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अन्य रोग

इस भाग में जानवरों का काटना, उम्र का बढ़ना एवं सूर्याघात के बारे में चर्चा की गई है

जानवरों का काटना

जानवरों के काटने से साधारण घाव से लेकर जीवन के लिए खतरनाक संक्रमण तक हो सकता है।

कारण

सबसे अधिक कुत्ता काटने का मामला आता है। इसके बाद बिल्ली के काटने का मामला आता है। कुत्ते की अपेक्षा बिल्ली के काटने से संक्रमण का खतरा अधिक होता है। अन्य जानवरों में सांप और बंदर का काटना शामिल है। जानवरों के काटने से सबसे अधिक चिंता रैबीज की आशंका की होती है। रैबीज की सर्वाधिक आशंका कुत्ते के काटने से पैदा होती है।

लक्षण

किसी जानवर के काटने से भले ही त्वचा फटी न हो, यह नीचे की हड्डियों, मांसपेशियों, छोटी नलिकाओं या नसों को दबाने या तोड़ने का कारण बन सकती है। यदि त्वचा फट गयी हो, तो संक्रमण का अतिरिक्त खतरा होता है।

संक्रमण के लक्षण निम्नलिखित हैं-

  • घाव के आसपास त्वचा गर्म होना
  • सूजन
  • दर्द
  • मवाद आना
  • छिद्रयुक्त घाव के आसपास त्वचा लाल होना
  • त्वचा में संक्रमण
  • गले की ग्रंथियों में सूजन
  • रैबीज व बिल्ली के खरोंच का बुखार

छोटी नलिकाओं या नसों को क्षति के लक्षण में शामिल हैं-

  • अंगुलियों को सीधा करने या मोड़ने में कठिनाई
  • अंगुली के छोर पर सूनापन

तत्काल प्राथमिक उपचार

काटे हुए स्थान पर मुंह नहीं लगाना चाहिए। मुंह में बैक्टीरिया होते हैं, जिनसे संक्रमण हो सकता है।

सतही घाव

सतही घाव के आसपास के इलाके को साबुन-पानी या हाइड्रोजन पेरोक्साइड या अल्कोहल जैसे किसी एंटी सेप्टिक से अच्छी तरह से धोना चाहिए। कोई एंटी बायोटिक मलहम घाव पर लगा कर उसे बिना चिपकनेवाली पट्टी से ढंक देना चाहिए। घाव के आसपास के इलाके पर नजर रखनी चाहिए कि कहीं छोटी नलिकाए या नसों को नुकसान तो नहीं पहुंचा है। घाव में थोड़ी खुजली हो सकती है। घाव एक सप्ताह से लेकर 10 दिन में सूख जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है या यदि छोटी नलिकाओं व नसों के क्षतिग्रस्त होने अथवा संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं, तो चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

रक्तस्राव की उपस्थिति

किसी साफ कपड़े से घाव को सीधे दबाना चाहिए और जहां से खून बह रहा हो, उसे ऊपर उठा कर रखना चाहिए। यदि रक्तस्राव अधिक नहीं हो, तो घाव की सफाई नहीं करनी चाहिए। घाव को साफ पट्टी से ढंक कर चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। यदि घाव चेहरे, सिर या गरदन पर है, तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।

सर्पदंश

सांप बाहरी तापमान के अनुरू प अपने शरीर का तापमान बढ़ा नहीं सकते। इसलिए वे 25 से 32 डिग्री तापमान में सर्वाधिक सक्रिय होते हैं।

  • काटने के दौरान विष सांप के मुंह में मौजूद ग्रंथि से निकली नस के जरिये उसके दांत में आता है और फिर उसके शिकार के शरीर में प्रवेश कर जाता है। सांप का विष कई तरह के रसायनों के मिश्रण से बनता है और मानव शरीर पर इसका प्रभाव भी अलग-अलग होता है। साधारण शब्दों में इस विष को चार वर्गों में बांटा जा सकता है-
    1. साइटोटाक्सिन, जो स्थानीय उतकों को क्षतिग्रस्त करता है
    2. हीमोटाक्सिन, जो आंतरिक रक्तस्राव का कारण बनता है
    3. न्यूरोटाक्सिन, जो स्नायुतंत्र को क्षतिग्रस्त करता है
    4. कार्डियोटाक्सिन, जो सीधे हृदय पर असर करता है
  • विषैले सांपों के आठ हजार प्रकार होते हैं। सर्वाधिक विषैले सांप दो परिवार से आते हैं। इनमें कोबरा (नाग) और वाइपर (करैत) शामिल हैं।

