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उत्तर प्रदेश - फिल्म नीति

इस भाग में उत्तर प्रदेश की फिल्म नीति से संबन्धित जानकारी दी गयी है।

आमुख

1.1 बीसवीं शताब्दी में सिनेमा भारतवर्ष में सामाजिक तथा सांस्कृतिक परिवर्तन के एक सशक्त माध्यम के रूप में उभरकर सामने आया। मनोरंजन उद्योग होने के नाते इसने देश के लोगों के सामाजिक व्यवहार को प्रभावित किया है तथा जन संस्कृति के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। आज सिनेमा एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि का रूप धारण कर चुका है। विगत वर्षों के दौरान फिल्मों के माध्यम से बड़ी संख्या में दर्शकों को मनोहारी दृश्यों तथा संस्कृति से अवगत कराकर, इस सशक्त माध्यम ने पर्यटन को प्रोत्साहित करने में प्रमुख भूमिका निभाई है। निःसंदेह भारतीय फिल्में न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी समकालीन भारत की छवि बनाने में सहायक हुई हैं। दिनों-दिन सिनेमा के महत्व को सर्वत्र स्वीकार किया जाने लगा है। भारत सरकार ने फिल्मों को उद्योग का दर्जा प्रदान करने का निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस प्रकार का निर्णय 1998 में ही लिया जा चुका था। वर्तमान सदी में फिल्म मनोरंजन ही नहीं बल्कि रोजगार, सामाजिक चेतना व संस्कृति के विकास के लिए और भी ज्यादा सशक्त माध्यम है।

1.2 भारतीय सिनेमा के इतिहास में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस प्रदेश ने फिल्म उद्योग को कई ख्यातिप्राप्त फिल्म निर्माता, निर्देशक, कलाकार, गीतकार, संगीतकार, तथा कथा/पटकथाकार दिये हैं। उत्तरांचल बन जाने के बाद भी प्रदेश के विशाल भू–भाग में फिल्म निर्माण की विपुल संस्कृति-धरोहर मौजूद हैं, जो प्रदेश के गौरवशाली इतिहास, इसकी वैभवपूर्ण वास्तुकला तथा स्थानीय संस्कृतियों की विविधता आदि सभी फिल्म निर्माण के लिए आवश्यक तत्व उपलब्ध कराते हैं। यद्यपि वर्ष 1999 में फिल्म नीति की घोषणा की गयी थी, तथापि इसमें अन्य आवश्यक सुसंगत प्राविधानों की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए कतिपय संशोधन किये गये हैं, ताकि उत्तर प्रदेश में उपलब्ध असीम संभावनाओं को फिल्मांकित करने का समुचित उपयोग हो सके।

1.3 आवश्यकता इस बात की है कि ऐसा उपयुक्त वातावरण सृजित किया जाय, जिससे उत्तर प्रदेश में न केवल बड़े पैमाने पर शूटिंग का कार्य सम्पन्न हो सके, बल्कि फिल्म निर्माण के विभिन्न पक्षों से जुड़ी गतिविधियों का भी समग्र विकास हो सके। इस नीति का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में फिल्म उद्योग के समग्र विकास हेतु एक सुसंगठित ढांचा एवं उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है।

उद्देश्य

  • उत्तर प्रदेश को फिल्म निर्माण के लिए महत्वपूर्ण केन्द्र के रूप में विकसित किया जाना।
  • प्रदेश के अद्भुत, मनोहारी तथा रमणीय पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी देना एवं पर्यटकों को आकर्षित करना।
  • प्रदेश की सांस्कृतिक, पौराणिक, ऐतिहासिक विरासत एवं गौरवशाली परम्परा को देश एवं विदेश में प्रचारित व प्रसारित करना।
  • प्रदेश में अभिनय व फिल्म निर्माण की प्रतिभाओं को विकास के अवसर प्रदान करना।
  • प्रदेश में रोजगार सृजन के अवसर उपलब्ध कराना।
  • फिल्म उद्योग के माध्यम से अतिरिक्त पूँजी निवेश आकर्षित करना।
  • देश व प्रदेश की जनता को स्वस्थ व अपेक्षाकृत सस्ता मनोरंजन उपलब्ध कराना।

रणनीति

राज्य सरकार द्वारा उपरिलिखित उद्देश्यों की पूर्ति हेतु हर सम्भव प्रयास जा रहा है तथा इस निमित्त उत्तर प्रदेश फिल्म बन्धु का गठन किया गया है। प्रदेश में फिल्म निर्माण के लिए उपयुक्त वातावरण सृजन के लिए निम्न प्रयास किये जायेंगे।

  • श्रेष्ठ एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक अवस्थापना के सृजन में सहयोग देना।
  • विद्यमान अवस्थापना का जीर्णोद्धार।
  • नवीनीकरण एवं उच्चीकरण।
  • अपेक्षित सुविधाएं उपलब्ध कराना।
  • प्रशासनिक सहायता।
  • वित्तीय प्रोत्साहनों का आकर्षक पैकेज।
  • सुयोग्य प्रकरणों में वित्तीय समर्थन की आकर्षक प्रणाली तथा सिनेमा के प्रचार-प्रसार से जुड़े गैर-सरकारी संगठनों को बढ़ावा देना आदि।

परिभाषा

फिल्मों की परिभाषा वही होगी, जो भारतीय सिनेमेटोग्राफी अधिनियम में दी गयी है।

अवस्थापना

5.1 फिल्मों के लिए एक विशिष्ट प्रकार की अवस्थापना की आवश्यकता होती है। राज्य सरकार द्वारा निजी तथा संयुक्त क्षेत्र में इस प्रकार की अवस्थापना के सृजन को बढ़ावा दिया जायेगा। निजी क्षेत्र में इस प्रकार की अवस्थापना के उपलब्ध होने तक राज्य सरकार यथासम्भव विद्यमान कमियों को अपने प्रयासों से दूर करने का प्रयत्न करेगी।

5.2 फिल्मों के विकास के लिए आवश्यक अवस्थापना को सामान्य तौर पर निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:-

  • शूटिंग तथा फिल्म निर्माण के लिए अवस्थापना जैसे स्टूडियो एवं प्रोसेसिंग प्रयोगशालाएं।
  • फिल्म प्रदर्शन के लिए अवस्थापना।
  • उपकरण
  • कलाकारों, तकनीशियनों तथा विशिष्ट क्षेत्रों में विशेषज्ञता की प्रशिक्षण सुविधाएं।

5.3 शूटिंग/फिल्म निर्माण हेतु अवस्थापना

5.3.1 फिल्म सिटी

5.3.1.1 उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में नोएडा में फिल्म सिटी का विकास किया गया था, जो शनैः शनैः अब उत्तरी भारत में बन रहे टी0वी0 सीरियल्स फिल्म की शूटिंग का प्रमुख केन्द्र बन गया है। राज्य सरकार नोएडा के साथ ही लखनऊ व वाराणसी के आस-पास तथा फिल्म शूटिंग के लिए उपयुक्त अन्य स्थानों पर फिल्म निर्माण सुविधाओं के विकास का प्रयास करेगी, ताकि प्रदेश फिल्म निर्माण के केन्द्र बिन्दु के रूप में विकसित हो सके।

5.3.1.2 प्रदेश में उपलब्ध संभावनाओं का पूर्ण दोहन सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञ एजेन्सी के माध्यम से एक सम्भाव्यता अध्ययन कराया जाएगा। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य निजी क्षेत्र में नवीन फिल्म नगरी/नगरियों/फिल्म लैबोरेटरी की स्थापना के लिए सम्भावनाओं का मूल्यांकन करना होगा। यह अध्ययन फिल्म बन्धु द्वारा कराया जाएगा तथा इसकी रिपोर्ट के आधार पर एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर उसे क्रियान्वयन हेतु निजी क्षेत्रों को प्रस्तुत किया जायेगा। प्रत्येक कैलेण्डर वर्ष के लिए भी विस्तृत कार्य योजना बनायी जायेगी।

