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इलेक्ट्रानिकी विभाग की उपलब्धियाँ

इस पृष्ठ में इलेक्ट्रानिकी विभाग की उपलब्धियाँ 2014 - 2016 की जानकारी दी गयी है|

समान सेवा केंद्रों (सीएससी) में क्रांति

कॉमन सर्विस सेण्टर देश के ग्रामीण क्षेत्रों सहित समान सेवा केंद्र फ्रंट एन्ड सेवा केंद्र के रूप में काम कर रहे हैं। इनकी संख्या पिछले दो वर्षों में 1.34 लाख से बढ़ कर 2.05 लाख हो गई है।  समान सेवा केंद्रों की संख्या 31.05.2014 के 83,950 से बढ़कर 28.04.2016 तक 1,66,671 हो गई।

  • कुल कारोबारी समान सेवा केंद्रों की संख्या 63433 से बढ़कर 114926 हो गई है और ये देश के नागरिकों को ई-जीओवी तथा बिजनेस सेवाएं दे रहे हैं।
  • सीएससी सक्रिय बैंकिंग प्रतिनिधियों की संख्या 11244 से बढ़कर 30734 हो गई है। पिछले एक साल में  इन्हें 39 करोड़ रुपये का कमिशन मिला। 70 लाख प्रतिदिन के औसत से सीएससी 35 बीमा कंपनियों के लिए प्रीमियम एकत्र कर रहे हैं।
  • सीएससी ने देश में 10 करोड़ से अधिक आधार कार्ड बनाए हैं। यह कुल आधार कार्ड बनाने का 10 प्रतिशत है और 40 प्रतिशत आधार कार्ड सीएससी के माध्यम से देश में बनाए जा रहे हैं।

नई बीपीओ प्रोत्साहन नीतियां

भारत बीपीओ प्रोत्साहन योजना (आईबीपीएस)

सरकार ने देश में बीपीओ/टीईएस परिचालन के लिए डिजीटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत भारत बीपीओ प्रोत्साहन योजना (आईबीपीएस) को मंजूरी दी है। इनमें  छोटे शहर और ग्रामीण क्षेत्र में 1,45,000 लोगों को रोजगार देना शामिल है। इसके लिए 31.03.2017 तक बारहवीं योजना की शेष अवधि के दौरान 493 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 48,300 सीटों के वितरण की योजना बनाई गई है। यह योजना 2011 की जनगणना के अनुसार आबादी प्रतिशत पर आधारित है। इनमें मेट्रो शहर और उनके निकवर्ती क्षेत्र यानी बंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, एनसीआर(दिल्ली, गुड़गांव, नोएडा, फरीदाबाद) तथा पुणे और पूर्वोत्तर के राज्य  शामिल नहीं किए गए हैं।

साफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया डीईआटीवाई के अंतर्गत स्वायत्त सोसायटी है। इसे आईबीपीएस को लागू करने वाली एजेंसी बनाया गया है। आईबीपीएस के अंतर्गत कंपनियों के चयन के लिए ऑनलाइन निविदा प्रस्ताव अनुरोध (आरएफपी)  30.04.2016 को एसटीपीआई द्वारा प्रकाशित किया गया और  ऑनलाइन प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 31.05.2016 रखी गई।

पूर्वोत्तर बीपीओ प्रोत्साहन योजना(एनईबीपीएस)

पूर्वोत्तर बीपीओ प्रोत्साहन योजना (एनईबीपीएस) को डिजीटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत स्वीकृति दी गई है। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में  युवाओं के लिए रोजगार सृजन तथा  बीपीओ/आईटीईएस का विकास करना है। एनईबीपीएस का लक्ष्य संभाव्यता अंतर कोष (वीजीएफ) के वित्तीय समर्थन से 5000 बीपीएस/आईटीईएस परिचालन स्थापना को प्रोत्साहित करना है और  इसके लिए  31.03.2016 तक 12वीं योजना की शेष अवधि के दौरान 50.00 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इलेक्ट्रानिक्स मैन्यूफैक्चरिंग को प्रोत्साहन

