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कुपोषण

इस भाग में रक्तअल्पता, प्रोटीन कैलोरी कुपोषण, पोषण संबंधी कमी, एवं खाद्य और पोषण संबंधी बीमारियों के विषय में चर्चा की गई है

रक्त अल्पता क्या है ?

  • रक्त में सामान्य से कम रक्त कोशिका
  • लाल रक्त-कोशिका की संख्या एवं 10 ग्राम प्रति घोल (10 gm/dil ) हेमोग्लोबिन के आधार पर मापा जाता

रक्त अल्पता संबंधित मुख्य बातें -
1) वयस्क पुरुष - 13 ग्राम /डायल्यूट से कम
2) अवयस्क महिला - 12 ग्राम / डायल्यूट से कम
3) गर्भवती महिला - 11 ग्राम (Gms) से कम
4) 6 माह से लेकर 6 वर्ष का बच्चा- 11 ग्राम  /डायल्यूट
5) 6 वर्ष से लेकर 14 वर्ष का बच्चा - 11 ग्राम / डायल्यूट

कारण

  • फॉलिक एसिड की कमी
  • विटामिन बी-12 की कमी
  • लौह तत्वों की कमी
  • कुछ बीमारी जिसकी वजह से रु धिर कोशिका का विखंडन होता
  • मलेरिया जैसे संक्रमण का दोबारा शिकार होना
  • कुछ प्रकार का बोन मैरो रोग
  • घायल होने या बीमारी के कारण रक्त ह्रास
  • अल्प आहार से कुपोषण का खतरा
  • गर्भावस्था के दौरान अपर्याप्त मात्रा में आहार लेना
  • महिलाओं में अधिक मासिक चक्र का होना

लक्षण

  • थकावट
  • सीने में दर्द
  • जल्दी-जल्दी साँस लेना
  • शरीर का फूलना
  • चमड़े का पीला होना

प्रोटीन कैलोरी कुपोषण

प्रोटीन कैलोरी कुपोषण (पीसीएम) मारास्मस (शरीर के आकार में वृद्धि रुकना और शरीर बेकार होना) और क्वाशियोरकोर (प्रोटीन की कमी), जिसमें त्वचा क्षतिग्रस्त होती है, के रूप में सामने आती है। पीसीएम के कारण न्यूमोनिया, चिकेनपॉक्स या खसरा से मौत का खतरा अधिक होता है।

कारण
क्वाशियोरकोर और मारास्मस शरीर की वृद्धि के लिए जरूरी अमीनो एसिड की कमी के कारण होती है। क्वाशियोरकोर आमतौर पर एक साल तक के उम्र के बच्चों में होती है। उस समय बच्चों को स्तनपान से अलग कर प्रोटीन की कमी वाला पोषण (मांड़ या चीनी-पानी का घोल) दिया जाता है।  वैसे यह बीमारी बच्चों के वृद्धि काल में कभी भी हो सकती है। मारास्मस छह से 18 महीने की उम्र के वैसे बच्चों को होती है, जिन्हें स्तनपान से वंचित किया जाता है या डायरिया की गंभीर बीमारी होती है।

संकेत लक्षण

  • गंभीर पीसीएम से ग्रस्त बच्चे अपनी उम्र से कम दिखते हैं, शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर तथा संक्रमण के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं। उन्हें एनोरेक्सिया और डायरिया जैसी बीमारी हमेशा घेरे रहती है।
  • पीसीएम से गंभीर रूप से पीड़ित बच्चे छोटे, सुस्त और रूखी त्वचा वाले होते हैं। उनकी त्वचा ढीली होती है और बाल कम संख्या में तथा भूरे या लाल-पीले होते हैं। उनके शरीर का तापमान हमेशा कम रहता है, नब्ज की गति धीमी होती है और सांस लेने की रफ्तार भी कम रहती है। ऐसे बच्चे कमजोर, गुस्सैल और हमेशा भूखे होते हैं, हालांकि उनमें जी मिचलाने और उल्टी के साथ अपच की शिकायत हो सकती है।
  • मारास्मस के विपरीत क्वाशियोरकोर में मरीज के शरीर के आकार में वृद्धि तो होती है, लेकिन उसकी त्वचा सूखती जाती है, क्योंकि उसके शरीर की चर्बी शरीर की ऊर्जा जरूरतों को पूरा नहीं कर पाती है। इस बीमारी में त्वचा का रूखेपन, उसका उखड़ना और खुजली आदि सामान्य है। जो मरीज दूसरी श्रेणी के पीसीएम से ग्रसित होते हैं, उनमें भी मारास्मस जैसे लक्षण होते हैं और उनके शरीर की त्वचा बेकार होने लगती है तथा वे क्रमिक ढंग से सुस्त पड़ते जाते हैं।

