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अंगूर की किस्में

इस पृष्ठ में अंगूर की किस्म की विस्तृत जानकारी दी गयी है I

अनब-ए-शाही

यह किस्म आंध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और कर्नाटक राज्यों में उगाई जाती है। यह व्यापक रूप से विभिन्न कृषि जलवायु स्थितियों के लिए अनुकूल है । यह किस्म देर से परिपक्व होने वाली और भारी पैदावार वाली है। बेरियां जब पूरी तरह से परिपक्व हो जाती है तो ये लम्बी, मध्यम लंबी, बीज वाली और एम्बर रंग की हो जाती है। इसका जूस साफ और 14-16% TSS सहित मीठा होता है। यह कोमल फफूदी के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। औसतन उपज 35 टन/है0 है। फल बहुत अच्छी क्वालिटी वाला है और तालिका उद्देश्य हेतु ज्यादातर इस्तेमाल किया जाता है।

बंगलौर ब्लू

यह किस्म कर्नाटक में उगाई जाती है। बेरियां पतली त्वचा वाली छोटी आकार की, गहरे बैंगनी, अंडाकार और बीजदार वाली होती है। इसका रस बैंगनी रंग वाला, साफ और आनन्दमयी सुगंधित 16-18% टीएसएस वाला होता है। फल अच्छी क्वालिटी का होता है और इसका उपयोग मुख्यत: जूस और शराब बनाने में होता है। यह एन्थराकनोज से प्रतिरोधी है लेकिन कोमल फफूदी के प्रति अतिसंवेदनशील है।

भोकरी

यह किस्म तमिलनाडू में उगाई जाती है। इसकी बेरियां पीली हरे रंग की, मध्यम लंबी, बीजदार और मध्यम पतली त्वचा वाली होती है। जूस साफ 16-18% टीएसएस वाला होता है। यह किस्म कमजोर क्वालिटी की होती है और इसका उपयोग टेबल प्रयोजन के लिए होता है। यह जंग और कोमल फफूदी के प्रति अतिसंवेदनशील है। औसतन उपज 35 टन/ हेक्टेयर/ वर्ष है ।

गुलाबी

यह किस्म तमिलनाडू में उगाई जाती है। इसकी बेरियां छोटे आकार वाली, गहरे बैंगनी, गोलाकार और बीजदार होती है। टीएसएस 18-20% होता है। यह किस्म अच्छी क्वालिटी की होती है और इसका उपयोग टेबल प्रयोजन के लिए होता है। यह क्रेकिंग के प्रति संवदेनशील नहीं है परन्तु जंग और कोमल फफूदी के प्रति अतिसंवेदनशील है। औसतन उपज 1012 टन/ हेक्टेयर है।

काली शाहबी

इस किस्म छोटे पैमाने पर महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश राज्यों में उगाई जाती है। इसकी बेरियां लंबी, अंडाकार बेलनाकार, लाल- बैंगनी और बीजदार होती है। इसमें टीएसएस 22% है। यह किस्म जंग और कोमल फफूदी के प्रति अतिसंवेदनशील है। औसतन उपज 10-12 टन/ हेक्टेयर है। वैराइटी जंग के लिए तिसंवेदनशील है और कोमल फफूदी। औसतन उपज 12-18 टन/है0 है। तालिका उद्देश्य हेतु यह किस्म उपयुक्त है ।

परलेटी

यह किस्म पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के राज्यों में उगाई जाती है। इसकी बेरियां बीजरहित, छोटे आकार वाली, थोडा एलपोसोडियल गोलाकार और पीले हरे रंग की होती है। जूस 16-18% टीएसएस सहित साफ और हरा होता है। यह किस्म अच्छी क्वालिटी की होती है और इसका उपयोग टेबल प्रयोजन के लिए होता है। कल्सटरों के ठोसपन की वजह से यह किस्म किशमिश के लिए उपयुक्त नहीं है। यह एन्थराकनोज के प्रति अतिसंवेदनशील है। औसतन पैदावार 35 टन/है0 है।

