सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

गुलाब की खेती

इसमें गुलाब की खेती के बारे में जानकारी दी गयी है।

भूमिका

गुलाब अपनी उपयोगिताओं के कारण सभी पुष्पों में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। आमतौर पर गुलाब का पौधा ऊंचाई में 4-6फुट का होता है। तने में असमान कांटे लगे होते हैं। गुलाब की 5 पत्तियां मिली हुई होती है। बहुत मात्रा में मिलने वाला गुलाब का फूल गुलाबी रंग का होता है। गुलाब का फल अंडाकार होता है। इसका तना कांटेदार, पत्तियां बारी-बारी से घेरे में होती है। पत्तियों के किनारे दांतेदार होती है। फल मांसल बेरी की तरह होता है जिसे 'रोज हिप' कहते हैं। गुलाब का पुष्पवृन्त कोरिम्बोस, पेनीकुलेट या सोलिटरी होता है।

गुलाब एक भारतीय पुष्प है। पूरे भारत में गुलाब के पौधे पाए जाते हैं। गुलाब का वैज्ञानिक नाम रोजा हाइब्रिडा है। देशी गुलाब लाल रंग का होता है। परन्तु कलम करके कई रंगो के गुलाब उगाए जाते हैं। गुलाब एक ऐसा फूल है, जिसके बारे में सब जानते हैं। गुलाब का फूल दिखने में जितना अधिक सुन्दर होता है। उससे कहीं ज़्यादा उसमें औषधीय गुण होते हैं। यह सबसे पुराना सुगन्धित पुष्प है, जो मनुष्य के द्वारा उगाया जाता था। इसके विभिन्न प्रकार के सुन्दर फूल जो कि आर्कषक, आकृति, विभिन्न आकार, मन को लुभाने वाले रंगों और अपने विभिन्न उपयोगिताओं के कारण एक महत्त्वपूर्ण पुष्प माना जाता है।

गुलाब की उपज भूमि की उर्वरा शक्ति फसल की देखरेख एवं प्रजातियों पर निर्भर करती हैI फूलों का गुण हैं खिलना, खिल कर महकना, सुगंध बिखेरना, सौंदर्य देना और अपने देखने वाले को शांति प्रदान करना। फूलों की इस खूबसूरत दुनिया में गुलाब का एक ख़ास स्थान  है क्योंकि इसे सौंदर्य, सुगंध और खुशहाली  का प्रतीक  माना गया है। तभी तो इसे 'पुष्प सम्राट' की  संज्ञा दी गयी है और 'गुले-आप', यानी फूलों की रौनक भी कहा गया है। इस की भीनीभीनी मनमोहक सुगंध, सुन्दरता, रंगों की विविध किस्मों के कारण हर प्रकृति  प्रेमी इसे अपनाना चाहता है।

भारत में गुलाब हर जगह उगाया जाता है। बागबगीचों, खेतों, पार्कों, सरकारी व निजी इमारतों के अहातों में, यहाँ तक कि घरों की ग्रह-वाटिकाओं की क्यारियों और गमलों में भी गुलाब उगा कर उस का आनंद लिया जाता है। गुलाब पूरे उत्तर भारत में, खासकर राजस्थान में तथा बिहार और मध्य प्रदेश में जनवरी से अप्रैल तक खूब खिलता है। दक्षिण भारत में खासतौर पर बंगलौर में और महारास्ट्र और गुजरात में भी गुलाब की भरपूर खेती होती है।

गुलाब को घर पर गमले में खिड़की की मंजूषा में, रसोई बगीचे की क्यारी में, आँगन में उगाने के लिए पर्याप्त धूप का होना एक आवश्यक शर्त है। गुलाब को दिन में कम से कम छः से आठ घंटे की खुली धूप होना आवश्यक है। गुलाब के पौधों के लिए पर्याप्त जीवांशयुक्त मिट्टी अच्छी होती है। बहुत चिकनी मिट्टी इसके अनुकूल नहीं होती है। मिट्टी का जल निकास और वायुसंचार सुचारु होना चाहिए। भूमि में हल्की नमी बनी रहना चाहिए।

