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शिक्षा

प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक शिक्षा जीवन का आधार है जो प्रत्येक नागरिक के विकास में सहायक है और उसके भविष्य का निर्माण करती है. इसका सीधा ताल्लुक देश के कल के निर्माण से है, जिसमे इन्ही नौनिहालों का योगदान रहता है. अतः भारत ने आपने बच्चों को संपूर्ण साक्षर करने का बीड़ा उठाया है और यह लेख उन्ही बड़ते हुए क़दमों को विस्तृत कर बताता है।

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    शिक्षा एक मौलिक मानवाधिकार है

    चौदह वर्ष की आयु तक के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान संवैधानिक प्रावधान में से एक है। पिछले एक दशक में भारत ने साक्षरता की दर में उल्लेखनीय प्रगति की और हाल ही में नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के कार्यान्वयन इसमें महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।

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    शिक्षा में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी

    शिक्षा के क्षेत्र में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है और विशेष रूप से शैक्षिक गतिविधियों में को सशक्त बनाने की प्रक्रिया में भी प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण योगदान है। आईसीटी संभावनाओं, शैक्षिक गतिविधियों को एकीकृत करने और सीखने के माहौल को बढ़ाने के लिए अवसर प्रदान करता है।

प्राथमिक शिक्षा

प्राथमिक शिक्षा ऐसा आधार है जिसपर देश तथा इसके प्रत्येक नागरिक का विकास निर्भर करता है। हाल के वर्षों में भारत ने प्राथमिक शिक्षा में नामांकन, छात्रों की संख्या बरकरार रखने, उनकी नियमित उपस्थिति दर और साक्षरता के प्रसार के संदर्भ में काफी प्रगति की है। जहाँ भारत की उन्नत शिक्षा पद्धति को भारत देश के आर्थिक विकास का मुख्य योगदानकर्ता तत्व माना जाता है, वहीं भारत में आधारभूत शिक्षा की गुणवत्ता फिलहाल एक चिंता का विषय है।

भारत में 14 साल की उम्र तक के सभी बच्चों को निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना संवैधानिक प्रतिबद्धता है। देश के संसद ने वर्ष 2009 में ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम' पारित किया था जिसके द्वारा 6 से 14 साल के सभी बच्चों के लिए शिक्षा एक मौलिक अधिकार हो गई थी। हालांकि देश में अभी भी आधारभूत शिक्षा को सार्वभौम नहीं बनाया जा सका है। इसका अर्थ है बच्चों का स्कूलों में सौ फीसदी नामांकन और स्कूलिंग सुविधाओं से लैस हर घर में उनकी संख्या को बरकरार रखना। इसी कमी को पूरा करने हेतु सरकार ने वर्ष 2001 में सर्व शिक्षा अभियान योजना की शुरुआत की थी, जो अपनी तरह की दुनिया में सबसे बड़ी योजना थी।

सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में सूचना व संचार प्रौद्योगिकी शिक्षा क्षेत्र में वंचित और संपन्न समुदायों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, के बीच की दूरी पाटने का कार्य कर रहा है। भारत विकास प्रवेशद्वार ने प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में भारत में मौलिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण हेतु प्रचुर सामग्रियों को उपलब्ध कराकर छात्रों तथा शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने की पहल की है।

बाल अधिकार

बाल अधिकार आज के समय की सबसे बड़ी और उभरती हुई जरुरत है, जिसके बारे में लोगों में जानकारी का अभाव है। इस भाग में ऐसे कई बाल अधिकारों पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रण का उद्देश्य बच्चों के बाल अधिकारों का हनन होने से रोकना और उनके अधिकार सुरक्षित करना है।

नीतियां और योजनाएं

6 से 14 साल की उम्र के बीच के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है। इस 86 वें संविधान संशोधन अधिनियम के अनुच्छेद 21 ए जोड़ा गया और इसे कार्यान्वित करने के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की जानकारी इस भाग में दी गई है।

बाल जगत

मल्टीमीडिया सामग्री के विभिन्न भाग विज्ञान खंड आदि रचनात्मक सोच और सीखने की प्रक्रिया में बच्चों में सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं। इसी तरह के अन्य उदाहरणों को इस भाग में प्रस्तुत किया गया  है।

शिक्षक मंच

शिक्षण और अधिगम प्रक्रिया की अनेक महत्वपूर्ण बातें शिक्षार्थी जीवन में इस प्रक्रिया की उपयोगिता सिद्ध करती हैं। विभिन्न कौशल के साथ शिक्षक की विद्यार्थी के व्यवहार और सीखने के अनुभव के साथ समग्र विकास में किस तरह भूमिका  होती है- इसकी संक्षिप्त जानकारी यह भाग देता है।