थॉम्पसन सीडलेस

इस किस्म की म्यूटेंट टास-ए-गणेश, सोनाका और माणिक चमन हैं। इस किस्म महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक में उगाई जाती है । इसे व्यापक रूप से बीजरहित, इलपसोडियल लंबी, मध्यम त्वचा वाली सुनहरी-पीली बेरियों के रूप में अपनाया जाता है। इसका जूस 20-22% टीएसएस सहित मीठा और भूसे रंग वाला होता है। यह किस्म अच्छी क्वालिटी की होती है और इसका उपयोग टेबल प्रयोजन और किशमिश बनाने के लिए किया जाता है। औसतन पैदावार 20-25 टन/है0 है। म्यूटेंट टास-ए-गणेश और सोनाका की खेती ज्यादातर महाराष्ट्र में की जाती है।

शरद सीडलेस

यह रूस में स्थानीय किस्म है और इसे किशमिश क्रोनी कहा जाता है। इसकी बेरियां बीजरहित, काली, कुरकरी और बहुत ही मीठी होती है। इसमें टीएसएस 24 डिग्री ब्रिक्स तक होता है। यह जीए के लिए अच्छी प्रतिक्रिया देती है और इसका शैल्फ जीवन अच्छा है। इसे विशेष रूप से टेबल उद्देश्य हेतु उगाया जाता है।

संकर किस्मों में

अरकावती

यह 'ब्लैक चंपा' और 'थॉम्पसन बीजरहित' के बीच का क्रॉस है। इसकी बेरियां मध्यम, पीली हरी, इलपसोडियल अंडाकार, मीठी, बीजरहित और 22-25% टीएसएस की होती है। यह बहु प्रयोजन वाली किस्म है और इसका उपयोग किशमिश और शराब बनाने में किया जाता है।

अरका हंस

यह ‘बंगलौर ब्लू' और 'अनब-ए-शाही' 'के बीच का क्रॉस है। इसकी बेरिया पीली हरी, इलपसोडिय-गोलाकार, बीजवाली सुगन्धित महक की होती है। इसमें टीएसएस 18-21% है। इस किस्म का प्रयोग शराब बनाने के लिए किया जाता है।

अरका कंचन

यह देरी से पकने वाली किस्म है और यह ‘अनब-ई-शाही' और 'क्वीन ऑफ दा वाइनयाई' के बीच का क्रॉस है। इसकी बेरिया सुनहरी पीली, इलपसोडियल अंडाकार, बीजदार और सुगन्धित ‘मुस्कैट' स्वाद की होती है। इसमें 19-22% टीएसएस होता है और टेबल प्रयोजन और शराब बनाने के लिए उपयुक्त है। इस किस्म की अच्छी पैदावार है लेकिन क्वालिटी हल्की है।

अरका श्याम

यह 'बंगलौर' ब्लू 'और' काला चंपा के बीच का क्रॉस है। इसकी बेरियां मध्यम लंबी, काली चमकदार, अंडाकार गोलाकार, बीजदार और हल्के स्वाद वाली होती है। यह किस्म एंथराकनोज के प्रति प्रतिरोधक है। यह टेबल उद्देश्य और शराब बनाने के लिए उपयुक्त है।

अरका नील मणि

यह 'ब्लैक चंपा' और 'थॉम्पसन बीजरहित' के बीच एक क्रॉस है। इसकी बेरियां काली बीजरहित, खस्ता लुगदी वाली और 20-22% टीएसएस की होती है। यह किस्म एंथराकनोज के प्रति सहिष्णु है। औसतन उपज 28 टन/हे0 है। यह शराब बनाने और तालिका उद्देश्य के लिए उपयुक्त है।

अरका श्वेता

यह ‘अनब-ए-शाही' और 'थॉम्पसन बीजरहित' के बीच एक क्रॉस है। इसकी बेरियां पीली, अंडाकार, बीजरहित और 1819% टीएसएस की होती है। औसतन उपज 31 टन/हे0 है। इस किस्म का उपयोग टेबल उद्देश्य के लिए किया जाता है। और इसमें अच्छी निर्यात संभावनाएं है।