5.3.1.3 राज्य सरकार इस फिल्म नगरी/नगरियों के स्थापना में सहयोग करेगी और इसके लिए औद्यागिक दरों पर भूमि उपलब्ध करायेगी तथा सहायक अवस्थापना के सृजन में भी सक्रिय योगदान देगी। सुरक्षा की दृष्टि से फिल्म नगरी में पुलिस थाना स्थापित करने में भी सरकार अपना योगदान करेगी। पुलिस थाना, अग्नि शमन केन्द्र, सम्पर्क मार्ग तथा वाह्य जल निकासी आदि भौतिक अवस्थापनाओं का विकास राज्य सरकार के माध्यम से किया जायेगा।

5.3.2 स्टूडियोज़ / लैब्स

जब तक प्रदेश में पूर्ण रूप से क्रियाशील फिल्म नगरी की स्थापना नहीं हो जाती तब तक स्टूडियोज तथा प्रयोगशालाओं की स्थापना को राज्य सरकार द्वारा बढ़ावा दिया जायेगा। इनकी स्थापना हेतु राज्य सरकार की संस्थाओं के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने के अतिरिक्त क्षेत्रीय फिल्मों के लिए इस नीति के अन्तर्गत अनुमन्य अनुदान योजना से उन्हें सम्बद्ध किया जाएगा, ताकि प्रदेश में स्थापित स्टूडियोज/प्रयोगशालाएं लाभान्वित हो सकें।

फिल्मों का प्रदर्शन

टी0वी0 और केबिल नेटवर्क के सशक्त प्रवेश से फिल्म उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। सिने दर्शकों की संख्या में कमी आने के फलस्वरूप बड़ी संख्या में छविगृह बन्द हो गए हैं। और कार्यरत छविगृहों के रख-रखाव तथा उनकी सेवाओं का ह्रास हुआ है। फिल्म उद्योग के समग्र विकास हेतु उच्च श्रेणी की सिनेमा प्रदर्शन सुविधाएं आवश्यक हैं, किन्तु सिने-दर्शक केवल उसी दशा में छविगृहों की ओर आकर्षित होंगे, जब छविगृहों में फिल्म देखने का अनुभव घर में फिल्म देखने की अपेक्षा बिल्कुल भिन्न हो। इसलिए राज्य सरकार द्वारा छविगृहों में भौतिक सुख-साधन तथा प्रौद्योगिकी के उच्चीकरण को प्रोत्साहित करने हेतु वर्तमान छविगृहों के उच्चीकरण हेतु विशेष योजना बनायी जायेगी।

माल एवं सेवा कर

प्रदेश में, दिनांक 01.07.2017 से माल और सेवाकर अधिनियम-2017 के क्रियान्वयन हो जाने के उपरान्त सिनेमा /मल्टीप्लेक्स पर माल और सेवाकर की दर रूपये 100/- के टिकट मूल्य पर 18%(CGST 9%+ SGST 9%) एवं रुपये 100/- से अधिक टिकट मूल्य पर 28%(CGST 14%+SGST 14%) देय है।

प्रदेश में बन्द सिनेमाघरों को पुनःसंचालित कराने, संचालित सिनेमाघरों का पुनर्निर्माण/रिमॉडल करवाने मल्टीप्लेक्स विहीन 58 जनपदों में मल्टीप्लेक्स खुलवाने, एकल सिनेमा घरों के निर्माण को प्रोत्साहित करने एवं संचालित सिनेमाघरों के उच्चीकरण हेतु समेकित प्रोत्साहन योजना

शासनादेश संख्या-564/11-6-2017- एम(34)/17 दिनांक 28.07.2017 द्वारा प्रदेश में बन्द सिनेमाघरों को पुनः संचालित कराने, संचालित सिनेमाघरों को पुनर्निर्माण/रिमॉडल कराने, मल्टीप्लेक्स विहीन 58 जनपदों में यथाशीघ्र मल्टीप्लेक्स खुलवाने, एकल सिनेमाघरों के निर्माण को प्रोत्साहित करने एवं संचालित सिनेमाघरों के उच्चीकरण हेतु समेकित प्रोत्साहन योजना निर्गत की गयी है, जो निम्नवत है:-

जन सामान्य को स्वस्थ्य मनोरंजन उपलब्ध कराने, राजस्व वृद्धि के साथ-साथ अधिकाधिक रोजगार सृजन के उद्देश्य से प्रदेश में बन्द या संचालित सिनेमाघरों को यथास्थिति, पूर्णरुप से तोड़कर व्यवसायिक गतिविधियों सहित उन्हें पुनः संचालित कराने/बन्द अथवा संचालित सिनेमाघरों को रिमॉडल करवाने, मल्टीप्लेक्स विहीन 58 जनपदों में यथाशीघ्र मल्टीप्लेक्स खुलवाने, एकल स्क्रीन सिनेमाघरों के निर्माण को प्रोत्साहित करने, संचालित छविगृहों के उच्चीकरण तथा संचालित एक स्क्रीन सिनेमाघरों के स्वामियों की समस्याओं के दृष्टिगत शासन द्वारा सम्यक् विचारोपरान्त निम्नलिखित समेकित प्रोत्साहन योजना लागू किये जाने का निर्णय लिया गया है:-

(i) बन्द पड़े अथवा संचालित सिनेमाघरों को पूर्ण रुप से तोड़कर उसके स्थान पर व्यवसायिक काम्पलेक्स सहित आधुनिक सुविधाओं से युक्त लघु क्षमता के सिनेमाघरों के निर्माण हेतु प्रोत्साहन योजनाः-

शासनादेश संख्या-1669/11-6-2004- बीस0एम0(36)/99 दिनांक 03.09.2004 के अधीन निर्मित सिनेमाघरों को प्रथम तीन वर्ष राज्य माल और सेवाकर का 100 प्रतिशत एवं शेष दो वर्ष 75 प्रतिशत अनुदान अनुमन्य होगा, इस योजना का लाभ वर्तमान में बन्द या संचालित ऐसे एकल स्क्रीन सिनेमाघरों को अनुमन्य होगा। जो विलम्बतम दिनांक 31.03.2020 तक जिला मजिस्ट्रेट से लाइसेंस प्राप्त कर उक्त में फिल्म प्रदर्शन प्रारम्भ कर लेंगे।

इस योजना का लाभ उन सभी सिनेमाघरों को भी अनुमन्य होगा, जिन्होंने शासनादेश संख्या-1560/11- क0नि0-6-2005-बीस0एम0(106)/ 2005 दिनांक 27.09.2005 द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अन्तर्गत, जिला मजिस्ट्रेट को निर्माण की अनुमति हेतु प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत कर दिया था, परन्तु जिला मजिस्ट्रेट के स्तर से निर्माण की अनुमति मिलने में हुए विलम्ब या किन्ही अन्य अपरिहार्य कारणों से दिनांक 31.03.2010 तक लाइसेंस प्राप्त नहीं कर सके थे, बशर्ते इस उपवर्ग में आने वाले सिनेमाघर विलम्बतम दिनांक 31.03.2018 तक जिला मजिस्ट्रेट से चलचित्रों के प्रदर्शन हेतु लाइसेंस प्राप्त कर सिनेमाघर में फिल्मों का प्रदर्शन प्रारम्भ कर लेंगे। (ii) पुराने बन्द पड़े एवं संचालित सिनेमाघरों को भवन की आंतरिक संरचना के परिवर्तन (रिमॉडल) कर पुनः संचालित होने वाले सिनेमाघरों हेतु प्रोत्साहन योजना :

