सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

कृषि विपणन : राष्ट्रीय कृषि बाज़ार

इस भाग में कृषि विपणन : राष्ट्रीय कृषि बाज़ार योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।

परिचय (क्या करें ?)

  • किसान अपनी उपज की कीमत की जानकारी एगमार्क नेट वेबसाइट पर या किसान का कॉल सेंटर अथवा एसएमएस के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।
  • अपनी आवश्यकता अनुसार उपलब्ध एसएमएस को देखें और सूचना प्राप्त करें।
  • वेबसाइट पर क्रेता विक्रेता उपलब्ध है।
  • फसल की कटाई और गहराई उचित समय पर की जानी चाहिए।
  • उचित कीमत के लिए बिक्री से पहले उचित ग्रेडिंग, पैकिंग और लेबलिंग की जानी चाहिए।
  • उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए उचित बाजार/मंडी में बिक्री करनी चाहिए।
  • मजबूरन बिक्री से बचना चाहिए।
  • बेहतर विपणन सुविधाओं के लिए किसान समूह में सहकारी विपणन समितियाँ एफपीओ गठित कर सकते है।
  • विपणन समितियाँ खुदरा और थोक दूकानें खोल सकतीं हैं।
  • मजबूरन बिक्री से बचने के लिए किसान उपज के भण्डारण के लिए शीत  भण्डारण और गोदाम बना सकते हैं।

कृषि विपणन इन्फा (एएमआई)

कृषि विपणन इन्फ्रा को तत्काल बंद कर दिया गया है। किसी तरह की जानकारी अथवा विवरण प्राप्त करने के लिए आप उप कृषि विपणन सलाहकार, विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय, फरीदाबाद से संपर्क कर सकते हैं।

राष्ट्रीय कृषि बाज़ार (इ-नाम)

कृषि विपणन क्षेत्र में प्रवेशक सुधार के उद्देश्य से और किसानों को अधिकतम लाभ देने के लिए पूरे देश में कृषि जिंशों को ऑन – लाइन विपणन को प्रोत्साहन देने के लिए भारत सरकार ने दिनांक 01.07.2015 को राष्ट्रीय कृषि बाजार को कार्यान्वयन के लिए एक योजना अनुमोदित की है। इस योजना के अंतर्गत सभी 250 नियमित बाजारों में यथोचित सामान्य ई- मार्केट प्लेटफार्म उपलब्ध कराया गया है, जिससे ऑन – लाइन ट्रेडिंग करने, ई- परमिट जारी करने और ई-  भुगतान आदि करने के साथ – साथ बाजार के संपूर्ण कार्य के डिजिटलाइजेशन को प्रोत्साहित किया जा सके। इसके साथ – साथ सूचना विषमता का दूर करने, लेन – देन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और पूरे देश की बाजारों में पहुँच आसान बनाने में इससे सहायता मिलेगी। यह किसानों को वास्तविक लाभ देने के लिए आवश्यक होगा। राष्ट्रीय कृषि विपणन (एनएएम) दिशानिर्देश शीघ्र ही 14.04.2016 को 8 राज्यों की 20 मंडियों में शुरू किया गया है। अब तक 10 राज्यों में आन्ध्र प्रदेश (12), छत्तीसगढ़  (5), गुजरात (40), हरियाणा (37), हिमाचल प्रदेश (20) राजस्थान (11) तेलंगाना (44) और यूपी (66) ई- एनएएम् पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया। अधिक जानकारी के लिए कृपया भी श्री सुभाष शर्मा, पीएमयू, एनएएम्, लघु किसान  कृषि व्यवसाय संगठन, नई दिल्ली (e-mail ID nam@sagac-in) को संपर्क करें। योजनाओं की विस्तृत जानकारी  www.enam.gov.in पर उपलब्ध है।

किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ)

