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जैव विविधता नियम, 2004

इस भाग में जैव विविधता नियम के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है

भूमिका

जैव विविधता पृथ्वी पर सारे जैव वैदिध्य को समावृत करती है। भारत विश्व के 12 मेगा , विविधतापूर्ण देशों में से एक है। दुनिया में 2.50% भु-क्षेत्र वाला भारत, वैश्विक प्रजातियों में से 7.5% का प्रतिनिधित्व करता है। भारत पारंपारिक और समसामयिक ज्ञान की संकेतिक एवं अनौपचारिक दोनों पद्धतियों में धनी है।

जैव विविधता (1992) के संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन में भारत एक पक्षकार है। राज्यों का अपने जैव संसाधनों पर सम्प्रभु अधिकारों का संज्ञान करते हुए, कन्वेंशन यह चाहता है कि पक्षकार अपने राज्य के कानून तथा आपस में शर्तों का अनुपालन करते हुए अन्य पक्षकारों को अनुवांशिक संसाधनों की पहुँच के लिए अवसर प्रदान करें (जैविक विविधता कन्वेंशन संसाधनों की पहुंच के लिए अवसर प्रदान करें (जैविक विविधता कन्वेंशन के 3 तथा 15 अनुच्छेद)। जैव विविधता कन्वेंशन के अनुच्छेद 8 (जे) स्थानीय तथा देशीय समुदायों के योगदानों और पारंपरिक जानकारी, उपयोजन तथा नव परिवर्तनों के उपयोग द्वारा उदयीमान लोगों की ले हितों में साम्यापूर्ण हिस्सा बंटाने का प्रावधान भी करता है।

जैव विविधता बहु विद्या- विशेष विषय है, जिसके कार्य व कार्यकलाप अनेक है। इसके साझेदार केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय स्वाशासित संगठन के संस्थान, उद्योग आदि हैं। भारत की प्रमुख चुनौतियों, यह भी एक है कि जैव विविधता कन्वेंशन में प्रस्तावित साम्यापूर्ण हिस्सा बंटाने के लक्ष्यों को नियमबद्ध बनाए।

साझेदारों के साथ विस्तृत एवं गहरी सलाह-प्रक्रिया को अपनाने के बाद, केंद्र सरकार ने जैव विविधता अधिनियम 2002 को पारित किया है जिसके प्रमुख उद्देश्य निम्न प्रकार हैं :

देश के जैव संसाधनों की पहुंच को नियमित करें, ताकि जैविक संसाधनों के उपयोग से संप्राप्त लाभों का साम्यापूर्ण हिस्सा तथा जैव संसाधनों से संबंधित संबद्ध ज्ञान भी प्राप्त कर सकें।

जैव विविधता की संरक्षा तथा पोषणीय उपयोग भी कर सकें।

जैव विविधता से संबंधित स्थानीय समुदायों की जानकारी का आदर व संरक्षा करें।

स्थानीय लोगों को जैव संसाधनों के संरक्षक एंव तत्सम्बन्धी ज्ञान तथा सूचना के संवर्धकों के रूप में स्वीकृत करते हुए उन्हें तत्सम्बन्धी लाभों का साम्यापूर्ण हिस्सा संप्राप्त करावें।

विनाश की ओर जानेवाली प्रजातियों का संरक्षण एवं पुनर्वास।

समितियों के गठन के द्वारा जैव विविधता अधिनियम के कार्यान्वयन में राज्य सरकारी संस्थाओं का भाग लेना।

जैव विविधता अधिनियम 2002

जैव विविधता के संरक्षण, उसके अवयवों के पोषणीय उपयोग और जैव संसाधनों और ज्ञान के उपयोग से अदभुत फायदों में उचित और साम्यापूर्ण हिस्सा बंटाने और उससे संबंधित या उसके अनूशंगिक विषयों का उपबंध करने के लिए अधिनियम;

भारत जैव विविधता और उससे संबंधित सहबद्ध पारंपरिक और समसामयिक ज्ञान पद्धति में धनी है;

और भारत 5 जून, 1992 को रियो दि जेनेरो में हस्ताक्षर किए गए जैव विवधता से संबंधित संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन में एक पक्षकार है;

और उक्त कन्वेंशन 29 दिसंबर, 1993 को प्रवृत हुआ;

और उक्त कन्वेंशन ने राज्यों के अपने जैव संसाधनों पर सम्प्रभु अधिकारों की पुष्टि की है;

और उक्त कन्वेंशन का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण, इसके अवयवों का पोषणीय उपयोग और अनुवांशिक संसाधनों के उपयोग से अदभुत फायदों में साम्यापूर्ण हिस्सा बंटाना है;

और अनुवांशिक संसाधनों के संरक्षण, पोषणीय उपयोग और उनके उपयोग से अदभुत फायदों में साम्यापूर्ण हिस्सा बंटाने के लिए उपबंध करना और उक्त कन्वेंशन को प्रभावी करना आवश्यक समझा गया है;

भारत गणराज्य के तिरपनवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-

प्रारंभिक

संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ

  1. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम जैव विविधता अधिनियम, 2002 है।
  2. इसका  सम्पूर्ण भारत में है।
  3. यह उस तारीख को प्रवृत होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करें:

परंतु इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और ऐसे किसी उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का उस उपबंध के प्रवर्तन में आने के प्रति निर्देश के रूप अर्थ लगाया जाएगा।

परिभाषाएँ

2- इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,

क) “फायदे के दावेदार” से जैव संसाधनों, उनके उपोत्पादों के संरक्षक, ऐसे जैव संसाधनों के उपयोग, ऐसे उपयोग और उपयोजन से  नवपरिवर्तनों तथा व्यवहारों से संबंधित ज्ञान और जानकारी के सर्जक और धारक अभिप्रेत है;

ख) “जैव विविधता” से सभी संसाधनों से सप्राण जीवों के बीच परिवर्तनशीलता और परिस्थ्तिक जटिलताएँ, जिनके वे भाग हैं, अभिप्रेत हैं और इसके अंतर्गत प्रजातियों में या प्रजातियों और पारिस्थितिक प्रणालियों में विविधता भी है:

ग) “जैव संसाधनों” से पौधे, जीव-जन्तु और सूक्ष्म जीव या उनके भाग, वास्तविक या संभावित उपयोग या मूल्य सहित उनके आनुवांशिक पदार्थ और उपोत्पाद मूल्यवर्धित उत्पादों को छोड़कर अभिप्रेत है किन्तु इसके अंतर्गत मानव अनुवांशिक उत्पादों नहीं है;

घ) “जैव सर्वेक्षण और जैविक उपयोग” से किसी प्रयोजन के लिए जैव संसाधनों की प्रजातियों और उप्प्रजतियों, जीन, अवयवों और सत्व का सर्वेक्षण या संग्रहण अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत वर्णन, आविष्कारक और जैव आमापन भी है;

ङ) “अध्यक्ष” से यथास्थिति, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण या राज्य जैव बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है;

च) “वाणिज्यिक उपयोग” से वाणिज्य उपयोग के लिए जैसे अनुवांशिक व्यवधान के माध्यम से फसल और पशुधन में सुधार करने के लिए प्रयुक्त औषधि, औद्योगिक किण्वक, खाद्य सुगंध, सुवास, प्रसाधन, पासीकारक, तैलराल, रंग, सत्ता, और जीन, वानीज्यिक उपयोग के लिए जैव संसाधनों का अंतिम उपयोग अभिप्रेत है, किन्तु इसके अंतर्गत किसी कृषि, बागवानी, कूक्कूट पालन, दुग्ध उद्योग, पशुपालन या  मधुमक्खी पालन में उपयोग में आने वाला पारंपरिक प्रजनन या परंपरागत पद्धतियों नहीं हैं।

छ) उचित और साम्यापूर्ण फायदों में हिस्सा बंटाना” से धारा 21 के अधीन राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा अवधारित फायदों में हिस्सा बंटाना अभिप्रेत है;

ज) “स्थानीय निकायों” से संविधान के अनुच्छेद 243 (ख) के खंड (1) और अनुच्छेद 243 (थ) के खंड (1) के अंतर्गत पंचायतें और नगर – पालिकाएं, चाहे उनका कोई नाम हो, और पंचायतों या नगर-पालिकाओं के अभाव में संविधान के किसी अन्य उपबंध या किसी केन्द्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम के अधीन गठित स्वशासी संस्थाएँ अभिप्रेत हैं;

झ) “सदस्य” से राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण या राज्य जैव विविधता बोर्ड सदस्य अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत अध्यक्ष भी हैं;

ञ) “राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण” से धारा 8 के अधीन स्थापित राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण अभिप्रेत हैं;

ट) “विहित” से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

ठ) “विनिमय” से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं;

ड) “अनुसंधान” से किसी जैव संसाधन का अध्ययन या क्रमबद्ध अन्वेषण या उसका प्रौद्योगिकीय उपयोजन अभिप्रेत है जो जैव प्रणालियों, सप्राण जीवों या किसी उपयोग के लिए उत्पादों को बनाने या उपांतरित करने या प्रक्रिया तय करने के लिए उनसे व्यूत्पदियों का उपयोग करता है;

ढ) “राज्य जैव विविधता बोर्ड” से धारा 22 के अधीन स्थापित राज्य जैव विविधता बोर्ड अभिप्रेत है;

ण) “पोषणीय उपयोग” से जैव विविधता के अवयवों का ऐसी रीति में और ऐसी दर से उपयोग अभिप्रेत है, जिससे जैव विविधता का दीर्घकालिक ह्रास न होता हो जिससे वर्तमान और भावी पीढ़ियों की आश्यकताओं और अपेक्षाओं को पूरा करने की इसकी संभाव्यता को बनाए रखा जा सके;

त) “मूल्यवर्धित उत्पादों” से ऐसे उत्पाद अभिप्रेत हैं जिनमें पौधों या पशुओं के मान्यकरणीय और वस्तुत: अपृथक्करणीय रूप में भाग या उनके तत्व अन्ताव्रिष्ट हो सकते है।

जैव विविधता का विनियमन और उस तक पंहुच

कतिपय व्यक्तियों द्वारा राष्ट्रीय जैव विविधता से संबंधित क्रियाकलापों का न किया जाना।

1961  का 43

3. (1) उपधारा  (2) में निर्दिष्ट कोई भी व्यक्ति, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के पूर्व अनुमोदन के बिना, भारत में व्युत्पन्न कोई जैव संसाधन या अनुसंधान के लिए या वाणीज्यिक उपयोग के लिए अथवा जैव सर्वेक्षण और जैव उपयोग के लिए उससे सहबद्ध जानकारी अभिप्राप्त नहीं करेगा।

2) वे व्यक्ति जिनसे उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का अनुमोदन लेना अपेक्षित होगा, निम्नलिखित हैं, अर्थात :-

क) वह व्यक्ति जो भारत का नागरिक नहीं है;

ख) भारत का ऐसा नागरिक जो आय- कर अधिनियम, 1961 की धारा 2 के खंड (30) में परिभाषित अनिवासी है;

ग) ऐसा निगमित निकाय, संगम या संगठन जो-

(घ) ऐसा निगमित निकाय, संगम या सन्गठन जो-

तत्सम प्रवृत किसी विधि के अधीन भारत में निगमित या रजिस्ट्रीकृत है जिससे उसकी शेयर पूँजी या प्रबंध में कोई गैर भारतीय भागदारी है।

अनुसंधान के परिणाम राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अनुमोदन के बिना कतिपय व्यक्तियों को अंतरित नहीं किए जाएंगे।

