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कुंदरी व बैंगन की खेती कर कुंवर ने बनायी अलग पहचान

इस लेख में किस प्रकार कुंदरी एवं बैंगन की खेती करके एक किसान ने अपनी अलग पहचान बनायीं है, इसकी जानकारी दी गयी है।

कुंदरी व बैंगन की खेती ने बदला जीवन

बिहार के गोपालगंज जिले के बरौली प्रखंड के बघेजी गांव  के 56 साल के किसान कुंवर लंबे समय से सब्जी के उत्पादन में अलग ही पहचान है। आठवीं पास कुंवर सब्जी की खेती की बदौलत न सिर्फ अपनी ज़िन्दगी संवार रहे हैं बल्कि सालाना पांच लाख की आय भी कर रहे हैं। इन दिनों इनके खेतों में बैंगन और कुंदरी की फसल लहलहा रही हैं। सुबह-सुबह सारण के विभिन्न इलाकों के सब्जी कारोबारी इनके खेतों में सब्जी खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। घर का एकलौता पुत्र और पर्याप्त जमीन होने के कारण कुंवर आठवीं पास करने के बाद पढ़ न सकें। वर्ष 1980 में 20 वर्ष की उम्र में कुंवर के कदम खेतों की ओर बढ़ चले, जो आज तक पीछे न लौटे। सब्जी की खेती को उन्होंने अपना मुख्य आधार बनाया और उसी में रच-बस गये। 36 वर्ष के खेती के लंबे अनुभव में कुंवर ने न सिर्फ अच्छी कमाई की बल्कि खेती के गुरों की जानकारी में पारंगत भी हो गये। आज वे न सिर्फ अपने खेतों में सब्जी उगाते हैं बल्कि नये किसानों को खेती करने की कला भी सिखाते हैं। कुंवर अपने क्षेत्र में खुद एक मिसाल बने हैं।

तीन एकड़ में करते हैं खेती

वर्तमान में कुंवर ने एक एकड़ में बैगन की खेती की हैं। शेष दो एकड़ में कुंदरी, परवल तथा भिन्डी की खेती है। इन दिनों सबसे अधिक उनकी आय बैंगन से है। प्रति दिन पांच से सात हजार का बैगन बि क रहा है। अन्य सीज न में इनकी खेती बदल जाती है। वे गोभी के लिए खेत की तैयारी में भी लग गये हैं। उन्होंने बताया कि अक्तूबर के अंत तक उनकी गोभी बाजार में आ जायेगी। खेती के संबंध में कुंवर ने कहा कि खास कर सब्जी की खेती हमारा

पुश्तैनी धंधा है। मैं कि सी भी हालत में इसे छोड़ना नहीं चाहूंगा। बच्चों को भी मैंने खेती करने की सलाह दी है। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा है कि कम दाम की नौकरी से अच्छी खेती है, युवाओं को इसमें आकर अपनी तकदीर संवारनी चाहिए।

तीन एकड़ में करते हैं खेती

वर्तमान में कुंवर ने एक एकड़ में बैंगन की खेती की हैं। शेष दो एकड़ में कुंदरी, परवल तथा भिन्डी की खेती है। इन दिनों सबसे अधिक उनकी आय बैंगन से है। प्रतिदिन पांच से सात हजार का बैंगन बिक रहा है। अन्य सीजन में इनकी खेती बदल जाती है। वे गोभी के लिए खेत की तैयारी में भी लग गये हैं। उन्होंने बताया कि अक्तूबर के अंत तक उनकी गोभी बाजार में आ जायेगी। खेती से प्राप्त आमदनी ने उनके घर को भी सुखी रखा है। उनके कुल आठ बच्चे हैं, जिनमें सात बेटियां हैं और एक बेटा है। वे तीन बेटियों की शादी कर चुके हैं। अन्य पढ़ाई कर रहे हैं। बेटा स्नातक कर पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए खेती में कदम बढ़ा चुका है।

स्त्रोत: संदीप कुमार, वरिष्ठ पत्रकार, पटना,बिहार

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