पोषण संबंधी कमी

जब किसी व्यक्ति का पोषण न्यूनतम अनुशंसित जरूरतों से लगातार कम होता है, तो वह कुपोषण संबंधी कमी का शिकार हो जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 10 से 19 साल तक के बच्चों में यह बीमारी पूरी दुनिया में आम है।

विटामिन बी -1

थायमिन या विटामिन बी-1, पानी में घुलनशील विटामिन है, जो ऊर्जा उत्पादन (अडीनोसीन ट्राइफास्फेट (एटीपी) के श्लेषण और नसों के फैलने से बनती है (एटीपी मानव शरीर द्वारा काम किये जाने की ऊर्जा प्रदान करने का प्रमुख स्रोत है) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। थायमिन पोर्क, लेग्युम और जौ में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके विपरीत अरवा चावल, सफेद आटा, परिष्कृत चीनी, वसा और तेल में यह नहीं पाया जाता है। जो लोग अधिक मात्रा में अल्कोहल का सेवन करते हैं या आधुनिक जीवन शैली में रहते हैं, उन्हें थायमिन की कमी का खतरा रहता है। ऐसे लोगों में खनिजों की कमी भी आम है।
बेरी-बेरी नामक बीमारी थायमिन की कमी का उदाहरण है। इसके लक्षणों में स्नायु तंत्र का असामान्य होना (पांव में मोच या मांसपेशियों का कमजोर होना), बांह में सूजन, नब्ज की गति तेज होना तथा हृदय गति रुकना शामिल है। वर्निक-कोर्साकोफ सिंड्रोम इससे जुड़ी एक स्थिति है, जिसमें बेहोशी, असामान्य बातचीत और स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है। यह आमतौर पर अल्कोहल लेनेवालों को होती है।

विटामिन बी -3

पेलेग्रा पोषण की कमी या नियासीन (विटामिन बी-3) अथवा अमीनो एसिड ट्रिप्टोफान लेने में विफलता से होनेवाली एक बीमारी है। पेलेग्रा का अर्थ है खुरदरी त्वचा। इसके लक्षण तीन डी हैं, यानी डीमेंसिया (मानसिक लक्षण), डरमेटाइटिस (सूखी त्वचा का घाव) और डायरिया।

खनिज की कमी, कैल्शियम और विटामिन डी

ओस्टियोपोरोसिस, जो हड्डियों को कमजोर करने की बीमारी है, कुपोषण के कारण हड्डियों को प्रभावित करनेवाली सबसे आम बीमारी है। हड्डियों की मजबूती 35 साल की उम्र तक बढ़ती है और उसके बाद स्थिर हो जाती है। करीब 40 साल की उम्र में हड्डियों के कमजोर होने की गति अचानक तेज हो जाती है। हड्डी जितनी तेजी से बनती है, उससे अधिक गति से दरकने लगती है, जिससे हड्डियां कमजोर होती जाती हैं और कैल्शियम की कमी हो जाती है। महिलाओं के लिए उम्र से संबंधित इस बीमारी के अलावा रजोनिवृत्ति तथा महिला हारमोन की कमी (विशेष रूप से एस्ट्रोजेन) के कारण हड्डियों में कमजोरी पैदा होने लगती है। ओस्टियोपोरोसिस से ग्रस्त लोग 30 से 40 प्रतिशत तक कैल्शियम की कमी झेलते हैं, जिसके कारण उनकी हड्डियां टूटने लगती हैं।
ओस्टियोपोरोसिस के विकास के कई कारण होते हैं। धूम्रपान, अल्कोहल और अनियमित जीवन के कारण यह बीमारी होती है। उम्र और लिंग भी इसके महत्वपूर्ण कारक हैं। जिन महिलाओं में एस्ट्रोजेन की कमी (रजोनिवृत्ति के बाद) होती है, उन्हें यह बीमारी होने का खतरा अधिक होता है। पुरुषों की हड्डियां महिलाओं के मुकाबले अधिक मजबूत होती हैं, इसलिए उनमें यह बीमारी कम ही होती है। इसमें प्रजाति की भी भूमिका है।

