सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

होम (घर) / कृषि / पशुपालन / पशु सेहतमंद तो कमाई भी अच्छी
शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

पशु सेहतमंद तो कमाई भी अच्छी

हर दौर में पशु पालन एक अच्छा व्यवसाय साबित हुआ है| किसान तो आमतौर पर पशु पालन करते हैं, पर आम नौकरीपेशा या निठल्ला व्यक्ति भी इसे अपना सकता है| पशु पालन कर के अच्छी खासी कमाई की जा सकती है|

परिचय

हमारे देश के ज्यादातर किसान खेती करने के साथ साथ गायभैंस भी पालते हैं| जिस से उन्हें अलग सेMilking अच्छी खासी कमाई होती है | गायभैंसों से ज्यादा दूध लेना जी हर किसान का मकसद होता है, लेकिन कुछ जी किसान अपनी गाय भैंसों से उन की कूवत के मुताबिक दूधलेने से नाकाम रहते हैं और उन की गाय भैंसें भी सेहत मंद नहीं रहती हैं|

ज्यादातर गाय भैंसें अक्टूबर नवंबर महीनों में ब्याती हैं| आमतौर पर गाय भैंसें ब्याने में इस से ज्यादा समय लें, तो फौरन पशु चिकित्साक को बुला कर दिखाएँ| अगर गाय या भैंस का नवजात बच्चा (बछिया, बछड़ा या कटिया, कटरा) पैदा होने के 30 सेकेंड बाद साँस लेना शुरू नहीं करता है, तो उसे कृत्रिम साँस (आर्टिफिशियल साँस दिलाने के लिए नवजात बच्चे की छाती को धीरे-धीरे दबाएँ और पिछले हिस्से को उठा लें| ऐसा करने से बच्चा साँस लेना शुरू कर देगा|

गाय / भैंस का ब्याना

नवजात बच्चा पैदा होने के 2-3 घंटे बाद पहला गोबर करता है| अगर नवजात बच्चा पैदा होने के 2-3 घंटे बाद गोबर नहीं करता है, तो उसे 30 मिलीलीटर अरंडी का तेल पीला दे|

नवजात बच्चे के जिस्म पर (ब्याने के फौरन बाद) लगा लसलसा पदार्थ आमतौर पर माँ (चाट कर)साफBirth giving कर देती है| अगर लसलसा पदार्थ नवजात बच्चे की माँ चाट कर ठीक सेसफ नहीं करती है, तो ऐसी हालत में उसे साफ, सूखे कपड़े से पोंछ दें|

आमतौर पर गाय भैंसें ब्याने के 2-4 घंटे बाद जेर देती हैं, लेकिन कभी-कभी वे 8-12 घंटे तक का समय जेर गिराने में लेती हैं| अगर गाय भैंस ब्याने के 8-12 घंटे बाद भी जेर नहीं डालती हैं, तो इस का मतलब जेर रूक गई है| ऐसी हालत में फौरन पशुओं के डॉक्टर या किसी माहिर से बच्चेदानी में फ्यूरिया जैसी दवा डलवाएं| अगर गाय भैंसें ब्याने के 30 घंटे बाद भी जेर नहीं गिरती हैं, तो पशुओं के डॉक्टर से उसे निकलवाएँ|

ब्याई गाय या भैंस को पहले 5 दिनों तक 100 मिलीलीटर बच्चेदानी की सफाई वाली दवा दिन में 2 बार पिलाएं|

बच्चे (बछिया, बछड़ा या कटिया, कटरा) के पैदा होते ही उस की टूंडी (नाभि) पर एंटी सेप्टिक यानी टिंचर आयोडीन, डेटोल या हल्दी पाउडर लगाएँ|