लक्षण

विषैले सांप के काटने से कई प्रकार के प्रभाव पड़ते हैं। इसमें साधारण घाव से लेकर जीवन के लिए खतरनाक असर और मौत तक शामिल है। विषैले सांप के काटने का पता चलना ही कभी-कभी खतरनाक साबित होता है। पीड़ित को कभी-कभी शुरू  में कोई तकलीफ नहीं होती, लेकिन अचानक उसे सांस लेने में दिक्कत होती है और गहरा आघात लगता है।
सांप के विष के लक्षण और संकेत को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है-

  • स्थानीय प्रभाव- वाइपर और कुछ कोबरा के काटने से दर्द होता है और घाव में सूजन आ जाता है। घाव से रक्तस्राव भी होता है। कोबरा के विष घाव के आसपास के उतकों को मार देते हैं।
  • रक्तस्राव- वाइपर के काटने से शरीर के  भीतरी अंगों, जैसे मस्तिष्क या गुदा से रक्तस्राव हो सकता है। रोगी के घाव या शरीर में मौजूद किसी पुराने घाव अथवा मुंह से लगातार रक्तस्राव हो सकता है। यदि इसे रोका नहीं जाये, तो रोगी की मौत हो सकती है।
  • स्नायुतंत्र पर प्रभाव- कुछ सांप के विष सीधे स्नायुतंत्र पर असर डालते हैं। ये विष बहुत जल्दी सक्रिय होते हैं और इससे रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है और उसकी तत्काल मृत्यु हो जाती है। शुरुआत में रोगी को देखने में परेशानी या बेहोशी की शिकायत हो सकती है।
  • मांसपेशियों का मरना- कुछ सांपों के विष के कारण शरीर की मांसपेशियां मर जाती हैं। मृत मांसपेशियां किडनी में जमा होती हैं। किडनी अधिक प्रोटीन को बाहर निकालने का प्रयास करता है और अंततः किडनी क्षतिग्रस्त हो जाता है।
  • आंख- थूकनेवाले कोबरा अक्सर अपने शिकार की आंखों में विष थूक देते हैं, जिससे आंखें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं या उनमें दर्द हो सकता है।

चिकित्सकीय सहायता कब लें ?

सर्पदंश के मरीज को तत्काल अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाना चाहिए, लेकिन यदि यह पता चल जाये कि सांप विषैला नहीं था, तो ऐसा करने की जरू रत नहीं है। याद रखें कि सांप की पहचान में गलती खतरनाक हो सकती है। यदि सांप विषैला नहीं है, तो भी इसके घाव की सावधानी से देखरेख की जरूरत होती है। मरीजको टिटेनस का टीका लगवाना चाहिए।

रैबिज की रोकथाम आपके हाथों में है

लक्षणः

यह रैबिज का सबसे सामान्य प्रकार है जिसमें उच्च प्रेरक क्रिया, कंपन, अतिसंकुचन और छोटी छोटी सांसे देखी जा सकती हैं। ग्रसिका(गुलट) में अतिसंकुचन के कारण रोगी के लिए निगलना मुश्किल हो जाता है। हाइड्रोफोबिया के बाद एयरोफोबिया और अत्यधिक मात्रा में लाला का गिरना।

रैबिज किस प्रकार फैलता है?

रैबिज सामान्यतः किसी रैबिज वाले जानवर के चाटने या काटने से होता है।
इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि सभी गर्म खून वाले जानवर (वार्म ब्लडेड एनिमल) रैबिज वायरस से संक्रमित हो सकते हैं और इसे संचारित कर सकते हैं। रैबिज वायरस का संचारण अंग प्रतिरोपण के माध्यम से भी संभव है। रैबिज वायरस न केवल फटी त्वचा बल्कि अक्षुण्ण श्लेष्मिका को भी बेध सकते हैं।

क्या एक से दूसरे मनुष्य में यह वायरस फैल सकता है?

