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बिहार में राई की उन्नत खेती

इस पृष्ठ में बिहार राज्य में कृषि प्रणाली में राई की उन्नत खेती की खेती की जानकारी दी गयी है।

परिचय

रबी तेलहनी फसलों में राई का विशेष स्थान है। जिन क्षेत्रों में कम वर्षा की स्थिति में धान की खेती नहीं हो सकी, उन खाली खेतों में राई की अगात खेती कर खरीफ फसलों की भरपाई की जा सकती है।

भूमि का चुनाव- राई की खेती सभी प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है।

खेत की तैयारी – खेत की तैयारी हेतु दो-तीन बार जुताई करके पाटा चला दें और खेत समतल कर लें।

अनुशंसित प्रभेद

उन्नत प्रभेद

बोआई का समय

परिपक्वता अवधि (दिन)

औसत उपज (किवंटल/हेक्टेयर

तेल की मात्रा

वरुण

15-25 अक्तूबर

135-140

20-22

42%

पूसा बोल्ड

15-25 अक्तूबर

120-140

18-20

42%

क्रांति

15-25 अक्तूबर

125-130

20-22

40%

राजेंन्द्र राई पिछेती

15 नव-10 दिस.

105 -115

12-14

41%

राजेंद्र अनुकूल

15 नव-10 दिस.

105- 115

10-13

40%

राजेंद्र सुफलाम

15 नव-25  दिस.

105 -115

12-15

40%

बीज दर- 05 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर

बीजोपचार- बीज जनित रोगों एवं कीटों से फसल को बचाने के लिए फुफुन्दनाशक दवा से बीजों को उपचारित करना जरूरी है। बुआई से पहले बीजों को वेबिस्टीन चूर्ण से २.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें।

बोने की दूरी- पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सें.मी. तथा  पौधे से पौधे की दूरी 15 सें.मी,।

खाद एवं उर्वरक प्रबन्धन – 8-10 टन सड़ी हुई कम्पोस्ट खाद खेत की अंतिम जुताई के समय खेत में मिला देना चाहिए। उर्वरकों की असिंचित अवस्था में 40 किलोग्राम नेत्रजन, 20 किलोग्राम फास्फोरस एवं 20 पोटाश प्रति हेक्टेयर आवश्यकता होती है। उर्वरकों की सिंचित अवस्था में 80 किलोग्राम नेत्रजन, 40 किलोग्राम फास्फोरस एवं 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर आवश्यकता होती है।

प्रयोग विधि- कम्पोस्ट खाद को बुआई से 20-30 दिन पूर्व खेत में डालकर अच्छी तरह मिला दें। सिंचित अवस्था में नेत्रजन की आधी मात्रा एवं स्फुर तथा पोटाश की पूरी मात्रा बुआई के समय प्रयोग करें। नेत्रजन की शेष आधी मात्रा फूल लगने के समय उपरिवेशन करें। असिंचित अवस्था में नेत्रजन, स्फुर तथा पोटाश की पूरी मात्रा बुआई के समय प्रयोग करें। जिंक की कमी वाले खेत में प्रति हेक्टेयर 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट खेत की तैयारी के समय डालें।

सिंचाई – अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए मृदा में पर्याप्त नमी बनाये रखना आवश्यक है। सिंचित अवस्था में दो सिंचाई करें। पहली सिंचाई फूल आने से पूर्व तथा दूसरी सिंचाई फलियों के लगने के समय करें।

निकाई-गुडाई एवं खरपतवार प्रबन्धन- राई फसल में 15-20 दिनों के अंतर अतिरिक्त पौधों को बछनी जरुर करें। बुआई के 20-25 दिनों के बाद निकाई-गुडाई करें।

कटनी दौनी एवं भंडारण- जब 75% फलियाँ सुनहरे रंग की हो जाए तो समझ लेना चाहिए कि फसल की कटनी करने के बाद इसे सुखाकर अपने संसाधनों द्वारा बीजों को अलग कर लें। देर से कटाई करने पर बीजों के झड़ने की आशंका रहती है। बीजों को 3-4 दिन सुखाकर भंडारित करें।

 

स्त्रोत: कृषि विभाग, बिहार सरकार

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