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राइट टू न्यु एजुकेशन की मांग

इस लेख में नई शिक्षा के अधिकार की मांग को आज के परिपेक्ष्य में बतलाने के साथ वर्तमान समय में इसकी आवश्यकता को दर्शाने की कोशिश की गयी है |

भूमिका

वैसे देखा जाए तो लगता है कि राइट टू एजुकेशन भारत में एक नयी क्रांतिकारी कदम है और इसके माध्यम से पूरे भारत में हर बच्चे के लिये चौदह वर्षों तक की शिक्षा उसका अधिकार है। साथ ही न केवल एक बच्चा सरकारी विद्यालयों में अध्ययन की बात सोच सकता है लेकिन अगर अपने क्षेत्र में कोई गुणवत्ता वाले अंग्रेजी माध्यम के निजी विद्यालय में अध्ययन कीराईट तो न्यू एजुकेशन की मांग बात हो तो वह वहां भी अध्ययन की सोच सकता है। सरकार उस बच्चे के लिये फीस का प्रबंध कर सकती है साथ ही स्कूल प्रबंधन से उसके लिये रियायत की भी बातें रख सकती है। पच्चीस प्रतिशत सीट ऐसे बच्चों के लिये किसी विद्यालय में सीट सुरक्षित रखने का प्रावधान है। हालांकि निजी विद्यालयों ने शिक्षा के अधिकार के इस दूसरे पक्ष के बारे में इस बात को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी कि ऐसे बच्चों के आने से विद्यालय में पढ़ाई के स्तर में गिरावट आ सकती है और बच्चे धनी बच्चों की संगति में हीनता के शिकार हो सकते हैं। चूंकि उन्हें विद्यालय के संचालन में किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं प्राप्त होती है इसलिये ऐसे बोझ सरकार निजी विद्यालयों में नहीं डाल सकती है। कुल मिलाकर देखा जाए तो संपन्न निजी विद्यालयों में गरीब तबकों के बच्चों की संख्या का अनुपात बहुत कम है।

भारतीय संदर्भ

माना कि शिक्षा का अधिकार बच्चों के बीच शिक्षा के लिये एक बहुत बड़ा कदम है, भारतीय संदर्भ में इसे एक ऐसे कदम के रूप में भी देखा जा सकता है कि इसके माध्यम से भारत अपने देश में साक्षरता के प्रतिशत में सुधार की बात सोचता है। इक्कीसवीं सदी में भी भारत में 26 प्रतिशत लोग अशिक्षित हैं जो कि विश्व के 84 प्रतिशत से कम है। इसका सीधा अर्थ है कि देश में करीब 30 करोड़ भारतीय अब भी अशिक्षित हैं।  भारत अपने आर्थिक विकास और सैन्य उपलब्धियों के बारे लाख दावा क्यों न कर ले, दुनियां की निगाहों में वह अशिक्षा के कलंक को छिपा नहीं सकता। हां इसी बीच विभिन्न सरकारों ने विश्व बैंक संपोषित अनेक कार्यक्रमों के द्वारा ग्रामीण अशिक्षा को मिटाने का कार्यक्रम रखा है लेकिन इन कार्यक्रमों की गति बहुत कम है। अगर केरल राज्य को छोड़ दिया जाए तो देश के सभी प्रांतों में निरक्षरता का प्रतिशत काफी है। बीमारू राज्यों में जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, उडीसा, बंगाल आदि में निरक्षरों की संखया में कमी लाने के लिये अतिरिक्त प्रयास की जरूरत है। पूरी दुनियां में आज गुणवत्ता वाली शिक्षा की बातें हो रहीं हैं। लेकिन भारत आज भी साक्षरता अभियान से उलझा हुआ है। ध्यान रखने वाली बात है कि सारक्षरता का ताल्लुक सिर्फ व्यक्ति के नाम लिख पाने तक की क्षमता भर से है।

भारत में अंग्रेजों के जमाने से आधुनिक शिक्षा का प्रचलन हुआ। शिक्षा से अंग्रेजों का एक ही उद्देश्य  था कि उन्हें अपने राजपाठ को चलाने के लिये किरानी कर्मचारियों की भारतीय तादाद उपलब्ध हो। आगे चलकर यह शिक्षा गुणवत्ता वाली शिक्षा बनी जहां शिक्षा का स्तर इंग्लैंड से तय हुआ करता था। चूंकि भारत में उच्च वर्ग के लोगों के लिये ही शिक्षा संभव थी, शिक्षा की दो धाराओं का प्रादुर्भाव हुआ। एक अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा और दूसरी सरकारी शिक्षा जो लगभग दूसरे दर्जे की हुआ करती थी। जब सारक्षरता एक बड़ी समस्या के रूप में विकराल होती गयी तो ग्रामीणों को साक्षर मात्र बना देने की परिपाटी चली। ऐसी शिक्षा से एक ऐसे वर्ग को तैयार करने की बात हुई जो अभिजात वर्ग की सेवा में रहे। हाल के दिनों में गुणवत्ता वाली शिक्षा बेहद मंहगी हुई है और देश में होने वाले रोजगार के अवसर इन्हीं विद्यालयों और महाविद्यालयों से निकलने वाले छात्र छात्राओं के लिये उपलब्ध हैं। इस तरह, आज भारत में शिक्षा तीन धाराओं में बंटी है; पहली अंग्रेजी शिक्षा, दूसरी हिन्दी या अन्य राज की भाषाओँ  में शिक्षा और तीसरी साक्षरता बढ़ाने को केन्द्र में रखी शिक्षा । तीनों ही स्तर की शिक्षा भारतीय समाज को अलग-अलग वर्गों में बांटती हैं।

