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प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता मिशन

इस भाग में डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को पूरा करने के लिए शुरु किये गये कार्यक्रम प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता मिशन की जानकारी दी गई है।

पृष्ठभूमि

सरकार ने भारत को एक डिजिटल सशक्त समाज और ज्ञान की अर्थव्यवस्था में रूपांतरित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी परिकल्पना के साथ डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। कार्यक्रम में नागरिकों को विभिन्न ई-गवर्नेंस पहलों से जोड़ने को विचार शामिल है, जिसमें सार्वजनिक भागीदारी को मजबूत बनाने और प्रशासन की जवाबदेही बढ़ाने के लिए निर्णय लेना शामिल है । डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की पूरी संभावना का एहसास हो सकता है, यदि प्रत्येक नागरिक को, स्थान और सामाजिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना डिजिटल सेवाओं / प्रौद्योगिकियों के अवसरों के साथ उस तक पहुंचने की क्षमता और उसका लाभ प्रदान किया जाए । ग्रामीण भारत सहित देश भर में सार्वभौमिक डिजिटल साक्षरता इन पहलों की सफलता के लिए एक आवश्यक  तत्व है ।

सरकार ने दो योजनाओं को डिजिटल साक्षरता प्रदान करने के लिए स्वीकृत किया है, जिनके नाम हैं  राष्ट्रीय डिजिटल  साक्षरता  मिशन (एनडीएलएम)  और  डिजिटल  साक्षरता  अभियान (डीआईएसएचए) जो सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज़ इंडिया लिमिटेड, एक स्पेशल  पर्पस व्हीकल(सीएससी-एसपीवी) (कंपनी अधिनियम 1956 के अंतर्गत स्थापित एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी) के द्वारा एक साथ लागू किया गया । इन दोनों योजनाओं के अंतर्गत 52.5 लाख विधिवत प्रमाणित लाभार्थियों को डिजिटल साक्षरता प्रदान करने का संचयी लक्ष्य दिसंबर 2016 में दिसम्बर 2018 की प्रस्तावित समय सीमा से बहुत पहले ही प्राप्त कर लिया गया था ।

कार्यक्रम का उद्देश्य

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य  पूरे राज्यों /संघ शासित प्रदेशों  के, ग्रामीण क्षेत्रों में छः करोड़ लोगों को बनाना है, डिजिटल साक्षर, प्रत्येक पात्र परिवार के एक सदस्य कवर करने के द्वारा लगभग 40% ग्रामीण परिवारों तक पहुंचना है ।

इस योजना का उद्देश्य  ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को कम्प्यूटर चलाने या डिजिटल एक्सेस डिवाइसें  (जैसे टैबलेट, स्मार्ट फोन आदि), ई-मेल भेजना और प्राप्त करना, इंटरनेट ब्राउज़ करना,  सरकारी सेवाओं का उपयोग करना, सूचना के लिए खोज करना, डिजिटल भुगतान शुरू करना , आदि और इसलिए सूचना प्रौद्योगिकी और संबंधित अनुप्रयोगों विशेषकर  डिजिटल भुगतान राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम बनाता है । इस प्रकार इस योजना का उद्देश्य  डिजिटल विभाजन को जोड़ने के लिए है, विशेषकर  ग्रामीण आबादी लक्ष्य करते हुए, जिसमें अनुसूचित जाति (अजा) /अनुसूचित जनजाति (एसटी), गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल), महिलाएं, निःशक्तजनों और अल्पसंख्यकों जैसे समाज के हाशिये  वाले वर्ग शामिल हैं।

योजना की अवधि

इस योजना की अवधि 31 मार्च, 2019 तक है।

लक्षित हितग्राही

पात्रता मापदंड

  • योग्य परिवार

एक परिवार को एक ईकाई के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें शामिल हैं परिवार के प्रमुख, पति या पत्नी, बच्चे और माता-पिता।  ऐसे सभी घरों में जहां परिवार का कोई भी सदस्य डिजिटल साक्षर नहीं है, उन्हें इस योजना के अंतर्गत पात्र घर माना जाएगा ।

