सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

मिट्टी जाँच

इस भाग में झारखण्ड राज्य में प्रचलित मिट्टी जाँच के बारे में जानकारी उपलब्ध है|

मिट्टी जाँच क्यों

पोषक तत्वा का अधिकांश भाग पौधे मिट्टी से ही प्राप्त करते हैं और इन तत्वों कि कमी हो जाती है तो उसे खाद एवं उर्वरक डाल कर पूरा करते हैं| सभी मिट्टियाँ एक जैसे नहीं होती हैं| उनकी उर्वरता का अपना स्तर होता है तथा उनके गुण दोष अलग होते हैं| इसलिए फसल के साथ मिट्टी के अनुसार भी उर्वरकों का उपयोग एवं उनकी मात्रा बदल सकती है|  अत: फसल लेने के पहले मिट्टी की जाँच आवश्यक है|

मिट्टी कि जाँच दो समस्याओं के समाधान के लिए कि जाती है : (१) फसल एवं वृक्षों के खाद की सिफारिशों के लिए (२) आम्लिक या क्षारीय मिट्टी के सुधार के लिए|

मिट्टी कि जाँच से पता चलता है कि भूमि में कौन सा तत्त्व उचित, अधिक या कम मात्रा में है| यदि आप बिना मिट्टी जाँच कराये खाद डालते हैं तो संम्भव है कि खेत में आवश्यकता से अधिक या कम खाद डाल दी जाए|

आवश्यकता से कम खाद डालने पर कम उपज मिलेगी तथा अधिक खाद डालने पर खाद का गलत उपयोग होगा और पैसा भी बेकार जायेगा|  यह भी हो सकता है कि आप उस पोषक तत्वों जिनकी कम आवश्यकता है, आप अधिक मात्रा में दे रहे हैं|  खाद व्यवहार के लिए संतुलित एवं उचित मात्रा क्या हो, इसकी सही जानकारी मिट्टी जाँच द्वारा की जा सकती है|

फलदार पौधों कि जड़ मिट्टी में बहुत नीचे तक चली जाती है यह जानने के लिए कि जिस खेत में आप फल के पेड़ लगाना चाहते हैं उसमें पेड़ों कि जड़ों को बढनें और पूर्ण रूप से भोजन पहुँचाने की क्षमता है या नहीं, मिट्टी जाँच जरुरी है|

छोटानागपुर एवं संथालपरगना के पठार की ऊँची भूमि की लाल एवं पीली मिट्टी आम्लिक है|  आम्लिक भूमि में उचित मात्रा में खाद और पानी देने के बाद भी उपज नहीं होती है|  इन खेतों में चूने का प्रयोग करना अनिवार्य होता है| चूने की सही मात्रा जानने के लिए भी मिट्टी जाँच जरुरी है|  पटारी रोहतास जिले कि मिट्टियाँ क्षारीय हैं|  इन मिट्टियों में लवण कि मात्रा अधिक होती है जिससे पैदावार नहीं के बराबर होती है| क्षारीय मिट्टी के सुधार के लिए भी मिट्टी की जाँच बहुत आवश्यक है|

मिट्टी कि जाँच कब करायें?

मिट्टी जाँच खाद कि सिफारिशों के लिए हमेशा फसल लेने के एक यह दो महीने पहले करा लेना चाहिए|  अर्थात खरीफ फसल लेने के लिए अप्रैल – मई के महीने में और रब्बी कि फसल लेने के लिए अगस्त या सितम्बर में|  ऐसा करने से खेत की तैयारी के समय तक खाद की सिफारिश मिट्टी जाँच प्रयोगशाला से प्राप्त हो जायगी|  अप्रैल – मई के महीने में करा लेने के लिए मिट्टी में आप चुना का व्यवहार वर्षा होने के पहले खेत में कर सकते हैं|

मिट्टी का नमूना कैसे लें?

