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बीज उद्यान मार्गदर्शिका

इस पृष्ठ में बीज उद्यान मार्गदर्शिका की जानकारी दी गयी है I

प्रस्तावना

  1. आनुवंशिकीय रूप से श्रेष्ठ गुण श्रेणी के वृक्षों से बीज प्राप्त करने के स्रोतों में बीज उद्यान (सीड ऑर्चर्ड ) एक मुख्य स्रोत हैं। सामान्य तौर पर बीज उद्यान (सीड ऑर्चर्ड ) आनुवंशिकीय रूप से श्रेष्ठ वृक्षों का रोपण है जिसे बाहर के निम्न श्रेणी के वृक्षों से परागण से सुरक्षित किया गया हो तथा जिसका प्रबंध मुख्य रूप से पर्याप्त बीज उत्पादन के लिये किया जाता हैं। आनुवंशिक रूप से उत्तम गुण श्रेणी के बीज उत्पन्न करने के लिए बीज उद्यान का निर्माण प्रथम बार स्वीडेन में पाइन (Pine) प्रजाति के बीज प्राप्त करने के लिये 1949 में किया गया। इसके पश्चात यूरोप के दूसरे देशों तथा अन्य देशों में पाइन एवं दूसरी प्रजातियों के बीज उद्यान इस शताब्दी के सातवे तथा आठवे दशक में प्रायोगिक रूप में बनाये गये। परन्तु इन बीज उद्यानों का वानिकी क्षेत्र में हुए रोपणों से कोई समन्वय नहीं बन सका। जो बीज उद्यान लगाये गये वे बहुत कम क्षेत्रफल के थे और वानिकी क्षेत्र में हो रहे रोपणों की आवश्यकता बहुत बड़ी थी। अतः बीज उद्यान की स्थापना, प्रबंध, बीज उत्पादन तथा बीज उपयोग वन अनुसंधान संस्थानों तक ही सीमित रह गया।
  2. विश्व वानिकी योजना - विश्व वानिकी योजना के अन्तर्गत आनुवंशिक रूप से उत्तम गुण श्रेणी के पर्याप्त बीज उत्पन्न करना एवं विभागीय रोपणों और निजी क्षेत्र के वन एवं गैरवन क्षेत्र के रोपणों में इनका उपयोग सुनिश्चित करना एक प्रमुख कार्य के रूप में स्वीकार किया गया हैं। इसलिए इस योजना के अन्तर्गत निम्नलिखित प्रजातियों के बीज उद्यान बनाने का लक्ष्य रखा गया हैं –
  • सागौन
  • युकेलिप्टस
  • खमार
  • अन्य प्रजाति

बीज उद्यान प्रकार

बीज उद्यान मुख्य रूप से दो प्रकार से बनाये जाते हैं -

  • आनुवंशिक रूप से उत्तम गुण श्रेणी के वृक्ष से क्लोन अर्थात कटिंग, बडिंग अथवा ग्राफ्टिंग प्राप्त करके बीज उद्यान बनाने को क्लोनल बीज उद्यान (क्लोनल सीड ऑर्चर्ड ) कहते हैं
  • यदि आनुवंशिक रूप से उत्तम गुण श्रेणी के वृक्ष से बीज प्राप्त करके बीज उद्यान बनाये जायें तो उन्हें बीजाकुर बीज उद्यान (सीडलिंग  सीड ऑर्चर्ड ) कहते हैं।

बीज उद्यान (सीड ऑर्चर्ड)

  1. आनुसंशिक रूप से उत्तम गुण श्रेणी के वृक्ष के बीज से विकसित बीजांकुरों (सीडलिंग) से तैयार किये बीज उद्यान को बीजांकुर बीज उद्यान तथा क्लोन से तैयार किये गये उद्यान को क्लोनल बीज उद्यान कहते हैं।

बीज उद्यान के निर्माण में निम्नलिखित कार्य आवश्यक होंगे -

  1. प्लस वृक्षों का चयन
  2. प्लस वृक्षों में बीज या क्लोन एकत्र करना
  3. प्लस वृक्षों के बीज या क्लोन से नर्सरी में पौधे बनाना
  4. बीज उद्यान के लिये क्षेत्र का चयन और उसकी तैयारी
  5. बीज उद्यान का रोपण
  6. बीज उद्यान का प्रबंध

