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परम्परागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई)

इस पृष्ठ में परम्परागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) की जानकारी दी गयी है I

भूमिका

भारत में जैविक खेती की परंपरा और महत्व आरम्भ से ही रही हैI पूर्ण रूप से जैविक खादों पर आधारित फसल पैदा करनाजैविक खेती कहलाता है। दुनिया के लिए भले ही यह नई तकनीक हो, लेकिन देश में परंपरागत रूप से जैविक खाद पर आधारित खेती होती आई है। जैविक खाद का इस्तेमाल करना देश में परंपरागत रूप से होता रहा है।

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ आर्गेनिक एग्रीकल्चर मूवमेंट (आईऍफ़ओएएम) द्वारा किए गए 2013 के एक अध्ययन के अनुसार, पूरे विश्व में लगभग दो लाख किसान जो जैविक खेती के तरीकों का अभ्यास करते है उन फार्मों का लगभग 80 प्रतिशत भारत में हैं। यह मानना गलत नहीं होगा कि हमारे देश में एक जैविक क्रांति का केंद्र बिंदु है जो पूरे विश्व को अपने क्रांति लहर में समेट लेगा I भारत में जैविक खेती की बहुतायत निश्चित रूप से आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि यह सदियों से पुराने हमारे पूर्वजों द्वारा की जानेवाली खेती प्रथाओं के एक निरंतरता है।

हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में रसायनिक खादों पर निर्भरता बढ़ने के बाद से जैविक खाद का इस्तेमाल नगण्य हो गया है।आज के समय में बढ़ते हुए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग को देखते हुए जैविक खेती भारत में और भी महत्वपूर्ण बन गया है। दुनिया भर में जैविक खाद्य के लिए मांग में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। इन जैविक खेती की तकनीक को बढ़ावा मिलने से भारत इन खाद्य पदार्थों के विशाल निर्यात की संभावनाओं को साकार कर सकता है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने परम्परागत कृषि विकास योजना को शुरू किया है।

परम्परागत कृषि विकास योजना

राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन का एक सविस्तारित घटक है। परम्परागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई)के तहत जैविक खेती को क्लस्टर पद्धति और पीजीएस प्रमाणीकरण द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है। भारत सरकार कृषि एवं सहकारिता विभाग द्वारा वर्ष 2015-16 से एक नई-परम्परागत कृषि विकास योजना का शुभारम्भ किया गया है।इस योजना का उद्देश्य जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण और विपणन को प्रोत्साहन करना है। योजनान्तर्गत सम्मिलित घटक सहभागिता जैविक प्रतिभूति प्रणाली या पार्टीसिपेटरी ग्यारन्टी स्कीम (पी.जी.एस.) को सुदृढ़ता प्रदान करने के तारतम्य में हैं। इसी दिशा में भारत सरकार कृषि एवं सहकारिता विभाग द्वारा क्षेत्रीय परिषद (रीजनल काउन्सिल) के रूप में राष्ट्रीय जैविक खेती केन्द्र गाजियाबाद से पंजीयन करवाकर, पीजीएस लागू करने संबंधी कार्यवाही के लिये जिला आत्मा समितियों को अधिकृत किया गया है।

योजना के अंतर्गत एनजीओ के जरिए प्रत्येक क्लस्टर को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराईं जाएंगी। एक क्लस्टर पर कुल 14.35 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। पहले वर्ष में 6,80 लाख रुपये, दूसरे वर्ष में 4.81 लाख रुपये व तीसरे वर्ष में 2.72 लाख रुपये की मदद प्रत्येक क्लस्टर को दी जाएगी।

