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कार्ड्स और डिजिटल साधनों के द्वारा भुगतान को बढ़ावा

इस पृष्ठ में कार्ड्स और डिजिटल साधनों के द्वारा भुगतान को बढ़ावा की जानकारी है

परिचय

डिजिटल लेनदेन वो लेनदेन है जिसमें ग्राहक अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से पैसे के हस्तांतरण कर रहे हैं, और धन का सीधे प्रवाह एक से दूसरे के खाते में संभव हो रहा है। यह खातों बैंकों या संस्थाओं/प्रदाताओं के साथ संबंधित है। यह हस्तांतरण कार्ड (डेबिट/क्रेडिट), मोबाइल वॉलेट, मोबाइल एप्प्स, नेट बैंकिंग, इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस (ईसीएस), नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी), तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस), प्री-पेड उपकरणों या इसी तरह के अन्य साधनों के माध्यम से किया जाता है ।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कार्ड और डिजिटल साधनों के माध्यम से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। इसका लक्ष्य नकदी लेनदेन को कम करना है। कई लघु अवधि (एक वर्ष के भीतर लागू किया जाना है) और मध्यम अवधि (दो साल के भीतर लागू किया जाना है) जिसे सरकार के मंत्रालयों/ विभागों / संगठनों द्वारा कार्यान्वयन के लिए अनुमोदित किया गया है। आवश्यक दिशा-निर्देश इस प्रकार हैं।

उद्देश्य

  1. एक व्यक्ति के लिए कार्ड / डिजिटल सहजता से लेनदेन करने को बढ़ावा देना।
  2. व्यक्तिगत स्तर पर कैश हैंडलिंग की लागत और जोखिम को कम करना।
  3. अर्थव्यवस्था में नकदी प्रबंधन की लागत को कम।
  4. बेहतर क्रेडिट तक पहुँच और वित्तीय समावेशन सक्षम बनाने की दिशा में लेन-देन के इतिहास का निर्माण।
  5. टैक्स परिहार(अवॉयडेंस) को कम करना।
  6. जाली मुद्रा के प्रभाव को कम करना I

विस्तार/स्कोप

  1. हर नागरिक को कार्ड/ डिजिटल लेनदेन के संचालन की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ वित्तीय भुगतान सेवाओं तक पहुँच बनाना I
  2. सभी जमा केन्द्रों में कार्ड / डिजिटल भुगतान की विधि को इस रूप से सशक्त बनाना कि सरकार के संग्रह का डिजिटलीकरण हो सके I
  3. नकद आधारित लेनदेन को समाप्त करते हुए कार्ड डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करना और नकद भुगतान लेनदेन से गैर-नकदी लेनदेन की ओर बढ़ना I
  4. देश में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे को स्वीकृति को बढ़ावा देना।
  5. कार्ड / डिजिटल भुगतान की सुविधा को बढ़ावा देने के लिए कॉर्पोरेट, संस्थाओं और व्यापारी, प्रतिष्ठानों को प्रोत्साहित करना I

लक्ष्य

प्रस्तावित नीति में परिवर्तन के लिए डिजिटल वित्तीय लेन-देन के उपयोग को उचित प्रोत्साहन देना है और सरकारी लेनदेन अथवा वाणिज्य में नियमित नकद प्रयोग को बदलने के लिए आवश्यक नीति हस्तक्षेप करना है।

लघु अवधि के कदम

कार्ड डिजिटल साधनों के माध्यम से भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए, जो एक वर्ष के अल्पावधि के भीतर लागू किया जाएगा, इस प्रकार का सुझाव दिया  जाता है -

सरकारी भुगतान और संग्रह में कार्ड डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना

  • सरकारी विभागों/ संगठनों केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों / एंकर नेटवर्क के द्वारा ये कदम उठाया जायेगा (1) जो ग्राहक आवश्यक वस्तुओं, उपयोगिता सेवा प्रदाताओं, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसियों, रेलवे टिकट आरसीटीसी, आयकर विभाग, संग्रहालयों, स्मारकों आदि के लिए कार्ड डिजिटल भुगतान करने के लिए पसंद करते हैं उनको सेवा शुल्क अधिभार से मुक्त रखे; (ख) अन्य व्यापारियों की तरह एमडीआर लागत वहन करने के लिए उचित कदम उठाने होंगें; और (ग) सभी संग्रह केन्द्रों पर कार्ड डिजिटल भुगतान के लिए स्वीकृति बुनियादी ढांचे (पीओएसआई मोबाइल पीओएस टर्मिनल) का निर्माण ।
  • शहरी विकास के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय बैंक द्वारा जारी किये गए मौजूदा ओपन लूप सिस्टम का बहुउद्देशीय उपयोग व समर्पित आवेदन के साथ पारगमन भुगतान(टोल फीस, मेट्रो रेल और बस सेवाओं, आदि)  को प्रोत्साहित करेगी।
  • वित्तीय सेवा/ आरबीआई विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि पीएमजेडीवाई के तहत प्रत्येक योग्य खाता धारक को "रुपे कार्ड 'के अलावा डिजिटल वित्तीय सेवाओं की सुविधा मिले ।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग एक कार्य योजना तैयार करेगा जिससे सरकारी विभागों/संगठनों में उचित बुनियादी ढांचे को स्वीकृति मिलेगा जो यह सुनिश्चित करेगा कि "पेगोवइंडिया 'या अन्य तंत्र के माध्यम से कार्ड डिजिटल साधन द्वारा राजस्व, फीस, दंड आदि के संग्रह हो सके I
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के द्वारा "पेगोवइंडिया को "एक एकीकृत पोर्टल" के रूप में विकसित करेगा जो पूरे केंद्रीय, राज्य सरकारों और उनके सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों संग्रह प्रयोजनों के लिए होगा ।

कार्ड/डिजिटल लेनदेन के व्यापक अपनाने के लिए कार्यवाही

  • वित्तीय सेवा/ आरबीआई विभाग द्वारा ये कदम उठाये जायेंगें (1) कार्ड द्वारा लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को युक्तिसंगत बनाना; और (ख) समग्र रूप से हितधारकों के साथ परामर्श व जांच के द्वारा कुछ महत्वपूर्ण लेनदेन जैसे उपयोगिता भुगतान और रेलवे टिकट के लिए एक विभेदित एमडीआर ढांचा तैयार करना।
  • दूरसंचार विभाग, वित्तीय सेवा विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा एकीकृत यूएसएसडी मंच के लिए एक प्रावधान तैयार होगा जो सभी भुगतान तंत्र द्वारा लेनदेन का समर्थन करेंगें । वित्तीय सेवाओं का विभाग / रिज़र्व बैंक, बृहत् बुनियादी ढांचे पर कम कीमत उपलब्ध पर मोबाइल बैंकिंग सेवा का लाभ उठाने के लिए बढ़ावा देंगें। डिजिटल वॉलेट / प्री-पेड उपकरणों के लिए प्रवेश मार्ग में बाधाओं को कम करने, मोबाइल बैंकिंग पंजीकरण और सक्रिय करने के  चुनौतियों से निपटने के लिए, नियमों को कम करने की दिशा में कदम उठाये जायेंगें।

