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चर्म रोग

इस भाग में एड़ियों की बिवाई, छाजन, छाल रोग (सारिआसिस), विटिलिगो, मुहांसे, खाज (स्कैबी) एवं त्वचा के रंग बदलने पर जानकारी उपलब्ध है।

एड़ियों की बिवाई

एड़ियों की बिवाई, जिसे एड़ियों का फटना भी कहा जाता है, एक सामान्य सौंदर्य समस्या हो सकती है, लेकिन इससे गंभीर चिकित्सकीय समस्या भी पैदा हो सकती है। एड़ियों की बिवाई उस समय सामने आती है, जब एड़ियों के नीचे की बाहरी सतह की त्वचा कड़ी, सूखी और भुरभुरी हो जाती है। कभी-कभी तो बिवाई इतनी गहरी होती है कि उसमें दर्द होने लगता है और खून निकलने लगता है।

एड़ियों का फटना आमतौर पर सूखी त्वचा (जेरोसिस) के कारण होता है। जब एड़ी के चारों ओर की त्वचा मोटी हो जाती है (कैलस), तो समस्या अधिक गंभीर हो जाती है।

कारण

एड़ियों की बिवाई किसी को भी प्रभावित कर सकती है, लेकिन यह मुख्य रूप से निम्न स्थितियों में होती हैं:

  • सूखी जलवायु में रहना
  • मोटापा
  • लगातार खाली पैर चलना या सैंडल या पीछे से खुले जूते पहनना
  • पसीने की निष्क्रिय ग्रंथियां

पैरों की अन्य स्थितियों के अनुरूप ही यदि बिवाई का समय पर उपचार नहीं किया जाये, तो वे खतरनाक हो सकती हैं,गहरी होकर संक्रमित हो सकती हैं। ये मधुमेह या सीमित प्रतिरोधी ताकत वाले मरीजों में विशेष रूप से खतरनाक हो सकती हैं।

उपचार और बचाव

पैरों को नियमित रूप से नमीयुक्त बनाने से बिवाई से बचाव हो सकता है। एक बार वे हो जायें, तो हर दिन झामा ईंट से रगड़ कर त्वचा की मोटाई कम करें। खाली पैर चलने या पीछे की ओर से खुले जूते, सैंडल या पतले तले के जूते पहनने से बचें। मोटे तले के जूते स्थिति में सुधार में मदद कर सकते हैं।

पैरों में हर दिन कम से कम दो बार कोई मोइश्चराइजर लगाने और सोते समय मोजे पहनने से भी मदद मिल सकती है।

घरेलू उपचार

फटी हुई एड़ियों के घरेलू उपचार की चाबी यह है कि हर रोज रात में सोने से पहले मोइश्चराइजर लगायें और नमी को पैरों में बनाये रखने के लिए खासतौर पर तैयार मोजे पहन कर सोयें। ये मोजे नमी को रोकने के लिए बनाये जाते हैं। यदि आपको समय पर स्थिति में सुधार नजर नहीं आये, तो चिकित्सक से सम्पर्क करें।

स्रोत: फूट एंड ऐंकल स्टोर

छाजन

छाजन क्या होता है?

छाजन त्वचा की एक स्थिति है जिससे सूखी, खुरदरी अत्यंत खुजलीदार त्वचा के धब्बे पैदा होते हैं।

छाजन किस कारण होता है?

छाजन सामान्यतया अति संवेदनशीलता, एलर्जी से उत्पन्न होता है जिससे कि सूजन पैदा होती है। सूजन से त्वचा में लालीपन, खुजली और खुरदरापन आ जाता है।

छाजन के चिह्न और लक्षण क्या है?

छाजन से त्वचा में खुजलीदार, सूखे, लाल धब्बे पड़ते हैं। खुजली से गर्मी, तनाव या खरोंच लगने से स्थिति और अधिक बिगड़ जाती है।

किस आयु वालों को अधिक प्रभाव पड़ता है?

यह बच्चों और शिशुओं में अधिक पाया जाता है। तथापि अधिक आयु के बच्चों और अधेड़ों में भी छाजन देखा जा सकता है।

त्वचा धब्बे शरीर के किस अंग पर पाए जाते हैं?

ये धब्बे अधिकांश घुटनों के पीछे, कोहनी के मोड़ों पर, कलाइयों और गला, कलाइयों और पैरों पर पाए जाते हैं। शिशुओं के गालों पर दोदरों के रूप में आरंभ होते देखे जा सकते हैं। कुछ महीनों के पश्चात दोदरे हाथों और पैरों पर भी उभर आते हैं।

यह स्थिति किन लोगो में अधिक होती है?

छाजन उन लोगों में सामान्यतया अधिक पाया जाती है जिनकों अस्थमा या तेज बुखार आ चुका होता है। यह उस व्यक्ति में भी पाया जाता है जिनके परिवार में छाजन परागत ज्वर या अन्य श्वसन अलर्जी का इतिहास होता है।

क्या इसके कोई अतिशीघ्र प्रेरक उपादान होते हैं?

इसके अनेक उपादान होते हैं और यह एक व्यक्ति से दूसरे के बीच अलग-अलग हो सकता हैः

  • पर्यावरण उपादानों के साथ अनाश्रित खुलापन (साबुन, प्रक्षालक, क्लोरीन तथा अन्य उत्तेजन पदार्थ)
  • कुछ खाद्य पदार्थों से लक्षणों की स्थिति बिगड़ सकती है (दूध, अंडे)
  • तनाव भी एक उपादान होता है।
  • शुष्क जलवायु और सूखी त्वचा से स्थिति बिगड़ सकती है।

स्थिति पर नियंत्रण के लिए कौन सी सामान्य सिफारिशें लाभदायक होती है?