पैदा हुए बच्चे को खीस (पेवसी/ पहला दूध) जल्द ही पीला दें| खीस की खुराक बच्चे के जिस्म के 1/10 हिस्से के बराबर रखें यानी 10 किलो के बच्चे को 1 लीटर खीस पीने को दें और 30 किलो के बाचे को 3 लीटर खीस पिलाएं| बच्चे को बीमारियाँ से बचाती है| यह बच्चे में बीमारी से लड़ने की कूवत पैदा करती है| खीस पिलाने से बच्चा बचपन से ही तंदुरूस्त रहता है|

अक्टूबर नवंबर में सर्दी पड़ना शुरू हो जाती है, ऐसे में बच्चे और उस की माँ को सर्दी से बचाएं| बच्चे को सेहतमंद रखने के लिए और अब्ज से बचाने के ली समय-समय पर 30 – 40 मिलीलीटर अरंडी का तले पिलाते रहें|

जब बच्चे की उम्र 3 महीने हो जाए, तो उसे खुरपका मुंहपका बीमारी से बच्व का टिका लगवाएं| मई जून में 6 महीने से ज्यादा उम्र वाले पशुओं को खुरपका मुंहपका, गलघोंटू और लंगरिया बीमारियों को रोकने वाला टिका लगवाएं|

गाय और भैंस को हर 3 व ढाई लीटर दूध के हिसाब से 1 किलोग्राम राशन दें| जो गाय भैंस दूध नहीं दे रही हैं, उन्हें हर दिन 1 किलोग्राम राशन देना चाहिए| गाय भैंसों को 70 फीसदी हर चारा देना चाहिए| 100 किलोग्राम वजन वाली गाय को 2.5 किलोग्राम और भैंस को 3 किलोग्राम सूखी खुराक की जरूरत होती है| इस में दोतिहाई चारा और एक तिहाई दाना देना चाहिए|

हरे चारे में कम से कम 11-12 फीसदी प्रोटीन होना चाहिए और डेन में 18- 20 फीसदी प्रोटीन जरूरी  हैं| सभी पशुओं को संतुलित मात्रा में प्रोटीन देना जरूरी होता है| पशुओं को संतुलित मात्रा में चारादाना दिन में 2 बार 8 - 10 घंटे के अंतर घंटे के अंतर पर दें| इस के अलावा 2 बार 8-10 घंटे के अंतर पर दें इस के अलावा 2 बार साफ ताजा पानी पीने को दें| 6 महीने की गाभिन भैंस को डेढ़ किलोग्राम राशन (दाना) अलग से दें| दुधारू पशुओं को रोजाना कम से कम 5 किलोग्राम हरा चारा जरूर दें| सर्दी के मौसम में बरसीम सब से अच्छा हरा चारा होता है|

पशु के राशन में 2 फीसदी मिनरल मिक्सचर जरूर मिलाएँ| पशुओं से ज्यादा दूध लेने और उन को लम्बे समय तक सेहतमंद बनाए रखने के लिए उन्हें संतुलित मात्रा में चारादाना (राशन) देना जरूरी होता है| संतुलित राशन में खनिज लवण के साथ पोषक तत्त्व, प्रोटीन, विटामिन वैगरह तय मात्रा में रखें जाते हैं| संतुलित आहार (राशन) बनाने का फार्मूला न्यूट्रीशन एक्सपर्ट से संपर्क कर के हासिल करें| संतुलित राशन घर में भी बना सकतें हैं| राशन बनाने में उम्दा क्वालिटी का अनाज (जेई, जौ, गेहूं, ज्वार वैगरह), तेल, खली (सरसों, मूंगफली वैगरह की खली), ग्वारमल, शीरा, नमक, मिनरल मिक्सचर व विटामिनों का संतुलित मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है|

एडवांस डरो फार्म पर पूरक आहार (सप्लीमेंट राशन) दिया जाता है| पूरक आहार खिलाने से पशु के जिस्म में आई कमियां दूर हो जाती हैं और वह लम्बे समय तक सेहतमंद व दुधारू बना रहता है| पूरक आहार में मिनरल मिक्सचर, फीड एडिटिव, बाइपास प्रोटीन, बी कंप्लेक्स वैगरह को शामिल किया जाता है बहुत सी प्राइवेट कंपनियां पूरक आहार बाजार से बेचती हैं, तो उन की पूरी जानकारी हासिल कर के अपने पशु को पूरक आहार खिलाएं|