आधारिक संरचना स्वीकृति निर्माण

  • वित्तीय सेवा विभाग/ रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा कुछ कार्ड उत्पादों के विभिन्न हितधारकों के लिए लिंक स्वीकृति हेतु संरचना को निर्मित किया जायेगा जो जारी कार्ड या अन्य साधनों के लिए पीओएस टर्मिनल / मोबाइल पीओएस टर्मिनल के उचित अनुपात के द्वारा होगा। स्वीकृति/ वित्तीय समावेशन फंड बनाने की संभावना का पता लगाया जा जाएगा।
  • वित्तीय सेवा विभाग/रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा सभी भुगतान प्रणाली के लिए अधिकृत पहचान यूनिक आईडी अथवा पहचान के अन्य सबूत के आधार पर केवाईसी(नो योर कस्टमर- अपने ग्राहक को जानिए) मानदंडों में समरूपता लाने के लिए  पीएमएल अधिनियम और नियमों के तहत आवश्यकताओं का पुनः परीक्षण किया जायेगा I इसके अतिरिक्त डिजिटल साधनों के माध्यम से कम, मध्यम और उच्च मूल्य के लेन-देन की सुविधा के लिए त्रिस्तरीय केवाईसी लागू करने के कदम उठाया जाएगा।
  • वित्तीय सेवा विभाग/भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा विशिष्ट पहचान संख्या को जोड़ने अथवा  व्यापारियों के लिए पहचान आधारित केवाईसी को सम्मिलित करने के लिए मर्चेंट अधिग्रहण दिशा-निर्देशों को संशोधित किया जायेगा ।
  • वित्तीय सेवा विभाग/भारतीय रिजर्व बैंक, कार्ड/ डिजिटल माध्यमों के द्वारा विक्रय केन्द्रों(पीओएस) में  एक निर्धारित राशि की और नकद निकासी बढ़ोतरी को स्वीकृत के लिए कदम लेगा I

मोबाइल बैंकिंग भुगतान चैनलों को प्रोत्साहित करना

  • दूरसंचार विभाग के द्वारा एक निर्दिष्ट समय सीमा के भीतर, एनपीसी या अन्य एजेंसियों के माध्यम से उपभोक्ता और व्यापारियों के बीच सफल लेन-देन के लिए यूएसएसडी चार्ज में औचित्यपूर्ण कमी और इसके व्यवहार्यता के अनुरूप चार्ज करने लिए उचित कदम उठाएगी।
  • सभी कार्ड / डिजिटल भुगतान के लिए व्यवहार्यता का अध्ययन किया जायेगा और कार्ड / डिजिटल भुगतान द्वारा भुगतान का इतिहास बनाने के लिए नियमों का निर्माण होगा I साथ ही यह सुनिश्चित किया जायेगा कि उपभोक्ता अपने क्रेडिट इतिहास का लाभ ले सकते हैं डिजिटल साधनों के माध्यम से त्वरित, कम लागत वाली लघु ऋण तक पहुँच के लिए और भुगतान लेन-देन इतिहास और क्रेडिट जानकारी के बीच एक आवश्यक संबंधों का निर्माण कर सकते हैं ।

जागरूकता और शिकायत निवारण

  • वित्तीय सेवा/आरबीआई विभाग के द्वारा यह कदम उठाया जायेगा (क) धोखाधड़ी लेनदेन जहाँ पर  लेनदेन के मामले में धोखाधड़ी होता है एक आवश्यक आश्वासन तंत्र का निर्माण किया जायेगा और अधिकतम 2-3 महीने के भीतर पूरी जाँच के बाद 'ग्राहकों के खाते में पैसे वापस जमा किया जाएगा; (ख) बैंकिंग लोकपाल की भूमिका को मजबूत करने के लिए ग्राहकों के विश्वास को अधिक से अधिक बढ़ाया जायेगा (ग) कार्ड और डिजिटल साधनों के माध्यम से लेनदेन के लिए एक व्यापक ग्राहक संरक्षण नीति बनाया जायेगा।
  • वित्तीय सेवा विभाग/ भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा डिपोजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फण्ड  (डीइएएफ) के तहत फण्ड का बेहतर उपयोग और कम नकद समाज के लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार की स्वीकृति और जागरूकता अभियानों के संचालन के लिए आवश्यक कदम उठाया जायेगा I

मध्यम अवधि के लिए कदम

मध्यम अवधि के तहत कार्ड डिजिटल साधनों के माध्यम से भुगतान को दो साल के भीतर लागू किया जा सकता है, इसके संवर्धन के लिए कदम व सुझाव इस प्रकार से है-