शासनादेश संख्या-843/ 11-6-2016- बीस0 एम0(19)/08 दिनांक 30.12.2016 में अन्तर्निहित अपवाद (ऐसे नगर निगम एवं नगर पालिका परिषद, जहां एक भी मल्टीप्लेक्स हो को छोड़कर) को निरसित करते हुए योजना सम्पूर्ण प्रदेश हेतु प्रभावी होगी एवं इस योजना के तहत रिमॉडल होने वाले सिनेमाघर/मल्टीप्लेक्स को प्रथम तीन वर्ष राज्य माल और सेवाकर का 75 प्रतिशत तथा चतुर्थ एवं पंचम वर्ष 50 प्रतिशत अनुदान अनुमन्य होगा। इस योजना का लाभ ऐसे सिनेमाघरों को अनुमन्य होगा, जो विलम्बतम दिनांक 31.03.2020 तक जिला मजिस्ट्रेट से लाइसेंस प्राप्त कर उक्त में फिल्म प्रदर्शन प्रारम्भ कर लेंगे। शासनादेश संख्या-843 दिनांक 30.12.2016 की शेष शर्ते यथावत रहेगी।

(iii) प्रदेश में बन्द पड़े सिनेमाघरों को बिना आन्तरिक संरचना के परिवर्तन किये यथास्थिति पुनः संचालित करने वाले सिनेमाघरों हेतु प्रोत्साहन योजनाः-

इस योजना का लाभ प्रदेश में बन्द पड़े सिनेमाघरों को बिना आन्तरिक संरचना के परिवर्तन किये यथास्थिति पुनः संचालित करने हेतु जनपद/तहसील मुख्यालयों के अतिरिक्त कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बन्द हो चुके सिनेमाघरों हेतु पूर्व योजना को और आकर्षक बनाये जाने के उद्देश्य से दिनांक 31.03.2017 तक बन्द हो चुके सिनेमाघरों को प्रथम तीन वर्ष राज्य माल और सेवाकर का 50 प्रतिशत अनुदान अनुमन्य होगा। इस योजना का लाभ ऐसे सिनेमाघरों को अनुमन्य होगा जो विलम्बतम दिनांक 31.03.2018 तक जिला मजिस्ट्रेट से लाइसेंस प्राप्त कर उक्त में फिल्म प्रदर्शन प्रारम्भ कर लेंगे।

(iv) व्यवसायिक गतिविधियों सहित/ रहित, न्यूनतम 125 आसन क्षमता के एकल स्क्रीन सिनेमाघरों के निर्माण हेतु प्रोत्साहन योजनाः-

इस योजना का लाभ व्यवसायिक गतिविधियों सहित/रहित, न्यूनतम 125 आसन क्षमता के एकल स्क्रीन सिनेमाघरों के निर्माण हेतु वर्तमान में प्रभावी शासनादेश संख्या-950/11-6-2016 एम(9)/16 दिनांक 30.12.2016 को यथावत बनायें रखते हुए इस योजना का लाभ ऐसे सिनेमाघरों को अनुमन्य होगा जो विलम्बतम दिनांक 31.03.2020 तक जिला मजिस्ट्रेट से लाइसेंस प्राप्त कर उक्त में फिल्म प्रदर्शन प्रारम्भ कर लेंगे।

(v) जिन जनपदों में एक भी मल्टीप्लेक्स निर्मित/संचालित नहीं है, वहां मल्टीप्लेक्स खुलवाने सिनेमाघरों हेतु प्रोत्साहन योजनाः-

इस योजना का लाभ प्रदेश के ऐसे 58 जनपदों जिनमें एक भी मल्टीप्लेक्स निर्मित संचालित नहीं है, में भी नये मल्टीप्लेक्सेज के निर्माण हेतु वर्तमान में लागू शासनदेश-714/11-6-15–एम (72)/ 2010 दिनांक 03.09.2015 को इस सीमा तक संशोधित करते हुए उन जनपदों में प्रथम संचालित होने वाले मल्टीप्लेक्स को छः वर्ष तक राज्य माल और सेवाकर का 100 प्रतिशत अनुदान अनुमन्य किया जायेगा। शासनादेश संख्या-714/11-6-15–एम (72) /2010 दिनांक 03.09.2015 एवं इस योजना का लाभ ऐसे सिनेमाघरों को अनुमन्य होगा जो विलम्बतम दिनांक 31.03.2020 तक जिला मजिस्ट्रेट से लाइसेंस प्राप्त कर उक्त में फिल्म प्रदर्शन प्रारम्भ कर लेंगे।

(vi) सिनेमाघरों के उच्चीकरण हेतु वर्तमान में लागू प्रोत्साहन योजनाः-

इस योजना के अन्तर्गत निम्न वर्णित एक अथवा अनेक मदों में निवेश की गयी वास्तविक धनराशि का 50 प्रतिशत की सीमा तक का अनुदान राज्य माल और सेवाकर में से अनुमन्य होगाः-

  • एयर कंडीशनिंग/एयर कूलिंग
  • जेनरेटर सेट क्रय
  • ध्वनि प्रणाली के आधुनिकीकरण
  • सारे सीट बदलने
  • फाल्स-सीलिंग बदलने
  • डिजिटल प्रक्षेपण प्रणाली एवं
  • सौर ऊर्जा पर आधारित संयंत्र

इस उच्चीकरण का लाभ एकल स्क्रीन छविगृह के व्यवसायियों को ही अनुमन्य होगा, मल्टीप्लेक्स को उच्चीकरण योजना का लाभ अनुमन्य नहीं होगा।

बंद छविगृहों को पुनर्जीवित करना

बन्द पड़े छविगृहों को पुनर्जीवित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सिने व्यवसाय को आर्थिक रूप से उपादेय बनाने के उद्देश्य से बन्द/घाटे में चल रहे सिनेमाघरों को पुर्नसंरचित करके 125 अथवा अधिक आसन क्षमता के छोटे सिनेमा सहित व्यावसायिक गतिविधियां प्रारम्भ करने सबंधी शासनादेश संख्या- 231/11-6-11-20 एम(19)/2008 दिनांक 20.05.2011 जारी किया गया है।

प्रदेश में दिनांक 01.07.2017 से माल और सेवाकर अधिनियम, 2017 के क्रियान्वयन हो जाने के उपरान्त, उपरोक्त प्रस्तर-8 के अनुसार, शासनादेश संख्या- 564/ 11 -6-2017-एम(34)/17 दिनांक 28.07.2017 द्वारा प्रदेश में बन्द सिनेमाघरों को पुनः संचालित कराने, संचालित सिनेमाघरों को पुनर्निर्माण/रिमॉडल कराने, मल्टीप्लेक्स विहीन 58 जनपदों में यथाशीघ्र मल्टीप्लेक्स खुलवाने, एकल सिनेमाघरों के निर्माण को प्रोत्साहित करने एवं संचालित सिनेमाघरों के उच्चीकरण हेतु समेकित प्रोत्साहन योजना निर्गत की गयी है।

