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किशोर न्याय (बच्चों के देखभाल एवं सुरक्षा) आधिनियम , 2000

इस लेख में किशोर न्याय (बच्चों के देखभाल एवं सुरक्षा ) आधिनियम , 2000 सम्बन्धी रुपरेखा की जानकारी दी गई है।

किशोर न्याय आधिनियम 1986, 2000  और 2006 का इतिहास और पृष्ठभूमि

भारत में किशोर न्याय प्रणाली बच्चों के अधिकारों को प्रोत्साहित और सुरक्षित करने के सिद्धांत पर आधारित है। बचों की असुरक्षा व विशेष और भिन्न व्यवहार की जरूरत को मानते हुए 1986  में ही पहली बार पूरे भारत के लिए एकरूप किशोर न्याय कानून को पारित किया गया। जब संसद ने बाल कानून को भारत के विभिन्न राज्यों में स्थानांतरित करने का फैसला किया। यह कानून 1985 के किशोर न्याय बीजिंग के संचालन के लिए संयुक्त राष्ट्र के मानक न्यूनतम नियम के साथ संबद्ध है। इसे देखरेख, सुरक्षा, व्यवहार विकास और अवहेलित व बच्चों की पुनर्स्थापन के लिए पारित किया गया है।

बहरलाल किशोर न्याय अधिनियम 198६ के क्रियान्वयन का इतिहास उम्मीदों के सच नहीं होने और साथ ही साथ इसके लागू न हो पाने की वजह को देखने के लिए इसकी एक समीक्षा की गई। 1992 के बाल आधिकारिक रूप से आने के साथ ही साथ बाल अपराधों के प्रति बदलते हुए सामाजिक मुद्राओं और अधिक बाल हित किशोर न्याय कानून की जरूरत कुछ ऐसे कारण थे जिसने किशोर न्याय बच्चें की देखरेख व सुरक्षा कानून 2000 को पारित करवाया। इस कानून ने पहले के 1986 कानून की जगह ली है।

बहरलाल किशोर न्याय अधिनियम 2000 बाल अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन बीजिंग नियम अपनी स्वतंत्रता से वंचित किशोर की सुरक्षा के लिए बने संयुक्त नियम और दूसरे तमाम राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय प्रणालियों जो बच्चों को साफ तौर पर 18 वर्ष तक की उम्र का  व्यक्ति परिभाषित करते हैं  के सिद्धांतों पर आधारित है। यह कानून भारतीय संविधान और संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन के सिद्धांतों पर आधारित है।

किशोर न्याय अधिनियम 2000 का एक सारांश

प्रस्तावना

इस कानून की प्रस्तावना यह कहती है कि यह कानून किशोर अपराध, समुचित देखभाल, सुरक्षा. विकास, उनके विकास की जरूरतें व बाल हित की भावना और इस कानून के तरह बने विभिन्न संस्थाओं के द्वारा उनके पुनर्स्थापन के द्वारा इन कानून को मजबूत किया जाए।

यह कानून भारतीय संविधान और संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन के चार नामांकित बड़े अधिकारों के प्रस्तावों पर आधारित है।

  • जीवन अधिकार
  • सुरक्षा का अधिकार
  • विकास का अधिकार
  • सहभागिता का अधिकार

प्राथमिकी

यह अध्याय मुख्य रूप से इस कानून द्वारा किशोर व बच्चे को एक व्यक्ति के तौर पर परिभाषित करता है जिसने 18  वर्ष की उम्र सेक्शन 2 k  नहीं पूरी की है। इस कानून के तरह बच्चों की दो श्रेणियां है।

  • किशोर कानून के साथ विरोध में उम्र सेक्शन 2 (1)
  • बच्चे जिन्हें देखरेख व सुरक्षा की आवश्यकता है।

बिना किसी शरण या घर के पाए जाने वाले बच्चे

  • उस व्यक्ति के साथ रहने वाले जो जान से मारने की धमकी देने वाले या बच्चे की कोई क्षति करनेवाला समझा जाता है।
  • उस व्यक्ति के साथ रहने वाले बच्चे, जिस व्यक्ति का बाल उत्पीड़न व अवहेलना एक एक इतिहास रहा है और इस प्रकार से बच्चा उसी व्यवहार का शिकार हो जाने के एक तार्किक खतरे के दायरे में है।
  • मानसिक रूप से या शारीरिक रूप से अक्षम बच्चे की श्रेणी में, बीमार या लगातार रोग ग्रस्त बच्चे या वे जो बिना किसी सहारे के लाईलाज बीमारी में हो, बच्चे जो आघात सह रहे हों  यह इसकी सम्भावना हो, उत्पीड़ित व शोषित बच्चे जो बाल व्यापार व ड्रग्स उत्पीड़न  के लिए इस्तेमाल किये जाने के खतरों के दायरे में हो,  बच्चे जो हथियार विवाद और प्राकृतिक विपदाओं के शिकार हों।
  • जिनके अभिभावक/देखरेखकर्त्ता बच्चे की देखभाल करने में अक्षम हो, परित्यक्त, गुमशुदा या भटकते हुए बच्चे जिनके अभिभावक या देखरेखकर्त्ता ढूंढने पर भी नहीं मिल सकें।

इस अध्याय की अन्य परिभाषाएं बच्चों के लिए बने विभिन्न संस्थाओं/घरों और इस कानून के तहत बने दूसरे सभी विश्वस्त अधिग्रहणों को शामिल करता है।

सेक्शन 3 किशोर या बच्चा जिन्हें एक ही प्रकार का मान लिए जाने वाले मामलों में इसके विरोध के लिए जाँच पड़ताल को जारी रखना: यदि किस जाँच पड़ताल के होने दौरान एक बच्चा या किशोर अपनी आयु के 18 वर्ष पूर्ण कर लेता है, पड़ताल जारी रहेगी और आदेश पारित हो जायेंगे, उस व्यक्ति से एक बच्चे के तौर पर व्यवहार करते हुए।

कानून के साथ विरोध में किशोर

यह उप अध्याय कानून के साथ विरोध में बच्चों की बात करता है।

सेक्शन 4-किशोर न्याय बोर्ड (JJB)

कानून के साथ विरोध में बच्चों से बात करने के लिए राज्य सरकार अधिकृत है की वह एक एक या अधिक किशोर न्याय बोर्ड स्थापित कर सके।
सदस्य

एक महानगरीय प्रथमश्रेणी का मजिस्ट्रेट या एक न्यायिक मजिस्ट्रेट और दो सामाजिक कार्यकर्त्ता जिसमें कम से कम एक महिला हो।

शैक्षणिक  योग्यता

मजिस्ट्रेट के पास बाल मनोविज्ञान या बाल कल्याण का एक विशेष ज्ञान या प्रशिक्षण होना चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्त्ताओं को स्वास्थ्य शिक्षा या कल्याण कार्यों जो सात के उम्र के बच्चों से सम्बन्धित हों में सक्रिय रूप से शामिल होते रहना चाहिए।

पदच्युत करना

राज्य सरकार एक जाँच पड़ताल के बाद किसी भी बोर्ड सदस्य के अधिकार के पदच्युत कर  सकत है।

  • यदि कानून के द्वारा मुहैया अधिकारों के दुरूपयोग में दोषी पाया जाए।
  • यदि नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ किसी अपराध के दोषी पाए गए।
  • यदि वे बोर्ड की बैठकों में बिना किसी वैध कारणों के लगातार तीन महीने तक अनुपस्थिति रहे या साल के तिहाई या चौथाई बैठक में अनुपस्थित रहे।

सेक्शन 5 प्रक्रियाएं, इत्यादि—बोर्ड के सम्बन्ध में:

  • एक बच्चा जो कानून के साथ विरोध में है किसी भी सदस्य के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है, जब बोर्ड नहीं बैठा हो।
  • सुनवाई के किसी भी चरण में बोर्ड के द्वारा पारित आदेश उसके किसी भी सदस्य की अनुपस्थिति में भी वैध है। वहां कम से कम दो सदस्य प्रस्तुत रहेंगे जिनमें मुख्य मजिस्ट्रेट मामले के अंतिम सुनवाई के समय शामिल होगा।
  • यदि पारित आदेश को लेकर बोर्ड के सदस्यों में मत भिन्नता है, तब बहुसंख्या के विचारों को लियेया जायेगा और यदि कोई बहुमत नहीं हो तो मुख्य मजिस्ट्रेट का विचार अंतिम होगा।

