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वैक्सीन्स की प्रभावशीलता, सुरक्षा तथा दुष्प्रभाव

इस भाग में टीकों (वैक्सीन्स) के उचित रख-रखाव के बारे में बताया गया है|

परिचय

राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में प्रयोग की जाने वाली सभी वैक्सीन्स बहुत प्रभावशाली तथा लक्षित रोग की रोकथाम करने में सक्षम हैं| इनकी प्रभावशीलता को बरकरार रखने के लिए यह आवश्यक है कि इन्हें हमेशा सही तापमान पर रखा जाए| स्वास्थ्य विभाग “कोल्ड चेन उपकरणों” जैसे कि डीप फ्रीजर, रेफ्रीजरेटर, वैक्सीन कैरियर आदि के प्रयोग से इन्हें सही तापमान पर रखने के प्रयास करता है| अगर किसी भी कारणवश कोल्ड चेन गडबड़ा जाती है तो वैक्सीन्स ख़राब हो सकती है और ऐसी परिस्थिति में यह हो सकती है कि वैक्सीन सही समय पर दिए जाने के बावजूद भी, प्रतिरक्षित व्यक्ति को आवश्यक सुरक्षा न मिल पाए|

प्रभावशीलता

जब भी आप की वैक्सीन खरीदने या लगवाने जाएँ तो कोल्ड चेन के रख-रखाव के बारे में चौकन्ना होना आवश्यक है| कुछ लापरवाही दवाई विक्रेता (कैमिस्ट) कोल्ड चेन के बारे में ध्यान नहीं रखते हैं और अपनी दुकानों में वैक्सीन्स को रेफ्रीजरेटरों में बेहतरतीब ढंग से रखते है| ऐसी वैक्सीन्स भी न खरीदें जिनकी एक्सपायरी तिथि समाप्त हो चुकी हो| वैक्सीन्स के बारे में एक बात और हमेशा याद रखें कि कोई भी वैक्सीन शत -प्रतिशत प्रभावशाली नहीं होती है| ओ.पी.वी. का ही उदहारण लें| आपको कुछ ऐसे बच्चे मिल सकते हैं जिन्हें सही समय, पर पर्याप्त खुराकों में ओ.पी.वी. (पोलियो ड्रॉप्स) मिली होती हैं| ऐसा इसलिए होता हैं क्योंकी ओ.पी.वी. की जैविक प्रभावशाली लगभग 70-80 प्रतिशत ही होती है| अच्छी बात यह है कि ऐसे मामले विरले ही होते हैं और इनमें बीमारी अधिक गंभीर नहीं होती है|

सुरक्षा तथा दुष्प्रभाव

लगभग सभी वैक्सीन्स के थोड़े- बहुत दुष्प्रभाव (“साइड- - इफेक्ट्स”) होते हैं जो कि मामूली से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं| तदापि, ये सारी वैक्सीन्स (टीके) काफी सुरक्षित हैं| दुष्प्रभावों को मामूली से उपचार से ठीक किया जा सकता है| दुष्प्रभाव होना इसका संकेत है कि वैक्सीन अपना असर दिखा रही है|

नीचे राष्ट्रीय टीकाकरण में प्रयुक्त होने वाली वैक्सीन के मुख्य दुष्प्रभावों के लक्षणों का संक्षिप्त विवरण दिया जा रहा है| साथ में उनके उपचार के बारे में भी बताया गया है|

ओरल पोलियो वैक्सीन (ओ.पी.वी.) पोलियो ड्रॉप्स

दुष्प्रभाव :

लगभग कोई नहीं|

डी. पी. टी./ डी. टी. वैक्सीन

दुष्प्रभाव :

इंजेक्शन लगाए जाने के स्थान पर दर्द, सूजन तथा थोड़ी से लाली हो सकती है| इंजेक्शन लगने कुछ घंटो बाद बच्चे को हल्का बुखार हो सकते है| ये सारे दुष्प्रभाव सामान्य हैं और चिंता की बात नहीं है| आम तौर पर डी.पी.टी या डी. टी. वैक्सीन प्राप्त करने वाले हर बच्चे को एहतियात के तौर पर पेरासिटामॉल की गोली या शर्बत दिया जाता है|

