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इबोला

इबोला बीमारी की सामान्य जानकारी को इस शीर्षक के अंतर्गत शामिल किया गया है।

भूमिका

इबोला एक बीमारी है जो इबोला नामक वायरस से होती है। हाल ही में इबोला पश्चिम अफ़्रीकी देशों में और लाइबेरिया में फैला हुआ है। इबोला की वजह से कई रोगियों की जान जा चुकी है। इबोला रोग की पहचान लगभग 40 साल पहले सूडान के ईबोला नदी के पास स्थित एक गांव में हुई थी। इसी कारण इसका नाम इबोला पड़ा।

इबोला वायरस का आकार माइक्रोस्कोप से देखने पर एक मुड़े हुए धागे जैसा दिखता है।इबोला वायरस की 5 प्रकार की किस्में हैं जिनमें से 4 किस्में इंसानों के लिए खतरनाक होती हैं। अभी तक इबोला से बचने के लिए कोई दवा या टीका/वैक्सीन का निर्माण नहीं हुआ है। इबोला को हेमोराजिक फीवर भी कहते हैं क्योंकि इबोला का संक्रमण होने पर शरीर में कही से भी रक्तस्त्राव/ब्लीडिंग हो सकती है। इबोला  का संक्रमण होने पर लगभग 90 % रोगियों की मृत्यु हो जाती है।

इबोला कैसे फैलता है?

इबोला का संक्रमण कई तरह से हो सकता है। इसकी संक्षिप्त जानकारी नीचे दी गयी है-

  1. इबोला वायरस से संक्रमित जानवर जैसे की बंदर, चमदागड़ या सूअर इत्यादि जानवरों के या संक्रमित रोगी के पसीने,लार,संक्रमित खून या मल के सीधे संपर्क में आने से यह फैलता है।
  2. संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध।
  3. संकमित व्यक्ति के शव से संपर्क।
  4. संक्रमित सूई /नीडल से।
  5. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाली चीजे जैसे कपडे, बर्तन, टॉवेल इत्यादि।
  6. जो रोगी इबोला के संक्रमण होने के बाद ठीक होने में सफल हो जाते हैं, ऐसे रोगी के वीर्य/सीमेन अगले 7 हफ्ते तक इबोला के संक्रमण को फैला सकते हैं।

अच्छी बात यह है इबोला वायरस का संक्रमण सांस के जरिए (एयरबोर्न) नहीं फैलता है, इसका संक्रमण रोगी से सीधे संपर्क में आने पर ही होता है।

इबोला के लक्षण क्या है ?

इबोला वायरस का संक्रमण होने के बाद 2 से 21 दिनों में (इन्क्यूबेशन पीरियड) शरीर में फैलने शुरू हो जाता है।इबोला के लक्षण नीचे दिए गए हैं:

प्रथम 7 से 9 दिन (शुरूआती दौर)

  • बुखार
  • सरदर्द
  • कमजोरी
  • दस्त
  • आँखे लाल होना
  • गले में कफ जमा होना
  • स्नायु में कमजोरी या जकड़ाहट

10 वे दिन

  • तेज बुखार
  • खून की उलटी
  • निष्क्रिय व्यवहार

11 वे दिन

  • त्वचा पर चोट या त्वचा के नीचे  खून जमा होना
  • आँख, नाम, मुंह या गुद मार्ग से रक्तस्त्राव होना
  • मस्तिष्क को क्षति

12 वे दिन (अंतिम चरण)

  • बेहोश होना
  • दौरा पड़ना
  • शरीर के अंदर ज्यादा मात्रा में रक्तस्त्राव
  • अंत में मृत्यु

स्रोत: यू एस सेंटर ऑफ़ डिजीज एंड कण्ट्रोल, बी.बी.सी

इबोला के निदान हेतु परीक्षण

इबोला के निदान हेतु निम्नलिखित परीक्षण/प्रयोगशाला टेस्ट किए जाते हैं :

  1. एंटीबाडी-कैप्चर एंजाइम लिंक्ड इम्मुनोसोर्बेंट एस्से (एलिसा)
  2. एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट
  3. सीरम न्यूट्रीलाईजेसन टेस्ट
  4. रिवर्स ट्रांसक्रिपटेस पोलीमीरेस चेन  रिएक्शन (आर.टी.-पी.सी.आर.) एस्से
  5. इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोपी
  6. वायरस आइसोलेशन

इबोला से बचाव

इबोला रोग अभी तक भारत में पहुंचा नहीं है। भारत सरकार द्वारा हर संभव कोशिश की जा रही है की इस रोग को भारत में पहुचने से रोका जाए। इबोला  के उपचार के लिए कोई ठोस दवा या टीका / वैक्सीन  का निर्माण अभी तक हुआ नहीं है। 2015 तक इसका टीका/ वैक्सीन निर्माण होने की आशंका है।

इबोला वैक्सीन तयार होने के पहले अगर इबोला रोग भारत में या हमारे पाठक जिस देश में हो वहा फ़ैल जाए तो हमें क्या सावधानी बरतनी चाहिए इस संबंधी अधिक जानकारी नीचे  दी गयी है :

  1. इबोला के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉकटर से जाँच करा लें।
  2. अच्छे साबुन या हैण्ड सानीटाईज़र से हाथ धोएं।
  3. खाना अच्छे से पकाएं।
  4. मांसाहार लेने से बचें।
  5. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में जाने से बचें।
  6. जिस जगह पर इबोला के रोगी ज्यादा मात्रा में पाए जाते है ऐसी जगह जाने से बचें।
  7. लोगो से अनावश्यक हाथ मिलाना या संपर्क करना टालें।
  8. अपने घर और आसपास सफाई रखें।
  9. मच्छरों को न पनपने दें।
  10. जानवर द्वारा कटा हुआ आलूबुखारा /पल्प न खाएं।
  11. किसी भी अनजान/अपरिचित व्यक्ति या जानवर से बचिए।
  12. मृत व्यक्ति या जानवर के पास जाने की कोशिश न करें।
  13. इबोला  से मरने वाले व्यक्ति या जानवर के कपड़े, चद्दर या उपयोग में ली जानेवाली चीजों को न छुएं।
  14. भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें।
  15. औपचारिकता दिखाने के लिए अस्पताल न जाएं।
  16. अपने आसपास के लोगो को इबोला संबंधी जानकारी दें और सफाई बनाए रखने के लिए प्रेरित करें।

कई देशो में इबोला महामारी की तरह फैलता जा रहा है। थोड़ी सी सावधानी और एहतियात रख कर इबोला से बचा जा सकता है।

याद रहे कि रोकथाम ईलाज से बेहतर है !

लेखक: डॉ. परितोष त्रिवेदी

स्रोत: निरोगिकाया

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