सेक्शन 6- किशोर न्याय बोर्ड के अधिकार

कानून के साथ विरोध में किशोर से सम्बन्धित कानून के भीतर सभी मामलों से निपटने के लिए बोर्ड अपार अधिकारों से लैस है।

यदि कोई मामला उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पुनर्समीक्षा या अपील के लिए आता है तो ये न्यायालय कि.न्या. बो. के तहत प्रतावित उन्हीं अधिकारों का उपयोग करेंगे।

सेक्शन 7 कानून के अंतर्गत अनाधिकृत दंडाधिकारी के कार्य करने की प्रक्रिया

कानून के अंतर्गत अनाधिकृत दंडाधिकारी के समक्ष किशोर बच्चे को प्रस्तुत किया जाए, तो दंडाधिकारी सुनवाई के एक लेखाजोखा के साथ विश्वस्त प्राधिकरण को जी (किशोर न्याय बोर्ड) के तहत अधिकृत हो इन्हें भेज सकता सकती है।

सेक्शन 8 और 9 - कानून के अंतर्गत गृह बनने चाहिए

कानून के साथ विरोध में बच्चों के लिए निगरानी और विरोध गृह स्थापित किया जाना चाहिए या प्रत्येक जिलों या जिलों के समूहों में स्वयं सेवी संस्थाओं की सहमति के अंतर्गत बनाया जाना चाहिए।

निगरानी गृह

निगरानी गृह उन बच्चों के लिए जो कानून के साथ विरोध में है, के लिए तात्कालिक तौर पर बनाये गये हैं जिनकी जाँच पड़ताल कानून (सेक्शन 8 (1) के अंतर्गत विचाराधीन है।

निगरानी गृह के पास एक स्वगत इकाई होगा, जिसमें उन बच्चों को जिन्हें माँ –बाप या अभिभावक के साथ नहीं रखा गया है शुरूआती तौर पर रखा जायेगा।

  • प्राथमिक जाँच पड़ताल
  • बच्चों के देखभाल और उम्र में उनका वर्गीकरण जैसे 7-12 वर्ष 12-16वर्ष  16-18 वर्ष

विशेष गृह

विशेष गृह कानून के साथ में आये किशोरों का ध्यान रखने और उन्हें पुनर्स्थापित करने के लिए बने है।  सेक्शन 9 (1)

सेक्शन 10 – विधि विरोधी ( विधि विरोधी (कार्यों में लिप्त) किशोर का पकड़ा जाना

  • जैसे ही पुलिस कानून के साथ विरोध में आये बच्चे को कानूनी अधिकार में लेती है, उसे बच्चे/बच्ची को विशेष किशोर पुलिस इकाई (सेक्शन 2 (w)  प्राधिकरण में भेज दिया जायेगा, जो तत्काल मामले की जानकारी बोर्ड (1) के एक सदस्य को 24 घंटे की अवधि के भीतर बच्चे/बच्ची की गिरफ्तारी की जगह  से यातायात शामिल नहीं है। किशोर के किसी भी मामले में उन्हें पुलिस लॉकअप या जेल में नहीं  रखा जायेगा।
  • राज्य सरकार व्यक्तियों के लिए स्वयंसेवी संगठनों को शामिल करते हुए, कानून के साथ विरोध में आये बच्चे को एक बोर्ड सदस्य (2) (ii) के समक्ष  पेश करने हेतु प्रावधान बनाने के लिए कानून बना सकता है।

किशोर न्याय बोर्ड की चरण दर चरण प्रक्रिया

  • यदि कानून का उल्लंघन करनेवाला किशोर जमानत पर नहीं छूटता है तो उसे निगरानी गृह में रखा जाता है, जब तक की किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष मामला निपट न जाए बच्चे को हर 15 दिन में किशोर  न्याय बोर्ड के समक्ष एक बार पेश करना आवश्यक है।
  • यदि कानून का उल्लंघन करनेवाला किशोर अपना अपराध स्वीकार कर लेता है तो वोर्ड किशोर न्याय अधिनियम की धारा15 के अंतर्गत अंतिम फैसला सुनाती है, जिसमें 18वर्ष की आयु तक बच्चे को निगरानी और फोलोअप शामिल है।
  • पुलिस को किशोर न्याय बोर्ड के आदेशानुसार 90 दिनों के अंतर्गत गृह में रहने वाले हर बच्चे/किशोर के विरुद्ध चार्जशीट दायर करनी है।
  • जमानत प्राप्त बच्चे/किशोर के विरुद्ध  चार्जशीट दायर करती है जब वह तैयार हो।
  • पकड़े गये/गिरफ्तार हुए बच्चे को 24 घंटे के भीतर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पुलिस द्वारा पेश किया जाता है।
  • यदि किसी कारणवश  न्याय बोर्ड के सत्र नहीं चल रहे हों तो बच्चे को महानगर न्यायालय के समक्ष पेश किया जा सकता है।
  • यदि कानून का उल्लंघन करनेवाला किशोर अपना अपराध स्वीकार न करे तो बोर्ड के समक्ष सुनवाई चलती रहती है।
  • सुनवाई खत्म होने पर धारा 15 के अंतर्गत निर्णय सुनाया जाता है।
  • जब चार्जशीट दायर हो चुकी हो और बच्चे को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष सुनवाई के लिए पेश किया जाए तो बोर्ड बच्चे को उसपर लगे आरोपों से वाकिफ कराती है।
  • बच्चे को सुरक्षित हिरासत के लिए निगरानी गृह में भेजा जाता है।
  • यदि किशोर न्याय बोर्ड को लगाता है और बच्चे पर छोटे अपराधों का दोष लगा है और माता-पिता या अभिभावक बोर्ड के समक्ष मौजूद है तो मजिस्ट्रेट बच्चे को कुछ शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ सकता है।

किशोर न्याय बोर्ड द्वारा हस्तक्षेप  के चरण

  • कानून का उल्लंघन करने वाला बच्चे को विशेष किशोर पुलिस इकाई या पदासीन पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जाता है।
  • बच्चे को पुलिस लॉकअप में नहीं रखा जा सकता ।
  • न्यायिक मजिस्ट्रेट व दो समाजिक कार्यकर्त्ता जो पीठ का कार्य करते हैं द्वारा बच्चे से सवाल जबाब किया जाता है व विस्तृत जाँच की जाती है।
  • निगरानी अधिकारी, बाल कल्याण अधिकारी भी बच्चे से मिलते है वा बच्चे का इतिहास दर्ज किया जाता है।
  • यदि बच्चे को उम्र पर सवाल है तो उम्र की जाँच व उम्र प्रमाण के लिए आदेश दिया जाता है। संशोधित कानून के अनुसार किशोर की उम्र अपराध की तिथि पर तय की जाती है।
  • पूछताछ के दौरान बच्चे को निगरानी गृह में रखने या माता-पिता की जिम्मेदारी पर उन्हें सौंपने का आदेश दिया जाता है जिसपर निगरानी व जाँच के दौरान बोर्ड के  समक्ष  पेश  किए जाने का आदेश भी शामिल होता है।
  • किशोर न्याय बोर्ड निगरानी अधिकारी से सामाजिक तहकीकात करने व उसकी रिपोर्ट देने का आदेश देता है।
  • यदि  जाँच पूरी गई हो तो बोर्ड अंतिम निर्णय सुनाती है।

एक बच्चे के खिलाफ दिए जाने वाले निर्णयों में निम्न शामिल है:

  • बच्चे व उसके माता-पिता को समझाना उनकी काउंसलिंग
  • बच्चे को सामुदायिक काउंसलिंग में जाने का आदेश देना
  • किशोर को सामुदायिक सेवा करने का आदेश देना
  • किसी उपयुक्त संस्था में किशोर को रखा जा सकता  है। (3 वर्षों से अधिक नहीं)
  • विशेष गृह में भेजे जाने का आदेश देना (3 वर्षों से अधिक नहीं)

