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नर्सरी प्रबंधन - काजू

इस पृष्ठ में काजू के नर्सरी प्रबंधन की जानकारी दी गयी है।

सायॉन का उत्पादन

  • प्रत्ये्क क्षेत्र के लिए संस्तुत किस्म से ही सायॉन बैंक स्थापित करना चाहिए।
  • पौधों को कम अंतराल (4मी x 4मी) पर लगाया जाए ताकि सायॉनों का निरंतर सप्लाई  हो।
  • संस्तुत उर्वरक दिया जाए तथा मानसून में समय पर कीटनाशक स्प्रेय देकर कोमल प्ररोहों को सुरक्षित रखा जाए।
  • पुष्पगुच्छों को काट निकाला जाए ताकि ज्यादा सायॉन प्राप्त हो।
  • सायॉन बैंक के पौधों की ऊँचाई भूतल से 1.5मी तक सीमित रखा जाए तथा समय-समय पर सूखी ठहनियों की काटछॉंट की जाए।
  • पौधों की वार्षिक काट-छॉंट सितंबर-अक्तूबर महीने में की जाए।

सायॉन का चयन व तैयारी

  • ऐसे 3-5 महीने के पार्श्वस प्ररोहों का चयन करें जो अपुष्पित व वर्तमान मौसम के हों।
  • पेंसिल की मोटाई वाले, 10-12 से.मी. लंबे, प्रसुप्त, फुले अंतस्थे कलिका वाले भूरे रंग के खड़े प्ररोहों का चयन किया जाए।
  • ऊपर के 4-5 पत्तेा गहरे हरे् रंग के हों जिससे सायॉन की पक्वता सूचित हो।
  • पर्णवृंत को छोडकर चयनित सायॉनों के सारे पत्ते काटकर उसे तैयार किया जाए।
  • सायॉनों को 8-10 दिन के बाद, अंकुरण होने से पहले माता पेड़ से अलग किया जाए और कलमन के लिए प्रयोग किया जाए।

सायॉनों का संचयन

  • तैयार सायॉनों को प्रात:काल में माता पेड़ से अलग करना उचित होगा। खयाल रहे की इनकी लंबाई 10सें.मी. से कम न हो।
  • माता पेड़ से अलग करने के तुरंत बाद सायॉनों को पानी में डुबाकर 100 गेज मोटायी के पॉलीथीन बैग में रखकर कलम के लिए नर्सरी ले जाना चाहिए।
  • ज़रूरत पड़ने पर सायॉनों को स्फैग्नम मॉस कपड़े से बॉंधकर, 100 गेज के पॉलीथीन बैगों में 3-4 दिन तक रखा जा सकता है।

बीज नटों का चयन

  • उच्चतम फसलन काल, याने फरवरी-अप्रैल में नट इकट्ठा करके 2-3 दिन धूप में सुखाया जाए।
  • मध्यम आकार, याने 7-8 ग्राम के नट का ही चयन किया जाए ताकि कोमल शाख कलम के लिए ज़रूरी समान एवं तंदुरुस्त बीजूपौध प्राप्त् हो।
  • बीज सबल एवं अपेक्षित गुरुत्व (1.0 से ज्या्दा) वाले हों। धूप में सुखाए श्रेणीकृत बीजों को गण्णीस/पॉलीथीन बैगों में संभरित करने से पहले कार्बरिल का उपचार(5ग्राम/किलो बीज) दिया जाए। बैगों को स्टोर रूम में लकड़ी के तख्तों पर रखा जाए।

गमलन मिश्रण की तैयारी

  • गमलन मिश्रण तैयार करते वक्त भारी वृष्टि वाले प्रदेशों में लाल मृदा, रेत व कंपोस्ट सम अनुपात में लिया जाए और 5 किलो रॉक फॉसफेट से मिलाया जाए। कम वृष्टि वाले प्रदेशों में रेत का प्रयोग न किया जाए।
  • जड़ प्ररोह उत्पन्न करने के लिए उच्च सघनता व 300 गेज (160-170 बैग/किलो)वाले 25 से.मी.x 15 सें.मी के पॉलीथीन बैगों का उपयोग किया जाए।
  • भारी वृष्टिकाल में जल का सुगम निकास सुनिश्चित करने के लिए पॉलीथीन बैगों में 0.5 व्यास के 15-30 छेद लगाएं। कम वृष्ट वाले प्रदेशों में छेदों की संख्या कम की जा सकती है।
  • बैगों को गमलन मिश्रण से भरने से पूर्व उनके निचले कोनों को अंदर की तरफ मोड़ा जाए।
  • बैगों को पूरी तरह गमलन मिश्रण से भरा जाए और 1000 की क्यारियों में (10x100) रखा जाए।