अरका राजसी

यह ‘अंगूर कलां' और 'ब्लैक चंपा' के बीच एक क्रॉस है। इसकी बेरियां गहरी भूरे रंग की, एकसमान, गोल, बीजदार होती है और इसमें 18-20% टीएसएस होता है। यह किस्म एनथराकनोज के प्रति सहिष्णु है। औसतन उपज 38 टन/हे0 है। इस किस्म की अच्छी निर्यात संभावनाएं है।

अरका चित्रा

यह 'अंगूर कलां' और 'अनब -ए-शाही' 'के बीच एक क्रॉस है। इसकी बेरियां सुनहरी पीली गुलाबी लाल, थोडी सी लम्बी होती है और इसमें 20-21% टीएसएस होता है। इस किस्म में कोमल फफुदी को सहन करने की क्षमता होती है। औसतन उपज 38 टन/हे0 है। ये बेरियां बहुत ही आकर्षक होती हैं और इसलिए टेबल उद्देश्य के लिए उपयुक्त है।

अरका कृष्णा

यह 'ब्लैक चंपा' और 'थॉम्पसन बीजरहित' के बीच एक क्रॉस है। इसकी बेरियां काले रंग, बीजरहित, अंडाकार गोल होती है और इसमें 20-21% टीएसएस होता है। औसतन उपज 33 टन/हे) है। यह किस्म जूस बनाने के लिए उपयुक्त है।

अरका सोमा

यह ‘अनब-ए-शाही' और 'क्वीन ऑफ वाइनयाईस' 'के बीच एक क्रॉस है। इसकी बेरियां हरी पीली, गोल अण्डाकार होती है। इसकी लुगदी गोश्त वाली और इसमें 20-21% टीएसएस सहित 'मस्कट' स्वाद होता है। इस किस्म में एनथराकनोज, कोमल फफंदी और ख़स्ता फफूदी को सहन करने की क्षमता है। औसतन उपज 40 टन/हे0 है। यह सफेद रेगिस्तानी शराब बनाने के लिए अच्छी है।

अरका तृष्णा

यह ‘बंगलौर ब्लू’ और ‘कॉन्वेंट बड़ा काला' के बीच एक क्रॉस है। इसकी बेरियां गहरी तन रंग, गोल अण्डाकार वाली होती है और इसमें 22-23% टीएसएस होता है। यह किस्म एनथराकनोज प्रतिरोधक है और इसमें कोमल फफंदी को सहन करने की क्षमता है। औसतन उपज 26 टन/हे0 है। यह किस्म शराब बनाने के लिए उपयुक्त है।

अंगूर की विदेशी किस्में

इटली

टेबल और प्रसंस्करण प्रयोजन

इटली विक्टोरिया

पुर्तगाल

प्रसंस्करण उद्देश्य

असारिओ

अमेरिका

प्रसंस्करण उद्देश्य

अल्मेरिया

टेबल प्रयोजन

अलेक्जेंड्रिया ऑफ मसकट, सम्राट, कार्डिनल, रिबेयर, रानी, कलमिरया, इटली, ज्वाला टाउकेई, ज्वाला बीजरहित, रूबी बीजरहित।

टेबल और प्रसंस्करण प्रयोजन

बृहस्पति, मंगल, नेपच्यून, रिलायंस, शनि, सनबेल्ट और वीनस।

यूरोपयिन किस्में

प्रसंस्करण उद्देश्य

काबरनेट, सावीगोन, चारडोनी, मरलोट, राइसिंग

 

स्रोत: भारत सरकार का राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड

3.0625

Manish Kumar Meena Aug 04, 2019 02:21 PM

अंगूर की अन्य किस्में डी लाइट कॉर्डियल ताशे गणेश दिलखुश अर्का हंस अर्का श्याम अर्का कंचन

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