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बिहार में सूचना का अधिकार अधिनियम की सफल कहानियां

इस भाग में किस प्रकार बिहार राज्य में सूचना के अधिकार अधिनियम के लागू होने के बाद, कई सफल कहानियां सामने आयीं है, इसकी जानकारी दी गयी है।

मधुबनी में वर्षों बाद मिला घर जाने का रास्ता

मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी प्रखण्ड के हररी पंचायत निवासी अवकाश प्राप्त शिक्षक श्री हरिनन्दन ठाकुर वर्षों से अपने घर तक जाने वाली सरकारी सड़क को अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त कराने हेतु प्रयासरत थे। इसके लिए 70 साल की उम्र में भी श्री ठाकुर ने अधिकारियों के चौखट पर सैकड़ों बार दस्तक दी। परन्तु कार्रवाई के नाम पर संबंधित पदाधिकारियों ने बीच में ही फाईल को लटका दिया। श्री ठाकुर के अथक प्रयासों के बाद 20.6.2002 को शुरू हुई कार्रवाई 27.11.02 तक चली। परन्तु जब अंचल अधिकारी अंधराठाढ़ी के पास कार्रवाई हेतु आदेश देने का वक्त आया तो 27. 11.02 के बाद उन्होंने फाईल को बिना कोई आदेश पारित किए छोड़ दिया। श्री ठाकुर को याद नहीं कि उन्होंने अंचल अधिकारी अंधराठाढ़ी की इस निष्क्रियता के खिलाफ कितनी बार जिला के वरीय पदाधिकारियों के पास फरियाद की। परन्तु किसी ने उनकी नहीं सुनी। आखिरकार श्री ठाकुर को सूचना का अधिकार कानून की जानकारी मिली तो दिनांक 04.06.07 को इसके तहत आवेदन देकर उन्होंने अंचल अधिकारी से जवाब-तलब किया। फाइलों पर कुन्डली मार बैठे अधिकारियों के लिए यह आवेदन जी का जंजाल बन गया। मजबूर होकर उन्हें श्री ठाकुर के घर तक जाने वाला अतिक्रमित रास्ता खाली कराना पड़ा। ज्ञातव्य हो कि यह सफलता श्री ठाकुर को राज्य सूचना आयोग, बिहार, पटना तक मामले को ले जाने के बाद मिली।

मजलूम नदाफ ने 20 दिनों में पाया इंदिरा आवास

मधुबनी जिले झंझरपुर प्रखंड अन्तर्गत सुखेत पंचायत के मच्छी गाँव क रहने वाले 70 वर्षीय मजलूम नदाफ एक रिक्शा चालक हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी रिक्शा खींचना उनकी मजबूरी है। उनकी जिन्दगी का सहारा उनका कमाऊ पुत्र करीब चार वर्ष पूर्व बीमारी के चपेट में आकर दवा और उचित इलाज के अभाव में स्वर्ग सिधार गया। उन्हें वर्षों से रहने हेतु एक आवास की आवश्यकता थी।

वर्ष 2002 में ग्राम सभा ने भी मजलूम को इस लायक समझ उन्हें इसका लाभ दिए जाने की अनुशंसा की। परन्तु भ्रष्टाचार एवं बिचौलियों की भेंट चढ़ चुकी इस आवास योजना का लाभ बिना 'सुविधा शुल्क" शायद ही किसी को मिलता है। मजलूम से भी इंदिरा आवास पाने के लिए रिश्वत की माँग की गई। बुढ़ापे में पेट की खातिर रिक्शा खींचने को विवश मजलूम ने रिश्वत देने में असमर्थता जाहिर की तो उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। 7 अप्रैल 2006 को मजलूम को जब सूचना अधिकार कानून की जानकारी मिली तो उन्होंने इसके तहत अनुमंडल पदाधिकारी, झ्झरपुर क पास एक आवेदन दिया तथा अबतक इंदिरा आवास से वंचित रखे जाने को लेकर कई सवाल पूछे। अनुमंडल पदाधिकारी ने उक्त आवेदक को वांछित सूचना उपलब्ध करने का निर्देश स्थानीय बीडीओ को दिया। इसपर तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री विजय कुमार ने अपने कार्यालय की भूल सुधारते हुए 27042007 को मजलूम के घर जाकर इंदिरा आवास की प्रथम किश्त के रूप में 15,000/- रुपये का चेक उनके सुपुर्द किया। आज मजलूम के पास इंदिरा आवास के तहत पक्का का मकान है। मजलूम की कहानी बिहार के उन गरीबों की कहानी है जिन्होंने इस कानून का प्रयोग कर अपना हक हासिल किया।

ग्राम सभा से अपना हक़ माँगा- गाँव में स्ट्रीट लाइट लगी

रत्नेश कुमार पासवान, वैशाली जिलान्तर्गत उफरौल पंचायत के गाजीपुर के निवासी हैं। वह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। इनके गाँव में ग्राम सभा की सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। इन्होंने कई बार वरीय पदाधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी बीच गाजीपुर ग्राम में स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य हुआ और केवल एक स्ट्रीट लाइट लगाई गई। गाजीपुर ग्राम में परियोजना के अन्तर्गत ग्राम सभा के निर्णय से सौर ऊर्जा चालित चार स्ट्रीट लाइटें लगाई जानी थीं। परियोजना में गड़बड़ी से सम्बंधित सूचनाओं के लिए आवेदन दिया गया। पहले तो लोक सूचना पदाधिकारी ने आवेदन लेने से ही इनकार कर दिया। उन्होंने कई बहाने बनाए। लेकिन अंततः उन्हें आवेदन लेना पड़ा। इसका परिणाम यह हुआ कि ग्राम सभा आयोजित की गई और परियोजना में निर्धारित चार स्ट्रीट लाइटें लगाई गई। गाँव में अभी चारों स्ट्रीट लाइट काम कर रही हैं।

अपने बच्चे के साथ अन्य छात्रों को भी दिलवाया छत्रवृत्ति की राशि

श्री सुरेश शर्मा, गाजीपुर, जिला-वैशाली के निवासी हैं। इनके सभी बच्चे मध्य विद्यालय गाजीपुर में पढ़ते हैं। इस वर्ष इनके एक बच्चे को छात्रवृति नहीं दी गई। अत: उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत लोक सूचना पदाधिकारी को आवेदन दिया। मध्य विद्यालय गाजीपुर के प्रधानाध्यापक लोक सूचना पदाधिकारी हैं और वही विद्यालय में छात्रवृत्ति वितरित करते हैं। कई बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिली थी। श्री सुरेश शर्मा ने छात्रवृत्ति से संबंधित कई प्रश्न सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत पूछे। आवेदन लेते ही लोक सूचना पदाधिकारी ने कहा कि छात्रवृत्ति मिल जाएगी, यह सब करने की कोई जरूरत नहीं है। दूसरे दिन ही सुरेश शर्मा के बच्चों सहित सूची में अंकित सभी छात्र/छात्राओं को छात्रवृत्ति मिल गई।

उप श्रमायुक्त ने सहायता का आश्वासन दिया

राजेंद्र पोद्दार उर्फ़ खूरचंद पोद्दार, श्री मुरलीधर भगत, व्याहुत चौक, नवगछिया, भागलपुर की दुकान में 1980 ई० से काम करते थे। कुछ दिनों के बाद खूरचन्द उक्त दुकानदार के ट्रक में बतौर खलासी कार्य करने लगे। इसी क्रम में ट्रक से सामान उतारने के दौरान खूरचन्द के रीढ़ की हड्डी टूट गई, जिसका उस दुकानदार ने न तो इलाज ही कराया और न बकाए राशि का भुगतान किया। इसकी लिखित शिकायत उप श्रमायुक्त, भागलपुर से दिनांक 18.12.2007 को निबंधित डाक से की गई। उक्त शिकायत पर उप श्रमायुक्त भागलपुर द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं की गई। इसी दौरान खूरचन्द की मौत हो गई। रिश्तेदार द्वारा जब भी उक्त कार्यालय से संपर्क किया गया तो उक्त कार्यालय के कर्मचारी निबंधित पत्र न प्राप्त होने की बात कहकर, टालमटोल करते हुए उन्हें कार्यालय से निकाल दिया करते थे। इसी दौरान खूरचन्द के रिश्तेदार श्री वीरेन्द्र कुमार पोद्दार मानव अधिकार संगठन का सहयोग लेने कार्यालय पहुँचे। वहाँ से श्री वीरेन्द्र कुमार पोद्दार द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत उक्त कार्यालय के लोक सूचना पदाधिकारी को एक आवेदन दिनाक 20.02.2008 को निबंधित डाक से भेजा गया। इसे प्राप्त करते ही उक्त कार्यालय के पदाधिकारियों की एक टीम ने खूरचन्द के घर पहुँच कर जाँच-पड़ताल की और जाँच प्रतिवेदन उक्त कार्यालय को समर्पित किया। उक्त कार्यालय द्वारा विवाद को निपटाने हेतु तत्परता से कार्रवाई करना प्रारंभ कर दिया गया एवं उप श्रमायुक्त ने पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता प्रदान करने में स्वयं रुचि दिखाई।