प्लस  वृक्षों का चयन

  1. योजना के अनुसार, सागौन, युकेलिप्टस, तथा खमार के बीज उद्यान बनाने का प्रस्ताव है। क्षेत्र की आवश्यकता के अनुसार इन प्रजातियों के अतिरिक्त दूसरी महत्वपूर्ण प्रजातियों के भी बीज उद्यान बनाये जा सकते हैं। सर्वप्रथम कार्य प्लस वृक्षों का चयन है।
  2. प्लस वृक्षों का चयन एक जटिल तथा परिश्रम युक्त कार्य हैं। इस कार्य में कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। प्लस वृक्ष वास्तव में आनुवंशिकीय रूप से श्रेष्ठ वृक्ष ही होना चाहिए। यह बहुत कुछ वृक्ष के बाह्य गुणों को देखकर निर्धारित किया जाता हैं। प्लस वृक्षों के चयन के लिये प्रजाति के प्राकृतिक वनों की छानबीन करना चाहिए। काष्ठ उत्पादन को दृष्टिगत रखते हुए वृक्ष के निम्नलिखित गुणों की ओर ध्यान देना चाहिए -
  • वृक्ष की आयु
  • वृक्ष की वृद्धि
  • वृक्ष का स्वास्थ
  • वृक्ष की ऊँचाई
  • तने के गुण
  • वृक्ष का छत्र तथा शाखाएँ
  • फल/बीज उत्पादन की क्षमता

  1. वृक्ष की आयु - सामान्यतया वृक्ष मध्य आयु (मिडिल एज्ड) के होना चाहिए। वृक्ष की आयु ऐसी हो कि ऊँचाई कीचित्र 1 वृद्धि लगभग समाप्त हो गयी है और तने की वृद्धि अच्छी हो रही हो। सागौन में यह आयु 30 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए। युकेलिप्टस में 10-15 वर्ष की आयु उचित रहेगी। खमार में 20-30 वर्ष की आयु के वृक्ष चयन करना उचित होगा।
  2. वृक्ष की वृद्धि - जिस वृक्ष को प्लस वृक्ष के रूप में चयन करना हो उसकी वृद्धि दर उसके आस-पास के दूसरे वृक्षों से अधिक होना आवश्यक हैं। ऊँचाई तथा व्यास दोनों की वृद्धि देखना आवश्यक हैं। व्यास की वृद्धि या आधार क्षेत्रफल से वृद्धि को देखा जा सकता हैं।
  3. वृक्ष को देखने से ऐसा प्रतीत होना चाहिए कि वृक्ष पूर्ण रूप से स्वस्थ है, और उसकी आकृति दूसरे वृक्षों की अपेक्षा अधिक अच्छी है। कुल मिलाकर वृक्ष के बाह्य गुण श्रेष्ठ होना चाहिए।
  4. चित्र- 2 - 4 वृक्ष की ऊँचाई -

क्षेत्र में जो वृक्षों की औसत ऊँचाई हो उस ऊँचाई से प्लस वृक्ष की ऊँचाई अधिक होनी चाहिए। जहां तक सम्भव हो ऐसे वृक्षों को ही प्लस चुनना चाहिए जिनकी ऊँचाई क्षेत्र में सबसे अधिक हो अथवा उसके निकट हो। स्थल और प्रजाति के अनुसार ऊँचाई का निर्धारण किया जा सकता हैं। सागौन में ऊँचाई 20 मीटर से कम नहीं होनी चाहिए। अच्छे गुण श्रेणी वाले वनों में वृक्ष की ऊँचाई 30 मीटर से भी अधिक होनी चाहिए।

तने का आकार -

काष्ठ उत्पादन की दृष्टि से तने का आकार बहुत महत्वपूर्ण हैं। तने के आकार (स्टेम फॉर्म ) से संबंधित निम्न गुण महत्वपूर्ण हैं-

तना सीधा होना चाहिए (चित्र 1)

तने की आकृति बेलनाकार होनी चाहिए (चित्र 2)।

तने की मोटाई में नीचे से ऊपर तक बहुत कम अन्तर होना चाहिए, अर्थात वृक्ष के तने में टेपर बहुत कम होना चाहिए (चित्र 3)।

तने के आधार पर बट्रेस या फ्लूटिंग नहीं होना चाहिए (चित्र 4)।चित्र 5-6

तने में गठानें (नोट्स ) नहीं होना चाहिए (चित्र 5)।
तने का साफ भाग अधिक से अधिक लम्बा (10 मीटर से कम तो नहीं होना)चाहिए (चित्र 6)।
तना नीचे से उच्च वितान तक एक सा होना चाहिए।
द्विशाखित तने वाले वृक्ष का चयन नहीं किया जाना चाहिए (चित्र 7)