छोटे या जवान पशुओं को बाहरी और अंदरूनी कीड़े ( इन्टरनल और एक्सटर्नल पैरासाईट) काफी नुकसान पहुंचाते हैं| अंदरूनी कीड़े जैसे फीता कृमि, गोलकृमि, परंकृमि वैगरह पशु के पेट में रह कर उस का आहार व खून पीते हैं| बाहरी कीड़े, जैसे जूं, किल्ली, पिस्सू, माइट वैगरह पशु के बाहरी जिस्म पर रहते हैं और उस का खून चूसते हैं|

बाहरी और अंदरूनी दोनों ही कीड़े पशु को कमजोर बना देते हैं, जिस के चलते पशु की दूध देने की कूवत कम होती जाती है और पशु समय से पहले कमजोर व बीमार हो कर मर सकते हैं पशु के अंदरूनी कीड़ों को मारने के लिए कीड़े मार दवा जैसे फेंटास, एल्बोमार, पैनाखूर वैगरह की सही मात्रा पशु चिकित्सक से पूछ कर दें| बाहरी कीड़ों को मारने के लिए ब्यूटाक्स दवा की 2 मिलीलीटर मात्रा 1 लीटर पानी में घोल कर पशु के शरीर पर अच्छी तरह से पोंछा लगाएं, पर दवा लगाने से पहले पशु के मुंह पर मुचका जरूर बांध दें, ताकि पशु दवा को चाट न सके|

पशुओं  के गोबर का इस्तेमाल उपले यानी इंधन बनाने में कतई न करें| गड्ढा खोद कर उस में गोबर डालें और गोबर की खाद तैयार करें, जिन पशु पलकों के पास खेती की जमीन नहीं, वे गोबर की खाद गड्ढे में तैयार कर के उसे अच्छे दामों पर बेच सकते हैं| जैविक खेती में गोबर की सड़ी खाद की काफी  मांग रहती है|

दूध उत्पादन के लिए हेमशा दुधारू नस्ल के पशु ही पालें| गाय में साहिवाल, हरियाणा, करनस्विस, करन फ्रिज वैगरह और भैंस में मुर्रा, मेहसाना वैगरह और भैंस में मुर्रा, मेहसाना वैगरह नस्लें माली नजरिए से फायदेमंद साबित होती हैं| दुधारू पशु (गाय भैंस) खरीदने से पहले उस की नस्ल, दूध देने की कूवत वैगरह की जाँच जरूर करनी चाहिए| पशु का वंशावली का रिकार्ड भी जरूर देखना चाहिए, यानी उस की माँ, नानी, परनानी वैगरह कितना दोध देती थी| इस के अलावा अपने इलाके और सुविधाओं के आधार पर ही पशु का चुनाव करें|

पशुशाला हमेशा ऐसी जगह बनाएं, जहाँ बारिश का पानी नहीं भरता हो| जगह हवादार व साफ सुथरी होनी चाहिए| पशुशाला का फर्श पक्का खुरदरा रखें| गोबर को पशुशाला से उठा कर दूर खाद के गड्ढे में डालें| पशुशाला से पानी की निकासी का भी सही बंदोबस्त रखें| पशुशाला के आसपास गन्दा पानी जमा न होने दें|

पशुशाला में मक्खी मच्छर से बचाव का भी इंतजाम करें| पशुओं को सर्दीगर्मी व बरसात से बचाने के लिए पशुशाला में बचाव का इंतजाम करें| ध्यान रखें कि पशुओं को किसी भी तरह की परेशानी न हो| सर्दी के मौसम में पशुशाला में बिछावन के लिए भूसा, लकड़ी का बुरादा, पेड़ों की सूखी पत्तियों या गन्ने के सूखी पत्तियाँ इस्तेमाल करें| बिछावन गीला होने के बाद उसे गोबर के साथ उठा कर खाद के गड्ढे में डाल दें| हर रोज सुखा बिछावन ही इस्तेमाल में लाएं|

