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रानी ने कष्ट क्यों झेला

इस भाग में एक कहानी के माध्यम से स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक किया गया है।

परिचय

यह कहानी है उत्तर प्रदेश राज्य के छोटे से कस्बे में रहने वाले एक दम्पति - रोहित तथा सरला – और उनकी बेटी की।जब उनकी घर में एक प्यारी सी बेटी ने जन्म लिया तो रोहित और सरला खुशी के मारे फूले नहीं समाए।प्यार से उन्होंने उसका नाम रानी रखा।रोहित की माँ बसंती देवी, हालाँकि पौत्री के जन्म से कोई ज्यादा खुश नहीं थी।उसकी तो इच्छा थी कि पहला बच्चा पौत्र होना चाहिए था।उसकी निगाह में तो बेटी होने के लिए केवल सरला जिम्मेवारी थी।उसने इसका सारा दोष उसी के सिर मढ़ दिया था|

क्या हुआ रानी के साथ

सरला और रोहित नई रानी की हर संभव रूप से देखभाल की।जो भी सलाह स्थानीय स्वास्थ्य कर्मचारी देते थे, सरला उनका पूरी तरह से पालन करती थी।हालाँकि बसंती देवी इसका विरोध करती थी।बसंती देवी इसके कर्मचारी ने बताया था, रानी को बीमारी से बचाव के विभिन्न टीके लगवाए जाएँ।वह कहती थी,”

...लड़कियाँ वैसे भी काफी तगड़ी होती हैं, उन्हें कुछ नहीं होता है|” यदा-कदा सरला अपने आपको असहाय महसूस करती थी क्योंकी यह जानते हुए भी कि उसकी सास गलत कह रही है, उसमें इतना साहस नहीं था की वह बसंती देवी का विरोध कर सके।परिणाम यह हुआ कि रानी को विभिन्न टीकों की पूरी खुराकें नहीं मिलीं ।समय गुजरता गया।रानी अब डेढ़ साल की हो गई थी.... अभी काफी स्वस्थ थी|

एक सुबह रानी को बुखार हो गया, जो धीरे-धीरे बढ़ता गया।उसकी आँखों तथा नाक से पानी बहने लगा।सरला को चिंता होने लगी।उसने अपने पति रोहित से बात की।दोनों न्र रानी की हालत के बारे में स्थानीय स्वास्थ्य कर्मचारी से मशविरा लेने की सोची परंतु बसंती देवी ने उनको यह कह कर रोक दिया कि”...... यह तो मामूली सा खाँसी – जुकाम है....... घरेलू उपचार से ठीक हो जाएगा... मैं अभी कोई घरेलू दवा बनाती हूँ|” तीन दिन  गुजर गए परंतु रानी की बीमारी और भी बदतर होती गई।जो कभी एक चुलबुली, हंसमुख बच्ची थी वह अब बहुत मुरझा गई थी।उसने खाना- पीना भी बंद कर दिया था।उसने खाना- पीना भी बंद कर दिय था।बुखार के चौथे दिन रानी के चेहरे पर लाल दाने निकलने लगे जो धीरे-धीरे बढ़ते ही गए।ऐसा लगता था जैसे कि उसके चेहरे को मच्छरों ने बुरी तरह से काटा हो।धीरे-धीरे ये लाल दाने उसकी छाती, पेट, बांहों आदि पर भी हो गए।उसकी खाँसी भी काफी बढ़ गई थी|

सरला को अब अत्यधिक चिंता हो गई।उसने रोहित को गाँव के स्वास्थ्य केंद्र से स्वास्थ्य कर्मचारी को लाने के लिए भेजा।वह जल्दी ही आ गया।जैसे ही उसने रानी को देखा, उसने खा कि रानी को खसरा (“मीजल्स”) हुआ है।उसने रानी की और भी जाँच की तो पाया की उसे गंभीर निमोनिया भी था – एक सामान्य जटिलता जो खसरा पीड़ित बच्चों में अक्सर होती है|

स्वास्थ्य कर्मचारी ने सरला और रोहित को सलाह दी कि वे रानी को स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर दाखिल करा दें ताकि गंभीर निमोनिया का उचित इलाज किया जा सके।रोहित की माँ ने इसका विरोध किया और कहा, .... रानी पर शीतला माता का प्रकोप है.... और वह दो - चार दिन में अपने आप ठीक हो जाएगी।इसके लिए कोई दवा की आवश्यकता नहीं है”।बसंती देवी ने रानी को ठोस आहार देना भी बंद कर दिया ताकि शीतला माता नाराज न जाए|

अगले दो दिनों में रानी की हालत बहुत ख़राब हो गई।अब सरला और रोहित ने कुछ करने का निर्णय ले लिया चाहे उसकी माँ नाराज ही क्यों न हो जाए।उन्होंने रानी को स्थानीय अस्पताल ले जाकर दाखिल करा दिया|

रानी की जान बचाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी व डॉक्टरों के लिए काफी मुश्किल काम रहा।तदापि, कुछ दिनों के सघन उपचार से उसे बचाया जा सका।जब रानी  की अस्पताल सी छुट्टी की गई तो उसे पहचानना कठिन था।वह बहुत कमजोर और दुबली हो गई थी।उसके चेहरे की चमक गायब हो गई थी।उसकी जान तो बच गई...... परंतु बहुत मुश्किल से|

जी हाँ, रानी खुश किस्मत थी परंतु भारत तथा अन्य विकासशील देशों में हजारों बच्चे इतने सौभाग्यशाली नहीं होते हैं।उनकी समय से पहले ही, दुखद रूप से मौत हो जाती है ........ और वह भी तब जब इन मौतों की पूरी तरह से रोकथाम की जा सकती है|

टीका क्यूँ था ज़रूरी?

जैसा कि हम जानते हैं, रानी की दादी ने उसे सभी टिके नहीं लगवाने दिए।इस कारण उसे बच्चों कोImportanceलगभग नौ महीने की आयु पर लगाए जाने वाला- खसरे से बचाव का टीका नहीं लग पाया।चूंकि रानी की खसरे से सुरक्षा नहीं थी, उसे यह घातक बीमारी हो गई जो हर साल, भारत व ऐसे ही विकाशील देशों में, हजारों बच्चों की जान ले लेती है।चाहे थोड़ी देर से ही सही, रानी के माता- पिता ने समझदारी का प्रदर्शन करते हुए, उसकी सही उपचार करा लिया, इसलिए वह बच गई।परंतु जैसा हमने पहले कहा है, हजारों अन्य बच्चे इतने सौभाग्यशाली नहीं होते हैं।उन्हें उसे एक सरल प्रक्रिया में अनके लाभ नहीं मिल पाते हैं जिसे “रोग प्रतिरक्षण” कहते हैं|

नियमित टीकाकरण


नियमित टीकाकरण पर देखिये यह ज्ञानवर्धक विडियो

स्रोत: वालेंटरी हेल्थ एसोशिएशन ऑफ इंडिया/ जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची

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