वृक्ष का छत्र तथा शाखाएँ

प्लस वृक्ष चयन करते समय वृक्ष के छत्र पर भी ध्यान देना आवश्यक हैं। वृक्ष का छत्र अच्छा होना चाहिए, छत्र न तो बहुत बड़ा और न ही बहुत छोटा होना चाहिए। छत्र में बहुत शाखाएँ (ब्रांचेस) नहीं होनी चाहिए। शाखाओं में प्राकृतिक प्रूनिंग  होनी चाहिए।

वृक्ष में एपीकार्मिक शाखाएँ (ब्रांचेस) नहीं होना चाहिए। क्योंकि इस प्रकार की शाखाएँ वृक्ष के अच्छे स्वास्थ की द्योतक नहीं होती हैं।

वृक्ष की शाखाएँ बहुत मोटी नहीं होनी चाहिए। पतली-पतली शाखाएँ अच्छी होती हैं, इससे तना काष्ठ की मात्रा अधिक, और शाखा काष्ठ की मात्रा कम होती हैं।

वृक्ष में पुष्पन तथा फलन

वृक्ष की पुष्पन तथा फलन क्षमता अच्छी होनी चाहिए।

यदि वृक्ष की फूलने तथा फलने की प्रवृत्ति तथा क्षमता कम हो तो बीज एकत्रित करने में कठिनाई होगी और इस प्रकार का वृक्ष प्लस वृक्ष के रूप में नहीं चुना जाना चाहिए।

वृक्ष का स्वास्थ्य

वृक्ष का स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए। किसी प्रकार की बीमारी, कीड़े-मकोड़े का आक्रमण दिखाई नहीं देना चाहिए। सागौन में डिफोलियेटर तथा स्केलटनाइजर का आक्रमण हो तो, ऐसे वृक्ष को प्लस वृक्ष नहीं चुनना चाहिए।

इसी प्रकार खमार तथा युकेलिप्टस में भी यदि किसी कीड़े-मकोड़े अथवा बीमारी के आक्रमण के लक्षण दिखाई पड़ते हैं, तो उन्हें भी नहीं चुनना चाहिये।

विभिन्न कारकों का आंकलन

प्लस वृक्षों के चयन के लिये उपरोक्त बिन्दुओं में आवश्यकता दर्शायी गयी हैं परन्तु किस कारक को कितना महत्व दिया जाये और कैसे प्लस वृक्ष चयनित किये जायें इसके लिये विभिन्न कारकों को शामिल करने के गणित का सहारा लिया जा सकता हैं, और विभिन्न गुणों को अंक निर्धारित किया जाकर प्लस वृक्ष का चयन किया जा सकता हैं। यह प्रक्रिया नीचे दर्शायी गयी हैं I

किसी भी क्षेत्र में सम्भावित प्लस वृक्ष का प्राथमिक चयन करने के उपरान्त अन्तिम रूप से प्लस वृक्ष के चयन में विभिन्न गुणों को महत्व दिया जाकर उनके अंक निर्धारित किये जाते हैं प्राथमिक रूप से चयनित प्लस वृक्ष को उम्मीदवार प्लस वृक्ष कहा जाता हैं। विभिन्न गुणों की तुलना हेतु निम्नानुसार अंक निर्धारित किये जा सकते हैं -

क्रम.स.

 

वृक्ष के गुण

 

कुल निर्धारण अधिकतम अंक

 

विभिन्न गुणों में वितरण

1

वृक्ष की वृद्धि

30

आसपास के वृक्षों या फसल की औसत वृद्धि दर से 10 प्रतिशत अधिक वृद्धि दर होने पर 3 अंक दिए जाए,इस प्रकार 50 प्रतिशत अधिक वृद्धि होने पर 15 अंक और 100 प्रतिशत अधिक वृद्धि दर होने पर 30 अंक दिए जाए ।

2

वृक्ष की ऊंचाई

10

फसल की औसत ऊंचाई से प्रत्येक 10 प्रतिशत ऊंचाई होने पर एक अंक दिया जाए अधिकतम अंक निर्धारित हैं ।

3

तने का आकार

 

 

10

4

0

 

