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कृषि विपणन

इस पृष्ठ में कृषि विपणन से जुड़ी जानकारी है I

क्या करें ?

  • किसान अपनी उपज की कीमत की जानकारी एगमार्क नेट वेबसाइट एगमार्कनेट पर या किसान काल सेंटर अथवा एसएमएस के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।
  • अपनी आवश्यकता अनुसार उपलब्ध एसएमएस को देखें और सूचना प्राप्त करें।
  • फसल की कटाई और गहाई उचित समय पर की जानी चाहिए।
  • उचित कीमत के लिए बिक्री से पहले उचित ग्रेडिंग, पैकिंग और लेबलिंग की जानी चाहिए।
  • उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए उचित बाजार/मंडी में बिक्री के लिए जाएं।
  • अधिकतम लाभ के लिए उपज का भंडारण करके बेमौसम में बिक्री करनी चाहिए।
  • मजबूरन बिक्री से बचना चाहिए।
  • बेहतर विपणन सुविधाओं के लिए किसान समूह में सहकारी विपणन समितियाँ एफपीओ गठित कर सकते हैं।
  • विपणन समितियां खुदरा और थोक दुकानें खोल सकतीं हैं।
  • मजबूरन बिक्री से बचने के लिए किसान उपज के भण्डारण के लिए शीत भंडारण और गोदाम बना सकते हैं।

आईएमएएम की एएमआई अपयोजना

भंडारण इंफ्रास्ट्रक्चर सहित कृषि विपणन इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा एकीकृत कृषि विपणन योजना (आईएसएएम) की एक पूंजी निवेश सब्सिडी उपयोजना कृषि विपणन इंफ्रास्ट्रक्चर (एमआई) का क्रियान्वयन किया जा रहा है। पूर्व की दो योजनाओं अर्थात्

(i) 01.04.2001 से लागू की गई ग्रामीण भंडारण योजना (जीबीवाई) और

(ii)20.10.2004 से लागू की गई कृषि विपणन इंफ्रास्ट्रक्चर, श्रेणीकरण एवं मानकीकरण के सुदृढ़ीकरण/विकास की योजना (एएमआईजीएस) को दिनांक 01.04.2014 से कृषि विपणन इंफ्रास्ट्रक्चर (एएमआई) नामक योजना में आमेलित कर दिया गया है। आईएसएएम की एएमआई उपयोजना को 12वीं योजना अवधि (2012-17) के लिए स्वकृति प्रदान की गई थी। वर्तमान में यह योजना किसी भी श्रेणी के लाभार्थी के लिए उपलब्ध नहीं है।

इसके अतिरिक्त, देश में भंडारण परियोजनाओं सहित अतिरिक्त कृषि विपणन इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं सृजित करने हेतु एएमआई उपयोजना को 14वें वित्त आयोग की सहसमाप्य अवधि तक के लिए पुनः शुरू करने हेतु स्वीकृत किया है।

किससे संपर्क करें

उप कृषि विपणन सलाहकार (ए.एम.आई.), विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय (डी.एम.आई.), सी.जी.ओ. कॉम्पलैक्स, एनएच-IV, फरीदाबाद (हरियाणा) दूरभाषः 0129-2434348, ईमेल-rgs.agri@nic.in

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम)

कृषि विपणन क्षेत्र में प्रवेशक सुधार के उद्देश्य से और किसानों को अधिकतम लाभ देने के लिए पूरे देश में कृषि जिन्सों की ऑन-लाइन विपणन को प्रोत्साहन देने के लिए भारत सरकार ने दिनांक 01.07.2015 को राष्ट्रीय कृषि बाज़ार कार्यान्वयन के लिए एक योजना अनुमोदित की है। इस योजना के अंतर्गत सभी 585 नियमित बाजारों में यथोचित सामान्यक ई-मार्केट प्लेटफार्म उपलब्ध कराया गया है, जिससे ऑन-लाइन ट्रेडिंग करने, ई–परमिट जारी करने और ई-भुगतान आदि करने के साथ-साथ बाजार के संपूर्ण कार्य के डिजिटलाइजेशन को प्रोत्साहित किया जा सके। इसके साथ-साथ सूचना विषमता को दूर करने, लेन-देन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और पूरे देश के बाजारों में पहुंच आसान बनाने में इससे सहायता मिलेगी। यह किसानों को वास्त्विक लाभ देने के लिए आवश्यक होगा। राष्ट्रीय कृषि विपणन (एनएएम) दिशानिर्देश शीघ्र ही 14.04.2016 को 8 राज्यों की 21 मंडियों में शुरू किया गया है।