वर्तमान छविगृहों का उच्चीकरण

सिनेमाहालों में फिल्मों को देखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए यह आवश्यक है कि वर्तमान छविगृहों में उपलब्ध सुविधाओं तथा तकनीकों का आधुनिकीकरण एवं उच्चीकरण किया जाये। प्रदेश सरकार द्वारा शासनादेश संख्या-952 दिनांक 03.11.1999 के अंतर्गत छविगृह में जनसुविधा के विस्तार एवं उन्हें जनोन्मुखी बनाने के उददेश्य से छविगृहों में आधुनिक ध्वनि प्रणाली, एअर कंडीशनिंग, जेनरेटर सेट, फाल्स सिलिंग लगाने एवं समस्त फर्नीचर बदलने तथा वृहद नवीनीकरण हेतु मनोरंजन कर उपादान की नवीन योजना लागू की गयी है, जिसके अन्तर्गत छविगृह–स्वामी को उपरोक्त सुविधाओं पर किए गए निवेश के 50% की अधिकतम् सीमा तक मनोरंजन कर, जो इस सुविधा के बाद अतिरिक्त रूप से जमा किया जायेगा, अनुदान के रूप में अपने पास रखने की अनुमति पूर्व वर्ष में जमा किये गये मनोरंजन कर राजस्व के बराबर, राजस्व शासकीय कोषागार में जमा करने के पश्चात् दी जायेगी। पुनः शासनादेश संख्या-621 (1) दिनांक 12.09.2014 द्वारा उक्त शासनादेश दिनांक 03.11.1999 में छविगृह में डिजिटल प्रोजक्शन सिस्टम एवं सौर उर्जा से संचालित संयत्र स्थापित करने पर इस योजना के अंतर्गत निवेश की गयी धनराशि पर 50 प्रतिशत अनुदान दिये जाने की व्यवस्था कतिपय शर्तों के साथ की गयी है।

प्रदेश में दिनांक 01.07.2017 से माल ओर सेवाकर अधिनियम, 2017 के क्रियान्वयन हो जाने के उपरान्त, उपरोक्त प्रस्तर–8 के अनुसार, शासनादेश संख्या- 564/ 11 -6-2017-एम(34)/17 दिनांक 28.07.2017 द्वारा प्रदेश में बन्द सिनेमाघरों को पुनः संचालित कराने, संचालित सिनेमाघरों को पुनर्निर्माण/रिमॉडल कराने, मल्टीप्लेक्स विहीन 58 जनपदों में यथाशीघ्र मल्टीप्लेक्स खुलवाने, एकल सिनेमाघरों के निर्माण को प्रोत्साहित करने एवं संचालित सिनेमाघरों के उच्चीकरण हेतु समेकित प्रोत्साहन योजना निर्गत की गयी है।

प्रदेश में दिनांक 01-07-2017 से माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 के क्रियान्वयन हो जाने के उपरांत, उत्तर प्रदेश आमोद एवं पणकर अधिनियम, 1989, उत्तर प्रदेश माल और सेवाकर अधिनियम, 2017 की धारा-174 द्वारा निरसित।

छविगृहों को उद्योग का दर्जा

उत्तर प्रदेश में छविगृहों को उद्योग का दर्जा दिया गया।

वैधानिक संशोधन

उद्योग के प्रतिनिधियों से परामर्श के बाद सिनेमेटोग्राफी नियमावली तथा सिनेमा से सम्बन्धित अन्य कानूनों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे, ताकि मल्टीप्लेक्सेज तथा छोटे छविगृहों के निर्माण तथा स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो सके।

उपकरण

उत्तर प्रदेश में पूर्ण रुप से क्रियाशील फिल्म नगरी/नगरियों की स्थापना होने तथा स्थानीय सिनेमा उद्योग का पर्याप्त विकास होने तक राज्य सरकार द्वारा विभिन्न शासकीय विभागों यथा, शिक्षा, सूचना तथा संस्कृति में उपलब्ध उपकरण फिल्म निर्माताओं को किराए पर उपलब्ध कराए जाएंगे। फिल्म निर्माताओं की आवश्यकता के अनुरूप इन उपकरणों के वर्तमान भण्डार को बढ़ाया जायेगा। इन उपकरणों का अर्जन तथा रख-रखाव ‘फिल्म बन्धु द्वारा किया जायेगा। इस कार्य हेतु फिल्म बन्धु, नोडल एजेन्सी के रुप में कार्य करेगा तथा समस्त उपकरणों का एक पूल, फिल्म बन्धु में स्थापित किया जायेगा। उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए फिल्म बन्धु शासकीय विभागों के अतिरिक्त निजी क्षेत्र में भी पूल बना सकेगा।

शूटिंग स्थलों का विकास

प्रदेश में उपलब्ध प्रचुर नैसर्गिक सुन्दरता, समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराओं तथा ऐतिहासिक स्मारकों की पृष्ठभूमि का पर्यटन विभाग निरन्तरता के आधार पर प्रदेश में आउटडोर शूटिंग के लिए स्थलों का चयन कर उनका विकास करेगा तथा सक्रियता से प्रचार करेगा। इसके लिए ट्रॉन्सपैरेन्सीज, लघु फिल्में, प्रचार–साहित्य जैसे—ब्रोशर्स इत्यादि विकसित किये जायेंगे। प्रदेश की नयी पर्यटन नीति के तहत निजी क्षेत्र को इस बात के लिए उत्प्रेरित किया जाएगा कि वे इन शूटिंग स्थलों पर होटल्स, मोटल्स, रेस्टोरेन्ट तथा कैम्पिंग सुविधाओं की स्थापना करें। फिल्म नीति के प्रभावी क्रियान्वयन तथा फिल्म निर्माताओं को नियमानुसार आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में फिल्म प्रमोशन एण्ड फेसिलिटेशन कमेटी का निम्नानुसार गठन किया जायेगाः-

1.  जिलाधिकारी - अध्यक्ष

2.  वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक अथवा उनके द्वारा नामित अधिकारी – सदस्य

3.  अपर जिलाधिकारी (जिलाधिकारी द्वारा नामित) – सदस्य

4.  क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी/ पर्यटन अधिकारी - सदस्य

5.  मनोरंजन कर विभाग के जनपदीय अधिकारी, यथा- उपायुक्त/सहायक आयुक्त/जिला मनोरंजन कर अधिकारी – सदस्य

6.  उप निदेशक/सहायक निदेशक/ जिला सूचना अधिकारी/प्रभारी जिला सूचना अधिकारी

- संयोजक/नोडल अधिकारी यह समिति फिल्म निर्माताओं द्वारा फिल्म की शूटिंग के लिए प्रार्थना प्रत्र प्रस्तुत करने पर शूटिंग स्थल की अनुमति, फिल्म यूनिट की सुरक्षा व्यवस्था, नियमानुसार भुगतान करने पर शासकीय गेस्ट हाउस/पर्यटन अतिथि में ठहरने की व्यवस्था तथा शूटिंग के बाद शूटिंग के दिवसों में जिलाधिकारी कार्यालय में प्रदान किये जाने वाले प्रमाण-पत्र के समयबद्ध निर्गमन आदि का अनुश्रवण करेगी तथा जनपद में विभागों के स्तर पर आने वाली कठिनाइयों का त्वरित निराकरण करायेगी। फिल्म शूटिंग से सम्बन्धित आवेदन प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर फिल्म प्रमोशन एण्ड फेसिलिटेशन कमेटी की बैठक आयोजित कर नियमानुसार अपेक्षित कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।

कलाकारों तथा तकनीशियनों का प्रशिक्षण

16.1 फिल्म उद्योग के उपयुक्त विकास के लिए यह परम् आवश्यक है कि प्रतिभा सम्पन्न कलाकार तथा प्रशिक्षित तकनीशियन सुगमता से उपलब्ध हों। उत्तर प्रदेश में फिल्म तथा टेलीविजन इंस्टीट्यूट की एक शाखा खोलने के लिए राज्य सरकार, भारत सरकार से समन्वय स्थापित करेगी, ताकि उन प्रतिभाशाली नवयुवकों की आकांक्षा की पूर्ति हो सके, जो कि देश के उत्तरी भाग में फिल्मों को अपना कैरियर बनाना चाहते हैं। इस शाखा की स्थापना होने तक प्रदेश की प्रख्यात भारतेन्दु नाट्य अकादमी का विकास, राज्य फिल्म तथा टेलीविजन संस्थान के रूप में किया जायेगा।

16.2 फिल्म तकनीशियनों को चुने हुए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षित किया जायेगा।