सेक्शन11 किशोर पर अभिरक्षक का नियंत्रण

वह व्यक्ति जिसकी जिम्मेदारी में बच्चा है, वह बोर्ड के द्वारा तय किये गए विशेष अवधि के पूरे समय के लिए यद्यपि उसके माता-पिता या कोई अन्य व्यक्ति बच्चे को अपना बच्चा होने का दावा कर रहा हो, उस बच्चे के ऊपर उसका एक माता-पिता के रूप में नियंत्रण होगा और वह बच्चे के रखरखाव के प्रति जबावदेह होगा।

सेक्शन  12 किशोर की जमानत

  • यदि कोई बच्चा गैर जमानती किसी भी अपराध के लिए गिरफ्तार हुआ या बोर्ड के समक्ष हाजिर होता है, उसे सुनिश्चितता या बिना सुनिश्चितता के जमानत पर रिहा किया जाएगा। जब तक की उसके बाहर आने के बाद उस पर नैतिक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक खतरे के प्रति विश्वास ना हो। ऐसे मामलों में उसे निगरनी गृह या सुरक्षित जगह पर भेज दिया जायेगा।
  • यदि पुलिस स्टेशन का अधिकारी बच्चे को जमानत नहीं देता है, बच्चा/बच्ची को तब तक निगरानी गृह में रखा जायेगा, जब तक उन्हें बोर्ड के समक्ष हाजिर नहीं किया गया है।

सेक्शन 13 माता-पिता/अभिभावक या मामले के अधिकारी को सूचना

जब तक बच्चा गिरप्तार किया जाता है, पुलिस स्टेशन का अधिकारी या विशेष किशोर पुलिस इकाई सूचित करेगा।

  • बच्चे के माता-पिता या अभिभावक को अगर मिल जाएँ तब या सीधा बोर्ड के समक्ष उपस्थित करेगा।
  • मामले का अधिकारी (सेक्शन 2 (S)   के तहत बच्चे के पूर्व इतिहास, पारिवारिक पृष्टभूमि या कोई भी दूसरा ब्यौरा जो पूछताछ  में जरुरी हो के लिए सूचना लेने हेतु अधिकृत है।

सेक्शन 14 किशोर के मामले में बोर्ड की पड़ताल

जब बच्चा बोर्ड के समझ प्रस्तुत किया जाता है, तब उसकी जाँच पड़ताल होती है, जो जाँच पड़ताल शुरू होने के समय से चार महीने के भीतर पूरी होजानी है, जब तक कि किसी विशेष परिस्थिति में विस्तार की जरूरत ना हो इसे भी लिखित तौर पर रिकोर्ड में रखना होगा।

सेक्शन 15 किशोर के मामले में दिए जा सकने वाले निर्देश

बोर्ड को या तो निगरानी अधिकारी से या एक मान्यता प्राप्त संगठन से बच्चे पर हए सामाजिक जाँच पड़ताल रपट लेना होगा और खोजबीन पूरी हो जाने के उपरांत एक निर्देश देगा। इस बात से संतुष्ट होकर कि एक बच्चे ने अपराध किया है, बोर्ड निम्नलिखित निर्देश दे सकता है:

  • बच्चे को चेतावनी और शिक्षा देने के बाद बच्चे को घर जाने की अनुमति देगा।
  • बच्चे को समूह शिक्षा में भागीदारी करने और समान गतिविधियों में शामिल होने के निर्देश देगा।
  • बच्चे को सामुदायिक सेवा निर्वाह करने के निर्देश देगा।
  • बच्चा या बच्ची जिसकी उम्र वर्ष से ऊपर है, और वह कमा रहा है/रही है,, उसके माँ-बाप को या स्वयं उन्हीं को जुर्माना देने का निदेश दे सकता है। इसके अतिरिक्त यदि यह बच्चे या जनता के हित में है तो बोर्ड बच्चे को निगरानी अधिकारी के संरक्षण में तीन वर्ष से ज्यादा समय तक नहीं रखने के निर्देश दे सकता है।
  • निगरानी में रह रहे बच्चे को अच्छे व्यवहार के लिए उसे उसके माँ बाप/अभिभावक या किसी भी उचित व्यक्ति के यहाँ एक करार करने के बाद बिना निश्चितता या निश्चितता के साथ तीन वर्ष से ज्यादा वक्त तक बच्चे को नहीं रखते हुए उसे उनके पास भेजने का निर्देश दे सकता है। यदि यह बच्चे व जनता के हित में है तो बोर्ड बच्चे को निगरानी अधिकारी के संरक्षण में तीन वर्ष से ज्यादा समय तक नहीं रखने दे सकता है।
  • निगरानी में रह बच्चे को उसके अच्छे व्यवहार के लिए किसी उचित संस्था (सेक्शन 2 (h)  में तीन वर्ष तक की किसी भी अवधि के लिए जो इससे अधिक नहीं होगा बच्चे को रखने का निर्देश दे सकता है।
  • यदि किसी समय, निगरानी अधिकारी या कोई उचित व्यक्ति बोर्ड को यह सूचित करता है है उनकी निगरानी में रह रहे बच्चे का व्यवहार ठीक नहीं, या कोई उचित संस्था देर तक यह सुनिश्चित करने योग्य या इच्छुक नहीं है कि उसकी  संस्था में देखरेख हेतु रह रहे बच्चे के अच्छे व्यवहार और अच्छे भले के प्रति वह गंभीर है, बोर्ड बच्चे को एक विशेष गृह में भेजने के निर्देश दे सकता है।
  • बच्चा/बच्ची के 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक उन्हें एक विशेष गृह में भेजने के निर्देश दे सकता है। यदि बच्चा/ बच्ची 17वर्ष से ऊपर है, और  18 वर्ष को आयु से कम तब तक उन्हें विशेष गृह में कम से कम दो वर्ष तक रखा जाना चाहिए।

 

सेक्शन 16 किशोर के विरोध में नहीं दिए जा सकते

  • कानून के साथ विरोध में किसी भी बच्चे को मौत की सजा या आजीवन  कारावास नहीं दिया जायेगा या जुर्माना या जमानत नहीं देने की स्थिति में भी सजा नहीं दी जाएगी।
  • यदि कोई बच्चा 16 वर्ष का है, या बड़ा है, और उसने बोर्ड के विचार से बहुत ही गंभीर प्रकृति का अपराध किया है तो उसे विशेष गृह में या सेक्शन 15 के प्रावधानों के साथ नहीं लिया जा सकता, तब बोर्ड इसकी खबर राज्य सरकार को दे सकता है और बच्चे को सुरक्षित जगह पर भेजने के निर्देश दे सकता है। राज्य सरकार बच्चे को सुरक्षित निगरानी पर रख सकता है।

सेक्शन 17-अपराध प्रकिया संहिता की अध्याय 8 के अंतर्गत दी गई प्रक्रिया किशोर पर लागू नही होती।

  • कोई भी प्रक्रिया या निर्देश अपराध प्रक्रिया संहिता अध्याय 8 की तरह किशोर के विरोध में पारित नहीं किये जायेंगे।

सेक्शन 18- किशोर और जो किशोर नहीं है, उनकी साथ सुनवाई नही होगी।

  • कोई भी किशोर किसी अपराध के लिए एक व्यवस्क के साथ आरोपित या उसकी पड़ताल नहीं होगी। यदि एक किशोर किसी ऐसे व्यक्ति के साथ जो किशोर नहीं है और उसके साथ किशोर ने कोई अपराध किया है, बोर्ड दूसरे व्यक्ति को अलग से सुनवाई करने के निर्देश देगा।

सेक्शन 19- दोष के साथ जुडी अयोग्यता को हटाना

  • एक किशोर जिसने एक अपराध किया है और जो इस कानून के तहत दोषी माना गया है, उसे अयोग्यता से नहीं गुजरना पड़ेगा, जैसा कि सभी कानूनों में जिक्र है। बोर्ड इस बात के लिए अधिकृत है कि एक जायज अवधि या अपील करने की अवधि के ख़त्म हो जाने के बाद वह सभी प्रासंगिक रिकोर्ड जो दोष के साथ जुड़े है, उन्हें हटा दे।

सेक्शन 20 रुके हुए मामलों में विशेष प्रावधान

  • यदि एक किशोर की सुनवाई की प्रक्रिया किसी क्षेत्र में जहाँ तिथि से जब यह कानून प्रभाव में आया है, मामला रुका हुआ है, वे उस न्यायालय में मामले की सुनवाई की प्रक्रिया की जारी रखेंगे और यदि किशोर किसी अपराध में लिप्त पाया गया है, तब न्यायालय उसे सजा नहीं देगा, बल्कि जाँच पड़ताल के रिकोर्ड रखेगा और उसे बोर्ड के सामने रखेगा जो किशोर के लिए इस कानून के तहत निर्देश पारित करेगा।