गुलाब को विश्वभर में पसंद किया जाता है। इस पर व्यापक अनुसंधान एवं विकास कार्य किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुलाब प्रेमियों के संगठन हैं, जो नई किस्मों के विकास, परिचिन्हन, मानकीकरण आदि करते हैं। इसके अनुसार पौधों की बनावट, ऊँचाई, फूलों के आकार आदि के आधार पर इन्हें निम्न वर्गों में बाँटा गया है।

गुलाब का व्यवसाय

गुलाब की खेती व्यावसायिक स्तर पर करके काफी लाभ कमाया जा सकता है। गुलाब की खेती बहुत पहले से पूरी दुनिया में की जाती हैI इसकी खेती पूरे भारतवर्ष में व्यवसायिक रूप से की जाती हैI गुलाब के फूल डाली सहित या कट फ्लावर तथा पंखुड़ी फ्लावर दोनों तरह के बाजार में व्यापारिक रूप से पाये जाते हैI गुलाब की खेती देश व् विदेश निर्यात करने के लिए दोनों ही रूप में बहुत महत्वपूर्ण हैI गुलाब को कट फ्लावर, गुलाब जल, गुलाब तेल, गुलकंद आदि के लिए उगाया जाता हैI गुलाब की खेती मुख्यतः कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्रा, बिहार, पश्चिम बंगाल ,गुजरात, हरियाणा, पंजाब, जम्मू एवं कश्मीर, मध्य प्रदेश, आंध्रा प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में अधिक की जाती हैI

फूल के हाट में गुलाब के गजरे खूब बिकते हैं। गुलाब की पंखुडियों और शक्कर से गुलकन्द बनाया जाता है। गुलाब जल और गुलाब इत्र के कुटीर उद्योग चलते है। उत्तर प्रदेश में कन्नौज, जौनपुर आदि में गुलाब के उत्पाद की उद्योगशाला चलती है। दक्षिण भारत में भी गुलाब के उत्पाद के उद्योग चलते हैं। दक्षिण भारत में गुलाब फूलों का खूब व्यापार होता है। मन्दिरों, मण्डपों, समारोहों, पूजा-स्थलों आदि स्थानों में गुलाब फूलों की भारी खपत होती है। यह अर्थिक लाभ का साधन है। वहाँ हजारों ग्रामीण युवा फूलों  को अपनी आय का माध्यम बना लेते हैं।

गुलाब की किस्में

भारत में उगाई जाने वाली गुलाब की परम्परागत किस्में हैं, जो देश के अलगअलग इलाकों में उगाई जाते हैं, विदेशों से भी अलगअलग किस्में मांगा कर उन का 'संकरण' (2 किस्मों के बीच क्रास) कर  के अनेक नई व उन्नत किस्में तैयार की गयी हैं, जो अब अपने देश में बहुत लोकप्रिय हैं।

गुलाब की विदेशी किस्में जर्मनी, जापान, फ्रास, इंग्लैण्ड, अमेरिका, आयरलैंड, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया से मंगाई गयी हैं। भारतीय गुलाब विशेषज्ञों ने देशी किस्मों में भी नयी विकसित 'संकर' (हाईब्रिड) किस्में जोड़ कर गुलाब की किस्मों की संख्या में वृद्धि की है। इस दिशा में दिल्ली स्थित भारती कृषि अनुसंधान संस्थान का अनुसंधान कार्य ख़ास उल्लेखनीय है। दक्षिण भारत में भारतीय बागबानी अनुसंधान संसथान, बंगलौर ने भी किस्मों के विकास और  वृद्धि में भरपूर कार्य किया है।

मात्र शौक और सजावट के लिये गुलाब का पौधा जब गमले में उगाया जाए तो किस्मों का चुनाव भी उसी के अनुसार किया जाना चाहिए। व्यावसायिक स्तर पर गुलाब की खेती करनी  हो तो वैसी ही किस्मों का चयन करें। इस बारे में प्राय: सभी बड़ी नर्सरियों में पूरी जानकारी मिल सकती है। दिल्ली में हों तो भारतीय कृषि अनुसंधान पूसा के पुष्प विज्ञान विभाग से उचित जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

