सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

सूखी खाँसी

इस पृष्ठ में सूखी खाँसी नामक बीमारी की जानकारी दी गयी है।

क्या है सूखी खाँसी

यह एक आम लक्षण है और अपने आप में कोई बीमारी नहीं है। असल में यह केवल बिन बलगम की खाँसी है। यह खाँसी श्वास नली, स्वरयंत्र, गले, कण्ठच्छेद या टॉन्सिल की हल्की फुल्की बीमारी के साथ होती है। धूल या गैसों जैसे ऐसिड की भाप या मिर्च के पाउडर आदि से भी सूखी खाँसी हो सकती है।

लक्षण

अनुभव हो जाने पर आप खाँसी की आवाज़ से ही पता कर सकते हैं कि गड़बड़ कहाँ पर है। गले में गड़बड़ होने पर हल्की और कम गहरी खाँसी होती है। परन्तु स्वरयंत्र में गड़बड़ होने पर गहरी खाँसी होती है। छाती के बीच से उठने वाली खाँसी श्वासनली में गड़बड़ी से होती है।

आवाज़ के अलावा दर्द के जगह से भी यह पता चल सकता है कि समस्या किस हिस्से में है। छाती के बीच की हड्डी के पीछे में दर्द होने का मतलब है कि श्वास नली की गड़बड़ी से खाँसी है। गड़बड़ी की जगह कोई भी लगे, गले की जॉंच ज़रूर कर लेनी चाहिए। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि चिरकारी सूखी खाँसी स्वरयंत्र की समस्या हो सकती है। इसके लिए डॉक्टर की मदद की ज़रूरत है।

इलाज

बड़ों में लगातार उठने वाली व परेशान करने वाली सूखी खाँसी से आराम दिलाने के लिए आप लिंक्टस कोडीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। बच्चों के लिए कोडीन का इस्तेमाल न करें क्योंकि इससे तंत्रिका तंत्र धीमा हो जाता है। कोडीन से कब्ज़ भी हो जाता है।

जुकाम सभी उम्र के लोगों को होता है। अक्सर यह मौसमी होता है। जुकाम असल में नाक की गुफा का शोथ है जो एलर्जी या किसी वायरस की संक्रमण से होता है। वायरस से होने वाला जुकाम संक्रामक होता है यानि एक व्यक्ति से दूसरे में फैल जाता है। खासकर कमज़ोर लोग एक दो दिनों में से इसकी चपेट में आ जाते हैं। यह हवा से फैलता है।

जुकाम के वायरस संबंधी प्रतिरक्षा बहुत ही सीमित समय के लिए होती है। इसलिए एक व्यक्ति को कुछ ही दिनों के बाद दोबारा जुकाम हो सकता है। इसके अलावा जुकाम करने वाले वायरस बहुत ही सारे हैं। जुकाम वायरस का कोई खास इलाज नहीं है। जुकाम करने वाले वायरस की करीब दस बड़ी श्रेणियॉं हैं। हर श्रेणी में भी बहुत सारे वायरस होते हैं। हर एक की अलग-अलग तरह की प्रतिरक्षा प्रक्रिया होती है। यानि एक वायरस के लिए प्रतिरक्षा दूसरे वायरस के लिए बेकार होती है।

इसलिए इस सीमित प्रतिरक्षा का भी खास फायदा नहीं रहता। यानि जुकाम दूसरी बार दूसरे किसी वायरस से भी हो सकता है। यह कह पाना मुश्किल होता है कि कौन सा जुकाम एलर्जी से हुआ है और कब वायरस से। दोनों में सिर्फ यही फर्क है कि वायरस से होने वाला जुकाम संक्रामक होता है। एलर्जी से होने वाले जुकाम में ज़्यादा छीकें आती हैं और बुखार कम होता है।

स्वरयंत्र शोथ (लैरींजाईटिस)

कारण

  • क्षोभकारी तत्व और या संक्रमण फैलाने वाले कारक स्वरयंत्र में शोथ कर देते हैं। स्वरयंत्र शोथ का एक कारण ऐलर्जी भी होता है।
  • बहुत ज़्यादा बोलने से स्वरयंत्र खराब होना भी काफी आम बात है।
  • बीड़ी सिगरेट या खाना बनाने का बुरा तेल आदि भी भौतिक तत्व हैं।
  • एक बार कोई भौतिक तत्व असर कर दे तो फिर बैक्टीरिया और वायरस भी पैर जमा सकते हैं।
  • वैसे बैक्टीरिया या वायरस की संक्रमण अपने आप भी हो सकती है।
  • कभी-कभी केवल स्वरयंत्र पर संक्रमण का असर होता है और कभी-कभी निचले श्वसन ट्रैक पर इसका असर हो जाता है।
  • आम जुकाम और गला खराब होने से भी स्वरयंत्र शोथ हो सकता है। खसरे से भी बच्चों में स्वरयंत्र शोथ हो जाता है।

लक्षण

क्रूप (यानि सख्त और ज़ोर दार आवाज़ वाली खाँसी) स्वरयंत्र शोथ का एक विशिष्ट लक्षण है। आवाज़ कर्कश हो जाती है। स्वरयंत्र में दर्द और दुखरुपन से बीमारी का स्थान पकड़ पाने में मदद मिलती है। इस संक्रमण में बुखार और बदन में दर्द लगभग हमेशा होता है।

