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प्रकीर्ण

इस भाग में प्रकीर्ण के बारे में जानकारी दी गई है।

सदभावपूर्वक की गई कारवाई का संरक्षण

21.  कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के बारे में, जो इस अधिन्यीं या इसके अधीन बनाये गए किसी नियम के अधीन सदभावपूर्वक की गई हो या की जाने के लिए आशायित हो, किसी व्यक्ति के विरूद्ध न होगी।

अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना।

1923 का 19 22. इस अधिनियम के उपबंधों का, शासकीय गुप्त बात, अधिनियम, 19२३ और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से अन्यथा विधि के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखत में असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभाव होगा।

न्यायालयों की अधिकारिता का वर्जन

23. कोई न्यायालय, इस अधिनियम के अधीन किये गए किसी आदेश की बाबत कोई वाद, आवेदन या अन्य कार्यवाही ग्रहण नहीं करेगा और ऐसे किसी आदेश को, इस अधिनियम के अधीन अपील से भिन्न किसी रूप में प्रश्नगत नहीं किया जायेगा।

अधिनियम का कतिपय संगठनों को लागू न होना

24. (1) इस अधिनियम में अंतविर्ष्ट कोई बात, केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित आसूचना औए सुरक्षा संगठनों को, जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट है या ऐसे संगठनों द्वारा उस सरकार को प्रस्तुत की गई किसी सूचना को लागू नहीं होगी:

परन्तु भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के अतिक्रमण का अभिकथनों से सम्बन्धित सूचना इस उपधारा से अपवर्जित नहीं होगी ।

“परन्तु यह और है कि मानव अधिकारों के अतिक्रमण के आरोपों के मामलों में, मांगी गई जानकारी केवल सम्बंधित सूचना आयुक्त के अनुमोदन से ही दी जाएगी और धारा 7 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी जानकारी अनुरोध की प्राप्ति के तैतालिस दिनों के भीतर प्रदत्त की जाएगी।”

(२) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में किसी अधिसूचना द्वारा अनुसूची का, उस सरकार द्वारा स्थापित किसी अन्य आसूचना या सुरक्षा संगठन को उसमें सम्मिलित करके या उसमें पहले से विनिर्दिष्ट किसी संगठन का उससे लोप करके, संशोधन कर सकेगी औए ऐसी अधिसूचना के प्रकाशन पर ऐसे संगठन को अनुसूची में, यथास्थिति, सम्मिलित किया गया या उससे लोप किया गया समझा जायेगा।(3)  उपधारा (२) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष राखी जायगी।

“(4) इस अधिनियम की कोई बात ऐसे आसूचना और सुरक्षा संगठनों को लागू नहीं होगी, जो समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किये जाएं ।

परन्तु भ्रष्टाचार के अभिकथनों से सम्बन्धित सूचना इस धारा के अधीन अपवर्जित नहीं की जाएगी:

परन्तु यह और कि मानव अधिकारों के अतिक्रमण के आरोपों के मामलों में, माँगी गई जानकारी केवल सम्बन्धित सूचना आयुक्त के अनुमोदन से ही दी जाएगी और धारा 7 में कसी बात के होते हुए भी, ऐसी जानकारी अनुरोध प्राप्ति के पैतालीस दिनों के भीतर प्रदत्त की जांएगी।

(5) उपधारा (4) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना राज्य विधानमंडल के समक्ष राखी जायगी।

निगरानी औए रिपोर्ट करना

25. (1) यथास्थिति, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग प्रत्येक वर्ष के अंत के पश्चात यथासाध्यशीघ्रता से वर्ष के दौरान इस अधिनियम के  कार्यान्वयन के सम्बन्ध में एक रिपोर्ट तैयार करेगा और उसकी एक प्रति समुचित सरकार को भेजेगा।