उपचार

डी.पी.टी. या डी.टी. का इंजेक्शन लगवाने के एक या दो घंटे बाद बच्चे को पेरासिटामॉल की गोली या शर्बत दें| खुराक के बारे में इंजेक्शन देने वाले स्वास्थ्य कर्मचारी की सलाह मानें|

सावधानी/ चेतावनी :

1. आमतौर पर ऊपर बताए गए लक्षण 2-3 दिनों में ठीक हो जाते हैं| अगर वे ठीक नहीं होते हैं या इंजेक्शन लगाए जाने का स्थान लाल, गर्म या सूज जाता है तो शीघ्र ही किसी स्वास्थ्य कर्मचारी से परामर्श करें|

2. अगर बच्चे को पूर्व काल में कभी भी मिरगी के दौरे पड़े हैं तो डी.पी.टी. वैक्सीन न लगवाएं| इस बारे में स्वास्थ्य कर्मचारी को पहले से ही बता दिन| ऐसे बच्चे को डी.पी.टी.के स्थान पर डी.टी. वैक्सीन दी जानी चाहिए|

टी.टी. वैक्सीन

दुष्प्रभाव : इंजेक्शन लगाए जाने का स्थान थोड़ा सूज सकता है और वहाँ दर्द हो सकता है| ऐसा होने पर ऐसा होने पर स्वास्थ्य कर्मचारी की सलाह के अनुसार पेरासिटामॉल की गोली लें|

मीजल्स वैक्सीन (खसरे का टीका)

दुष्प्रभाव :

इंजेक्शन लगने के 6-7 दिनों बाद बच्चे को हल्का बुखार तथा शरीर पर हल्के लाल दाने हो सकते हैं|

उपचार

उपचार की आवश्यकता नहीं है| ये लक्षण अपने आप ठीक हो जाते हैं|

बी.सी.जी. वैक्सीन

इस वैक्सीन को परंपरागत रूप से बायें कंधे के गोल भाग में लगाया जाता है| इंजेक्शन लगने के 3-4 सप्ताह के बाद उस स्थान पर एक छोटा सा दाना आकार में थोड़ा बड़ा जो जाता है और उसमें साफ तरल पदार्थ भर जाता है  (फुंसी के दाने की भांति) इसके पश्चात अगेल 1-2 दिनों में यह फूट जाता है| और वहाँ एक छोटा सा अल्सर बन जाता है अगले 5-7 दिनों में यह जख्म अपने आप भर जाता है और उस स्थान पर एक छोटा सा जख्म का निशान (“स्कार”) बन जाता है जो पूरी जिंदगी वहाँ बना रहता है| ये सब बी.सी.जी. इंजेक्शन के बाद होने वाली सामान्य प्रतिक्रियाएं हैं|

तदापि, अगर इंजेक्शन लगवाने के कुछ दिनों बाद ही वहाँ दाना या जख्म बन जाता है या वहाँ बनने वाला सामान्य अल्सर (जैसा कि ऊपर बताया गया है) 12 सप्ताह गुजरने के बाद भी नहीं भरता है तो शीघ्र ही किसी डॉक्टर से सलाह लें| यह इस बात का संकेत हो सकता है कि बच्चे को शायद पहले से ही टी.बी. के उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है|

दुष्प्रभाव

बी.सी.जी. के कारण, इंजेक्शन लगने के स्थान पर अल्सर (जख्म) बन सकता है (जैसे कि ऊपर बताया गया है); बगल में गिल्टियाँ हो सकती हैं तथा हल्का बुखार जो सकता है|

उपचार

ऐसे लक्षण होने पर किसी डॉक्टर से सलाह लेना ही अच्छा है| अल्सर पर कोई पदार्थ या दवा न लगाएं|

लगभग सभी वैक्सीन्स के थोड़े- बहुत दुष्प्रभाव (साइड- इफेक्ट्स) होते हैं जो कि मामूली से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं| तदापि, ये सारी वैक्सीन्स (टीके) काफी सुरक्षित हैं|

स्रोत: वालेंटरी हेल्थ एसोशिएशन ऑफ इंडिया/ जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची

3.0796460177

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