एफपीओ में किसान कैसे सम्मिलित हों

किसानों का एक समूह जो वास्तव में कृषि उत्पादन कार्य में लगा हो और जो कृषि व्यवसायिक गतिविधयों चलाने में एक जैसी धारणा रखते हों, एक गाँव अथवा कई गांवों को सम्मिलित कर एक समूह बना सकते है और संगत कंपनी अधिनियम के अधीन एक किसान उत्पादन कंपनी के पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।

एफपीओ के गठन से किसान को क्या लाभ होंगे

क.  यह एक सशक्तिशील संगठन होने के कारण एफपीओ के सदस्य के रूप में किसनों को बेहतर सौदेबाजी करने की शक्ति देगी जिसे उन्हें जिंशो को प्रतिस्पर्धा मूल्यों पर खरीदने या बेचने का उचित लाभ मिल सकेगा।

ख. बेहतर विपणन सुअवसरों के लिए कृषि उत्पादों का एकत्रीकरण। बहुलता में व्यापार करने से प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन इत्यादि मदों में होने वाले संयूक्त खर्चों से किसानों को बचत।

ग. एफपीओ मूल्य संवर्धन के लिए छंटाई/ग्रेडिंग, पैकिंग, प्राथमिक प्रसंस्करण इत्यादि जैसे गतिविधियाँ शुरू कर सकता है जिससे किसनों के उत्पादन को उच्चतर मूल्य मिल सकता है।

घ. एफपीओ के गठन से ग्रीन हाउस, कृषि मशीनीकरण, शीत भण्डारण, कृषि प्रसंस्करण इत्यादि जैसे कटाई पूर्व और कटाई पश्चात संसाधनों के उपयोग में सुविधा।

ङ. एफपीओ आदान भंडारों, कस्टम केन्द्रों इत्यादि को शुरू कर अपनी व्यवसायिक गतिविधियों को विस्तारित कर सकते हैं। जिससे इसके सदस्य किसान आदानों और सेवाओं का उपयोग रियायती दरों पर ले सकते हैं।

एफपीओ में आवेदन करने के लिए संपर्क सूत्र

आमतौर पर कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग द्वारा राज्यों में कार्यान्वित विभिन्न केन्द्रीय क्षेत्र योजनाओं के अंतर्गत एफपीओ को प्रोत्साहित किया जाता है। एफपीओ गठित करने के इच्छुक किसानों को विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित विभाग/ लघु कृषक कृषि व्यवसाय संगठन के निदेशक (ई- मेल: sfac@nic.in)  से संपर्क कर सकते हैं।

क्या पायें ?

क्र. सं

 

सहायता का प्रकार

 

श्रेणी

अनुदान सब्सिडी की अधिकतम सीमा

योजना

 

 

 

पूँजी लागत पर अनुदान (सब्सिडी) की दर

1000 मेट्रिक टन तक (रू. प्रति मेट्रिक टन में)

1000 से अधिक से 30000 मेट्रिक टन (रू. प्रति मेट्रिक टन में)

अधिकतम (रू. लाख में)

 

1.

भण्डारण संसाधन परियोजनाओं के लिए कृषि विपणन संसाधन (एएमआई) आईएसएएम की उपयोजना (पूर्व में ग्रामीण भण्डारण योजना)

क) उत्तरपूर्वी राज्यों, सिक्किम, अंडमान निकोबार और पर्वतीय क्षेत्र

33.33%

 

1333.20

 

1333.20

 

400.00

 

कृषि विपणन के लिए सामेकित योजना (आईएसएएम)

ख. अन्य क्षेत्रों में

1. पंजीकृत एफपीओ, पंचायतों, महिलाओं अनुसूचित जाति, (एससी)/ अनुसूचित जनजाति (एसटी) लाभार्थियों अथवा उनकी सहकारिताएं /स्व-सहायता समूहों के लिए

33.33%

 

1166.55

 

 

1000.00

 

300.00

 

 

2. लाभार्थियों के अन्य सभी वर्गों के लिए

33.33%

875.00

750.00

225.00

 

 