1961  का 43

4. कोई भी व्यक्ति, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के पूर्व अनुमोदन के बिना, भारत में उत्पन्न या भारत से अभिप्राय किन्हीं जैव संसाधनों से संबंधित किसी अनुसंधान के परिणामों को किसी ऐसे व्यक्ति को, जो भारतीय नागरिक नहीं है या भारत का ऐसा नागरिक है जो आय-कर अधिनियम, 1961की धारा 2 के खंड (3) में यथा परिभाषित अनिवासी है या ऐसे निगमित निकाय या संगठन को, जो भारत में रजिस्ट्रीकृत या निगमित नहीं है अथवा जिसमें उसकी शेयर पूँजी या प्रबंध में कोई गैर भारतीय भागीदारी है, धनिय प्रतिफल के लिए या अन्यथा अंतरित नहीं करेगा।

स्पष्टीकरण – इस धारा के प्रयोजन के लिए “अंतरण” के अंतर्गत अनुसंधान कागज पत्रों का प्रकाशन या किसी सेमिनार या कार्यशाला में किसी जानकारी का विकीर्णन नहीं है यदि ऐसा प्रकाशन केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए मार्गदर्शन के अनुसार है।

धारा 3 और धारा 4 का कतिपय सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं को लागू नहीं होना।

5. (1) धारा 3 और धारा 4 के उपबंध ऐसी सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं को लागू नहीं होंगे  जो जैव संसाधनों या उससे संबंधित सूचना से संस्थाओं के बीच जिनके अंतर्गत सरकार द्वारा प्रयोजित भारतीय संस्थाएँ हैं और अन्य देशों में ऐसी संस्थाओं के बीच अंतरण या विनिमय में लगी हुई हैं, यदि ऐसी सहयोगी अनुसंधान परियोजनाएँ  (2) में विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा कर देती है।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट सहयोगी अनूसंधान परियोजनाओं से भिन्न सभी परियोजनाएँ जों इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व पूरे किए गए करारों पर आधारित हैं और जो प्रवृत्त हैं, उस सीमा तक जहाँ तक करार के उपबंध इस अधिनिमय के उपबंधों और उपधारा (3) के खंड (क) के अधीन जारी किए गए किसी मार्गदर्शन से असंगत हैं, शून्य होगी।

(3) उपधारा (1)  के प्रयोजनों के लिए सहयोगी अनुसंधान परियोजनाएं|

(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त जारी किए गए नीति संबंधी मार्गदर्शक के अनुरूप होंगी;

(ख) केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित की जाएँगी।

बौद्धिक संपदा अधिकारों के लिए आवेदन राष्ट्रीय राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अनुमोदन के बिना नहीं किया जाएगा।

6. (1) कोई भी व्यक्ति किसी बौद्धिक संपदा अधिकार के लिए, चाहें उसका कोई भी नाम हो, भारत में या भारत से बाहर किसी अनुसंधान पर आधारित किसी अविष्कार के लिए या भारत से अभिप्राप्त जैव संसाधन पर आधारित जानकारी के लिए ऐसा आवेदन करने से पूर्व राष्ट्रीय जैव विवधता प्राधिकरण का पूर्व अनुमोदन अभिप्राप्त जैव संसाधन पर आधारित जानकारी के लिए ऐसा आवेदन करने से पूर्व राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का पूर्व अनुमोदन अभिप्राप्त किए बिना आवेदन नहीं करेगा:

परन्तु यदि कोई व्यक्ति पेटेंट के लिए आवेदन करता है, तो राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की अनुज्ञा पेटेंट के स्वीकार कर लिए जाने के पश्चात, किन्तु संबंध पेटेंट राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा पेटेंट में व्यवहार करने से पूर्व, अभिप्राप्त की जा सकेगी।

परंतु यह और की राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण उसको की गई अनुज्ञा हेतु आवेदन का निपटारा आवेदन की प्राप्ति की तारीख से नब्बे दिन की आवधि के भीतर करेगा।

(2) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, इस धारा के अधीन अनुमोदन अनुदत्ता करते समय, फायदे में हिस्सा बंटाने की फोस या रायल्टी अथवा दोनों अधिरोपित कर सकेगा या ऐसे अधिकारों के वाणिज्यिक उपयोग से अदभुत वित्तीय फायदों का हिस्सा बंटाने सहित शर्तों अधिरोपित कर सकेगा।

(3) इस धारा के के उपबन्ध ऐसे व्यक्ति को लागू नहीं होंगे जो संसद द्वारा अधिनियमत पौधा किस्म के संरक्षण से संबंधित किसी विधि के अधीन किन्हीं अधिकारों के अधीन आवेदन कर रहा है।

(4) जहाँ कोई अधिकार उपधारा (3) में निर्दिष्ट विधि के अधीन अनुदत्त किया जाता है वहाँ संबद्ध प्राधिकारी ऐसे अधिकार अनुदत्त करते समय ऐसा अधिकार अनुदत्त करने वाले ऐसे दस्तावेज की प्रति राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को पृष्ठांकित करेगा।

कतिपय प्रयोजनों के लिए जैव संसाधन अभिप्राप्त करने के लिए राज्य जैव विविधता बोर्ड को पूर्व इत्तिला।

7. ऐसा कोई भी व्यक्ति जो भारत का नागरिक है या ऐसा निगमित निकाय, संगम या संगठन है जो भारत में रजिस्ट्रीकृत है. वाणिज्यिक उपयोग के लिए कोई जैव संसाधन या वाणिज्यिक उपयोग के लिए या जैव संरक्षण और जैव उपयोग के लिए संबद्ध राज्य विविधता बोर्ड को पूर्व इत्तिला देने के पश्च्चात ही अभिप्राय करेगा, अन्यथा नहीं:

परन्तु इस धारा के उपबंध स्थानीय व्यक्ति या उस क्षेत्र के  समुदायों को लागू नहीं होंगे जिनके अंर्तगत जैव विविधता के उगाने वाले और कृषक, और ऐसा वैद्य और हकीम है जो देशी औषधियों का व्यवसाय कर रहे हैं।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना ।

8. (1) ऐसी तारीख से जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के नाम के निकाय की स्थापना की जाएगी।

(2) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण पूर्वोक्त नाम का निगमित निकाय होगा जिसका शाश्वत उत्तराधिकारी और सामान्य मुद्रा होगी तथा जिससेजंगम और स्थावर दोनों ही प्रकार की सम्पत्ति अर्जित करने की या उसके व्ययन करने की और संविदा करने की शक्ति होगी तथा वह उस नाम से वाद ला सकेगा या उसके विरूद्ध वाद लाया जा सकेगा।

(3) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का प्रधान कार्यालय चेन्नई में होगा और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से भारत में अन्य स्थानों पर भी कार्यालय स्थापित कर सकेगा।

(4) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात :-

(क) अध्यक्ष, जो ख्यातिप्राप्त व्यक्ति होगा जिसके पास जैव विविधता के संरक्षण उसके पोषणीय उपयोग में तथा फायदों में साम्यापूर्ण हिस्सा बंटाने से संबंधित विषयों पर पर्याप्त ज्ञान और अनुभव हो, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा नियत किया जाएगा;

(ख) केंद्रीय सरकार द्वारा तीन पदेन सदस्यों को नियुक्त किया जाएगा जिनमें जनजाति कार्यों से संबंधित मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करने के लिए दो सदस्य जिसमें से एक अपर वं महानिदेशक या वन महानिदेशक होगा;

(ग) निम्नलिखित से संबंधित केन्द्रीय सरकार के सम्बन्ध मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाने वाले सात पदेन सदस्य –

  1. कृषि अनूसंधान और शिक्षा;
  2. जैव प्रौद्योगिकी;
  3. समुद्र विकास;
  4. कृषि और सहकारिता;
  5. औषधि और होम्योपैथिक की भारतीय पद्धतियाँ;
  6. विज्ञान और प्रौद्योगिकी;
  7. वैज्ञानिक और औद्योगिक अनूसंधान;

(घ) ऐसे पांच गैर शासकीय सदस्य जो ऐसे विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों में से नियुक्त किए जायेंगे, जिनके पास जैव विविधता के संरक्षण, जैव संसाधनों के पोषणीय उपयोग और जैव संसाधनों के उपयोग से अद्भुद फायदों में साम्यापूर्ण हिस्सा बंटाने से संबंधित विषयों में विशेष ज्ञान और अनुभव और जो उद्योग के प्रतिनिधि, जैव संसाधनों के संरक्षक, सर्जक और जानकारी धारण करने वाले हों।

अध्यक्ष और सदस्यों की सेवा शर्तें

9. राष्ट्रीय जैव विविधता प्रधिकरण के अध्यक्ष और पदेन सदस्यों से भिन्न अन्य सदस्यों की पदावधि और सेवा की शर्ते वे होगीं जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएँ।

अध्यक्ष राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का मुख्य कार्यपालक होगा।

10. अध्यक्ष राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का मुख्य कार्यपालक होगा और

अध्यक्ष राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का मुख्य कार्यपालक होगा  और वह ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्त्तव्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएँ।

सदस्यों का हटाया जाना

11. केन्द्रीय सरकार राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के किसी सदस्य को पद से हटा सकेगी यदि वह व्यक्ति –

क) जो दिवालिया न्यायनिर्णित किया गया है; या

ख) जो किसी ऐसे आपराध का सिद्धकोष ठहराया गया जिसमें नैतिक अधमता अन्तर्वलित है; या

ग) जो शारीरिक या मानसिक रूप से सदस्य के रूप में कार्य करने के अयोग्य हो गया है; या

घ) जिसने अपने पड़ का ऐसा दुरूपयोग किया है जिससे उसका पद पर बने रहना लोकहित के लिए अहितकर है; या

ङ) जिसने ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित किया है जिससे सदस्य के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की सम्भवना है।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अधिवेशन

12. (1) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ऐसे समयों और स्थानों पर अधिवेशन करेगा और अपने अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार में (जिसके अंतर्गत ऐसे समयों और स्थानों के संव्यवहार में (जिसके अंतर्गत ऐसे अधिवेशनों में गणपूर्ति है) प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा, जो विहित किए जाएँ।

2) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का अध्यक्ष राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अधिवेशनों की अध्यक्षता करेगा।

3) यदि अध्यक्ष किसी कारण से राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ है तो उस अधिवेशन में उपस्थित राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण सदस्यों द्वारा अपने में से चुना गया कोई अन्य सदस्य उस अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा।

4) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के किसी अधिवेशन में उसके समक्ष आने वाले सभी प्रश्नों का विनिश्चय उपस्थित और मत देनेवाले सदस्यों के बहुमत से किया जायेगा और मत बराबर होने की दशा में, अध्यक्ष या उसके अनुपस्थिति में अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति का, द्वितीय या निर्णायक मत होगा।

5) प्रत्येक ऐसा सदस्य, जो किसी भी प्रकार से, चाहें प्रत्यक्षत:, अप्रत्येक्ष: या व्यक्तिगत रूप से अधिवेशन में विनिश्चित किए जाने वाले विषय से संबंध या हित की प्रकृति को प्रकट करेगा और इस प्रकार प्रकट करने के पश्चात संबंद्ध या हितबद्ध सदस्य उस अधिवेशन में भाग नहीं लेगा।

6) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस आधार अविधिमान्य नहीं होगी कि-

क) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है; या

ख) किसी सदस्य के रूप में किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि है; या

ग) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की प्रक्रिया में ऐसी अनियमितता है जिससे मामले के गुणा-वगुण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की समितियाँ