इंदिरा आवास के लिए कार्रवाई की गई

श्री नागेन्द्र पासवान, वैशाली जिला के देसरी प्रखंड अन्तर्गत उफरौल पंचायत के निवासी हैं। ये बीपीएल सूची में 6 अंक के तहत जीवन यापन करते हैं। इनकी इोपड़ी भी आँधी में नष्ट हो गई थी। ये किसी तरह टूटी इोपड़ी को खड़ा करके गुजर-बसर कर रहे हैं। इन्होंने इन्दिरा आवास के लिए पंचायत प्रतिनिधि एवं ग्राम सेवक से अनुरोध किया पर कुछ नहीं हुआ। जबकि बीपीएल सूची में 9 अंक वालों तक को इंदिरा आवास आवंटित हो चुका था। इन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत एक आवेदन पंचायत सेवक सह लोक सूचना पदाधिकारी को दिया। आवेदन लेते ही ठीक उसी समय इंदिरा आवास हेतु इनका सर्वे किया गया और इंदिरा आवास के आवंटन हेतु आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई।

वाद की कार्यवाही प्रारंभ हुई

राकेश कुमार भगत, पिता श्री गोपाल भगत, न्यू रजनी मेडिकल हॉल पंजवारा, बाँका ने अपने साथ घटित धोखाधड़ी के मामले में पंजवारा थाना कांड सं० 11/07, नालसी वाद सं० 1506/06 तथा जी०आर० नं० 43/07 दर्ज कराया था। उक्त वाद के संदर्भ में क्षेत्राधिकार के सवाल पर मामले को साहेबगंज, झारखंड भेजने का आदेश न्यायालय द्वारा पारित हुआ। उक्त आदेशानुसार वाद पर कार्रवाई बन्द हो गई तथा क्षेत्राधिकार के सवाल पर वाद लगभग समाप्त ही हो गया था। इन्होंने मानवाधिकार संगठन, भागलपुर के सहयोग से दिनांक 06.12.2007 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 क तहत एक आवेदन लोक सूचना अधिकारी द्वारा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की निबंधित डाक से प्रेषित किया। इसमें इन्होंने 24.08.2007 के आदेश पर की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट, दोषी अधिकारियों का नाम, पद एवं पता पूछा था। इसे प्राप्त करते ही दिनांक 9.12.2007 को उक्त वाद में आदेश पारित किया गया तथा पुन: कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई। श्री भगत को भी उसकी सूचना दे दी गई।

इंदिरा आवास हेतु प्रक्रिया शुरू

श्री रामजी साहनी, वैशाली जिला के उफरौल पंचायत अन्तर्गत गाजीपुर के एक मजदूर हैं। इनके पास रहने के लिए एक टूटा-फूटा घर है। बीपीएल सूची में इनका अंक 7 है। इन्हें इंदिरा आवास का आवंटन नहीं किया गया जबकि इसी ग्राम में 9 अंक वाले व्यक्ति को इंदिरा आवास आवंटित किया गया। इन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत आवेदन दिया। आवेदन देते ही उसी दिन इंदिरा आवास हेतु इनका सर्वे किया गया और आवंटन प्रक्रिया शुरू की गई।

सूचना का अधिकार ने दिलाया पारिवारिक लाभ

भीखनी देवी, जिला मधुबनी के पंडौल प्रखंड अन्तर्गत मकरमपुर की निवासी हैं। इनके पति वैद्यनाथ ठाकुर की मृत्यु 2005 ई० में हुई। उन्होंने पारिवारिक लाभ के लिए आवेदन दिया। लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब भीखनी देवी ने बिहार सेवा समिति के कार्यकर्ता श्री वकील यादव से संपर्क किया। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत आवेदन दिलवाया। प्रखंड विकास पदाधिकारी से सूचना न मिलने पर अनुमंडल पदाधिकारी के पास अपील दायर की गई। इसके परिणामस्वरूप उनका आवेदन सामाजिक सुरक्षा विभाग में भेजा गया और तब जाकर उन्हें पारिवारिक लाभ की राशि मुहैया हुई।

लक्ष्मी पासवान को मिली विधिक सहायता

सुशीला देवी, पति लक्ष्मी पासवान ग्राम-मकरमपुर, प्रखंड- पंडोल, जिला- मधुबनी की निवासी हैं। सुशीला के पति विकलांग हैं। पति की विकलांगता का फायदा उठाते हुए गाँव के ही छोटे पासवान और केकन पासवान ने उनकी इज्जत लूटने की कोशिश की और मार-पीट की। सुशीला देवी ने बिहार सेवा समिति के कार्यकर्ता वकील यादव से संपर्क किया। उनकी मदद से विधिक सहायता के लिए सुशीला देवी ने अध्यक्ष, विधिक सहायता समिति के पास आवेदन दिया। छह महीने बीत जाने पर भी जब विधिक सहायता समिति ने नहीं सुनी तब सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन दिया गया जिसपर कार्रवाई के उपरांत सुशीला देवी को विधिक सहायता प्राप्त हुई।

इंदिरा आवास की राशि वापस कराई गई

सूचना का अधिकार के इस्तेमाल से अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा गलत ढंग से प्राप्त इंदिरा आवास की राशि वापस कराई गई। पंडौल प्रखंड के नरपतिनगर और मकरमपुर पंचायत में पैसे के बल पर अनधिकृत लोग इंदिरा आवास की राशि खा जाते थे। बिहार सेवा समिति के कार्यकर्ता वकील यादव ने प्रखंड विकास पदाधिकारी, पंडौल से इंदिरा आवास की सूची माँगते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत आवेदन दिया। सूचना नहीं मिलने पर उन्होंने अपील दायर की। तदुपरांत उन्हें इंदिरा आवास के लाभार्थियों की सूची प्राप्त हुई। इस सूची की जाँच कराई गई तो नरपतिनगर के श्री नारायण ठाकुर, पिता स्व० हरिनन्दन ठाकुर, ललन सिंह, पिता डॉ० वीरेन्द्र नारायण सिंह एवं लखिन्दर साफी से इंदिरा आवास की राशि वापस कराई गई।

सूचना का अधिकार के इस्तेमाल से बिजली बिल में सुधार

सूचना का अधिकार के इस्तेमाल से सुमन झा के बिजली बिल में 4,000/- रु० कम करके बिजली बिल का सुधार किया गया। सुमन कुमार झा, पिता फेकन झा, ग्राम सोहराय, पो०-पंडौल, जिला मधुबनी के निवासी हैं। बिजली विभाग ने इन्हें दो वर्षों का गलत बिल भेज दिया था और भुगतान के लिए बार-बार नोटिस दे रहा था। वास्तविकता यह थी कि दो वर्षों तक बिजली विभाग का ट्रान्सफॉर्मर जला हुआ था। सुमन इन ने बिहार सेवा समिति के कार्यकर्ता वकील यादव से सम्पर्क किया। इसके बाद सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत आवेदन दिया गया। फलस्वरूप बिजली बिल की राशि कम की गई और उसमें 4,000/- रु० का सुधार किया गया।

पुल निर्माण का आदेश हुआ

मधुबनी जिलान्तर्गत पंडौल प्रखंड के कनकपुर इलाके में कभी बाढ़ नहीं आती थी। यहाँ के किसान बाढ़ के समय बाढ़ग्रस्त गाँवों को बीज और खरूऊन की आपूर्ति करते रहे हैं। इलाके का पानी बरसात के दिनों में पुल के नीचे से बह जाता था। वर्ष 2007 जनवरी-फरवरी में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा कनकपुर ग्राम में सड़क बनाने के क्रम में पुलों को भर दिया गया। फलस्वरूप जुलाई-अगस्त में पानी का बहाव रुक जाने से गाँव में पानी घुस गया तथा सैकड़ों एकड़ में लगी फसल नष्ट हो गई। इस समस्या को लेकर बिहार सेवा समिति के कार्यकर्ता वकील यादव ने सूचना के अधिकार का प्रयोग किया। इससे प्रशासन की नींद खुली। परियोजना निदेशक ने स्थल का निरीक्षण किया और पुल निर्माण का आदेश दिया।

वर्षों से बंद पड़ा आँगनबाड़ी केन्द्र चालू हुआ

मधुबनी जिलान्तर्गत पंडौल प्रखंड का आँगनबाड़ी केन्द्र सं० 206 हमेशा बन्द रहता था। गाँव वालों ने इसे खुलवाने के कई प्रयास किए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। हालत यह थी कि विगत तीन वर्षों में वहाँ के बच्चों को एक दिन भी पोषाहार नहीं दिया गया। स्थिति से तंग आकर उस गाँव के वार्ड सदस्य सुखदेव पासवान ने जिला पदाधिकारी को आवेदन दिया। तब भी कोई कार्रवाई नहीं। तदुपरांत, सूचना के अधिकार के तहत आवेदन पर की गई कार्रवाई के सम्बंध में जानकारी माँगी गई। सूचना के अधिकार का इस्तेमाल होते देख जिला प्रशासन हरकत में आया। इस संदर्भ में सम्बंधित सीडीपीओ से जवाब-तलब किया गया। तब जाकर आँगनबाड़ी केन्द्र चालू हुआ और कई वर्षों बाद वहाँ के बच्चों को पोषाहार नसीब हुआ।