मूलवृंत का उत्पादन

  • मूलवृंत के उत्पा‍दन के लिए वर्तमान मौसम के नटों का ही प्रयोग किया जाए।
  • बोने से पहले बीज नटों को पानी में रातभर भिगोना है।
  • बोने के वक्त बैग की मृदा नम व ढ़ीली होनी चाहिए।
  • भिगाए नटों को प्रत्येक बैग के मध्य में 2.0-2.5से.मी. की गहराई में ऐसे बोएं कि नट का वृंत भाग ऊपर हो।
  • बोने के तुरंत बाद तथा आगे हर दिन पानी से सींचा जाए, पर खयाल रहे कि सिंचाई ज्यादा न हो।
  • पोलीथीन बैगों को घास-भूसे से ढका जाए ताकि जल्द अंकुरण हो। 8-10 दिन में बीजूपौध के बाहर आ जाने पर इन्हें निकाला जाए।
  • सामान्यत: वर्षा ऋतु में 15-20 दिन के अंदर बीज नटों का अंकुरण होता है और ग्रीष्म ऋतु में 8-10 दिनों में।
  • अंकुरित नटों की सुरक्षार्थ 5% मैलथियन पाउडर छिड़की जाए या क्लोशरोपिरीफॉस(1%) की फुहार दी जाए और बीजूपौध की सुरक्षा के लिए 1% बोर्डिऑक्सा मिश्रण भी लगाया जाए।
  • अंकुरण के 45-60 दिन बाद कलम के लिए बीजूपौध तैयार होंगे।

मूलवृंत का चयन व तैयारी

  • एकल मुख्य तना वाले 45-60 दिन के स्वस्थ बीजूपौध को मूलवृंत के लिए चुना जाए।
  • कलम चाकू को कवकनाशी घोल में भिगोकर रोगाणुमुक्त किया जाए।
  • चयनित मूलवृंत के पत्‍तों में से अंतिम दो जोडियों को छोड़कर बाकी पत्तों को तीखे कलम चाकू से निकाला जाए।
  • भूतल से 15-20 सें.मी. की ऊँचाई पर जहॉं कोमलशाख भाग है, वहॉं आड़े काट से अंतस्थ प्ररोह निकाला जाए।
  • कटे हुए भाग में 4-5 सें.मी. गहरी दरार बनाई जाए।
  • दरार के अंदर से लकड़ी का थोड़ा सा हिस्सा निकाला जाए ताकि कलम के बाद जोड़ ठीक रहे।

सायॉन की तैयारी

  • प्रकंद के बराबर मोटाई वाला 10-12 से.मी.लंबा सायॉन चुना जाए।
  • सायॉन के कटे भाग को दोनों तरफ से 4-5 से.मी.लम्बां तिरछा दोनों तरफ काटा जाए।
  • खयाल रहे कि कटे भाग को हाथ से छूकर खराब न किया जाए और वहॉं का गोंद अविकल रहे।

कलम तकनीक

  • सायॉन (सांकुर शाख) के तिरछे कटे हुए भाग को मूलवृंत के कटे हुए भाग में प्रत्याॉरोपित करते हैं। सायन और मूलवृंत की मोटाई (0.5 - 1.0 से.मी.) दोनों तरफ बराबर होनी चाहिए जिससे वैसकुलर कैम्बियम व प्लोस्म आपस में जुड़ सके।
  • कलम जोड़ को 1.5 सें.मी. चौड़ी और 30 से.मी. लंबी 100 गेज की पॉलीथीन पट्टी से बॉंधा जाए।
  • कलमित पेड़ को एक लंबे 12 सें.मी.x 4 सें.मी. के 100 गेज वाले एचडी पॉलीथीन बैग से ढककर नीचे एकल गॉंठ से बॉंधा जाए ताकि सायॉन सूख न जाए।
  • उच्चे आर्द्रता वाले प्रदेशों में पॉलीथीन कैप की ज़रूरत नहीं है।
  • अंतस्थ कालिकाओं के अंकुरण को प्रोत्सा हित करने के लिए कलमित पौधों को नर्सरी शेड में दो हफ्ते के लिए रखा जाए।
  • दो हफ्ते बाद पॉलीथीन कैपों को सावधानी से निकाला जाए और शेड से बाहर ले जाए।
  • 3-4 हफ्ते के अंदर 70-80% कलमों का अंकुरण होता है।
  • 5-6 महीनों में ये कलमें रोपण के लिए तैयार होती है।

स्त्रोत: काजू और कोको विकास निदेशालय, भारत सरकार

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