मनुष्य से मनुष्य में संचारण, हालांकि सिद्धांत रुप से संभव है, लेकिन इसके बहुत कम मामले सामने आए हैं क्योंकि इस संबंध में बहुत ही कम रिपोर्टें प्राप्त हुई हैं। फिर भी इस बात को ध्यान में रखते हुए कि रैबिज के रोगी के शरीर के पूरे द्रव से वायरस की उपस्थिति देखी जा सकती है, ऐसे रोगियों का इलाज करते समय अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए (जैसे दस्तानों और मास्क का उपयोग)।

रैबिज की रोकथाम आपके हाथों में है

रैबिज की सामान्य ऊष्मायन इनक्यूबेशन की अवधि क्या है और कौन कौन से घटक इस अवधि का निर्धारण करते हैं

काटने के स्थान पर जमा होने पर वायरस मांसपेशियों के रेशे में प्रवर्धित होते हैं। कुछ दिनों अथवा सप्ताहों की अवधि के बाद यह परिधीय तंत्रिका में प्रवेश करता है और मस्तिष्क की ओर बढ़ता है जो कि इसका मुख्य लक्ष्य अंग है। ऊष्मायन अवधि कई घटकों के आधार पर भिन्न-भिन्न होती है। जैसेः

  • काटने का स्थान
  • जमा वायरस की मात्रा
  • वायरस की विषाक्तता
  • पीड़ित की रोध क्षमता स्थिति

सामान्यतः मस्तिष्क के पास अर्थात सिर, गला, चेहरा अथवा चरम स्थान जैसे उच्च शक्तिह्रास क्षेत्र में काटने पर ऊष्मायन अवधि कम होती है।

रैबिज हमेशा घातक क्यों होते हैं?

रैबिज के लक्षण सामान्यतः तभी दिखाई देते हैं जब वायरस तंत्रिका तंत्र को पहले ही प्रभावित कर चुका होता है। चूंकि तंत्रिका ऊतक में उपलब्ध वायरस तक कोई भी मानव प्रतिरक्षा प्रणाली नहीं पहुंच सकती, इसलिए ये जल्दी जल्दी बढ़ते जाते हैं और अंत में मृत्यु हो जाती है।

रैबिज की रोकथाम का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

चूंकि रैबिज का इलाज नहीं किया जा सकता इसलिए निम्न प्रकार इसकी रोकथाम की जानी चाहिएः

  • भटके जानवरों से बचना
  • विवृत्ति पूर्व टीकाकरण(प्रोफाइलेक्टिक प्री-एक्सपोज़र इम्यूनाइजेशन)
  • विवृत्ति पश्चात प्रथमोपचार का पालन तथा इसके बाद क्रियाशील और निष्क्रिय टीकाकरण

रैबिज के टीकाकरण के दौरान कौन कौन सी दवाइयां नहीं लेनी चाहिए

वे सभी दवाइयां जो व्यक्ति के प्रतिरक्षण प्रतिक्रिया को समाप्त कर सकती है, नहीं लेनी चाहिए। उदाहरणः

  • स्टेरायड
  • मलेरिया निरोधी दवाइयां
  • आल्कोहल
  • प्रतिरक्षक समापक एजेंट
  • कैंसर चिकित्सा

निष्क्रिय टीकाकरण की क्या भूमिका है?

निष्क्रिय टीकाकरण का अर्थ है- तैयार विशिष्ट रोग प्रतिरक्षक औषधि का प्रयोग करना जिससे कि रोगी की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली अपने आप सक्रिय प्रतिरक्षक उत्पादन करना आरंभ कर दे। यह अवधि काटने के दिन से लगभग सात दिन तक की होती है। इस बीच टीकाकरण की प्रतिक्रिया में निष्क्रिय टीकाकरण के कारण जिस रोगी को गंभीर रूप से काटा गया है उसके लिए कम ऊष्मायन(इनक्यूबेशन) वाली अवधि असुरक्षित रह जाती है।

रैबिज से पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चत करने के लिए क्या कदम आवश्यक हैं?

अच्छी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम आवश्यक हैं अर्थात घाव प्रबंधन, सक्रिय टीकाकरण और निष्क्रिय टीकाकरण (अधिक काटने के मामलों में)। फिर भी इस बात को भी दिमाग में रखना चाहिए कि सामान्य रोग प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति पर(रोगप्रतिरक्षा समाप्त स्थिति में नहीं) ही टीका की पर्याप्त रूप से प्रतिक्रिया होगी।

क्या टीकाकरण के दौरान शराब से बचना चाहिए?