वैसे तो विश्व भर में गुलाब की किस्मों की संख्या लगभग 20 हजार से अधिक है, जिन्हें विशेषज्ञों ने विभिन्न वर्गों में बांटा है लेकिन तक्तीकी तौर पर गुलाब के 5 मुख्य वर्ग हैं, जिन का फूलों के रंग, आकार, सुगंध और प्रयोग के अनुसार विभाजन किया गया है, जो इस प्रकार  है: हाईब्रिड टीज, फ्लोरीबंडा, पोलिएन्था वर्ग, लता वर्ग और मिनिएचर वर्ग।

हाईब्रिड टीज वर्ग

यह बड़े आकार के गुलाबों का एक महत्वपूर्ण वर्ग है, जिस में टहनी के ऊपर या सिरे पर एक ही फूल खिलता है, इस वर्ग की अधिकतर किस्में यूरोप और छीन के 'टी' गुलाबों के 'संकर' (क्रास) से तैयार की गयी है, इस वर्ग की भारतीय किस्में हैं : डा.होमी भाभा, चितवन, भीम, चित्रलेखा, चंद्बंदीकली, गुलजार, मिलिंद, मृणालिनी, रक्त्गंधा, सोमा, सुरभी, नूरजहाँ, मदहोश, डा. बैंजमन पाल आदि।

हाइब्रिड टी (एचटी),इस वर्ग के पौधे ब़ड़े, ऊँचे व तेजी से ब़ढ़ने वाले होते हैं। इस वर्ग की प्रमुख किस्में अर्जुन, जवाहर, रजनी, रक्तगंधा, सिद्धार्थ, सुकन्या आदि हैं। इनके पुष्प शाखा के सिरे पर ब़ड़े आकर्षक लगते हैं। एक शाखा के सिरे पर एक ही फूल आता है।

फ्लोरीबंडा वर्ग

यह हाईब्रिड टीज और पोलिएन्था गुलाबों के संकर (मिलन) से विकसित किये गए गुलाबों का वर्ग है। इस के फूल उपेक्षाकृत छोटे किन्तु गुच्छों में खिलतें हैं और आकार व वजन में बढ़िया होते हैं। इस वर्ग के फूल गृहवाटिका  की क्यारियों और गमलों में ज्यादा देखने को मिलते हैं। इस किस्म की विशेषता है कि इन के पौधे कम जगह में ही उगा कर पर्याप्त फूल प्राप्त किये जा सकते हैं। ठन्डे मौसम में जब दूसरे  गुलाब नहीं खिलते हैं, इस वर्ग के फूल दिल्ली सहित उत्तर भारत के सभी राज्यों में खूब खिलते हैं। इस की मुख्य किस्में हैं : दिल्ली, प्रिन्सिस, बंजारन, करिश्मा, चन्द्रमा, चित्तचोर, दीपिका, कविता, जन्तार्मंतर, सदाबहार, लहर, सूर्यकिरण, समर, बहिश्त, आइसबर्ग, शबनम आदि।

फ्लोरीबंडा, इसके पौधे मध्यम लंबाई वाले होते हैं, इनमें फूल भी मध्यम आकार के और कई फूल एक साथ एक ही शाखा पर लगते हैं। इनके फूलों में पंखुड़ियों की संख्या हाइब्रिड टी के फूलों की अपेक्षा कम होती हैं। इस वर्ग की प्रमुख किस्में बंजारन, आम्रपाली, ज्वाला, रांगोली, सुषमा आदि हैं।

ग्रेन्डीफ्लोरा

यह उपरोक्त दोनों किस्मों के संयोग से तैयार किया गया है। गुलदानों में इस वर्ग के फूलों को अधिक पसंद किया जाता है। बड़े स्तर पर खेती के लिए इस वर्ग का अधिक उपयोग किया जाता है। गोल्ड स्पॉट, मांटेजुआ, क्वीन एलिजाबेथ इस वर्ग की प्रचलित किस्में हैं।

पॉलिएन्था

इस वर्ग के पौधों को घरेलू बगीचों व गमलों में लगाने के लिए पसंद किया जाता है। क्योंकि इनमें मध्यम आकार के फूल अधिक संख्या में साल में अधिक समय तक आते रहते हैं। इस वर्ग की प्रमुख किस्में स्वाति, इको, अंजनी आदि हैं।