  1. संशोधित विशेष प्रोत्साहन पैकेज योजना (एम-एसआईपीएस) को निवेशक सहज बनाया गया है और इसकी अवधि पांच वर्षों के लिए जुलाई 2020 तक बढ़ा दी गई है। एम-एसआईपीएस ने पिछले दो वर्षों में 160 निवेश प्रस्तावों को आकर्षित किया है। इसके साथ ही 1,21, 502 करोड़ रुपये के कुल 195 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
  2. विश्व स्तरीय बुनियादी संरचना स्थापना में सहायता देने के लिए इलेक्ट्रानिक्स मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर्स (ईएमसी) की स्थापना के लिए सिद्धांत रूप में  20 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है  और सात राज्यों में 445 करोड़ रुपये की लागत से 8 क्लस्टरों ( मध्य प्रदेश-2, राजस्थान-1, झारखंड-1, छत्तीसगढ़-1, आंध्र प्रदेश-1, पश्चिम बंगाल-1 तथा कर्नाटक-1) को अंतिम स्वीकृति दे दी गई है। इन ईएमसी से 1728 करोड़ रुपये का निवेश आएगा और रोजगार के एक लाख से अधिक अवसरों का सृजन होगा।
  3. देश में नवाचार प्रोत्साहन तथा आईपी सृजन को प्रोत्साहन देने के लिए इलेक्ट्रानिक्स विकास कोष  बनाया गया है। इस कोष का प्रबंधन मेसर्स केनबैंक वेंचर कैपिटल फंड लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। ईडीएफ ने चार डॉटर कोषों के लिए सिद्धांत रूप में 169 करोड़ रुपये के निवेश का संकल्प व्यक्त किया है। इस तरह इस कोष का कुल धन 1196 करोड़ रुपये है। डॉटर कोष इलेक्ट्रानिक्स, नैनोइलेक्ट्रानिक्स तथा आईटी क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को समर्थन देगा।
  4. मेडिकल इलेक्ट्रानिक्स के लिए  इलेक्ट्रानिक्स स्टार्ट अप के लिए तीन इनक्यूबेटरों  की स्थापना दिल्ली एनसीआर, आईआईटी पटना और कंज्यूमर इलेक्ट्रानिक्स के लिए आईआईटीएम, केरल में करने की स्वीकृति सिद्धांत रूप में दी गई है।
  5. मोबाइल हैंड सेटों को देश में बनाने के लिए प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से अंतरीय उत्पाद शुल्क लगाने से घरेलू क्षेत्र में हैंडसेटों के निर्माण में वृद्धि हुई है। भारत में मोबाइल सेट मैन्यूफैक्चरिंग में 83 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और परिणामस्वरूप 2014-15 के 6 करोड़ मोबाइल फोन की तुलना में 2015-16 में 11 करोड़ से अधिक  मोबाइल सेट बनाए गए।
  6. आईआईटी, कानपुर में नेशनल सेंटर फॉर लार्ज एरिया फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रानिक्स(एनसीफ्लेक्सई) तथा आईआईटी बाम्बे में नेशनल सेंटर ऑफ एक्सेलेंस इन टेक्नोलाजी फॉर इंटरनेट सेक्योरिटी (एनसीईटीआईएस) फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रानिक्स में नवाचार प्रेरित पारिस्थितिकी तथा पुलिस पारामिलिट्री इलेक्ट्रानिक्स के लिए  सहयोगी प्रयास और टेक्नोलॉजी विकास गतिविधियों के माध्यम से सक्रिय समर्थन देने के लिए स्थापित कए जा रहे हैं।

जनमुखी आईटी प्रयास

पिछले दो वर्षों में नागरिकों की बेहतरी के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग करके MyGov, डिजीटल लॉकर्स, जीवन प्रमाण, ई- हॉस्पिटल, नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल, ई- संपर्क, ई-ग्रीटिंग्स प्रस्तुत किए गए हैं।