तने को निम्नलिखित श्रेणियों में विभक्त किया जाए –

  • सीधा
  • कुछ टेढ़ा
  • बहुत टेढ़ा

 

4

तने की गोलाई

 

 

10

4

0

तने को निम्न श्रेणियों में निम्नानुसार विभक्त किया जाए -

  • तना गोलाकार
  • तना कम गोलाकार
  • तना टेढ़ा-मेढ़ा
5

तने में टेपर

 

 

 

10

4

0

तने में टेपर साफ तने के भाग तक देखा जाए ,तने को निम्नलिखित श्रेणियों में विभक्त किया जाए -

  • तने में टेपर बहुत कम(10 प्रतिशत से कम)
  • तने में कुछ टेपर(10 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक)
  • तने टेपर बहुत अधिक(50 प्रतिशत से अधिक)
6

तने में अवगुण

 

 

10

4

0

तने में पाए जाने वाले अवगुणों को निम्नानुसार तीन श्रेणियों में बाँटा जाए -

  • तना अवगुणों से मुक्त
  • तने में कुछ अवगुण
  • तने में बहुत अवगुण
7

वृक्ष का छत्र

 

 

 

10

 

4

 

0

वृक्ष को छत्र की दृष्टि से निम्नलिखित तीन श्रेणियों में बाँटा जाए -

  • जीवित शाखाएं छत्र के ऊपरी एक तिहाई छत्र में स्थित
  • जीवित शाखाएं छत्र के ऊपरी 1/3 तथा मध्य भाग तक स्थित
  • जीवित शाखाएं नीचे के एक तिहाई भाग में भी स्थित ।
8

शाखाएं

 

 

10

 

7

 

3

 

10

 

0

वृक्ष की शाखाएं (जीवित या मृत )भी महत्वपूर्ण होती हैं, इस दृष्टिकोण से वृक्ष को निम्नलिखित चार श्रेणियों में विभक्त किया जाए –

  • कोई शाखा नहीं अथवा कुल ऊंचाई तक आधी ऊंचाई तक कोई शाखा नहीं
  • आधी ऊंचाई तक पतली शाखाएं तने के छाती ऊंचाई के व्यास (DBH) के 1/10 भाग के बराबर तक
  • आधी ऊंचाई तक मध्यम मोटाई की शाखाएं

 

  • वृक्ष की छाती ऊंचाई पर व्यास (DBH) के 1/4 भाग के बराबर तक
  • मोटी शाखाएं (वृक्ष के छाती ऊंचाई पर व्यास के 1/4 से अधिक मोटी )
9

कीड़े-कमोड़ों या बीमारी का आक्रामक

 

 

यदि वृक्ष में किसी कीड़े - मकोड़े या बीमारी का आक्रामक नहीं है तो उसे कोई अंक न दिए जाए,परन्तु यदि कुछ आक्रामक है तो -5 अंक, और यदि आक्रामक अधिक है तो -10 अंक दिए जाए ।

  1. उपरोक्तानुसार उम्मीदवार प्लस वृक्षों (कैंडीडेट प्लस ट्रीज ) का परीक्षण किया जाए, और किसी क्षेत्र में सबसेचित्र 8-9अधिक अंक अर्जित करने वाले वृक्ष को प्लस वृक्ष (प्लस ट्रीज ) माना जाए। बीज उद्यान बनाने के लिये प्रत्येक सेन्टर में प्रत्येक प्रजाति के कम से कम 35 से 50 प्लस वृक्षों का चयन आवश्यक होगा।
  2. उम्मीदवार प्लस वृक्ष (कैंडीडेट प्लस ट्रीज ) की पहचान के लिये, छाती ऊँचाई पर 2" का एक पीला पट्टा बना दिया जाता है और उसको एक नम्बर दिया जाता है (चित्र8)। उम्मीदवार प्लस वृक्षों से अंतिम रूप से जब प्लस वृक्ष का चयन पूर्ण कर लिया जाता है तो छाती ऊँचाई पर 2" के दो पीले पट्टे लगा दिये जाते हैं चित्र-9)।