ऑनलाइन मूल्यांकन

यह भाग ऑनलाइन मूल्यांकन के अंतर्गत वेब संसाधनों और स्त्रोत की सहायता से गणित,विज्ञान,भूगोग की स्वमूल्यांकन प्रक्रिया को दर्शाते हुए राज्य,उनकी राजधानियों और भारत के नदियों के नाम और उनकी विशेषताओं के बारे में जानने का अवसर देता है।

शिक्षा की ओर प्रवृत करने की पहल

इस भाग में बहुप्रतिभा सिद्धांत की व्याख्या करते हुये बुद्धि के विभिन्न प्रकार (शाब्दिक,तार्किक आदि) के बारे में गार्नर के मनोवैज्ञानिक सिद्धांत को प्रस्तुत किया गया है। यह भाग बताता है कि प्रत्येक व्यक्ति की सीखने की शैली,शिक्षा में इसके उपयोग के साथ स्कूल में बहु-प्रतिभा सिद्धान्त अपनाने के अनेक लाभ हैं।

कैरियर मार्गदर्शन

कैरियर में मार्गदर्शन से भविष्य को बेहतर तरीके से आकार देने में मदद मिलती है। यह भाग पाठकों को उपलब्ध विभिन्न अध्ययन और 10 वीं कक्षा, स्नातक के बाद मिलने वाले रोजगार के अवसरों की जानकारी के साथ इससे जुड़ीं अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों को जानने का अवसर देता है।

कंप्यूटर शिक्षा

इस भाग के विभिन्न विषय आपकी सूचना और प्रौद्योगिकी की जानकारी में इज़ाफा करते हुए उसके माध्यम से क्षमता निर्माण में उसके द्वारा होने वाले महत्वपूर्ण योगदान की जानकारी देते हैं।

संसाधन लिंक

यह भाग शिक्षा क्षेत्र में उपयोगी सरकारी,वैश्विक संसाधन,प्रशिक्षण एवं आदान-प्रदान योग्य संसाधन,बाल अधिकार व प्रचार संसाधन आदि की जानकारी देते हुए और शिक्षा समाचार स्त्रोत की उपयोगिता बताते हुए इस क्षेत्र में कार्यरत अंतर्राष्ट्रीय अभिकरणों को भी जानने का अवसर देता है।

चर्चा मंच

शिक्षा का चर्चा मंच शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर आपको अपने विचारों को प्रस्तुत करने के साथ अन्यों के साथ अपने विचारों और सूचनाओं को आदान-प्रदान करने का अवसर भी देता है।


रवि कुमार मीणा Aug 14, 2018 10:07 AM

मुझे शिक्षा के लिए पैसा नहीं ह

Ankush sharma Aug 13, 2018 03:40 PM

My new account when my passbook receive date

Dhirender Aug 12, 2018 05:55 PM

नमस्ते क्या सबकुछ फ्री में देना इतना ज्यादा जरूरी है कि बाद में उसकी कोई अहमियत ही ना रह जाए फ्री में दीजिए साथ ही सरकारी स्कूलों में कुछ ऐसी व्यवस्था भी कीजिए कि जो प्राइवेट स्कूल में मैं अपने बच्चे की फीस अगर 5000 देता हूं तो सरकारी स्कूल मुझसे ₹2000 महीना ले ले और मेरे बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराएं सब कुछ फ्री में देने का नतीजा यह निकलता है कि कर्मचारी 50000 से ₹100000 माहवार की तनख्वाह पाते हैं और उन कर्XचारिXों पर ही सारा बोझ बढ़ जाता है जिससे कि वह टाइम से किसी भी जगह पर अपना समय नहीं दे पाते और सरकार के पास पैसा नहीं होता उन्हें देने के लिए और जो लोग टैक्स चुकाते हैं सारा पैसा इसी में बर्बाद हो जाता है कुछ और विकास का काम होता ही नहीं सरकारें सिर्फ वोट बैंक और कैसे आएगा हमारे पास फ्री में देती जाती हैं और शासन के अंतर्गत रहने वाले लोगों को आत्XXिर्Xर बनाने का कोई काम ही नहीं कर पाती पहले सबको फ्री में पढ़ाते हैं उसके बाद जब वह पहले तो पढ़ ही नहीं पाते किसी तरीके से पढ़ भी लिया तो फिर उनके पास रोजगार नहीं होता क्योंकि टेक्स्ट से आया हुआ सारा पैसा तो सब कुछ मुफ्त में देने में लुटा देते हैं

AJEET SINGH Aug 11, 2018 01:52 PM

Sir I am student of UPSC ( civil service) .I am studying in delhi coaching in dirasti the vision .I pay 1lakc 7 thousand rupees .in coaching study very poor so I am not satisfied the coaching .I request the coaching returning my fee .but coaching coaching is not returning my fee . Plz sir help me My email address XXXXX@gmail.com

Ramesh Aug 10, 2018 09:37 PM

आधार कार्ड खो जाने की प्रॉब्लम

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