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उत्तक संवर्धित (टिशु कल्चर्ड) पौधों की खेती क्यों?

इस पृष्ठ में उत्तक संवर्धित (टिशु कल्चर्ड) पौधों की खेती संबंधी जानकारी दी गई है।

उत्तक संवर्धित पौधों की खेती क्यों?

  1. ये पौधे रोग रहित होते हैं।
  2. ये आम पौधों से पहले फूल और फल देते है।
  3. सभी पौधे एक साथ फूल और फल देते हैं, जिसे एक साथ बिक्री हेतु भेज सकते है।
  4. टिशु कल्चर्ड पौधों से उपजे फल पुष्ट होते हैं, जिससे उपज अच्छी होती है।
  5. बांस के पेड़ मजबूत होते हैं और फूलदार पौधों में फूल बड़े और जल्दी खिलते हैं।

उत्तक संवर्धित (टिशु कल्चर्ड) पौधे लगाने की उत्तम विधि

  1. केला (किस्म: बेहुला, रोबस्टा, कैवेनडिश, मालभोग, मरतमान, इत्यादि) 2 फीट (ल) x 2 फीट (चौ.) x 11/2 फीट (ग.) के गड्ढे खोदें।
  2. गड्ढे में 5 किलो सड़े गोबर की खाद (कम्पोस्ट) एवं ½ किलो नीम खली को अच्छी तरह मिला कर गड्ढों को भर दें।
  3. गड्ढों की भराई के एक सप्ताह बाद पॉलीथीन पैकेट को फाड़कर (उसी अवस्था में जड़ के चारों तरफ की मिटटी को बिना छेड़े) पौधों को गड्ढों में रोप दें।
  4. दो पौधों की बीच की दूरी: लम्बी किस्मों (बेहुला आदि) के लिए: 8.5 फीट x 8.5 फीट बौनी किस्मों (रोबस्टा आदि) के लिए: 6 फीट x 6 फीट
  5. पौधों के चारों तरफ एक हाथ की गोलाई में थाला बना लें। थालों को आपस में बिना जोड़े सिंचाई करें। बारिश के दिनों में सिंचाई की आवश्यकता नहीं है।

 

पौधों के पोषण हेतु खाद की मात्रा

क्र.सं.

पौधा रोपण के बाद (दिन)

यूरिया (ग्रा.)

फ़ॉस्फेट (ग्रा.)

पोटाश (ग्रा.)

1

35

50

125

45

2

70

100

125

90

3

105

100

125

90

4

140

100

125

100

5

175

90

125

100

6

फूल आने पर

-

-

85

 

क्या करें

  1. सिंचाई हेतु ड्रिप व्यवस्था का प्रयोग करें।
  2. जल निकास का अच्छा प्रबंध करें।
  3. पौधों के बगल से निकलने वाले प्रथम पौधे को छोड़कर अन्य पौधों को काट दें। ये प्रथम पौधे बाद की संतति के रूप में प्रयोग कर लें।
  4. बाग़ से समय-समय पर खरपतवार निकाल दिया करें।
  5. तीन से 5 बार तक बहुत अथली एवं कम गुड़ाई करें।
  6. किसी भी तरह के कीड़े अथवा रोग लगने पर जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कांके राँची से सम्पर्क करें।

क्या न करें

  1. अधिक ठंड के दो महीने (15 दिसम्बर से 15 फरवरी तक) रोपाई न करें।
  2. छायाकार स्थल का चयन केले के बाद हेतु न करें।
  3. क्षारीय स्थल का चयन केले के बाद हेतु न करें।
  4. खाद की मात्रा में कोई कटौती न करें। अन्यथा यह केले की उपज को प्रभावित करेगा।

बांस

  1. 2 फीट 2 फीट 2 फीट आकार का गड्ढा खोदें।
  2. पाँच किलो सड़ी गोबर की खाद (कम्पोस्ट) एवं ½ किलो नीम खली को मिटटी में अच्छी तरह मिलाकर गड्ढे को वापस भर दें।
  3. गड्ढा भरने के 7-10 दिनों के बाद पौधा की रोपाई कर दें।
  4. दो पौधों के बीच की दूरी 5 मीटर रखें।
  5. पौधों का लगाने के बाद, शुरुआत में नियमित रूप से पानी पटायें।
  6. पौधों को लगाने से पहले, पौधों को पॉलीथीन सहित छायादार जगह में रखें। प्रतिदिन एक बार या आवश्यकतानुसार पानी पटाएं। जहाँ पौधे रखें, वह जगह हवादार एवं थोड़ी आर्द्रतायुक्त होनी चाहिए।

 

स्त्रोत: कृषि विभाग, झारखंड सरकार

3.03571428571

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