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मृतक दाता संबंधित प्रत्यारोपण

इस लेख में मृतक दाता संबंधित प्रत्यारोपण से सम्बंधित जानकारी दी गयी है|

शव / मृत शरीर क्या है?

ऑक्‍सफोर्ड डिक्‍शनरी के अनुसार ''मृत'' को मृत मानव शरीर के रूप में परिभाषित किया गया है। ''मृत'' शब्‍द को चिकित्‍सा की दृष्टि से विच्‍छेदन और अध्‍ययन में उपयोग किया जाता है। अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में, ''मृत'' का अर्थ है धड़कते हुए हृदय के साथ जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया मस्तिष्‍क मृत शरीर।

मृतक दाता अंग दान क्या है?

एक व्यक्ति ब्रेन स्टेम मौत के बाद कई अंग और ऊतक दान कर सकता है। उसके अंग किसी और व्‍यक्ति में जीवित बने रहते हैं।

एक मृतक दाता कौन से अंग और ऊतक दान कर सकता है?

यदि विभिन्न अंग और ऊतक चिकित्सकीय रूप से फिट स्थिति में हैं, तो निम्न अंगों और ऊतकों का दान किया जा सकता है:

 

अंग

ऊतक

दोनों गुर्दे

 

दो कॉर्निया

 

यकृत

 

त्वचा

 

हृदय

 

हृदय वाल्व

 

दो फेफड़े

 

कार्टिलेज/ उपास्थि / स्नायुबंधन

 

आंत

 

हड्डियां / कण्डरा

 

अग्न्याशय

 

वेसल्स

 

 

ब्रेन स्टेम मृत्यु क्या है?

ब्रेन स्टेम मौत के कारण अपरिवर्तनीय क्षति के लिए ब्रेन स्टेम के कार्य की समाप्ति है। यह एक अपरिवर्तनीय स्थिति है और इसमें व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। इसे भारत में मस्तिष्क मृत्यु भी कहा जाता है।एक ब्रेन स्टेम से मृत व्यक्ति अपने आप साँस नहीं ले सकता है; हालांकि हृदय में एक इनबिल्ट तंत्र होता है जिससे यह लंबे समय से ऑक्सीजन और रक्त की आपूर्ति होने तक पंप करता है। एक वेंटीलेटर ब्रेन स्टेम मृत व्यक्तियों के फेफड़ों में हवा में डालना जारी रखता है, उनके हृदय में ऑक्सीजन युक्त रक्त प्राप्त करना जारी रहता है और उनके रक्तचाप को बनाए रखने के लिए दवा दी जा सकती है। हृदय ब्रेन स्टेम की मौत के बाद एक समय अवधि तक धड़कना जारी रहेगा - इसका अर्थ यह नहीं है कि यह व्यक्ति जीवित है, या इसके दोबारा जीवित हो जाने का कोई मौका है।

ब्रेन स्टेम मौत की घो‍षणा स्‍वीकृत चिकित्‍सा मानकों के साथ की जाती है। इस पैरामीटर में तीन क्लिनिकल प्राप्तियों पर बल दिया जाता है जो ब्रेन स्टेम सहित पूरे मस्तिष्‍क के सभी कार्यों के अपरिवर्तनीय रूप से समाप्‍त हो जाने के लिए अनिवार्य है : कोमा (बेहोशी) एक ज्ञात कारण के साथ, मस्तिष्क सजगता का अभाव, और एपनिया (सहज साँस लेने की अनुपस्थिति) है। इन जांचों को चिकित्‍सा विशेषज्ञों के दल द्वारा कम से कम 6 – 12 घण्‍टों के अंतर पर दो बार किया जाता है। ब्रेन स्टेम मौत को THOA 1994 के बाद से स्वीकार कर लिया गया है।

क्‍या ब्रेन स्टेम मृत्यु को कानूनी तौर पर मौत के रूप में स्वीकार किया जाता है?

हां, THOA 1994 के अनुसार ब्रेन स्टेम मौत को कानूनी तौर पर मौत के रूप में स्वीकार किया जाता है।

ब्रेन स्टेम मृत्यु कौन प्रमाणित करेगा?

