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प्रौद्योगिकी के स्तरोन्नयन हेतु दिशा-निर्देश

इस पृष्ठ में प्रौद्योगिकी के स्तरोन्नयन हेतु दिशा-निर्देश की जानकारी दी गयी है।

प्रौद्योगिकी की स्तरोन्नयन योजना का क्षेत्र-विस्तार

प्रौद्योगिकी के सृजन की प्रक्रिया के दौरान, शोध संस्थानों द्वारा प्रबंध की जा रही/ किये जा रहे प्रयोगशालाओं और फार्मों में परीक्षण किये गये हैं। प्रयोगशालाओं, प्रांगण के प्रयोगों और सीमित स्थानों पर किये गये परीक्षणों से प्राप्त परिणाम, जो विभिन्न एग्रो-जलवायु संबंधी दशाओं के अंतर्गत जब किसानों को प्रौद्योगिकी के रुप में प्रसारित किये गये थे, वे प्रायः ‘उपज के अंतराल' रहे हैं। यह ज्ञात है कि या तो वे देशी या विदेशी प्रौद्योगिकियाँ उपलब्ध हैं जो पूर्ण रुप से या आंशिक रुप से किसानों द्वारा अंगीकार की जा रही हैं। और समुद्री क्षेत्र में मछुआरों द्वारा प्रौद्योगिकियाँ भी अंगीकार की गई हैं। अतः, कृषि प्रणाली और किसान की माँग को उपयुक्त बनाने के लिये इन प्रौद्योगिकियों को किसान की फार्म की दशाओं में परीक्षण करके अंतत: अंगीकरण करने के लिये उनका स्तरोन्नयन किया जाना है। प्रौद्योगिकी के स्तरोन्नयन के लिये योजना का क्षेत्र-विस्तार स्थान पर परीक्षणों और किसानों के तालाबों के मध्य उपज के अंतराल को संबोधित करना है; किसानों/मछुआरों द्वारा वर्तमान में अंगीकृत की जा रही पुरानी प्रौद्योगिकियों के स्तर का उन्नयन करना है; और उन प्रौद्योगिकियों को परिशुद्ध और अंगीकार करना है जिनका विस्तृत रुप से प्रसार नहीं किया गया है। ये परियोजनाएं, प्रौद्योगिकी के उपयोगकर्ताओं की वर्तमान उम्मीदों और प्रौद्योगिकी के सृजनकर्ताओं और प्रसारकों के अनुकूली सीखने को ध्यान में रखकर प्रतिसूचना और प्रतिसूचना की अग्रसारण प्रणालियों के मुख्य रुप से प्रभावी कार्य करने पर निर्भर होंगीं।

प्रौद्योगिकी स्तरोन्नयन परियोजनाओं का चयन करने के लिये मापदंड

प्रौद्योगिकी के स्तरोन्नयन के लिये परियोजनाओं का चयन करने के लिये निम्नलिखित मापदंड अपनाये जायेंगे:

  • स्तरोन्नयन के लिये प्रस्तावित प्रौद्योगिकी, क्षेत्र में एक चालू समस्या का संकेत करती है और वह बड़ी संख्या में किसानों /मछुआरों को लाभ पहुँचायेगी।
  • स्तरोन्नयन करने की संभावना और स्तर का उन्नयन की गई प्रौद्योगिकी, जैसी कि परियोजना के प्रस्ताव में दी गई है, संभव है।
  • परियोजना स्पष्ट रुप से तकनीकी - आर्थिक संभाव्यता और आशा किये गये बढ़े हुए लाभ और पर्यावरणीय प्रभाव, यदि कोई हो, की रुपरेखा प्रस्तुत करती है।
  • परियोजना, क्षेत्र के प्रदर्शन और संस्थानों की/के प्रयोगशालाओं और फार्मों में न्यूनतम परीक्षण के साथ मूल्यांकन पर केंद्रित है।
  • विद्यमान स्तरों से परे, आय-सृजन बढ़ाने के लिये ध्यान दिया गया है।
  • चालू शोध, विकास और प्रसार के कार्यक्रमों के साथ सम्पर्क स्पष्ट है।

प्रस्तावों का आवेदन करने वाले संस्थान(नों) के चयन हेतु मापदंड

  • प्रौद्योगिकी विकास की शर्तों में अंशदन या मात्स्यिकी और जल-कृषि के क्षेत्र में प्रसार
  • परियोजना लागू करने के लिये प्रस्तावित संस्थान(नों) में उपलब्ध विशेषज्ञता।
  • प्रौद्योगिकी के स्तरोन्नयन के प्रस्तावित क्षेत्र में प्रारम्भिक निष्कर्ष, वांछनीय संभाव्यता होगी
  • अग्रणी संस्थान या साझीदार संस्थानों में से एक संस्थान को एक स्थापित उपस्थिति रखनी चाहिये और

उस भौगोलिक क्षेत्र में उसे अपने निजी स्टॉफ को लगाने की क्षमता होनी चाहिये जहाँ परियोजना अपनाई जानी है।

  • यदि यह बहु-संस्थागत परियोजना है तो उनमें संस्थागत और संबंध स्पष्ट है।

प्रस्तावों का प्रस्तुतीकरण

प्रस्ताव, फार्म- टी.यू.-1 में अनुमोदन और निधियों के जारी करने के लिये एन.एफ.डी.बी. को प्रस्तुत किये जायेंगे।

उपभोग प्रमाण-पत्र का प्रस्तुतीकरण

कार्यान्वयन करने वाले अभिकरण, बोर्ड द्वारा उनको जारी की गई निधियों के संबंध में उपभोग प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करेंगे। ऐसे प्रमाण-पत्र, फार्म टी.यू.- II में अर्ध-वार्षिक आधार पर अर्थात् प्रत्येक वर्ष की जुलाई और जनवरी की अवधि में प्रस्तुत किये जायेंगे। उपभोग प्रमाण-पत्र उस अवधि के दौरान भी प्रस्तुत किये जा सकते हैं यदि वे क्रिया-कलाप जिनके लिये निधियाँ पूर्व में जारी की गई थीं, वे पूरे हो चुके हैं।

और साम्या शेयर की अगली खुराक किसान द्वारा शेष कार्य पूरा करने के लिये अपेक्षित है।

अनुश्रवण और मूल्यांकन

एन.एफ.डी.बी. के वित्तपोषण के अंतर्गत लागू किये गये क्रिया-कलापों की प्रगति का आवधिक आधार पर अनुश्रवण एवं मूल्यांकन करने के लिये एन.एफ.डी.बी. के मुख्यालयों पर एक समर्पित अनुश्रवण और मूल्यांकन (एम.एवं ई.) कक्ष की स्थापना की जायेगी। परियोजना का अनुश्रवण करने वाली एक समिति जिसमें होंगे - विषय-वस्तु और वित्त के विशेषज्ञ और वित्तपोषण करने वाले संगठनों के प्रतिनिधि, भौतिक, वित्तीय और उत्पादन के लक्ष्यों से सम्बन्धित उपलब्धियों को शामिल करते हुए क्रिया-कलापों की प्रगति की आवधिक आधार पर समीक्षा करने के लिये एक समिति गठित की जायेगी।

स्त्रोत: पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय

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