मिनिएचर वर्ग

इस के पौधे, पट्टियां  और फूल सभी छोटे  होते हैं। पौधे कलामों द्वार उगे जाते हैं। यह गमलों, पतियों आदि में उगाने की उपयुक्त किस्म है। गृहवाटिका की क्यारियों के चारों ओर बार्डर लगाने के लिये भी उपयुक्त है। गुलाब के फूल खिलने का मौसम (अक्टूबर से मार्च) में इस किस्म के गुलाब खूब खिलते हैं। विभिन्न रंगों में ये गुच्छों और डंडियों पर अलग भी उगते हैं। बेबी डार्लिंग, बेबी गोल्ड, स्टार, ग्रीन इसे, ब्यूटी सीकृत, ईस्टर मार्निंग, संड्रीलो आदि इस की लोकप्रिय किस्में हैं।

मिनीएचर,जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है, ये कम लंबाई के छोटे बौने पौधे होते हैं। इनकी पत्तियों व फूलों का आकार छोटा होने के कारण इन्हें बेबी गुलाब भी कहते हैं। ये छोटे किंतु संख्या में बहुत अधिक लगते हैं। इन्हें ब़ड़े शहरों में बंगलों, फ्लैटों आदि में छोटे गमलों में लगाया जाना उपयुक्त रहता है, परंतु धूप की आवश्यकता अन्य गुलाबों के समान छः से आठ घंटे आवश्यक है। इस वर्ग की प्रमुख किस्में ड्वार्फ किंग, बेबी डार्लिंग, क्रीकी, रोज मेरिन, सिल्वर टिप्स आदि हैं।

लता वर्ग  (क्लैंग्बिंग एंड रैंबलिंग रोज)

इस वर्ग के गुलाब के पौधे लताओं के रोप में बढ़ते हैं और पैराबोला पर या दीवार का सहारा पा कर बढ़ते हैं। ये साल में केवल एक बार खिलते हैं।

ये गुलाब की बेल (लता) वाली किस्में हैं। इन्हें मेहराब या अन्य किसी सहारे के साथ चढ़ाया जा सकता है। इनमें फूल एक से तीन (क्लाइंबर) व गुच्छों (रेम्बलर) में लगते हैं। इस की मुख्य किस्में है सदाबहार, समर स्नो, डा.होमी भाभा, मार्शल नील, दिल्ली वाईट पर्ल आदि।

क्लाइंबर वर्ग की प्रचलित किस्में गोल्डन शावर, कॉकटेल, रायल गोल्ड और रेम्बलर वर्ग की एलवटाइन, एक्सेलसा, डोराथी पार्किंस आदि हैं।

गुलाब में जितने रंगों के फूल देखने को मिलते हैं उतने शायद किसी दूसरे फूल में नहीं। यदि सफ़ेद गुलाब हैं तो पीले, लाल, नारंगीलाल, रक्त्लाल, गुलाबी लेवेंडर रंग के दोरंगे, तींरंगे और यहाँ तक कि अब तो नीले और काले रंग के गुलाब भी पाए जाते है।

गुलाब की खेती के लिए जलवायु और भूमि

गुलाब की खेती उत्तर एवं दक्षिण भारत के मैदानी एवं पहाड़ी क्षेत्रों में जाड़े के दिनों में की जाती हैI दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री सेंटीग्रेट तथा रात का तापमान 12 से 14 डिग्री सेंटीग्रेट उत्तम माना जाता हैI गुलाब की खेती हेतु दोमट मिट्टी तथा अधिक कार्बनिक पदार्थ वाली होनी चाहिएI जिसका पी.एच. मान 5.3 से 6.5 तक उपयुक्त माना जाता हैI

