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बच्चे के लिए उपयुक्त सामग्री एवं प्रक्रिया मूल्यांकन की जरुरत

इस भाग में पोलियोग्रस्त बच्चे की जरुरत के अनुसार उपयुक्त सामग्री एवं प्रक्रिया के बारे में मूल्यांकन की आवश्यकता को बताया गया है|

आप बच्चे एवं परिवार से बातचीत के सीखते हुए शुरुआत

आप बच्चे एवं परिवार से बातचीत के मध्यम से सीखते हुए शुरुआत कर सकते है| आप ऐसा कर सकते हैं, बच्चे की गतिविधि के बारे में देखें| ध्यानपूर्वक आप निरीक्षण करें कि शरीर का कौन सा भाग मजबूत दिख रहा है है कौन सा कमजोर| शरीर के दोनों भागों को ध्यानपूर्वक देखें जैसे- पैरों की मोटाई व लम्बाई में अंतर| क्या उनमें कोई स्पष्ट विकृति है या कोई जोड़ जो किसी भी तरह से सीधा नहीं दिखाई देता| यदि बच्चा चलता है तो उसके चाल-ढाल में क्या असामनता है क्या उसका कुल्हा आगे निकला या एक तरफ का है क्या वह अपने पाँव को हाथ से सहारा दे रहा है| क्या दूसरे की अपेक्षा नीचे है? या कंधा नीचे है? क्या पीठ में एक कूबड़, धसाव या पीठ में एक बगल को टेढ़ापन को है|

अमीना के दोनों पाँव व दाहिना हाथ गंभीर लकवा से प्रभावित हो गए| उसके धड़ में (मुख्य शरीर में) कमजोरी आ गई और उसकी रीढ़ की हड्डी अग्रेजी के s अक्षर जैसी झुक गई| वह किसी भी तरह चलने में असमर्थ है उसे एक पहिये वाली कुर्सी या गाड़ी चाहिए| आप भी उसके शरीर के लिए बंधनी बनाकर मदद करना चाह सकते हैं या उसे बैठाने के लिए अन्य उपाय अपना कर रीढ़ की हड्डी अधिक मुड़ने से रोकने की कोशिश कर मदद करना चाहेंगे|

राजू के पांवों व कूल्हों में गंभीर लकवा है यदि उसके कूल्हों, घुटनों और पावों की सीधा (संकुचन रहित) नहीं किया जाए तो एसा दिखेगा| उसके पेट की कमजोर मांसपेशी तथा गंभीर कूल्हों के संकुचन के कारण रीढ़ में धंसाव  हो गया है|  क्योंकि कि उसके हाथ मजबूत दिख रहे हैं अतः राजू सम्भवता वैसाखियों व पाँव की बंधनी द्वारा चल सकता है, परन्तु सबसे पहले इसके संकुचनों को ख़त्म करना होगा| चूँकि उसके कुल्हे कमजोर है, अतः पट्टी बाँधकर सीधे किये जा सकते है और टखने एवं घुटनों में प्लास्टर चढ़ाना होगा| यदि धीरे-धीरे खिचाव से संकुचन दूर नहीं होते तो फिर ओपरेशन की जरुरत हो सकती है| घुटने व टखने को सुपृढ बनाने हुए कास्टिंग करें|

चूँकि उसके कुल्हे कमजोर हैं अतः उसके पांवों के लिए लम्बी बंधनी (खपच्चियाँ) चाहिए जिनमें कूल्हों के लिए एक मोड़ भी हो|

