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जनजातीय उप-योजना क्षेत्रों में आश्रम विद्यालयों की स्थापना की केन्द्रीय प्रायोजित योजना

इस पृष्ठ में जनजातीय उप-योजना क्षेत्रों में आश्रम विद्यालयों की स्थापना की केन्द्रीय प्रायोजित योजना की जानकारी है I

योजना का उद्देश्य

योजना का उद्देश्य पीटीजी सहित अनुसूचित जनजातियों के बीच शिक्षा को बढ़ावा देना है। आश्रम विद्यालय शिक्षा ग्रहण करने के अनुकूल वातावरण में आवासीय सुविधा के साथ शिक्षा प्रदान करते हैं। योजना 1990-91 से प्रचालन में है।

प्रमुख विशेषताएं

क) योजना जनजातीय उप-योजना राज्यों/संघ राज्य प्रशासनों में प्रचालित है।

ख)शिक्षा के प्राथमिक, मिडिल, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर के लिए आश्रम के निर्माण के साथ-साथ पीटीजी सहित अनुसूचित जनजाति के बालकों और बालिकाओं के लिए वर्तमान आश्रम विद्यालयों का उन्नयन।

ग)टीएसपी क्षेत्रों में बालिकाओं के लिए आश्रम विद्यालय अर्थात् विद्यालय भवन, छात्रावास, किचन और स्टॉफ क्वाटर्स के लिए 100% निधियन। इसके अतिरिक्त, समय-समय पर गृह मंत्रालय द्वारा चिह्नित नक्सल प्रभावित जिले (गृह मंत्रालय द्वारा विनिर्दिष्ट नक्सल प्रभावित जिलों की सूची संलग्न) के केवल टीएसपी क्षेत्रों में (यदि कोई हो) बालकों के लिए आश्रम विद्यालयों की स्थापना के लिए 100% निधियन। तथापि, टीएसपी राज्यों में बालकों के लिए अन्य सभी आश्रमों को 50:50 के आधार पर निधियन जारी रहेगा। संघ राज्यक्षेत्रों को 100% निधियन प्रदान किया जाएगा।

घ)50:50 आधार पर वित्तीय सहायता व्यय के अन्य अनावर्ती मदों अर्थात् उपकरणों की खरीद, फर्नीचर और सौंदर्गीकरण, छात्रावासों के निवासियों के उपयोग हेतु छोटे पुस्तकालय के लिए कुछ पुस्तकों की खरीद के लिए दी जाएगी।

निर्माण की अवधि

आश्रम विद्यालय केन्द्रीय सहायता की निर्मुक्ति की तिथि से 2 वर्षों की अवधि के भीतर पूर्ण किए जाएंगे। तथापि, वर्तमान आश्रम विद्यालयों के विस्तार के लिए निर्माण की अवधि 12 माह है।

संचालन की प्रक्रिया

राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन जनजातीय कार्य मंत्रालय को वार्षिक रूप से अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। राज्य सरकार के प्रस्ताव के साथ निम्निलिखित दस्तावेज होंगे-

1) राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन में स्थान के साथ सक्षम प्राधिकारी द्वारा पूर्णत: अनुमोदित आश्रम विद्यालय की योजना। प्रत्येक राज्य से अच्छे हवादार और आरामदायक रहने योग्य स्थान वाले भवनों के लिए आकर्षक डिजाइन तैयार करने की आशा है। ऐसे विद्यालयों में बच्चों को गर्व का अहसास होना चाहिए। रंग योजनाएं बालानुकूल होनी चाहिए। योजना में रसोई, सब्जियों के बगीचे और बाग (मोरिंगा, सहजन) , खट्टे फलों और पोषण संबंधी पेड़) के क्षेत्रों सहित संयोजन का नक्शा दर्शाया जाए।

राज्यों के नवीन एवं नीवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की योजनाओं का लाभ उठाते हुए विद्यालय में पूरी बचत अथवा नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