गुलाब की उन्नतशील प्रजातियां

गुलाब की लगभग 6 प्रकार की प्रजातियां पाई जाती है प्रथम संकर प्रजातियां जिसमे कि क्रिमसन ग्लोरी, मिस्टर लिंकन, लवजान, अफकैनेडी, जवाहर, प्रसिडेंट, राधाकृषणन, फर्स्ट लव , पूजा, सोनिया, गंगा, टाटा सैंटानरी, आर्किड, सुपर स्टार, अमेरिकन हेरिटेज आदि हैI दूसरे प्रकार कि पॉलीएन्था इसमे अंजनी, रश्मी, नर्तकी, प्रीत एवं स्वाती आदिI तीसरे प्रकार कि फ़लोरीबण्डा जैसी कि बंजारन, देहली प्रिंसेज, डिम्पल, चन्द्रमा, सदाबहार, सोनोरा, नीलाम्बरी, करिश्मा सूर्यकिरण आदिI चौथे प्रकार कि गैंडीफलोरा इसमे क्वींस, मांटेजुमा आदिI पांचवे प्रकार कि मिनीपेचर ब्यूटी क्रिकेट, रेड फ्लस, पुसकला, बेबीगोल्ड स्टार, सिल्वर टिप्स आदि और अंत में छठवे प्रकार कि लता गुलाब इसमे काक्लेट, ब्लैक बॉय, लैंड मार्क, पिंक मेराडोन, मेरीकलनील आदि पाई जाती हैI

गुलाब के खेतों की तैयारी

सुंदरता की दृष्टि से औपचारिक लेआउट करके खेत को क्यारियों  में बाँट लेते है क्यारियों  की लम्बाई चौड़ाई 5 मीटर लम्बी 2 मीटर चौड़ी रखते हैI दो क्यारियों  के बीच में आधा मीटर स्थान छोड़ना चाहिएI क्यारियों  को अप्रैल मई में एक मीटर की गुड़ाई एक मीटर की गहराई तक खोदे और 15 से 20 दिन तक खुला छोड़ देना चाहिएI क्यारियों  में 30 सेंटीमीटर तक सूखी पत्तियो को डालकर खोदी गयी मिट्टी से क्यारियों  को बंद कर देना चाहिए साथ ही गोबर की सड़ी खाद एक महीने पहले क्यारी में डालना चाहिए इसके बाद क्यारियों  को पानी से भर देना चाहिए साथ ही दीमक के बचाव के लिए फ़ालीडाल पाउडर या कार्बोफ्यूरान 3 जी. का प्रयोग करेI लगभग 10 से 15 दिन बाद ओठ आने पर इन्ही क्यारियों  में कतार बनाते हुए पौधे व् लाइन से लाइन की दूरी 30 गुने 60 सेंटीमीटर रखी जाती हैI इस दूरी पर पौधे लगाने पर फूलों  की डंडी लम्बी व् कटाई करने में आसानी रहती हैI

गुलाब की खेती करने के लिए पौध तैयार करना

आमतौर पर जुलाई-अगस्त में मानसून आते ही  गुलाब लगाया जाता है। सितम्बर-अक्टूबर में तो यह भरपूर उगाया जाता है। गुलाब लगाने की सम्पूर्ण विधि और प्रक्रिया अपनाई जाए तो यह फूल मार्च तक अपने सौंदर्य, सुगंध और रंगों से न केवल हमें सम्मोहित करता है बल्कि लाभ भी देता है।

जंगली गुलाब के ऊपर टी बडिंग द्वारा इसकी पौध तैयार होती हैI जंगली गुलाब की कलम जून-जुलाई में क्यारियों  में लगभग 15 सेंटीमीटर की दूरी पर लगा दी जाती हैI नवम्बर से दिसंबर तक इन कलम में टहनियां निकल आती है इन पर से कांटे चाकू से अलग कर दिए जाते हैI जनवरी में अच्छे किस्म के गुलाब से टहनी लेकर टी आकार कालिका निकालकर कर जंगली गुलाब की ऊपर टी में लगाकर पालीथीन से कसकर बाँध देते हैI ज्यो-ज्यो तापमान बढता है तभी इनमे टहनी निकल आती हैI जुलाई अगस्त में रोपाई के लिए पौध तैयार हो जाती हैI

पौधशाला से सावधानीपूर्वक पौध खोदकर सितम्बर-अक्टूबर तक उत्तर भारत में पौध की रोपाई करनी चाहिएI रोपाई करते समय ध्यान दे कि पिंडी से घास फूस हटाकर भूमि की सतह से 15 सेंटीमीटर की ऊंचाई पर पौधों की रोपाई करनी चाहिएI पौध लगाने के बाद तुरंत सिंचाई कर देना चाहिएI

