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पोलियो - कारण एवं निदान

इस पृष्ठ में बच्चों में पोलियो की बीमारी के होने वाले कारणों एवं उपायों का उल्लेख किया गया है।

पोलियो क्‍या है?

पोलियो एक संक्रामक रोग है जो पोलियो विषाणु से मुख्‍यतः छोटे बच्‍चों में होता है। यह बीमारी बच्‍चें के किसी भी अंग को जिन्‍दगी भर के लिये कमजोर कर देती है। पोलियो लाईलाज है क्‍योंकि इसका लकवापन ठीक नहीं हो सकता है। बचाव ही इस बीमारी का एक मात्र उपाय है।

पोलियो कैसे फैलता है?

मल पदार्थ में पोलिया का वायरस जाता है। ज्‍यादातर वायरस युक्‍त भोजन के सेवन करने से यह रोग होता है। यह वायरस श्‍वास तंत्र से भी शरीर में प्रवेश कर रोग फैलाता है।

कैसे होती है पोलियो की पहचान?

पोलियो स्‍पाइनल कॉर्ड व मैडुला की बीमारी है। स्‍पाइनल कॉर्ड मनुष्‍य का वह हिस्‍सा है जो रीड की हड्डी में होता है।

पोलियो मॉंसपेशियों व हड्डी की बीमारी नहीं है।

क्‍या पोलियो विषाणु से हमेशा लकवापन होता है?

नहीं, पोलियो वासरस ग्रसित बच्‍चों में से एक प्रतिशत से भी कम बच्‍चों में लकवा होता है।

पोलियो बच्‍चों में ही क्‍यों ज्‍यादा होता है?

बच्‍चों  में पोलियों विषाणु के विरूद्व किसी प्रकार की प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती है इसी कारण यह बच्‍चों में होता है।

पोलियो से बचने के उपाय?

पोलियो विषाणु के विरूद्व प्रतिरोधक क्षमता उत्‍पन्‍न के लिए 'नियमित टीकाकरण कार्यक्रम' व 'पल्‍स पोलियो अभियान के उन्‍तर्गत पोलियों वैक्‍सीन की खुराकें दी जाती है। ये सभी खुराके 05 वर्ष से कम उम्र के सभी बच्‍चों के लिये अत्‍यन्‍त आवश्‍यक है।

पोलियो वैक्‍सीन में कौनसी दवा होती है?

ओरल पोलियो वैक्‍सीन  का आविष्‍कार रूसी वैज्ञानिक डॉ. अल्‍बर्ट सेबिन ने सन् 1961 में किया था। ओर पोलियो वैक्‍सीन में विशेष प्रकिया द्वारा निष्क्रिय किये गये पोलियो के जीवित विषाणु होते हैं। इस विशेष प्रकिया में पोलियो विषाणु की बीमारी पैदा करने की क्षमता समाप्‍त कर दी जाती है,  परन्‍तु से पोलियो बीमारी के विरूद्व प्रतिरोधक क्षमता उत्‍पन्‍न करती है।

नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अन्‍तर्गत पोलियो की दवाई कब पिलाई जानी चाहिए?

जन्‍म पर, छठे, दसवें, व चौदहवें सप्‍ताह में फिर 16 से 24 माह की आयु के मध्‍य बूस्‍टर खुराक दी जानी चाहिए।

पोलियो की खुराक बार-बार क्‍यों पिलायी जाती है?

बार-बार और एक साथ खुराक पिलाने से पूरे क्षेत्र के 05 वर्ष तक की आयु के सभी बच्‍चों में इस बीमारी से लडने की एक साथ क्षमता बढती है,  और इससे पोलियो विषाणु को किसी भी बच्‍चे के शरीर में पनपने की जगह नहीं मिलेगी,  जिससे पोलियो का खात्‍मा हो जायेगा।

क्‍या नवजात शिशु को यह दवा पिलानी जरूरी है?

जी हॉं बहुत जरूरी है। यह खुराक 1 घण्‍टे के नवजात शिशु को भी पिलानी जरूरी है निश्चित होकर अपने नवजात शिशु को पोलियो की खुराक दिलाऍं इससे किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।

जो बच्‍चा 5 से 8 बार पहले भी खुराक पी चुका हो, तो क्‍या फिर से उसे खुराक पिलानी चाहिए?

जी हॉं कोई भी बच्‍चा तक तक सरक्षित नहीं है जब तक पोलियो के विषाणु का वातावरण से पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता है।

अगर बच्‍चा पोलियो की खुराक पीने के बाद उल्‍टी कर देता है तो क्‍या करना चाहिए?

बच्‍चे को पोलियो की खुराक दुबारा पिलानी चाहिए।

अगर बच्‍चें के दस्‍त लगें हो या बुखार हो तो क्‍य बच्‍चें को पोलियो की खुराक देनी चाहिए?

हॉं बच्‍चे को बुखार, उल्‍टी, दस्‍त है तब भी पोलियो की खुराक देनी चाहिए।

अगर बच्‍चें को नियमित टीकाकरण से पोलियो की खुराक मिल गयी हो तो क्‍या फिर भी अभियान में पोलियो की खुराक देने की आवश्‍यकता है?

हॉं अभियान के दौरान पिलाई गई खुराके अतिरिक्‍त खुराकें है। नियमित टीकाकरण के साथ इनको भी बच्‍चों को देना अत्‍यन्‍त आवश्‍यक है।

जिन बच्‍चो ने टीकाकरण के दौरान 1 या 2 दिन पहले पोलियो ड्रॉप पी हो तो भी क्‍या उन्‍हे अभियान के दौरान यह दवा पिलानी चाहिए?

हॉं यदि बच्‍चे ने नियमित टीकाकरण के दौरान 1 या 2 दिन पहले भी दवा पी हो तो भी उसे अभियान के दौरान पोलि‍यो ड्रॉप पिलानी चाहिए।

स्त्रोत: स्वास्थ्य विभाग, झारखण्ड सरकार

 

 

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