टीटू लाठी के सहारे अपने गाँव में घूमता रहता है| क्योंकि उसके पैरों व जांघों की मांसपिशियों कमजोर हैं| वह अपने पाँव को आगे को बढाकर अपना भार ढो सकता है| उसके घुटने को पीछे की ओर होना बढ़ता ही जायगा और उसके घुटने के पीछे की नसें खींचती रहती हैं| उसके माता-पिता ने धीरे-धीरे यह महसूस किया कि उसके दोनों पाँव रखने पर लगभग गोल घेरा सा बन रहा है| उसके माता-पिता चिंतित हुए कि वह स्कूल कैसे जायेगा या खेती में कैसे मदद करेगा| अंत में एक ग्रामस्वास्थ्य कार्यकर्त्ता टीटू को ‘पोलियो कैम्प’ इस हालत में  लेकर गया, जब वह अपने पांवों पर खड़ा भी नहीं हो सकता था| टीटू के पांवों व घुटनों का ऑपरेशन किया गया वह एक बार पुनः बड़ी लम्बी बंधनी के सहारे चलने योग्य बन सका|  यदि टीटू पोलियो कैम्प काफी पहले आ जाता? या स्वस्थ्य कार्यकर्ता अगर टीटू के अंगों को शुरू में ही सहारा दे देते तो शायद ऑपरेशन भी न करना पड़ता| हो सकता है वह बिना लाठी के भी चलने लायक बन जाता अगर वह घुटनों तक की बन्धनी औरे स्थिर जूते पहनता| यदि वह चलता नहीं है तो उसके पाँव का पिछला भाग और ख़राब होता जायेगा अतः उसे एक लम्बी बंधनी चाहिए| यह बंधनी उसके पाँव को सीधा करते हुए आगे लाकर मजबूती देगी, अतः उसमें घुटना लॉक की जरुरत नहीं होगी|

गीता आगे को झुकी है औरे जब चलती है तो अपने हाथों से अपनी कमजोर बाई जाँघ को दबाती है |उसकी बाएँ टांग प्रर्याप्त  सीधी नही होती| उसका कमजोर पाँव दूसरे की अपेक्षा छोटा दिखता है| या उसे घुटने से ऊपर के लिए बंधनी की जरुरत है जो पट्टी बांधकर घुटने को पीछे कर सकती अहि |यह गद्दी उसे घुटने को पीछे करती है या उसे घुटने से नीचे तक की बंधनी की जरुरत है जो उसके घुटने को पीछे की ओर दबाएगा| व्यायाम के बाद उसका घुटना सीधा हुआ या इस समय वह बहुत कम टेढ़ा है थोड़ा सा पीछे की ओर है लेकिन अब वह अपने हाथ उपयोग में लाये बिना चल सकती है|पैड घुटने को पीछे ठेलता है| बंधनी घुटने को पीछे दबा रही है| उठा हुआ तलुआ या तलीबंधनी पाँव के पास नीचे थोड़ी मुड़ी है इसलिए उसके शरीर का वजन (एड़ी के बजाय) पंजों पर है जो उसके घुटने को पीछे को ठेल रही है|

यह एक शरीरिक परीक्षण है|

यह शरीरिक परीक्षण है| इसमें प्रायः यह बातें शामिल है:परिधीय गतिशीलता परीक्षण : खासकर जहाँ आप साधारण संकुचन के बारे में सोचते हों मांसपेशी की जाँच: विशेषरूप से वह  मांसपेशी,  जिसे आप कमजोर समझ रहे हैं इसके साथ ही उस ही उस मांसपेशी की भी जाँच जो कमजोर वाली का विकल्प बनें,  विकृतियों की जाँच: संकुचन, अविस्थापित (कुल्हे, घुटने, पाँव, कंधे व टखने), पांवों की लम्बाई में अंतर, कूल्हों का टेढ़ापन, पीठ का टेढ़ापन या असामान्य आकृति|

शरीरिक परीक्षण के उपरांत

शरीरिक परीक्षण के उपरांत एक बार फिर देखें कि बच्चा कैसे चलता या गति करता है| आप उसके शरीरिक परीक्षण के खास परिणामों को उसके गति एंव चलने से जोड़ का देखें|