प्रवेश मानदंड

  1. हितग्राही डिजिटल साक्षर होना चाहिए ।
  2. प्रत्येक घर से केवल एक ही व्यक्ति पर प्रशिक्षण के लिए विचार किया जाएगा ।
  3. आयु वर्ग : 14 - 60 वर्ष ।

प्राथमिकता

  • गैर-स्मार्टफोन उपयोगकर्ता, अंत्योदय घर, कॉलेज ड्रॉप-आउट, प्रौढ़ साक्षरता मिशन  के प्रतिभागी ।
  • कक्षा 9वीं से 12वीं के डिजिटल निरक्षर विद्यार्थियों के लिए जिनके स्कूलों में प्रदान की जाने वाली कंप्यूटर / आईसीटी प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध नहीं है ।
  • अनुसूचित जाति (अजा), अनुसूचित जनजाति (एसटी), गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल), महिलाएं, निःशक्तजनों और अल्पसंख्यकों को प्राथमिकता दी जाएगी ।
  • हितग्राहियों की पहचान सीएससी-एसपीवी द्वारा डीईजीएस, ग्राम पंचायतों, और ब्लॉक विकास अधिकारियों के साथ सक्रिय सहयोग से पूरी की जाएगी ।

इस तरह के हितग्राहियों की सूची पोर्टल में उपलब्ध कराई जाएगी ।

योजना का कवरेज

यह योजना देश के केवल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लागू है। पूरे देश में न्यायसंगत भौगोलिक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए, 2.50 लाख ग्राम पंचायतों में से प्रत्येक के लिए निर्धारित और निगरानी रखने वाले लक्ष्यों के साथ एक ग्राम पंचायत केन्द्रित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। औसतन हर ग्राम पंचायत के अनुसार 200-300 लाभार्थियों का लक्ष्य माना जाता है। वास्तविक लक्ष्य जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली जिला ई-गवर्नेंस सोसाइटी (डीजीएस) द्वारा तय किया जाएगा, जिले का आकार, आबादी, स्थानीय आवश्यकताओं, आदि को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में शामिल गावों को पूरी डिजिटल साक्षरता प्रदान करने के लिए प्रयास किए जाएंगे ।

अनुमानित परिणाम

डिजिटल साक्षरता व्यक्तियों और समुदायों की क्षमता के अनुसार समझ और जीवन परिस्थितियों में डिजीटल तकनीक का सार्थक कार्यों के लिए उपयोग करना है। डिजिटली साक्षर व्यक्ति कंप्यूटर/ डिजिटल एक्सेस डिवाइस (जैसे टेबलेट, स्मार्ट फोन, आदि) को संचालित कर सकेंगे, ईमेल भेजने के साथ प्राप्त कर सकते हैं, इंटरनेट ब्राउज़ कर सकते हैं, सरकारी सेवाएं एक्सेस कर सकते हैं, जानकारी खोज सकते हैं, नकद के बिना लेनदेन आदि कर सकते हैं और राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भागीदीरी करने के लिए आईटी का उपयोग कर सकते हैं।एमजीदिशा विश्व के सबसे बड़े डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों में से एक होने वाला है। इस योजना के अंतर्गत, वित्तीय वर्ष-2016-17 में 25 लाख वित्तीय वर्ष 2017-18 में 275 लाख; 2018-19 वित्तीय वर्ष में 300 लाख उम्मीदवार प्रशिक्षित किए जाएंगे। भौगोलिक रुप से सभी तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, 250,000 ग्राम पंचायतों में से प्रत्येक 200-300 उम्मीदवारों की संख्या के साथ पंजीकरण होंगी।

राज्यवार लक्ष्य प्राप्त करने के लिए, यहां क्लिक करें।

डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण और पाठ्‌यक्रम अवधि

व्यापक सामग्री की रूपरेखा

मॉड्‌यूल का नाम

  • डिजिटल उपकरणों का परिचय
  • ऑपरेटिंग डिजिटल डिवाइस
  • इंटरनेट का परिचय
  • इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए संचार
  • इंटरनेट के आवेदन
  • (नागरिक-केन्द्रित सेवाएं शामिल होगीं; नकद रहित लेनदेन करने के लिए डिजिटल वित्तीय उपकरणों का उपयोग होगा)