13. 1 राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण कृषि जैव विविधता से व्यवहार करने के लिए एक समिति का गठन कर सकेगा।

स्पष्टीकरण – इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, “कृषि जैव विविधता” से कृषि से संबंधी जाती और उनकी जंगली प्रजातियों से संबंधित जैव विविधता अभिप्रेत हैं।

2) उपधारा 1) के उपबंधों पर प्रतिकूल  प्रभाव डाले बिना राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन और कृत्यों के अनुपालन के लिए उतनी संख्या में समितियों का गठन कर सकेगा जो वह ठीक समझे।

3) इस धारा के अधीन गठित समिति में, ऐसे व्यक्ति जो राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के सदस्य नहीं हैं, उतनी संख्या में सहयोजित किए जा सकेगें जो वह ठीक समझे और इस प्रकार सहयोजित व्यक्तियों को समिति के अधिवेशनों में उपस्थित होने और इसके कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु उसमें मत देने का अधिकार नहीं होगा।

4) उपधारा (2) के अधीन गठित समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त व्यक्ति, समिति के अधिवेशनों में उपस्थित होने केलिए ऐसे भत्ते और फिस प्राप्त कने के हकदार होंगे, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियत की जाए।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी ।

14. 1) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, उतने अधिकारीयों और ऐसे अन्य कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा जो वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक समझे।

2) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के ऐसे अधिकारीयों और अन्य कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्तें ऐसी होंगी जो विनियमों द्वारा विहित की जाएँ।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के आदेशों और विनिश्चयों का अधिप्रमाणन।

15. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के सभी आदेशों और विनिश्चयों का अधिप्रमाणन अध्यक्ष या राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी सदस्य के हस्ताक्षर द्वारा किया जाएगा और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा निष्पादित सभी अन्य लिखतें राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर द्वारा अधिप्रमाणित की जाएगीं।

शक्तियों का प्रत्योजन।

16. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, लिखित रूप में साधारण या विशेष आदेश द्वारा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के किसी सदस्य या अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति को, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए यदि कोई हों, जो इस आदेश में विनिद्रिष्ट की जाएँ, अधिनियम के अधीन ऐसी शक्तियों और कृत्यों को धारा 50 के अधीन अपील करने और (धारा 62 के अधीन विनियम बनाने की शक्ति से भिन्न), जो आवश्यक समझी जाएँ, प्रत्यायोजित की जा सकेगी।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के  व्यय का भारत की संचित निधि में से चुकाया जाना।

17. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के सदस्यों को संदेय वेतन और भत्ते तथा प्रशासनिक व्यय, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अधिकारीयों और अन्य कर्मचारियों को संदेय या उनेक संबंध में संदेय वेतन, भत्ते और पेंशन है, भारत की संचित निधि में से चुकाए जायेंगे।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के कृत्य और शविन्त्याँ

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के कृत्य व शक्तियाँ

18. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का, धारा 3, धारा 4 और धारा 6 में विनिद्रिष्ट क्रियाकलापों को विनियमित करने और विनियमों द्वारा जैव संसाधनों तक पहुँच और फायदों में साम्यापूर्ण हिस्सा बंटाने तक की लिए मार्गदर्शन जारी करने का कर्तब्य होगा।

2) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का धारा 3, धारा 4 और विनिर्दिष्ट क्रियाकलाप को करने के लिए अनुमोदनअनूद्त्त कर सकेगा ।

3) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण,

क) केन्द्रीय सरकार कों जैव विविधता के संरक्षण, इसके अवयवों के पोषणी य उपयोग और राष्ट्रीय जैव विविधता संसाधनों के उपयोग में से उद्भूत फायदों के साम्यापूर्ण हिस्सा बंटाने के संबंध में सलाह दे सकेगा;

ख) राज्य सरकारों को, जैव विविधता के महत्व के क्षेत्रों के चयन जो विरासत स्थल के रूप में धारा 37 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित किए जाएँ तथा ऐसे विरासत स्थलों के प्रबंध के उपाय के चयन में सलाह दे सकेगा।

ग) ऐसे अन्य कृत्यों का पालन कर सकेगा जो इस अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक समझे जाएँ।

4) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, केन्द्रीय सरकार की ओर से भारत से अभिप्राप्त किसी जैव संसाधन या ऐसे जैव संसाधन से सहयोजित, जो भारत से व्यूत्त्पन्न हूआ हैं, भारत के बाहर किसी देश में बौद्धिक संपदा अधिकारों को मंजूर करने का विरोध करने के लिए आवश्यक कदम उठा सकेगा।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा अनुमोदन

कतिपय क्रियाकलाप करने के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा अनुमोदन

1) धारा 3 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट कोई व्यक्ति, जो भारत में होने वली किसी जैव संसाधन को उससे सहयोजित ज्ञान को, अनूसंधान या वाणिज्यिक उपयोग या जैव सर्वेक्षण और और जैव उपयोग के लिए अथवा भारत में होने वाले या भारत के बाहर से अभिप्राप्त जैव संसाधन से संबंधित किसी अनूसंधान के परिणामों के अंतरण को प्राप्त करने के लिए आशयित हैं, ऐसे प्रारूप में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को आवेदन करेगा और ऐसी फ़ीस का संदाय करेगा, जो विहित की जाए।

(2) कोई व्यक्ति,जो भारत में या भारत के बाहर धारा 6 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट किसी पेटेंट के लिए या बौद्धिक संपदा संरक्षण के किसी अन्य प्ररूप के लिए आवेदन करना चाहता हो तो वह ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को आवेदन कर सकेगा जो विहित की जाए।

(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन किसी आवेदन की प्राप्ति पर, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ऐसी जाँच करने के पश्चात जो वह आवश्यक समझे और यदि आवश्यक हो इस प्रयोजन के लिए गठित किसी विशेषज्ञ समिति से परामर्श करने के पश्चात, आदेश द्वारा इस निमित्त बनाए गए किन्हीं विनियमों के अधीन रहते हुए अनुमोदन अनूद्त्त कर सकेगा और यह ऐसी शर्तों और निबंधनों के अधीन होगा, जो आवश्यक समझी जाएँ जिनके अंतर्गत रायल्टी के रूप में प्रभारों का अधिरोपण या आवेदन को नामंजूर करने के कारण सम्मिलित हैं:

परन्तु यह कि नामंजूरी का ऐसा कोई आदेश प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिए गए नहीं किया जायेगा:

(4) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण इस धारा के अधीन दिए गए प्रत्येक अनुमोदन की सर्वजनिक सूचना देगा।

जैव संसाधन या ज्ञान का अंतरण

20.  (1) कोई भी व्यक्तिम जिसे धारा 19 के अधीन अनुमोदन प्रदान किया गया है, किसी ऐसे जैव संसाधन या उससे सहबद्ध ज्ञान को, जो उक्त अनुमोदन की विषय वस्तु है, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की अनुज्ञा के बिना आन्तरिक नहीं करेगा।

(2) कोई व्यक्ति जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी जैव संसाधन या उससे सहबद्ध ज्ञान को अंतरित करना चाहता है, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को आवेदन करेगा, जो विहित की जाए।

(3) उपधारा (2) के अधीन किसी आवेदन की प्राप्ति पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ऐसी जाँच करने के पश्चात् जिन्हें वह उचित समझे और यदि आवश्यक हो इस प्रयोजन के लिए गठित किसी विशेषज्ञ समिति से परामर्श करने के पश्चात् आदेश द्वारा इस निमित्त न बनाए गए किन्हीं विनियमों के अधीन रहते हुए अनुमोदन दे सकेगा और यह शर्तों और निबंधनों के अधीन होगा जो आवश्यक समझी जाएँ जिनके अंतर्गत रायल्टी के रूप में प्रभारों का अधिरोपण या आवेदन को नामंजूर करने के कारण सम्मिलित हैं:

परंतु यह कि नामंजूरी का ऐसा कोई आदेश प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिए बिना नहीं किया जाएगा:

(4) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण इस धारा के अधीन दिए गए प्रत्येक अनुमोदन की सार्वजनिक सूचना देगा।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण साम्यापूर्ण फायदे में हिस्सा बाँटने का अवधारणा ।

21. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, धारा 19 या धारा 20 के अधीन अनुमोदन प्रदान करते समय यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसे निबंधनों और शर्तों का, जिनके अधीन रहते हुए अनुमोदन प्रदान किया गया है, उपलब्ध जैव संसाधनों के उपयोग से अदभुत फायदों, उनके उत्पादों, उनके उपयोग से सहबद्ध नवपरिवर्तनों तथा व्यवहारों और उनसे सम्बन्धित स्थानीय निकाय और फायदे के दावेदारों के बीच पारस्परिक रूप से करार किए गए निबंधनों और शर्तों के अनुसार साम्यापूर्ण फायदे में हिस्सा बंटाना सुनिश्चित है।

2) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण इस बनाए गए किन्हीं विनियमों के अधीन रहते हुए फायदे में हिस्सा बंटाने की अवधारणा को निम्नलिखित किसी या सभी रीति में लागू किया जाएगा अर्थात: -

(क) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण या जहाँ फायदे के दावेदारों को ऐसे फायदे के दावेदारों के रूप में पहचाना जाता है, बौद्धिक संपदा अधिकारों का संयुक्त स्वामित्व देना;

(ख) प्रौद्योगिकी का अंतरण;

(ग) ऐसे क्षेत्रों में उत्पादन, अनुसंधान और विकास एककों का अवस्थान जो फायदे के दावेदारों के बेहतर जीवन स्तर को सुदृढ़ बनाते हैं;

(घ) भारतीय वैज्ञानिक संगम, फायदों का दावा करने वाले व्यक्ति और जैव संसाधन और जैव सर्वेक्षण और जैव उपयोग के अनुसंधान और विकास में लगे स्थानीय व्यक्ति फायदे का दावा करने वाले;

(ङ) फायदे का दावा करने वालों के हेतु की गई सहायता के लिए बौद्धिक पूँजी निधि की स्थापना;

(च) फायदे का दावा करने वालों को धनीय प्रतिकार और अन्य गैर धनीय फायदों का  संदाय जो राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा आवश्यक समझे जाएँ;

3)  जहाँ धन की आवश्यकता राशि का हिस्सा बंटाने का आदेश दिया जाता है, वहाँ राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ऐसी राशि को राष्ट्रीय जैव विविधता निधि में जमा करने का आदेश दे सकेगा:

परंतु यह कि जहाँ जैव संसाधन या ज्ञान किसी विनिर्दिष्ट व्यष्टिक – समूह या संगठन के परिणाम स्वरूप उपलब्ध था, वहाँ राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण निदेश दे सकेगा कि राशि का किसी  राशि का किसी करार के निबंधनों के अनुसरण में और ऐसी रीति में जो आवश्यक समझी जाए और विशिष्ट व्यष्टि और व्यष्टि समूह या संगठन  को प्रत्यक्षत: संदाय किया जाए। (4) इस धारा के प्रयोजन के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण केंद्रीय सरकार के परामर्श से विनियमों द्वारा मार्गदर्शक सिद्धांत विरचित करेगा।

राज्य जैव विविधता बोर्ड

राज्य जैव विविधता बोर्ड कि स्थापना।

22. (1) उस तारीख से जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित नियत करें, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए ------- (राज्य का नाम) जैव विविधता बोर्ड के नाम से ज्ञात राज्य के लिए उस सरकार द्वारा एक बोर्ड स्थापित किया जाना जाएगा।

2) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी किसी राज्य जैव विविधता बोर्ड को किसी संघ राज्य क्षेत्र और ऐसे संघ राज्यक्षेत्र के सम्बन्ध में गठन किया गया नहीं समझा जाएगा। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण संघ राज्यक्षेत्र के लिए किसी राज्य जैव विविधता बोर्ड की शक्तियाँ का प्रयोग और कृत्यों का पालन करेगा:

परन्तु यह कि किसी संघ राज्य क्षेत्र के संबंध में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को, जो केन्द्रीय सरकार विहित करे, इस उपधारा के अधीन सभी या किसी शक्ति अथवा कृत्यों का प्रत्यायोजन कर सकेगा।

3) बोर्ड, उपयुक्त नाम से निगमित एक निकाय होगा जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और एक सामान्य मुद्रा होगी तथा उसे स्थावर और जंगम सम्पत्ति दोनों को अर्जित करने, धारण करने और व्ययन करने और संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वाद ला सकेगा तथा विरूद्ध वाद लाया जा सकेगा।

4) बोर्ड में निम्नलिखित सदस्य होगें, अर्थात्:-

(क) एक अध्यक्ष, जो जैव विविधता के संरक्षण और पोषणीय उपयोग तथा फायदों के साम्यापूर्ण हिस्सा बंटाने से संबंधित विषयों में पर्याप्त ज्ञान और अनुभव रखने वाला विशिष्ट व्यक्ति होगा, राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा;

(ख) राज्य सरकार के संबद्ध विभागों का प्रतिनिधित्व करने के लिए राज्य सरकार द्वारा पांच से अनधिक पदेन सदस्य नियुक्त किए जाएंगे;

(ग) जैव विविधता के संरक्षण, जैव संस्थाओं के पोषणीय उपयोग तथा जैव संस्थानों के उपयोग में ही अदभुत कार्यों के साम्यापूर्ण हिस्सा बंटाने से संबंधित विषयों के विशेषज्ञों में से पांच से अनाधिक सदस्य नियुक्त किए जाएंगे।

5) राज्य जैव विविधता बोर्ड का मुख्य कार्यालय ऐसे स्थान पर होगी जो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किया जाए।

राज्य जैव विविधता बोर्ड के कृत्य।

23. राज्य जैव विविधता बोर्ड के कृत्य निम्नलिखित होंगे,

(क) राज्य सरकार केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए किसी मार्गदर्शन के अधीन रहते हुए जो जैव विविधता के संरक्षण, उसके अवयवों के पोषणीय उपयोग तथा जैव संसाधनों के उपयोग में से अदभुत फायदों के साम्यापूर्ण हिस्सा बंटाने के संबंध में राज्य सरकार को सलाह देना;

(ख) वाणिज्यिक उपयोग या जैव सर्वेक्षण और भारतियों द्वारा किसी जैव विविधता संसाधन के जैव विविधता संसाधन के जैव उपयोग के लिए अनुमोदन या अन्यथा अनुरोध को मंजूर करके, विनियमित करना;

(ग) ऐसे अन्य कृत्यों को करना जो इस अधिनियम के उपबंधो के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक हों और राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएँ।

संरक्षण आदि के उद्दश्यों के उल्लंघन करने के लिए कतिपय क्रियाकलापों को निबंधित करने की राज्य विविधता बोर्ड की शक्ति।

24. (1) भारत  का कोई नागरिक या निगमित निकाय, संगठन या भारत में रजिस्ट्रीकृत संगम, जो धारा 7 में निर्दिष्ट किसी कार्यकलाप को करना चाहता है, राज्य जैव विविधता बोर्ड को इसकी पूर्व सूचना ऐसे प्ररूप में देगा, जो राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए।

(2) उपधारा (1) के अधिन्किसी संसूचना की प्राप्ति पर राज्य जैव विविधता बोर्ड संबंधित निगमित निकाय से परामर्श करके और ऐसे जाँच करने के पश्चात्, जो वह ठीक समझे, आदेश द्वारा ऐसे किसी क्रियाकलाप को प्रतिरोध या निबंधित कर सकेगा यदि उसकी राय में ऐसा क्रियाकलाप संरक्षण और जैव विविधता के पोषणीय उपयोग या ऐसे क्रियाकलाप में से अदभुत फायदों के साम्यापूर्ण हिस्सा बाटंने के प्रतिकूल या विरूद्ध हो:

परन्तु यह कि ऐसा कोई हिस्सा आदेश प्रभावित व्यक्तियों को सुनवाई का अवसर दिए बिना नहीं किया जाएगा।

(3) पूर्व इत्तिला के लिए उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्ररूप में दी गई कोई सूचना गुप्त रखी जाएगी और किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसका उससे कोई संबंध नहीं, साशय या बिना साशय या बिना आशय के प्रकट नहीं की जाएगी।

राज्य जैव विविधता बोर्ड को उपंतारणों सहित धारा 9 से धारा 17 के उपबंधो का लागू होना

25. धारा 9 से धारा 17 के उपबन्ध, किसी राज्य जैव विविधता बोर्ड को लागू होंगे और निम्नलिखित उपान्तरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे, अर्थात:-

(क) केन्द्रीय सरकार के प्रतिनिर्देश को राज्य जैव विविधता बोर्ड प्रतिनिर्देश समझा जाएगा;

(ख) राज्य जैव विविधता प्राधिकरण के प्रतिनिर्देश को राज्य जैव विविधता बोर्ड के प्रतिनिर्देश समझा जाएगा;

(ग) भारत की  संचित निधि प्रतिनिर्देश को राज्य संचित निधि के प्रतिनिर्देश समझा जाएगा।

राज्य जैव विविधता प्राधिकरण का वित्त, लेखा और लेखा परीक्षा

केंद्र सरकार के अनुदान या ऋण

26. केन्द्रीय सरकार, इस निमित्त संसद द्वारा सम्यक रूप से विनियोग के पश्चात्, ऐसे अनुदान या ऋणों के द्वारा, राष्ट्रीय जैव विविधिता प्राधिकरण को ऐसी राशियों का संदाय कर सकेगी, जो केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाने के लिए, आवश्यक समझे।

राष्ट्रीय जैव विविधता

27. (1) राष्ट्रीय जैव विविधता निधि के नाम से एक निधि का गठन किया जाएगा और उसमें निम्नलिखित जमा किया जाएगा -

(क) धारा (26)  के अधीन राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को दिया गया कोई अनुदान या ऋण;

(ख) इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा प्राप्त किए सभी प्रभार और स्वामित्व; और

(ग) ऐसे अन्य संसाधनों से राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा सभी रकम, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिश्चित की जाए।

2. निधि का निम्नलिखित के लिए उपयोग किया जाएगा -

(क) फायदे का दावा करनेवालों को फायदों का दिया जाना;

(ख) जैव संसाधनों का संरक्षण, संवर्धन और उन क्षेत्रों का विकास जहाँ से ऐसे जैव संसाधन या उससे सहबद्ध ज्ञान उपलब्ध हुआ हो;

(ग) स्थानीय निकाय के परामर्श से खंड (ख) में निर्दिष्ट क्षेत्रों का सामाजिक – आर्थिक विकास।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की वार्षिक रिपोर्ट।

28. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ऐसे प्ररूप में और प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे समय पर जो विहित किए जाएँ, अपनी वर्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा और जिसमें पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान ऐसे क्रियाकलाप का सम्पूर्ण लेखा जोखा देगा तथा केन्द्रीय सरकार को ऐसी तारीख से पूर्व, जो विहित की जाए, पेश करेगा और इसके साथ उस लेखापरीक्षकों की रिपोर्ट और लेखाओं की एक संपरीक्षित प्रति लगी होगी।

बजट, लेखा और लेखापरीक्षा ।

29. (1) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण एक बजट तैयार करेगा, समुचित लेखा और अन्य सुसंग अभिलेख (जिसमें राष्ट्रीय जैव विविधता निधि के लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख सम्मिलित है) बनाए रखेगा और लेखाओं का एक वार्षिक विवरण उस प्ररूप में जैसा केन्द्रीय सरकार भारत के नियंत्रक- महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित करे, तैयार करेगा।

(2) भारत के नियंत्रक- महालेखापरीक्षक द्वारा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के लेखाओं की संपरीक्षा ऐसे अंतरालों पर की जाएगी जैसा उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए और ऐसी संपरीक्षक के सम्बन्ध के किए गए खर्चे को राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को देय होगा।

(3) भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक तथा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के लेखाओं की संपरीक्षक के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति को, ऐसी संपरीक्षा के संबंध में वैसे जी अधिकार और विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे जो सामान्यतया नियंत्रक और लेखापरीक्षक को सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में प्राप्त होते हैं और विशिष्टत: उसे बहियों, लेखाओं, संबंधित वाउचर और अन्य दस्तावेज तथा कागज – पत्र प्रस्तुत करने की मांग करने और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के किसी कार्यलय का निरीक्षक करने का अधिकार होगा।

(4) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के भारत के नियंत्रक- महालेखापरीक्षक या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा प्रमाणित लेखा, उनकी संपरीक्षक रिपोर्ट सहित वार्षिक रूप से केन्द्रीय सरकार को अग्रेषित किए जाएंगे।

वार्षिक रिपोर्ट का संसद के समक्ष रखा जाना।

30. केन्द्रीय सरकार वार्षिक रिपोर्ट और लेखा परीक्षकों की रिपोर्ट को उनके प्राप्त होने के यथासंभव शीघ्र पश्चात संसद की प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी।

राज्य जैव विविधता बोर्ड का वित्त लेखा और लेखापरीक्षक

31. राज्य सरकार, इस निमित्त राज्य विधान सभा द्वारा सम्यक रूप से विनियोग के पश्चात, ऐसे अनुदान या ऋणों के द्वारा, राज्य जैव विविधता बोर्ड को ऐसी राशियों का संदाय कर सकेगी, जो राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए उपयोग किए जाने के लिए, आवश्यक समझे।

राज्य जैव विविधता निधि।

32. (1) राज्य जैव विविधता निधि के नाम से एक निधि का गठन किया जाएगा और उसमें निम्नलिखित जमा किया जाएगा –

(क) धारा 31 के अधीन राज्य जैव विविधता बोर्ड को दिया गया कोई अनुदान या ऋण;

(ख) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को दिया गया कोई अनुदान या ऋण;

(ग) ऐसे अन्य संसाधनों से राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्राप्त सभी रकम जो राज्य सरकार द्वारा प्राप्त सभी रकम जो राज्य सरकार द्वारा विनिश्चित की जाए।

(2) राज्य जैव विविधता निधि का निम्नलिखित के लिए उपयोग किया जाएगा,

(क) विरासतीय स्थलों का प्रबंध और संरक्षण;

(ख) धारा आर्थिक रूप से प्रभावित व्यक्तियों को प्रतिकर देना और उनका पुन:स्थापना;

(ग़) जैव संसाधनों का संरक्षण;

(घ) ऐसे क्षेत्रों का समाजिक- आर्थिक विकास, जहाँ से संबंधित स्थानीय निकायों के परामर्श से धारा 24 के अधीन किए गए आदेश के अधीन रहते हुए, राज्य सरकार को ऐसे जैव संसाधनों या उससे सहबद्ध हुआ ज्ञान उपलब्ध हुआ है;

(ङ) इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत प्रयोजनों के लिए उपगत व्यय की पूर्ति।

राज्य जैव विविधता बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट।

33. राज्य जैव विविधता बोर्ड, ऐसे प्ररूप में और प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, ऐसे समय, पर जो विहित किया जाए, अपने वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा और पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान ऐसे क्रियाकलापों का सम्पूर्ण लेखाजोखा देगा तथा उसकी एक प्रति राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा।