(२) प्रत्येक मंत्रालय या विभाग, अपनी अधिकारिता के भीतर लोक प्राधिकरणों के सम्बन्ध में, ऐसी सूचना एकत्रित करेगा और उसे यथास्थिति, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग को उपलब्ध कराएगा, जो इस धारा के अधीन रिपोर्ट तैयार करने के लिए अपेक्षित है और इस धारा के प्रयोजनों के लिए,  उस सूचना को प्रस्तुत करने तथा  अभिलेख रखने से सम्बन्धित अपेक्षाओं का पालन करेगा।

(3) प्रत्येक रिपोर्ट में, उस वर्ष के सम्बन्ध में कथन होगा, जिसमें रिपोर्ट निम्नलिखित से सम्बन्धित हैं-

क) प्रत्येक लोक प्राधिकारी को किये गए अनुरोधों की संख्या,

ख) ऐसे विनिश्चयों की संख्या, जहाँ आवेदन, अनुरोधों के अनुसरण में दस्तावेजों तक पहुंच के लिए पात्र नहीं थे, इस अधिनियम के वे उपबंध, जिसके अधीन ये विनिश्चय किये गए थे और ऐसे समयों की संख्या, जब ऐसे उपबन्धों का अवलंब किया गया था,

ग) पुनर्विलोकन के लिए यथास्थिति, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग को निद्रिष्ट की गई अपीलों की संख्या अपीलों के स्वरुप और अपीलों के निष्कर्ष,

घ) इस अधिनियम के प्रशासन के सम्बन्ध में किसी अधिकारी के विरुद्ध की गई अनुशासनिक कारवाई की विशिष्टियां,

ड.) इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक लोक प्राधिकारी द्वारा एकत्रित की गई प्रभारों की रकम .

च) कोई ऐसे तथ्य, जो इस अधिनियम की भावना और आशय को ग्रहण कराने या कार्यान्वित करने के लिए लोक प्राधिकारियों के प्रयास को उपदर्शित करते है,

छ) सुधार के लिए सिफारिशें , जिसके अंतर्गत इस अधिनियम या अन्य विधान या सामान्य विधि के विकास, अभिवृद्धि आधुनिकीकरण, सुधार या संशोधन के लिए विशिष्ट लोक प्राधिकारियों की बाबत सिफारिशें या सूचना तक पहुँच के अधिकार को प्रवर्तनशील बनाने से सुसंगत कोई अन्य विषय भी हैं।

(4) यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार प्रत्येक वर्ष के अंत के पश्चात यथासाध्य, शीघ्रता से, उपधारा (1) में निद्रिष्ट यथास्थिति, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग की रिपोर्ट की एक प्रति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष हैं वहाँ प्रत्येक सदन के समक्ष और जहाँ राज्य विधानमंडल का एक सदन है वहाँ उस सदन के समक्ष रखवाएगी।

(5) यदि आयोग को ऐसा प्रतीत होता है कि इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का प्रयोग करने के सम्बन्ध में किसी लोक प्राधिकारी की पद्धति इस अधिनियम के उपबंधों या भावना के अनुरूप नहीं है तो वह प्राधिकारी को ऐसे उपाय विनिदिष्ट करते हुए सिफारिश कर सकेगी, जो उसकी राय में ऐसी अनुरूपता को बढ़ाने के लिए किये जाने चाहिए।

केन्द्रीय सरकार द्वारा कार्यक्रम तैयार किया जाना।

26. (1) केन्द्रीय सरकार, वित्तीय और अन्य संसाधनों की उपलब्धि की सीमा तक-

क)  जनता की, विशेष रूप से, उपेक्षित समुदायों की, इस अधिनियम के अधीन अनुध्यात अधिकारी का प्रयोग करने के ज्ञान में वृद्धि करने के लिए शिक्षिक कार्यक्रम बना सकेगी और आयोजित कर सकेगी,

ख) लोक प्राधिकारियों  को, खंड (क) में निर्दिष्ट कार्यक्रमों और आयोजन में भाग लेने और उनके लिए ऐसे कार्यक्रम करने के लिए बढ़ावा दे सकेगी,

ग) लोक प्राधिकारियों  द्वारा उनके क्रियाकलापों के बारे में सही जानकारी का समय से और प्रभावी रूप में प्रसारित किये जाने का बढ़ावा दे सकेगी,