इलाज

वायरस से होने वाला स्वरयंत्र शोथ अपने आप ठीक हो जाने वाला रोग है। आवाज़ को आराम देने, भाप लेने और गर्म तरल पदार्थ लेने से एक हफ्ते के अन्दर यह ठीक हो जाता है। ऐस्परीन से दर्द, बुखार और शोथ कम करने में मदद मिलती है। अक्सर ये पता करना मुश्किल होता है कि शोथ वायरस से हुआ या बैक्टीरिया से। साथ में जुकाम होने से यह सूचना मिलती है कि शायद संक्रमण वायरस से हुई है। अगर लगा कि संक्रमण का कारण बैक्टीरिया है तो रोगी को डॉक्सीसाइक्लीन या ऐमाँक्सीसिलीन देनी चाहिए। गर्भवती, दूध पिलाती माँ और १५ वर्ष से कम उम्र के बच्चों में डॉक्सी न दे।

अगर सूखी खाँसी बहुत ज़्यादा हो तो कोडीन दवा सिरप या गोलियों के रूप में दें। स्वरयंत्र की एंठन, जिसमें सॉंस लेने में मुश्किल हो जाती है, ऐलर्जी के कारण होता है। यह बच्चों में होता है। अगर स्थिति गम्भीर हो जाए तो इसके इलाज के लिए स्टीरॉएड के इन्जैक्शन और ऑक्सीजन देने की ज़रूरत होती है।

बड़ों में स्वरयंत्र शोथ के लक्षण अगर लम्बे समय तक चलें (जैसे दो हफ्ते या उससे ज़्यादा) और साथ में आवाज़ में बदलाव (होर्सनेस) आ जाए तो यह कैंसर के कारण भी हो सकता है। बूढ़ों में यह सम्भावना काफी ज़्यादा होती है। ऐसे में तुरन्त विशेषज्ञ की सलाह की ज़रूरत होती है।

खाँसी और औषधीय इलाज

  • बार-बार होने वाली खासी में वासावालेहा से फायदा होता है। यह एक आदोसा नामक एक आम बूटी से बना होती है। आप इसका कवाथा भी बना सकते हैं (यह बूटी या पत्तियों को पानी में उबालकर बनाया जाता है)। या फिर आसव भी बना सकते हैं (यह खमीर उठाया हुआ सत्त होता है)। आवालेहा बेहतर रहता है। बड़ों के लिए हर रोज़ एक चम्मच दिन में दो बार ७ से १० दिनों तक लिया जाना आमतौर पर काफी होता है। बच्चों में इसकी आधी खुराक काफी होती है। आसव के रूप में रोज़ दो चम्मच ७ से १० दिन लेने की सलाह दी जानी चाहिए।
  • कण्टकारी खाँसी की एक और औषधी है। यह एक कॉंटेदार खरपतवार बेल होती है जिसके पीले बैंगन जैसे फल होते हैं। इसके फूल बैंगनी होते हैं। बूटी के सभी हिस्से (जड़, तना, पत्तियॉं, फूल और फल) इलाज के लिए इस्तेमाल होते हैं। बाज़ार में भी इसकी बनी हुई औषधी जैसे सिरप, आवालेहा (चीनी या गुड़ में बना हुआ सत्त) भी मिलेते हैं।
  • सीतोफलादी चूरण भी आम खाँसी की एक अन्य आर्युवेदिक दवाई है। निमोनिया या तपेदिक जैसी बीमारियों के अलावा इसका इस्तेमाल सभी तरह की खाँसी के लिए किया जा सकता है। वायरस की संक्रमण से हुई खाँसी में कोई भी जीवाणु नाशक दवा काम नहीं करती है। ऐसे मे शीतोफलादी चूरण से ऐसे में फायदा हो जाता है। एक से दो चम्मच चूरण घी के साथ एक हफ्ते तक दिन में एक या दो बार लेने से फायदा होता है।
  • लवंगादि ओर खादीरादी वटी सूखी खाँसी की अन्य दवाइया हैं। लवंगादि लौंग और खादीरादी वटी आकेसिआ कटाचू से बनती है। वटी की मुँह में ही घुल जाने दिया जाना ज़रूरी है।
  • व्याघ्री हरितकी भी सुखी कॉंसी में अच्छा काम देता है। इसे हर तीन-चार घंटों में एक बेर जैसे गोली बनाकर चूसें, बच्चों में चने जितनी बडी गोली पर्याप्त है।

स्त्रोत: भारत स्वास्थ्य

 

2.98148148148

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
संबंधित भाषाएँ
Back to top

T612019/07/24 12:24:15.683140 GMT+0530

T622019/07/24 12:24:15.712203 GMT+0530

T632019/07/24 12:24:15.712925 GMT+0530

T642019/07/24 12:24:15.713200 GMT+0530

T12019/07/24 12:24:15.661413 GMT+0530

T22019/07/24 12:24:15.661602 GMT+0530

T32019/07/24 12:24:15.661743 GMT+0530

T42019/07/24 12:24:15.661880 GMT+0530

T52019/07/24 12:24:15.661967 GMT+0530

T62019/07/24 12:24:15.662039 GMT+0530

T72019/07/24 12:24:15.662759 GMT+0530

T82019/07/24 12:24:15.662949 GMT+0530

T92019/07/24 12:24:15.663177 GMT+0530

T102019/07/24 12:24:15.663402 GMT+0530

T112019/07/24 12:24:15.663448 GMT+0530

T122019/07/24 12:24:15.663538 GMT+0530