राज्य जैव विविधता बोर्ड के लेखाओं की लेखापरीक्षा।

राज्य जैव विविधता बोर्ड के लेखा राज्य के महालेखाकार के परामर्श से ऐसी रीति में तैयार किए जाएंगे और लेखापरीक्षित किए जाएंगे और लेखा परीक्षित किए जाएंगे तथा राज्य जैव विविधता बोर्ड, राज्य सरकार को ऐसी तारीख से पूर्व, जो विहित की जाए, अपनी लेखापरीक्षित लेखा की प्रति और उस पर लेखापरीक्षकों की रिपोर्ट सहित, प्रस्तुत करेगा।

35. राज्य जैव विविधता बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट का राज्य विधान मंडल के समक्ष मंडल के समक्ष रखा जाना है।

राज्य सरकार, वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षकों की रिपोर्ट को, उनके प्राप्त होने के यथा संभव शीघ्र राज्य विधान मंडल के सदन के समक्ष रखवाएगी।

केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों के कर्त्तव्य

जैव विविधता के संरक्षण आदि के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय कूट-नीतियों, योजनाओं आदि को विकसित किया जाना।

36. (1) केन्द्रीय सरकार, जैव विवधता के संरक्षण और संवर्धन और पोषणीय उपयोग के लिए उसके जिसके अंतर्गत ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना और उनको मानिटर करना भी है जो जैव संसाधनों के प्राकृतिक आन्तरिक और बाह्य संरक्षण से परिपूर्ण है, जैव विविधता के संबंध में जागृति बढ़ाने के लिए अनुसंधान, प्रशिक्षण और लोक शिक्षा के प्रोत्साहन के लिए राष्ट्रीय नीतियों, कार्यक्रमों को विकसित करेगी।

(2) जहाँ केन्द्रीय सरकार के पास इस बारे में विश्वास करने का कारण है कि ऐसे किसी क्षेत्र को जो जैव विविधता, जैव संसाधनों से समृद्ध है और उन संसाधनों से भरपूर है, उनके अधिक उपयोग दुरूपयोग या उनकी उपेक्षा द्वारा उन्हें खतरा पैदा होता जा रहा है वहाँ वह सम्बन्ध राज्य सरकार को निर्देश जारी करेगी कि वह ऐसी राज्य सरकार को निर्देश जारी करेगी कि वह ऐसी राज्य सरकार को को तकनीकी या अन्य सहायता प्रदान करते हुए तत्काल ऐसे सुधारक उपाय करे जिनको उपलब्ध कराना संभव जो या जो जरूरी हो।

(3) केन्द्रीय सरकार, यथाशक्य जब कभी यह समुचित समझे, जैव विविधिता प्रभाव के संरक्षण, संवर्धन और पोषणीय उपयोग को सुसंगत क्षेत्रीय या प्रतिक्षेत्रीय योजनाओं, कार्यक्रमों और नीतियों में एकीकृत करेगी।

(4) केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित उपाय करेगी:

(i)     जहाँ कहीं आवश्यक जो, एक परियोजना, जो पर्यावरणीय प्रभाव के ऐसे प्रभावों के निराकरण या उसको कम करने के विचार से निर्धारण के लिए जिससे जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है और जहाँ ऐसे निर्धारण के लिए जिससे जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है और जहाँ ऐसे निर्धारण में जनता की भगीदारी के लिए समुचित व्यवस्था करना।

(ii)   उस जैव प्रौद्योगिकी के परिणामस्वरूप जीवित संशोधित जीवों के उपयोग और मोचन से संबद्ध जोखिमों को विनियमित करना, उनका प्रबंध या नियंत्रण करना जिससे जैव विविधता के संरक्षण और पोषणीय उपयोग तथा मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावन है।

(5) केन्द्रीय सरकार, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा की गई सिफारिश के आधार पर जैव विविधता से संबंधित स्थानीय व्यक्ति के ज्ञान पर विचार करने पर ऐसे उपाय के माध्यम से उसे संरक्षित करने का प्रयास करेगी जिसमें स्थानीय, राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे  ज्ञान का राजिस्त्रिकारा, और विशिष्ट प्रणाली सहित संरक्षण के अन्य उपाय सम्मिलित होंगे।

स्पष्टीकरण – इस धारा के प्रयोजनों के लिए –

(क) प्राकृतिक बाह्य संरक्षण से उनके प्राकृतिक आवासों से बाहर के जैव विविधता के अवयवों का संरक्षण अभिप्रेत हैं;

(ख) प्राकृतिक संरक्षण से आर्थिक प्रणाली और प्रक्रितक आवासों का संरक्षण और प्राकृतिक वातावरण में उनकी जातियों की परिवर्तनीय संख्या को बनाए रखना और उन्हें प्राप्त करना तथा वातावरण में प्रजातियों के घरेलूकृत या संवर्धित की दशा, जहाँ उनहोंने अपने विभिन्न गुण विकसित किए हैं, अभिप्रेत हैं।

जैव विविधता विरासतीय स्थल।

37 (1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना राज्य सरकार, समय-समय पर स्थानीय निकाय के परामर्श से राजपत्र में इस अधिनियम के अधीन जैव विविधता विरासतीय स्थलों के रूप में जैव विविधता के महत्व के क्षेत्रों को अधिसूचित करेगी।

(2) राज्य सरकार केन्द्रीय सरकार के परामर्श से सभी विरासतीय स्थलों के प्रबंध और संरक्षण विरचित करेगी।

(3) राज्य सरकार ऐसी अधिसूचना द्वारा आर्थिक रूप से प्रभावित व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग के प्रतिकार या पुर्नस्थापना के लिए स्कीमों विरचित करेगी।

विलुप्त जो रही जाति को अधिसूचित करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति।

38 तत्समय  किसी अन्य विधि के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना केन्द्रीय सरकार संबद्ध सरकार से परामर्श करने के पश्चात् समय- समय पर, ऐसी जातियों को जो विलुप्त होने के कगार हैं या जिनके निकट भविष्य में  विलुप्त होने की संभावना है तथा किसी प्रयोजन या विनियमित कर सकेगी, उन प्रजातियों के पुर्नस्थापना और परिरक्षण के लिए समुचित कदम उठाएगी।

संग्रहालयों को अभिहित करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति।

39. (1) केन्द्रीय सरकार राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के परामर्श से विभिन्न प्रवर्गों के जैव संसधानों के लिए इस अधिनियम के अधीन संग्रहालयों के रूप में संसाधनों को अभिहित कर सकेगी।

(2) संग्रहालय जैव समग्री को संरक्षित अभिरक्षा में रखेगा जिसके अंतर्गत उनके पास जमा किए गए वाउचर नमूने सम्मिलित हैं।

(3) किसी व्यक्ति द्वारा अविष्कार किए गए किसी नये वर्गक को संग्रहालय में या इस प्रयोजन के लिए पदाभिहित की गई किसी संस्था को अधिसूचित किया जाएगा और उसके द्वारा ऐसे संग्रहालय या संस्था के वाउचर नमूने को जमा किया जाएगा।

केंद्रीय सरकार की कतिपय जैव संसाधनों को छूट देने की शक्ति।

40. इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी केन्द्रीय सरकार राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के परामर्श से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह घोषणा कर सकेगी कि इस अधिनियम के उपबंध किन्हीं मदों को लागू नहीं होंगे जिसके अंतर्गत वाणिज्य के रूप में साधारणतया व्यापार के जैव संसाधन सम्मिलित है।

जैव विविधता प्रबंध समितियाँ

जैव विविधता प्रबंध समितियों का गठन

41. 1) प्रत्येक स्थानीय निकाय संरक्षण के संवर्धन, पोषणीय उपयोग और जैव विविधता के दस्तावेजीकरण के प्रयोजन के लिए, जिसके अंतर्गत आवासकों का भूमि की संरक्षण की प्रजाति का संरक्षण, व्यक्तियों के वर्गों और पशुधन के घरेलूकृत संवर्धकों तथा पशुओं के प्रजनन और सूक्ष्म जीवों तथा जैव विविधता संबंधित ज्ञान को श्रृखंलाबद्ध करने के प्रयोजन का लिए इसके क्षेत्र के भीतर है, जैव विविधता प्रबंध समीति का गठन करेगा।

स्पष्टीकरण – इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए-

क) “कल्टीवर” से पौधे की ऐसी किस्म अभिप्रेत है जो कृषि में पैदा होता थी और बढ़ती रहती थी या कृषि के प्रयोजनों के लिए विशेष रूप से उगाई थी;

ख) “लोक किस्म” से पौधे की पैदा की गई वह किस्म अभिप्रेत है जो किसानों के बीच औपचारिक रूप से विकसित, उगाई और विनिमय की गई थी;

ग) “भूमि प्रजाति” से पुरातन कल्टीवर अभिप्रेत है जो प्राचीन कृषकों और उनके उत्तराधिकारीयों द्वारा उगाई जाती थी।

(2) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और राज्य जैव विविधता बोर्ड जैव संसाधनों और ऐसे संसाधनों से सहबद्ध ज्ञान के उपयोग के संबंध में, जैव विविधता प्रबंध सिमितयों की क्षेत्रीय अधिकारिता भीतर होते हैं, कोई विनिश्चय लेते समय जैव विविधता समितियों से परामर्श करेगा।

3) जैव विविधता प्रबंध समिति, अपनी क्षेत्रीय अधिकारिता के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों  से वानीज्यिक प्रयोजनों के लिए किसी जैव संसाधन की पहुंच या संग्रहण के लिए किसी व्यक्ति से फिस के संग्रहण के रूप में प्रभाव उदगृहित कर सकेगी।

स्थानीय जैव विविधता निधि

जैव विविधता निधि को अनुदान

42. राज्य सरकार, इस निमित्त राज्य विधान- मंडल द्वारा किए गए सम्यक विनियोग के पश्चात स्थानीय स्थानीय जैव विविधता निधियों को ऐसी धनराशी का अनुदान या ऋण दे सकेगी जो एह इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए उपयोग किए जाने के लिए ठीक समझे।

स्थानीय जैव विविधता निधि का गठन

43. 1) राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित प्रत्येक क्षेत्र में स्थानीय जैव विविधता निधि के नाम से ज्ञात निधि का गठन किया जाएग जहाँ कोई संस्था स्वशासित रूप में कार्य कर रही हो और उसमें निम्नलिखित को जमा किया जाएगा-

क) धारा 41 के अधीन दिया गया कोई अनुदान और ऋण;

ख) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा किए गए कोई अनुदान और ऋण;

ग) राज्य जैव विविधता बोर्डों द्वारा दिए गए कोई अनुदान या ऋण:

घ) धारा 41 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट जैव विविधता प्रबंध समितियों द्वारा प्राप्त फ़ीस;

स्थानीय जैव विविधता निधि का उपयोजन

44.  1) उपधारा  2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, स्थानीय जैव विविधता निधि का ऐसी रीति से प्रबंध – तंत्र और उसकी अभिरक्षा करने वाला व्यक्ति तथा वे प्रयोजन जिनके लिए ऐसी निदई का उपयोग किया जाएगा, वे होंगे जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जायें।

2) निधि का उपयोग संबंधित स्थानीय निकाय की अधिकारित के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में जैव विविधता के संरक्षण और संवर्धन के लिए और समुदायिक फायदे के लिए, जहाँ तक ऐसा उपयोग जैव विविधता के संरक्षण से संगत है, किया जाएगा।