प्लस वृक्षों का अंतिम चयन हो जाने के पश्चात उनका विवरण, दिये गये प्रपत्र में दर्ज किया जाना चाहिए (प्रपत्र-1)। प्लस वृक्ष की स्थिति की सही जानकारी देने के लिए सम्बन्धित वन खण्ड के 4" = 1 मील के मानचित्र पर, प्लस वृक्ष की स्थिति अंकित की जायेगी। प्लस वृक्ष के आसपास के वृक्ष, उसकी प्रजाति, गोलाई आदि तथा उसकी दूरी तथा दिशा का उल्लेख होना चाहिए। यदि निकट में कोई प्राकृतिक वस्तु हो तो, उसका भी उल्लेख किया जाना चाहिए। अभिलेख तथा मानचित्र के साथ ही प्लस वृक्ष की फोटो भी रखना चाहिए एवं जानकारी प्रपत्र के अनुसार भरी जाना चाहिए।

प्लस वृक्षों से बीज एवं क्लोन एकत्रित करना

  1. जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया जा चुका है कि प्रत्येक प्रजाति के लगभग 35-50 प्लस वृक्ष चयन किये जाना हैं। इन चयन किये हुए वृक्षों की सहायता से बीज उद्यान बनाने का कार्य प्रारंभ किया जाना हैं। बीजांकुर बीज उद्यान (सीडलिंग सीड ऑर्चर्ड ) बनाने के लिए चयन किये गये प्लस वृक्षों से बीज एकत्रित किये जाने का कार्य करना होगा। बीज एकत्रित करने के लिये प्रजाति के फूलने-फलनेके समय की जानकारी भलीभांति होना चाहिए। प्रत्येक वृक्ष से पर्याप्त मात्रा में बीज एकत्रित किया जाना है, यह मुख्य रूप से बीज उद्यान बनाये जाने के क्षेत्रफल एवं बीज के आकार पर निर्भर करेगा। सागौन का बीज उद्यान बनाने के लिए यह आवश्यक होगा कि, प्रत्येक प्लस वृक्ष से कम से कम एक किलोग्राम बीज एकत्रित किया जाए ।
  2. प्रत्येक प्लस वृक्ष के बीज एकत्रित करने के पश्चात उसकी साफ-सफाई करके अलग थैली में रखना चाहिए, और इस थैली में प्लस वृक्ष से संबंधित जानकारी के साथ लेबल लगाकर बीज की जानकारी रखना चाहिए। प्रत्येक प्लस वृक्ष से एकत्रित किये हुए बीजों का उपचार एवं भण्डारण भी अलग-अलग से किया जाना चाहिए।
  3. खमार और युकेलिप्टस के भी प्लस वृक्ष का चयन करके पर्याप्त बीज एकत्र किया जाना चाहिए। युकेलिप्टस का बीज जनवरी से अप्रैल के बीच में प्राप्त होता है इसीलिये स्थल के अनुसार यह ध्यान रखना होगा कि आपने जो प्लस वृक्ष चयन किया उसमें फल कब आ रहा है और उससे बीज कब एकत्र किया जाना है? युकेलिप्टस प्रजाति के बीज वृक्ष बहुत छोटे होते हैं, और एक किलो में 3 से 5 लाख बीज आते हैं, इसलिए युकेलिप्टस प्रजाति के प्रत्येक प्लस वृक्ष सेकेवल 100 ग्राम बीज ही पर्याप्त होगा। खमार का बीज मई जून में प्राप्त होता है। अत: प्लस वृक्षों का चयन करके अप्रैल-जून में बीज एकत्र करने की कार्यवाही करना चाहिए। एक किलो में खमार के 2000-3000 बीज आते हैं इसलिए प्रत्येक प्लस वृक्ष से लगभग एक किलो बीज एकत्र कर लेना ठीक होगा।
  4. आपको यदि 10 हेक्टर क्षेत्र में सागौन का बीज उद्यान बनाना है और रोपण में 4 मी. X 4 मी. का अन्तराल रखना है तो इसके लिये आपको 6250 पौधों की आवश्यकता होगी। यदि आपने सागौन के 40 प्लस वृक्ष चयन किए हैं तो सम्भव है कि आपको सभी वृक्षों में बीज न मिले। यदि 30 प्लस वृक्षों से अलग-अलग एक-एक किलों बीज एकत्र किया गया है और नर्सरी में उनसे पौधे तैयार किये गये हैं तो आसानी से प्रत्येक प्लस वृक्ष से बीज से एक हजार पौधे अर्थात कुल मिलाकर लगभग 30,000 पौधे उपलब्ध होंगे। प्रत्येक प्लस वृक्ष से तैयार 1000 पौधों में श्रेष्ठतम लगभग 200 पौधे बीज उद्यान में लगाने के लिए चुने जायें। इस प्रकार कुल मिलाकर 10 हेक्टेयर के लिये आवश्यक पौधे उपलब्ध हो सकेगे।