कुछ तथ्य

  1. ई-कामर्स - 2014 के 13.5 बिलियन डालर की तुलना में दिसंबर, 2015 तक 16.3 बिलियन डालर।
  2. स्मार्ट फोन पहुंच- वर्ष 2013 में 44 मिलियन, 2014 में 80.5 मिलियन तथा 2015 में 100 मिलियन स्मार्ट फोन बेचे गए।
  3. ई-गवर्नेंस सेवाएं- वर्ष 2014 में 29.78 करोड़ प्रति माह कारोबारी गणना की तुलना में वर्ष 2015 में 58.16 करोड़ प्रति माह कारोबारी गणना ।
  4. आधार नामांकन और आवेदन- जून 2014 के 63.22 करोड़ की तुलना में मई 2016 में 101.11 करोड़ से अधिक। पिछले दो वर्षों में 37.89 करोड़ से अधिक आधार कार्ड जारी किए गए।  मई 2016 में 26.11 करोड़ से अधिक बैंक खाते आधार से जोड़े गए जबकि जून, 2014 में 6.7 करोड़ बैंक खाते आधार से जोड़े गए थे। पिछले दो वर्षों में 19 करोड़ से अधिक बैंक खाते आधार से जोड़े गए। मई 2016 में 167 करोड़ से ऊपर प्रमाणीकरण सौदे हुए जबकि जून, 2014 में 8.8 करोड़ प्रामाणीकरण सौदे हुए थे। इस तरह पिछले दो वर्षों में 158 करोड़ से अधिक प्रमाणीकरण सौदे हुए। 42 केंद्रीय योजनाओं को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना के अंतर्गत लाया गया ।
  5. नवाचार तथा स्टार्ट अप - पिछले वर्ष लगभग 1000 स्टार्ट अप।उद्योग अनुमान के आधार पर इलेक्ट्रानिक हार्डवेयर (चुनिंदा सामग्री जिसका डाटा उपलब्ध है) उत्पादन में वृद्धि।

मोबाइल हैंडसेट उत्पादन

  • 2015-16: 110 मिलियन, 54000 करोड़ रुपये मूल्य के (अनुमानित)
  • 2014-15: 60 मिलियन, 18,900 करोड़ रुपये मूल्य के (अनुमानित)
  • मात्रात्मक दृष्टि से 83 प्रतिशत की वृद्धि

एलसीडी/ एलईडी टीवी उत्पादन

  • 2015-16: 12.0 मिलियन, 21,000 करोड़ रुपये मूल्य के (अनुमानित)
  • 2014-15: 8.75 मिलियन, 16,200 करोड़ रुपये मूल्य के (अनुमानित)
  • मात्रात्मक दृष्टि से 37 प्रतिशत की वृद्धि

इस वर्ग में उक्त अवधि में औसत मूल्यों में कमी देखने को मिली।

लाइट इमिटिंग डियोड्स(एलईडी) उत्पादन

  • 2015-16: 3,590 करोड़ रुपये(अनुमानित)
  • 2014-15: 2,172 करोड़ रुपये।
  • 65 प्रतिशत की वृद्धि

नोटबुक उत्पादन

  • 2014-15: 10,542 करोड़ रुपये।
  • 2013-14: 9,010 करोड़ रुपये।
  • 17 प्रतिशत की वृद्धि

टैबलेट पीसी उत्पादन

  • 2014-15: 1,430 करोड़ रुपये।
  • 2013-14: 1,126 करोड़ रुपये।
  • 27 प्रतिशत की वृद्धि

डाक विभाग की उपलब्धियां

राजस्व वृद्धि

  1. स्पीड पोस्ट से मिलने वाले राजस्व में वृद्धि हुई और यह 2013-14 में 1372 करोड़ रुपये से बढ़कर 2014-15 में 1495 करोड़ रुपये हो गया। 2015 -16 में इसमें और तेज वृद्धि हुई और यह पिछले साल से 7 प्रतिशत बढ़कर 1600 करोड़ रुपये हो गया
  2. मई 2015 में संसद में प्रस्तुत सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार सख्त निगरानी के चलते निजी कुरियर सेवाओं के मुकाबले स्पीड पोस्ट को देशभर में सर्वश्रेष्ठ एक्सप्रेस डाक सेवा का गौरव प्राप्त हुआ है।
  3. ई-कॉमर्स उपभोक्ताओं से पार्सल राजस्व में 2013-14 (118.63 करोड़) में 2 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जबकि 2014-15 (172 करोड़) में इसमे 45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 2015-16 में यह 80 प्रतिशत बढ़कर 310 करोड़ रुपये हो गया।

