অসমীয়া   বাংলা   बोड़ो   डोगरी   ગુજરાતી   ಕನ್ನಡ   كأشُر   कोंकणी   संथाली   মনিপুরি   नेपाली   ଓରିୟା   ਪੰਜਾਬੀ   संस्कृत   தமிழ்  తెలుగు   ردو

किसान खेती भी करते और बाजार लगा कर भी कमाते है मुनाफा

परिचय

आसपास के गांवों के किसानों को हो रही सहूलियत, अब सब्जी मंडी का लेना लगा है रूप; लोग दूर-दूर से लोग आते हैं। यहां सब्जी खरीदते हैं बिहार के सीवान जिले के किसानों की एक पहल ने उन्हें न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना दिया है, बल्कि अन्य किसानों के लिए यह एक अलग ही उदहारण पेश कर रहे हैं। इनके इस प्रयास से आज कई लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से भी रोजगार मिल रहा है, जहां कल तक जो स्थान सुनसान व वीरान था, वहां सुबह के पांच बजे के बाद हजारों लोगों की भीड़ उमड़ रही है।

सब्जी हब के रूप में हो रहा विकसित

सभी के माथे पर केवल टोकरी व ढाका ही नजर आता है। इसमें केवल हरी सब्जी ही रहती है और जैसे ही किसान आते हैं कि उनकी हरी सब्जी को खरीदने के लिए उनको लोग घेर लेते हैं। यह दृश्य गोरेयाकोठी प्रखंड के पचिपकड़यां गांव के सानी बसंतपुर मोड़ का है, जो सब्जी के हब के रूप में विकिसत होने लगा है। यहां केवल सीवान ही नहीं सीमा के अधिकांश जिलों के लोग सब्जी खरीदने आते हैं। करीब पांच वर्ष पूर्व यहां के कुछ किसान पीपल के वृक्ष के नीचे टोकरी में सब्जी लेकर आकर दिन भर में बेचते थे। इसके बाद लोगों के मन में आया कि यहां हम सभी मिल कर एक बाजार लगाया जाये, ताकि यहां आस-पास के गांवों के किसानों को दूर अपने खेतों से निकलने वाली सब्जी को बेचने नहीं जाना पड़े। इसके बाद भिखम प्रसाद की पहल से यह शुरू हुआ, जो 3 वर्षों से बाजार लगना शुरू हुआ। आज यहां का सब्जी बाजार अब मंडी का रूप ले लिया है। यह करीब एक दर्जन से अधिक गांवों के किसान सुबह में ही अपने खेतों से निकलनेवाली सब्जी को लेकर बेचने आ जाते हैं, जिसे छोटे -छोटे व्यापारी खरीद कर लेकर चले जाते हैं। इससे दोनों लोगों को फायदा होता है। अब जिले के भी व्यापारी यहां पहुंचने लगे हैं।

समय की बचत होने से उत्पादन पर दे रहे हैं ध्यान

ध्यान जो समय अपनी सब्जियों को लेकर बाजार में बैठ कर गंवाना पड़ता था, उस समय का सदुपयोग किसान अपने खेतों में कर रहे हैं। मंडी लगने से इस क्षेत्र के किसानों के जिंदगी में एक क्रांति आ गयी है। अब ये बुलंद हौसलों के साथ पारंपरिक खेती की जगह सब्जी की खेती में पूरा ध्यान देने लगे हैं। पहले किसानों को यह शक रहता था कि बाजारों में इनका उत्पाद बिकेगा या नहीं। लेकिन इस क्षेत्र में मंडी हो जाने से यह निर्भीक होकर खेती कर विकास के नयी इबारत लिखने में जुटे हुए हैं। यदि विभाग व प्रशासन सुविधा उपल्ब्ध कराये, तो वह दिन दूर नहीं है कि पूरे जिले में सानी बसंतपुर मोड़ की सानी नहीं होगी।

एक ट्रक आलू सहित अन्य सब्जियों की रोजाना होती है खपत

गोरेयाकोठी प्रखंड के पचिपकड़यां गांव के सानी बसंतपुर मोड़ के बाजार ने अब धीरे-धीरे सब्जी के हब का रूप लेना शुरू कर दिया है,  जहां रोजाना एक ट्रक आलू, हाफ ट्रक प्याज, 100 क्रैट टमाटर, दस टन गोभी, सहित अन्य सब्जी की खपत है, जिससे यहां के किसानों सहित अन्य लोगों अच्छी कमाई हो रही है। यहां सरकारी स्तर से कोई सुविधा किसानों को नहीं मिलती है। बरसात के दिनों में इन्हें काफी परेशानियां होती हैं। इन्हें यहां उचित दर भी मिल जाता है। यहां से आस पास के साथ गोपालगंज, छपरा, मुजफ्फरपुर सहित सीमावर्ती यूपी के लोग सब्जी खरीदने आते हैं।

इन गांवो के किसानों को होती है लाभ

यहां सब्जी मंडी का रूप लेने से गोरेयाकोठी प्रखंड के पचिपकडया, सानीबसंतपुर, सग्रामपुर, सतवार, सैदपुरा, चाचोपाली, कला डूमरा, हैयातपुर, जगदीशपुर, बरारी, सरारी, करपलिया, करतालपुर, बहादुरपुर सहित अन्य गांवों के किसानों को लाभ होता है। यहां के किसान अपने खेतों में गोभी, परवल, टमाटर, बैंगन, पालक, आलू, प्याज, गाजर, धनिया, लौका सहित अन्य हरी सब्जी उपजाते हैं। लेकिन, सरकारी सहायता नहीं मिलने से इन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर सरकारी सहायता इन किसानों को मिलना शुरू हो जाये, तो किसानों को काफी लाभ हो गया। यही नहीं यहां दूसरे जिले के भी किसान व बड़े सब्जी व्यापारी पहुंच रहे हैं।

लेखन : संदीप कुमार, स्वतंत्र पत्रकार

अंतिम बार संशोधित : 2/22/2020



© C–DAC.All content appearing on the vikaspedia portal is through collaborative effort of vikaspedia and its partners.We encourage you to use and share the content in a respectful and fair manner. Please leave all source links intact and adhere to applicable copyright and intellectual property guidelines and laws.
English to Hindi Transliterate