नर्सरी में पौधे तैयार करना

बीज एकत्रित हो जाने के पश्चात विधिवत उपचार के पश्चात उनकी नर्सरी में बोआई की जानी चाहिए। बीज उद्यान बनाने के लिए जितनी मात्रा में पौधों की आवश्यकता हो उससे कम से कम चार-पाँच गुना अधिक पौधे तैयार किया जाना चाहिए, और उसके अनुसार ही बीज बोवाई पौधशाला में की जानी चाहिए। सागौन केबीज फरवरी-मार्च में मिल जाते हैं इसलिए सागौन के बीज फरवरी-मार्च में एकत्रित करके नर्सरी में मार्चअप्रैल के महीने में बो देना उचित होगा। इसके पहले बीज के लिए जो भी उपचार आवश्यक हो वह पूरा कर लेना चाहिए। इसी प्रकार दूसरी प्रजातियां जैसे खमार, युकेलिप्टस एवं अन्य प्रजातियां के बीज भी प्लस वृक्षों के चयन के पश्चात बीज एकत्रित करके अलग-अलग प्लस वृक्षों के अनुसार संग्रहित करना चाहिए, और उनको नर्सरी में भी अलग-अलग ही बोना चाहिए। नर्सरी में प्लस वृक्ष के अनुसार पौधों की अलग पहचान बनाने के लिए साइन बोर्ड लगा देना चाहिए, ताकि पौधों को पहचानने में आसानी हो। जब पौधे कम से कम 6 महीने के हो जाये तभी उन पौधों से बीज उद्यान निर्माण करने के लिए क्षेत्र में लगाने की कार्यवाही की जानी चाहिए। फील्ड में अलग-अलग प्लस वृक्षों के बीजों से जितने पौधे तैयार किये गये हैं उनमें से श्रेष्ठतम पौधों का ही रोपण हेतु चयन करना चाहिए।

प्लस वृक्षों से क्लोन एकत्र करना

  1. बीजांकुर बीज-उद्यान द्वारा पूर्ण रूप से आनुवंशिक लाभ मिलने की सम्भावना नहीं रहती है क्योंकि प्लस वृक्ष से जो बीज एकत्र किये गये हैं वे यदि निम्न गुण श्रेणी के वृक्ष से परागण होने पर प्राप्त हुये हैं तो बीज अच्छा प्राप्त नहीं होगा और बीज उद्यान का आनुवंशिक लाभ नहीं मिल पायेगा। पर-परागण सेउत्पन्न होने वाले अनुवंशिकीय प्रभाव को देखते हुये, यह आवश्यक है कि प्लस वृक्षों से क्लोन प्राप्त किये जायें।
  2. सागौन में, प्लस वृक्ष से कली प्राप्त करके उसका प्रत्यारोपण नर्सरी में उगाये गये पौधे पर कलीरोपण द्वारा किया जा सकता है। राज्य वन अनुसंधान संस्थान ने इस प्रकार कलीरोपण (बडिंग) द्वारा बीज उद्यान बनाने में अनुभव प्राप्त कर लिया है। सागौन में ग्राफ्टिंग (ग्राफ्टिंग ) भी सफल रही है। अत: सागौन में प्लस वृक्ष से कली प्राप्त करके नर्सरी में उगाये गये साधारण सागौन के पौधों पर कली रोपण किया जा सकता है। चित्र में ग्राफ्टिंग तथा बडिंग की कुछ विधियाँ दिखाई गई है।
  1. युकेलिप्टस प्रजाति में ब्रांच कटिंग की रूटिंग मिस्ट चैम्बर में प्राप्त की जा सकती है। अतः युकेलिप्टस प्रजातिग्राफ्टिंगमें ब्रांच कटिंग से मिस्ट चैम्बर में रूटिंग (रूटिंग) प्राप्त करके बीज उद्यान बनाया जा सकता है। चूंकि ब्रांच कटिंग की रूटिंग युकेलिप्टस में हो जाती है इसलिए इस प्रजाति में ग्राफ्टिंग तथा बडिंग (ग्राफ्टिंग  & बडिंग) के सफल होने की सम्भावना अधिक है। ग्राफ्टिंग तथा बडिंग (ग्राफ्टिंग  & बडिंग) कार्य में प्रशिक्षित अनेक कर्मचारी उद्यानिकी विभाग में होंगे, उनकी सहायता से अपने कर्मचारियों को भी इस विधि में प्रशिक्षित किया जा सकता है।
  2. खमार प्रजाति में भी ग्राफ्टिंग या बडिंग करके क्लोन प्राप्त करना होगा। यदि 10 हेक्टर क्षेत्र में बीज उद्यान बनाया जाना है और रोपण 6 से 8 मीटर के अन्तराल में करना है तो 2000 पौधों की आवश्यकता होगी। इसलिए 10 हेक्टर में क्लोनल बीज उद्यान बनाने के लिए प्रत्येक 30 प्लस वृक्ष से लगभग 70 रूटेड कटिंग, ग्राफ्टिंग या बडिंग करके प्राप्त करने होंगे। 70 पौधे की आवश्यकता की पूर्ति के लिये प्रत्येक प्लस वृक्ष से कम से कम 150-200 क्लोन लेने पड़ेंगे। क्योंकि अनेक बार ग्राफ्टिंग तथा बडिंग में शायन (Scion) पौधे मर जाते हैं, प्रत्येक प्लस वृक्ष से प्राप्त क्लोन को अलग-अलग रखा जाना चाहिए। और नर्सरी में पर्याप्त समय उगाने के पश्चात बीज उद्यान रोपण क्षेत्र में ले जाना चाहिए।