वर्तमान समय की मांग

आज के समय में हम देश में उपलब्ध मानव पूंजी के प्रति संवेदनशील बने हैं। चीन जैसे देशों में मानव पूंजी के निर्माण में तीव्र गति से प्रगति की है। शिक्षा प्राप्त करने वाले सभी युवा उच्च शिक्षा के लिये मानकों को तय नहीं कर पाते इसलिये उनके लिये अन्य विद्याओं में अपने को पारंगत करने का अवसर होता है। तकनीकी शिक्षा इसी नीति का एक भाग है। सरकारें अपने देश के युवाओं के लिये ऐसे अवसर उपलब्ध कराते हैं और हुनर की पूंजी देश के लिये तय करते हैं। तकनीकी शिक्षा  के लिये प्रारंभिक शिक्षा जरूरी है। जिस तर्ज पर साक्षरता मिशन पर पैसा और समय खर्च किया जा रहा है उस हिसाब से अगर तकनीकी शिक्षा पर यदि देश का ध्यान हो तो रोजगार सम्मत विकास के लिये नये रास्ते खुल सकते हैं। तकनीकी शिक्षा को कभी-कभी टेक्नोलोजी और मशीनरी से जोड़ कर देखने की कोशिश की जाती है। ग्रामीण संदर्भ के लिये, मुर्गी पालन, मछली पालन, नयी किस्मों के पेड़ों की रोपाई आदि पुरानी परंपरा की लीक से हटकर नयी तकनीकी का प्रयोग करते हुए देखा जा रहा है। आज के समय में एक पपीते के पेड़ को रोपने के बाद भी छः महीनों तक विशेष देखभाल और खाद-पानी देने की आवश्यकता हो गयी है। तभी नयी किस्म के पौधे उचित फल दे पाते हैं। ऐसी शिक्षा को ग्रामीण युवा आसानी से देखता और प्रयोग में लाने की सोचता है। दुर्भाग्य से ऐसी शिक्षा में उतना बल नहीं दिया गया है जो इसके हिस्से की है। नयी बातों को सीखने का रूझान युवाओं में अक्सर देखा जाता है। इन विद्याओं को शिक्षा का अंग अभी तक शायद नहीं माना गया है। बात साफ है कि ग्रामीण परिवेश की शिक्षा के लिये अलग किस्म के टीचरों की जरूरत है। अपने परिवेश  के संसाधनों के समुचित उपयोग की शिक्षा दे सकने वाले ही असल में गुरू हो सकते हैं अन्यथा वे मात्र ग्रामीणों को साक्षर बनाने तक ही सीमित रह जायेंगे जिसका प्रभाव भी सीमित होता है। इस संदर्भ में ग्रामीण स्कूलों की परिकल्पना भी दूसरे तरीके से करने की जरूरत होगी। आज भारत के छः लाख से अधिक गांव किसी न किसी विकास संस्थाओं से जुड़े हैं। हो सकता हो कि इन संस्थाओं में क्षेत्रीय ज्ञान और तकनीकी हुनर एक समान उपलब्ध न हो। पर कहीं न कहीं स्थानीय संसाधनों के प्रयोग के साथ विकास की अवधारणा अवश्य होती है। इन्हीं संस्थाओं को ग्रामीण शिक्षा के साथ जोड़ने की पहल होनी चाहिये।

लेखक : डॉ.फा.रंजीत टोप्पो, ये.स.

3.0

Rajendra jatav Dec 23, 2017 10:50 PM

राईट तो एजुकेशन बहुत से गरीब बच्चे पुरे भारत भर में हैं। जैसा की सरकर ने २५ % आरक्षण प्राइवेट स्कूल में दिया उनके पास इतने पैसे नही की वे ड्रेस और कॉपी किताब का खर्च उठा सके इसलिए में कहना चाहता हूँ की नर्सरी से १२ तक जो बिलकुल ७५% गरीब है उनको मुफ़्त शिक्षा मुफ़्त कित्ताब और मुफ़्त ड्रेस मिलनी चाहिए शासन हर महीने विधार्थी को १५०० रुपये देने का प्रावधान लागू करना चाहिए।

k s Solanki Apr 04, 2017 10:38 AM

क्पया आर. टी .ई. के अंतर्गत किस प्रकार से ऐडमिसन होता है कोई नियम या सते' लागू है तो , आप सभी नियम एवं सते बताये धन्यवाद

राहुल KUSHWAHA Sep 27, 2016 09:47 AM

मई राहुल कुशवाहा १८ साल का मई आप से निवेदन करता हु की गाओ में भी कंप्यूटर एजुकेशन की सहायता दे गाओ के विX्Xार्थी भी कंप्यूटर की जानकारी रखे आने वाले कल में कंप्यूटर की ज्यादा आवश्यकता हूँ गई मई आपसे सविनय निवेदन करता हूँ मुझे भी गाओ में कंप्यूटर की फ्री एजुकेशन का करके करने की अनुमति देने का कास्ट करे उससे गाओ का भी वकास बढ़ेगा मेरे गाओ मी दूर दूर तक कही कंप्यूटर एजुकेशन सीखेने की कोचिंग नहीं है कृपया मेरे और मेरे गाओ वासियो की सहायता करे और मुझे भी यह योजना को खोलने का सहायता करे धनयवाद

विपिन kumar Jan 28, 2015 02:05 PM

सर मुझे विकास सस्थाओ के नाम बताओ जो विलेज में विकास को बढ़ा रही है प्लीज सर मुझे बताओ मेरी ईमेल.ईद द्विXिXXX@जीXेल.कॉX है प्लीज मुझे मेल के द्वारा बताओ

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