विटामिन डी

कभी (सूखा रोग) रिकेट को बाल्यावस्था में होनेवाली आम बीमारी की संज्ञा दी गयी थी। सूखा रोग (रिकेट) से ग्रस्त बच्चों की पहचान टेढ़े-मेढ़े पैर और मुड़े-तुड़े घुटने से की जा सकती है। इसके कारण इनकी शारीरिक बनावट बेढ़ंगी होती है।
सूखा रोग (रिकेट) विटामिन डी की कमी से होती है। विकास के दौरान मानव शरीर की हड्डियां कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन डी के संयोग से बनती तथा विकसित होती है। कैल्शियम अपरिपक्व हड्डियों (ऑस्टियोइड) में जमा रहता है। इस प्रक्रिया को कैल्सिफिकेशन कहा जाता है। इससे अपरिपक्व हड्डी क्रमशः मजबूत होती है और आकार ग्रहण करती है। भोजन में मौजूद कैल्शियम को ग्रहण करने के लिए विटामिन डी की जरूरत होती है। रिकेट में इस विटामिन की कमी के कारण कैल्शियम की मात्रा कम हो जाती है और हड्डियां विकृत हो जाती हैं।

विटामिन डी एकमात्र ऐसा विटामिन है, जो भोजन से भी मिलता है और खुद शरीर भी इसका उत्पादन करता है। हालांकि विटामिन डी पशुओं की चर्बी, जैसे दूध, पनीर, मछली और मांस में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, लेकिन यह शरीर की आवश्यकता का मात्र 10 प्रतिशत ही दे पाता है। शेष 90 प्रतिशत का उत्पादन शरीर खुद करता है। समुचित विटामिन डी के बिना शरीर भोजन में मौजूद कैल्शियम की मात्र 10 से 15 फीसदी मात्रा ही ले सकता है। इसलिए विटामिन डी, कैल्शियम और फॉस्फेट का संतुलन हड्डियों के विकास और रखरखाव, विशेष कर बच्चों के लिए बहुत आवश्यक है। यह कमी बुजुर्गों में भी हो सकती है।

खाद्य और पोषण संबंधी बीमारियां

विटामिन ए की कमी से अंधापन

अच्छी तरह देखने के लिए विटामिन ए बहुत जरूरी है। बच्चों में विटामिन ए की कमी से आँख की रोशनी कम पड़ जाती हैं। यदि यह कमी बहुत अधिक होती है, तो इससे स्थायी अंधापन भी हो सकता है। हमारे देश में हर साल 30 हजार बच्चे विटामिन ए की कमी के कारण अंधे होते हैं। विटामिन ए की कमी के लक्षण 1-5 साल तक की आयु के बच्चों में अधिक पायी जाती है।

विटामिन ए की कमी के लक्षण

विटामिन ए की कमी से बच्चों में अंधेपन अचानक नहीं होता। विटामिन ए की कमी का यदि पहले पता चल जाये, तो विटामिन ए युक्त पौष्टिक भोजन लेकर इसे रोका जा सकता है।

विटामिन ए की अत्यधिक कमी के लक्षण

  • रतौंधी इसका पहला लक्षण है। रतौंधी से पीड़ित बच्चे कम रोशनी या अंधेरे में नहीं देख सकते। आंखों का सफेद हिस्सा सूख जाता है और इसकी चमक खत्म हो जाती है।
  • इन लक्षणों की पहचान होने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। यदि इनका इलाज नहीं किया जाये, तो हमेशा के लिए अंधा होने का खतरा होता है।

विटामिन ए की कमी रोकने के उपाय

  • ऐसा भोजन लें, जिनमें विटामिन ए अधिक हो।
  • दूध, अंडे, मछली के तेल आदि में विटामिन ए अधिक होता है। पत्तेदार सब्जी, हरी सब्जी, गाजर, पपीता और आम जैसे फल भी विटामिन ए के अच्छे स्रोत हैं।
  • राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद द्वारा किये गये शोध के अनुसार 1-5 साल तक के बच्चों को छह महीने में एक बार एक चम्मच विटामिन ए सीरप पिलाने से भी विटामिन ए की कमी पर कुछ हद तक रोक लगायी जा सकती है।
  • जब बच्चों को छह महीने में एक बार विटामिन ए की दवा पिलायी जाती है, तो यह उनकी आंत में जमा रहता है और शरीर को समुचित मात्रा में उपलब्ध होता है। हमारे देश में यह सिलसिला अभी चल रहा है, ताकि बच्चों को विटामिन ए की कमी के कारण होनेवाले अंधेपन से बचाया जा सके।
  • गर्भवती महिलाओं को विटामिन ए युक्त भोजन लेना चाहिए। इससे गर्भस्थ शिशु को विटामिन ए की खुराक मिलती है।

बढ़ते बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन

बढ़ते बच्चों को पौष्टिक भोजन की बहुत जरूरत होती है। बच्चों के शरीर में जब प्रोटीन और कैलोरी की कमी होती है (कुपोषण), तो उनमें मेरास्मास और क्वाशियॉरकर जैसी बीमारियां होती हैं।

मेरास्मास और क्वाशियारकर किसे होता है ?