सेक्शन 21 कानून के तहत किसी भी सुनवाई में शामिल किशोर के मामले के प्रकाशन इत्यादि पर प्रतिबंध

  • यह कानून किसी भी रपट को जो अखबार, पत्रिका, समाचार पत्र, दृश्य माध्यम में किशोर जो कानून के साथ विरोध में है, उससे सम्बन्धित जानकारी छापने से प्रतिबंधित करता है, जो उसकी पहचान सामने लाता हो, किशोर की किसी तस्वीर को भी छापने पर प्रतिबंध है।
  • यदि इस जाँच पड़ताल के लिए अधिकृत व्यक्ति यह विचार रखता है, कि इस प्रकार कि सार्वजनिकता किशोर के हित में है तब इसके पीछे के कारणों को लिख कर रिकोर्ड में रखना होगा।
  • कोई भी व्यक्ति जो इस प्रावधान की अवमानना करता है, उस पर 1000 रु. तक का जुमाना किया जायेगा।

सेक्शन 22 बच कर निकल गये किशोर के लिए प्रावधान

  • कोई भी पुलिस अधिकारी एक किशोर का जो एक विशेष गृह या एक निगरानी गृह वी व्यक्ति जिसकी निगरानी में किशोर इस कानून के तहत रहा रहा है यदि बच कर भाग निकलता है उसका अधिकार ले सकता है। बिना एक वारंट के, किशोर को उस गृह में जहाँ से वह भगा है या भेज देना चाहिए और ऐसी किसी भी घटना की सुनवाई की प्रक्रिया किशोर के विरोध में नहीं होनी चाहिए।

अधिनियम के तहत किशोर के विरुद्ध विशेष अपराध करने पर जुर्माना (शक्ति) एवं सजा

यह अनुच्छेद सिर्फ वयस्क व्यक्तियों को जुर्माना एंव सजा से सम्बन्धित है, जिहोने इस अधिनियम के तहत बच्चे के विरुद्ध अपराध किया है। अनुच्छेद-27 निश्चित तौर पर ये विशेष अपराध, अधिनियम के तहत संज्ञेय है।

धारा

धारा

अपराध

सजा

23.किशोर या बच्चे के प्रति क्रूरता

किशोर पर हमला, उसका परित्याग, उच्छन्न या स्वैच्छिक उपेक्षा करना जिससे बच्चे को मानसिक एवं शारीरिक कष्ट होना अपेक्षित हो।

6 महीने का कारावास या जुर्माना या दोनों

24.भीख मांगने के लिए किशोर या बालक का नियोजन

1. किसी बच्चे या किशोर का भीख मांगने में इस्तेमाल करना या उससे भीख मंगवाना या इसका कारण बनना।

2. किशोर या बालक पर वास्तविक प्रभार या नियंत्रण रखते हुए, उपरोक्त अपराध करता है।

 

तीन वर्ष का कारावास या जुर्माना

 

 

 

तीन वर्ष का कारावास या जुर्माना तथा कारावास की अवधि एक वर्ष और बढ़ाया जाता जा सकता है।

 

 

25. किशोर या वयस्क को मादक शराब या स्वापक औषधि या मन:प्रभावी पदार्थ देने के लिए (शास्ति) सजा

किसी किशोर या बच्चे को किसी सार्वजनिक स्थल पर मादक शराब या स्वापक औषधि या मन:प्रभावी पदार्थ देना यदि किसी शिक्षित चिकित्सक द्वारा बीमारी की स्थिति में देने को न कहा गया हो।

तीन वर्ष का कारावास या जुर्माना

 

 

26.किशोर या बाल कर्मचारी का शोषण

किसी किशोर या बच्चे को खतरनाक काम करने के लिए रखना उसे बंधुआ मजदूर बनाना और उसकी तनख्वाह रोकना या उसकी कमाई को अपने हित में इस्तेमाल करना।

तीन वर्ष का कारावास या जुर्माना

 

 

 

देखरेख व सुरक्षा की जरूरत वाले बच्चे

यह अध्याय उन प्रावधानों के विषय में है जो देखरेख व सुरक्षा को जरूरत वाले बच्चों से सम्बन्धित है।

सेक्शन 29-बाल कल्याण समिति (बा.क.स.)

राज्य सरकार एक या उससे अधिक बाल कल्याण समिति जो एक जिला या जिलों के समूह में देखरेख व सुरक्षा की जरूरत वाले बच्चों के लिए है, को बनाने का अधिकार रखता है।

सदस्य

एक अध्यक्ष और चार सदस्य जिसमें कम से कम एक महिला हो और दूसरा बच्चों से सम्बन्धित मामलों में प्रवीन होना चाहिए।

समिति की शैक्षणिक योग्यता

अध्यक्ष और सदस्यों की शैक्षणिक योग्यता नियमों के अनुरूप होगा।

अधिकार

समिति दंडाधिकारियों के एक पीठ के तौर पर कार्य करेगी जिसके पास एक महानगरीय या एक न्यायिक दंडाधिकारी जो प्रथम श्रेणी का होगा जैसे अधिकार होंगे।

समाप्ति

राज्य सरकार एक जाँच पड़ताल के उपरांत किसी भी समिति सदस्य की नियुक्ति को समाप्त कर सकता है:

  • यदि कानून के द्वारा दिए गए अधिकारों के दुरुपयोग का दोषी पाया जाये।
  • यदि नैतिक सिद्धांतों से जुड़े अपराध में दोषी पाया जाए।
  • यदि स्त्री/पुरुष लगातार तीन महीनों तक बिना किसी जायज कारण के वोर्ड की सुनवाई की प्रक्रिया के दौरान अनुपस्थित रहे हों, या साल के कुल बैठकों के तिहाई-चौथाई हिस्से में अनुपस्थित हों।

सेक्शन 30 समिति के सम्बन्ध में प्रक्रिया, इत्यादि—

  • देखरेख व सुरक्षा की जरूरत वाले बच्चे सुरक्षित निगरानी में भेजे जाने के लिए किसी भी एक सदस्य के सामने पेश किये जा सकते हैं, जब समिति का सत्र नहीं चल रहा हो।
  • किसी सदस्य को अनुपस्थिति के दौरान समिति के द्वारा पारित किया गया निर्देश सुनवाई की प्रक्रिया के किसी भी चरण में वैध माना जाता है।
  • किसी भी अंतरिम निर्णय को लेकर यदि समिति के सदस्यों के बीच मतभिन्नता पाई जाए तब बहुसंख्यक के विचार को लिया जायेगा और यदि ऐसी कोई बहुसंख्या नहीं हो तो अध्यक्ष का विचार अंतिम होगा।

सेक्शन 31 समिति के अधिकार

  • समिति विशेष रूप से निपटारा करने के लिए अधिकृत है, और यह बच्चों के देखरेख, सुरक्षा व्यवहार, विकास और पुनर्स्थापन व उनकी बुनियादी आवश्यकताओं और मानवधिकारों की सुरक्षा को मुहैया कराने का अंतिम प्राधिकरण है।

सेक्शन 32 समिति के समक्ष पेश करना

देखरेख  सुरक्षा की जरूरत वाले कोई भी बच्चे इनमें से किसी के भी द्वारा समिति के सामने रखे जा सकते हैः

  • कोई भी पुलिस अधिकारी या विशेष कोशोर पुलिस इकाई या पदासीन पुलिस अधिकारी
  • कोई भी सरकारी नौकर
  • चाईल्डलाईन, एक पंजीकृत स्वयंसेवी संगठन या कोई दुसरा स्वयंसेवी संगठन या राज्य सरकार के द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसी।
  • कोई भी सामाजिक कार्यकर्ता या जन भावना से लैस नागरिक जो राज्य सरकार के द्वारा अधिकृत किये गए हो।
  • स्वयं बच्चा/बच्ची के द्वारा