आपके निरीक्षण एवं परीक्षण पर आधारित

आपके निरीक्षण एवं परीक्षण पर आधारित, आप यह पता करने की कोशिश करें कि किस प्रकार के व्यायाम, सामग्री और सहायता बच्चे के लिए ज्यादा से ज्यादा लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं| दूसरी सम्भावनाओं के फायदों पर ध्यान दें, लाभ, मूल्य, सुविधा, प्रभाव तथा उसकी उपलब्धता और यह कि बच्चा क्या आपकी तैयार सामग्री उपयोग में ला सकेगा| बच्चे के माता-पिता तथा उसके विचार एवं सुझाव भी जानिए|

उपयोगी एवं सार्थक

आखिर में बच्चे के लिए सामग्री या बंधनी बनाने से पहले, यदि संभव हो तो यह जाँच कर देख लें कि वह कितना उपयोगी एवं सार्थक है इसके लिए आप अस्थाई या किसी बच्चे की पुरानी सामग्री उपयोग में ला सकते हैं उदाहरण के लिए:- यदि किसी बच्चे का टखना बाहर की ओर इस तरह मुड़ा हो| बाहर तरफ थोड़ा सा उठा तला पाँव सीधा करने में मददगार हो सकता है| उठाव या जूते को चिपकाने या कीलें ठोंकने से पहले आप झट से गत्ते या किसी अन्य चीज पर पाँव के तल्ले बनाकर जल्दी से चिपकाकर चप्पलों या जूतों में लगाएँ और डोरी या फीते से बंधने लायक बनाए और इसे बच्चे के चलाने में प्रयोग करें|

बच्चे व उसके माता-पिता तथा आपके द्वारा या तय करने पर कि किस प्रकार सामग्री का चयन

बच्चे व उसके माता-पिता तथा आपके द्वारा या तय करने पर कि किस प्रकार की बंधनी या सामग्री के निर्माण हेतु जरुरी नाप जोख कर लें| जब आप तैयार कर लें तो एक फिर होशियारी इसी में है कि कीलें ठोंकने या चिपकाने से पहले अस्थाई तौर से आजमायें और नाप जोख लें|

बच्चे के साथ कुछ दिन तक बंधनी या सामग्री का प्रयोग करके देखें

बच्चे के साथ कुछ दिन तक बंधनी या सामग्री का प्रयोग करके देखें की सही काम कर रही है या नहीं| बच्चे और माता-पिता से पूछें| क्या यह मदद कर रही है या इससे चोट या क्षति हो रही है? क्या कोई और समस्या है| इसे और बेहतर कैसे बना सकते हैं| जो भी जरुरी सुधर ही करें परन्तु ध्यान रहे ऐसी कोई भी बंधनी या सामग्री उपलब्ध नही होती जो आपके बच्चे की बिलकुल सही जरूरत के मुताबिक हो, अतः आप खुद सब कुछ बेहतर करें जो उसके लिए अच्छा हो|

बच्चे के लिए विभिन्न स्थितियों में भिन्न ढंग से सामग्री तैयार की जा सकती है| यदि बच्चे के गाँव में या आस-पास कोई विकलांग पुनर्वास केंद्र है तो उसे परिवार सहित 3-४ दिन गुजारने होंगे ताकि उपयुक्त सामग्री तैयार की जा सके और वह सामजस्य बिठा सके|

आमतौर पर यद्यपि बंधनी (खपच्ची) या सामग्री अस्पतालों या कैपों में तैयार की जाती है| जोकि ज्यादातर बच्चे के गाँव या रहने के स्थान से दूर होते हैं और बच्चे तथा उसके परिवार वाले अस्पताल या कैम्प में एक दिन से अधिक ठहर पाने में सक्षम नहीं होते हैं|