ग्रामीण व अर्ध शहरी भारत में ई-कॉमर्स क्रांति की पहल

  1. देश में हो रहे ई-कॉमर्स क्रांति में डाक विभाग महत्वपूर्ण ताकत बन रहा है। इसने ई-कॉमर्स प्रीपेड व कैश ऑन डिलीवरी जैसी सेवाओं के लिए 900 से ज्यादा ई-कॉमर्स एजेंसियों के साथ समझौते किए हैं जिसमें प्रमुख हैं फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, अमेजॉन, येपमी, शॉपक्लू आदि। अमेजॉन ई-कॉमर्स प्रीपेड साथ ही साथ कैश ऑन डिलीवरी (सीओडी) ऑर्डर के लिए सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। डाक विभाग द्वारा सीओडी संग्रहण 2013-14 में 100 करोड़ रुपये से बढ़कर 2015-16 में 1300 करोड़ रुपये हो गया है।
  2. डाक विभाग प्रतिदिन ई-कॉमर्स में 40,000 पार्सल पहुंचा रहा है।
  3. डाक विभाग द्वारा संभाले जा रहे ई-कॉमर्स पार्सल का औसत मूल्य शहरों में 5000 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 3000 रुपये है।
  4. बाजार शोध रिपोर्ट के मुताबिक स्पीड पोस्ट को वजन के मामले में पहले स्थान पर और कीमत के मामले में दूसरे स्थान पर रखा गया है।
  5. पार्सल को संभालने वाले अवसंचरना में भी पिछले दो सालों में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है। 57 नए पार्सल केंद्र स्थापित किए गए और 27 को अपग्रेड किया गया।
  6. 34 मुख्य मार्गों पर सड़क परिवहन नेटवर्क स्थापित किया गया ताकि पार्सल का तेज, सुरक्षित व विश्वसनीय प्रसार हो सके।
  7. 950 से ज्यादा डाक गाड़ियों को जीपीएस के साथ जोड़ा गया ताकि डाक गाड़ियों की ऑनलाइन निगरानी की जा सके।

डिजीटल इंडिया

  1. ‘किसी भी वक्त कहीं भी बैंकिंग सेवा’ प्रदान करने के लिए कोर बैंकिग सल्यूशन (सीबीएस) को 21664 डाक घरों में लागू किया गया है जिसमें 30 करोड़ से ज्यादा डाकघर बचत खाता शामिल है। डाक विभाग सीबीएस अब देशभर में सबसे बड़ा सीबीएस नेटवर्क है, एसबीआई सीबीएस नेटवर्क से भी बड़ा। अप्रैल 2014 में सीबीएस डाक घरों की संख्या केवल 230 थी।
  2. 913 डाकघरों में एटीएम लगाया गया है। अप्रैल 2014 में यह केवल 4 डाकघरों में था।
  3. देश के 130,000 ग्रामीण डाकघरों में ऑनलाइन डाक व बचत खाताओं में लेनदेन के लिए उन्हें सौर ऊर्जा, बायोमैट्रिक, हस्तचलित आधुनिक यंत्रों से जोड़ा गया है। हस्तचलित यंत्र 6 पायलेट क्षेत्रों (असम, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान व उत्तर प्रदेश) में पहले ही 4700 ग्रामीण डाकघरों को भेजे जा चुके हैं। 31 मार्च 2017 तक 130,000 यंत्र भेजे जाएंगे।