टीएचओए बोर्ड के अनुसार निम्नलिखित चिकित्सा विशेषज्ञ मिलकर ब्रेन स्टेम मौत को प्रमाणित करेंगे :

1. अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर (चिकित्सा अधीक्षक)।

2. डॉक्टर को उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा नियुक्त डॉक्टरों के एक पैनल से नामांकित किया जाता है।

3. न्यूरोलॉजिस्ट / न्यूरोसर्जन / इन्टेंसिविस्ट उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा नियुक्त एक पैनल से नामित किया है।

4. रोगी का इलाज करने वाला डॉक्‍टर। चार डॉक्टरों का पैनल मस्तिष्क मृत्यु प्रमाणित करने के लिए एक साथ परीक्षण करता है।

ब्रेन स्टेम मौत के बारे में परिवार को कौन बताएगा ?

डॉक्‍टर (इन्टेंसिविस्ट / न्यूरोलॉजिस्ट / न्यूरोसर्जन) जो रोगी का इलाज करते हैं, वे ब्रेन स्‍टेम मौत के बारे में परिवार को समझाएंगे।

यदि परिवार संभावित दाता के अंगों को दान करने के लिए तैयार हैं तो वे मृत मस्तिष्क स्टेम के संदर्भ में अधिक जानकारी पाने के लिए कैसे आगे बढ़ सकते हैं?

प्रत्यारोपण समन्वयक या आईसीयू के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से संपर्क कर सकते हैं।

मृतक अंग दान में समय देरी के क्या कारण हैं?

मस्तिष्‍क की मृत्‍यु की पुष्टि 6 घण्‍टे के अंतर पर दो बार किए गए परीक्षण से होती है। जब अंगदान के लिए एक बार सहमति प्राप्‍त हो जाती है तो अंग प्राप्ति की प्रक्रिया के समन्‍वय में लगता है।

मृत दाता से अंग प्राप्ति में कई अस्‍पताल शामिल होते हैं और प्रत्‍यारोपण दल यह सुनिश्चित करता है कि दान किए गए अंग ग्राही के साथ अधिकतम संभव तरीके से मिलान वाले हों। यदि यह मेडिको लीगल मामला है तो पोस्‍ट मॉर्टम किया जाता है और इसमें पुलिस तथा फोरेंसिक मेडिसिन विभाग शामिल होते हैं।

एक मृतक दाता द्वारा जल्दी से अंग दान, प्रत्यारोपित कैसे किया जाना चाहिए?

स्वस्थ अंग को जल्द से जल्द प्रत्यारोपित किया जाना चाहिए। विभिन्‍न अंगों को अलग अलग समय के अंदर प्रत्‍यारोपित किया जा सकता है, जो इस प्रकार हैं :

हृदय

 

4-6 घंटे

 

फेफड़े

 

4-8 घंटे

 

यकृत

 

6-10 घंटे

 

यकृत

 

12-15 घंटे

 

अग्न्याशय

 

12-24 घंटे

 

गुर्दे

 

 

24-48 घंटे

 

 

मेरा अंग कौन प्राप्त करेगा?

आपके जीवित अंगों का प्रत्‍यारोपण उन व्‍यक्तियों में किया जाएगा जिन्‍हें इसकी तत्‍काल बहुत अधिक जरूतर है। जीवन का उपहार (अंग) ग्राही के साथ मिलान करने के बाद चिकित्‍सीय उपयुक्‍तता के आधार पर, प्रत्‍यारोपण की तात्‍कालिकता, प्रतीक्षा सूची की अवधि और भौगोलिक स्‍थान पर निर्भर करता है। NOTTO तथा इसकी राज्‍य इकाइयां (ROTTO एण्‍ड SOTTO) हर समय हर दिन पूरे वर्ष कार्य करेंगी और पूरे देश को कवर करेंगी। इसके ऊतकों का मिलान बहुत कम होता है, उदाहरण के लिए ऊतक का साइज और प्रकार, अन्‍यथा यह प्रत्‍यारोपण की जरूरत वाले प्रत्‍येक रोगी के लिए सहजता से उपलब्‍ध होता है।

ब्रेन स्टेम मृत्यु के बाद अंग दान की सहमति कौन दे सकता है?