मिट्टी जाँच हेतु नमूना सही ढंग से लें क्योंकि थोड़ी से भी असावधानी से मिट्टी की सिफारिश का पूर्ण लाभ नहीं हो सकता है|

खेत से मिट्टी का नमूना लेने कि सही विधि यह है कि जिस खेत से आपको नमूना लेना हो उसे भली-भांति देख लें कि खेत कि मिट्टी में रंग, भारीपन, पौधे की लम्बाई उपज या और कुछ कारण से भिन्नता तो नहीं| यदि भिन्नता हो तो हर क्षेत्र से ५-६ भिन्न स्थान से १५-२० सेंटीमीटर या एक बित्ता गहराई तक मिट्टी का नमूना लें|  मिट्टी का नमूना लेने के लिए खुरपी या कुदाली से V आकार का एक बित्ता गहरा गड्डा खोदें|  गड्डे के अंदर की सब मिट्टी निकाल दें तथा खुरपी से दो अंगुल मोटा परत ऊपर से नीचे तक खुरच लें और एक साफ कागज में जमा कर लें, इस प्रकार कई स्थानों से जमा की गई मिट्टी को अच्छी प्रकार मिलाकर छाया में सुखा लें और आधा किलो मिट्टी का नमूना थैली में भर दें|

फलों के पेड़ (बगीचे) लगाने के लिए – १ से दो हेक्टेयर  के बीच एक मीटर गड्डा खोदें, जिसका एक दीवार सीधा हो| अब सीधी दीवार पर १५, ३०, ४०, और १०० सें.मी. पर निशान लगायें|  अब एक बाल्टी को १५ सें.मी. पर निशान लगाये पर रखें तथा खुरपी की सहायता से ऊपर से लेकर इस निशान तक मिट्टी की मोटी परत खुरच कर बाल्टी में रख लें|  इस प्रकार चारों गहराइयों से नमूना लेकर छाया में सुखाकर जाँच हेतु भेजें|

तीन सूचना पत्र बनायें| एक सूचना पत्र सावधानी से कपड़ें कि थैली में भर दें, तीसरा अपने पास रखें| सूचना  पत्र के साथ नीचे लिखी सूचनाएं भेजें|

१)      किसान का नाम, ग्राम, डाकघर, जिला एवं प्लाट न.|

२)      खेत की स्थिति – नीची, मध्यम नीची (दोन २, दोन ३, टांड २,३)

३)      गाँव का नाम

४)      नमूना इकट्ठा करने की तिथि

५)      मिट्टी की किस्में – केवाल, बालुआही|

६)      कौन सी फसल लगाना चाहते हैं, खरीफ में रबी में, एवं गर्मी में,

७)      खेत में सिंचाई की सुविधा है या नहीं|

८)      खेत में पिछले तीन वर्षों में कौन सी खाद कितनी मात्रा में डाली गई है|

९)      खेत में पिछले वर्ष उपजाई गयी फसलों की औसत उपज|

सावधानी

१)      फसल अगर कतारों में बोई गयी हो तो कतारों के बीच की जगह मिट्टी न लें|

२)      असामान्य स्थान, जैसे सिंचाई की नालियाँ, दल-दली जगह, पुरानीं मेढ़ एवं पेड़ के निकट खाद के ढेर से नमूना न लें|

३)      खेत में हरी खाद, कम्पोस्ट तथा रासायनिक खाद डालने के तुरंत बाद मिट्टी का नमूना न लें|

४)      मिट्टी का नमूना खाद के बोरे या खाद की थैली में कभी न रखें|

५)      खेत से नमूना खेत की गीली अवस्था में न लें|  खेत की मिट्टी की जाँच तीन साल में एक बार अवश्य करवाएं|

६)      सिंचाई की नालियाँ, दलदली जगह, पेड़ के निकट, पुराना  से या जिस जगह खाद राखी गयी हो वहाँ का नमूना न लें|

७)      सूचना  पत्र को पेन्सिल से लिखें|

आप सूचना  पत्र की नक़ल अपने पास में रखें क्योंकि मिट्टी जाँच की रिपोर्ट मिलने पर आपको  सही मालूम होगा कि खेत में कौन सी फसल लेनी है तथा कितनी खाद या कितना चुना डालना है|

मिट्टी का नमूना कहा भेजें ?