जाँच लें कि बंधनी में कुल्हे व घुटने के लॉक सही काम कर रहें हों, उनमें तेल भी डालते रहें| टखने के गुमड़े की सुरक्षा हेतु अस्थिल स्थान पर कब्ज़ा होना चाहिए बंधनी के घुटने का जोड़ त्वचा को नहीं छुना चाहिए जबकि बच्चा खड़ा हो या बैठा बंधनी में घुटने से टेढ़ापन होना चाहिए (घुटने के जोड़ से लगभग 3 इंच नीचे) जोड़ के नीचे बंधनी को नहीं छुना चाहिए जबकि बच्चा खड़ा हो या बैठा सैंडल या जूता आरामदेय होना चाहिए तथा सख्त कसा नही हो|कुल्हे का मोड़ यदि ठीक से नहीं फिट किया गया तो पीछे का हिस्सा आगे को झुक सकता है| अतः एक कुल्हे का झुकाव पीछे की ओर मुड़ा होने तक गद्दी लगे होने से पुट्ठों को रोकने के लिए उपयुक्त रहेगा|

एक बच्चे को जब पहली बार बंधनी फिट कर दि जाती है तो वह उसे स्वीकार नहीं कर पाता| यहाँ तक कि उसके माता-पिता इसके बारे में समझाएँ या फिर वह बिलकुल फिट ही क्यों न हो| यह भी देखा गे है कि यदि एक बच्चा बंधनी के सहारे के चलने में सक्षम है तो वह बिना बंधनी के ही रहना  चाहता है| प्रेरित करें कि वह इसे स्वीकार करें, लेकिन आम प्रचलित बंधनी काफी भद्दी एवं भारो होती है और  उसके मूल तथ्य यह  हैं कि वह बच्चे के लिए हानिकारक होती है| वस्तुतः बंधनी के साथ बच्चों को जूते पहनने जरुरी हैं परन्तु परम्परागत ढंग से गाँवों के या शहरी झुग्गी झोपड़ियों के बच्चे जूते नहीं पहनते हैं| जवान लड़कियां अक्सर बंधनी पहनने से मना कर देती हैं क्योंकि वे अपनी परम्परागत पोशाक नहीं पहन सकती है|

यहाँ एक दूसरा कारण यह भी है कि इन बच्चों ने अपने जीवन में कभी बंधनी के सहारे न तो चले  या टहलें हैं अतः नई बंधनी उनके लिए दर्द भरी एवं असुविधाजनक होती है| कुछ खास एवं हल्की बंधनी को छोड़कर उन्हें उठाने के लिए अतिरिक्त ताकत लगाने की जरुरत होती है लेकिन लगातार प्रयोग के बाद बच्चा इनके उपयोग के लिए आदी हो जाता है| शुरुआत में अगर बच्चा होता है तो अपना दिल दुखी न करें| थोड़ा सा धीरज एवं प्रोत्साहन बच्चे को शुरुआत का दौर निकाल लेने में सहायक सिद्ध होगा|

अमूमन बच्चे को ठीक करने के लिए शल्यक्रिया

अमूमन बच्चे को ठीक करने के लिए शल्यक्रिया अगला चरण होता है| मयह कदम तब उठाया जाता है जब संकुचन एवं विकृति काफी गंभीर रूप धारण कर लेती है रुए सही स्थिति के लाने के लिए सीधा करने, व्यायाम या प्लास्टर चढाने से बात नही बनती है| शल्यक्रिया प्रायः किसी बच्चे के लिए तभी उचित है जब बच्चे के चल सकने के दिक्कत में खड़ा होना और चलना तथा उपयोग वाली बंधनी के आकर घटाने में मददगार हो या वह बिना सामग्री के चलने योग्य बन सके| कई बार, शल्यक्रिया उन बच्चों के लिए कूबड़ घटाने में मददगार है हो बिना सामग्री के चलते है तो भद्दा सा कूबड़ निकल आता है| शल्यक्रिया के बाद बच्चे के माता-पिता एवं परिवार वालों को उसकी देखरेख करनी चाहिए| घाव गीला नहीं होना चाहिए और न ही मरहमपट्टियाँ पानी या मूत्र से गीला होनी चाहिए| शल्यक्रिया वाली जगह को बाजार से प्राप्त पोलीथिन के थैले से ढक कर बचाना चाहिए| घाव पर लगाये गए टाँके अमूमन १० से 14 दिन के बीच निकल दिए जाते है| यदि घाव साफ रहे तो मरहमपट्टी की घी जरुरत नहीं रहती |