तोड़-मरोड़ कर दी गई सूचना में सुधार हुआ

जयन्त कुमार गुप्ता, मुहल्ला-खन्दकपर, पो० बिहारशरीफ छंटनीग्रस्त निर्वाचन कर्मचारी हैं। उन्होंने नियुक्ति/समायोजन नहीं होने के कारण माननीय उच्च न्यायालय में वाद दाखिल किया था। जिला पदाधिकारी, नालंदा ने माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश आवश्यक कारंवाई हेतु अध्यक्ष, बिहार कर्मचारी चयन आयोग को पत्रांक 574 दिनांक 12.06.2004 द्वारा प्रेषित कर दिया।

जयन्त कुमार गुप्ता ने सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत जिला पदाधिकारी के उक्त पत्र के आलोक में की गई कार्रवाई की सूचना मांगी। उन्होंने आवेदन कूरियर से भेजा था जो लौटा दिया गया। तब उन्होंने राज्य सूचना आयोग में अपील सं० 353/06-07 दाखिल की। सुनवाई के पश्चात् आयोग ने कडिकावार सूचना उपलब्ध कराने का आदेश पारित किया। कर्मचारी चयन आयोग के सचिव द्वारा सूचना उनके पत्रांक 370 आ० दिनांक 2802.2007 को निर्गत की गई जो कडिकावार सूचना न होकर कर्मचारी चयन आयोग की कार्यप्रणाली से संबंधित थी। यह भी सूचित किया गया था कि सूचना के अधिकार के तहत सूचना प्राप्त करने की जिज्ञासा की अपेक्षा चयन आदि की प्रक्रिया एवं आयोग के दायित्वों के संबंध में सर्वसाधारण को सम्यक ज्ञान रखना अधिक आवश्यक है।

आवेदक ने पुन: राज्य सूचना आयोग में आपत्ति दर्ज की। आयोग ने दिनांक 1403,07 को सुनवाई की तथा लोक सूचना पदाधिकारी, कर्मचारी चयन आयोग को यह निदेश दिया कि 'आवेदक को कडिकावार उत्तर न देकर कर्मचारी चयन आयोग की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया है। अनुरोध होगा कि दिनांक 10,04,07 तक आवेदक को वांछित सूचना देते हुए कडिकावार मंतव्य आयोग कार्यालय को तीन प्रतियों में उपलब्ध कराने का कष्ट करें।' तब सचिव, बिहार कर्मचारी चयन आयोग द्वारा पत्रांक वि0ष्क०च०आ० 05/विविध-08/10/06-621 दिनांक 10.04.07 कि माध्यम से वांछित सूचनाएँ उपलब्ध कराई गई जिससे आवेदक संतुष्ट हुआ।

इंदिरा आवास की दूसरी किश्त मिली

राजेन्द्र मंडल, झंझारपुर प्रखंड के परसा पंचायत के रहने वाले हैं। काफी भाग-दौड़ के बाद वर्ष 2006 में उन्हें इंदिरा आवास की पहली किश्त मिली थी। लेकिन दूसरी किश्त के लिए उन्हें लम्बी प्रतीक्षा करनी पड़ी। दूसरी किश्त की राशि मिलने की अवधि में ग्राम पंचायत का मुखिया बदल गया। और जैसा कि आजकल गाँवों में आमतौर से होता है, राजनीतिक कारणों से दूसरी किश्त का भुगतान रोक दिया गया। उन्होंने दिनांक 10.01.2007 को सूचना का अधिकार अधिनियम का सहारा लिया। इसबार उन्हें ज्यादा प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी। आवेदन डालने के तीन दिनों के भीतर उन्हें दूसरी किश्त भी मिल गई।

मूक-बधिर ने पाया इंदिरा आवास

झंझरपुर प्रखंड के सिमरा पंचायत के निवासी 50 वर्षीय लक्ष्मण मंडल टी०बी० के मरीज हैं। इस बीमारी के कारण उन्हें करीब चार वर्ष पूर्व अपना पुश्तैनी धंधा रिक्शा चलाना भी छोड़ना पड़ा। उन्हें तीन संतानें हैं - दो पुत्र एवं एक पुत्री। तीनों जवान मगर सभी मूक-बधिर। इस कारण उन्हें कोई काम भी नहीं मिलता। लक्ष्मण अपनी बीमार काया के बावजूद मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह दो वक्त की रोटी जुटा पाते हैं। घर बनाना उनके बूते की बाहर की बात है। लक्ष्मण ने आवास का लाभ पाने के लिए मुखिया से लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी, झंझरपुर के कार्यालय तक सैकड़ों बार चक्कर लगाया, परन्तु किसी ने उनकी नहीं सुनी। आखिरकार लक्ष्मण मंडल ने दिनांक 25.05:2006 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन देकर प्रखंड विकास पदाधिकारी से इंदिरा आवास आवंटन प्रक्रिया में बीमार व विकलांगों की प्राथमिकता के सम्बंध में जानकारी माँगी। उनके प्रश्न से प्रखंड प्रशासन की पोल भी खुल सकती थी। इसलिए प्रखंड विकास पदाधिकारी ने आवेदन पर कार्रवाई करते हुए पंचायत के मुखिया को उन्हें शीघ्र इंदिरा आवास देने का निर्देश दिया। आज लक्ष्मण के पास भी इस योजना के तहत पक्का मकान है।

विकलांग की मिला इंदिरा आवास

गुज्जर चौपाल, अंधराठाढ़ी, जिला मधुबनी के मड़रौल पंचायत के रहने वाले हैं। बचपन में ही बिजली के करेंट में उनका दायाँ हाथ नाकाम हो गया था। एक हाथ से उनका बमुश्किल गुजारा हो पाता है। बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर वह किसी तरह अपना पेट पाल रहे हैं। इंदिरा आवास के लिए वह वर्षों से प्रयासरत थे। परन्तु जब किसी ने उनकी गुहार नहीं सुनी तब आखिरकार उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का सहारा लिया। 29.05.2006 को उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत आवेदन में प्रखंड विकास पदाधिकारी से इंदिरा आवास आवंटन से जुड़े पाँच सवाल पूछे। पदाधिकारी ने इसका जबाव देने की अपेक्षा उन्हें इंदिरा आवास का लाभार्थी बनाना बेहतर समझा। आज गुज्जर चौपाल के पास अपना इंदिरा आवास है।

विधवा ने पाई इंदिरा आवास हेतु दूसरी किश्त

झंझरपुर प्रखंड के परसा पंचायत की रहने वाली उमा देवी विधवा है। उन्हें वर्ष 2006 में इंदिरा आवास की पहली किश्त मिली थी। जबतक वह प्रथम किश्त की राशि का उपयोग कर पातीं, ग्राम पंचायत चुनाव में मुखिया बदल गया। उन्होंने जब दूसरी किश्त की माँग की तो राजनीतिक कारणों से नए मुखिया ने उसे राशि देने से इंकार कर दिया। उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारी, झंझरपुर से इसकी दर्जनों बार शिकायत भी की परन्तु किसी ने उनकी अर्जी नहीं सुनी। अंतत: 10.01.2007 को उन्होंने सूचना के अधिकार कानून 2005 का इस्तेमाल करते हुए अपने पुत्र परमानंद सिंह के माध्यम से दूसरी किश्त के भुगतान के सम्बंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी से जानकारी माँगी। परिणामत: तीस दिनों के भीतर उन्हें इंदिरा आवास की दूसरी किश्त मिल गई।

इंदिरा आवास हेतु चेक मिला

लक्ष्मण महतो, मधुबनी जिला के लखनौर प्रखंड अंतर्गत गंगापुर पंचायत के रहने वाले हैं। वह एक पाँव से विकलांग हैं और लंबे समय से विकलांग कोटे के तहत इंदिरा आवास के लिए मुखिया से लेकर बी०डी०ओ० के दफ्तर का चक्कर काटते रहे परन्तु उन्हें इंदिरा आवास नहीं मिला। दूसरी ओर, जबकि पहुँच वाले लोग आसानी से इस योजना का लाभ प्राप्त कर रहे थे। अंततः 20.12.2006 को लक्ष्मण महतो ने लखनौर के बी०डी०ओ० से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन देकर जवाब माँगा। परिणामत: बीस दिनों के भीतर इंदिरा आवास निर्माण के लिए लक्ष्मण को 24,000/- रुपया का चेक प्राप्त हो गया।