  1. वित्तीय सेवा विभाग/ आरबीआई व्यापारी भुगतान मानकों और विभिन्न जारीकर्ताओं और स्वीकृत नेटवर्क अंर्तकार्यकारी जैसे दूरसंचार, इंटरनेट, प्री-पेड साधन प्रदाताओं और भुगतान बैंकों सहित के लिए आवश्यक दिशानिर्देश तैयार करेगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि भुगतान की व्यापक स्पेक्ट्रम और सेटलमेंट प्रणाली अंर्तकार्यकारी है I
  2. आर्थिक मामलों के विभाग के द्वारा देश में भुगतान प्रणाली की समीक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक, संबंधित सरकारी विभागों और प्रमुख उद्योग हितधारकों(स्टेकहोल्डर्स) के साथ मिलकर एक या एक से अधिक समितियों का गठन किया जायेगा । समिति के द्वारा दूसरों के बीच निम्न समस्याओं को संबोधित किया जा सकता है:
  3. यदि परिवर्तन की  लिए की जरूरत है, भुगतान और निपटान प्रणाली (पीएसएस) अधिनियम, 2007 के तहत नियामक तंत्र में और भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करने वाले अन्य कानूनों में।
  4. डिजिटल लेनदेन के प्रमाणीकरण के लिए और एक केंद्रीकृत केवाईसी की स्थापना रजिस्ट्री हेतु विशिष्ट पहचान संख्या या अन्य आई डी का इस्तेमाल करना।
  5. सभी प्रकार के कार्ड स्वीकृति के लिए भुगतान गेटवे की सिंगल विंडो सिस्टम से परिचित करना I सरकार की सेटलमेंट व प्रप्स्वीकार करते हैं। प्राप्ति के लिए डिजिटल भुगतान और बस्तियों को सक्षम।
  6. वित्तीय सेवा विभाग/रिज़र्व बैंक एक निश्चित निर्धारित राशि के नीचे दो तरीकों से प्रमाणीकरण देगा दोनों स्थिति में एक कार्ड मौजूद और कार्ड मौजूद नहीं वर्तमान लेनदेन के लिए। डीएफएस / भारतीय रिजर्व बैंक, कम, मध्यम और उच्च मूल्य लेनदेन के लिए एक बहु प्रमाणीकरण संरचना में काम करेगा।
  7. राजस्व विभाग द्वारा दोहरे कराधान को दूर करने कदम उठाये जायेंगें ।
  8. जहां भी जरूरत है, विभागों/ मंत्रालयों के द्वारा जारी किए गए नियमों और विनियमों में संशोधन करना होगा ताकि उचित परिवर्तन से कार्ड डिजिटल साधन का उपयोग से भुगतान को स्वीकृत मिले। किसी भी सरकारी विभाग एजेंसी द्वारा नकद भुगतान किसी बहुत ही विशेष व स्पष्ट परिस्थितियों के तहत ही अनुमति दी जाएगी।
  9. केवल वित्तीय सेवा के राजस्व विभाग द्वारा एक निर्धारित सीमा से परे कार्ड/ डिजिटल/ कैशलेस मोड से भुगतान हेतु अधिदेश जारी किया जायेगा I

राजस्व विभाग / आर्थिक मामलों का विभाग / वित्तीय सेवाओं का विभाग द्वारा कर में छूट / प्रोत्साहन अनुदान या कैशबैक / लॉटरी या कार्ड और डिजिटल साधनों के माध्यम से लेनदेन को प्रोत्साहित करने के लिए उपाय किये जायेंगें ।

वित्तीय सेवा विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक कार्ड और सीमाओं से परे डिजिटल साधनों के माध्यम से बहुत ही उच्च मूल्य के लेन-देनों के लिए एक पद्धति को विकसित करेगा।

 

स्रोत: आर्थिक कार्यों का विभाग, वित्त मंत्रालय

2.97014925373

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