कुल अवधि : 20 घण्टे

वित्तीय सहायता

प्रशिक्षण शुल्क

300/-प्रति उम्मीदवार सीएससी-एसपीवी के माध्यम से उनके द्वारा प्रशिक्षित  उम्मीदवारों के सफल प्रमाणीकरण पर सीधे संबंधित प्रशिक्षण भागीदारों / केन्द्रों को सीधे देय हैं ।

उपरोक्त एजेंसियों को भुगतान जारी करना डीईजीएस से एक फीडबैक /इनपुट के साथ प्राप्त परिणामों  पर आकस्मिक होगा ।  इनमें ई-मेल एकाउंट बनाने, ई-मेल भेजने, डिजिटल लॉकर खोलने, ई-रेल टिकट बुकिंग, बिजली/पानी के बिल का ई-भुगतान, पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन करना, डिजिटल भुगतान करना या ई-केवाईसी को सक्षम करना शामिल हो सकता है । प्रशिक्षु  द्वारा अनुपालन, जीसीसी सेवाएं जैसे कि पैनर कार्ड, मोबाइल रिचार्ज, एईपीएस /यूएसएसडी / यूपीआई / ई-वॉलेट इत्यादि का उपयोग करने के लिए उपयोग करना ।

परीक्षा शुल्क/प्रमाणन लागत

70/-प्रति उम्मीदवार परीक्षा शुल्क है। उम्मीदवारों के मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए विधिवत्‌ पंजीकृत प्रमाणित एजेंसियों को यह शुल्क प्रत्यक्ष रूप से देय होगा ।

राज्यों / संघ शासित प्रदेशों  के लिए वित्तीय सहायता

राज्य क्रियान्वयन एजेंसियां, ओवरहेड की लागत को पूरा करने और योजना की निगरानी हेतु सीएससी-एसपीवी द्वारा 2/-प्रति उम्मीदवार वित्तीय सहायता के पात्र होंगे ।

प्रभाव मूल्यांकन अध्ययनः प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन (नों) एक स्वतंत्र तृतीय पक्ष द्वारा आयोजित किया जाएगा । अध्ययन को पूरा करने के लिए इलेक्ट्रिॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय उपयुक्त संस्थानों / संगठनों को काम पर लगाएगा ।

इस योजना के अंतर्गत आने वाले सभी 6 करोड़ हितग्राहियों का विवरण मेसर्स कौशल विकास और उद्यमिता, राज्य कौशल विकास मिशन, सेक्टर कौशल परिषदों के साथ उचित अभिसरण के लिए और अन्य कौशल विकास योजाओं के साथ अग्रेषण संबंधों को मजबूत करने के लिए देश में स्किलिंग /रोजगार इको सिस्टम को साझा किया जाएगा ।

स्त्रोत : पीएमजीदिशा

संबंधित संसाधन

पीएमजीदिशा दिशानिर्देश

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Mustak Ali Jan 10, 2019 06:39 AM

Iska time 2020 tak hona chahiye kyoki pure gano me Iski jankari di ja sake dhanybad

asif naj shaikh Dec 20, 2018 03:42 PM

सर रूपया नहीं mila

jugraj dangi Nov 26, 2018 03:13 PM

XXXXX@gmail.com mo-97XXXo- jhalawar me work karna chahta hu .

विपेन्द्र singh Oct 22, 2018 07:54 AM

सर मेरा जन सेवा केंद्र खोलना चाहता हूँ, मेरा रेजिस्ट्रेशX नहीं हो रहा है प्ल्ज़ हेल्प करें .

Jawahar lal rautel Aug 09, 2018 03:34 PM

Esme unhi logo ko rakhana chahiye Jo pahale se hi prarak pad pe kam kar rage the.kyoki WO log praud shiksha kendra se pahle se hi Jude huge the aur wo es kam ko karne me ruchi v rakhate hai.aur sath hi un perako ko prashikchad v diya jay.dhanwad

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