वित्तीय समावेश को प्रोत्साहन

  1. इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक (आईपीपीबी)-इसके लिए डाक विभाग को आरबीआई से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। आईपीपीबी मार्च 2017 तक स्थापित हो जाएंगे। आईपीपीबी देश में डाकघरों के विशाल जाल का फायदा बैंकिग सेवाएं प्रदान करने के लिए करेगा जिसमें नगद भुगतान, आईपीपीबी खाते से सेवा प्रदाता को ऑनलाइन/मोबाइल भुगतान और लाभार्थी को डीबीटी/सामाजिक सुरक्षा भुगतान हो सकेगा। यह बैंक सुविधाओं से वंचित गांवों व नागरिकों को साथ ही साथ एमएसएमई को भी उपयोगी होगा। तीसरे पक्ष द्वारा क्रेडिट कार्ड व अन्य वित्तिय व बीमा सेवाएं भी पहुंचाई जा सकेंगी।
  2. पिछले दो सालों में डाक घर बचत खाते 30.86 करोड़ से बढ़कर 34.22 करोड़ हो गए हैं और पीओएसबी खातों में व नगद प्रमाणपत्रों को मिलाकर कुल 6.53 लाख करोड़ इसमें जमा है।
  3. बालिकाओं के लिए 22 जनवरी 2015 से सुकन्या समृद्धि योजना लागू होने के बाद से 85 लाख से ज्यादा खाते खुले हैं और इनमें समग्र निवेश करीब 4596 करोड़ रुपये का है। एनएसआई के आंकड़ों के मुताबिक सभी सार्वजनिक व अधिकृत निजी क्षेत्र के बैंकों में कुल मिलाकर केवल 4 लाख एसएसवाई खाते खुले हैं।
  4. 18 नवंबर 2014 से लागू होने के बाद 2.94 करोड़ किसान विकास पत्र बिके हैं और इसने 23460 करोड़ रुपये की लघु बचत को आकर्षित किया है।
  5. सीबीएस डाक घरों में डाकघर बचत खाता रखने वालों को पीएस सुरक्षा बीमा योजना, पीएम जीवन ज्योति योजना व अटल पेंशन योजना योजनाओं के तहत 4 लाख पॉलिसी अभी तक बेची जा चुकी हैं।
  6. डाक जीवन बीमा की अधिकतम राशि में वृद्धि की गई है। इसे 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये और ग्रामीण पीएलआई को 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रूपये करने को अधिसूचित किया गया है। इससे निवेश के मार्ग भी बढ़े हैं व साथ ही साथ असमय मृत्यु पर आश्रितों को बीमा भुगतान भी ज्यादा होगा।

दूरसंचार विभाग की उपलब्धियाँ

08.05.2016 तक भारतनेट की स्थिति

  1. ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल के विस्तार के लिए भारतनेट मिशन की शुरुआत की गई है। 100 एमबीपीएस ब्रॉडबैंड के साथ देश में सभी 2,50,000 ग्राम पंचायतों (60 करोड़ से अधिक ग्रामीणों को) से कनेक्ट करने के लिए दोनों ब्रॉडबैंड कनेक्शन से ग्रामीण कवरेज की खाई को पाटने का प्रयास किया जाएगा।
  2. आठ मई 2016 तक तक - ओएफसी पाइप 1,40,742 किलोमीटर (61,066 जीपीएस तक कवर करने के लिए) तक बिछाई गई है। ऑप्टिकल फाइबर 1,12,871 किलोमीट (50,465 जीपीएस) तक बिछा।
  3. 2631 ब्लॉक/91470 जीपीएस से संबंधित निविदाओं का काम पूरा हुआ। 2381 ब्लॉक/80398 जीपीएस में इस सिलसिले में काम शुरू कर दिया गया है।

