सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

होम (घर) / स्वास्थ्य / बाल स्वास्थ्य / शैशवावस्था : शारीरिक, पेशीय एवं स्नायविक विकास
शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

शैशवावस्था : शारीरिक, पेशीय एवं स्नायविक विकास

इस पूरे भाग में शिशु के जन्म से लेकर 2 वर्षों तक छोटे से छोटे शारीरिक विकास की विस्तृत जानकारी दी गयी है |

नवजात शैशवावस्था (जन्म से एक माह तक)
इस भाग में शिशु के जन्म से एक माह तक विकास की गति के बारे में जानकारी दी गयी है|
नवजात शिशु की विविध दशाएँ
इस भाग में शिशु के शारीरिक संरचनाओं के विकास का उल्लेख किया गया है|
नवजात शिशु की चेष्टाएँ
इस पूरे भाग में शिशु के क्रमिक विकास के anअंतर्गत शिशु के दूध पीने की क्रियाएँ बाल रूदन के मनोवैज्ञानिक कारण इस सब की जानकारी दी गयी है|
नवजात का व्यवहारपरक मूल्यांकन
इस भाग में शिशु के व्यवहारगत विशेषताएँ वैयक्तिक एवं सांस्कृतिक भिन्नताओं की जानकारी दी गयी है|
नवजात की क्षमताएँ
इस भाग में शिशु के नये नये व्यवहार का उल्लेख किया गया है ।
आदतीकरण एवं अनादतीकरण
इस भाग में शिशु के आयु वृद्धि के साथ – साथ अनुकरण करने की क्षमता बढ़ती जाती है| लेकिन अपरिपक्वा शिशु के जन्म के साथ साथ बहूत सारी कठिनाइयाँ भी उत्पन्न होती है।
भावात्मक एवं शारीरिक देखभाल
इस भाग में अपरिपक्व शिशु में अनेक प्रकार की शारीरिक, मानसिक एवं व्यवहारपरक समस्याएं पायी जाती हैं| इसका प्रभाव उसके भावी विकास पर होता है।
शैशवावस्था (1 माह – 2 वर्ष तक) : शारीरिक, गत्यात्मक एवं स्नायविक विकास
इस भाग में शिशुओं के महत्वपूर्ण परिवर्तनों का उल्लेख किया गया है |
शारीरिक विकास
इस भाग में शिशुओं के लम्बाई, वजन, दांतों का उगना, चलना आदि होने वाले परिवर्तनों के बारे में बताया गया |
शारीरिक आकार में परिवर्तन
इस भाग में शिशुओं की वृद्धि का उल्लेख किया गया|

नेवीगेशन
Back to top