बीज उद्यान के लिये क्षेत्र का चयन

  1. बीज उद्यान के लिये क्षेत्र का चयन सावधानी पूर्वक करना चाहिए। क्षेत्र अच्छी उत्पादकता वाला होना चाहिए। अपक्षरित या कटा-फटा, पथरीला आदि नहीं होना चाहिए। भूमि की गहराई भी पर्याप्त होनी चाहिये, ताकि वृक्षों का विकास भलीभाँति हो सके। क्षेत्र में जल-निकास की व्यवस्था होनी चाहिये। जलावरूद्ध स्थिति में पौधों का विकास ठीक से नहीं होता है, और पौधे मर जाते हैं। क्षेत्र में पानी की व्यवस्था भी होनी चाहिए। यदि गर्मी में पौधों को पानी दिया जाना हो तो पानी की व्यवस्था होने से पौधों की सिंचाई करना आसान हो जाएगा।
  2. जहां तक संभव हो क्षेत्र सड़क के पास होना चाहिए, ताकि उसका निरीक्षण किया जाना सरल हो। इसके साथ ही अच्छी फेंसिंग होना चाहिए, जिससे पौधे आदि के लाने में भी सुविधा होगी। इसके साथ ही बीज उद्यान निर्मित हो जाने के बाद, बीज एकीकरण, उपचार, परिवहन आदि के कार्यों में भी आसानी होगी।

बीज उद्यान क्षेत्र की तैयारी

  1. बीज उद्यान क्षेत्र, जैविक दबाव से पूर्ण रूप से सुरक्षित होना चाहिए। इसमें पशुओं एवं वन्य पशुओं का प्रवेश नहीं होना चाहिए। बाहर के लोग भी बिना अनुमति के अन्दर नहीं जायें ऐसी व्यवस्था होना चाहिए। इसके लिये आवश्यक है कि कटीले तार की फेंसिंग की जाए। चार-पांच स्टैंड कंटीले तार की फेंसिंग उपयुक्त होगी। वन मण्डलाधिकारी को चाहिए कि फेंसिंग की लागत (कास्ट) को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट रिपोर्ट में फेंसिंग के स्पेशिफिकेशन के बारे में प्रस्ताव करें।
  2. फेंसिंग हो जाने के पश्चात, भूमि की तैयार का कार्य किया जायेगा। भूमि की तैयारी के पूर्व क्षेत्र में खड़ी हुई वनस्पति की सफाई कना चाहिए। यदि क्षेत्र में लेण्टाना जैसी प्रजातियां हो तो उन्हें उखाड़ कर नष्ट किया जाना चाहिए। यदि वृक्ष या झाडिया खड़ा हो तो उनको भी काटना अनिवार्य होगा। केवल कुछ फलदार वृक्ष रोके जा सकते हैं। जिस प्रजाति का बीज उद्यान बनाया जा रहा है उस प्रजाति के सभी वृक्षों को काट देना चाहिए। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना होगा कि उनसे कापिस न निर्मित हो। बीज उद्यान के लिये ऐसे क्षेत्र का चयन करें जो प्रजाति के प्राकृतिक क्षेत्र में तो हो, परन्तु स्थल पर उस प्रजाति के वृक्ष न हो।
  3. स्थल की सफाई के पश्चात् भूमि की तैयार का कार्य कराया जाना होगा। भूमि की तैयारी के लिये रोपण का अन्तराल निर्धारित करना आवश्यक है। सामान्यतया बीज उद्यान में अन्तराल अधिक रखा जाता है ताकि वृक्षों के छत्र का विकास ठीक से हो तथा फल एवं बीज का उत्पादन भी अधिकाधिक हो सके। बीजांकुर बीज उद्यान में सागौन, खमार युकेलिप्टस प्रजातियों के लिये अन्तराल 4 मी. या 4 मी. रखना ठीक होगा। परन्तु क्लोनल आर्चड में रोपण का अन्तराल 6 से 8 मी. रखना श्रेयस्कर होगा।
  4. स्टेकिंग करने के बाद गड्ढे खोदने का काम हाथ में लेना चाहिए। गड्ढे का आकार कम से कम 0.5x0.5x0.5 मीटर होना चाहिए। प्रत्येक गड्ढे में 3 से 5 किलोग्राम की गोबर की खाद डालना चाहिए। यदि भूमि उपजाऊ हो तो गोबर की खाद की मात्रा कम की जा सकती है। दीमक द्वारा सम्भावित हानि से बचने के लिए बी.एच.सी. पाउडर की थोड़ी मात्रा गड्ढे में डाल देनी चाहिए।

