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मखाना ने बदली किसानों की तकदीर

इस भाग में किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही मखाने की खेती के लिए किये जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई है।

किसानों की तकदीर बदल दी

मखाना की खेती ने न सिर्फ सीमांचल के किसानों तकदीर बदल दी है बल्कि हजारों हेक्टेयर की जल जमाव वाली जमीन को भी उपजाऊ बना दिया है। अब तो जिले के निचले स्तर की भूमि मखाना के रूप में सोना उगल रही है। विगत डेढ़ दशक में पूर्णिया, कटिहार और अररिया जिले में मखाना की खेती शुरू की गयी है। किसानों के लिए यह खेती के लिए साबित हुआ है। मखाना खेती का स्वरूप मखाना खेती शुरू होने से तैयार होने तक की प्रक्रिया भी अनोखी है। नीचे जमीन में पानी रहने के बाद मखाना का बीज बोया जाता है।

तेजी से बढ़ता रकबा

मखाना का पौधा पानी के लेवल के साथ ही बढ़ता है। और मखाना के पत्ते पानी के ऊपर फैले रहते हैं और पानी के घटने की प्रक्रिया शुरू होते ही लगभग फसल होकर पानी से लबालब भरे खेत की जमीन पर पसर जाता है। जिसे कुशल और प्रशिक्षित मजदूर द्वारा विशेष प्रक्रिया अपना कर पानी के नीचे ही बुहारन लगा कर फसल एकत्र किया जाता है और पानी से बाहर निकाला जाता है। मखाना की केती की शुरुआत बिहार के दरभंगा जिला से हुई वहां से सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज होते हुए पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के हरिश्रंद्रपुर तक फैल गया है। पिछले एक दशक से पूर्णिया जिले में मखाना की खेती व्यापक रूप से हो रही है। सालों भर जलजमाव वाली जमीन मखाना की खेती के लिए उपयुक्त साबित हो रही है। अधिकांश जमीन वाले अपने जमीन को मखाना की खेती के लिए लीज पर दे रहे हैं। बेकार पड़ी जमीन से वार्षिक आय अच्छी हो रही है।

उत्पादन

मखाना की खेती का उत्पादन प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल में प्रति एकड़ खर्च 20 से 25 हजार रुपये होता है जबकि आय 60 से 80 हजार रुपये होता है। यह खेती न्यूनतम चार फीट पानी में होता है। इसमें प्रति एकड़ खाद की खपत 15 से 40 किलोग्राम होता है। खेती का उपयुक्त समय मार्च से लेकर अगस्त तक होता है। पूर्णिया जिले में जानकीनगर, सरसी, श्रीनगर,बैलौरी,लालबालू,कसबा,जलालगढ़ सिटी आदि क्षेत्रों में होता है। इतना ही नहीं मखाना तैयार होने के बाद उसे 200 ग्राम 500 ग्राम और आठ से दस किलो के पैकेट में पैकिंग कर बाहर शहरों व महानगरों में भेजा जाता है। कई शहरों से भी व्यापारी तैयार मखाना के लिए आते हैं। पूर्णिया जिले से मखाना कानपुर, दिल्ली, आगरा,ग्वालियर, मुंबई के मंडियों में भेजा जाता है। यहां का मखाना अमृतसर से पाकिस्तान भी भेजा जाता है। मखाना की खपत प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। मखाना में प्रोटीन, मिनरल और कार्बेाहाइड्रेट प्रचुर मात्र में पाया जाता है।

स्त्रोत: संदीप कुमार,स्वतंत्र पत्रकार,पटना बिहार।

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