45. स्थानीय जैव विविधता निधि की अभिरक्षा करने वाला व्यक्ति, ऐसे प्ररूप में और प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान ऐसे समय पर जो विहित किया जाय, अपनी वार्षिक तैयार करेगा जिसमें पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान अपनी क्रियाकलापों का सम्पूर्ण लेखा- जोखा देते हुए उसके एक प्रति संबंद्ध स्थानीय निकाय को प्रस्तुत करेगा।

जैव विविधता प्रबंध समिति के लेखाओं की लेखा-परीक्षा।

46. स्थानीय जैव विविधता निधि के लेखा, राज्य के महालेखाकार के परामर्श से ऐसी रीति में रखें और लेखापरीक्षित किए जाएंगे जो विहित की जाए और स्थानीय जैव विविधता निधि की अभिरक्षा करने वाला व्यक्ति, संबद्ध स्थानीय निकाय को ऐसी तारीख से पूर्व जो विहित की जाए उस पर लेखापरीक्षकों की रिपोर्ट सहित लेखाओं की एक लेखा संपरीक्षित प्रति देगा।

जिला मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत की जाने वाली जैव विविधता प्रबंध समितियों की वार्षिक रिपोर्टे, आदि।

47. धारा 41 की उपधारा (1) के अधीन जैव विविधता प्रबंध समिति का गठन करनेवाला प्रत्येक स्थानीय निकाय क्रमश: धारा 45 और धारा 46 में निर्दिष्ट और ऐसी समिति से संबंधित वार्षिक रिपोर्ट और उस पर संपरीक्षक की रिपोर्ट के साथ लेखाओं की संपरीक्षित प्रति उस जिला मजिस्ट्रेट को, जिसकी उक्त स्थानीय निकाय पर अधिकारिता हो, प्रस्तुत कराएगा।

प्रकीर्ण

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए गए निदेशों से आबद्ध होना।

48. (1) इस अधिनियम के पूर्वगामी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों और कर्तव्यों का निर्वहन करते समय नीति के प्रश्नों पर ऐसे निदेशों द्वारा आबद्ध होगा जो केन्द्रीय सरकार समय-समय पर उसे लिखित रूप दें:

परन्तु यह की राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को इस उपधारा के अधीन कोई निदेश देने से पूर्व, जहाँ तक साध्य हो, अपने विचार अभिव्यक्त करने का अवसर दिया जायेगा।

2) इस संबंध में कि कोई प्रश्न नीति का हा या नहीं केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा।

राज्य सरकार की निदेश देने की शक्ति।

49. 1) इस अधिनियम के पूर्वगामी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना राज्य जैव विविधता बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों और कर्तव्यों का निर्वहन करते समय नीति के ऐसे  प्रश्नों पर ऐसे निदेशों द्वारा आबद्ध होगा जो राज्य सरकार समय-समय पर उसे लिखित रूप में दे:

परंतु यह की राज्य जैव विविधता बोर्ड को, जहाँ तक साध्य जो, इस उपधारा के अधिन कोई निदेश देने से पूर्व अपने विचार अभिव्यक्त करने का अवसर दिया जाएगा।

2) इस संबंध में कि कोई प्रश्न नीति का है या नहीं राज्य सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा।

राज्य जैव विविधता बोर्डो के बीच विवादों का निपटान।

50. 1) यदि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और राज्य जैव विविधता बोर्ड के बीच कोई विवाद उत्पन्न होता है तो यथास्थिति, उक्त प्राधिकरण या बोर्ड केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए. अपील कर सकेगा।

2)  उपधारा (1) के अधीन की गई प्रत्येक ऐसे प्रारूप में होगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए।

(3) किसी अपील के निपटान सकी प्रक्रिया ऐसी होगी जो केंद्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए:

परन्तु यह कि किसी अपील के निपटान से पूर्व पक्षकारों को सुनवाई का युक्ति युक्त अवसर किया जाएगा।

(4) यदि राज्य जैव विविधता बोर्डो के बीच कोई विवाद उत्पन्न होता है तो केन्द्रीय सरकार उसे राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को निर्देशित करेगी।

(5) उपधारा 4) के अधीन किसी विवाद का न्याय के सिद्धांतों द्वारा मार्गदर्शिता होगा और ऐसा प्रक्रिया का पालन करेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए।

1908 का 5

(6) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को इस धारा के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए, निम्नलिखित विषयों के संबंध में, वही शक्तियाँ होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन किसी सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात:

क) किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना;

ख) दस्तावेजों को प्रकट और पेश करने की अपेक्षा करना;

ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना;

घ) साक्षियों या दस्तावजों की परीक्षा के लिए कमिशन निकलना;

ङ) अपने विनिश्चयों का पुनर्विलोकन करना;

च) व्यतिक्रम के लिए किसी आवेदन को ख़ारिज करने के किसी आदेश या उसके द्वारा एकपक्षीय रूप से विनिश्चय करना;

छ) व्यतिक्रम के लिए किसी आवेदन को ख़ारिज करने के किसी आदेश या उसके द्वारा एकपक्षीय रूप से पारित किसी आदेश को अपास्त करना;

ज) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाए ।

1860 का 45 / 1974 का 2

7) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का समक्ष प्रत्येक कार्यवाही भारतीय दंड संहिता की धारा 193 और धारा 228 के अंतर्गत और धारा 196 के प्रयोजन के लिए न्यायिककार्यवाही समझी जाएगी तथा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 195 और अध्याय 26 के प्रयोजन के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और राज्य जैव विविधता बोर्ड के सदस्यों, अधिकारीयों आदि को लोग सेवक समझा जाना।

1860 का 45 अपील।

51. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और राज्य बोर्ड के सभी सदस्य, अधिकारी और अन्य कर्मचारी, जब वे इस अधिनियम के उपबंधो में से किसे के अनुसरण में कार्य कर रहे हों जब उनका ऐसा कार्य करना तात्पर्य हो, भारतीय दंड स्न्हीगता की धारा 21 के अंतर्गत लोग सेवक समझे जाएंगे।

52. इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण या राज्य जैव विविधता बोर्ड के, फायदे में हिस्सेदारी की किसी अवधारणा या आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, यथास्थिति, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण या राज्य जैव विविधता बोर्ड के अवधारणा या आदेश की उसे संसूचना की तारीख से तीस दिन के भीतर उच्च न्यायालय को अपील कर सकेगा:

परन्तु यदि उच्च न्यायालय का यह समाधान जो जाता है कि अपीलार्थी उक्त अवधि की भीतर अपील फ़ाइल करने से पर्याप्त कारण से नियारित रहा है तो उक्त अपील साथ दिन से अनधिक की और अवधि अवधि के भीतर फ़ाइल किए जाने को अनज्ञात कर सकेगा।

अवधारणा या आदेश का निष्पादन

53 इस अधिनियम का अधीन राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण या राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा किया गया फायदे की हिस्सेदारी की प्रत्येक अवधारणा या आदेश अथवा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण या राज्य जैव विविधता प्राधिकरण या राज्य जैव विविधता बोर्ड के किसी अवधारणा या आदेश के विरूद्ध किसी अपील में उच्च न्यायालय द्वारा किया गया कोई आदेश, यथास्थिति, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण या राज्य जैव विविधता बोर्ड की किसी अधिकारी या उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार द्वारा जारी प्रमाणपत्र पर सिविल न्यायालय की डिक्री समझा जाएगा और उसी रूप में निष्पादनीय होगा जिसमें उस न्यायानल की डिक्री होती है।

स्पष्टीकरण – इस धारा और धारा 51 (क) के प्रयोजनों के लिए, “राज्य जैव विविधता बोर्ड”  पद अंतर्गत ऐसा व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह भी है जिसे धारा 22 की उपधारा (2) के अधीन की शक्तियाँ और कृत्य उस उपधारा के अधीन प्रत्यायोजित किए गए हैं और इस धारा के अधीन ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा जारी किए जाएगा।

सदभावपूर्वक की गई करवाई के लिए संरक्षण

54. इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के अधीन सदभावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी अधिकारी या राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण या राज्य जैव विविधता बोर्ड के किस सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी के विरूद्ध नहीं होगी।

शास्तियां

55. (1) जो कोई धारा 3 या धारा 4 या धारा 6 के उपबन्धों का उल्लंघन करेगा या प्रयास करेगा या उल्लंघन करने का दुष्प्रेरणा करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दस लाख रूपए तक का हो सकेगा और जहाँ कारित नुकसान दस लाख रूपए से अधिक हो वहाँ जुर्माना कारित नुकसान के अनुरूप होगा अथवा दोनों से दंडनीय किया जाएगा।”

2) जो कोई धारा 7 के उपबंधों का उल्लंघन करेगा या उल्लंघन करने का प्रयास करेगा आ धारा 24 की उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करेगा, कारावास से, जिसकी आवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच लाख रूपए तक का जो सकेगा, या दोनों से दंडनीय जोग।

केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और और राज्य जैव विविधता बोर्डो के निदेशों या आदेशों का उल्लंघन करने के लिए शास्ति।

56. यदि कोई व्यक्ति केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण या राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा दिए गए किसी निदेश या किए गए किसे आदेश का उल्लंघन करता है जिसके लिए इस अधिनियम के अधीन पृथक रूप से किसी दंड का उपबंध नहीं किया गया है, तो वह जुर्माने से जो एक लाख रूपए तक का हो सकेगा और किसी दुसरे या पश्चातवर्ती अपराध के लिए जुर्माने से जो दो लाख रूपए तक का हो सकेगा तथा निरंतर उल्लंघन के मामले में अतिरिक्त जुर्माने से व्यतिक्रम जारी रहने के दौरान प्रत्येक दिन के लिए दो लाख रूपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।

कंपनियों द्वारा अपराध।

57. (1)  जहाँ इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध या उल्लंघन किसी कंपनी द्वारा किया गया है; वहाँ ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध या उल्लंघन के लिए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी, ऐसे अपराध या उल्लंघन के दोषी समझे जायेंगे और तदनुसार अपने विरूद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:

परन्तु इस उपधारा की कोई बात, किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबंधित किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध या उल्लंघन उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध या उल्लंघन के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक तत्परता बरती थी।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहाँ इस अधिनियम के अधीन किसी कंपनी द्वारा कोई दंडनीय अपराध या उल्लंघन किया गया है और यह साबित जो जाता है कि वह अपराध या उल्लंघन कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी अपराध या उल्लंघन का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरोद्ध कार्यवाही किए जाने के लिए और दंडित किए जाने का भागी होगा।

स्पष्टीकरण  इस धारा के प्रयोजनों के लिए’

क) “कंपनी” से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम है; और

(ख) फर्म के संबंध में “निदेशक” से उस फार्म का भागीदारी अभिप्रेत है।

अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे

58. इस अधिनियम के अधीन अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे।

अधिनियम अन्य अधिनियमों के अतिरिक्त होगा

59. इस अधिनियम के उपबंध वन और वन्यजीव से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधो के अतिरिक्त होंगे और न कि उनके अल्पीकरण में।

केंद्र सरकार की राज्य सरकारों को निर्देश देने की शक्ति

60. केंद्रीय सरकार इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम या किए गए आदेश के किन्हीं उपबंधों को किसी राज्य में निष्पादन करने के लिए किसी राज्य सरकार को निर्देश दे सकेगी।

अपराधों का संज्ञान

61. कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का संज्ञान-

क) केन्द्रीय सरकार या उस सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी प्राधिकारी या अधिकारी द्वारा; या