सेक्शन 33- जाँच पड़ताल

  • बच्चे को बा.क.स. के समक्ष पेश करने के लिए अधिकृत किसी व्यक्ति या एजेंसी के द्वारा एक रपट प्राप्त करने पर जैसा कि सेक्शन 32 में कहा गया है, यह समिति बच्चे को एक बाल गृह में भेजने का निर्देश पारित कर सकता है, ताकि एक जाँच पड़ताल एक सामाजिक कार्यकर्ता या कल्याण अधिकारी के द्वारा संचालित किया जा सके।
  • जाँच पड़ताल को निर्देश करने की तिथि के चार महीनों के भीतर पूरा हो जाना है और यदि यह अवधि आगे बढ़ती है, तब इसके कारण लिखित रूप से रिकोर्ड किये जायेंगे।
  • जाँच पड़ताल की रपट करने के उपरांत यदि समिति यह विचार रखती है कि बच्चे के पास कोई पारिवारिक मदद नहीं है या दूसरा सहयोग नहीं ही, तब यह तक ले लिए जब तक बच्चे को उपयुक्त पुर्नवास नहीं मिल जाए या बच्चा/बच्ची 18 वर्ष को पूरी न कर लें उन्हें बाल गृह में रहना जारी रखने का निर्देश पारित का सकता है।

सेक्शन 34 और 37 –देखरेख व सुरक्षा की जरूरत वाले बच्चों के लिए गृह स्थापना

राज्य सरकार या तो स्वयं या स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर प्रत्येक जिले में या जिलों के समूह में बच्चों के लिए गृह स्थापित करेगा।

इन गृहों का उद्देश्य

  • जाँच पड़ताल की अवधि के दौरान देखरेख व सुरक्षा की जरूरत वाले बच्चों का सुरक्षित रखरखाव
  • इसके उपरांत इन बच्चों की देखरेख , ईलाज, शिक्षा, प्रशिक्षण, विकास और पुनर्स्थापन करना (सेक्शन 34)

 

स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा चलाए जाने वाले गृह

  • राज्य सरकार जाने माने, अनुभवी स्वयंसेवी संगठन को मान्यता दे सकता है और उन्हें शरण गृहों को चलाने में मदद कर सकता है।
  • ये गृह बच्चों को ला कर रखने वाले केन्द्रों के रूप में कार्य करेंगे उन बच्चो की जिन्हें तत्काल मदद की जरूरत है जिन्हें सेक्शन 32 में लिखित किसी भी व्यक्ति द्वारा लाया गया हो।

सेक्शन 35 निरीक्षण

बाल गृहों के लिए निरीक्षण समिति राज्य जिला स्तर पर राज्य सरकार के द्वारा किये जायेंगे जो राज्य सरकार के प्रतिनिधियों स्थानीय प्राधिकरण, बा.क.स. स्वयंसेवी संगठन, चिकित्सकीय दक्षलोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए होगी।

सेक्शन 36 सामाजिक संपरीक्षण

केंद्र और राज्य सरकार समय-समय पर बाल गृहों के कार्य व्यवहार की निगरानी और मूल्यांकन करेगा और सरकार की तरफ से खास तौर पर नियुक्त व्यक्तियों और संस्थाओं के द्वारा भी यह होगा।

सेक्शन 38-अंतरण

  • यदि जाँच पड़ताल से यह पता चलता है कि बच्चा समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर का है, तब यह बच्चे के जायज प्राधिकरण के पास भेजने का निर्देश पारित करेगा, जिसके पास बच्चे के आवासीय क्षेत्र का प्राधिकरण होगा।
  • बच्चा गृह के कर्मचारियों जहाँ बच्चा/बच्ची रह रहे हैं के साथ रहेगा और राज्य सरकार बच्चे की यात्रा भत्ता भी दे सकता है।

सेक्शन 39-पुनर्व्यवस्था

  • बाल गृह या शरण गृह का प्राथमिक तत्व उन बच्चों के जो वंचित है अपने पारिवारिक वातावरण से तात्कालिक तौर पर या हमेशा के लिए उनकी पुनर्व्यवस्था और अपनी निगरानी में उनकी सुरक्षा करना है।
  • समिति इसके लिए अधिकृत है कि वह बच्चा/बच्ची के उसके माता-पिता, अभिभावक, उपयुक्त व्यक्ति या उपयुक्त संस्थान को देकर उन्हें पुनर्व्यवस्थित करे।
  • बच्चे की पुनर्व्यवस्था इस सेक्शन के सन्दर्भ में यह अर्थ रखता है:
  • माता-पिता
  • गोद लेने वाले माता-पिता
  • घरनुमा देखरेख करनेवाले माता-पिता

बाल कल्याण समिति (बा.क.स ) की प्रक्रियाएं

बा.क.स. जिले के बालगृह के केन्द्रों पर मिलती है, मामलो को बा.क.स के समक्ष तयशुदा समय दिन जब समिति कार्य कर रही होती है तब लाया जाता है।

यदि किसी खास दिन बा.क. स सत्र में नहीं है, तब बच्चा सीधे सुपरीटेंडेट के द्वारा नामांकित किया जाता है और तब बच्चे को अगले दिन बा.क. स. के समक्ष पेश किया जाता है। बच्चे की किसी एक सदस्य के समक्ष भी लाया जा सकता है।

बा.क.स. बच्चे से मिलता है और उसका साक्षात्कार उसके पहले के इतिहास से उसकी समस्या को एक बालसुलभ तरीके और माहौल में समझता है। बाल कल्याण निगरानी अधिकारी बा.क.स. के समक्ष उपस्थित होता है। मामले की उसके साथ चर्चा की जाती है और एक लिखित ब्यौरा तैयार होता है।

पुनर्स्थापन की प्रक्रियाओं में बा.क.स. के द्वारा ली गई सीढ़ी दर सीढ़ी प्रक्रियाएं और हस्तक्षेप

सीढ़ी 1: बच्चे को बा.क.स. के समक्ष उपयुक्त निर्णय/किया/पुनर्स्थापन  के लिए पुलिस चाइल्डलाईन, स्वयंसेवी संगठन या किसी सम्बन्धित नागरिक के द्वारा लाया जाता है।

सीढ़ी 2:बच्चे को सुरक्षित निगरानी (रिमांड नही) और उसे सरकार मान्यता प्राप्त बाल गृहों के स्वागत इकाई (निगरानी गृह में नहीं) लाया जाता है।

सीढ़ी 2:बच्चे को किसी भी निम्नलिखित की सुरक्षित निगरानी में दिया जा सकता है।

  • बाल गृह
  • बाल संस्थान, जो वैध/मान्यता प्राप्त अधिग्रहण एजेंसी
  • शरण गृह (सड़क के और भागे हुए बच्चों के लिए)
  • सुरक्षा की जगह (जैसे घरनुमा परिवार/उपयुक्त व्यक्ति)
  • उन संगठनों  को जिनके यहाँ आसंस्थागत सेवाएं बच्चे के परित्याग/संस्थाकरण (घरनुमा देखरेख/सौजन्यता/सामुदायिक सेवाएं) को रोकने के लिए है।

सीढ़ी 3:यदि बच्चे को सीधे एक संगठन के द्वारा प्राप्त किया गया है, तब बच्चा/बच्ची बा.क.स. के समक्ष 24-48 घंटों के भीतर पेश किया जायेगा। (यदि बच्चा दो वर्ष से कम उम्र का है तब  बा.क.स. के समक्ष एक रपट जमा करना होता है)

सीढ़ी 4:बा.क.स. को मामले का मूल्यांकन/पुलिस की रपट का अध्ययन/बाल कल्याण अधिकारी/साक्षात्कार और बच्चे की काउंसिलग करना होता है।

सीढ़ी 5: इस अवधि के दौरान निगरानी अधिकारी को आवश्यक निर्देशों के साथ अंतिम रपट तैयार करना होता है।

सीढ़ी 5: अ: इनके द्वारा रपट तैयार होता है

  • बच्चे का साक्षात्कार
  • सही जाँच पड़ताल करना
  • यदि कोई परिवार है तो उससे पत्र व्यवहार
  • बच्चे की काउंसलिंग