मिट्टी का नमूना लेने के बाद उसकी जाँच हेतु आप स्थानीय जनसेवक, प्रखंड पदाधिकारी को दें या आप भी निकटतम मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में नमूना ले जाकर दे सकते हैं जहां इसकी जाँच मुफ्त की जाती है|

पठारी क्षेत्रों में परीक्षण प्रयोगशाला

बिरसा कृषि विस्वविद्यालय रांची, निम्बू अनुसन्धान क्षेत्र चियांकी (पलामू): डी.भी.सी. हजारीबाग, एफ. सी.आई. सिंदरी एवं जनजाति कल्याण परियोजना,चक्रधरपुर|

सुझाव तथा सिफारिश को अपनाने के बाद पैदावार कितनी मिली इसकी सूचना प्रयोगशाला को दें|

खाद एवं उर्वरक

मिट्टी में स्फुर एवं पोटास की कमी होने के कारण फसल की समुचित वृद्धि नहीं हो पाती है, जिससे उपज में कमी हो जाती है|

नेत्रजन, स्फुर एवं पोटास की कमी के लक्षण

नेत्रजन की कमी

पौधों की वृद्धि का रुक जाना, नीचे के पत्तों का हलके हरे रंग का होकर फिर फीके पीले रंग से लेकर भूरे रंग का होना|  बाद में पत्तों का झाड जाना| डंठल की संख्या में कमी|

स्फुर की कमी

पौधों का रंग गढा होना| पतों का लाल या बैगनी होकर झड़ जाना |

स्रोत- मिट्टी जाँच एवं खाद व्यवहार तकनीक, प्रसार शिक्षा निदेशालय, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची

तथ्य

-          हमारी कृषि दुनिया की सबसे पुरानी कृषि प्रणाली है|

-          भारत दुनिया का सबसे बड़ा फल (४१.५ टन) और नारियल (१३ अरब टन ) उत्पादक देश है|  हमारी गणना दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सब्जियों के उत्पादक के रूप में की जाती है|

-          दुनिया का सबसे बड़ा दलहन फसलें उगाने वाला देश भी भारत ही है|

-          सबसे पहले हमने ही कपास की संकर प्रजाति (एच -४) ईजाद की, जिसका क्षेय गुजरात कृषि विश्वविद्यालय को जाता है|

-          भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक (८८.२५ टन ) देश है|

-          हमारे यहाँ की जलवायु में अनोखी विविधता है यानि भारत में शुष्क और बर्फीला दोनों क्षेत्र हैं|

-          भारत दुनिया का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक (३०९.३१ मीट्रिक टन) देश के रूप में भी जाना जाता है|

-          हम भौगोलिक दृष्टि से सबसे ज्यादा क्षेत्रफ़ल में खेती करते हैं|

-          भारत में सबसे ज्यादा भैंसें (८.४२ मिलियन) हैं| बकरियों की दृष्टि से दूसरे, भेड़ों के लिहाज से तीसरे और पाल्ट्री की दृष्टि पे सातवें स्थान पर है|

१९९८-९९ के आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक (७४.७ मीट्रिक टन) देश है|

स्रोत: दैनिक समाचारपत्र

मिट्टी जाँच - क्यों, कब और कैसे


मिट्टी जाँच - क्यों, कब और कैसे
2.96551724138

Gautam Kumar Jan 04, 2018 09:23 AM

App Ko is ka pdf v rakhna chaia

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
Back to top

T612018/09/25 03:15:39.890817 GMT+0530

T622018/09/25 03:15:39.914986 GMT+0530

T632018/09/25 03:15:40.031303 GMT+0530

T642018/09/25 03:15:40.031794 GMT+0530

T12018/09/25 03:15:39.868072 GMT+0530

T22018/09/25 03:15:39.868271 GMT+0530

T32018/09/25 03:15:39.868417 GMT+0530

T42018/09/25 03:15:39.868559 GMT+0530

T52018/09/25 03:15:39.868649 GMT+0530

T62018/09/25 03:15:39.868724 GMT+0530

T72018/09/25 03:15:39.869532 GMT+0530

T82018/09/25 03:15:39.869729 GMT+0530

T92018/09/25 03:15:39.869950 GMT+0530

T102018/09/25 03:15:39.870185 GMT+0530

T112018/09/25 03:15:39.870233 GMT+0530

T122018/09/25 03:15:39.870329 GMT+0530