बीएसएनएल का पुनरुद्धार

  1. वर्ष 2004 में बीएसएनएल को 10,183 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था जबकि 2014 – 15 में 8,234 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। 2009-10 के बाद बाएसएनएल के परिचालन लागत की तुलना में इसके मुनाफे पर असर पड़ा है, जिससे राजस्व में लगातार कमी आई है। लेकिन अब, सतत प्रयासों से बीएसएनएल को पुनर्जीवित किया जा रहा है।
  2. वर्ष 2013-14 की तुलना में 2014-15 में सेवाओं से हुई आय में 4.16% की वृद्धि हुई है। वर्ष 2013 -2014 में इसका कुल मुनाफा 26,153 करोड़ रुपये रहा जबकि इसकी तुलना में 2014-15 में  27,242 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।
  3. पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में (पहले नौ महीने 31 दिसम्‍बर, 2015 तक) बीएसएनएल की सेवाओं से वर्ष 2015 -16 में 2.16% की वृद्धि हुई है। (2014-15 के लिए 18,117 करोड़ रुपये की तुलना में 2015-16 में 18,508 2015-16 में करोड़ की बढ़ोतरी हुई।)
  4. बीएसएनएल ने वित्त वर्ष 2014-15 में 672 करोड़ रुपये का परिचालन लाभ अर्जित किया है। इसी तरह 2015-16 में इस कम्पनी से परिचालन लाभ अधिक होने की संभावना है। वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए शुद्ध घाटा वित्त वर्ष 2014-15 की तुलना में 20% से कम होने की उम्मीद है।
  5. पहली बार वर्ष 2015-16 में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) की वजह से 2,50,666 मोबाइल कनेक्शन का शुद्ध सकारात्मक लाभ हुआ।
  6. 2014-15 की तुलना में 2015-16 में डाटा राजस्व में 50% की वृद्धि दर्ज की गई है।
  7. ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार, सभी निजी कंपनियों में बीएसएनएल ने फरवरी 2016 के महीने में मोबाइल ग्राहकों की मासिक वृद्धि दर में प्रथम स्थान प्राप्त कर ली है।
  8. बीएसएनएल ने विभिन्न ग्राहक केंद्रित पहल की शुरुआत की है, जैसे मुफ्त इनकमिंग रोमिंग, नाइट फ्री कॉलिंग, न्यूनतम गति के लिए 2 एमबीपीएस ब्रॉडबैंड की वृद्धि की इत्यादि।
  9. बीएसएनएल अपने सामाजिक दायित्वों को भी पूरा कर रहा है।  लगातार बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के मामले में सहायता मुहैया कराने में सबसे आगे है।

दूरसंचार क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नए स्तर पर पहुंचा

  • अप्रैल 2014 से फरवरी 2016 के दौरान दूरसंचार क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़कर 4091 अमेरिकी मिलियन डॉलर (27,234 करोड़ रुपये) पर पहुँच गया है। यह दोगुने से भी अधिक है जो पिछले दो साल की समान अवधि में आया है यानी अप्रैल, 2012 से मार्च, 2014 के दौरान यह 1,611 अमेरिकी डॉलर रहा है।
  • दूरसंचार क्षेत्र में अप्रैल 2014 से फरवरी 2016 के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 5.97 प्रतिशत रहा, यह पिछले समान अवधि में दोगुना रहा है। अप्रैल 2012 से मार्च 2014 तक यह 3.44 प्रतिशत रहा।

