सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

होम (घर) / स्वास्थ्य / बाल स्वास्थ्य / शैशवावस्था : शारीरिक, पेशीय एवं स्नायविक विकास / शैशवावस्था (1 माह – 2 वर्ष तक) : शारीरिक, गत्यात्मक एवं स्नायविक विकास
शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

शैशवावस्था (1 माह – 2 वर्ष तक) : शारीरिक, गत्यात्मक एवं स्नायविक विकास

इस भाग में शिशुओं के महत्वपूर्ण परिवर्तनों का उल्लेख किया गया है |

परिचय

दो वर्षो में उसमें महत्वपूर्ण परिवर्तन बड़ी तेजी से आते हैं यथा: रेंगना या खिसकना, बैठना, चलना और बोलना| इसके अतिरिक्त अन्य परिवर्तन भी आते हैं जिन्हें स्पष्टत: नहीं देखा जा सकता| प्रत्येक शिशु अपने ढंग से अपनी गति एवं सीमा में विकसित होता है| शिशु की आयु वृद्धि के साथ ही उसकी वैयक्तिकता: अधिक नियमित एवं सुस्पष्ट होती जाती है|

 

भूमिका

जैसा कि अनुभाग में वर्णित है, एक नवजात शिशु जन्म से ही अपने परिवेश के प्रति संवेदना और अनुक्रिया की क्षमता रखता है| उसमें चयनात्मक अवधान एवं अधिगम की भी क्षमता होती है परंतु वह शरीरिक रूप से अपरिपक्व एवं पारिश्रत होता है| उसमें संज्ञानात्मक क्षमता सीमित होती है| परंतु बाद के दो वर्षो में उसमें महत्वपूर्ण परिवर्तन बड़ी तेजी से आते हैं यथा: रेंगना या खिसकना, बैठना, चलना और बोलना| इसके अतिरिक्त अन्य परिवर्तन भी आते हैं जिन्हें स्पष्टत: नहीं देखा जा सकता| ऐसे परिवर्तन शिशु में आन्तरिक स्तर पर घटित होते हैं| यद्यपि विकास आयु के प्रतिमानों के अनुरूप ही होता है तथापि प्रत्येक शिशु अपने ढंग से अपनी गति एवं सीमा में विकसित होता है| शिशु की आयु वृद्धि के साथ ही उसकी वैयक्तिकता: अधिक नियमित एवं सुस्पष्ट होती जाती है|

इस अध्याय में शैशवकाल में होने वाले महत्वपूर्ण शारीरिक, पेशीय एवं स्नायविक विकास वर्णन किया गया है| प्रसिद्ध विकास मनोवैज्ञानिक गैसल ने शिशुओं पर किये गये दीर्घकालिक अनुसन्धान से प्राप्त ज्ञान के आधार पर उनके विकास का संरूप तथा विशिष्टताओं की विशद व्याख्या अपनी दो पुस्तकों ‘द फर्स्ट फाइव इयर्स आफ लाइफ’ (1940) एवं ‘द चाइल्ड फ्राम फाइव टू टेन एंड यूथ : द इयर्स फ्राम टेन टू सिक्सटीन (1956)’ में किया गया है, जिससे शिशु में निहित विकास के विविध संरूपों एवं क्षमताओं पर प्रकाश पड़ता है|

स्रोत: जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची

2.93333333333

Dharmendra singh yadav from BHU varanasi . Live in fadanpur ghazipur . May 14, 2019 05:44 PM

सर कृपया कोहलवर्ग के नैतिक सिद्धान्त को स्Xस्टीकरण कीजिये । ।। ध्न्यवाद ।।

neha lohani Dec 16, 2018 07:22 PM

ache se samjaye....

Jitendra Prajapati Nov 22, 2018 05:20 AM

ग्राम पोस्ट Noorpur Jila Ghazipur

Satyapal yadav Jun 02, 2018 01:29 PM

Kishorawastha ki umra ka nirdharan 12se22saal tak ki umra main karna hi uchit hai. Kyon ki 12se19 ki umra main kishorawastha ke poore lakshan nahi mil pate.

पूजा मिश्रा Dec 28, 2017 09:30 AM

कपया आप शैशवावसथा के मानसिक विकास के बारे मे पूरी जानकारी दे

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
Back to top

T612019/08/22 01:28:33.776043 GMT+0530

T622019/08/22 01:28:33.797628 GMT+0530

T632019/08/22 01:28:33.798331 GMT+0530

T642019/08/22 01:28:33.798593 GMT+0530

T12019/08/22 01:28:33.752683 GMT+0530

T22019/08/22 01:28:33.752866 GMT+0530

T32019/08/22 01:28:33.753005 GMT+0530

T42019/08/22 01:28:33.753140 GMT+0530

T52019/08/22 01:28:33.753228 GMT+0530

T62019/08/22 01:28:33.753304 GMT+0530

T72019/08/22 01:28:33.754018 GMT+0530

T82019/08/22 01:28:33.754207 GMT+0530

T92019/08/22 01:28:33.754412 GMT+0530

T102019/08/22 01:28:33.754626 GMT+0530

T112019/08/22 01:28:33.754671 GMT+0530

T122019/08/22 01:28:33.754762 GMT+0530