इन बातों का ख्याल रखें

  • पशुओं को अफारा बीमारी से बचाने के लिए 1 लीटर मीठे तेल में 200 ग्राम कला नमक, 100 ग्राम मीठा खाने वाला सोडा, 30 ग्राम अजवाइन व 20 ग्राम हिंग मिला कर दें, अफारा से बचाव के लिए जरूरत से ज्यादा बरसीम, खड़ा गेहूं व ज्यादा राशन न खिलाएं|
  • पशुओं को थनैला बीमारी से बचाने के लिए पशुशाला को हमेशा साफसुथरी व हवादार रखें| समय समय पर थनैला के लिए दूध की जाँच कराते रहें| थनैला जाँच के लिए 1 कप पानी में 1 चम्मच सर्फ घोलें व 5 चम्मच दूध में 1 चम्मच यह घोल मिला दें| आगरा दूध जेल बन जाए तो समझ लें कि पशु को थनैला हो गया है| थनैला होने पर फौरन पशुओं के डॉक्टर से पशु का इलाज कराएं|
  • थनैला से बचाव के लिए पशु का दूध निकालने से पहले व बाद में थानों को साफ पानी से धोएं और साफ सूखे कपड़े से पोंछ दें| दूध दूहने वाले हाथ के नाखून हमेशा कटे होने चाहिए| पशुशाला आरामदायक होनी चाहिए|
  • हमेशा उन्नत नस्ल की गाय भैसें ही पाले, मादा को गाभिन कराने के लिए उच्च कोटि के सैंड के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान कराएँ|
  • कटिया बछिया को संक्रमण गर्भपात से बचाने वाला टिका लगवाएं| पशु को पेट के कीड़े मारने के लिए हर 6 महीने में 1 बार कीड़े मारने वाली दवा दें|
  • जब कटिया बछिया का वजन 250 किलोग्राम हो जाए, तो उन को समय पर गाभिन होने के लिए 50 ग्राम खनिज मिश्रण, 1 चम्मच कोलायडल आयोडीन और 125 ग्राम अंकुरित अनाज 2 महीने तक दें| कटियाबछिया की सफाई का पूरा ध्यान रखें|

दुधारु पशुओं में तत्वों की कमी से होने वाली समस्याएँ व रोकथाम


दुधारु पशुओं में तत्वों की कमी से होने वाली समस्याएँ व रोकथाम| देखिये यह विडियो

स्रोत: फार्म एन फ़ूड/ जेवियर समाज संस्थान, राँची

2.92647058824

राज कुमार धनगर Sep 03, 2017 08:33 PM

मेरी भैस ने पाडे को जन्म दिये 2-3 दिन हो गया है पर भैस कुछ खा नहीं रही है। 1-2 दिन हो गया है। तो सर जल्दी से जल्दी कुछ उपाय बताओ।

रवि Aug 30, 2017 08:35 AM

कैसे पता चलता है कि अब गाय बयान वाली है

vaibhav pawar Aug 20, 2017 10:25 AM

janvaro me calsium a b c d aise ghatak kam PAYE hate hai unake lite konsa khurak me yeah matra jyada hai yesi konsi ghans hai air koi chiss isaka vistar se bataye taki had pashupalak isaka bharpur fayada utha sake doodh kaise badana hai new technical ideas bataye

Hemant Aug 02, 2017 04:17 PM

कैल्शियम किस किस चीजों से मिलता hai

Jagat singh Aug 02, 2017 09:44 AM

भैंस की जाड़ (दाँत) बढ़ गयी बहुत कमजोर हो गई हैं

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
Back to top