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आधार कार्ड की विशेषतायें

सार्वभौमिकता

  • सार्वभौमिकता, यह सुनिश्चित है कि आधार को समय के साथ देश भर में सेवा प्रदाताओं द्वारा मान्य एवं स्वीकार किया जायेगा।
  • प्रत्येक निवासी आधार संख्या हेतु पात्रता रखता है।
  • संख्या के फलस्वरूप सार्वभौमिक पहचान अवसंरचना निर्मित होगी जिस पर देश भर में पंजीयक एवं एजेंसी उनकी पहचान आधारित अनुप्रयोगों का निर्माण कर सकते हैं।
  • भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण, (भा.वि.प.प्रा.) आधार संख्या हेतु निवासियों को नामांकित करने के लिये देश भर के विभिन्न पंजीयकों के साथ साझेदारी करेगा, ऐसे पंजीयक राज्य सरकारों, राज्य- सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, बैंक, टेलीकॉम कंपनियों इत्यादि को शामिल कर सकते हैं। ये पंजीयक आगे निवासियों को आधार में नामांकित करने हेतु नामांकन एजेंसियों के साथ भागीदारी कर सकते हैं।

दस्तावेजों की जांच

  • आधार सरकारी व निजी एजेंसियों एवं निवासियों के मध्य विश्वास में वृद्धि सुनिश्चित करेगा। एक बार निवासियों का आधार के लिये नामांकन होते ही सेवा प्रदाता को सेवा प्रदान करने से पहले के.वाई.आर. संबंघी दस्तावेजों की जांच जैसी समस्या का सामना नहीं करना होगा। वे अब निवासियों को बिना पहचान दस्तावेजों के सेवाए देने से इन्कार नहीं कर सकते हैं।
  • निवासियों को भी बार- बार दस्तावेजों के माध्यम से पहचान उपलब्ध कराने की परेशानी नहीं होगी। जब भी वे कई सेवाओं जैसे बैंक में खाता खुलवाने, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की आवश्यकता महसूस करेंगे, आधार संख्या पर्याप्त होगी।
  • पहचान के स्पष्ट सबूत प्रदान कर, आधार, निर्धनों एवं दलितों को सेवाओं जैसे औपचारिक बैंकिंग प्रणाली तथा सरकारी एवं निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों की कई अन्य सेवाओं का आसानी से उपयोग करने हेतु अवसर प्रदान कर सशक्त बनाता है।

आधार प्रमाणीकरण

  • भा.वि.प.प्रा. का केन्द्रीयकृत प्रौद्योगिक अवसंरचना 'कभी भी, कहीं भी, किसी भी तरह'' प्रमाणीकरण को सक्षम करेगी। इस तरह आधार प्रवासियों को भी पहचान की गतिशीलता प्रदान करेगा।
  • आधार प्रमाणीकरण सजीव ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन दोनों तरीके से किया जा सकता है।
  • निवासियों को दूर से अपनी पहचान स्थापित करने हेतु सेलफोन/लैण्ड लाइन कनेक्शन सजीव प्रमाणीकरण की अनुमति प्रदान करेगा।

पहचान सत्यापन


  • सजीव आधार से जुड़ा पहचान सत्यापन ग्रामीणों एवं निर्धनों को वैसा ही लचीलापन उपलब्ध करायेगा जिस तरह से शहरी धनी वर्तमान में अपनी पहचान सत्यापित करते हैं तथा सेवाओं जैसे कि बैंकिंग एवं अन्य का उपयोग करते हैं।
  • आधार, नामांकन पूर्व उचित सत्यापन की भी मांग करता है, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को इसमें सम्मिलित किया जाना सुनिश्चित है।
  • आधार डाटाबेस में इससे जुड़ीं समस्याओं को को रोकने के लिये भा.वि.प.प्रा. ने निवासियों को जनसांख्यिकीय एवं बायोमैट्रिक जानकारियों के उचित सत्यापन के साथ अपने डाटाबेस में नामांकित करने की योजना बनाई है। जो यह सुनिश्चित करेगा कि संग्रहित आंकड़े कार्यक्रम के प्रारंभ से ही सही हैं। हालांकि अधिकतर दलित एवं निर्धन लोगों के पास पहचान संबंधी दस्तावेजों का अभाव रहता है और आधार उनको अपनी पहचान साबित करने का पहला रूप हो सकता है।
  • भा.वि.प.प्रा. यह सुनिश्चित करेगा कि उसका अपने निवासी को जाने के.वाई.आर. का मानक निर्धनों के नामांकन में बाधा न बने इसके लिये परिचयदाता प्रणाली मानकों के अनुसार विकसित की गई है जिनके पास दस्तावेजों का अभाव है।
  • इस प्रणाली के द्वारा अधिकृत व्यक्ति (परिचयदाता) जिसके पास पहले से ही आधार है, उन निवासियों का, जिनके पास कोई पहचान संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, परिचय दे सकता है ताकि वे अपना आधार प्राप्त कर सके ।
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    स्त्रोत : भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण,भारत सरकार

अंतिम बार संशोधित : 2/21/2020



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