यह 1-5 साल तक की आयु के बच्चे को होता है।

मेरास्मास के लक्षण
यह बीमारी पैर में सूजन के साथ शुरू  होती है और फिर हाथ तथा शरीर फूलने लगता है। त्वचा खुरदरी होती है, सिर पर बाल कम होते हैं और उनका रंग लाल भूरा होता है। यह मेरास्मास के लक्षण हैं। इससे ग्रस्त बच्चे बीमार और थके-थके नजर आते हैं।

क्वाशियारकर के लक्षण
इस बीमारी से ग्रस्त बच्चे कमजोर और दुबले होते हैं। बच्चों को शुरुआती दिनों में डायरिया हो सकता है। उनकी त्वचा रूखी होती है।

इन बीमारियों से ग्रस्त बच्चों के इलाज के लिए सलाह
बच्चों को  नियमित रूप से कैलोरी और प्रोटीन युक्त पौष्टिक भोजन दें। बहुत अधिक संक्रमित बच्चों को तत्काल डॉक्टर से पास ले जायें।

मेरास्मास और क्वाशियारकर से प्रभावित बच्चों का आहार
राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद ने मिक्स नामक पौष्टिक भोजन विकसित किया है, जिसमें सभी पौष्टिक तत्वों का मिश्रण है। यह मिश्रण घर में भी तैयार किया जा सकता है।

पौष्टक मिश्रण में उपयोग की जानेवाली पदार्थ-
भुना हुआ गेहूं- 40 ग्राम
पत्तेदार अनाज- 16 ग्राम
भुनी मूंगफली- 10 ग्राम
जैगरी- 20 ग्राम
इस मिश्रण को पीस लें और अच्छी तरह मिला लें। इसमें 330 ग्राम कैलोरी और 11.3 ग्राम प्रोटीन होता है।
इस मिश्रण को दूध या पानी के साथ खिलायें। मेरास्मास या क्वाशियारकर से ग्रस्त बच्चों को इसे खिला कर इसका परीक्षण किया गया है।

 कुपोषण


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Source: एनडीटीवी डॉक्टर
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त्रिभुवन चौधरी ( सिउरी नौकापुरा ) Jun 08, 2017 07:09 AM

एक टेबुल पंखे को बंद कमरे में चलाने पर कमरे की हवा पर क्या प्रभाव पड़ेगा ⁉ (१) गरम होगी (२) ठंडी होगी (३) कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा

आनंद.SURESH Apr 04, 2017 03:47 PM

मै अपने हिम्मत से ज्यादा सरकार से कुपोषण पर ज्यादा गौर के लेया लेटर डे चूका हु शायद पोलियो पर कामयाबी को सरकार अपना कदम को क्लीन भारत पूर्ण समझ रही है भारत मई अगर कश्मीर है तो बिहार बंगाल के वह इलाके भी है जहा पूर्ण स्वच्छ जल और अन्न कहना होगा कभे गया ही नहीं कागजो मे मै लेख लिखता हु तो प्रशाशन उन आदिवासियो कॊ स्वच्छ नागरिक बन चुके झेत्र घोषित कर चुके यानी आप कहो तो सत्यवाणी हम कहे तो बीटा समय की कहानी जाप "मोदी लहर " कहने वाले जानते है पर मोदी कहर नहीं कहेगे खुद बीजेपी बी.ए फाइनल ईयर वलय Modi गान पसन्द nahi क्र रहे पर मै २०१९ के चुनाव मे मोदी लहर को क्यों हार /जीत ?? यह ?? मार्क इनके अपनों ke दुखते आलाप के ककरण कह रहा हु और हां मुझे मेरे टॉपिक( कुपोषण ) पर कह देना के मोदी जी बोले है के मै कॉल करुगा @मुझे टेबलेट डे रहे है हार -जीत मे सिर्फ उंच्चे ई का फर्क है ऊँछी याने मोदी ई अगर राजास्थान म.पी में २०-२५% नया स्टेप चला डे आपको staff देना है kaam ५०-६०% के ऊपर के लहर होगी कान ही बन्द क्र रखे है तो हमे अपना मुह बन्द रख लेना वक़्त के लहर देखते है ३२साल के म्हणत कोई तो सुनेगा मै अपने लिए नहीं मांग रहा आनंद जोउर्Xलिस्ट ## 90XXX्न

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