इस उद्देश्य से सम्बन्धित पाठ्यक्रम, कुछ संस्थानों में प्रारम्भ किए जाएंगे। राज्य सरकार द्वारा निजी क्षेत्र को भी फिल्म सम्बन्धी व्यवसायों एवं पाठ्यक्रमों के साथ प्रशिक्षण संस्थान खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

16.3 भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, पुणे तथा सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, कोलकाता में उत्तर प्रदेश के प्रशिक्षणरत विद्यार्थियों को वार्षिक छात्रवृत्ति रु0 25,000/दी जायेगी। छात्रवृत्तियों की अधिकतम संख्या दोनो संस्थानों में प्रत्येक के लिए अलग-अलग दस होगी। इस कार्य पर व्यय होने वाली धनराशि का वहन फिल्म बन्धु द्वारा किया जायेगा।

16.4 प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयो में 'परफॉरर्मिंग आटर्स' के पाठ्यक्रम आरम्भ किए जाएंगे, ताकि प्रदेश के युवा वर्ग को अपनी प्रतिभा विकसित एवं मुखरित करने का अवसर प्राप्त हो सके।

फिल्म इकाइयों के लिए आवासीय सुविधा

प्रदेश में आउटडोर शूटिंग करने वाली इकाइयों को उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के होटल्स/मोटल्स में कमरों के किराए में 25% की छूट दी जायेगी। लोक निर्माण विभाग, वन विभाग तथा सिंचाई विभाग एवं राज्य सम्पत्ति विभाग के अतिथि। गृह/विश्रामालय भी इन फिल्म इकाइयों को नियमित भुगतान पर उपलब्ध होंगे।

सरकारी हवाई पट्टियों का प्रयोग

राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के विभिन्न भागों में स्थित हवाई पट्टियों के प्रयोग की सुविधा आउटडोर शूटिंग करने वाली फिल्म इकाइयों को निर्धारित किराये के भुगतान पर अनुमन्य करायी जा सकेगी।

फिल्म तथा फिल्म सम्बन्धी अवस्थापना

फिल्म तथा फिल्म सम्बन्धी अवस्थापना के विकास की विभिन्न योजनाओं का वित्त पोषण करने के लिए धनराशि, प्रत्येक वर्ष आय-व्ययक में सूचना विभाग की अनुदान संख्या-86 के अधीन प्राविधानित करायी जायेगी तथा उस धनराशि को फिल्मों के अनुदान आदि के संचालन हेतु उत्तर प्रदेश फिल्म बन्धु को उपलब्ध कराया जायेगा। बजट से प्राप्त धनराशि का उपयोग निम्नलिखित कार्यो के लिए किया जायेगा

  • हिन्दी/क्षेत्रीय भाषा के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश में शूटिंग की जाने वाली अंग्रेजी व देश की अन्य भाषाओं की फीचर फिल्मों को अनुदान उपलब्ध कराना।
  • फिल्म निर्माण से सम्बन्धित उपरकणों की व्यवस्था।
  • फिल्म स्टूडियो/फिल्म इंस्टीट्यूट/ फिल्मसिटी आदि की स्थापना।
  • फिल्मों के लिए पुरस्कार।
  • फिल्म छात्रों के लिए छात्रवृत्ति।
  • फिल्म महोत्सवों का आयोजन।
  • फिल्म-गोष्ठियों/ सेमिनार का आयोजन।
  • राष्ट्रीय/प्रदेश स्तरीय फिल्म महोत्सव के लिए शासन की अनुमति से स्पांसरशिप।
  • फिल्म से सम्बन्धित अन्य सभी कार्य।

फिल्म बन्धु की स्थापना तथा उसके रख-रखाव सम्बन्धी व्यय।

वित्तीय प्रोत्साहन

20.1 राज्य माल और सेवा कर (GST) की प्रतिपूर्तिः वर्तमान में जीएसटी प्रणाली लागू की गयी है। तद्नुसार उचित कार्यवाही की जायेगी।

20.2 मल्टीप्लेक्स/सिनेमा के स्वामी/ लाइसेंसी द्वारा जमा किये गये अग्रिम राज्य माल एवं सेवाकर की, दर्शकों को दी गयी छूट के समतुल्य, प्रतिपूर्ति, कर एवं निबन्धन अनुभाग-6 के शासनादेश संख्या-612/11 -6-2017-एम(43)/17 दिनांक 09.08.2017 के अधीन रहते हुए किया जायेगा।

20.3 प्रदेश में दिनांक 01.07.2017 से माल और सेवाकर अधिनियम के क्रियान्वयन हो जाने के उपरान्त मल्टीप्लेक्स/सिनेमा पर माल और सेवाकर की दर रु0 100 के टिकट मूल्य पर 18%(CGST 9%+ SGST 9%) रुपये 100/- से अधिक टिकट मूल्य पर 28% (CGST 14%+SGST 14%) देय है।

क्षेत्रीय फिल्में

21.1 अन्य राज्यों में रोजगार सृजन तथा अवस्थापना के विकास में क्षेत्रीय फिल्मों की सफल भूमिका अनुकरणीय है। प्रदेश हिन्दी भाषा का मुख्य क्षेत्र रंगारंग, अनुपम तथा माटी से जुड़ी हुई लोक-संस्कृति से समृद्ध होने के पश्चात् भी क्षेत्रीय, भाषाई तथा आँचलिक सिनेमा से वंचित रहा है। उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय बोलियों का प्रयोग भारतीय साहित्य में व्यापक रूप से हुआ। है। भोजपुरी, अवधी, बुन्देली तथा ब्रज बोलियाँ बोलने वाले लोग, न केवल देश में फैले हुए हैं।

बल्कि सम्पूर्ण विश्व में रहते हैं। पूर्व में बनायी गयीं अनेक भोजपुरी फिल्मों को व्यवसायिक दृष्टि से अत्यधिक सफलता मिली है और भारतीय सिनेमा की कुछ सर्वश्रेष्ठ फिल्में इसी भाषा में बनायी गयी हैं। अतः क्षेत्रीय फिल्मों के विकास एवं उनकी सफलता की प्रबल संभावनाएं हैं।

21.2 राज्य सरकार इन बोलियों तथा संस्कृतियों में अन्तर्निहित शक्ति एवं सम्भावनाओं से पूर्ण रूप से परिचित है। इन क्षेत्रीय भाषाओं में फिल्म निर्माण को सक्रिय रुप से प्रोत्साहित किया। जायेगा। इससे न केवल एक सशक्त क्षेत्रीय एवं आँचलिक फिल्म उद्योग का विकास होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होंगे और प्रदेश की स्थानीय संस्कृतियों की छवि प्रक्षेपित होगी। क्षेत्रीय फिल्म उद्योग के विकास से एक ऐसा वातावरण बनेगा, जो उत्तर प्रदेश में मुख्य धारा की हिन्दी फिल्मों के निर्माण को भी आकर्षित करेगा। एक पनपता हुआ क्षेत्रीय फिल्म उद्योग फिल्म सम्बन्धी अवस्थापना को आर्थिक रुप से सबल बनाने में भी सहायक होगा, इसलिए राज्य सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय फिल्मों के विकास के लिए प्रोत्साहन दिये जायेंगे।

21.3 अनुदान/प्रोत्साहन व्यवस्था

1. उत्तर प्रदेश फिल्म नीति-2001 (यथा संशोधित -2014) के प्रस्तर-23.3.1 के अन्तर्गत अवधी, ब्रज, बुन्देली, भोजपुरी फिल्मों के लिए अनुदान की सीमा लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत तथा हिन्दी, अंग्रेजी तथा देश की अन्य भाषाओं में निर्मित फिल्मों के लिए अनुदान की सीमा लागत का अधिकतम 25 प्रतिशत तक होगी।

