सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

होम (घर) / स्वास्थ्य / वृद्धजनों का स्वास्थ्य / स्वस्थ रहते हुए वृद्ध होना
शेयर

स्वस्थ रहते हुए वृद्ध होना

इस भाग में वृद्धजन किस प्रकार स्वस्थ रह सकतें है और जीवन का आनंद उठा सकते है, जानकारी दी गयी है|

परिचय

“हैल्दी एजिंग” या स्वस्थ रहते हुए वृद्ध होने की आवधारण को पहली बार विश्व स्वास्थ्य संगठन ने परिभाषित किया था | यूनाईटेड नेशंस वर्ल्ड असेंबली ऑन एजिंग  ने 1982 में वृद्ध होने की प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्रसंघ की कार्य योजना का मसौदा तैयार किया था | उसके अनुसार, वृद्ध होना एक जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है | यह योजना उम्रदराज होते हुए लोगों के स्वास्थ्य पर फोकस करती है | इसमें रोगों से रक्षा और असमर्थता की विशिष्ट स्थितियों के अलावा, अधिकतम स्वास्थ्य की प्राप्ति, दोनों ही बातें शामिल हैं | इसमें उम्रदराज होने के प्रति व्यक्ति, समुदाय सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के सहयोग पर आधारित पद्धति अपने गई है, जिसका लक्ष्य वृद्ध लोगों के शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य को बरकरार रखना व उसमें सुधार लाना है | रोगों का जल्दी निदान करने, जीवन भर बनी रहनी वाली अक्षमताओं और दीर्घकालिक रोगों से पैदा होने वाली समस्याओं को कम करने वालों अक्षमताओं को रोकने का प्रयास किए जाने चाहिए | इस अवधारणा की जरूरत इसलिए पड़ी कि लोगों की उम्र लंबी होने लगी है और वे भिन्न जीवन परिस्तिथियों और अवसरों के साथ जी रहें हैं | वे उम्रदराज होने के अधिक सकारात्मक अनुभवों की संभावना को मुख्य रूप दे रहे हैं |

सभी एज केयर कर्यक्रमों का मुख्य लक्ष्य स्वस्थ बने रहते हुए वृद्ध होने का होना चाहिए | यह सुनिश्चित करना हरेक की जिम्मेदारी है की वृद्ध लोग जितना संभव है, स्वस्थ रह सकें ताकि वे एक सक्रिय और अर्थपूर्ण जीवन गुजार सकें |

यह बात याद रखनी चाहिए कि शारीरिक रूप से गिरती हुई स्थिति , वृद्धों में डायबिटीज, कोरोनरी धमनी रोग, मस्तिष्क के स्ट्रोक तथा संघातों जैसी वृद्धावस्था की बिमारियों का शिकार होने के ढेर जोखिम पैदा कर देती है | तब शारीरिक रूप से वृद्ध होना रोगपूर्ण वृद्धावस्था में बदल जाता है |

अनेकों वृद्ध लोगों को एक से ज्यादा रोग होते हैं और वे उन सब का लिए दवाएँ लेते हैं | ये दवाएँ परस्पर अंतक्रिया करती हैं और कभी-कभी हानिकारक प्रभाव पैदा करती हैं | इस खतरे के प्रति सभी वृद्धों व उनके परिचारकों को सचेत होना चाहिए | वृद्ध लोग अम्पने रोगों के उपचार के लिए जो भी दवा लेते हैं, उनमें से प्रत्येक के बारे में डॉक्टर की सलाह ली जानी चाहिए |