एक व्‍यक्ति जिसके पास कानूनी तौर पर मृत व्‍यक्ति की जिम्‍मेदारी है, वह सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर कर सकता है। आम तौर पर यह माता पिता, पति या पत्नी, बेटे / बेटी या भाई / बहन द्वारा किया जाता है।सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर से परिवार यह कहता है कि उन्‍हें अपने प्रिय जन के शरीर से अंगों को निकालने पर कोई आपत्ति नहीं है। यह एक कानूनी दस्‍तावेज है। इस पत्र को अस्‍पताल में रखा जाता है।

यदि मेरे परिवार ने शव अंग दान करने से मना कर दिया, तो मेरा इलाज प्रभावित होगा?

तो उपचार दैनिक स्थिति के अनुसार ही किया जाएगा। अंग दान की प्रक्रिया को आपके उपयुक्‍त इलाज के साथ कभी नहीं जोड़ा जाता है। ये दो अलग अलग इकाइयां है। एक दल दान के लिए पूरी तरह अलग से कार्य करता है। इसके साथ प्रत्‍यारोपण ऑपरेशन में शामिल डॉक्‍टरों को कभी भी संभावित दाता के परिवार की दान प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता है।

क्‍या मैं यह भरोसा कर सकता हूं कि यदि मैं एक संभावित अंग दाता के रूप में पंजीकृत हूं, तब भी मेरा जीवन बचाने की कोशिश की जाएगी?

हां, यह स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवसायिक का कर्तव्‍य है कि वह रोगी के जीवन को बचाए। सभी प्रयासों के बावजूद यदि रोगी की मौत हो जाती है तो उसके अंग और ऊतक दान पर विचार किया जा सकता है तथा पुन: प्राप्ति और प्रत्‍यारोपण विशेषज्ञों के पूरी तरह अलग अलग दल इसके लिए कार्य करेंगे।

यदि मेरे पास एक दाता कार्ड है तो तो मेरा अंग मेरे परिवार के पूछे बिना ले जाया जाएगा?

नहीं, यदि आपके पास दाता कार्ड है तब भी आपके परिवार के नजदीकी सदस्‍यों और घनिष्‍ठ संबंधियों से अंगों और ऊतकों के दान के लिए पूछा जाएगा। मृत शरीर के विषय में कानूनी तौर पर इससे संबंध रखने वाले व्‍यक्तियों की सहमति अनिवार्य है, इसके बिना दान नहीं कराया जा सकता है। यदि वे इसके लिए मना कर देते हैं तो अंग दान नहीं किया जाएगा।

क्‍या संभव है मैं यह इच्छा व्यक्त कर सकता हूं कि मेरे अंगों का दान कुछ लोगों के लिए है और कुछ के लिए नहीं है?

नहीं। किसी भी अंग और ऊतक को तब तक स्‍वीकार नहीं किया जा सकता जब तक इन्‍हें स्‍वतंत्र रूप से दान नहीं दिया जाता। इसमें ऐसी कोई परिस्थिति नहीं है कि इन्‍हें संभावित ग्राहियों की शर्तों के अनुसार स्‍वीकार किया जाए। आप खास तौर पर अंग और / या ऊतक के विशिष्‍ट रूप से दान की इच्‍छा होने पर इसे व्‍यक्‍त कर सकते हैं, जिन्‍हें आप दान देना चाहते हैं।

अंग / ऊतक दान के लिए मेरे परिवार के लिए कोई प्रभार है?

नहीं। संभावित अंग दाता के परिवार के लिए कोई अतिरिक्‍त प्रभार नहीं होता है। संभावित दाता को चिकित्‍सा की दृष्टि से दान होने के समय तक आईसीयू में रखने की जरूरत होती है। जब परिवार अंग और ऊतक दान के लिए सहमत हो जाता है तो इसके सभी प्रभार इलाज करने वाले अस्‍पताल द्वारा वहन किए जाते हैं और दाता परिवार को कोई खर्च नहीं करना होता है।

अंग / ऊतक निकालने से दाह संस्कार / दफन करने की व्यवस्था प्रभावित होती या शरीर विरूपित हो जाता है?

नहीं। अंग या ऊतक निकालने से पारंपरिक दाह संस्‍कार या दफनाने की व्‍यवस्‍था में कोई बाधा नहीं आती है। शरीर की बनावट में कोई बदलाव नहीं होता है। एक अत्‍यंत कुशल सर्जरी प्रत्‍यारोपण दल अंगों और ऊतकों को निकालता है, जिन्‍हें अन्‍य रोगियों में प्रत्‍यारोपित किया जा सकता है। सर्जन शरीर को सावधानी पूर्वक सिल देते हैं, अत: कोई विकृति नहीं होती है। शरीर को मृत्‍यु और अंतिम संस्‍कार के लिए ले जाया जा सकता है और इसमें कोई विलंब नहीं होता।

घर में, मृत्यु के बाद अंगों को निकाला जा सकता है?

