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रोहतास जिले का राजपुर बना टमाटर उत्पादन का हब

इस पृष्ठ में बिहार के रोहतास जिले के राजपुर ग्राम की कहानी है, जो टमाटर हब के रूप में विकसित हो रहा है ।

परिचय

सब्जियों का सरताज अगर आलू है तो टमाटर भी उससे कम नहीं है। पूरी दुनिया में घरों से लेकर फूड इंडस्ट्री तक सबसे ज्यादा उपयोग टमाटर का सब्जी के तौर पर किया जाता है। अपने देश में फूड प्रोसेसिंग यूनिट में भी टमाटर सबसे ज्यादा डिमांड में रहता है। लेकिन पिछले एक दशक से हाइिबड्र टमाटर और इस पर रासायनिक प्रयोग से इसके स्वाद पर भी बहुत असर पड़ा है। हाइिबड्र टमाटर की खेती करने से इसकी पैदावार भले ही बढ़ी है, लेकिन इसकी पोष्टिकता कम हुई है। यह देश के कृषि वैज्ञानिकों के लिए चिंता का सबब था।

पूरे गाँव ने शुरू की टमाटर की खेती

बावजूद बिहार के रोहतास जिले के राजपुर को टमाटर उत्पादन का हब बना दिया है। यहां के टमाटर देश के कई महानगरों की मंडियों तक पहुंच रहे हैं। आलम यह है कि रबी की खेती छोड़कर सैकड़ों किसान अब अपने खेतों में सिर्फ टमाटर का ही उत्पादन कर रहे हैं। बताया जाता है कि सबसे पहले घोरिडही गांव के दिनेश चौधरी, उमा चौधरी, रिंकू पटेल व चिंटू पटेल ने टमाटर की खेती शुरू की। इन किसानों को काफी मुनाफा हुआ, तो धीरे-धीरे अन्य किसानों ने भी टमाटर की खेती शुरू की। अब तो प्रखंड के सैकड़ों किसान गेहूं के बजाय खेतों में टमाटर का ही उत्पादन कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि परिड़या व बरांव पंचायत के घोरिडही, नावाडीह, परिड़या, महुअरी, बरैचा, बरांव, सुलतानपुर, रामपुर, घोरडीहा सहित दर्जनों गांवों के किसान टमाटर का उत्पादन इस कदर कर रहे हैं कि पूरा इलाका टमाटर उत्पादन के हब के रूप में चर्चित हो चुका है।

टमाटर की फसल उगाना है आसान

किसानों का कहना है कि टमाटर अधिक कार्बिनक पदार्थ वाली बलुई दोमट मिट्टी में आसानी से उगाया जा सकता है। हलकी अम्लीय मिट्टी जिस का पीएच मान 6.0 से 7.0 तक हो, टमाटर के लिए अच्छी रहती है। टमाटर गरम मौसम की फसल है, इसलिए उन इलाकों में अच्छी पनपती है, जहां पाला नहीं पड़ता है। ज्यादा गरमी (42 डिग्री से ज्यादा) में फूल व बिना पके फल झड़ जाते हैं। टमाटर के पौधे तैयार करने के लिए 60 से 90 सेंटीमीटर चौड़ी व 16 सेंटीमीटर ऊंची उठी हुई क्यारियां बनानी चाहिए। भरपूर मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट मिला कर 5 सेंटीमीटर की दूरी पर लाइनें बना कर बीजों की बोआई करनी चाहिए। बीज आधा सेंटीमीटर से ज्यादा गहरे नहीं डालने चाहिए। जब पौधे 15 सेंटीमीटर ऊंचे हो जाएं (28 दिन) तो रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं।

किसान अब ऑनलाइन भी भेज रहे अन्य शहरों में टमाटर

इन गांवों में उपजाए गए टमाटर को दिल्ली, चंडीगढ़, कोलकाता, भोपाल, लुधियाना, अमृतसर, आगरा, मेरठ समेत कई नगरों में भेजा जाता है। घोरडीही के किसान रिंकू पटेल तो ऑनलाइन भी टमाटर बेचने लगे हैं। टमाटर की खेती से हर किसान को हर साल कम से कम तीन-चार लाख रुपए का मुनाफा हो रहा है।

लेखन : संदीप कुमार, स्वतंत्र पत्रकार

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