अत्यधिक शराब पीने से रोग प्रतिरक्षक प्रतिक्रिया के समाप्त होने की संभावना रहती है। अतः यह वांछनीय है कि सक्रिय टीकाकरण के दौरान रोगी को अत्यधिक शराब नहीं पीना चाहिए।

उम्र का बढ़ना

उम्र का बढ़ना मनुष्य के जन्म लेने के साथ ही शुरू हो जाता है। एक शिशु विकसित और परिपक्व होकर वयस्क होता है। वैसा चरण, जहां यह विकास रुक जाता है और अंततः मनुष्य की मौत हो जाती है, एजिंग या बूढ़ा होना कहलाता है।
बूढ़े होने की प्रक्रिया के दौरान कुछ परिवर्तन इस प्रकार के होते हैं

मस्तिष्क और स्नायु तंत्र प्रणाली
लोग जैसे-जैसे बूढ़े होते हैं, उनके मस्तिष्क की कोशिकाएं भी कम होती जाती हैं। इस स्थिति से निबटने में कई चीज सहायक होते हैं। इन परिवर्तनों के कारण मस्तिष्क के काम करने की गति भी धीमी हो जाती है। इसलिए बूढ़े व्यक्ति अपना काम धीरे-धीरे करते हैं। उनकी शब्द क्षमता भी कम होने लगती है और याददाश्त कमजोर होती जाती है। सीखने की उनकी क्षमता भी कमजोर हो जाती है।

करीब 60 साल की आयु के बाद रीढ़ में कोशिकाओं की संख्या कम होने लगती है। इसके कारण बूढ़े व्यक्तियों में संवेदनशीलता कम होने लगती है। इसलिए बूढ़े लोग चोट या किसी अपंगता के अधिक शिकार होते हैं।

प्रतिरोधी प्रणाली
व्यक्ति जैसे-जैसे बूढ़ा होता है, उसकी प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती जाती है। इसलिए बुढ़ापे में कैंसर या न्यूमोनिया या इनफ्लुएंजा जैसी संक्रामक बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।

सूर्याघात

सूर्याघात क्या है ?

सूर्याघात, जिसे उष्माघात भी कहते हैं,एक जीवन-घातक दशा है जिसमें शरीर का उष्मा-नियंत्रक तंत्र उच्च तापमानों से सामना होने पर काम करना बंद कर देता है।ऐसा तब होता है जब भीषण गतिविधि या बहुत गर्म वातावरण के कारण शरीर अपने भीतर की अतिरिक्त गर्मी से छुटकारा पाने में असमर्थ हो जाता हैं।ऊचे तापमानों के कारण शरीर के प्रमुख अवयव काम करना बंद कर देते हैं।

उष्माघात गर्मी से संबंधित समस्याओं में सबसे गंभीर है,जो अकसर गर्म वातावरणों में अपर्याप्त द्रव सेवन के साथ कसरत या भारी काम करने के परिणामस्वरूप होता हैं।

सूर्याघात किसे होता है ?

हालांकि सूर्याघात किसी को भी हो सकता है फिर भी कुछ लोग अधिक संवेदनशील होते हैं।इनमें बच्चे,एथलीट,मधुमेह के रोगी,शराबी और ऐसे लोग जिन्हें भीषण गर्मी और धूप की आदत नहीं हो,शामिल हैं।कुछ दवाइया भी उष्माघात होने की संभावना बढ़ा देती है।

सूर्याघात के चिन्ह और लक्षण क्या हैं?

आतपघात का मुख्य चिन्ह है,व्यक्तित्व में परिवर्तन से लेकर भ्रांति और कोमा तक मानसिक स्थिति में बदलावों के साथ शरीर के तापमान का अत्यधिक बढ़ जाना (104 डिग्री फा. से अधिक).त्वचा गर्म और सूखी रह सकती है –यद्यपि कसरत से उत्पन्न उष्माघात में त्वचा गीली रह सकती हैं।

अन्य चिन्ह और लक्षणों में शामिल हैं:

  • तेज हृदयगति/ नाड़ी
  • तेज और उथली श्वासक्रिया
  • उच्च या कम रक्तचाप
  • पसीने का बंद हो जाना
  • चिड़चिड़ापन,भ्रांति या बेहोशी
  • चक्कर आना या सिर का हल्कापन
  • सिरदर्द
  • मतली (उल्टी)
  • मूर्च्छा,जो अधिक उम्र के वयस्कों में पहला चिन्ह हो सकता है

यदि सूर्याघात बना रहा तो निम्न गंभीर लक्षण हो सकते हैं

  • मानसिक भ्रम
  • अतिसंवातन
  • शरीर में ऐठन
  • भुजाओं और पैरों में दर्दमय आकुंचन
  • दौरे
  • कोमा

प्राथमिक उपचार

  • रोगी को धूप से हटाकर छांव या वातानुकूलित स्थान में ले जाएं]
  • रोगी को लिटा दें और पैरों को जरा सा ऊंचा उठा दें।
  • कपड़ों को ढीला कर दें या निकाल दें।
  • पीने को ठंडा पानी या अन्य बिना शराबवाला या कैफीन रहित पेय दें।
  • ठंडे पानी का स्प्रे या स्पंज करके रोगी को ठंडा करें।
  • रोगी की ध्यानपूर्वक निगरानी करें.आतपश्रांति तेजी से उष्माघात में बदल सकती हैं।

यदि ज्वर 102 डिग्री फा. से अधिक हो जाय,और मूर्च्छा,भ्रांति या दौरे पड़ने लगें तो तुरंत आपात्कालीन डाक्टरी मदद लें।

सूर्याघात की रोकथाम कैसे करें ?