2. प्रदेश में निर्मित उपरोक्त बिन्दु-1 में उल्लिखित फिल्मों जिनके कुल शूटिंग दिवसों में से कम से कम आधे दिवसों की शूटिंग उत्तर प्रदेश में की गयी हो, के लिए अनुदान की अधिकतम सीमा रू 1.00 (रूपये एक करोड़ मात्र) तक होगी।

3. प्रदेश में निर्मित उपरोक्त बिन्दु-1 में उल्लिखित फिल्मों जिनके कुल शूटिंग दिवसों में से दो तिहाई दिवसों की शूटिंग उत्तर प्रदेश में की गयी हो, के लिए अनुदान की अधिकतम सीमा रूपये-2.00 (रूपये दो करोड़ रूपये मात्र) तक होगी।

4. फिल्म नीति के अन्तर्गत प्रदेश में निर्मित किये जाने के आधार पर एक बार अनुदान प्राप्त फिल्म के बाद, अग्रेतर फिल्म बनाये जाने पर निम्नलिखित धनराशि अनुदान के रूप में दी जा सकेगीः-

फिल्म का विवरण

प्रदेश में फिल्म में शूटिंग की स्थिति

अनुदान की अधिकतम धनराशि

प्रदेश में द्वितीय फिल्म

फिल्म की कुल शूटिंग में से आधे दिवसों की शूटिंग करने पर

रू. 1.25 करोड़, मात्र

 

फिल्म की कुल शूटिंग में से दो तिहाई दिवसों की शूटिंग

रू. 2.25 करोड़, मात्र

 

प्रदेश में तृतीय फिल्म अथवा उसके उपरान्त

फिल्म की कुल शूटिंग में से आधे दिवसों की शूटिंग करने पर

रू. 1.50 करोड़ मात्र

 

फिल्म की कुल शूटिंग में से दो तिहाई दिवसों की शूटिंग करने पर

रू. 2.50 करोड़ मात्र

 

 

राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त निर्माता/निर्देशक द्वारा फिल्म नीति के अन्तर्गत प्रदेश में निर्मित किये जाने के आधार पर एक बार अनुदान प्राप्त करने के बाद अग्रेत्तर फिल्में बनाये जाने पर अनुदान धनराशि निम्नवत होगी:-

फिल्म का विवरण

 

प्रदेश में द्वितीय फिल्म

प्रदेश में फिल्म में शूटिंग की स्थिति

फिल्म की कुल शूटिंग में से आधे दिवसों की शूटिंग करने पर

अनुदान की अधिकतम धनराशि

रू. 1.75 करोड़ मात्र

 

फिल्म की कुल शूटिंग में से दो तिहाई दिवसों की शूटिंग करने पर

रू. 2.25 करोड़ मात्र

प्रदेश में तृतीय फिल्म अथवा उसके उपरान्त

फिल्म की कुल शूटिंग में से आधे दिवसों की शूटिंग करने पर

रू. 2.25 करोड़ मात्र

 

फिल्म की कुल शूटिंग में से दो तिहाई दिवसों की शूटिंग करने पर

 

 

6. यदि किसी फिल्म निर्माता द्वारा प्रदेश में ऐसी फिल्म की शूटिंग की जाती है/निर्मित की

जाती है, जिसके मुख्य पाँच कलाकार उत्तर प्रदेश के ही हैं तो उक्त फिल्म हेतु उन कलाकरों को फिल्म पारिश्रमिक के रूप में दी जाने वाली धनराशि या सम्मिलित रूप से रू. 25,00,000/- (रू. पच्चीस लाख मात्र) जो भी कम हो, का अतिरिक्त अनुदान दिया जा सकेगा।

7. इसी प्रकार यदि किसी फिल्म निर्माता द्वारा प्रदेश में ऐसी फिल्म की शूटिंग की जाती है/ निर्मित की जाती है जिसके समस्त कलाकार उत्तर प्रदेश के ही है, तो उक्त फिल्म हेतु उन कलाकरों को फिल्म पारिश्रमिक के रूप में दी जाने वाली धनराशि या सम्मिलित रूप से रू. 50,00,000/- (रू. पचास लाख मात्र) जो भी कम हो, का अतिरिक्त अनुदान दिया जा सकेगा।

8. यदि किसी फिल्म निर्माता द्वारा फिल्म शूटिंग के उपरान्त फिल्म की प्रोसेसिंग प्रदेश में ही की जाती है, तो उक्त प्रोसेसिंग पर आने वाली लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम रू.50.00 लाख का अनुदान, जो भी कम हो, अतिरिक्त रूप से स्वीकृत किया जा सकेगा।

9. यदि कोई निवेशक उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में (नोएडा/ग्रेटर नोएडा को छोड़कर) फिल्म प्रशिक्षण संस्थान खोलता है, तो लागत धनराशि का 50 प्रतिशत अथवा रू.50.00 लाख में से जो भी कम हो, का अधिकतम अनुदान स्वीकृत किया जा सकेगा।

10. प्रदेश में बोली जाने वाली हिन्दी भाषा सहित अवधी, ब्रज, बुन्देली एवं भोजपुरी भाषाओं के अतिरिक्त अंग्रेजी एवं देश की अन्य भाषाओं में अधिकाधिक फिल्में निर्मित किये जाने एवं फिल्म को उद्योग के रूप में विकसित करने तथा रोजगार सृजन बढ़ाये जाने के दृष्टिगत एक वित्तीय वर्ष में रू.5.00 करोड़ से अधिक अनुदान अवमुक्त न करने की शर्त को शिथिल किया जाता है।

11. अनुदान चयन के लिए पटकथा की गुणवत्ता एवं बजट का परीक्षण उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद द्वारा किया जायेगा। पटकथा के परीक्षण के लिए परिषद द्वारा स्क्रिप्ट परीक्षण कमेटी तथा अनुदान से सम्बन्धित बीजकों के परीक्षण के लिए वित्त विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया जायेगा फिल्म विकास परिषद् के अस्तित्व में न होने की दशा में, यह कार्य अध्यक्ष, फिल्म बन्धु द्वारा किया जायेगा।

12. उपरोक्तानुसार दिये जाने वाले अनुदान का आकलन कोषाध्यक्ष, फिल्म बन्धु तथा विभिन्न विभागों के वित्त एवं लेखा संवर्ग के अधिकारियों की समिति द्वारा किया जायेगा। इस कार्य के लिए सनदी लेखाकार की सहायता ली जा सकेगी। फिल्म बन्धु इस कार्य के लिए संविदा/आउटसोर्स पर वित्तीय सलाहकार भी नियुक्त कर सकती हैं। स्क्रिप्ट परीक्षण कमेटी निम्नानुसार होगीः-

1. सूचना निदेशक द्वारा नामित अधिकारी

2. महानिदेशक, पर्यटन विभाग द्वारा नामित अधिकारी

3. निदेशक, हिन्दी संस्थान द्वारा नामित अधिकारी

4. निदेशक, आकाशवाणी द्वारा नामित अधिकारी

5. निदेशक, दूरदर्शन द्वारा नामित अधिकारी

6. निदेशक, संस्कृति द्वारा संगीत नाटक अकादमी का नामित अधिकारी

7. निदेशक, संस्कृति द्वारा भारतेन्दु नाट्य अकादमी का नामित अधिकारी

8. भाषा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा नामित अधिकारी

9. फिल्म पटकथा लेखन में ख्यातिप्राप्त व्यक्ति (अधिकतम 03)