बीज उद्यान में रोपण

बीज उद्यान में रोपण, सभी क्लोनों का रंडामाइज्ड ब्लाक डिजाइन के आधार पर किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिये यदि 10 हेक्टयर का क्षेत्र है तो उसे 4 ब्लाक में बॉटा जा सकता है। एक ब्लाक का

क्षेत्रफल 2.5 हेक्टर होगा। इस 2.5 हेक्टर क्षेत्र को 30 भागों में विभक्त किया जाना चाहिए और एक भाग में एक क्लोन के पौधे का रोपण करना चाहिए।

प्रत्येक क्लोन के लिये लगभग 0.08 हेक्टर क्षेत्र आयेगा। 4 मीटर x 4 मीटर के अन्तराल में रोपण करने पर लगभग 50 पौधे एक क्लोन के आवश्यक होंगे। 30 क्लोनों का रोपण रेण्डम विधि से किया जा सकता है। चारों ब्लाकों में उक्तानुसर रोपण पूरा किया जा सकता है। अन्तराल कम या अधिक करने पर आवश्यक पौधों की संख्या में अन्तर आयेगा।

रोपण के बाद बीज उद्यान की देखभाल

रोपण के पश्चात पौधों की देखभाल बहुत आवश्यक है। प्रथम दो वर्ष तक निदाई तथा गुड़ाई (Hoeing) की जाना चाहिए। गर्मी के दिनों में 3-4 बार पानी भी दिया जाना आवश्यक होगा। पानी की मात्रा तथा विधि पानी की उपलब्धता तथा उसके स्रोत पर निर्भर करेगी। दो वर्ष के बाद निंदाई आवश्यक नहीं होनी चाहिए। लेकिन यदि झाडियाँ इत्यादि आ जाती है तो उनको निकाला जाना आवश्यक होगा। यदि भूमि अच्छी नहीं है तो खाद और उर्वरक भी दिया जाना उचित होगा। उर्वरक देने का समय और मात्रा स्थानीय परिस्थिति जैसे सिंचाई की उपलब्धता, भूमि की स्थिति आदि पर निर्भर होगा।

प्रपत्र – 1 प्लस वृक्ष का चयन

चयनित वृक्ष की स्थिति –

(अ)    वनमण्डल का नाम

(ब) ब्लाक

(स) परिक्षेत्र

(द) कक्ष क्र.

(थ) कक्ष में स्थिति

(न) बॅच चिन्हों से दूरी..................

उत्तर..................

दक्षिण................

पश्चिम..............

पूर्व .................

  1. मानचित्र संलग्न...................

वृक्ष का वर्णन

(अ)    प्रजाति

(ब) आयु

(स) छाती ऊँचाई पर गोलाई

(द) वृक्ष की ऊँचाई

स्रोत: मध्यप्रदेश सरकार का आधिकारिक वेबसाइट

2.95454545455

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