घ) लोक प्राधिकारियों के यथास्थिति केंद्रीय लोक सूचना अधिकारियों  या राज्य लोक सूचना अधिकारियों को प्रशिक्षित कर सकेगी और लोक सूचना प्राधिकरण द्वारा अपने प्रयोग के लिए सुसंगत प्रशिक्षण सामग्रियां पेश कर सकेगी

(२) समुचित सरकार, इस अधिनियम के प्रारंभ से अठारह माह के भीतर, अपनी राजभाषा में, सहज व्यापक रूप और रीति में ऐसी सुचना वाली एक मार्गदर्शिका संकलित करेगी, जिसकी ऐसे  किसी व्यक्ति द्वारा युक्तियुक्त  रूप में अपेक्षा की जाए, जो अधिनियम में विनिर्दिष्ट किसी अधिकार का प्रयोग करने चाहता है।

(3)  समुचित सरकार, यदि आवश्यक हो, उपधारा (२) में निर्दिष्ट मार्गदर्शी सिद्धांतों को नियमित अंतरालों पर अद्यतन और प्रकाशित करेगी, जिनमें विशिष्टितया और उपधारा (२) की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना निम्नलिखित सम्मिलित होगा-

क) इस अधिनियम के उद्देश्य,

ख) धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त प्रत्येक लोक प्राधिकारी के यथास्थिति केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, का डाक और गली का पता, फोन और फैक्स नम्बर और यदि उपलब्ध हो तो उसका इलेक्ट्रॉनिक डाक पता,

ग) वह रीति और प्रारूप, जिसमें किसी यथास्थिति, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी को किसी सूचना तक पहुँच कर अनुरोध किया जायेगा,

घ) इस अधिनियम के अधीन लोक प्राधिकरण के किसी यथास्थिति, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी से उपलब्ध सहायता और उसके कर्तव्य,

ड.) आयोग से उपलब्ध सहायता,

च) इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त या अधिरोपित किसी अधिकार या कर्तव्य की बाबत किसी कार्य या कार्य करने में असफल रहने के सम्बन्ध में विधि में उपलब्ध सभी उपचार, जिनके अंतर्गत आयोग को अपील फाइल करने की रीति भी है,

छ) धारा 4 के अनुसार अभिलेखों के प्रवर्गों के स्वैच्छिक प्रकटन के लिए उपबंध करने वाले उपबंध,

ज) किसी सूचना तक पहुँच के लिए अनुरोधों के सम्बन्ध, में संदत्त की जाने वाली फीसों से सम्बन्धित सूचनाएं ,

झ)  इस अधिनियम के अनुसार किसी सूचना तक पहुँच प्राप्त करने के सम्बन्ध में बनाए गए या जारी किये गए कोई अतिरिक्त विनियम या परिपत्र ।

4) समुचित सरकार को, यदि आवश्यक हो, नियमित अंतरालों पर मार्गदर्शी सिद्धांतों को अद्यतन और प्रकाशित करना चाहिए।

नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति

27. (1) समुचित केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी।

२) विशिष्टतया और पुर्वागामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्लिखित सभी या किसी विषय के लिए उपबंध कर सकेंगें, अर्थात :-

क) धारा 4 के उपधारा (4) में प्रसारित किये जाने वाले मीडियम की लागत या मीडियम का प्रिंट लागत मूल्य,

ख) धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन संदेय फीस,

ग) धारा 7  की उपधारा (1) और उपधारा (5) के अधीन संदेय फीस

घ) धारा 13 और 16 की उपधारा (7) के अधीन अधिकारियों और कर्मचारियों को संदेय वेतन और भत्ते तथा उसकी सेवा के निबंधन और शर्तें,

ड.) धारा 16 की उपधारा (10) के अधीन अपीलों का विनिश्चय करते समय यथास्थिति, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया,

च) कोई अन्य विषय, जो विहित किये जाने के लिए अपेक्षित हो या विहित किया जांए

नियम बनाने की संक्षम प्राधिकारी की शक्ति

28. (1) संक्षम प्राधिकारी, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगा।