वृद्ध लोगों में चिकित्सा संबंधी खतरे

इस बात का खतरा हमेशा रहता है की हम वृद्धों को प्रभावित करने वाली बिमारियों को वृद्धों को वृद्धावस्था  के लक्षण मान उन्हें नजरअंदाज कर दें | इससे रोगियों को चिकित्सा विशेषज्ञों के पास तब लाया जाता है, जब उनका रोग काफी बढ़ चुका होता है | वृद्धा व्यक्ति के शरीर तंत्र में रोग की प्रक्रिया तेजी से बढ़ती है और साथ ही उससे पैदा होने वाली जटिलताएँ किसी युवा व्यक्ति को मुकाबले अधिक होती है इसलिए, यह जरूरी है की जैसे ही किसी वृद्ध व्यक्ति में कोई शारीरिक असमान्यता दिखाई दे, उसे फौरन डॉक्टर या कमरों कम स्वास्थकर्मी की जानकारी में लाया जाए | वे उसकी स्थिति के निदान के बाद फैसला कर सकते हैं किक्या वृद्ध व्यक्ति को चिकित्सा हस्तक्षेप की जरूरत है |

शारीरिक गिरावट और उसके परिणाम

नीचे शरीर में आने वाली उन गिरावटों की सूची दी जा रही है जिनसे बहुत हद तक वृद्ध लोगों की जीवन शैली में बदलाव आ जाते हैं :

स्वाद- कलिकाओं का कमजोर होना – स्वाद के लिए जीभ की स्वाद- कलिकाएँ जिम्मेदार होती हैं | उम्र के साथ ये कमजोर हो जाती हैं | इससे खाने की पसंद पर बहुत असर पड़ता है | आम तौर पर मीठा खाने की गहरी इच्छा होने लगती है | वृद्ध व्यक्तियों को इन परिवर्तनों के प्रति सचेत रहना चाहिए और अपने आहार पर नियंत्रण रखना चाहिए |

दांतों का गिरना – यह वृद्धावस्था की एक आम विशिष्टता है | नकली दांत लगवाने के बाद भी खाने की आदतों में काफी बदलाव आ जाता है, क्योंकि चबाना मुश्किल हो जाता है | इसलिए, वृद्ध लोग मुलायम या कुचला खाना व तरल ज्यादा पसंद करते हैं | इससे अक्सर पौष्टिकता की कमियां पैदा हो जाती हैं |

गेस्ट्रो- इंटेस्टाइल मार्ग में आए परिवर्तन – वृद्धावस्था में गेस्ट्रो – इंटेस्टाइल तंत्र में काफी बदलाव आते हैं| उदाहरण के लिए, उदर पहले के मुकाबले आकार में छोटा हो जाता है | भोजन को ड्यूडेनम में पहूँचाने में अधिक समय लगता है | इससे पेट में एक भारीपन का अहसास और असुविधा का भाव पैदा होता है | आंतो की दीवारों क्षयग्रस्त और कमजोर हो जाती है इससे उनमें से भोजन बहुत धीमी गति से गुजरता है (लेजी इंटेस्टेइन) पाचन करने वाले इन्जाइम कम मात्रा में पैदा होने लगते हैं | इसके अलावा, आधा पचा भोजन आंतों में ज्यादा देर तक बना रहता है | इससे गैस बनने लगती है और कब्ज होता है|

वृद्धावस्था में भोजन को उच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए – आसानी से पचने वाली चीजों के उपयुक्त भोजन तथा पर्याप्त मात्रा में रेशेदार भोजन से आंते सक्रिय होंगी और ये शिकायतें दूर हो जाएंगी |

गुर्दे तथा पेशाब तंत्र – गुर्दे आकार में छोटे हो जाते है और शरीर से अवांछित अपशिष्ट पदार्थों को छान कर बाहर करने में उनकी क्षमता कमजोर हो जाती है | इसलिए, तरलों का सेवन अधिक मात्रा में दिया जाना चाहिए ताकि अधिक पेशाब आए और इस तरह तंत्र साफ हो जाए | मूत्राशय भी सिकुड़ जाता है और इससे बार- बार पेशाब करने की इच्छा होने लगती है | मूत्राशय  के पूरा भरे होने या छींकने और हंसने से मूत्राशय पर दबाव पड़ने के कारण के कारण अनचाहे में मूत्र अनियंत्रण या यूरीनेरी इन्कौन्तिनेंसे के नाम जाना जाता है |