ई-नाम एकीकृत मंडियों का 16 राज्यों और 2 संघ शासित प्रदेशों में विस्तार

राज्य

 

एकीकृत मंडियां

आन्ध्र प्रदेश

22

चंडीगढ़

1

छत्तीसगढ़

14

गुजरात

79

हरियाणा

54

हिमाचल प्रदेश

19

झारखण्ड

19

मध्य प्रदेश

58

महाराष्ट्र

60

ओडिशा

10

पुडुचेरी

02

पंजाब

19

राजस्थान

25

तमिलनाडू

23

तेलंगाना

47

उत्तर प्रदेश

100

उत्तराखण्ड

16

पश्चिम बंगाल

17

कुल

585

 

अधिक जानकारी के लिए कृपया लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी), नई दिल्ली ( ई-मेल आईडी nam@sfac.in) को संपर्क करें। योजनाओं की विस्तृत जानकारी ई-नाम(नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) के वेबसाइट पर उपलब्ध है।

किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ)

एफपीओ में किसान केसे सम्मिलित हों

किसानों का एक समूह जो वास्तव में कृषि उत्पादन कार्य में लगा हो और जो कृषि व्यवसायिक गतिविधियां चलाने में एक जैसी धारणा रखते हों, एक गाँव अथवा कई गाँवों को सम्मिलित कर एक समूह बना सकते हैं और संगत कम्पनी अधिनियम के अधीन एक किसान उत्पादन कम्पनी के पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।

एफपीओ के गठन से किसान को क्या लाभ होंगे

(i) यह एक प्रभावी संगठन होने के कारण एफपीओ के सदस्य के रूप में किसानों को बेहतर सौदेबाजी करने की शक्ति देगी जिससे उन्हें जिंसों को प्रतिस्पर्धात्मक मूल्यों पर खरीदने या बेचने का उचित लाभ मिल सकेगा।

(ii) बेहतर विपणन सुअवसरों के लिए कृषि उत्पादों का एकत्रीकरण। बहुलता में व्यापार करने से प्रसंस्करण, भण्डारण, परिवहन इत्यादि मदों में होने वाले संयुक्त खर्चे से किसानों को बचत ।

(iii) एफपीओ मूल्य संर्वधन के लिए छंटाई/ग्रेडिंग, पैकिंग, प्राथमिक प्रसंस्करण इत्यादि जैसी गतिविधियां शुरू कर सकता है जिससे किसानों के उत्पाद को उच्चतर मूल्य मिल सकता है।

(iv) एफपीओ के गठन से ग्रीन हाउस, कृषि मशीनीकरण, शीत भण्डारण, कृषि प्रसंस्करण इत्यादि जैसे कटाई पूर्व और कटाई पश्चात संसाधनों के उपयोग में सुविधा।

(v) एफपीओ आदान भण्डारों, कस्टम केन्द्रों इत्यादि को शुरू कर अपनी व्यवसायिक गतिविधियों को विस्तारित कर सकते हैं। जिससे इसके सदस्य किसान आदानों और सेवाओं का उपयोग रियायती दरों पर ले सकते हैं।

एफपीओ में आवेदन करने के लिए सम्पर्क सूत्र

आमतौर पर कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग द्वारा राज्यों में कार्यान्वित विभिन्न केन्द्रीय क्षेत्र योजनाओं के अंतर्गत एफपीओ को प्रोत्साहित किया जाता है। एफपीओ गठित करने के इच्छुक किसानों को विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित विभाग/लघु कृषक कृषि व्यवसाय संगठन के निदेशक (ई-मेलः sfac@nic.in) से संपर्क कर सकते हैं।

सएफएसी देश के 11 राज्यों में एनएफएसएम के तहत दालों और बाजरा के मूल्य विकास के लिए 145 एफपीओ को बढ़ावा दे रहा है। एसएफएसी के मानदंड के अनुसार, रुपये 62.75 लाख की राशि प्रति एफपीओ फार्मूलेशन, पंजीकरण, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, प्रबंधन और विपणन और मिनी दाल मिल की स्थापना के लिए प्रदान किया जाता है।

 

स्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार

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