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ मिला

उमा देवी, लखनौर प्रखंड के बेरमा पंचायत के भखरौली गाँव की रहने वाली हैं। उनके 20 वर्षीय कमाऊ पुत्र की मृत्यु दिनांक 01.05:2005 को हो गई। उन्होंने पुत्र के मरणोपरांत दिनांक 13.06.2005 को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत आवेदन देकर राशि की माँग की थी। अधिकारी उन्हें इसका लाभ देने की बजाय टाल-मटोल कर रहे थे। उमा को कोई संतोषप्रद जवाब भी नहीं मिल पा रहा था। अंततः 12.12.2006 को उमा ने अपने पति रघुनाथ देव के माध्यम से सूचना का अधिकार के तहत आवेदन देकर पारिवारिक लाभ के भुगतान से संबंधित जानकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी, लखनौर से माँगी। परिणामस्वरूप उन्हें तीस दिनों के भीतर दस हजार रुपये का चेक मिल गया।

निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता का पर्दाफाश

सर्वशिक्षा अभियान के तहत बिहार शिक्षा परियोजना द्वारा अनुदानित बेगूसराय जिला के मटिहानी प्रखण्ड में कुल 14 लाख रुपये की लागत से प्रखण्ड संसाधन केन्द्र बनना था। 2005 में किए गए एग्रीमेण्ट के बावजूद 2007 तक भवन पूरा नहीं होते देख उक्त प्रखण्ड अन्तर्गत महेन्द्रपुर गांव के एक सामाजिक कार्यकर्ता शिवअंजन कुमार ने जानकारी कॉल सेंटर के माध्यम से सूचना अधिकार के तहत आवेदन किया। उन्होंने अपने आवेदन में प्रखण्ड संसाधन केन्द्र मटिहानी समेत जिला के तमाम प्रखण्ड संसाधन केन्द्रों के सम्बंध में किए गए एग्रीमेण्ट, एस्टीमेट, कार्य की अवधि, कार्य कराने वाली एजेन्सी, आवंटित राशि के विरुद्ध किए कार्यों की उपयोगिता एवं मापी पुस्त समेत विस्तृत विवरण माँगा। उपलब्ध कराई गई सूचना में पूरे जिला में कुल 2 करोड़ 24 लाख रु० आवंटन के विरुद्ध निर्गत 90 प्रतिशत राशि में कार्य महज 30 से 50 प्रतिशत तक ही हो पाए थे, जबकि मापी पुस्त में 70 से 80 प्रतिशत तक की राशि का व्यय बताया गया था। अब शिवअंजन के पास पर्याप्त और पुख्ता प्रमाण थे। इसके आधार पर बिहार शिक्षा परियोजना परिषद्, पटना में विधिवत शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आलोक में राज्य स्तरीय जाँच अधिकारियों की टीम द्वारा उक्त बी०आर०सी० की गहन जाँच हुई। पाई गई अनियमितता को लेकर त्वरित कार्रवाई करते हुए निर्माण समिति द्वारा बैंक खाता संचालन पर रोक लगाते हुए 10 दिनों में कार्य पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गये। परिणामत: आज मटिहानी के बी०आर०सी० के साथ उक्त केन्द्र के कार्यों में बरती गई अनियमितता के लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई एवं प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुशंसा कर दी गई है।

रेणु ठाकुर को मानदेय मिला

लखनौर प्रखंड के बेरम पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय में रेणु ठाकुर शिक्षा मित्र के पद पर कार्यरत थीं। नियमित स्कूल जाने एवं पंचायत में मानदेय भुगतान वास्ते राशि आ जाने के बावजूद उन्हें मानदेय का भुगतान करीब दो वर्ष से नहीं हो रहा था। हर ओर से निराश होकर रेणु ने सूचना के अधिकार के कानून का सहारा लिया। दिनांक 14.11.2006 को इस कानून के तहत अनुमंडल पदाधिकारी, इहारपुर को आवेदन देकर मानदेय भुगतान से संबंधित जानकारी माँगी गई। परिणामत: उन्हें तीस दिनों के अंदर लम्बित अवधि के वेतन का भुगतान हो गया। रेणु के इस साहसी कदम के चलते दूसरे पंचायत शिक्षकों को भी लम्बित मानदेय मिल गया।

कृषि मित्र की नौकरी मिली

परशुराम प्रसाद, मधुबनी जिला के अंधराठाढ़ी प्रखंड स्थित रखवारी पंचायत के रहने वाले हैं। उन्होंने गणित विषय में प्रतिष्ठा तक पढ़ाई कर रखी है। राज्य सरकार के आदेश पर वर्ष 2006 में जब प्रखंड कार्यालयों में पंचायत कृषि मित्रों के चयन की प्रक्रिया शुरू हुई तो परशुराम ने भी इसके लिए आवेदन किया। अपने पंचायत से इस हेतु प्रखंड कार्यालय में जमा हुए सभी आवेदनकर्ताओं में वह सबसे अधिक योग्यता प्राप्त व अंकधारी युवक थे। लेकिन नियोजन के दौरान गलत ढंग से किसी और का चयन कर लिया गया। अंतत: परशुराम ने दिनांक 11.12.2006 को अपने भाई शम्भु कुमार राउत के माध्यम से सूचना का अधिकार के तहत आवेदन देकर प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंधराठाढ़ी से नियोजन संबंधित जानकारी माँगी। परिणामस्वरूप बीस दिनों के भीतर ही बी०डी०ओ०, अंधराठाढ़ी ने पूर्व चयनित उम्मीदवार का चयन रद्द कर परशुराम का इस पद पर चयन कर लिया।

मजदूरों को जॉब कार्ड मिले

मधुबनी जिले के लखनौर प्रखंड के गंगापुर, मदनपुर एवं बेहट उत्तरी पंचायतों में जब कुछ सामाजिक कार्यकर्ता राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की जमीनी हकीकत का पता करने पहुँचे तो उन्हें मालूम हुआ कि इन पंचायतों में जॉब कार्ड के लिए आवेदन लिए जाने के बावजूद मजदूरों को जॉब कार्ड नहीं मिल रहा है। सैकड़ों लोगों ने इसकी शिकायत सामाजिक कार्यकर्ताओं से की। राजेन्द्र मंडल नामक सामाजिक कार्यकर्ता ने दिनाक 14.11.2006 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत एक आवेदन देकर जॉब कार्ड एवं राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना से संबंधित उपरोक्त पंचायतों के प्रगति प्रतिवेदन की माँग की। परिमाणस्वरूप, तीस दिनों के भीतर करीब 400 लोगों को जॉब कार्ड वितरित किए गए तथा काम देने की प्रक्रिया भी शुरू हुई।

सूचना के अधिकार के इस्तेमाल से संस्था का निबंधन हुआ

फ्रीडम मिशन, नारायण कॉम्प्लेक्स, तिलकामाँझी, भागलपुर नामक संस्था का निबंधन कराने हेतु नियमानुसार सारी प्रक्रिया पूरा करते हुए दिनांक 16.11.2007 को निबंधन विभाग, नया सचिवालय पटना में निबंधित डाक से आवेदन जमा किया गया था। श्रीमती निशा सिंह, सचिव, फ्रीडम मिशन निबंधन हेतु कार्यालय का चक्कर काटती रहीं। परन्तु उक्त संस्था का निबंधन नहीं हो पाया। इसी क्रम में इन्होंने 31.03.2008 को सूचना के अधिकार सहायता केन्द्र (मानव अधिकार संगठन की स्वपोषित इकाई) से सम्पर्क किया। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत एक आवेदन प्रेषित किया। उसे प्राप्त करते ही श्रीमती सिंह को उक्त संस्था का निबंधन प्रमाण-पत्र, नियमावली, स्मृति प्रमाण-पत्र इत्यादि निबंधित डाक से उपलब्ध करा दिए गए तथा उक्त कार्यालय के पत्रांक सं0 1290 दिनांक 28. 04.2008 के द्वारा उन्हें सारी सूचना उपलब्ध करा दी गई।

अब आपको गैस सिलिंडर की दिक्कत नहीं होगी

अजीत कुमार सिंह, मानिक सरकार घाट रोड, भागलपुर का गैस सिलिंडर खाली हो गया था। उन्होंने होम डिलीवरी के लिए बी०पी० ट्रेडिंग, भागलपुर में दिनांक 29.03.2008 को नंबर लगा रखा था। उन्हें लगभग दो माह उक्त एजेन्सी का चक्कर काटना पड़ा परन्तु गैस सिलिंडर नहीं मिल पाया। गैस एजेन्सी बार-बार यह कह कर टाल दिया करती थी कि गैस उपलब्ध नहीं है। वह इसकी शिकायत करने हेतु मानव अधिकार संगठन भागलपुर के कार्यालय पहुँचे। संगठन के सूचना का अधिकार सहायता केन्द्र द्वारा उन्हें सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन बनाकर दिया गया और इसे उक्त गैस एजेन्सी में जमा करने हेतु भेजा गया। इसे देखते ही गैस एजेन्सी के मालिक का पसीना छूटने लगा। गैस एजेंसी मालिक ने आवेदन को उन्हें लौटा दिया और दो घंटे के अन्दर श्री सिंह के घर पर गैस सिलिंडर भेजवा दिया। उक्त मालिक ने श्री सिंह से निवेदनपूर्वक कहा कि 'जब भी आपको गैस सिलिंडर की आवश्यकता हो आप हमें व्यक्तिगत रूप से सूचित करें, अब आपको गैस की दिक्कत नहीं होगी।'