वृद्धावस्था में शरीर में पानी का संतुलन भी बिगड़ जाता है – एक वृद्ध व्यक्ति के शरीर में केवल 55 प्रतिशत पानी होता है, जबकि एक वयस्क युवा शरीर में पानी 75 प्रतिशत तक होता है | इसलिए कह सकते हैं की वृद्ध व्यक्ति के शरीर में पहले ही पानी की कमी हो चुकी होती है | इसलिए, उन्हें उच्च ताप और लू का खतरा ज्यादा होता है | सो, एक वृद्ध व्यक्ति के लिए अधिक से अधिक तरल पीना जरूरी हो जाता है | सामान्य नियम के अनुसार दिन में कमसे कम 8 गिलास पानी पीना चाहिए | यह भी याद रखना चाहिए की वृद्ध व्यक्ति के शरीर में पानी के कमी के बावजूद, मस्तिष्क के पिपासा – केंद्र के क्षयग्रस्त होते जाने के कारण उसे प्यास कम होने लगती है |

हृदय व रक्त संचार तंत्र – रक्तवाहिकाएं सख्त हो जाती हैं और अक्सर उनकी दीवारों पर ठोस पदार्थ, अधिकांशत: कोलेस्ट्रोल, जमा हो जाता है | इससे वे खुरदरी और सख्त हो जाती हैं दिल की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं इससे उनकी समूचे शरीर में रक्त धकेलने की क्षमता कम हो जाती है | परिणामस्वरुप, शरीर के ज्यादातर अंगों को पर्याप्त मात्रा में रक्त- आपूर्ति नहीं हो पाती | इसलिए, शरीर में पर्याप्त रक्त- आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शारीरिक गतिवधि को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है |

कोरोनरी थ्राम्बोसिस या धमनिय  घनास्त्रता:  यह एक और बड़ी हृदय संबंधी समस्या है | इसमें रक्तवाहिकाओं में जमे टुकड़े बह कर दिल की संकरी कोरोनरी धमनियों में प्रवेश कर जाते हैं और दिल की क्रियाकलाप को रोक देते है | इस रोग में दो निरोधक उपाय किए जा सकते हैं | उपयुक्त रक्त संचार बनाने के लिए शारीरिक गतिविधि करना और शरीर में चर्बी व रक्त में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को नियंत्रण में रखने के लिए ठीक आहार लेना |

मांसपेशियां तंत्र – उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियां धीरे- धीरे कमजोर होती जाती हैं, खासकर वे छोटी मांसपेशियां जिनकी जरूरत तेज रिप्लेक्स एक्शन यानी फौरन शारीरिक प्रतिक्रिया करने के लिए होती है वृद्ध लोग सामान्य कामकाज और उन गतिविधियों को करने में समर्थ होते हैं जिनमें टांगों व बाजुओं की बड़ी मांसपेशियों के जरूरत पड़ती है | लेकिन, जब तेजी से हरकत में आने की बात होती है, तो वे ऐसा नहीं कर पाते, क्योंकि तेज रिफ्लेक्स चेष्टाओं में छोटी मांसपेशियों की जरूरत होती है | तेज हरकत की कोशिश करने पर उनके साथ दुर्घटना भी घटित हो सकती है | सबसे आम दुर्घटना है, बाथरूम के गीले और फिसल कर गिर जाना, क्योंकी वे स्वयं को गिरने से रोक नहीं पाते |

