सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

फिटनेस-तंदुरुस्ती

इस पृष्ठ में फिटनेस और तंदुरुस्ती के मायने और अहमियत बताये गए है।

परिचय

फिटनेस या तंदुरुस्ती यह अब जीवन का एक नया मंत्र है। इसके बारे में अपने परिवार और मित्रों में जागृती फैलाएं। लेकिन पहले आप स्वयं फिट रहने की जरुरत है। तंदुरुस्ती से अनेक बीमारियाँ टलती है और जीवन का सही आनंद भी इसी से मिलता है।

बचपन से इसकी आदत होनी चाहिए। आप स्वयं सोचे की आप फिट या तंदुरुस्त है या नहीं। उम्र और कामकाज के अनुरुप फिटनेस के मायने बदलते है। हर एक खेल के लिए फिटनेस की अलग जरूरतें होती है। फिटनेस के लिए हमको अलग अलग व्यायाम जरुरी है। आमतौर पर ऐसे व्यायाम के लिए शरीर में सिंपथॅटीक तंत्रिका तंत्र कृतीशील होती है। इसके चलते एक मस्ती का अनुभव होता है।

कसरत के समय उर्जा का इस्तेमाल

  • कसरत की शुरूआत में करीब १० सैकेण्ड तक पेशियॉं आक्सीजन के इस्तेमाल के बिना उर्जा के तैयार स्रोत (एटीपी और फिर फॉस्फोजन) से उर्जा इस्तेमाल करती हैं। ऑक्सीजन के बिना पेशियों के एटीपी -फॉस्फोजन के जलने से खूब सारा लैक्टिक एसिड बनता है। इससे व्यक्ति थक जाता है। क्यूं की इसे ऑक्सिजन नही लगता, इसको एनरोबिक कसरत कहते है। जब हम बस पकडनेके लिये कुछ मीटर दौडते है तब यही क्रिया होती है।
  • इसके बाद मे पेशियॉं अपना ग्लाईकोजन इस्तेमाल करती हैं। यह स्रोत करीब २ मिनट तक चलता है। जिसमे जादा ग्लाईकोजन हो, उसका काम लंबा चलता है। इसे भी ऑक्सिजन नही लगता, सो इसको एनरोबिक कसरत कहते है।
  • इसके बाद खून के ग्लूकोज़ का इस्तेमाल होता है और फिर अन्त में वसीय अम्लों का। क्यूं की से ऑक्सिजन लगता है, कसरत के इस चरणको एरोबिक-हवाजरुरी- कसरत कहते है। एरोबिक कसरत से अनेक लाभ होते है। दिल के लिये यह खास लाभकारक है।

ग्लाईकोजन

नियमित रूप से कसरत करने से पेशियों के उस समूह की ग्लाईकोजन स्रोत में बढ़ोतरी होती है। ग्लाईकोजन स्रोत कलेजे यानि यकृत में भी होता है। पेशियों का ग्लाईकोजन २-३ मिनटों से ख़त्म होने पर यकृतवाला ग्लाईकोजन काम में आता है। एक प्रशिक्षित लम्बी दूरी के धावक में ज़्यादा मात्रा में ग्लाईकोजन होता है। लम्बे समय तक चलने वाले कार्यकलाप जैसे कि मैराथन दौड़ में, शरीर में इकट्ठा हुआ ग्लाईकोजन कम हो जाता है। ग्लाईकोजन मुख्यत: शकर्रा वर्गीय पदार्थों यानि कि कार्बोहाईड्रेट से बनता है । ४ से ५ दिनों के आराम और मण्ड वाला खाना खाने से ग्लाईकोजन दोबारा इकट्ठा हो पाता है।

स्त्रोत: भारत स्वास्थ्य

3.03896103896

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
संबंधित भाषाएँ
Back to top

T612019/10/15 02:44:5.037544 GMT+0530

T622019/10/15 02:44:5.055230 GMT+0530

T632019/10/15 02:44:5.055992 GMT+0530

T642019/10/15 02:44:5.056258 GMT+0530

T12019/10/15 02:44:5.013524 GMT+0530

T22019/10/15 02:44:5.013709 GMT+0530

T32019/10/15 02:44:5.013852 GMT+0530

T42019/10/15 02:44:5.014006 GMT+0530

T52019/10/15 02:44:5.014094 GMT+0530

T62019/10/15 02:44:5.014165 GMT+0530

T72019/10/15 02:44:5.014891 GMT+0530

T82019/10/15 02:44:5.015093 GMT+0530

T92019/10/15 02:44:5.015307 GMT+0530

T102019/10/15 02:44:5.015516 GMT+0530

T112019/10/15 02:44:5.015561 GMT+0530

T122019/10/15 02:44:5.015653 GMT+0530