इन रुपयों का इस्तेमाल किसानों को जैविक खेती के बारे में बताने के लिए होने वाली बैठक, एक्सपोजर विजिट, ट्रेनिंग सत्र, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, मृदा परीक्षण, ऑर्गेनिक खेती व नर्सरी की जानकारी, लिक्विड बायोफर्टीलाइजर, लिक्विड बायो पेस्टीसाइड उपलब्ध कराने, नीम तेल, बर्मी कंपोस्ट और कृषि यंत्र आदि उपलब्ध कराने पर किया जाएगा। वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन एवं उपयोग, बायोफर्टीलाइजर और बायोपेस्टीसाइड के बारे में प्रशिक्षण, पंच गव्य, के उपयोग और उत्पादन पर प्रशिक्षण आदि इसके साथ ही जैविक खेती से पैदा होने वाले उत्पाद की पैकिंग व ट्रांसपोर्टेशन के लिए भी अनुदान दिया जाएगा।

अद्यतन

परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई)- पीकेवीवाई को देश में जैविक खेती को प्रोत्‍साहित करने के उद्देश्‍य से कार्यान्‍वित किया जा रहा है। यह मृदा स्‍वास्‍थ्‍य एवं जैविक पदार्थ सामग्री में सुधार लाएगा तथा किसानों की निवल आय में बढ़ोत्‍तरी होगी ताकि प्रीमियम मूल्‍यों की पहचान किया जा सके। लक्षित 50 एकड़ (2015-16 से 2017-18) तक की प्रगति संतोषजनक है। अब इसे कलस्‍टर आधार (लगभग प्रति 1000 हैक्‍टेयर) पर शुरू किया गया है।

अपेक्षित परिणाम

इस योजना की परिकल्पना की गई है नीचे दी गयी उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए जो इस प्रकार से हैं -

1.  प्रमाणित जैविक खेती के माध्यम से वाणिज्यिक जैविक उत्पादन को बढ़ावा देना।

2.  उपज कीटनाशक मुक्त होगा जो उपभोक्ता के अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में योगदान देगा।

3.  यह किसानों की आय में बढ़ोतरी करेगा और व्यापारियों के लिए संभावित बाजार देगा।

4.  यह उत्पादन आगत के लिए प्राकृतिक संसाधन जुटाने के लिए किसानों को प्रेरित करेगा।

कार्यक्रम का कार्यान्वयन

  • किसानों के समूहों को परम्‍परागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक खेती शुरू करने के लिए प्रेरित किया जायेगा। इस योजना के तहत जैविक खेती का काम शुरू करने के लिए 50 या उससे ज्‍यादा ऐसे किसान एक क्‍लस्‍टर बनायेंगे, जिनके पास 50 एकड़ भूमि होगी। इस तरह तीन वर्षों के दौरान जैविक खेती के तहत 10,000 क्‍लस्‍टर बनाये जायेंगे, जो 5 लाख एकड़ के क्षेत्र को कवर करेंगे।
  • प्रमाणीकरण पर व्यय के लिए किसानों पर कोई भार/दायित्व नहीं होगा।
  • फसलों की पैदावार के लिए, बीज खरीदने और उपज को बाजार में पहुंचाने के लिए हर किसान को तीन वर्षों में प्रति एकड़ 20,000 रुपये दिए जायेंगे।
  • परंपरागत संसाधनों का उपयोग करके जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा और जैविक उत्पादों को बाजार के साथ जोड़ा जाएगा।
  • यह किसानों को शामिल करके घरेलू उत्पादन और जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण को बढ़ाएगा I