कार्यवाही प्रारंभ हुई

महेशानंद गुप्ता, गुलाबी बाग, अलीगंज, भागलपुर ने अपनी जमीन को दूसरे व्यक्ति द्वारा हथिया लिए जाने के संबंध में मुख्यमंत्री के जनता दरबार में आवेदन दिया था। इसका संदर्भ सं० 1009760005 है। इस पर कार्यवाही काफी धीमी गति से चल रही थी, जिससे श्री गुप्ता काफी परेशान थे। इस संदर्भ में उनके पुत्र जीवेश कुमार प्रभाकर ने संगठन द्वारा संचालित सूचना का अधिकार सहायता केन्द्र के सहयोग से लोक सूचना अधिकारी, मुख्यमंत्री सचिवालय को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत दिनांक 02.05.2008 को आवेदन निबंधित डाक से प्रेषित किया। इसके उपरांत उक्त सचिवालय से पत्रांक संख्या जशिकी (सू०अ०) 01/08,दिनांक 09.05:2008 निर्गत हुई। इसके उपरांत प्रशासनिक पदाधिकारी ने तत्परता से उक्त संदर्भ में कार्यवाही प्रारंभ कर दी है। श्री गुप्ता के लिए यह एक संतोषजनक बात है।

जिला शिक्षा अधीक्षक ने भूल स्वीकार की

जिला शिक्षा अधीक्षक, नालंदा ने अपने कार्यालय क पत्रांक 1285 दिनांक 10.04.2007 द्वारा कुल 76 शिक्षक एवं शिक्षिकाओं का स्थानान्तरण किया था। आवेदक जयन्त कुमार गुप्ता ने सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत सूचना माँगी कि शिक्षक स्थानान्तरण नियमावली के अन्तर्गत तीन विकल्पों में किस परिस्थिति में अन्यत्र स्थानान्तरण किया गया है। जिला शिक्षा अधीक्षक ने अपने पत्रांक 1732 दिनांक 1805:2007 के द्वारा सूचना दी कि लिपिकीय भूलवश पत्र में स्थानान्तरण अंकित हो गया है। उन सभी का स्थानान्तरण नहीं बल्कि पदस्थापन किया गया है।

आवेदन न लेने को लिए क्षमा माँगी

कार्यालय, बाल श्रमिक परियोजना समिति, नालन्दा ने दिनांक 07.07.07 को दैनिक 'आज' में सहायक-सह-लेखापाल के पद पर नियुक्ति हेतु सूचना प्रकाशित की थी। मानदेय 2000/- रु० था और कॉमर्स शिक्षा प्राप्त एवं अनुभवी व्यक्तियों को प्राथमिकता देने की शर्त थी। आवेदक जयन्त कुमार गुप्ता, वाणिज्य स्नातकोत्तर ने भी आवेदन समर्पित किया था। लेकिन उनका चयन नहीं किया गया।

जयन्त कुमार गुप्ता ने सूचना का अधिकार अधिनियम का उपयोग करते हुए लोक सूचना पदाधिकारी नालन्दा से विभिन्न सूचनाएँ माँगी। वहाँ आई०डी० सं० 350 दर्ज की गई परन्तु परियोजना निदेशक, बाल श्रमिक परियोजना समिति के प्रतिनिधि के रूप में श्री वीरेन्द्र कुमार, आशुलिपिक-सह-सहायक द्वारा आवेदन लेने से इंकार कर दिया गया।

आवेदक ने विभागीय अपीलीय प्राधिकार-सह-अपर समाहर्ता, नालन्दा के समक्ष अपील दायर की। अपीलीय प्राधिकार के निदेशानुसार परियोजना निदेशक, बाल श्रमिक परियोजना समिति, नालन्दा द्वारा उनके पत्रांक 165,बा०श्र० दिनांक 23.10.2007 द्वारा वांछित सूचनाएँ उपलब्ध कराई गई। सूचना में स्वीकार किया गया कि प्रार्थी जयन्त कुमार गुप्ता की शैक्षणिक योग्यता चयनित उम्मीदवार सुबोध कुमार से अधिक है। परन्तु शैक्षणिक योग्यता, उच्चतर योग्यता, अन्य अनुभव तथा साक्षात्कार में प्राप्तांक के आधार पर मेधा सूची तैयार कर चयन किया गया है।

श्री वीरेन्द्र कुमार के द्वारा आवेदन नहीं लेने के बिन्दु पर अपीलीय प्राधिकार-सह-अपर समाहर्ता के ज्ञापांक 77-7/07-3067/रा० दिनांक 26.11.2007 द्वारा सूचित किया गया कि श्री वीरेन्द्र कुमार द्वारा अपने गलत कार्य के लिए शर्मीन्दगी एवं दु:ख व्यक्त करते हुए भविष्य में पुनरावृत्ति नहीं करने का वादा करते हुए क्षमा याचना की गई है जिसे अपीलीय प्राधिकार द्वारा स्वीकार कर लिया गया है।

स्कूलों में अवैध राशि की वसूली बन्द हुई

नालंदा जिले के अधिकांश विद्यालयों में नवम् वर्ग में नामांकन के लिए छात्र/छात्राओं से अवैध राशि वसूल की जा रही थी। इस वसूली के विरुद्ध कई अभिभावकों ने अपने-अपने स्तर पर विरोध दर्ज किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अंत में यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता जयंत कुमार की नजर में आया। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के अधीन जिला शिक्षा पदाधिकारी से इस सम्बंध में सूचना की माँग की। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग दर्जनों उच्च विद्यालयों में जाँच का आदेश दिया। जाँच के दौरान अवैध वसूली के कई मामले उजागर हुए और अवैध वसूली बिल्कुल बन्द हो गई।

गलत नियोजन पर अंकुश लगाया गया

बेगूसराय जिलान्तर्गत बछवाड़ा प्रखण्ड के रूदौली पंचायत निवासी, श्रीनारायण यादव ने सूचना अधिकार का इस्तेमाल करके पंचायत शिक्षकों के नियोजन में रिश्वत एवं जुगाड़ के आधार पर किए गए अवैध नियोजन पर अंकुश लगाने में सफलता पाई।

श्री यादव की पुत्री संध्या कुमारी रूदौली पंचायत में पिछड़ी जाति के रोस्टर बिन्दु पर पंचायत शिक्षिका के पद की प्रबल दावेदार थी। पंचायत शिक्षक नियोजन नियमावली 2006 के आलोक में, संध्या ने विधिवत अपना आवेदन दिया। उन्होंने प्रकाशित मेधा सूची के अनुरूप नियमानुसार काउन्सिलिंग में भाग लिया, परन्तु अन्तिम रूप से नियोजन हेतु चयनित अभ्यर्थियों की सूची में अपना नाम न देख, वह चकित रह गई। चयनित अभ्यार्थियों में कुछ के मेधा अंक संध्या से कम थे। इस संबंध में संध्या ने प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को आवेदन दिया। कोई संतोषजनक कार्रवाई न होता देख उनके पिता श्रीनारायण यादव ने सूचना अधिकार का इस्तेमाल करके नियोजन की कार्रवाई से संबंधित पूर्ण विवरण मांगा। राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील के बाद उपलब्ध कराई गई सूचना में बरती गई अनियमितता से संबंधित सारे प्रमाण श्री यादव को मिल गए। प्राप्त प्रमाणों के साथ शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी के लिए एक बार फिर सूचना अधिकार का प्रयोग किया। परिणामत: विस्तृत और गहन जाँच के उपरान्त दो-दो बार उक्त पंचायत का शिक्षक नियोजन रद्द करते हुए, पंचायत सचिव पर आरोप पत्र गठित कर कार्रवाई प्रारंभ करने एवं पंचायत के मुखिया पर पंचायती राज अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का आदेश जिलाधिकारी बेगूसराय द्वारा पारित किया गया। चूँकि संध्या को अंक पर्याप्त से अधिक थे, उन्हें प्रखण्ड शिक्षिका पद के लिए नियोजित कर लिया गया।