फोन उपयोगकर्ताओं की तादाद नए स्तर पर पहुंची

  1. भारत में पिछले वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान एक अरब टेलीफोन ग्राहक हो चुके हैं। फिलहाल यहाँ पर 1052,38 लाख टेलीफोन कनेक्शन चल रहा है (29 फरवरी, 2016 तक के आंकड़ों के मुताबिक), जो केवल चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा टेलीफोन नेटवर्क है।
  2. मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या दिसंबर 2014 में 943 करोड़ थी, जो दिसंबर 2015 में बढ़कर 1 अरब से अधिक हो गई है
  3. ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या जून 2014 में 68.83 मिलियन थी, जो लगभग 15 महीनों में 120.88 मिलियन से दोगुना है।
  4. अप्रैल 2014 से फरवरी 2016  के दौरान कुल टेलीफोन नेट से लाभ 119.36 मिलियन (11.9 करोड़ रु.) रहा जबकि अप्रैल, 2012 से मार्च, 2014 के दौरान  इसमें 18.33 लाख (1.83 करोड़ रु.) की गिरावट आई थी। भारत में अप्रैल, 2014 से फरवरी, 2016 तक कुल टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या फ्रांस औऱ इटली की जनसंख्या के बराबर हो गई।
  5. मोबाइल टेलीफोन की संख्या में अप्रैल 2012 से मार्च 2014 तक 14.66 लाख की शुद्ध गिरावट दर्ज की गई और फिर अप्रैल 2014 से फरवरी 2016 तक अवधि के दौरान 122,660,000 की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गयी।
  6. अप्रैल 2014 से फरवरी 2016 के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में कुल कनेक्शनों शुद्ध लाभ 64.2 मिलियन का हुआ है जो कि मार्च, 2014 (46.96 लाख) से अप्रैल, 2012 की तुलना में अधिक है।
  7. अप्रैल, 2014 से  फरवरी 2016 के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में कुल टेलीफोनों की संख्या बढ़कर ब्रिटेन की जनसंख्या के बराबर पहुंच गई।
  8. इसके साथ ही कुल टेलीफोन घनत्व में मार्च 2014 में 75.23 फीसदी से बढ़कर फरवरी 2016 में 82.93 फीसदी पर पहुंच गया जबकि अप्रैल, 2012 से मार्च, 2014 के दौरान, दूरसंचार घनत्व 78.66% से अप्रैल, 2012 से मार्च में, 2014 तक इसमें 75.23% गिरावट आई।
  9. फरवरी 2016 के दौरान गांवों में टेलीफोन घनत्व 50.63%  रहा। इसमें अप्रैल 2014 से फरवरी 2016 तक इसमें 6.62 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई जबकि मार्च 2012 से मार्च 2014 के दौरान यह 4.75 प्रतिशत रहा।
  10. भारत में अप्रैल 2014 से दिसम्बर 2015 के दौरान इंटरनेट कनेक्शन की संख्या बढ़कर 80.08 तक पहुंच गई जो जो जर्मनी की जनसंख्या के बराबर है। दिसम्बर 2015 तक कुल इंटरनेट कनेक्शन 331.67 मिलियन को पार कर गया जो संयुक्त राज्य अमेरिका की जनसंख्या से अधिक है। इंटरनेट सेवा प्रदाताओं की रिपोर्ट के अनुसार,  देश में इंटरनेट ग्राहकों की संख्या पहले ही 400 मिलियन को पार कर चुकी है।

विभिन्न नीतिगत दिशा-निर्देश

स्पेक्ट्रम शेयरिंग, स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग, प्रशासकीय तौर पर आवंटित स्पेक्ट्रम का उदारीकरण, डिफेंस बैंड आइडेंटिफिकेशन एवं डिफेंस इंटरेस्ट जोन जैसे विभिन्न प्रकार के नीतिगत दिशा निर्देशों 7-10 साल से लंबित है । इससे सेवा की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार होगा।

स्पेक्ट्रम की सफल नीलामी

  • 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज और 2100 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम की नीलामी मार्च 2015, में आयोजित की गई और इससे 1,09,874 करोड़ रुपये अर्जित किए गए। यह नीलामी पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से की गई।
  • सरकार ने निकट भविष्य में 700/800/900/1800/2100/2300/2500 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम नीलामी के अगले दौर का संचालन करने का फैसला किया है।

उपभोक्ताओं का सशक्तीकरण

  1. सरकार ने वन नेशन- फूल मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) को जुलाई 2015 में मंजूरी दे दी। इससे क्षेत्र, सेवा प्रदाता कंपनी बदलने के बावजूद वही मोबाइल नंबर बना रहेगा। साथ ही इससे मोबाइल नंबर व्यक्ति की पहचान के रूप में स्थापित होगा और तमाम तरह की सरकारी सेवाओं जैसे जैम (जनधन, आधार, मोबाइल) का लाभ लिया जा सकता है।
  2. अगले साल से बेचे जाने वाले सभी मोबाइल फोन में “पैनिक बटन” होगा इससे महिलाएं किसी असामान्य स्थिति में मदद हासिल कर सकेंगी।
  3. अभी तक सेवा की गुणवत्ता को लेकर कभी गंभीरता से काम नहीं किया गया। लेकिन टेलीकॉम नियामक ट्राई ने सभी दूरसंचार कंपनियों से कॉल ड्रॉप की स्थिति में एक रुपये प्रति कॉल के हिसाब से हर्जाना देने को कहा है। यह एक जनवरी 2016 से प्रभावी है।

 

स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय

3.0

दिनेश kumar Dec 26, 2016 12:07 PM

जी मेरा नाम दिनेश कुमार जिला बलरामपुर ब्लाक वाड्रफनगर पोस्ट raghunath नगर गांव गैना है जी में अ रोजगार हु जी में आप संदेश है की रोजगार चाहिए मो.न.77XXX90

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