ख) ऐसे किसी फायदे के दावेदार द्वारा जिसने ऐसे अपराध की और कोई परिवाद किए जाने के अपने आशय की केन्द्रीय सरकार या पूर्वोक्त रूप में प्राधिकृत या अधिकारी को विहित रीति में तीस दिन से अन्यून की सूचना दे दी है,

किए गए परिवाद पर ही करेगा अन्यथा नहीं।”

केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति

62. 1) केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियमके प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।

2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों का उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-

क) धारा 9 के अधीन अध्यक्ष और सदस्य की सेवा के निबंधन और शर्तें;

ख) धारा के 10 के अधीन अध्यक्ष की शक्तियाँ और कर्तव्य;

ग) अधिवेशनों में कारबार से संव्यवहार के संबंध में धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन प्रक्रिया।

घ) धारा 19 के उपधारा (1) के अधीन कतिपय क्रियाकलाप करने के लिए आवेदन का प्ररूप और उसके लिए फ़ीस का संदाय;

ङ) धारा 19 की उपधारा (2) के अधीन आवेदन करने का प्रारूप और रीति;

च) धारा 20 की उपधारा (2) के अधीन जैवीय संसाधन या ज्ञान के अंतरण के लिए आवेदन का प्रारूप और रीति;

छ) वह प्रारूप जिसमें और प्रत्येक वित्त्तीय वर्ष का वह समय जिस पर धारा 28 के अधीन राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की वार्षिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी और वह तारीख जिससे पूर्व उस पर संपरीक्षक की रिपोर्ट के साथ लेखाओं की संपरीक्षित प्रति दी जाएगी;

ज) वह प्रारूप जिसमें धारा 29 के अधीन वार्षिक लेखा- विवरण तैयार किया जाएगा।

झ) वह समय जिसके भीतर वह प्रारूप जिसमें अपील की जा सकेगी, और अपील की निपटारा करने के लिए प्रक्रिया तथा धारा 50 के अधीन न्याय- निर्णय के लिए प्रक्रिया;

ञ) वह अतिरिक्त विषय जिसमें राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण धारा 50 की उपधारा (6) के खंड (ज) के अधीन सिविल न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा;

(ट) धारा 59 के खंड (ख) के अधीन सूचना देने की रीति;

(ठ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जाए अथवा जिसकी बाबत नियमों द्वारा उपबंध किया जाना है।

(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक विनिमय बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष जब वह सत्र में कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा। यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक के लिए रखा जाएगा। यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी। यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत जो जाएँ तो तत्पश्चात वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा। यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएँ कि वह नियम या विनिमय नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात वह निष्प्रभाव जो जाएगा किन्तु नियम या विनिमय के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति।

63. (1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों का उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-

क) धारा 23 के खंड (iiii) के अधीन राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा निर्वहन किये जाने वाले अन्य कृत्य;

ख) वह प्रारूप जिसमें धारा 24 की उपधारा (1) के अधीन जैव पूर्व सूचना दी जाएगी;

ग) वह प्रारूप जिसमें और प्रत्येक वित्तीय वर्ष का वह समय जिस पर धारा 33 के अधीन वार्षिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी;

घ) धारा 34 के अधीन राज्य जैव विविधता बोर्ड के लेखा रखने और उनकी संपरीक्षा करने की रीति तथा वह तारीख जिससे पूर्व उन पर संपरीक्षक की रिपोर्ट के साथ लेखाओं की संपरीक्षक प्रति दी जाएगी।

ङ) धारा 37 के अधीन राष्ट्रीय विरासत स्थलों के प्रबंध और संरक्षण;

च) वे प्रयोजन जिनके लिए धारा 44 की उपधारा (1) के अधीन स्थानीय जैव विविधता निधि का उपयोजन;

छ) धारा 44 की उपधारा (1) के अधीन स्थानीय जैव विविधता निधि के प्रबंध और अभिरक्षा की रीति तथा वह प्रयोजन जिनके लिए ऐसी निधि का उपयोग किया जाएगा।

ज) धारा 45 के अधीन वार्षिक रिपोर्ट का प्रारूप और वह समय जिस प्रत्येक फ=वित्तीय वर्ष के दौरान ऐसी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

झ) धारा 46 के अधीन स्थानीय जैव विविधता निधि के लेखा रखने और उनकी संपरीक्षा करने की रीति तथा वह तारीख जिससे पूर्व उन पर संपरीक्षा की रिपोर्ट के साथ उसके लेखाओं की संपरीक्षित प्रति दी जाएगी।

ञ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना जाना है या किउअ किया जाए।

(3) इस धारा के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र राज्य विधान- मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जहाँ इसके दो सदन हैं या जहाँ ऐसे विधान –मंडल का एक सदन है, उस सदन के समक्ष रखा जाएगा।

विनिमय बनाने की शक्ति।

64. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगा।

कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति।

65. (1) यदि इस अधिनियम के उपबंधो को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार ऐसे आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबंधो से असंगत न हो, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी;

परन्तु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात नहीं किया जाएगा।

(2) इस अधिनियम के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा।

जैव विविधता नियम, २००४ पर्यावरण और वन मंत्रालय अधिसूचना

नई दिल्ली, 15 अप्रैल, 2004

सा.का.नि. 261 (अ) केंद्रीय सरकार, जैव अधिनियम, 2002 की धारा 62 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के वेतन, भत्ते और सेवा की शर्ते) नियम, 2003 को उन बातों के सिवाय अधिक्रांत करते हुए, जिन्हें ऐसे अधिक्रमण से पहले किया गया है या करने का लोप किया गया है, निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्:-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ :-

(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम जैव विविधता नियम, 2004 है।

(2) ये 15 अप्रैल, 2004 को प्रवृत होंगे।

2. परिभाषाएँ :-

इन नियमों में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,

(क) “अधिनियम” से जैव विविधता अधिनियम, 2002 (2003 का 18) अभिप्रेत है;

(ख) “ प्राधिकरण” से धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित राष्ट्रीय जैव विविधता प्रबंध समिति अभिप्रेत है;

(ग) “जैव विविधता समिति” से स्थानीय निकाय द्वारा धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित कोई जैव विविधता प्रबंध समिति अभिप्रेत;

घ) “अध्यक्ष” से यथास्थिति राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण या राज्य जैव विविधता बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है;

ङ) “ फ़ीस” से अनुसूची में नियत कोई फ़ीस अभिप्रेत है;

च) “प्ररूप” से इन नियमों से उपाबद्ध प्ररूप अभिप्रेत है;

छ) “सदस्य” से यथास्थिति राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण या राज्य जैव विविधता बोर्ड के सदस्य अभिप्रेत है; और जिसके अंतर्गत अध्यक्ष भी है;

ज) “धारा” से अधिनियम की धारा अभिप्रेत है;

झ) “सचिव” से प्राधिकरण का पूर्णकालिक सचिव अभिप्रेत है;

ञ) ऐसे शब्दों और पदों के जिनका प्रयोग किया गया है, किन्तो वे इन नियमों में परिभाषित नहीं है और अधिनियम में परिभाषित है, वही अर्थ हैं जो अधिनियम में हैं।

3. अध्यक्ष के चयन और नियुक्ति की रीति

1) प्राधिकरण के अध्यक्ष की नियुक्ति केंद्रीय सरकार द्वारा की जाएगी।

2) उपधारा (1) के अधीन अध्यक्ष की प्रत्येक नियुक्ति केन्द्रीय सरकार से बाहर से प्रतिनियूक्ति के आधार की पर या चयन द्वारा की जाएगी। प्रतिनियूक्ति के माध्यम से नियुक्ति की दशा में आवेदक भारत  के अपर सचिव से नीचे की पंक्ति का नहीं होना चाहिए।

4. अध्यक्ष की पदावधि

1) प्राधिकरण का अध्यक्ष तीन वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेगा और पूनार्नियूक्ति के लिए पात्र होगा।

2) परन्तु कोई अध्यक्ष 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर या उसकी पदावधि की सम्पति के पश्चात, जो भी पूर्वतर हो, पद धारण नहीं करेगा।

3) अध्यक्ष केन्द्रीय सरकार को कम से कम एक मास की सूचना देकर अपने पद से त्यागपत्र दे सकेगा।

5. अध्यक्ष का वेतन भत्ते:-

1) अध्यक्ष 26,000 रू. प्रतिमाह के नियत वेतन का हकदार होगा। किसी सेवानिवृत्त व्यक्ति की अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति की दशा में, उसका वेतन उस व्यक्ति को लागू केन्द्रीय सरकार के आदेशों के अनुसार नियत किया जाएगा।

2) अध्यक्ष ऐसे भत्तों, छुट्टी, पेंशन, भविष्य निधि, आवास और अन्य परिलब्धियों आदि के हकदार होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर विनिश्चित की जाएँ।

6. गैर- सरकारी सदस्यों की पदावधि और भत्ते

1) प्राधिकरण का प्रत्येक गैर सरकारी सदस्य राजपत्र में उसकी नियुक्ति के प्रकाशन की तारीख से एक समय में तीन वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए अपना पद धारण करेगा।

2) प्राधिकरण की बैठक में उपस्थित होने वाले प्रत्येक गैर सरकारी सदस्य ऐसे बैठक भत्ता, यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता और ऐसे अन्य भत्तों का हक़दार होगा जो केन्द्रीय सरकार के आयोगों और समितियों के गैर सरकारी सदस्यों के ऐसे आयोगों या समितियों के अधिवेशनों में उपस्थित होने के लिए लागू हैं।

7. गैर सरकारी सदस्यों की रिक्तियों का भरा जाना

1) प्राधिकरण का कोई गैर सरकारी सदस्य किसी भी समय लिखित में अपने हस्ताक्षर से केन्द्रीय सरकार को संबोधित करके अपने पड़ से त्यागपत्र दे सकेगा और प्राधिकरण में उस सदस्य का स्थान रिक्त जो जाएगा।

2) प्राधिकरण में किसी गैर सरकारी सदस्य की आकस्मिक रिक्ति नय नामनिर्देशन द्वारा भरी जाएगी और रिक्ति को भरने के लिए नाम निर्दिष्ट व्यक्ति व्यक्ति इस पद को उस सदस्य की, जिसके स्थान पर उसे नाम निर्देशित किया गया है, शेष पदावधि तक धारण करेगा।

8. प्राधिकरण के सदस्य का हटाया जाना

प्राधिकरण के किसी सदस्य को, धारा 11 में विनिद्रिष्ट किसी आधार पर किसी ऐसे अधिकारी द्वारा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त भारत सरकार के सचिव से नीचे की रेंक का न हो, सभ्यक और उचित जाँच कराए बिना और ऐसे जाएगा।

9. प्राधिकरण का सचिव

1) प्राधिकरण अपने लिए एक सचिव की नियुक्ति करेगा।

2) सचिव की नियुक्ति के निबंध और शर्ते प्राधिकरण द्वारा विनियम द्वारा अवधारित की जाएगी।

3) सचिव प्राधिकरण के अधिवेशनों का समन्वयन और अधिवेशन बुलाने और प्राधिकरण के कर्मचारियों का अभिलेख रखने और ऐसे अन्य विषयों, जो उसे प्राधिकरण द्वारा सौपें जाएँ, के लिए उत्तरदायी होगा।