घटक और सहायता का पैटर्न

क्लस्टर पद्धति के द्वारा पार्टिसिपेटरी गारंटी सिस्टम (पीजीएस) को अपनाना

    पीजीएस प्रमाणीकरण के लिए 50 एकड़ भूमि के साथ किसानों/स्थानीय लोगों को क्लस्टर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना
  1. लक्षित क्षेत्रों में जैविक खेती क्लस्टर निर्माण हेतु किसानों के बैठकों और विचार विमर्श के आयोजन के लिए @ रु. 200 / किसान
  2. क्लस्टर के सदस्य को जैविक खेती क्षेत्रों का एक्सपोज़र विजिट कराना @ रु. 200 / किसान
  3. पीजीएस व्यवस्था के लिए क्लस्टर से संसाधन व्यक्ति की पहचान (एलआरपी)करना
  4. क्लस्टर के सदस्यों को जैविक खेती पर प्रशिक्षण (3 प्रशिक्षण@ रु.20000 प्रति प्रशिक्षण)
    पीजीएस प्रमाणीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण
  1. पीजीएस प्रमाणीकरण पर 2 दिवसीय प्रशिक्षण @ रु. 200 प्रति एलआरपी
  2. प्रशिक्षकों (20) का प्रशिक्षण लीड संसाधन व्यक्ति@ रु. 250 / दिन / प्रति क्लस्टर 3 दिनों के लिए।
  3. किसानों का ऑनलाइन पंजीकरण@ रु. 100 प्रति क्लस्टर सदस्य x 50
  4. मृदा नमूना संग्रह और परीक्षण(21 नमूने / वर्ष /क्लस्टर) @ रु. 190 प्रति नमूना तीन साल के लिए
  5. पीजीएस प्रमाणीकरण के लिए जैविक विधियों, इस्तेमाल किये गए आगतों, अनुगमन किये गए क्रॉपिंग पैटर्न, प्रयोग में लाये गए जैविक खाद और उर्वरक आदि के रूपांतरण की प्रक्रिया प्रलेखन, @ रुपए 100 प्रति सदस्य x 50
  6. क्षेत्र के क्लस्टर सदस्यों का निरीक्षण @ रुपए 400 / निरीक्षण x  3 (3 निरीक्षण प्रति वर्ष प्रति क्लस्टर किया जाएगा)
  7. एनएबीएल में नमूने का विश्लेषण (प्रति वर्ष  प्रति क्लस्टर 8 नमूने होंगें) @ रु. 10, 000 / नमूना
  8. प्रमाणीकरण  शुल्क
  9. प्रमाणीकरण लिए प्रशासनिक व्यय

क्लस्टर पद्धति के माध्यम से खाद प्रबंधन और जैविक नाइट्रोजन कटाई के लिए जैविक गांव को अपनाना

    एक क्लस्टर में जैविक खेती के लिए कार्य योजना बनाना
  1. भूमि का रूपांतरण जैविक की ओर@ रु.  1000/ एकड़ x 50
  2. फसल प्रणाली की शुरूआत; जैविक बीज खरीद या जैविक नर्सरी स्थापना @ रु. 500 / एकड़ / वर्ष x 50 एकड़ जमीन
  3. परंपरागत जैविक आगत उत्पादन इकाई जैसे पंचगव्य, बीजामृत और जीवामृत आदि @ रु. 1500 / यूनिट / एकड़ x 50 एकड़
  4. जैविक नाइट्रोजन फसल रोपण (ग्लिरीसीडिया, सेस्बनिया, आदि) @ रु. 2000 / एकड़ x 50 एकड़
  5. वानस्पतिक अर्क उत्पादन इकाइयां(नीम केक, नीम का तेल) @ रु.  1000 / यूनिट / एकड़ x 50 एकड़
    एकीकृत खाद प्रबंधन
  1. लिक्विड बायोफ़र्टिलाइजर कांसोर्टिया (नाइट्रोजन फिक्सिंग/फास्फेट सोलुबीलाईजिंग/ पोटेशियम मोबिलाईजिंग बायोफ़र्टिलाइजर) @ रु.  500 / एकड़ x 50
  2. लिक्विड बायोपेस्टीसाइड(ट्राईकोडर्मा विरीडे, प्सुडोमोनस फ्लोरीसेंस, मेटारहिजियम, बेविऔरिए बस्सिअना, पेसलोम्यसेस,वेर्तिसिल्लिऊ एम) @ रु.  500 / एकड़ x 50
  3. नीम केक / नीम तेल @ रु.  500 / एकड़ x 50
  4. फास्फेट रिच आर्गेनिक मैनयोर / जाइम ग्रानयूल्स @ रु.  1000 / एकड़ x 50
  5. वर्मीकम्पोस्ट  (साइज 7’x3’x1’) @ रु.  5000/ यूनिट  x 50
    कस्टम हायरिंग चार्जेज  (सीएचसी)
  1. कृषि औजार (एसएमएएम दिशा-निर्देशों के अनुसार) - पावर टिलर, कोनो वीडर, पैडी थ्रेशर, फुर्रो ओपनर, स्प्रेयर, गुलाब कैन, टॉप पैन बैलेंस
  2. बागवानी के लिए वाक इन टनलस(एमआईडीएच के दिशा-निर्देशों के अनुसार)
  3. पशु खाद के लिए मवेशी छायाघर/पोल्ट्री/ पिगरी(गोकुल स्कीम के दिशा-निर्देशों के अनुसार)
    क्लस्टर के जैविक उत्पादों की पैकिंग, लेबलिंग और ब्रांडिंग
  1. पीजीएस लोगो के साथ पैकिंग सामग्री+ होलोग्राम मुद्रण @ रु. 2500 / एकड़  x 50
  2. जैविक उत्पाद ढुलाई (चार व्हीलर, 1.5 टन भार क्षमता) @ रु. अधिकतम 120000 1 क्लस्टर के लिए
  3. जैविक मेला (अधिकतम सहायता @ रु.  36330 प्रति क्लस्टर दी जाएगी)