सीढ़ी 6:अ: संभव निर्णय

  • माता-पिता के पास पुनर्स्थापन करना।
  • बच्चे को उसके परिवार अथवा उसके गृह राज्य के नजदीकी बाल गृह में प्रत्यावर्तन करना।
  • बच्चे को बेसहारा घोषित करना और दत्तक ग्रहण के लिए कानूनी रूप से मुक्त करना।
  • एक संस्थान में नामांकित करना( जिसे हर वर्ष समीक्षित किया जायेगा)
  • लम्बी अवधि के लिए पोषण देखरेख में रखना (उन बच्चों के लिए कानूनी दत्तक ग्रहण के लिए मुक्त नहीं है)

पुनर्स्थापन और सामाजिक पुनर्गठन

यह अध्याय कानून के साथ विरोध में बच्चों के देखरेख व सुरक्षा की जरूरत वाले बच्चे के पुनर्स्थापन और पुनर्गठन की चर्चा करता है।

बच्चों के पुनर्स्थापन और पुनर्गठन की की प्रक्रिया को स्वयं बाल गृह से शुरू होना है। इसे कानून दे द्वारा प्रदान किये गए विभिन्न असंस्थागत सेवाओं के द्वारा किया जा सकता है।

  • दत्तक ग्रहण
  • घरनुमा देखरेख
  • प्रायोजकता
  • बच्चे को देखरेख के किसी संगठन में भेजना

सेक्शन 41 दत्तक ग्रहण

परिवार के पास उनके बच्चों के देखरेख और सुरक्षा प्रदान करने की प्राथमिक जबावदेही होती है, दत्तक ग्रहण उन बच्चों के पुनर्स्थापन के लिए है जो अनाथ, परित्यक्त, उपेक्षित और उत्पीड़ित हैं।

सरकार के द्वारा चलाये जा रहे बाल गृह या संस्थान जो अनाथों के लिए हैं उनकी मान्यता, जाँच पड़ताल और स्थान देना दोनों ही के लिए वे दत्तक ग्रहण एजेंसी है। इसे राज्य सरकार के दिशानिर्देश के अनुसार दत्तक ग्रहण के लिए किया जायेगा।

किशोर न्याय बोर्ड एक बच्चे को दत्तक ग्रहण के लिए देने और बच्चे के दत्तक ग्रहण के लिए आवश्यक खोजबीन से चालित करने के लिए अधिकृत है। राज्य सरकार के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए।

एक बच्चे को केवल निम्नलिखित स्थितियों में दत्तक ग्रहण के लिए दिया जा सकता है:

  • एक परित्यक्त बच्चे के मामलें में उसके दत्तक ग्रहण के लिए बा.क.स. के दो सदस्यों ने उसे मुक्त घोषित किया है।
  • बच्चे को वापस करने की स्थिति में माता-पिता को दिया गया दो महीने का विचार का समय पूरा होता है।
  • बच्चे की सहमति जो अपनी सहमति को समझा और व्यक्त कर सकता है, उसे प्राप्त किया गया है।

किशोर न्याय बोर्ड/ बा.क.स. दत्तक ग्रहण के लिए जाने वाले बच्चे को एकल माता-पिता और उन माता पिताओं को भी जो उसी लिंग में बच्चे का दत्तक ग्रहण कर सकते हैं बिना उनके जीवित बच्चों, जैविक पुत्र या पुत्रियों की संख्या पर गौर किये हुए।

सेक्शन 42-घरनुमा

यह दो प्रकार के हैं

  • वे नवजात जिन्हें अंततः अधिग्रहण के लिए दिया जाना है, उन्हें घरनुमा देखरेख के लिए तात्कालिक तौर पर भेजा जा सकता है।
  • एक बच्चा दूसरे परिवार के यहाँ थोड़े या विस्तारित अवधि के लिए भेजा जा सकता है। इस दौरान बच्चे के जैविक माता-पिता प्रायः उसे देखने आते है और जब पुनर्वास पूरा होता है, बच्चे को उसके अपने परिवार को लौटाया जा सकता है।

सेक्शन 43-प्रायोजकता

  • प्रायोजकता का उद्देश्य परिवारों को, बाल गृहों को और विशेष घरों को चिकित्सकीय, पोषकीय, शैक्षणिक और बच्चों के जीवन को सुधारने की दूसरी जरूरतों को पूरा करने के लिए आर्थिक व क़ानूनी सहयोग प्रदान करना है।
  • विभिन्न योजनायें जो बाल प्रायोजकता के लिए है जैसे व्यक्ति से व्यक्ति प्रायोजकता, समूह या सामुदायिक प्रायोजकता, राज्य सरकार के नियमों के लिहाज से लाये जाते हैं।

सेक्शन 44- पश्चातवर्ती देखरेख  संगठन

राज्य सरकार दोनों ही प्रकार के बच्चों के लिए जो कानून के विरोध में है तथा जिन्हें सुरक्षा व देखरेख की जरूरत है, देखभाल व संस्थानों की व्यवस्था या मान्यता प्रदान कर सकती है।

जब वे विशेष गृह/बाल गृह छोड़ते हैं, उनके जीवन की ईमानदार. उत्पादक और उपयोगी बनाने के लिए मदद प्रदान करती है।

बच्चा तीन वर्षों से ज्यादा समय तक देखभाल के संस्थान में नहीं कर सकता। यदि व सत्रह से ज्यादा है, लेकिन अठारह वर्ष के उम्र से कम है, तब वह वर्ष होने तक देखभाल के संस्थान में रह सकता है।

निगरानी अधिकारी या कोई भी दूसरा सरकार नियुक्त आधिकारी विशेष गृह से मुक्त होने से पहले बच्चों पर अपनी रपट तैयार और उसे जमा करेगा, इस रपट में जो शामिल होगा।

  • बच्चों के लिए देखभाल के संस्थानों की जरूरत की वजह
  • जरुरी देखभाल की समय अवधि और
  • अब तक बच्चों के द्वारा की गई प्रगति

सेक्शन 45- सम्पर्क और संयोजन

राज्य सरकार बच्चे के पुनर्स्थापन और सामाजिक पुनर्गठन में सहयोग करने के लिए विभिन्न सरकारी/गैर सरकारी/कॉर्पोरेट और अन्य सामुदायिक एजेंसियों के बीच नेट्वर्किंग और संयोजन को सशक्त करने के लिए नियम बना सकता है।

कानून के तहत कराये गये विभिन्न मानकों की जानकारी

सेक्शन 46- किशोर या बच्चे के माता-पिता  या अभिभावक की उपस्थिति

एक योग्य अधिग्रहण जिसके समक्ष बच्चा उपस्थित होता है वह किसी भी बच्चे या किशोर के वास्तविक जबावदेही माता-पिता या अभिभावकों को किसी भी सुनवाई के समय उपस्थित रहने के लिए सीधे निर्देशित कर सकता है।

सेक्शन 47- किशोर या बच्चे की उपस्थित के बिना

पूछताछ के किसी भी चरण में यदि योग्य अधिकारी  यह समझता है कि सुनवाई के समय किशोर या बच्चे की जरूरत नहीं है, तब वह वह बच्चे को उपस्थित नहीं रहने और उनकी अनुपस्थिति को जारी रखने के निर्देश दे सकता है।

सेक्शन 48-घातक बीमारी से पीड़ित किशोर या बालक को अनुमोदित स्थान के सुर्पुर्द करना और उसका भावी व्यवन

  • यदि कोई बच्चा एक ऐसी बीमारी से पीड़ित है जिसमें लम्बी अवधि  के उपचार की आवश्यकता है तब योग्य अधिग्रहण जरुरी उपचार के लिए उसे एक मान्य जगह पर भेजा सकता है।
  • यदि एक बच्चा बीमारियों जैसे कुष्ठ रोग, यौन संक्रमित रोगों, हेपेटाइटिस बी, तपेदिक या एक दिमागी बीमारी को लिए हुए पाया जाता है तब बच्चा/बच्ची विशेष रूप से सुझाई हुई सेवाओं के द्वारा अलग से देखे जाएगी।

सेक्शन 49- आयु की उपधारणा और अवधारणा

जब एक योग्य प्राधिकरण यह महसूस करता है कि व्यक्ति जिसे पेश किया गया है, वह किशोर है या बच्चा, उसके लिए बच्चे की उम्र की जाँचना आवश्य हो जाता है। इसे सबूत इकट्ठे करने होते हैं और तब व्यक्ति बच्चा है या नहीं, और जितना संभव हो उतना उम्र के बारे में सच बोल रहा है, इसे सच्ची उम्र माना जायेगा और उसके बाद कुछ और बता रहा कोई सबूत वैध नहीं समझा जायेगा।