नहीं। इसे केवल व्‍यक्ति के मस्तिष्‍क की मृत्‍यु अस्‍पताल में होने पर घोषित किया जाता है और उसे वेंटिलेटर तथा अन्‍य जीवन सहायक प्रणालियों पर तुरंत रख दिया जाता है। घर पर मृत्‍यु के बाद केवल आंखों और कुछ ऊतकों को ही निकाला जा सकता है।

यदि मैंने अंग दान करने का वादा किया था, लेकिन मेरे परिवार ने मना कर दिया तो क्या होगा?

इन अधिकांश स्थितियों में, परिवार अंग का दान करने के लिए सहमत हो जाते हैं, यदि उन्‍हें पता होता है कि यह उनके प्रिय जन की इच्‍छा थी। यदि मरने वाले व्‍यक्ति के परिवार या इनके घनिष्‍ठ संबंधी को अंग दान देने से आपत्ति है और मृत व्‍यक्ति की ओर से किसी रिश्‍तेदार, नजदीकी दोस्‍त या क्लिनिकल कर्मचारी को इसकी अनुमति विशेष रूप से दी गई हो या उसके पास दाता कार्ड हो या उसने NOTTO वेबसाइट पर अपनी इच्‍छा दर्ज कराई हो, तो स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल व्‍यावसायिक संवेदनशील तरीके से परिवार के लोगों से इसकी चर्चा करेगा। उन्‍हें मृत व्‍यक्ति की इच्‍छा को स्‍वीकार करने का प्रोत्‍साहन दिया जाएगा। किंतु यदि फिर भी परिवार को आपत्ति है तो दान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी और दान नहीं होगा।

क्‍या हृदय की मौत के बाद दाता या दाता के हृदय की धड़कन के बीच अंगों में अंतर होता है?

हां, हृदय धड़कने वाले दाता का अर्थ है कि रोगी की मस्तिष्‍क मृत्‍यु घोषित की गई है और उसके अंगों को तब निकाला जा सकता है जब सहायक युक्तियों के साथ उसका हृदय धड़क रहा है। धड़कते हुए हृदय से अंगों को रक्‍त की आपूर्ति जारी रखी जाती है और अंगों में रक्‍त की कम आपूर्ति से कोई नुकसान नहीं होता है। हृदय की मृत्‍यु के बाद दान के मामले में, जब हृदय ने धड़कना बंद कर दिया है और अंगों में रक्‍त की आपूर्ति नहीं होती है। इस कारण हृदय की मृत्‍यु के बाद होने वाले दान तुरंत किए जाने चाहिए, क्‍योंकि रक्‍त की आपूर्ति के बिना एक निश्चित समय अवधि के बाद अंगों का इस्‍तेमाल करना संभव नहीं होगा।

एक रोगी को दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु होने की तुलना में एक मस्तिष्क मृत रोगी के अंगों को प्रत्यारोपण के लिए इस्तेमाल क्यों?

ठोस अंग दान (हृदय, फेफड़े, यकृत, अग्न्याशय, गुर्दे) के लिए इन अंगों में निरंतर रक्‍त का परिसंचरण बनाए रखने की जरूतर होती है जब तक इन्‍हें निकाल नहीं जाता। यह मस्तिष्‍क मृत्‍यु के मामले में संभव है जहां इन अंगों को कुछ समय तक सहायता देकर कार्य करने की स्थिति में रखा जा सकता है।

जबकि हृदय की मृत्‍यु के बाद भी अंग निकाले जा सकते हैं, बशर्ते समय का अंतराल कम से कम हो।

 

स्त्रोत: राष्ट्रीय मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन

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नरेंद्र पाटीदार Sep 05, 2017 12:11 PM

में अपनी देहदान अपनी संतान को प्रेरणा देने के करूँगा में यह संकल्प लेता हूँ

संगीता गौड़ May 16, 2017 10:32 PM

मै अपने जन्मदिन 18 मई को अपना देह दान करके कई जिंदगीयो को बचाने का संकल्प लें रही हु

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