सहायता के प्रकार

श्रेणी

अनुदान (सब्सिडी) की दर

अनुदान (सब्सिडी) की अधिकतम सीमा (रू. लाख में)

योजना

 

 

2)

अन्य विपणन संसाधन परियोजनाओं  के लिए

कृषि विपणन संसाधन(एएम्आई) आईएसएएम् की उपयोजना

(पूर्व में कृषि विपणन संसाधन, ग्रेडिंग एवं मानकीकरण का विकास/सुदृढ़करण योजना)

क. उत्तरपूर्वी राज्य, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर राज्य, अंडमान निकोबार एवं लक्षद्वीप समूह संघ शासित क्षेत्र और पर्वतीय और आदिम क्षेत्र

 

33.33%

 

500.00

 

 

कृषि विपणन के लिए समेकित योजना

 

 

 

 

2. अन्य सभी वर्गों के लाभार्थियों के लिए

25%

400.00

 

 

 

 


  • पर्वतीय क्षेत्र वे हैं जो समुद्री स्तर से 1000 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर स्थित हैं।
  • एससी/एसटी समितियाँ राज्य सरकार के संबंधित अधिकारीयों द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए।
  • वर्तमान में योजना उत्तरपूर्वी राज्यों एवं अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उत्थान के लिए उपलब्ध है सामान्य श्रेणी के लिए सब्सिडी की मंजूरी दिनांक 05.08.2014 से अस्थाई रूप से बंद कर दी गई है।

उपयुक्त विपणन संसाधन

  • कटाई पश्चात प्रबंधन के लिए आवश्यक सभी विपणन संसाधन।
  • बाजार उपयोगकर्ता के लिए बाजार यार्ड इत्यादि जैसी आम सुविधाएँ।
  • ग्रेडिंग, मानकीकरण और गुणवत्ता प्रमाणन, लेवलिंग, पैकिंग और मूल्य संवर्धन सुविधाओं (गुणवत्ता को बिना परिवर्तित किए) के लिए संसाधन।
  • उत्पादक से उपभोक्ता तक/प्रसंस्करण यूनिट थोक क्रेता इत्यादि से सीधी बिक्री के लिए संसाधन।
  • कोल्ड सप्लाई चेन की व्यवस्था के लिए आवश्यक रिफर बैन जिसे कृषि उप्तादों के परिवहन के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • खाद्यान्न भण्डारण के लिए गोदाम की तरह संग्रह संरचना।

अनुदान (सब्सिडी)/ऋण के लिए कहाँ आवेदन/संपर्क करें?

  • वाणिज्यिक  बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैकों, राज्यों सहकारी बैंकों इत्यादि।
  • समितियों द्वारा परियोजना के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम।
  • www.agmarknet.nic.in पर उपलब्ध समेकित कृषि विपणन पर अधारित स्कीम निर्देशितका में विस्तृत सूचना दी गई है।

 

स्त्रोत: कृषि,सहकारिता और किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार

3.03125

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
Back to top

T612019/10/23 10:50:50.073419 GMT+0530

T622019/10/23 10:50:50.099957 GMT+0530

T632019/10/23 10:50:50.274367 GMT+0530

T642019/10/23 10:50:50.274820 GMT+0530

T12019/10/23 10:50:50.045422 GMT+0530

T22019/10/23 10:50:50.045598 GMT+0530

T32019/10/23 10:50:50.045767 GMT+0530

T42019/10/23 10:50:50.045925 GMT+0530

T52019/10/23 10:50:50.046026 GMT+0530

T62019/10/23 10:50:50.046127 GMT+0530

T72019/10/23 10:50:50.047035 GMT+0530

T82019/10/23 10:50:50.047257 GMT+0530

T92019/10/23 10:50:50.047498 GMT+0530

T102019/10/23 10:50:50.047741 GMT+0530

T112019/10/23 10:50:50.047789 GMT+0530

T122019/10/23 10:50:50.047884 GMT+0530