भविष्य निधि को भुगतान हेतु आदेश

बेगूसराय में हरखपुरा गाँव के निवासी 64 वर्षीय श्री रामललित राय, राष्ट्रीय उच्च विद्यालय दलसिंहसराय समस्तीपुर में प्रधानाध्यापक पद से वर्ष 2004 में सेवानिवृत हुए। श्री राय वर्ष 1968 से 1983 तक देवघर जिला के कोयरीडीह उच्च विद्यालय में सहायक शिक्षक पद पर कार्यरत रहे। डाकघर में खुले उनके भविष्यनिधि खाता में 1983 तक कुल लगभग 8000 रुपये जमा थे। जनवरी 2004 में अवकाश प्राप्ति के उपरान्त 4 वर्षों तक उक्त खाता में जमा उनकी भविष्यनिधि राशि का भुगतान उन्हें नहीं मिला, जबकि इस मामले में वे कई बार जिला शिक्षा अधिकारी देवघर एवं प्रधान डाकघर देवघर में आवेदन देकर, समुचित कार्रवाई की प्रत्याशा में चक्कर लगाते रहे। कार्यालय कर्मी उनसे रिश्वत के रूप में मोटी रकम माँगते थे। अंततः थक-हार कर उन्होंने मई, 2008 में सूचना का अधिकार के अंतर्गत आवेदन दिया और अपने भविष्यनिधि खाते की राशि का भुगतान किए जाने की दिशा में की गई कार्रवाई, सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया एवं विलंब के कारण सहित दोषियों पर कार्रवाई के ब्यौरे से संबंधित सवाल पूछे। श्री राय का उक्त आवेदन चमत्कार की तरह असरकारी साबित हुआ और 15 दिनों के अन्दर उक्त राशि की निकासी का आदेश निर्गत करते हुए एक पत्र उनके पते पर डाक के माध्यम से भेज दिया गया।

आज वे खुश हैं कि सूचना का अधिकार कानून की बदौलत ही उनका काम बिना रिश्वत और किसी परेशानी के हो गया। उनका मानना है कि आजादी के बाद पहली बार यह कानून आमलोगों को एक शक्तिशाली हथियार के रूप में संरक्षण देता है।

जिलाधिकारी ने आदेश वापस लिया

बेगूसराय के वीरपुर प्रखण्ड अंतर्गत डीह पर पंचायत के आंगनबाड़ी केन्द्र संख्या 06, 07 एवं 09 के लिए क्रमश: रानी देवी (पिछड़ा वर्ग), विमल देवी एवं रेणु देवी ने सेविका पद के लिए आवेदन दिया। विभागीय निर्देशों के अनुरूप उक्त तीनों अम्यर्थी पर्याप्त योग्यता रखती थीं एवं पंचायत द्वारा बनाई गई। मेधा सूची में भी इनका स्थान सबसे ऊपर था। चयन की प्रक्रिया पोषक क्षेत्र के लाभुकों की आम सभा द्वारा मुखिया की अध्यक्षता में पूरी की जानी थी। आयोजित आमसभा में उक्त केन्द्रों के लिए सर्वसम्मति से क्रमश: रानी देवी, विमल देवी एवं रेणु देवी को चयनित किए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया, परन्तु कार्यवाही पंजी पर प्रोसिडिंग बाद में लिखने के नाम पर सभी से सादे पृष्ठ पर हस्ताक्षर ले लिए गए। बाद में संबंधित पंचायत सचिव, भूतपूर्व मुखिया, पंचायत पर्यवेक्षक एवं प्रखण्ड के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी ने मिली-भगत से वैसे अभ्यर्थियों का चयन कर लिया, जिन्होंने न तो विधिवत आवेदन दिया था, न ही आमसभा के दिन उपस्थित थे। मनमाने तरीके से किए गए चयन में गाँव की बेटी को भी चयनित किया गया, जो नियमानुकूल सही नहीं था। केन्द्र संख्या 09 में प्रथम बार जिसे चयनित करने का कागजी खेल किया गया, उसका शैक्षणिक प्रमाण-पत्र ही जाली था। आनन-फानन में उससे इस्तीफा लेकर उसी परिवार की दूसरी महिला का चयन, सिर्फ कागजी तौर पर करते हुए बाकायदा प्रशिक्षण दिलवा कर केन्द्र संचालन भी शुरू कर दिया गया।

इस पूरे प्रकरण में बरती गई अनियमितता को लेकर की गई जन शिकायत एवं उस पर कृत कार्रवाई के सम्बंध में सूचना का अधिकार के तहत आवेदन देकर सूचनाएँ मांगी गई। पहले तो काफी नानुकूर हुआ। अपील में जाने के बाद उपलब्ध कराई गई सूचना के रूप में जो अभिलेख प्राप्त हुए वे भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध ऐसे प्रामाणिक विवरण थे जिसके आधार पर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया।

इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर जिलाधिकारी बेगूसराय द्वारा अपना आदेश यह लिखते हुए वापस लेना पड़ा कि 'आदेश पूर्ण रूपेण मुखर आदेश प्रतीत नहीं होता है"।

इस तरह सूचना के अधिकार के माध्यम से कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं निरंकुश कार्यशैली पर अंकुश लगाने में सफलता पाई गई।

फर्जी प्रमाण-पत्र के सहारे आँगनबाड़ी सेविका बनने का मामला उजागर

झंझरपुर प्रखंड के लोहना उत्तरी पंचायत के आँगनबाड़ी केन्द्र सं०-122 पर सेविका बहाली के दौरान लोहना पूर्व निवासी श्रीमती कचन इा इसलिए पीछे छूट गई कि वह अपने प्रतिद्वंदी प्रत्याशी रूक्मिणी कुमारी की तरह इंटरमीडिएट का फर्जी अंकपत्र का जुगाड़ नहीं कर पाई। इसका खुलासा कंचन झा द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम क तहत सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना से माँगी गई सूचना से हुआ। कंचन झा को नियोजन के समय से ही रूक्मिणी कुमारी के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की सत्यता पर संदेह था। इसके लिए श्रीमती इस नियोजन के तत्काल बाद से ही बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, झंझारपुर से लेकर अन्य कई वरीय अधिकारियों को पत्र लिखकर इनके फर्जी प्रमाण-पत्रों की जाँच की माँग करती रहीं। आखिरकार कचन इस ने अपने पति बैद्यनाथ इा के माध्यम से दिनांक 5.3.2008 को सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना से इसके प्रमाण-पत्रों की सत्यता के बारे में जानकारी माँगी। उप सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने दिनांक 10,408 को प्रेषित अपने जवाब में रूक्मिणी के मैट्रिक के प्रमाण पत्र में दर्ज रौल कोड, रौल नं० एवं पंजीयन को पूरी तरह फर्जी बताते हुए ऐसे किसी प्रमाण-पत्र को निर्गत किए जाने से इनकार किया। इस आधार पर बाल विकास परियोजना कार्यालय, झंझारपुर रूक्मिणी के नियोजन को रद्द करने की प्रक्रिया में लग गया है।

चन्द्रशेखर की मिली पंचायत शिक्षक की नौकरी

मधुबनी जिला के खुटौना प्रखण्ड के झांझपट्टी गाँव निवासी चन्द्रशेखर प्रसाद एक प्रशिक्षित पंचायत शिक्षक अभ्यार्थी थे। इनका नियोजन पंचायत शिक्षक के पद पर मधेपुर प्रखण्ड के परवलपुर पंचायत में हुआ था। इन्होंने 9 महीने तक काम भी किया। परन्तु 9 महीने के बाद नियोजन में अनियमितता की शिकायत को लेकर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, मधेपुर ने उनकी सेवा यह कहते हुए समाप्त कर दी कि इन्होंने जिस महाविद्यालय से शिक्षक प्रशिक्षण की परीक्षा उत्तीर्ण की है वह फर्जी है और वहाँ से प्रशिक्षित छात्रों का पंचायत शिक्षक पद पर नियोजन अवैध है। अभ्यर्थी श्री प्रसाद ने अनुमंडल पदाधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक गुहार लगायी पर किसी ने नहीं सुनी। श्री प्रसाद की शिकायत थी कि एक ही शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय से उत्तीर्ण अन्य अभ्यार्थियों का प्रमाण पत्र वैध कैसे हो सकता है? परन्तु श्री प्रसाद की अर्जी जब किसी उच्चाधिकारी ने नहीं सुनी और उन्हें अपनी नौकरी बचाने का कोई सहारा नहीं दिखाई पड़ा तो आखिरकार 'जानकारी' के माध्यम से उन्होंने दिनांक 15.10.07 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का सहारा लेकर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, मधेपुर से जवाब-तलब किया। परिणामस्वरूप 30 दिनों के भीतर श्री चन्द्रशेखर प्रसाद नया प्राथमिक विद्यालय, बैद्यनाथपुर पंचायत परवलपुर, प्रखण्ड मधेपुर में पंचायत शिक्षक के पद पर नियोजित किए गए। आज श्री प्रसाद पंचायत में बतौर शिक्षक कार्यरत हैं।