यदि बच्चे को बुखार या ताप है रुए काफी दर्द या सुजन या  घाव से कोई रिसन है तो उसके देखभाल की जरुरत है| हो सकता है कोई साधारण संक्रमण हो गया हो|

घाव भरने के दौरान खाने-पीने की कोई रोकथाम नहीं है| कई बार माता-पिता सोचते है जी दूध या दूध से बनी चींजे देने से बच्चे के घाव में मवाद या पीब बन सकती है जबकि उसका सही पक्ष यह है कि दूध व दूध की चींजें बच्चे के लिए अच्छी प्रोटीन देती है|

इस बच्चे के संकोचन काफी गंभीर है अतः पांव सीधा नहीं कर सकता है| यह एक जगह से दूसरी जगह हो सकती है| शल्यक्रिया के बाद उचित पोजीशन और व्यायाम बहुत जरुरी हैं ताकि फिट से टाँगों में संकोचन न पैदा हो|

एक कहानी: शिव के लिए बंधनी (ब्रास)

एक दिन, एक पड़ोसी गाँव की एक माँ अपने छः साल के बच्चे शिव के साथ केंद्र पर आई| रूपा और चेतन जो पुर्नस्थापन कार्यकर्ता थे, ने उनका बढकर स्वागत किया| उन्होंने देखा कि शिव के बचपन से पोलियो है| उन्होंने उसे चलने को कहा, इसके बाद दौड़ने को कहा और वे ध्यानपूर्वक उसे देखते भी रहे| शिव बहुत लंगड़ा रहा था और उसकी एक टांग पतली थी तथा छोटी थी| हर कदम चलने पर वह घुटने से मुडती थी|

रूपा ने बताया, “वह काफी अच्छा चलता है| लिकिन उसे अपने पांव का वजन के कारण पीछे की ओर मुड़ने से रोकना था| टांग (घुटना) पीछे को खिचाव कर रहा था जो एक बाहर भी हो सकता था”

“एक लम्बी टाँगों वाली बंधनी इसे रोक सकती है” चेतन ने सुझाव दिया

“कृपया वह न करें” शिव की माँ बोली “एक साल पहले में इसे बाहर के डॉक्टर के पास ले गई थी, जहाँ उसने धातु की बड़ी सी बंधनी दी थी, उसका कर्ज अभी भी पड़ा है| लेकिन शिव को उससे चिढ है| वह हरदम उसे निकाल कर छुपा देता हो| हमने बहुतेरी कोशिशें की, मगर या प्रयोग ही नही करता|”

“इसमें कोई और चिंता की बात नहीं” रूपा ने कहा “ अक्सर बच्चे बिना बंधनी को चल सकते हैं वे उसके उपयोग को मना कर देते है, चाहे वे पहले से बेहतर ही क्यों न चल सकें| हम इसे प्लास्टिक की एक लम्बी बंधनी बना देते है जो कि बहुत हल्की होगी| शिव आपका क्या विचार है? शिव रोने लगा|

“शिव घबराओ मत, हम इससे भी सरल कुछ बना सकते हैं|” रूपा ने कहा! “पर सबसे पहले तुम्हें जांचते है” अच्छा! शिव बोला |

शिव की एक मासपेशी  जांचने के बाद समझ नही हो सकता | लेकिन घुटने किस भी हालत में सीधा नहीं हो सकता| लेकिन घुटने को पीछे करने के लिए पर्याप्त सुदृढ़ता है|