(२) विशिष्टतया और पुर्वागामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले विना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी विषय के उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात:-

  1. I.     धारा 4 की उपधारा (4) के अधीन प्रसारित की जाने वाली सामग्रियों के माध्यम की कीमत य प्वाईंट  कीमत लागत
  2. II.     धारा 7 की उपधारा () के अधीन संदेय फीस, और
  3. III.     कोई अन्य विषय, जो विहित किये जाने के लिए अपेक्षित हो या विहित किया जाए

नियमों का रखा जाना

29. इस अधिनियम के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने की पश्चात् यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह ऐसी कुल तीस दिन की अवधि के लिए सत्र में हो, जो एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी/समाविष्ट हो सकेगी, रखा जायेगा और यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों में पूरी ठीक बाद के सत्र के अवसर के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाते हैं अथवा दोनों सदन सहमत हो जाते हैं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात वह नियम यथास्थिति, केवल ऐसे उपांतरित रूप में ही प्रभावी होगा या निष्प्रभाव हो जायेगा। किन्तु ऐसे परिवर्तन या निष्प्रभाव से उस नियम के अधीन फले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

(2) इस अधिनियम के अधीन किसी राज्य सरकात द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम अधिसूचित किये जाने के पश्चात् यथाशीघ्र राज्य विधानमंडल के समक्ष रखा जायेगा।

कठिनाईयों को दूर करने की शक्ति

30 (1) यदि इस अधियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे उपबन्ध, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों, बना सकेगी जो कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक और समीचीन प्रतीत होते हों

परन्तु इस अधिनियम के अधीन कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नही किया जायेगा।

(२) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किये जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जायेगा।

निरसन 31. सूचना स्वातंत्रय अधिनियम 2002 इसके द्वारा निरसित किया जाता है।

पहली अनुसूची

(धारा 13 की उपधारा (3 देखिये)।

मुख्य सूचना आयुक्त, सूचना आयुक्त या राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त द्वारा लि जाने वाली शपथ या किये जाने वाली प्रतिज्ञान का प्रारूप “मैं, जो ------------------ मुख्य सूचना आयुक्त/ सूचना उपआयुक्त/ राज्य मुख्य सूचना आयुक्त/ राज्य सूचना आयुक्त नियुक्त हुआ हूँ, ईश्वर की शपथ लेता हूँ कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के सविधान सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ  के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठां रखूँगा, मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूँगा तथा मैं सम्यक प्रकार से और श्रद्धापूर्वक तथा अपनी पुरी योग्यता, ज्ञान और विवेक से अपने पद के कर्तव्यों  का भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना पालन करूंगा तथा मैं संविधान और विधियों की मर्यादा बनाये रखूँगा।”

दूसरी अनुसूची

(धारा 21 देखिए)

केन्द्रीय सरकार के अधीन स्थापित आसूचना औए सुरक्षा संगठन -

1.  असूचना ब्यूरो।

2.  मंत्रिमंडल सचिवालय के अनुसन्धान और विशलेषण खंड

3.  राजस्व असूचना निदेशालय।

4.  केन्द्रीय आर्थिक असूचना ब्यूरो।

5.  प्रवर्तन निदेशालय।

6.  स्वापक नियत्रण ब्यूरो।

7.  वैमानिक अनुसन्धान केद्र

8.  विशेष सीमांत बल

9.  सीमा सुरक्षा बल

10. केन्द्रीय आरक्षित पुलिस बल

11. भारत तिब्बत सीमा बल

12. केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल

13. राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड

14. असम रायफल

15. विशेष सेवा ब्यूरो।

16. विशेष शाखा (सीआइडी) अंडमान  और निकोबार

17. अपराध  शाखा सीआइडी-सीबी, दादरा और नागर हवेली

18. विशेष शाखा लक्ष्यद्वीप पुलिस।

स्रोत:- सूचना का अधिकार विधेयक, 2005, जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची।

2.93137254902

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