सेक्शन 50- अधिकार क्षेत्र से बच्चे या किशोर के बाहर भेजना

जब योग्य अधिग्रहण, पूछताछ के उपरांत इस से निश्चित है कि किशोर या बच्चा उनके अधिकार क्षेत्र में बाहर का है, तब वह बच्चे को जो उसके आवसीय क्षेत्र का है, वहाँ किसी रिश्तेदार या कोई अन्य उपयुक्त व्यक्ति जो  बच्चे की देखभाल व नियंत्रण को सुनिश्चित करने को इच्छुक हैं के पास सौंप देगा। बाद का कोई भी मामला जी किशोर या बच्चे से जुड़ा हुआ है, उसे बच्चा जहाँ भेजा गया है वहाँ के योग्य अधिग्रहण के द्वारा निपटाया जायेगा।

सेक्शन 51- रपटों को विश्वास में रखना

निगरानी अधिकारी या सामाजिक कार्यकर्त्ता के द्वारा योग्य अधिग्रहण को जमा किये गये रपट गोपनीय समझे जाते है। हालाँकि यह बांटा जा सकता है, यदि योग्य प्राधिकरण बच्चा या माता-पिता या अभिभावक को मामले से जुड़े सबूत देने का मौका देने के लिए रपट के विषयों को उनके सामने खोलना आवश्यक समझता हो।

सेक्शन 52- अपीलें

कोई भी व्यक्ति जो कानून के तहत योग्य प्राधिकरण द्वारा पारित किये गये निर्देशों से असंतुष्ट है, वह निर्देश के तीस दिनों के भीतर सेशन न्यायालय में अपील ले सकता है यदि अपीलकर्त्ता समय पर अपील न करने के जयाज वजह देता है।

निम्नलिखित मामलों में अपील नहीं किया जा सकता है:

  • बोर्ड के द्वारा, एक किशोर को जिस अपराध करने का आरोप है उसे बरी करने का आदेश।
  • समिति के द्वारा एक व्यक्ति, जो अवहेलित बच्चा नहीं है, का आदेश पहली अपील के बाद के आदेश पर दूसरी अपील को सेशन न्यायालय द्वारा नहीं लिया जायेगा।

सेक्शन 53- पुनर्गठन

उच्च न्यायालय, आदेश की वैधता को सुनिश्चत करने के लिए अपने या एक दरखास्त से यह अधिकार रखता है कि वह योग्य प्राधिकरण या सत्र न्यायालय के द्वारा पारित किये गए आदेश की सुनवाई के रिकोर्ड के बारे में खोज खबर ले। यह पुनर्गठित आदेश यह बता सकता है कि यह किसी भी व्यक्ति को सुनने का जायज मौका देने को लेकर अस्पष्ट नहीं रहा है।

सेक्शन 54 –पूछताछ, अपील  और पुनर्गठन सुनवाई की प्रक्रियाएं

जब एक योग्य प्राधिकरण एक पूछताछ संचालित कर रहा है, चाहे वह सुनवाई की अपील हो या पुनर्गठित सुनवाई हो, इसकी प्रक्रियाओं को जहाँ तक संभव हो अवश्य ही अपराध प्रक्रिया संहिता 1973 (1972 का 2) के प्रावधानों के साथ रखने चलाना चाहिए।

सेक्शन 55- निर्देशों को संशोधित करने के अधिकार

  • कोई भी योग्य प्राधिकरण, एक संस्थान जहाँ एक किशोर या बच्चे को भेजा जाना है, या वह व्यक्ति जिसकी देखरेख या निगरानी के भीतर किशोर या बच्चे को रखा गया है, को लेकर किसी भी निर्देश को संशोधित कर सकता है।
  • एक संशोधन तभी पारित किया जा सकता है जव योग्य प्राधिकरण, एक संस्थान जहाँ एक किशोर या बच्चे को भेजा जाना है, या वह व्यक्ति जिसकी देखरेख या निगरानी के भीतर किशोर या बच्चे को रखा गया है, को लेकर किसी भी निर्दश को संशोधित कर सकता है।
  • एक संशोधन तभी पारित किया जा सकता है जब योग्य प्राधिकरण के कम से कम दो सदस्य और पार्टियाँ सुनवाई के दौरान मौजूद हों।
  • पारित किये गए निर्देशों में बिना जानबूझ के की गई लिखा पढ़ी की गलतियाँ योग्य प्राधिकरण के द्वारा स्वयं से या किसी  के दरख्वास्त के बिना पर किसी भी समय ठीक किए जा सकते है।

सेक्शन 56-किशोर या बालक को उन्मोचित या अंतरित करने की समक्ष प्राधिकारी की शंक्ति

योग्य प्राधिकरण के किशोर या बच्चे को यदि यह उसके परमहित में है उसे एक बाल गृह या विशेष गृह से दूसरे में स्थानांतरित बच्चे के रहने की पूरी अवधि को ऐसे घरों में बढ़ाता नहीं हो।

सेक्शन 57- बाल गृहों इस कानून के तहत और एक प्रकृति के किशोर गृहों का भारत के विभिन्न हिस्सें के बीच स्थानान्तरण

राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण एक बच्चे या किशोर को किसी भी बाल गृह या विशेष गृह से राज्य के बाहर किसी एक समान गृह या संस्थान में स्थानीय समिति को सूचित करने के बाद स्थानांतरित करने के आदेश दे सकता है।

सेक्शन 58 विकृतचित या कुष्ठ से पीड़ित या औषधि व्यसनी किशोर या बालक का अंतरण

यदि एक किशोर या बच्चे को जो कुष्ठ रोग से ग्रस्त है या मानसिक रूप बीमार या ड्रग की लत का शिकार है, इस कानून के तहत स्थापित किये गए गृहों या संस्थानों में रखा गया है योग्य प्राधिकरण ऐसे एक व्यक्ति को एक प्रमाणित की गई अवधि के लिए जो चिकित्सा अधिकारी के द्वारा बच्चे के सही इलाज  के लिए है एक समुचित सुविधा की जगह पर स्थानांतरित कर सकता है।

सेक्शन 59-स्थान दिलाने पर बच्चे या किशोर की मुक्ति व अनुपस्थिति

  • योग्य प्राधिकरण, निगरानी अधिकारी या सामाजिक कार्यकर्त्ता या एक सरकारी या स्वयंसेवी संगठन की रपट के आधार पर किशोर या बच्चे को बाल गृह या विशेषगृह से उनके माता-पिता, अभिभावक या कोई भी दूसरे अधिकृत व्यक्ति जो बच्चे के पुनर्स्थापन के लिए उसकी शिक्षा और उपयोगी प्रशिक्षण की जिम्मेदारी लेने का इच्छुक हो उसके हाथों सौंप सकता है।
  • योग्य प्राधिकरण एक किशोर या बच्चे को निगरानी के भीतर छुट्टी पर जाने की, अधिकतम सात दिनों की, अनुमति दे सकता है, जिसमें यात्रा का समय विशेष अवसर जैसे परीक्षाएँ, पारिवारिक शादी, रिश्तेदार की म्रृत्यु, माता-पिता की दुर्घटना या गंभीर बीमारी या दूसरी आपातकालीन स्थितियों को शामिल नहीं किया जाता है। इस छुट्टी को गृह में रखे गये किशोर या बच्चे के समयों के एक हिस्से के रूप में गिना जाता है।
  • यदि छुट्टी की अनुमति को रद्द कर दिया गया है और किशोर या बच्चा घर वापस नहीं आता है, तब योग्य प्राधिकरण उन्हें वापस गृह में लाने और उनकी जिम्मेदारी लेने के निर्देश दे सकता है। ऐसे मामले में उनकी अनुपस्थिति के समय को उनके घर में रहने के समय के एक हिस्से के रूप में नहीं गिना जायेगा।

सेक्शन 60-माता-पिता के द्वारा योगदान

  • योग्य प्राधिकरण, जिसके निर्देशन में किशोर या बच्चे को गृह या उपयुक्त व्यक्ति या संस्थान की देखरेख में भेजा गया है, वह माता-पिता या किशोर या बच्चे के लिए जबाबदेह व्यक्ति को उनकी आय के आधार पर किशोर या बच्चे के रखरखाव के लिए योगदान करने के निर्देश दे सकता है।