‘हैल्दी एजिंग’ के लिए कुछ सरल उपाय

  1. शारीरक गतिविधि – शारीरिक गतिविधि जैसे निरोधक उपायों से होने वाले स्वास्थ्य लाभों को प्रमाणित करने वाले काफी शोध – साक्ष्य मौजूद हैं | नियमित और हल्की हृदय रोग, स्ट्रोक, कार्डियोवैस्क्यूलर रोग, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज टाइप – 2 कोलोन के कैंसर और ओस्टोयोपोरोसीस जैसे रोगों के खतरे को कम कर सकती है | यह मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार लाने में सहायक होती है | अथ्राइटिस में होने वाले दर्द में राहत देती है | मांसपेशियों की शक्ति को बढ़ा कर गिरने से लगने वाली चोटों को रोक सकती है | वजन घटाने में मददगार होती है | वृद्ध लोगों के लिए अपनी शारीरिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्पर्क बनाए रखने में भी यह सहायक होती है | जनसंख्या के इस हिस्से के अधिकतम स्वास्थ्य लाभ के लिए, सप्ताह के ज्यादातर दिनों में कम से कम 30 मिनट की कोई साधारण शारीरिक गतिविधि आवश्यक है |
  2. उपयुक्त आहार- स्वस्थ रहते हुए वृद्ध होने के लिए अच्छा पौष्टिक भोजन भी बहुत जरूरी है | इसका संबंध शारीरिक गतिविधि और गिरने से है, खासकर जब गिरने की दुर्घटना ऑस्टियोपोरोसिस या किस दीर्घकालिक बीमारी के कारण हो | उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्यवर्धक व विविधतापूर्ण आहार द्वारा प्रदान किए जाने वाले पौष्टिक तत्वों की जरूरत भी बढ़ती चली जाती है |
  3. वृद्धावस्था में पैदा होने वाले जोखिमों के प्रति सचेत रहना और उनसे बचने के लिए उपयुक्त सावधानियाँ बरतना जरूरी होता है|
  4. व्यस्कावस्था की तयारी शुरू कर देनी चाहिए| घूमना या व्यायाम करना जैसी शारीरिक गतिविधियाँ वृद्धावस्था में नहीं, बल्कि काफी पहले शुरू कर देनी चाहिए |
  5. बीमार होने पर डॉक्टर से परामर्श करें | खुद - ब - खुद गोलियां निगल अपना इलाज न करें |

 

वृद्धावस्था  में स्वयं अपनी बेहतर देखभाल के लिए एक जांचसूची  (चैकलिस्ट)

  • नियमित दिनचर्या अपनाएं |
  • उद्देश्यपूर्ण गतिविधियों में संलग्न रहें |
  • उपचार से बेहतर है परहेज | नियमित स्वास्थ्य जाँच कराएँ |

  • वृद्धावस्था की जरूरतों के मुताबिक अपने खानपान के तरीके बदलें |
  • पर्याप्त नींद लें |
  • मेडिटेशन यानी ध्यान करें |
  • ऐसा व्यायाम करें जो थकाए नहीं |
  • वृद्धावस्था की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने मकान में रद्दोबदल करें |
  • परिवार, मित्रों व पड़ोसियों से मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखें |
  • सकारात्मक नजरिया बनाए रखें |

 

स्त्रोत: हेल्पेज इंडिया/ वोलंटरी हेल्थ एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया

3.0
सितारों पर जाएं और क्लिक कर मूल्यांकन दें

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
Back to top

T612020/02/21 12:55:14.617303 GMT+0530

T622020/02/21 12:55:14.635520 GMT+0530

T632020/02/21 12:55:14.636218 GMT+0530

T642020/02/21 12:55:14.636484 GMT+0530

T12020/02/21 12:55:14.570842 GMT+0530

T22020/02/21 12:55:14.571125 GMT+0530

T32020/02/21 12:55:14.571340 GMT+0530

T42020/02/21 12:55:14.571551 GMT+0530

T52020/02/21 12:55:14.571683 GMT+0530

T62020/02/21 12:55:14.571799 GMT+0530

T72020/02/21 12:55:14.573049 GMT+0530

T82020/02/21 12:55:14.573351 GMT+0530

T92020/02/21 12:55:14.573683 GMT+0530

T102020/02/21 12:55:14.574033 GMT+0530

T112020/02/21 12:55:14.574115 GMT+0530

T122020/02/21 12:55:14.574267 GMT+0530