सूर्याघात से बचने का लिये,बड़ी मात्रा में तरल पदार्थ पियें और घर के बाहर की गतिविधियों के समय शरीर को सामान्य तापमान पर रखें.शराब और कैफीन से दूर रहें क्यौंकि उनसे निर्जलीकरण हो सकता है.हल्के रंग के और ढीले कपड़े पहनें तथा द्रव पीने और शरीर का जलस्तर बनाए रखने के लिये ब्रेक लेते रहें.

स्रोत: मेयोक्लिनिक.कॉम

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Sushilkumar rane Jan 17, 2017 10:07 PM

Muje billi ne do din pahle kaata h to mai kya. karu kuch smj me nahi a raha h our muje drink karni ki lat lagi hue h to muje chodna h Maine rabbies ka injection le liya hu but drink nahi chut rahi h Dr ne MNA kiye h to plz ap ki Raye kya h

Hitendra kumar Jul 10, 2016 05:14 PM

Thali or corrier ko mila ke kitne pese lete ho

बक़र Bijnori Nov 11, 2015 10:58 PM

हमारे यहाँ साँप, बिच्छु, कुत्ता, बन्दर, गीदड़, छिपकली, मधुमख्खी, बिल्ली, नेवला, सियार, रीछ लँगूर, गिलहरी, घोड़ा, मेंढक, ऊदबिलाव, लोमड़ी आदि जैसे के नये वे पुराने से पुराने काटने का एकदम मुफ़्त में ईलाज किया जाता है। चाहे ये ज़हरीले जानवर किसी इन्सान या किसी पालतू जानवर जैसे- बकरी, घोड़ा, भैंस, गाये, आदि के ही कियों ने काटे। हम लोग मरीज़ की कमर पर काशी की थाली पढ़कर लगाते हें। अगर ज़ेहर होता हे तो थाली चुम्बक की तरह मरीज़ की कमर पर चिपक जाती है और तब तक नहीँ हटती जब तक मरीज़ क जिस्म से सारा ज़हर ना चूस ले। ये हमारा गारन्टी का 100% पेटेन्ट ईलाज है। मरीज़ को किसी तरह की कोई परेशानी नहीँ होती और मरीज़ आसानी से एक बार में ही पूरी तरह से ठीक हो जाता है। दोबारा आने की ज़रूरत नहीँ होती। अगर आपको या आपके किसी पालतू जानवर को इनमें से कोई भी ज़हरीली चीज़ काट ले तो आप बिना झिझक और बिना डरे हमारे पास चले आयें। किसी बाबा या झाड़-Xूँकवाले के चक्कर में आकर अपना वक़्त और पैसा बर्बाद ना करें। हमसे आकर मिलें या हमें फोन पर बतायें इंशाल्लाह आपकी इस तरह की परेशानी का एकदम हल और फ्री ईलाज किया जायेगा। चाहे आप किसी भी राज्य में रहते हों या कहीँ भी काम करते हों हमारे यहाँ आप तक डाक दुवारा या कोरियर से थाली भेजने की भी सुविधा है। आपको केवल थाली और कोरियर का ही पैसा देना होगा बाक़ी किसी तरह का और कोई पैसा नहीँ देना होगा। बस आप हमें अपना पुरा पता बता दीजिये। थाली आपको भेज दी जायेगी। नोट- हमारे यहाँ कुत्ते के काटने पर जो हड़क उठती हे उसके उठने से पहले पहले ही ईलाज किया जाता है। बाद में नहीँ। यानी रैबीज से पहले-पहले । हमारा व्हाट्सअप और कॉन्टेक्ट नंबर ये है। +91XXX8138 पता है--बाक़र हुसैन अंसारी ग्राम बग़दाद अन्सार पोस्ट हबीब वाला तहसील धामपुर ज़िला बिजनोर यूपी पिन कोड 246761 और थाली मंगाने के लिये पैसा भेजने को बैंक खाता नंबर ये है। Baqar Hussain S% Shaukat Ali A/C No. 30XXX301 State Bank Of india Branch Dhampur District Bijnor Uttarpradesh IFSC COD- SBINO000633

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