योग्य प्राधिकरण, यदि आवश्यक हो सुपरीटेंडेंट या प्रोजेक्ट मैनेजर को बच्चे या बच्ची को गृह से उसके आवासीय स्थान पर भेजते समय किशोर या बच्चे को और बच्चे या बच्ची की माता-पिता या अभिभावक को यात्रा का खर्च चुकाने के निर्देश दे सकता है।

सेक्शन 61- निधि

राज्य सरकार और स्थानीय अधिग्रहण स्वयंदेवी दान, योगदारों  या अमिदान व्यक्तियों या संगठनों के द्वारा इस कानून के तहत किशोर या बच्चे के कल्याण और पुनर्वास के लिए दिए जाते हैं, की एक कोष तैयार कर सकता है। राज्य सलाहकार बोर्ड इस कोष का प्रशासन करेगा।

सेक्शन 62- केन्द्रीय, राजकीय, जिला और शहरी सलाहकार बोर्ड

  • केंद्र और राज्य सरकार एक केन्द्रीय या राजकीय सलाहकार बोर्ड जिसमें जाने-पहचाने सामाजिक कार्यकर्ता, स्वयंसेवी, बाल कल्याण संगठनों के प्रतिनिधि, कॉर्पोरेट समूह, शिक्षाविद चिकित्सकीय पेशेवर और राज्य सरकार का जुड़ा हुआ विभाग शामिल होगा।
  • जिला और शहरी स्तर की निरीक्षण समिति (सेक्शन 35) जिला या शहरी सलाहकार बोर्ड के तौर पर भी कार्य कर सकता है।
  • सलाहकार बोर्ड का उद्देश्य सरकार को गृहों को बनाने और चलाने, संसाधनों को जुटाने, बच्चों व किशोरों के लिए शैक्षिक प्रशिक्षण मुहैया कराने और पुनर्स्थापन  सुविधाएँ देने तथा संविधान विभिन्न अधिकारिक व अनाधिकारिक एजेंसियों के बीच संयोजन बनाने से सम्बन्धित पर सलाह देना है।

सेक्शन 63 विशेष किशोर पुलिस इकाई

  • पुलिस अधिकारी जो प्रमुख तौर पर किशोर अपराध पर अंकुश लगाने या किशोरों या बच्चों को देखने में शामिल रहे हैं, उन्हें प्रभावशाली रूप से कार्य करने हेतु सशक्त बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण व निर्देश दिए जायेगें।
  • सभी पुलिस थानों में कम से कम एक किशोर या बाल कल्याण अधिकारी होना चाहिए जो प्राकृतिक रूप से प्रवीण और प्रशिक्षित हो और जो पुलिस के साथ किशोरों व बच्चों के मामलों को देख सके।
  • विशेष किशोर पुलिस इकाई जिसमें ऊपर के सभी पुलिस अधिकारी शामिल हैं, को जिला व शहरी स्तर पर पुलिस के द्वारा किशोरों व बचों को देखने में संयोजन और सुधार के लिए बनाया जायेगा।

सेक्शन 64 कानून के विरोध में किशोर जो इस अधिनियम के शुरुआत पर सजायाफ्ता हैं

कोई भी किशोर जो वैसे समय में जब यह अधिनियम व्यवहार में आया है, सजा काट रहा है, उसे राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण के एक आदेश के द्वारा सजा के बचे हुए दिनों को व्यतीत करने के लिए विशेष गृह या उपयुक्त संस्थान भेजा जा सकता है और इसके बाद किशोर को इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत देखा समझा जायेगा।

सेक्शन 65-अनुबंधों के लिहाज से सुरक्षा

अधिनियम के तहत लिए गए अनुबंधों को जहाँ तक संभव हो दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (1974 का 2) के अध्याय XXXIII(33)  के प्रावधानों के द्वारा सुरक्षित किया जायेगा।

सेक्शन 66 अधिकारों को शिष्ट मंडल

राज्य सरकार यह निर्देशित कर सकता है कि समान अधिकार जो यह इस अधिनियम के तहत व्यवहार करता है, वे सरकार या स्थानीय से छोटे अधिकारी भी व्यवहार कर सकते हैं।

सेक्शन 67 –अच्छे विश्वास में की गई क्रिया की सुरक्षा

राज्य सरकार या स्वयंसेवी संस्थानों, जो गृह चला रहा रहे हैं या एक अधिकारी या किसी कर्मचारी के द्वारा जो इस अधिनियम के तहत नियुक्त हुआ है जिसकी कार्रवाई अच्छी भावना और अधिनियम के निर्देशों के अनुसार है, के विरुद्ध क़ानूनी कार्रवाई नहीं शुरू की जा सकती है।

सक्शन 68 कानून बनाने के अधिकार

राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा किसी भी मामले या निम्नलिखित मामलों में अधिनियम के तहत नियमों को बना सकती है।

  • बोर्ड के सदस्यों के पद की अवधि और कारण, जिसमें वे त्यागपत्र देगे।
  • अध्यक्ष और सदस्यों की शैक्षिणक अर्हताएं और उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया
  • उनके द्वारा प्रदान की जानेवाली सेवाओं के विभिन्न सेवाओं की विभिन्न प्रकारों एवं मनको सहित सप्रेक्षण गृहों, विशेष गृहों और बालगृहों का प्रबंधन और परिस्थितियों और तरीका जिसमें, गृहों के सत्यापन को प्रदान किया जायेगा या वापस लिया जायेगा।
  • व्यक्ति जिनके द्वारा किशोर को बोर्ड के समक्ष लाया जा सकता है अरु किशोर को एक निगरानी गृह में भेजे जाने की प्रक्रिया
  • पुलिस की रिपोर्ट बनाने के नियम और धारा
  • बाल गृहों के लिए निरीक्षण समितियों की नियुक्ति, उनका कार्यकाल व उद्देश्य
  • शरण गृहों के द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाएँ।
  • घरनुमा देखरेख योजनाओं और बाल प्रायोजकता को विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए।
  • देखभाल संस्थानों से जुड़े मामलों के लिए
  • विभिन्न एजेंसियों को बाल पुनर्स्थापन व सामाजिक पुनर्गठन को सुनिश्चित करने के लिए उनके बीच प्रभावशाली नेट्वर्किंग  सुनिश्चित करने हेतु।
  • उद्देश्यों व नियम जिनमें कोष रखरखाव किये जायेंगे। इस अधिनियम के तहत प्रत्येक नियमों को राज्य विधायिका के समक्ष अवश्य प्रस्तुत करना है।

सेक्शन 69- अधिकाकारिक रूप से वैधता ख़त्म करना और बचत

किशोर न्याय अधिनियम 1986, को रद्द किया जाता है और इस अधिनियम के तहत लिए गए किसी भी कार्रवाई को किशोर न्याय अधिनियम 2000  के पत्र व्यवहार प्रावधानों के तहत वैध समझा जायेगा।

सेक्शन 70 कठिनाईयों को हटाने के अधिकार

यदि इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान के क्रियान्वयन में कोई कठिनाई आ रही है तब केंद्र सरकार इस अधिनियम के लागू होने के दो वर्षों के भीतर कठिनाई को ख़त्म करने के निर्देश पारित कर सकता है। बनाये गये निर्देश को संसद के दोनों में अवश्य ही पेश किया जाना चाहिए।

स्त्रोत: चाईल्डलाईन इंडिया फाउंडेशन

3.16326530612

शंकर सिंह डिंडोर Oct 05, 2018 11:57 AM

शंकर सिंहXिताजी वरसिंह डिंडोर छोटी रामगढ़ भेरूगढ़ झाबुआ मध्XX्रXेश 457770 मेरा आधार न 75XXX2740 कक्ष 12वी A.G.

Arjun singh Nov 25, 2017 12:08 PM

Meta bhai January 2014 ME nabalik tha tb US pr 363,366 dharae lgi thi ab bo balik h kya usko saja hogi ya fir kis tarah hogi

Amit yadav Jun 07, 2017 01:48 PM

बोर्ड द्वारा जमानत निरस्त किये जाने के बाद क्या जमानत पर पुनः सुनवाई हो सकती है।

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