गुलाब की खेती में खाद और उर्वरकों की आवश्यकता

उत्तम कोटि के फूलों  की पैदावार लेने के हेतु प्रूनिंग के बाद प्रति पौधा 10 किलोग्राम गोबर की सड़ी खाद मिट्टी में मिलाकर सिंचाई करनी चाहिएI खाद देने के एक सप्ताह बाद जब नई कोपल फूटने लगे तो 200 ग्राम नीम की खली 100 ग्राम हड्डी का चूरा तथा रासायनिक खाद का मिश्रण 50 ग्राम प्रति पौधा देना चाहिएI मिश्रण का अनुपात एक अनुपात दो अनुपात एक मतलब यूरिया, सुपर फास्फेट, पोटाश का होना चाहिएI

गुलाब की देखभाल

गुलाब के लिए सिंचाई का प्रबंधन उत्तम होना चाहिएI आवश्यकतानुसार गर्मी में 5 से 7 दिनों के बाद तथा सर्दी में 10 से 12 दिनों के बाद सिंचाई करते रहना चाहिएI

उत्तर प्रदेश के मैदानी भागो में कटाई-छटाई हेतु अक्टूबर का दूसरा सप्ताह सर्वोत्तम होता है लेकिन उस समय वर्षा नहीं होनी चाहिएI पौधे में तीन से पांच मुख्य टहनियों को 30 से 40 सेंटीमीटर रखकर कटाई की जाती हैI यह ध्यान रखना चाहिए कि जहाँ आँख हो वहाँ से 5 सेंटीमीटर ऊपर से कटाई करनी चाहिएI कटे हुए भाग को कवकनाशी दवाओ से जैसे कि कापर आक्सीक्लोराइड, कार्बेन्डाजिम, ब्रोडोमिश्रण या चौबटिया पेस्ट का लेप लगना आवश्यक होता हैI

गमलों के लिये मिट्टी का मिश्रण कुछ इस तरह से रखें। 2 भाग खेत की मिटटी, एक भाग खूब सड़ी गोबर की खाद, एक भाग में सूखी हरी पत्ते की खाद (लीफ मॉल्ड) और लकड़ी  का बुरादा मिला लें। सम्भव हो तो कुछ मात्रा में हड्डी का चुरा भी मिला लें। इस से पौधों और जड़ों का अच्छा विकास होता है।

याद रहे कि गमलों में पौधों का रखरखाव वैसा ही हो, जैसी कि क्यारियों में होता है, उन की उचित निराईगुडाई में होता है। मसलन, पौधों को पूरी खुराक मिले, उन की उचित निराईगुडाई और सिंचाई हो, कीट व्याधियों से बचाव हो, गमलों के पौधों को मौसम के अनुसार समय-समय पर पानी दिया जाए और उन की कटाईछंटाई  भी की जाए। सप्ताह में एक बार गमलों की दिशा भी अवश्य बदलें और उन के तले से पानी निकलने का चित्र भी उचित रूप से खुला रखें।

गुलाब में माहू, दीमक एवं सल्क कीट लगते हैI माहू तथा सल्क कीट के दिखाई देने पर तुरंत डाई मिथोएट 1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में या मोनोक्रोटोफास 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर 2 -3 छिड़काव करना चाहिएI दीमक के नियंत्रण हेतु सिंचाई करनी चाहिए तथा फोरेट 10 जी. 3 से 4 ग्राम या फ़ालीडाल 2% धुल 10 से 15 ग्राम प्रति पौधा गुड़ाई करके भूमि में अच्छी तरह मिला देना चाहिएI

गुलाब के फूलों की कटाई

सफ़ेद, लाल, गुलाबी रंग के फूलों  की अध् खुली पंखुड़ियों में जब ऊपर की पंखुड़ी नीचे की ओर मुड़ना शुरू हो जायें  तब फूल काटना चाहिएI फूलों  को काटते समय एक या दो पत्तियां टहनी पर छोड़ देना चाहिए जिससे पौधों की वहाँ से बढ़वार होने में कोइ परेशानी न हो सकेI फूलों  की कटाई करते समय किसी बर्तन में पानी साथ में रखना चाहिए जिससे फूलों  को काटकर पानी तुरंत रखा जा सकेI बर्तन में पानी कम से कम 10 सेंटीमीटर गहरा अवश्य होना चाहिए जिससे फूलों  की डंडी पानी में डूबी रहे पानी में प्रिजर्वेटिव भी मिलाते हैI फूलों  को कम से कम 3 घंटे पानी में रखने के बाद ग्रेडिंग के लिए निकालना चाहिएI यदि ग्रेडिंग देर से करनी हो तो फूलों  को 1 से 3 डिग्रीसेंटीग्रेट तापक्रम पर कोल्ड स्टोरेज रखना चाहिए जिससे कि फूलों  की गुणवत्ता अच्छी रह सकेI