कुल्हे और जांघों की  सुदृढ़ता के साथ वह घुटने को बिना टेढ़े किये खड़ा हो सकता है” रूपा ने कहा “शिव आओ देखें, पहले इस तरह कोशिश करें| समझ लो कि तुम बगुला हो” कुछ क्षण के लिए शिव ने ऐसा कर दिखाया, “बहुत अच्छा” रूपा बोली| : हर रोज ऐसे ही खड़े हो और देखो बिना पाँव को नीचे ले जाते हुए कितनी ज्यादा संख्या तक गिनती कर सकते हो| तुम हर रोज  अपने पिछले रिकार्ड से आगे बढ़ते रहना, समझे”| बगुले वाली अभ्यास उसे मदद कर सकती है” चेतन बोला| “पर मुझे अभी तो लगता है कि उसे बंधनी की जरुरत है, कम से कम शुरुआत में|”

“हमें सबसे पहले नुकसान के खिलाफ काम पर ध्यान देना होगा” रूपा बोली| “एक लम्बी टाँगों वाली बंधनी उसके लिए लाभदायक हो सकती है, मगर उसके लिए मांसपेशी का  सुदृढ़ बनाना है वह कमजोर हो सकती है| चूँकि बंधनी उसके टांग को पीछे झुकने से रोकेगी, पर तब ऐसा करने के लिए वह मांसपेशी का उपयोग नहीं कर पायेगा| टाँगों के लिए लम्बी बंधनी, शिव की उस मांसपेशी को कमजोर बनाएगी, जो उसे सुदृढ़ बनानी है|

“दूसरी तरह से हम क्यों न एक छोटी बंधनी अपना कर देखें जो कम से कम उसके पाँव को सही कोण में रखेगी| इसके बाद समतल कदम रखने पर वह घुटने को सीधा रख सकता है| इससे उसके जांघ के पीछे वाली मांसपेशी को सुदृढ़ बनाने में सहायता मिल सकती है|” चेतन ने किसी दूसरे की एक पुरानी पलास्टिक की बंधनी शिव को लाकर दिखाई | “देखो यह कैसे तुम्हारे पाँव के आस-पास सही बैठेगी, यह जरा भी भारी नहीं है| उठाकर देखो, इसमे कोई धातु का जोड़ भी नहीं है| तुम क्या कहते हो? क्या इसे अपनाकर दखना चाहोगे|”

जब बंधनी बनाई गई, उसकी जाँच करके देसी गई, शिव को वह अच्छी लगी| पहली बार, जब उसने काफी प्रयत्न किये तो वह बिना घुंटने पीछे मोड़े चल सका, लेकिन कुछ दिनों बाद उसकी माँ ने शिकायत की कि वह पहले की भांति घुटने को पहले जैसा ही टेड़ा करके चलता है और उसका पंजा हवा में इस तरह उठा रहता है| चेतन बोला” मुझे एक विचार आया है| क्यों न हम जूते के पीछे की ओर एक एड़ीलगा दें| इस तरह से जब वह चलेगा तो उसका वजन एड़ी पर आकर आगे को हो जायेगा| इसे उसके पाँव को आगे की ओर झुकने में तहत घुटने को सीधा रखने में मदद मिलेगी”

उन्होंने इसे आजमा कर देखा, और ज्यादातर समय(खास कर जब उसे याद दिलाई जाती) शिव बिना टांग को मोड़े काफी सीधा चल सकता था| यह बेहतर काम करती है| पीछे को निकली हुई एड़ी से टांग पीछे को मुड़ने में रोक लगती है| कदम उठाने के अन्त में जूते की आगे का तलवा वाल भाग गोल होने के कारण घुटने को पीछे कीओर नहीं ठेलता अहि घर पर शिव की माँ उसे बगुले वाली कसरत करने के लिए प्रोत्साहित करती है| और उसकी मांसपेशी सुदृढ़ होती जा रही है|| अब वह अपने पाँव को पीछे बिना चल सकता है| यहाँ तब कि खेल में भी सक्रिय रहता है|

स्रोत:- जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची|

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