13. अनुदान फिल्म के रॉ-स्टाक, गीत/ संगीत रिकार्डिंग, पोस्ट प्रोडक्शन (एडटिंग, साउन्ड वर्क, रि–रिकार्डिंग, विजुएल इफेक्टस / एनीमेशन, डी0आई/ कलर ग्रेडिंग आदि तकनीकी कार्य) से संबंधित व्यय, फिल्म यूनिट के उत्तर प्रदेश में होटल आदि में ठहरने का किराया, शूटिंग के दौरान प्रदेश में आवागमन (लोकल कन्वेन्स के रूप में टैक्सी किराया आदि) उत्तर प्रदेश से किराये पर लिए गये कास्टयूम, मेक-अप मैटीरियल एवं ज्वैलरी आदि, उत्तर प्रदेश के फिल्म संस्थानों/फर्मो से किराये पर लिये गये उपकरणो तथा उत्तर प्रदेश में फिल्म लोकेशन के किराये पर होने वाले व्यय को अनुदान में सम्मिलित किया जायेगा। फिल्म की लागत के संबंध में सी.ए. द्वारा प्रमाणित वास्तविक व्यय के मूल प्रमाण पत्र के साथ उपरोक्त समस्त प्रकार के व्यय के संबंध में विस्तृत विवरण एवं तत्संबंधी बीजकों की स्वप्रमाणित मूल प्रति तथा दो सेट छायाप्रतियां प्रस्तुत करना आवश्यक होगा। फिल्म अनुदान के लिए निर्माता/ बैनर द्वारा प्रस्तुत बीजकों के भुगतान में सरकार द्वारा स्थापित वित्तीय नियमों का पालन करने पर ही अनुदान दिया जायेगा। फिल्म प्रोडक्सन पर आने वाले प्रत्येक व्यय के प्रमाणस्वरुप बैंक स्टेटमेन्ट, कैश बुक, अकाउन्ट बुक, सी.ए. द्वारा प्रमाणित कुल वास्तविक व्यय, उपकरण का किराया, म्यूजिक–रिकार्डिग, साउण्ट ट्रैक, एक्टर आदि से सम्बन्धित अनुबन्ध पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। प्रत्येक व्यय के सापेक्ष आयकर/ जी.एस.टी. व अन्य प्रासंगिक कर अदा करने का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। फिल्म निर्माण में नगद भुगतान भारत सरकार/आर.बी.आई./राज्य सरकार के दिशा-निर्देश के अनुसार ही मान्य होगा। फिल्म निर्माण से सम्बन्धित समस्त क्रय/किराये का कार्य रजिस्ट्रर्ड फर्मों से किया जायेगा।

14. फिल्म की कुल शूटिंग दिवसों के संबंध में निर्माता/निर्देशक द्वारा शपथ पत्र एवं अन्य संबंधित प्रपत्र दिया जाना आवश्यक होगा, जिसमें उत्तर प्रदेश में की गयी शूटिंग के दिवसों का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।

15. उक्त अनुदान केवल प्रथम प्रिन्ट की सीमा तक के लिए ही दिया जायेगा।

16. अनुदान, फिल्म का निर्माण करने वाली संस्था को ही दिया जायेगा।

17. उत्तर प्रदेश की संस्कृति, पर्यटन, ऐतिहासिक धरोहर तथा गंगा यमुनी तहजीब पर आधारित अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल का लखनऊ में यथासंभव प्रतिवर्ष आयोजन किया जायेगा।

18. इस संम्बन्ध में विस्तृत प्रक्रिया का निर्धारण फिल्म बन्धु उत्तर प्रदेश द्वारा किया जायेगा। 19. एक राष्ट्र, श्रेष्ठ राष्ट्र की भावना के अनुरूप प्रदेश में कुल शूटिंग दिवसों में से कम से कम आधे दिवसों की शूटिंग उत्तर प्रदेश में की गयी हो, के अनुसार निर्मित होने वाली अंग्रेजी एवं देश की अन्य भाषाओं (उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय भाषाओं को छोड़कर) की फिल्मों के लिए, अनुदान की सीमा, लागत का 50 प्रतिशत अथवा रूपये 50 लाख तक में जो न्यूनतम हो, होगी।

20. ऐसे विदेशी नागरिकों जिनके पूर्वज भारत के मूल निवासी थे तथा मारिशस/फिजी/सूरीनाम/हॉलैण्ड आदि देशों में निवास कर रहे है, के द्वारा भारतीय विषयों पर प्रदेश में निर्मित की जाने वाली फिल्मों के लिए, कुल शूटिंग दिवसों में से कम से कम आधे दिवसों की शूटिंग उत्तर प्रदेश में की गयी हो, के अनुसार निर्मित होने वाली फिल्मों के लिए, अनुदान की सीमा, लागत का 50 प्रतिशत अथवा रूपये 50 लाख तक में जो न्यूनतम हो, होगी। निर्मित फिल्म के लिए भारत के सेंसर बोर्ड द्वारा प्रदत्त प्रमाण-पत्र तथा फिल्म का प्रदर्शन भारत में होना आवश्यक है। सरकार द्वारा विदेशी फर्मों/व्यक्तियों को अनुदान/ प्रतिपूर्ति के भुगतान हेतु स्थापित नियमों का अनुपालन आवश्यक होगा। फिल्म अनुदान के लिए निर्धारित आवेदन पत्र के क्रमाक-9 में फिल्म निर्माता/निर्देशक/ फर्म/संस्था/प्रोड्यूसर/पार्टनर का अद्यतन तीन वर्षों का आयकर जमा सम्बंधी कुशैरा फॉल, मिर्जापुर प्रमाण-पत्र को उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। इस संबंध में विदेश में रहने वाले ऐसे नागरिक (O.C.I) जिनके पूर्वज भारत के मूल निवासी थे, के द्वारा संबंधित देश की नागरिकता प्रमाण-पत्र की स्वप्रमाणित प्रति उपलब्ध कराये जाने पर आयकर रिटर्न जमा करने संबंधी प्रपत्र, संबंधित देश के कानूनों को ध्यान में रखते हुए, में शिथिलता/छूट प्रदान की जायेगी। फिल्म निर्माता द्वारा तीन वर्षों का सर्टिफाइड अकाउन्टस/टर्नओवर प्रस्तुत करना होगा। पत्राचार हेतु संबंधित देश का स्थायी पता तथा भारत में निवास स्थल/कार्य स्थल का स्थायी/ अस्थायी पता देना आवश्यक है।

प्रशासनिक सुविधाएं

22.1 फिल्म विकास परिषदः– उत्तर प्रदेश में फिल्म क्षेत्र के दीर्घकालिक तथा अर्थपूर्ण विकास के लिए राज्य स्तरीय फिल्म विकास परिषद की स्थापना की जायेगी। इस परिषद की अध्यक्षता सरकार द्वारा नामित किसी ख्याति प्राप्त फिल्मी व्यक्तित्व द्वारा की जायेगी। इस परिषद में प्रतिष्ठित फिल्म निर्माता, वितरक, कलाकार तथा शासकीय अधिकारी होंगे। सूचना निदेशक, उत्तर प्रदेश, इस परिषद के संयोजक होगें । यह परिषद समय-समय पर उत्तर प्रदेश में फिल्मों के विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों पर विचार-विमर्श करेगी, फिल्मों के विकास के लिए आवश्यक अवस्थापना के उच्चीकरण तथा सृजन पर शासन को परामर्श देगी और साथ ही फिल्म क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने हेतु रणनीति तैयार करेगी। इस परिषद द्वारा ‘फिल्म नीति' के क्रियान्वयन का अनुश्रवण किया जायेगा तथा जब कभी और जहाँ कहीं किसी सुधार व संशोधन की आवश्यकता होगी तो इसके लिए सुझाव दिया जाएगा।

22.2 राज्य फिल्म प्रभाग का गठनः- उत्तर प्रदेश में बनी लघु/शैक्षिक फिल्मों को छविगृहों में चलाने तथा फिल्म नीति के क्रियान्वयन हेतु सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय के अधीन राज्य फिल्म प्रभाग का गठन किया गया है। यह प्रभाग प्रदेश में फिल्मों, विशेषकर क्षेत्रीय फिल्मों के लिए सुगम, सरल तथा समयबद्ध प्रमाणीकरण सुविधा उपलब्ध करायेगा। राज्य फिल्म प्रभाग में निम्न पदाधिकारी है:-

