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संक्रामक की बीमारी से बचाव के उपाय

इस लेख में अपने पशुओं के संक्रामक की बीमारी से बचाव के उपाय बारे में बताने का प्रयास किया गया है।

परिचय

  1. पशुओं को स्वच्छ कोठों में रखें, उनके खानपान में भी स्वच्छता का ध्यान रखें, कमजोर पशु शीघ्र रोग – ग्रस्त होता है।
  2. बाजार या मेलों से क्रय पशुओं को गाँव या शहर से कम से कम एक सप्ताह तक दूरस्थ एकांत वास में रखें क्योंकि अक्सर देखा गया है कि गाँव अथवा शहर में नये पशु के प्रवेश के पश्चात् संक्रामक रोग फैला है।
  3. रोगी पशु को अलग से रखें तथा उसे चरने ने छोड़े।  यदि रोगी पशु की मृत्यु हो जाती है तो गढ्डे में पांच से दस किलो चूना डाल कर गाड़ दें।
  4. पशुओं को किलनी तथा अन्य परजीवी कीड़ों से बचना चाहिए, किलनी को मारने के लिए 3 प्रतिशत डी. डी. टी. या 5 प्रतिशत बी. एच. सी. का पावडर लगाना चाहिए।  यह कार्य किसी प्रशिक्षित व्यक्ति के मार्गदर्शन में करना चहिए।
  5. संक्रामक रोगों  की सूचना तत्काल निकटस्थ पशु चिकित्सालय/पुलिस थाना अथवा जिला मुख्यालय के प्रशासनिक प्रभाग को दें।
  6. विषाणु जन्य या शाकाणु जन्य रोगों से बचने के लिए टीकाकरण समय चक्र अनुसार प्रतिबंधात्मक टीके पशुओं को लगाना चाहिए।

पशु टीकाकरण कार्यक्रम

रोगी पशु को वैक्सीन का टिका कभी नहीं लगवाना चाहिए।  स्वस्थ पशुओं में भी टीकाकरण रोग फैलने के 15 दिन पहले लगवाना चाहिए।  यह भी ध्यान रहे कि एन्टीसीरम रोगी पशुओं को ही लगवाना चाहिए या रोग के संदेह होने के स्थिति वाले पशुओं में ही लगवाएं।  गोवंशीय तथा महिष वंशीय में प्रमुख संक्रामक रोगों से बचाव हेतु टीकाकरण का कार्यक्रम पीछे तालिका में दर्शाया गया है।

स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार

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