10. प्राधिकरण के अधिवेशन

1) प्राधिकरण के अधिवेशन तीन मास की अवधि के पश्चात एक वर्ष में कम से कम चार बार प्राधिकरण के मुख्यालय पर या ऐसे स्थान पर, जो अध्यक्ष द्वारा विनिश्चित किया जाए, आयोजित होगा।

2) अध्यक्ष प्राधिकरण के कम से कम पांच सदस्यों के लिखित अनुरोध पे या केन्द्रीय सरकार के निर्देश पर प्राधिकरण की विशेष बैठक बुला सकेगा।

3) सदस्यों को कोई सामान्य अधिवेशन आयोजित करने के लिए कम से कम 15 दिन की सूचना दी जाएगी और विशेष अधिवेशन बुलाने के लिए उद्देश्य, समय व स्थान जिस पर ऐसा अधिवेशन आयोजित किया जाएगा, विनिर्दिष्ट करते समय कम से कम तीन दिन की सूचना दी जाएगी।

4) प्रत्येक अधिवेशन की अध्यक्षता अध्यक्ष द्वारा की जाएगी और उसकी अनुपस्थिति में उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने में से चुने गए किसी पीठासीन अधिकारी द्वारा की जाएगी।

5) प्राधिकरण के किसी अधिवेशन में विनिश्चय, येई आवश्यक हो, उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से किया जाएगा और अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में अध्यक्षता करने वाले सदस्य का द्वितीय या निर्णायक मत होगा।

6) प्रत्येक सदस्य का एक मत होगा।

7) प्राधिकरण के प्रत्येक अधिवेशन में गणपूर्ति पांच होगी।

8) कोई सदस्य किसी अधिवेशन में ऐसे किसी विषय पर, जिसमें उसे दस दिन की सूचना नहीं दी गई है, अधिवेशन पर विचार करने के लिए अग्रसारित नहीं होगा जब तक कि उसे ऐसा करने के लिए अध्यक्ष स्वविवेक से ऐसा करने के लिए अनुज्ञात न करें।

9) अधिवेशन की सूचना सदस्यों से संवाहक द्वारा परिदत्त करके या इसे उसके अंतिम निवास या कारबार के ज्ञात स्थान पर रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा भेजकर या ऐसी अन्य रीति में जिसे मामले की परिस्थितियों में प्राधिकरण का सचिव ठीक समझे, दी जा सकेगी।

11. प्राधिकरण द्वारा विशेषज्ञ समिति की नियुक्ति और उनकी हकदारी:-

1) प्राधिकरण ऐसे प्रयोजनों के लिए, जिन्हें वह ठीक समझे, उतनी संख्या में समितियाँ गठित कर सकेगा जो पूर्णत: सदस्यों या पूर्णत: अन्य व्यक्तियों या अंशत: सदस्यों या अंशत: अन्य व्यक्तियों से मिलकर बनेगी।

2) प्राधिकरण के श्स्यों से भिन्न समिति के सदस्यों द्वारा अधिवेशन में उपस्थित होने के लिए ऐसी फ़ीस और भत्तों का संदाय किया जाएगा जो प्राधिकरण ठीक समझे।

12. प्राधिकरण के साधारण कृत्य: -

प्राधिकरण निम्नलिखित कृत्यों का पालन कर सकेगा, अर्थात् :-

1) धारा 3, धारा 4 और धारा 6 के अधीन उपबंधित क्रियाकलापों को शासित करने के लिए प्रक्रिया और मार्गदर्शक सिद्धांत अधिकथित करना;

2) केन्द्रीय सरकार के जैव विविधता के संरक्षण और उसके संघटकों को पोषणीय उपयोग तथा जैविक स्रोतों और ज्ञान के उपयोग से अदभुत फायदों के उचित और साम्यापूर्ण प्रभाजन से संबंधित विषयों के संबंध में सलाह देना;

3) राज्य जैव विविधता बोर्डों के क्रियाकलापों को समन्वित करना;

4) राज्य जैव विविधता बोर्डों को तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना;

5) अध्ययन आरंभ करना और अन्वेषण तथा अनूसंधान प्रयोजित करना;

6) प्राधिकरण को उसके कृत्यों के प्रभावी निर्वहन मर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए तीन वर्ष से अनधिक की विनिर्दिष्ट अवधि के लिए परामर्शदाताओं को लगाना;

परंतु यह की यदि तीन वर्ष से अधिक की अवधि के लिए किसी परामर्शदाता को लगाना आवश्यक और समीचीन है तो प्राधिकरण ऐसे लगाए जाने के लिए केन्द्रीय सरकार का पूर्वानुमोदन मांगेगा।

7) जैव विविधता संरक्षण, उसके संघटकों के पोषणीय उपयोग और जैवीय संसाधनों और ज्ञान और उपयोग से उद्भूत फायदों के उचित और साम्यापूर्ण प्रभाजन से संबंधित तकनीकी और संख्याकिय आंकड़े और मैनुअल, सहिंतायेंया गाइडें संगृहित, संकलित और प्रकशित करना;

8) जैव विविधता संरक्षण, उसके संघटकों के पोषणीय उपयोग और जैवीय संसाधनों और ज्ञान और उपयोग से अदभुत फायदों के उचित साम्यापूर्ण प्रभाजन से संबंधित जन प्रचार द्वारा एक वृहत कार्यक्रम आयोजित करना;

9) जैव विविधता संरक्षण और उसके संघटकों के पोषणीय उपयोग के लिए कार्यक्रमों में लगे या लगाए या लगाए जाने वाले कार्मिकों के लिए योजना और प्रशिक्षण आयोजित करना;

10) प्राधिकरण का उसकी रसीदों और केन्द्रीय सरकार से उसके अवमूल्यन को भी समाविष्ट करते हुए वार्षिक बजट तैयार करना परंतु यह कि केन्द्रीय सरकार द्वारा आबंटन केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित बजट उपबंधों के अनुसार प्रचालित किया जाएगा;

11) प्राधिकरण के कृत्यों का प्रभावी रूप से निर्वहन करने के लिए केन्द्रीय सरकार को पदों के सृजन करने के सिफारिश करना परन्तु ऐसा पद चाहे स्थायी/अस्थायी हो या किसी भी प्रकृति का हो, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानूमोदन के बिना सृजित नहीं किया जाएगा;

12) प्राधिकारियों के अधिकारीयों और सेवकों को भर्ती की पद्धति का अनुमोदन करना;

13) प्रभावी प्रबंधन, संवर्धन और पोषणीय उपयोगों को सुनिश्चित करने के लिए जैव विविधता रजिस्टर और इलेक्ट्रोनिक डाटा बेस के माध्यम से जैवीय संसाधनों और सहबद्ध पारंपरिक ज्ञान के लिए डाटा बेस बनाने और जानकारी तथा दस्तावेज पद्धति सृजित करने के लिए कदम उठाना;

14) राज्य जैव विविधता बोर्डों और जैव विविधता प्रबंध समितियों को अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए लिखित में निर्देश देना;

15) प्राधिकरण के कार्यकरण और अधिनियम के कार्यान्वयन के बारे में केन्द्रीय सरकार को रिपोर्ट देना;

16) समय-समय पर जैवीय संसाधनों की बाबत धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन फ़ीस या धारा 19 की उपधारा (3) के अधीन स्वामित्वों  के प्रभारों के फायदे के प्रभाजन की सिफारिश, उपांतरित और संगृहित करना;

17) विनीर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए राज्य जैव विविधता बोर्ड और जैव विविधता प्रबंध समितियों के लिए अनुदान सहायता और अनुदान मंजूर करना;

18) अधिनियम के कार्यान्वयन के संबंध में किसी क्षेत्र का वास्तविक निरिक्षण कराना;

19) भारत से बाहर किसी देश में किसी जैवीय संस्थान और किसी अवैध रीति में भारत से अभिप्राप्त ज्ञान के संबंध में बौद्धिक संपदा अधिकार अनूद्त्त किए जाने का विरोध करने के लिए विधि विशेषज्ञों की नियुक्ति के  लिए आवश्यक उपाय करना;

20) ऐसे  अन्य कृत्य करना जो समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा सौंपे जाएँ या निर्देशित किए जाएँ;

(2) राज्य जैव विविधता बोर्ड और अन्य राज्य विविधता बोर्ड या बोर्डों के बीच विवाद अदभुत होने की दशा में व्यथित बोर्ड या बोर्डों द्वारा विवाद के बिन्दु या बिंदुओं को केन्द्रीय सरकार को भेजा जाएगा जो उन्हें प्राधिकारण को निर्दिष्ट करेगा;

(3) अपील के ज्ञापन में मामले के तथ्य, वे धारा जिनका अपिलाथी ने अपील करने के लिए आश्रय लिया है और चाहा गया अनुतोष कथित होंगे;

(4) अपील ज्ञापन के साथ आदेश, निदेश या नीतिगत विनिश्चय यथास्थिति उस आदेश, निदेश या नीतिगत विनिश्चय की एक अधिप्रमाणित प्रति होगी जिसके द्वारा अपीलार्थी व्यथित है और जो अपीलार्थी के प्राधिकृत प्रतिनिधि सम्यक रूप से हस्ताक्षरित होगें;

(5) अपील का ज्ञापन विवादित आदेश, निदेश या नीतिगत विनिश्चय की तारीख से टिस दिन के भीतर चार प्रतियों में या तो व्यक्तिगत रूप से रसीदी रजिस्ट्रीकृत डाक से या सम्यक रसीदी रजिस्ट्रीकृत डाक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा;

परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि अपील करने में विलंब होने के लिए अच्छा और पर्याप्त कारण था तो लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से वह पूर्वगत तीस दिन की अवधि के अवसान के पश्चात् किन्तु यथास्थिति, विवादित आदेश, निदेश या नीतिगत विनिश्चय की तारीख से 45 दिन के अवसान से पूर्व अपील किया जाना अनुज्ञात कर सकेगी;

(6) अपील की सुनवाई की सूचना प्ररूप 6 में सम्यक रसीदी रजिस्ट्रीकृत डाक से दी जाएगी;

(7) केन्द्रीय सरकार अपीलार्थी और पक्षकारों के पश्चात् अपील की निपटारा सुनवाई करेगी;

(8) किसी अपील का निपटारा करते समय वह यथास्थिति विवादित अदेश, निदेश या नीतिगत विनिश्चय को परिवर्तित, उपांतरित या रद कर सकेगा;

(9) प्राधिकरण किसी विवादित का न्याय निर्णयन करने में प्राकृतिक न्याय के सिंद्धतों द्वारा मार्गदर्शित होता यथासध्य उसी प्रक्रिया को अपनाएगा जिसको इस नियम के अधीन केन्द्रीय सरकार से अपनाए जाने की अपेक्षा है।

24. धारा 61 के अधीन सूचना देने की रीति

(1) धारा 61 के खंड (ख) के अधीन सूचना देने की रीति निम्नानुसार होगी, अर्थात :-

क) सूचना लिखित में प्ररूप 7MM में होगी।

ख) सूचना देने वाला व्यक्ति उसे;

i) यदि अभिकथित अपराध संघ राज्य क्षेत्र में हुआ है तो राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अध्यक्ष को; और

ii) यदि अभिकथित अपराध राज्य में हुआ है तो राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष को भेजेगा।

(2) उपनियम (1) में निर्दिष्ट सूचना सम्यक रसीदी रजिस्ट्रीकृत डाक से भेजी जाएगी; और

(3) धारा 61 के खंड (ख) में वर्णित तीस दिन की अवधि की गणना उस तारीख से की जाएगी, जिसको उपनियम (1) में वर्णित प्राधिकारियों द्वारा सूचना प्राप्त की जाती है।

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