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बाल अधिकारों में सुधार

यह लेख बाल अधिकारों में सुधार की और उठाये गए क़दमों के बारे में बताता है। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर लिए गए निर्णयों की जानकारी भी देता है।

खम्मम और दंतेवाडा में बाल अधिकारों में सुधार

आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के क्रमशः खम्मम और दंतेवाडा जिले में नागरिक अशांति के बीच रहने वाले बच्चों के बारे में चिंतित, एनसीपीसीआर ने पाया है कि कुपोषण का मुकाबला करने के लिए आँगनवाड़ी स्थापित करने और बच्चों के स्वास्थ्य और टीकाकरण पर विचार करने के लिए एएसएचए (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) नियुक्त करने की उसकी आँध्रप्रदेश सरकार को अनुशंसाएं लागू की जा रही हैं। (छत्तीसगढ़ से विस्थापित) बच्चों को स्कूलों में लाने के लिए आवासीय सेतु पाठ्यक्रम (आरबीसी) स्थापित किए जा रहे थे।

खम्मम की दोबारा यात्रा के दौरान, एनसीपीसीआर टीम ने पाया कि कुपोषण गिरावट पर था, वैकल्पिक शिक्षा केन्द्र और आरबीसी ने बच्चों को श्रम से बाहर खींच लिया था और बच्चों की बड़ी संख्या का टीकाकरण हो चुका था।

हालांकि, टीम ने कहा कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए निगरानी और नियमित करने की जरूरत है। किशोर लड़कियां अभी भी स्कूलों में नहीं जा रही हैं और मतदाता कार्ड तथा राशन कार्ड की कमी विस्थापित आबादी की असुरक्षा में वृद्धि कर रही थी। इसके अलावा, गंभीर जल संकट स्वास्थ्य और पोषण में सुधार को धक्का देने की गंभीर चुनौती प्रस्तुत कर रहा था।

बाल अधिकार सुरक्षा समितियों की मदद से कर रहे सुधार

दंतेवाडा में सुकमा ब्लाक में गांवों का दौरा करते हुए, एनसीपीसीआर टीम ने पाया कि बच्चों को स्कूलों या आरबीसी भेजने के लिए परिवारों को मनाने हेतु समुदाय के लिए बाल अधिकार सुरक्षा समितियां (बास) गठित कर दी गईं थीं। कुछ महिलाएं बास के सदस्यों को संघर्ष कर रहे समूहों में शामिल होने के संदेह के रूप में गिरफ्तार हुई है, तो कुछ महिलाएं अपनी रिहाई के बाद भी बच्चों को नामांकन के लिए प्रोत्साहित करने में लगी हैं। क्षेत्र में शिक्षा के लिए मांग इतनी पुरजोर है कि सरकार ने कक्षा 8 से आगे का अध्ययन कर रहे बच्चों के लिए 500 सीटों की क्षमता वाले आश्रम स्कूलों और हॉस्टल के निर्माण के को मंजूरी दी है।

बास के सदस्यों ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा में बेहद दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। श्रम के लिए अवैध रूप से हैदराबाद ले जाए गए छह बच्चों का बास के सदस्यों ने पता लगाया जिन्होंने अपने संसाधन जमा कर शहर में जाकर और गैर सरकारी संगठन एमवी फाउंडेशन की मदद से उन्हें वापस लाने का काम किया।

बास की सक्रिय निगरानी के साथ, गांवों के स्कूलों में पूरी क्षमता के अनुसार नामांकन हो गए हैं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को उनके कर्त्तव्यों को पूरा करने में सहायता प्रदान की जा रही है।

स्त्रोत: पोर्टल विषय सामग्री टीम

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Jitendra Kumar Sep 12, 2016 01:11 PM

एक पिता का अपनी 14 varsh ki beti ke लिए क्या कानून ह..जिसकी पत्नी २००२ में गुज़र चुकी है. जो abhi use khana pani bhi sahi se nahi dete...

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