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दूरस्थ शिक्षा द्वारा उच्च शिक्षा का बेहतर विकल्प इग्नू

इस पृष्ठ में दूरस्थ शिक्षा द्वारा उच्च शिक्षा का बेहतर विकल्प इग्नू सन्दर्भ झारखण्ड की जानकारी है I

भूमिका

समाजशास्त्रियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था सामाजिक व्यवस्था की एक उपव्यवस्था है। अतः सामाजिक आर्थिक व्यवस्थाओं में परिवर्तन का प्रभाव शिक्षा व्यवस्था पर पड़ना अपरिहार्य है। अतः दूरस्थ शिक्षा व्यवस्था खासकर मुक्त शिक्षा व्यवस्था का प्रादुर्भाव के पीछे समाज में बदलते परिवेश व आवश्यकताएँ हैं। इन आवश्यकताओं में भूमंडलीकरण के कारण बदले प्रशिक्षण देने की जरूरत, कौशल विकास व शिक्षा क्षेत्र में तकनीकी का विकास रहा है। इससे भी अधिक अधिकांश विकसित व विकासशील देशों में एक विकल्प की आवश्यकता रही, जिसमें शिक्षार्थियों की माँग व पूर्ति के अंतर को कम किया जा सकें।

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय(इग्नू)

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना भी देश की बदलते जरूरतों व एक विकल्प के रूप में उच्च शिक्षा प्रदान करने की माँग की उपज के फलस्वरुप हुई। 1985 में इसके लिये जब संसदीय अधिनियम पारित हुआ तब उसका मकसद था कि उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने तथा तकनीकों द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना। मूल रूप में लोगों को अवसर प्रदान करना ताकि शिक्षा अर्जन में वंचन का सामना न करना पड़े। अतः मूलरूप में इग्नू का मकसद ''शिक्षा का प्रजातांत्रिकरण'' ही रहा है।

शिक्षार्थी केन्द्रित तथा तकनीकी व्यवस्था होना इसकी मुख्य  खासियत बनी और यही कारण है कि कुछ ही दशकों में इसने विश्व-स्तरीय दर्जा हासिल कर लिया है। इग्नू मात्र दो कार्यक्रमों मैनेजमेंट तथा दूरस्थ  शिक्षा में डिप्लोमा  से 1987 में शुरू कर आज लगभग 228 से अधिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर रही है। संप्रति करीब 3000 अध्ययन केन्द्रों के जाल के द्वारा 2.8 लाख लोगों को उच्च शिक्षा का लाभ पहुँचा रही है।

उत्कृष्टता इग्नू की खास पहचान बनी है जिसमें स्वनिर्मित अध्ययन सामग्री को गुणवत्ता के आधार पर 2013 में कॉमन वेल्थ ऑफ लर्निंग के द्वार एक्सीलेंस अवार्ड  मिला है। उसी तरह व्यापकता तथा इसकी गुणवत्ता के आधार पर इसे मेगा यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त है। इसकी क्षेत्रीय केन्द्र की संख्या  67 है तथा कई केन्द्र विदेशों में भी है।

इग्नू को प्रयोगधर्मिता तथा अनुसंधान के फलस्वरूप कई संख्या ओं से साकार प्रयास दर कई कार्यक्रम को अंजाम दिया है। कृषि विश्वविद्यालयों, फैशन अकादमी इत्यादि के सहयोग से कई संबंधित कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं।

इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र, देवघर, झारखण्ड

संथाल परगना क्षेत्र 2012 में शुरू हुआ जिसमें शुरु में संथाल परगना, बोकारो व धनबाद के केन्द्रों को इसके आधीन चलाया गया। इसकी शुरुआत होने से झारखण्ड में दो क्षेत्रीय केन्द्र हुए- राँची व देवघर।

क्षेत्रीय केन्द्र, देवघर की बात करें तो विगत चार वर्षों में इसने उतरोत्तर प्रगति की है। शिक्षार्थियों के पंजीकरण की बात करें तो 2012 में 7718 शिक्षार्थियों की संख्या  थी जो 2015 में 11556। प्रतिशत वृद्धि की बात करें तो जनवरी 2016 में पूर्व के वर्षों के जनवरी सत्र में करीब 54 % की वृद्धि हुई है।