स्वयं सहायता समूह को मिले अनुदान के गबन का मामला उजागर

झंझरपुर अनुमंडल के लखनौर प्रखण्ड के वेहट दक्षिणी पंचायत स्थित पिपराघाट गाँव में दो मिश्रित स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया था। समूहों के गठन के दौरान कुछ बिचौलिए किस्म के लोगों ने 25 लोगों को मिला कर गठित इन समूहों की संरचना इस रूप में की थी कि भविष्य में स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना के तहत बैंक से मिलने वाले अनुदान व ऋण की राशि महज दो परिवारों के बीच तक सीमित रहे। इस साजिश में लखनौर प्रखण्ड के महिला प्रसार पदाधिकारी से लेकर भारतीय स्टेट बैंक, झंझरपुर के क्षेत्रीय पदाधिकारी तक समान रूप से संलिप्त थे। नियमानुकूल कुटीर उद्योग के नाम पर समूह को ऋण और अनुदान मिलाकर पाँच लाख रुपये समय से मिले भी। जिसमें दो लाख पचास हजार रुपये अनुदान था। परंतु इस राशि की निकासी की सूचना समूह के मात्र दो पदाधिकारियों तक ही सीमित रखी गयी जो या तो एक ही परिवार के सदस्य थे या फिर आपस में पति-पत्नी। स्वरोजगार के नाम पर मिली इस राशि से कोई रोजगार प्रारम्भ करने की बजाए इसका गबन कर लिया गया। जबकि समूह में अपने हिस्से की राशि प्रतिमाह जमा करते रहने के बावजूद अन्य सदस्यों को कोई लाभ नहीं मिला। आखिरकार समूह की सदस्या पिपराघाट गाँव निवासी रतन देवी, पति-श्री हरि प्रसाद साह ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दिनांक 16,408 को अनुमंडल पदाधिकारी से स्वयं सहायता समूहों को स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना के तहत मिलने वाले वित्तीय अनुदान से संबंधित जानकारी माँगी। तब जाकर मामले का खुलासा हुआ और समूह की सभी सदस्याओं को पूर्व में प्राप्त अनुदान राशि में से दस-दस हजार रुपये प्रति सदस्य भुगतान कराया गया। अपने हिस्से की गबन हुई राशि पाकर सभी महिलायें आज प्रसन्न हैं और इस पूँजी से अपना व्यवसाय खड़ा करने में लगी हुई हैं।

पंचायत को मिले वृक्षारोपण हेतु तीन लाख रुपए

झंझरपुर अनुमंडल क लखनौर प्रखण्ड क अन्तर्गत मदनपुर पंचायत में प्रखण्ड पंचायत समिति लखनौर कं द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत वृक्षारोपण का प्रस्ताव पारित कर कार्य शुरू करने का निदेश प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को दिया गया। वित्तीय वर्ष 2005-06 में मदनपुर की पंचायत समिति सदस्या रेखा देवी ने अनुशंसा की थी जिस पर कृल लागत दो लाख तिहत्तर हजार रु० (273,000/- ) प्रस्तावित था। मार्च, 2006 में सम्पन्न प्रखण्ड पंचायत समिति की बैठक में पारित प्रस्तावों के आलोक में अंगरेजिया पोखर मदनपुर से लेकर कमला बलान के पश्चिमी तटबंध तक वृक्षारोपण काम हेतु प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, लखनौर ने मार्च 2006 में ही प्रथम किश्त के चेक पर अपना हस्ताक्षर कर काम शुरू करने का निदेश कार्यकारी एजेन्सी को दिया। उस समय इस योजना के तहत निर्गत किए जानेवाले चेक पर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, लखनौर के साथ-साथ प्रखण्ड प्रमुख का हस्ताक्षर भी होना आवश्यक होता था। परन्तु उक्त चेक पर प्रमुख ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। पंचायत समिति सदस्या अपने ही निर्वाचित प्रमुख के इस रूख के विरोध में 04 महीने तक लगातार उच्चाधिकारियों के यहाँ लिखित रूप से शिकायत करती रहीं। शिकायत के आलोक में जाँच भी हुई परन्तु कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार रेखा देवी को सूचना का अधिकार अधिनियम की जानकारी मिली और दिनांक 146,07 को उन्होंने सूचना आवेदन दायर कर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी से जवाब-तलब किया। इसका व्यापक असर दिखाई पड़ा और कुछ दिनों के भीतर आनन-फानन में वृक्षारोपण का काम शुरू किया गया। आज इस योजना के तहत मदनपुर पंचायत में सैकड़ों वृक्ष लगे हुए हैं।

पंचायत शिक्षकों ने पाया बकाया मानदेय

मधुबनी जिले की झ्झरपुर प्रखण्ड अन्तर्गत नवानी पंचायत क पंचायत शिक्षकगण भाष्कर चन्द्रमन्नु एवं वन्दना कुमारी के मार्च 2006 से सितम्बर 2006 तक का मानदेय का भुगतान नहीं हो रहा था। इसके लिए शिक्षकगण दर्जनों बार मुखिया से लेकर अनुमंडल पदाधिकारी, झंझारपुर तक दौड़ लगाते रहे जबकि इस अवधि की राशि ग्राम पंचायत के खाते में वर्षों से यूँ ही पड़ी थी। शिक्षकों के मानदेय भुगतान नहीं करने को लेकर मुखिया व पंचायत सेवक द्वारा तरह-तरह के बहाने बनाये जा रहे थे। शिक्षकों को उनकी कार्यावधि का कोई पैसा नहीं मिला। आखिरकार दिनांक-22.1207 को एक साथ शिक्षकों ने सूचना का अधिकार के तहत अलग-अलग आवेदन दायर किया। पंचायत शिक्षक रामचन्द्र कुमार चौधरी, भाष्कर चन्द्र मन्नु एवं बालाजी सिंह ने पंचायत सेवक, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी एवं प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी से जवाब-तलब किया। तब जाकर इन शिक्षकों के मानदेय का भुगतान हो सका।

अवैध रूप से कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी की नौकरी छिनी

मिथिलेश कुमार झा, अनुमंडलीय अस्पताल झंझारपुर में लिपिक के पद पर वर्षों से नाजायज तरीके से कार्यरत थे। श्री झा की नियुक्ति पत्रांक-2905, दिनांक - 31.1.89 द्वारा सिविल सर्जन मधुबनी के कार्यालय से हुई थी। परन्तु श्री इा के नियोजन के दौरान न तो आरक्षण के नियमों का पालन हुआ था और न साक्षात्कार। चयन समिति द्वारा नियोजन की अनुशंसा के बगैर श्री झा की नियुक्ति हुई थी। सबसे बड़ी बात तो यह थी कि जिस तिथि को श्री इन की नियुक्ति का पत्र निर्गत किया गया था, वह दिन रविवार था जो सार्वजनिक बन्दी का दिन होता है। इस अवैध नियोजन के बारे में सैकड़ों बार वरीय पदाधिकारियों के पास शिकायत की गई परन्तु कहीं किसी अधिकारी ने इसे निरस्त करने की कार्रवाई नहीं की। बल्कि मनचाहे स्थान पर श्री इस की पदस्थापना होती रही। आखिरकार अवकाश प्राप्त चिकित्साकर्मी अरूण कुमार ने दिनांक 28508 को क्षेत्रीय उप निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएँ, दरभंगा, प्रमंडल के पास सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन दायर कर जवाब-तलब किया। तब जाकर शुरू हुई विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया और अंततः असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, मधुबनी ने अपने कार्यालय पत्रांक-227 दिनांक-25.1.08 के द्वारा अवैध चिकित्साकर्मी का नियोजन रद्द कर दिया।

विधवा चन्द्रकला को सामाजिक सुरक्षा पेंशन

चन्द्रकला मधुबनी जिला के लखनौर प्रखण्ड के बेरमास पंचायत की भखरौली गाँव की रहने वाली हैं। दुर्भाग्यवश इनके पति की असामयिक मृत्यु हो गई। विधवा चन्द्रकला ने पति के मरणोपरान्त राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के लिए आवेदन किया था। आवेदन को लेकर वह दफ्तरों का चक्कर काटती रहीं परन्तु लम्बे समय तक प्रतीक्षा करने के बावजूद उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। थक हारकर उन्होंने दिनांक-26.06.07 को सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्रखण्ड विकास पदाधिकारी लखनौर से जवाब-तलब किया। इस कार्रवाई ने रंग दिखाया और इन्हें पारिवारिक लाभ के रूप में 10,000/- रु० का चेक प्रदान किया गया।

अनुत्तीर्ण छात्र को मिली प्रथम श्रेणी

झंझरपुर प्रखण्ड के लोहना उत्तरी पंचायत निवासी मलय नाथ मिश्र जो हिन्दुस्तान दैनिक के स्थानीय संवाददाता भी हैं, नालंदा खुला विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार विषय में दो वर्षीय स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे थे। द्वितीय वर्ष की परीक्षा ठीक जाने के बावजूद श्री मिश्रा को अनुतीर्ण कर परीक्षाफल भेज दिया गया। अच्छे अंक से पास होने की उम्मीद पाल बैठे श्री मिश्रा ने विश्वविद्यालय से प्राप्त इस परीक्षाफल से निराश होने की बजाय सूचना के अधिकार के तहत चुनौती देने की ठानी। श्री मिश्रा ने सूचना के अधिकार का प्रयोग कर विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब-तलब किया। विश्वविद्यालय प्रशासन को जैसे ही आवेदन मिला, उन्हें अपनी भूल समझ में आई। विश्वविद्यालय ने जाँचोपरांत आवश्यक कार्रवाई कर श्री मलय नाथ मिश्रा को प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण किया।

