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कम वर्षा या मानसून में देरी होने पर पशुपालक क्या करे?

इस पृष्ठ में कम वर्षा या मानसून में देरी होने पर पशुपालक क्या करे के बारे में जानकारी दी गई है।

परिचय

कम वर्षा या मानसून में देरी होने पर पशुपालकों को प्रयास करना चाहिए कि पशुओं को पर्याप्त मात्रा में चारा-दाना, पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करें। चारा फसल उगाने के लिए उन किस्मों का चुनाव करे जो कि सुखा रोधी हो व कम समय  में चारा उपलब्ध करा सके। जैसा कि आप जानते हैं कि संकर नस्ल की गाएँ अधिक ताप नहीं सह सकती है इसलिए जरुरी है कि संकर नस्ल की गायें को अधिक तापमान होने पर सुरक्षा प्रदान करें।

कम वर्षा व शुष्क जलवायु में पशुओं की देखभाल कैसे करें?

कम वर्षा व् शुष्क जलवायु में क्षेत्र में निम्नलिखित सुझाव को ध्यान में रख कर व्यवहारिक तौर पर लागू करने से किसान भाई अपने कीमती पशुओं को सही प्रकार से देखभाल कर सकते हैं।

  • पशुओं को चौबीसों घंटे साफ व पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराना चाहिए और पानी का टब/प्याऊ/नाद आदि को समय अंतराल पर ठीक से साफ करना चाहिए। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी हैं वहाँ पर किसान भाई पशुओं को एक दिन (24 घंटों ) में कम से कम तीन बार पानी उपलब्ध करा सकते हैं।
  • जहाँ तक संभव हो पशुओं को चारागाओं में चरने/चुगने के लिए जल्दी सुबह व देर शाम के समय ही जाने दे तब मौसम ठंडा रहता है जिससे पशुओं को ताप के दबाव से बचाया जा सकता है।
  • छोटे व नवजात पशुओं (पशुओं के बछड़ों बछड़ियाँ) को घर के अन्दर रखे या जहाँ पर पर्याप्त मात्रा में छाँव वाले स्थान पर रखे ताकि उन्हें अधिक गर्मी से बचाया जा सके।
  • यदि संभव हो तो भैंस को गाँव के तालाब व नहर आदि में तैरने, नहाने के लिए छोड़ देना चाहिए। ताकि भैंस अपने आपन को ठंडी रख सके।
  • कृषि कार्य आजसे खेतों की जुटी आदि में यदि बैलों का उपयोग किया जा रहा है तो प्रत्येक 2-3 घंटे कमा करने के बाद बैलों को 1 घंटा आराम करने के लिए किसी छायेदार वृक्ष के नीचे छोड़ देना चाहिए। पशुओं को उनकी शारीरिक क्षमता के अनुसार कार्य करने ए लिए 2-3 घंटे में आराम की आवश्यकता होती है।
  • पशुओं को चारे की कमी होने पर एक क्षेत्र या राज्य जहाँ पर चारा प्रचुर मात्रा में हों दूसरे क्षेत्र या राज्य जहाँ चारे की कमी हो का आदान-प्रदान करके पशुओं चारे की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।
  • पशुओं को प्रोटीन, उर्जा तथा आवश्यक खनिज लवणों की पूर्ति करने के लिए यूरिया, मोलेसिस, मिनिरल ब्लोक, लिक्क उपलब्ध करना चाहिए। ये सभी आर्थिक रूप स लाभप्रद होते हैं लाने ले जाने में आसानी होती है तथा व्यवसायिक रूप से देरी कोपरेटिव सोसिएटी में उपलब्ध होते हैं। इसलिए जरुरी है कि कम वर्षा या सुखा ग्रस्त क्षेत्रों में यूरिया मोलेसिस ब्लोक का स्टोर करके रखना चाहिए ताकि जरूरत पर पशुओं को उपलब्ध कराया जा सके।
  • पशुओं को संतुलित आहार वाले कम्प्लीट फीड ब्लोक जिसमें चारा-धाना व गैर परम्परागत घटक 50:50 अनुपात हो होने चाहिए सम्पूर्ण आहार ब्लोक किसी व्यवसायी फार्म से उपलब्ध कर सकते हैं। गेहूँ के भूसे व धान की परली की गुणवत्ता बहाने के लिए 10% मोलोसिस 2% यूरिया का छिड़काव्/स्प्रे करना चाहिए ताकि भूसे व पेरली की गुणवता में इनाफा किया जा सके।
  • पशुओं को 100 किलोग्राम सम्पूर्ण संतुलित चारा-दाना बनाने के लिए 88.5 किलोग्राम। भूसा या अन्य भूसा कड़वी, 5 किलोग्राम मोलेसिस, 1 किलो यूरिया और 500 ग्राम खनिज लवण की आवश्यकता होती है। एक क्विंटल सम्पूर्ण संतुलित आहार बनाने में करीब 375 से 950  रु. का खर्च आता है।
  • दुधारू व् गाभिन पशुओं को उनकी आवशयकतानुसार संतुलित आहार और दुसरे पशुओं को उनकी शारीरिक क्रिया के लिए आहार की आवश्यकता होती है। यदि पशु चारे की अत्यधिक कमी हो जाए तो दुधारू पशुओं के चारे-चने में 50% से कम कमी नहीं करनी चाहिए क्योंकि उत्पादन के लिए दुधार व गाभिन पशुओं को अधिक आवश्यकता होती है।
  • पशुओं को ताजे चारे दाने के साथ नमक 40-50 ग्राम/प्रति बड़े पशु व् 10-20 ग्राम प्रति छोटे पशु (भेड़-बकरी व गाय भैंस के बछड़े) की खुराक अवश्य खिलानी चाहिए।
  • सूखे वाले क्षेत्रों में चारे की फासले उगाने के लिए उन किस्मों का चुनाव करें जो कि सुखा को सहन करने वाली हो जैसे ज्वार की किस्में पी-सी-6, एम्.पी चरी, लोबिया की किस्मे बी.एल. 1 व बी.एल. 2 और चारा घासे जैसे धामन घास, अंजन घास, गीनी घास आदि को उगाना चाहिए।

कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, देरी विभाग द्वारा मिनी किट योजना के तहत किसकों को चारे की फसलों का बीज उपलब्ध कराया जा रहा है किसान भाइयों को चाहिए कि वे इस योजना का लाभ उठाएं।

लेखन : डॉ. एच.आर. मीणा

स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार

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