अध्ययन केन्द्रों में सबसे ज्यादा नामांकित छात्र देवघर स्थित ए.एस. कॉलेज, देवघर रहा दूसरा स्थान बदलाव फाउडेशन केन्द्र, जामताड़ा रहा। सभी जिलों में इग्नू के अध्ययन केन्द्र स्थापित कर दिये गये। कार्यक्रम में स्नातक में सबसे ज्यादा योग रही है। 2015 में स्नातक स्तर के कार्यक्रम में 5486 तथा स्नातकोत्तर कार्यक्रम में 1545 एडमिशन हुए।

इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र देवघर के मीडिया कवरेज तथा प्रचार-प्रसार के बदौलत काफी सामाजिक रुप में वंचित वर्गों में जागरुकता फैली है, इसका परिचालन हमें आकड़ों से पता चलता है। पूरे नामांकन का करीब 65 % SC, ST, OBC वर्गों के छात्र हैं। लड़कियों का नामांकन भी बढ़ रही है। 2015 में यह प्रतिशत करीब 40 % रही। ग्रामीण प्रतिशत भी अच्छी स्थिति ब्यान करता है जहाँ करीब नामांकन छात्र ग्रामीण ही हैं।

वंचित वर्गों हेतु प्रावधान

कई पहलों के द्वारा भी वंचित वर्गों हेतु प्रावधान किये गए हैं। जैसे डाइरेक्ट ट्रांसफर स्कीम (डीबीटी स्कीम) की प्रावधान जिसमें केन्द्र द्वारा एस.सी./ एस.टी. छात्रों की नामांकन शुल्क की वापसी। उसी तरह दो विशेष अध्ययन केन्द्र चलाये जा रहे हैं जहाँ कैदियों को स्नातक की सुविधा प्रदान की गई है। यह केन्द्र देवघर तथा केन्द्रीय कारा, दुमका में भी उपलब्ध है।

क्षेत्रीय केन्द्र की भावी योजनाओं में नये केन्द्रों की स्थापना है जिसमें जिला के जहाँ ब्लॉक स्तर पर केन्द्र खोलना शामिल है। ऐसे क्षेत्रों को निश्चित कर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में केन्द्र खोलने की योजना बनायी गयी है। एम.बी.ए., एम.ए.(एजुकेशन), पोस्टग्रेजुएड डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, बैचलर्स इन लाइब्रेरी साइंस। साथ में कृषि विज्ञान केन्द्र के सहयोग से कृषि विज्ञान संबंधित रोजगारन्मुख कार्यक्रम चलाये जाने की भी योजना है। डेयरी विभाग के सहयोग से डिप्लोमा इन डेयरी टेक्नोलॉजी भी शुरु करने की योजना है।

साथ में कई केन्द्रों में जो कार्यक्रम अभी तक शुरु नहीं किये गये हैं उन्हें वहाँ शुरुआत की जायेगी। जैसे बी.सी.ए., बी.एस.डब्लू., बी.ए. दर्शन शास्त्र एम.ए.आर.डी. इत्यादि।

संप्रति इग्नू के जनवरी 2017 सत्र हेतु आवेदन आमंत्रित किये जा रहे हैं जिसमें स्नातक, स्नातकोत्तर व डिप्लोमा कार्यक्रमों में नामांकन की अंतिम तिथि संभवतः नवम्बर 2016 होने की संभावना है।

शिक्षार्थियों के सुविधा के लिये ऑनलाइन एडमिशन का भी प्रावधान है जिसमें वे जो इग्नू का आधिकारिक वेबसाइट है, के द्वारा एडमिशन ले सकते हैं। कृपया इस लिंक में जाएँ

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय(इग्नू)ऑनलाइन एडमिशन

 

आवेदन फार्म क्षेत्रीय केन्द्र, देवघर तथा सभी 12 अध्ययन केन्द्रों से प्राप्त किये जा सकते हैं।

 

लेखक: अरविन्द मनोज कुमार सिंह;क्षेत्रीय निदेशक (प्रभारी),इग्नू, क्षेत्रीय केन्द्र, जसीडिह, देवघर

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राजेंद्र jatav Dec 23, 2017 10:38 PM

यह शिक्षा उनके लाइट जिन्होंने अपनी पढाई अधूरी छोड़ दीthi. सरकर उनके लिए प्रावधान लाइ है . जिनकी नौकरी लग गई उन्हें प्रमोशन की जरुरत है वो सभी ये लाभ ले सकते हे.

Ravishankar Aug 18, 2017 02:46 PM

मुझे दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से औरवेध वैध का कोर्स करना है

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