अवैध रूप से नियोजित आँगनबाड़ी सेविका का चयन रद्द

अंधराठाढ़ी प्रखण्ड के मदना पंचायत के गीदरगंज पूर्वी टोला आँगनबाड़ी केन्द्र सं०-22 पर सेविका के चयन में काफी अनियमितता बरती गई थी। नियमानुकूल इस केन्द्र पर जिस अभ्यार्थी का चुनाव होना था उसका चयन न कर ग्राम पंचायत के मुखिया एवं बाल विकास परियोजना पदाधिकारी ने गुप्त रूप से दूसरे उम्मीदवार का चयन कर दिया। योग्यता रहने के बावजूद सेविका बन पाने से वंचित रही इसी पंचायत की रौशन आरा ने इसकी शिकायत अनुमंडल पदाधिकारी से लेकर जिला पदाधिकारी, मधुबनी तक से की। जिलाधिकारी की जाँच में अनियमितता का मामला प्रकाश में आया। इस आलोक में जिला कल्याण पदाधिकारी, मधुबनी ने दिनांक 26.12.05 को ही बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, अंधराठाढ़ी को उक्त केन्द्र का चयन रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दे रखा था। परन्तु बाल विकास परियोजना पदाधिकारी अंधराठाढ़ी ने वर्षों तक इस आदेश को दबाए रखा और अवैध रूप से वह आँगनबाड़ी केन्द्र चलता रहा। शिकायतकर्ता रौशन आरा दर्जनों बार बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कार्यालय का चक्कर लगाती रहीं परन्तु जब कहीं कोई कार्रवाई नहीं हुई तब आखिकार उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत बाल विकास परियोजना पदाधिकारी अंधराठाढ़ी से जवाब-तलब किया। इस आवेदन के दबाव में आकर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को कार्रवाई करनी पड़ी। कल्याण पदाधिकारी-सह-जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, मधुबनी ने अपने कार्यालय पत्रांक-1246 दिनांक 01.1206 के द्वारा अवैध रूप से चयनित सेविका श्रीमति रूबी खातून का चयन रद्द कर दिया।

पुष्पा ने पाई पंचायत शिक्षिका की नौकरी

मधेपुर प्रखण्ड क बाथ पंचायत निवासी श्रीमती पुष्पा झा ने पंचायत शिक्षक पदक लिए आवेदन किया था। नियमानुकूल पुष्पा झा का चयन होना चाहिए था। परन्तु गुपचुप तरीके से सोनी कुमारी नाम की एक दूसरे अभ्यर्थी का जिन्हें पुष्पा से कम प्राप्तांक प्राप्त था, इस पद पर नियोजन कर दिया गया। सोनी कुमारी काफी समय तक इस पद पर बनी भी रही। परन्तु बाद में पुष्पा झा को जैसे ही गुप्त रूप से हुए इस नियोजन की जानकारी मिली तो उन्होंने अपने रिश्तेदार हरिश्चन्द्र इन के माध्यम से दिनांक 23.10.07 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जिला शिक्षा अधीक्षक से जवाब-तलब किया। परिणामस्वरूप सोनी कुमारी को नौकरी गवानी पड़ी। पुष्पा झा आज मधेपुर प्रखण्ड के बाथ पंचायत स्थित नया प्राथमिक विद्यालय पुरारी टोल में पंचायत शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं।

लोक शिक्षिका ने पाया बकाया मानदेय

जूलिता कुमारी, मधेपुर प्रखण्ड के भीठ-भगवानपुर पंचायत में लोक शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं। उन्हें लोक शिक्षण केन्द्र नवटोलिया में एक अन्य शिक्षक उमेश कामत के साथ प्रतिनियुक्त किया गया था। शिक्षिका जूलिता अपने कर्तव्यों का निर्वहन करती रहीं। इसके एवज में इन्हें अगस्त 2005 तक प्रतिमाह 1,000/- रु का मानदेय मिलता रहा। परन्तु उसके बाद पंचायत के मुखिया एवं पंचायत सेवक ने मानदेय का भुगतान करने से इनकार कर दिया। जूलिता का अनुनय-विनय भी कोई काम नहीं आया। इस प्रकार वह 13 महीनों तक लगातार भूखे पेट अपने कर्तव्यों का निर्वहन करती रहीं। इसी बीच सरकार द्वारा लोक शिक्षण केन्द्रों को बन्द कर दिया गया। नौकरी जाने के बाद वह इस्झारपुर शहर में अपना व्यवसाय करने लगीं। इझारपुर में प्रवास के दौरान जब उन्हें सूचना का अधिकार कानून की जानकरी मिली तो उन्होंने दिनांक 6.12.07 की इस आशय का एक आवेदन दायर कर पंचायत सचिव से जवाब-तलब किया। किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं करने पर उतारू पंचायत सचिव पर जब आवेदक को जानकारी देने की विवशता समझ में आई तो वे आवेदन दायर करने के कुछ ही दिनों बाद 13 महीने के बकाया मानदेय की राशि का चेक बनाकर लोक शिक्षिका जूलिता के घर पहुँचे। उन्होंने न सिर्फ 13,000/- रु० का चेक दिया बल्कि जूलिता से अपनी गलती के लिए माँफी भी माँगी।

डेढ़ सौ पेंशनधारियों का खाता खुला

मधुबनी जिला के लखनौर प्रखण्ड अन्तर्गत गंगापुर पंचायत के दैयाखरबार गाँव के गरीब 200 पेंशनधारी सरकार के नये नियमों के मुताबिक राष्ट्रीय वृद्धवस्था पेंशन एवं समाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ पाने के उद्देश्य से दैयाखरबार उप डाक घर में पासबुक खुलवाने हेतु महीनों चक्कर लगाते रहे। परन्तु पोस्टमास्टर उन लोगों का खाता खोलने को तैयार नहीं था। कई बार इसकी शिकायत पेंशनधारियों ने डाक अधीक्षक, जिला समाहर्ता, मधुबनी एवं डाक निरीक्षक झंझारपुर एवं प्रखण्ड विकास पदाधिकारी से की। परन्तु कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इस कारण पेंशनधारियों को समय से पेंशन का भुगतान होना भी बंद हो गया। चारों ओर से कहीं कोई कार्रवाई नहीं होता देख पेंशनधारियों ने इसकी शिकायत गाँव के ही एक समाजिक कार्यकर्ता अरूण कुमार सिंह से की। श्री सिंह ने इन पेंशनधारियों की समस्या को देख सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत दिनांक 26.12.2006 को एक आवेदन डाक अधीक्षक मधुबनी के पास दायर किया। तब जाकर डाक विभाग की नींद खुली और पन्द्रह दिनों के भीतर डाक अधीक्षक मधुबनी ने स्वयं दैयाखरवार गाँव आकर मामले की जाँच की। दोषी पोस्टमास्टर श्री गणेश सिंह को तत्काल निलंबित करते हुए सभी पेंशनधारियों का खाता नजदीक के पोस्ट ऑफिस में खुलवाकर उनका पेंशन चालू करवाया।

प्रशासन ने शुरू कराया वृद्धा का इलाज

चनौरागंज पंचायत की एक नि:सहाय वृद्ध महिला उर्मिला देवी जिन्दगी और मौत से जूझती इलाज हेतु 03 अप्रैल, 2008 को अनुमंडल अस्पताल झंझारपुर पहुँची। उनकी हालत अति दयनीय थी और उनके साथ कोई परिचारक भी नहीं था। बाबजूद वहाँ कार्यरत चिकित्सकों ने बिना उचित चिकित्सकीय सहायता दिए उन्हें दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। उनके पास न तो पैसा था और न ही कोई सहयोगी। इसलिए वह अस्पताल के बरामदे पर ही सहायता की आशा में पड़ी रहीं। दूसरे दिन उर्मिला देवी की दर्दनाक स्थिति की विस्तृत खबर विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई। जब उनकी स्थिति बिगड़ने लगी तो प्रखण्ड के चनौरागंज पंचायत के उप मुखिया भरत चौधरी ने दिनांक 07.04.08 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत अनुमंडल पदाधिकारी, झंझारपुर से जवाब-तलब किया। मामला जीवन और मौत से जुड़ा होने के कारण 48 घंटों के भीतर प्रशासन ने जो सूचना उपलब्ध कराई वह भोजन के अभाव में एक महिला के इस नाजुक स्थिति में पहुँचने का खुलासा था। साथ ही अनुमंडल पदाधिकारी झंझारपुर ने अंचल निरीक्षक झंझारपुर एवं चौकीदारों के साथ उन्हें बेहतर चिकित्सा हेतु दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल सरकारी खर्च पर भेजा। इस बीच इतना विलंब हो गया था कि दरभंगा मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान उर्मिला देवी की मौत हो गई।

विकास मद की राशि क गबन का मामला उजागर

चन्देश्वर यादव फुलपरास प्रखण्ड के महिंदवार पंचायत के निवासी हैं। इस पंचायत में स्थानीय मुखिया, पंचायत सचिव एवं कनीय अभियंत