बच्चों के जीवन का अभिन्न अंग जिस प्रकार लोरी ,गीत और विभिन प्रकार के खेल उद्दीपन में सहायक होते हैं,उसी प्रकार खिलौनों का भी उद्दीपन में अपना महत्व हैl खिलौनें बच्चों के जीवन का अभिन्न अंग हैंl बच्चे के हाथ में जो भी आता है,वह उससे खिलौना समझकर खेलना शुरु कर देता हैl यह भी एक प्रकार का उद्दीपन है। क्योंकि खिलौनों की मदद से बच्चों की ज्ञानेन्द्रियों की कल्पना शक्ति का विकास होता है और जिसकी उपयोगिता सीखने पर बच्चा विभिन वस्तुओं को जोड़कर नई रचना करता है,नई-नई ध्वनि और भाषा का प्रयोग करना सीखता है तथा खोज करना सीखता हैl क्रमिक विकास में महत्वपूर्ण जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाता या चलने लगता है,तो वह घर में जो कोई भी वस्तु मिलती है,उसे समझने की कोशिश करता हैl जैसे,उदाहरण के तौर पर घर पर पड़ी छोटी थाली को लेकर बच्चा उसको घुमाकर गाड़ी चलाने का नाटक करता हैl इस प्रकार की क्रिया के लिए हमें बच्चों को रोकना नहीं चाहिये बल्कि बच्चे को प्रोत्साहित करते हुए उसका उचित उपयोग सिखाना चहिये। देखा गए हैकि औद्योगिकीकरण के कारण कई बार माता पिता अपनी सामर्थ्य के अनुसार बच्चे को खिलौनें खरीद कर देते हैं लेकिन यह जरुरी नहीं कि बच्चों को महंगे खिलौनें ही देंl बल्कि,घर में पड़े बेकार सामान से भी खिलौनें बनाये जा सकते हैंl हम सब जान चुके हैं कि वातावरण में मौजूद कोई भी सुरक्षित वस्तु बच्चों के लिए खिलौने का काम करती हैl जिसे बच्चे मोड़कर,खोलकर,फोड़कर या फेंककर जानते हैं तथा वह वस्तु को समझने की कोशिश करते हैंl बच्चों को बस खिलौने देकर छोड़ नहीं देना चाहिए,बल्कि आप भी बच्चे को सहयोग दें और और उसके साथ खेलें। उद्दीपन के लिए खिलौने के प्रकार उद्दीपन के लिए ऐसी वस्तुओं का इस्तेमाल कर सकते हैं जो वातावरण में मौजूद और आप एकत्रित कर सकते हैंई साथ में आपको वह वस्तुएं मुफ्त मिल जाएं,जैसे खाली पड़ा टिन या कनस्तर,बेकार पड़ी प्लास्टिक की बाल्टियां,टब, मिटटी के बर्तन या टोकरियाँ आदि।बच्चे स्वयं भी कुछ-न-कुछ सामग्री ढूंढ निकलते हैं और नए प्रकार के खेलों की रचना कर लेते हैं जोकि एक प्रकार का उद्दीपन है I खेल और खिलौनों की सुरक्षा बच्चों को खेल सामग्री देते वक्त कुछ सुरक्षा को भी ध्यान रखना चाहिए,जिससे बच्चों को प्रकार का नुकसान हो I नुकीले और तेज धार वाले खिलौनों और वस्तुओं से बच्चों से दूर रखें। बहुत छोटी वस्तुएं या ऐसे टुकड़े,जो छोटा बच्चा मुंह में डाले,निगल लें या फिर अपने नाक,कान में घुसा लें वह बच्चों को न दें। जहाँ तक संभव हो बच्चों को प्लास्टिक के खिलौनें न दें क्योंकि इन खिलौनों को बनाने में जिन रंगों का प्रयोग किया जाता है वो बच्चों के लिए हानिकारक होते हैं I बच्चों के खिलौने साफ-सुथरे होने चाहिएं I स्त्रोत: केयर इंडिया और सी.ई.सी.ई.डी. अंबेडकर विश्वविद्यालय,दिल्ली