1. निदेशक, सूचना उत्तर प्रदेश,अध्यक्ष

2. निदेशक, दूरदर्शन, लखनऊ,सदस्य

3. निदेशक, आकाशवाणी, लखनऊ, सदस्य

4. निदेशक, संस्कृति, उत्तर प्रदेश,सदस्य

5. आयुक्त, मनोरंजन कर, उत्तर प्रदेश,सदस्य या उसके प्रतिनिधि जो अपर आयुक्त से नीचे न हो।

6. अपर निदेशक, सूचना उत्तर प्रदेश, सदस्य

7. उप निदेशक, फिल्म, सूचना, उत्तर प्रदेश, सदस्य या निदेशक, सूचना द्वारा नामित अधिकारी।

22.3 स्वीकृतियों के लिए एकल मेज व्यवस्था : फिल्म नीति के सफल क्रियान्वयन एवं फिल्म से जुड़े लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की दृष्टि से ‘एकल मेज प्रणाली का गठन किया गया है। फिल्म नीति के समस्त क्षेत्रों से सम्बन्धित समस्त विचाराधीन प्रकरणों के क्रियान्वयन की सुविधा विभाग के अधीन फिल्म बन्धु' के अन्तर्गत गठित समिति द्वारा उपलब्ध होगी।

22.4 फिल्म निर्माण हेतु सुरक्षा व्यवस्था उत्तर प्रदेश का सम्मानपूर्ण आतिथ्य सर्वविदित रहा है। अनेक भारतीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय फिल्में, उत्तर प्रदेश में फिल्मांकित की गयी हैं तथा कानून व्यवस्था की दृष्टि से फिल्मकारों का स्थानीय जनता के साथ सुखद अनुभव रहा है। राज्य अपनी आतिथ्य सत्कार की परम्पराओं को जारी रखेगा तथा उत्तर प्रदेश में फिल्मों की शूटिंग के लिए फिल्म निर्माताओं को सामान्य रूप से आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था निःशुल्क उपलब्ध करायी जायेगी, किन्तु निर्माताओं को इसके लिए स्थानीय अधिकारियों को न्यूनतम तीन सप्ताह पूर्व सूचित करना होगा, ताकि आवश्यक प्रबन्ध सुनिश्चित किये जा सकें। यह सूचना फिल्म बन्धु के माध्यम से भी दी जा सकती है। फिल्म निर्माण के लिए विशिष्ट सुरक्षा उपलब्ध कराने हेतु पुलिस विभाग के अधीन एक फिल्म शूटिंग विंग की स्थापना की जायेगी। इस विंग के अन्तर्गत उपयुक्त संख्या में आवश्यक पुलिस बल की व्यवस्था की जायेगी, ताकि फिल्म शूटिंग के समय फिल्म निर्माताओं की मांग पर उनकी मांग के अनुसार आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराया जा सके। यह अतिरिक्त विशिष्ट पुलिस बल फिल्म निर्माताओं को निर्धारित दर पर भुगतान किये जाने पर उपलब्ध कराये जायेंगे।

फिल्मों का प्रचार–प्रसार

23.1 यह सर्वमान्य सत्य है कि फिल्म उद्योग पूर्ण रूप से जन-समर्थन पर आश्रित है। एक बड़ी जनसंख्या वाला उत्तर प्रदेशफिल्मों के लिए एक श्रेष्ठ जनाधार प्रस्तुत करता है। यह दुर्भाग्य की बात है कि देश के कुछ भागों में प्रचलित फिल्म संस्कृति, उत्तर प्रदेश में अपनी जड़े जमा नहीं पायी हैं। राज्य द्वारा जनसाधारण में फिल्मों को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रयास किये जायेंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों का ध्यान मनोरंजन के इस शिक्षाप्रद स्रोत की ओर आकर्षित किया जा सके। निम्नलिखित विधियों से इस लक्ष्य की प्राप्ति सुनिश्चित की जायेगीः

  • फिल्मोत्सव का आयोजन
  • पुरस्कारों का वितरण
  • फिल्म सोसाइटीज को समर्थन

23.2 फिल्मोत्सवः राज्य द्वारा वर्ष में एक बार फिल्मोत्सव का आयोजन किया जायेगा। इन उत्सवों का उद्देश्य उच्च श्रेणी की राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय फिल्मों को जन-साधारण की आसान पहुँच में लाना है। ऐसा माना जाता है कि इससे स्वस्थ सिनेमा संस्कृति का विकास होगा तथा राज्य में फिल्म उद्योग के लिए एक व्यापक आधार तैयार होगा। इस उद्देश्य से राज्य, राष्ट्रीय फिल्मोत्सव निदेशालय से एक समझौता करेगा। उत्सव का आयोजन उद्योग, सूचना, पर्यटन, मनोरंजन कर तथा संस्कृति विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा। फिल्मोत्सव का आयोजन फिल्म बन्धु द्वारा किया जायेगा तथा इसका पर्यवेक्षण 'फिल्म बन्धु द्वारा किया जायेगा। इस अवसर को विशिष्ट पर्यटकीय अवसर के रूप में विकसित किया जायेगा।

23.3 पुरस्कार

23.3.1 राज्य सरकार द्वारा उच्च स्तरीय फिल्मों के निर्माण से जुड़े व्यक्तियों को सम्मानित  करने के लिए वार्षिक फिल्म पुरस्कार की स्थापना की जायेगी। फिल्म पुरस्कार हेतु दिनांक 01 जनवरी से 31 दिसम्बर के बीच निर्मित हिन्दी फिल्मों पर विचार किया जायेगा।

2. फिल्मों का चयन उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद द्वारा किया जायेगा।

3. सम्मान में निर्माता व निर्देशक दोनो को पृथक-पृथक रु0 2,51,000/- (रुपये दो लाख इक्वायन हजार) की धनराशि प्रदान की जायेगी।

23.3.2 इन पुरस्कारों तथा इसके वितरण समारोह को फिल्म बन्धु' द्वारा वित्त पोषित किया जायेगा।

23.4 फिल्म सोसाइटीजःफिल्म सोसाइटीज, फिल्म संस्कृति के विकास तथा सिने-दर्शकों का एक

विवेकशील तथा बुद्धिमान वर्ग सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा उच्च श्रेणी का राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय सिनेमा, जानकार लोगों द्वारा देखा जाता है, उन पर विचार-विमर्श किया जाता है तथा उनका विश्लेषण किया जाता है। फिल्म सोसाइटी आन्दोलन उत्तर प्रदश में कुछ स्थानों तक ही सीमित रहा है। उनकी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए फिल्म सोसाइटी आफ इंडिया से विधिक रूप से पंजीकृत गम्भीर एवं सक्रिय फिल्म सोसाइटीज को फिल्म बन्धु द्वारा 5000 रुपये का वार्षिक अनुदान दिया जायेगा। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम(एन.एफ.डी.सी.) तथा फिल्म सोसाइटी ऑफ इण्डिया से इस बात का आग्रह किया जायेगा, कि वे इन सोसाइटीज को अपनी गतिविधियों के विकास तथा उन्नयन हेतु विशेष पैकेज प्रदान करें।

24. फिल्म अनुदान ऐसी फिल्मों को कदापि नहीं दिया जायेगा, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य का किसी भी स्तर से गलत चित्रण किया गया हो अथवा छवि धूमिल की गयी हो। इसका परीक्षण स्क्रिप्ट स्तर पर ही सुनिश्चित किया जाएगा।

फिल्म सब्सिडी के लिए प्रार्थना पत्र का प्रारूप

 

 

 

 

 

 

 

 

स्त्रोत: उत्तर प्रदेश सरकार

3.0

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