गुलाब के पौधे गृहवाटिका में मिटटी के गमलों में आसानी से उगे जा सकते हैं, जो कम से कम 30 सेंटीमीटर घेरे के और उतने ही गहरे हों। मिनिएचर गुलाब के लिये 20 से 25 सेंटीमीटर आकार के गमले पर्याप्त हैं। गमलों को स्वच्छ  वातावरण में रखा जाए। जैसे ही नयी कोपलें और शाखाएं अंकुरित होने लगें, उन्हें  ही सूरज की रोशनी में रखें। दिन भर इन्हें 4-5 घंटे धूप अवश्य मिलनी चाहिए। हाँ, गरमी की कड़कती धूप में 1-2 घंटे ही पर्याप्त हैं।

जब जहाँ भी चारों ओर गुलाब खिलता है तो सब ओर इस की सुरभि व्याप्त हो जाती है। फरवरी-मार्च में गुलाब अपने पूर्ण यौवन और बहार पर होता है। आओ, इसे अपनी गृहवाटिका में उगायें और इस के सौंदर्य और महक का आनंद लें।

गुलाब की खेती के लिए आवश्यक सावधानियां

  • बरसात के मौसम में गमलों और क्यारियों में बहुत देर तक पानी भरा न रहने दें।
  • हर साल, पौधों की छंटाई कर, गमले के ऊपर की 2-3 इंच मिट्टी निकाल कर उस में उतनी ही गोबर की सड़ी खाद भर दें।
  • हर 2-3 साल के बाद सम्पूर्ण पौधे को मिट्टी सहित नए गमले में ट्रांसफर कर दें। चाहें तो गमले की मिट्टी बदल कर ताजा मिश्रण भरें।
  • यह प्रक्रिया सितम्बर-अक्टूबर में करें।

स्रोत: ज़ेवियर समाज सेवा संस्थान, दैनिक समाचार, विकिपीडिया।

3.01869158879

Sandeep vishwakma Feb 13, 2018 10:10 PM

Kripya Mujhe Gulab Ki Kalam kahan se melgi

Senior badrel Feb 03, 2018 10:02 AM

गुलाब की कलमें कहां से प्राप्त की जा सकती हैं

Shubham choudhary Jan 19, 2018 04:06 PM

Mere pas gulab ki keti h 10 bigha jamin me. Mujhe koi karidne wala nhi mil rha h me un ka kya karu Moradabad(u.p)

rajesh Dec 30, 2017 08:13 PM

मैं नई खेती करना चाहता हूं कृपया मुझे गुलाब की कलम कहा पर मिल सकती है

शिव ओम Dec 19, 2017 05:23 PM

मैंने हाल ही में गुलाब लगाया है कृपया मार्गXर्शX प्रदान करें

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
Back to top

T612018/02/21 05:04:46.886114 GMT+0530

T622018/02/21 05:04:46.914408 GMT+0530

T632018/02/21 05:04:47.017804 GMT+0530

T642018/02/21 05:04:47.018283 GMT+0530

T12018/02/21 05:04:46.863972 GMT+0530

T22018/02/21 05:04:46.864178 GMT+0530

T32018/02/21 05:04:46.864343 GMT+0530

T42018/02/21 05:04:46.864487 GMT+0530

T52018/02/21 05:04:46.864575 GMT+0530

T62018/02/21 05:04:46.864648 GMT+0530

T72018/02/21 05:04:46.865398 GMT+0530

T82018/02/21 05:04:46.865582 GMT+0530

T92018/02/21 05:04:46.865790 GMT+0530

T102018/02/21 05:04:46.865998 GMT+0530

T112018/02/21 05:04:46.866044 GMT+0530

T122018/02/21 05:04:46.866137 GMT+0530