 

स्रोत: कृषि और सहकारिता विभाग, भारत सरकार

3.08620689655

Lakamaram Choudhary Apr 02, 2019 04:33 PM

यह योजना तो अच्छी है मगर किसान मित्र जागरुक नहीं है सब आलसी है किसानों को बतातै भी नही है एैसै लोग जो ज़मीन सै जुडै हुए नहीं है

सुदर्शन नेगी Jan 29, 2019 02:53 PM

महोदय उत्तराखंड के नैनीताल जिले के विकास खंड कोटाबाग में छोटे छोटे किसानों ने अपने द्वारा उत्पादित जैविक कृषि उत्पादों को बिचौलियों के षोषण से निजात पाने के लिए एक संस्था का गठन किया गया है जिसका मुख्य उद्देश्य जैविक कृषि उत्पादन कर अपने द्वारा उत्पादित कृषि उत्पादों को सीधे उपXोक्ताओं तक पहुंचा है जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो सके तथा किसानों का आर्थिक एवं सामाजिक स्तर ऊंचा उठ सके महोदय संस्था को समुचित संसाधन उपलब्ध कराने की कृपा करेंगे अध्यक्ष एस एस नेगी सर्वोदय स्यायत्यव कृषि उत्पाद विपणन सहकारी समिति लि mobile 09XXX700 email.XXXXX@gmail.çom

Dharmendra Kumar bais Aug 28, 2018 09:02 PM

Sir Mai chitrangi black Ka LRP Hu kya LRP ko salerry nhi milti h please btaiye sir Mera no. 97XXX90

Kamlesh nagda Mar 12, 2018 04:03 PM

Karsk mitro ka mandey bhi bada dena chiye es yojna k साथ

कुवर गुलाब सिंह Jul 09, 2017 07:42 PM

महोदय इस योजना का लाभ NGO संचालक एव एलआरपी ले रहे हैं साथ-साथ किसानों को भी इस योजना में घोटत घोटालेXाजी करने के लिए कुछ पैसा मिल रहा है बुंदेलखंड क्षेत्र में एक भी किसान ऐसा नहीं है जो परंपरागत कृषि योजना के तहत खेती कर रहा हो शासन ने प्रथम वर्ष में वर्मी कंपोस्ट के लिए 5000 एवं जग छननी बाल्टी के के लिए प्रत्येक किसान 15 सो रुपए दिए और भी कई कार्यों के लिए किसानों के खाते में पैसा डाला गया आप वर्मी कंपोस्ट देखेंगे तो 50 कृषकों मैं से सिर्फ 10 कृषकों ने ही वर्मी कंपोस्ट बनवाई जिनका आज तक यूज नहीं किया गया सिर्फ लूट मौज हो रही है इसके अलावा कुछ नहीं

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