2) इस बात का प्रमाण-पत्र कि, राज्य बजट में योजना के लिए मैचिंग प्रावधान मौजूद है, जहां भी आवश्यक हो।

3) आश्रम विद्यालय के निर्माण के लिए संबंधित राज्य सरकार द्वारा भारमुक्त भूमि नि: शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

4)राज्य सरकार राज्य पीडब्ल्यूडी अथवा सीपीडब्लयूडी दरों की वर्तमान अनुसूचित दरों के आधार पर भवन लागत के वांछित हिस्से को वहन करेगी।

5)नए आश्रम विद्यालयों के स्थान तथा दाखिला नीति का निर्णय इस प्रकार किया जाना चाहिए कि अनुसूचित जनजाति की बालिकाओं, आदिम जनजातीय समूहों और प्रवासी अनुसूचित जनजातियों के बच्चों को प्राथमिकता दी जाए।

6)गत वर्षों के दौरान निर्मुक्त अनुदानों के संबंध में उपयोग प्रमाण-पत्र तथा वास्तविक प्रगति रिपोर्ट।

7)छात्रावास के कुछ कमरे/ब्लॉक अवरोधमुक्त किए जाएं और रैम्प आदि जैसी सुविधाएं अनुसूचित जनजाति के दिव्यांग विद्यार्थियों की सुविधा के लिए निर्माण के डिजाइन में शामिल की जानी चाहिए।

8) ऐसे मामलों में जहां कोई राज्य सरकार अपने बजट से वांछित हिस्सा प्रदान करने में असमर्थ है तो कोई एमपी/एमएलए अपनी एमपीएलएडीएस/एमएलएएलएडीएस निधि से राज्य का हिस्सा प्रदान कर सकते हैं।

9) उन राज्य सरकारों को प्राथमिकता दी जाएगी जो उचित मानदण्डों के अनुसार वार्षिक रख-रखाव व्यय के लिए प्रतिबद्ध है।

निगरानी तथा मूल्यांकन

1) कार्यान्वयकारी एजेंसी नियमित रूप से छात्रावासों के निर्माण की निकटता से निगरानी करेगी तथा छात्रावासों का | निर्माण पूरा होने तक जनजातीय कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली को वास्तविक तथा वित्तीय दोनों की तिमाही प्रगति रिपोटें प्रस्तुत करेगी।

2) प्रभावी निगरानी के उद्देश्य हेतु मंत्रालय परियोजनाओं के निरीक्षण के लिए स्वयं अथवा उपयुक्त एजेंसियों/प्राधिकरणों द्वारा किए जाने वाले क्षेत्र दौरे कर सकते हैं।

3)केन्द्रीय सरकार द्वारा योजना के मूल्यांकन/निगरानी तथा प्रशासन संबंधी कुल आवंटित निधियों के 28 का सीमा तक इस योजना के लिए प्रदान की गई निधियों से पूरा किया जाएगा।

अनुलग्नक

गृह मंत्रालय द्वारा पहचान किए गए नक्सल प्रभावित जिलों की सूची

राज्य

नक्सल प्रभावित जिलों की सूची

आंध्र प्रदेश

 

खम्मम

मध्य प्रदेश

बालाघाट

 

बिहार

 

अरवाल

औरंगावाद

गया

जमुई

जहानाबाद

रोहता

महाराष्ट्र

 

गढ़चिरौली

गोंदिया

 

छत्तीसगढ़

 

बस्तर

दंतेवाड़ा

कांकेर

राजनंदगांव

सुरगुजा

नारायणपुर

बीजापुर

ओडिशा

 

रायगढ़

देवगढ़

गजपति

मलकानगिरी

संबलपुर

झारखंड

 

बोकारो

चतरा

गढ़वा

गुमला

हजारीबाग

लातेहार

लोहरदगा

पूर्वी सिंहभूम

पलामू

पश्चिमी सिंहभूम

उत्तर प्रदेश

 

सोनभद्र

 

स्रोत: जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार

3.5

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