उपर्युक्त अतिशीघ्र प्रेरक उपादानों से बचाव करके इसके बढ़ते लक्षणों को कम किया जा सकता है।

छाजन का निदान कैसे किया जाता है?

परिवार और व्यक्तिगत एलर्जी से संबंधित स्थितियों में शारीरिक परीक्षण विवरण तथा आवश्यक होने पर अन्य जांच पड़ताल के माध्यम से निदान किया जाता है। कभी-कभी त्वचा का नमूना लेकर जांच (बायोप्सी) तथा आवश्यक होने पर खून की भी जांच कराई जा सकती है।

इस स्थिति की लंबी अवधि के प्रभाव क्या है?

  • संक्रमण
  • दाग
  • सूजन के बाद हाइपोपिगमेंटेशन

इस स्थिति के लिए उपचार क्या है?

  • लक्षणों को बिगाड़ने वाले उत्तेजकों से बचें
  • घावों को कुरेदें नहीं
  • अधिक समय तक स्नान न करें और देरी तक स्नानघर में न रहें
  • साबुन का प्रयोग कम से कम करें (बबल स्नान न करें)
  • सामान्यतः प्रयोग में लायी जाने वाली चिकित्सा औषधि में, सामयिक और मौखिक स्टेरॉयड, जो घाव बह रहे हों या तेज खुजली आती हो, उनके लिए लोशन (व्याइंटनेन्ट) शामिल हैं, कोल-तार सम्मिश्रण मलहम, मोटे पड़े धब्बों के लिए सूजन और खुजली कम करने तथा सहायक संक्रमण के लिए एंटी बायोटिक का प्रयोग किया जाता है।

उपचार के पश्च प्रभाव क्या है?

टोपीकल स्टेरॉयड मलहम और मौखिक स्टीरोयोड त्वचा या सहायक त्वचा स्थिति में और अधिक चिड़चिड़ाहट बढ़ा सकते हैं। प्रयोग किये जा रहे एंटीबायोटिक के आधार पर कई प्रकार के पश्च प्रभाव हो सकते हैं। एंटीहिस्टामाइन से उनींदापन आता है।

छाल रोग (सारिआसिस)

यह छाल रोग क्या होता है?

छाल रोग एक असंक्रामक दीर्घकालिक त्वचा विकार है जो कि परिवारों के बीच चलता रहता है। छाल रोग सामान्यतया बहुत ही मंद स्थिति का होता है। इसके कारण त्वचा पर लाल-लाल खुरदरे धब्बे बन जाते हैं। यह ऐसा दीर्घकालिक विकार है जिसका यह अर्थ होता है कि इसके लक्षण वर्षों तक बने रहेंगे। ये पूरे जीवन में आते-जाते रहते हैं। यह स्त्री-पुरुष दोनों ही को समान रूप से हो सकता है।

छाल रोग किस कारण से होता है?

इसके सही कारणों की जानकारी नहीं है। अद्यतन सूचना से यह मालूम होता है कि सारिआसिस निम्नलिखित दो कारणों से होता हैः
1. वंशानुगत पूर्ववृत्ति
2. स्वतः असंक्राम्य प्रतिक्रिया

लाल खुरदरे धब्बे क्यों होते हैं?

लाल खुरदरे धब्बे, त्वचा के अनुपयोगी परत में त्वचा कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाने के कारण पैदा होते हैं। सामान्यतया त्वचा कोशिकाएं पुरानी होकर शरीर के तल से झड़ती रहती है। इस प्रक्रिया में लगभग 4 सप्ताह का समय लग जाता है। कुछ व्यक्तियों को सारिआसिस होने पर त्वचा कोशिकाएं 3 से 4 दिन में ही झड़ने लगती है। यही अधिकाधिक त्वचा कोशिकाओं का झड़ाव त्वचा पर छालरोग के घाव पैदा कर देता है।

छाल रोग की पहचान कैसे होती है?

छालरोग में त्वचा पर लाल, खुरदरे धब्बे, खुजली और मोटापा, चिटकना और हथेलियों या पैर के तलवों में फफोले पड़ना, के लक्षण से पहचाने जाते हैं। ये लक्षण हल्के-फुल्के से लेकर भारी मात्रा में होते हैं। इससे विकृति और अशक्तता की स्थिति पैदा हो सकती है।

क्या ऐसे उपादान है जिनसे छालरोग अति शीघ्र बढ़े या खराब हो?

कुछ कारक है जिनसे छाल रोग से पीड़ित व्यक्तियों में चकते पड़ सकते हैं। इन कारकों में त्वचा की खराबी (रसायन, संक्रमण, खुरचना, धूप से जलन) मद्यसार, हार्मोन परिवर्तन, धूम्रपान, बेटा-ब्लाकर जैसी औषधी तथा तनाव सम्मिलित हैं।

इस बीमारी के दीर्घकालिक प्रभाव क्या है?

छाल रोग से व्यक्तियों पर भावनात्मक तथा शारीरिक प्रभाव पड़ सकते हैं। छाल रोग आर्रथरायटिस वाले व्यक्तियों को होते हैं। इससे दर्द होता है तथा इससे व्यक्ति अशक्त भी हो सकता है।

क्या छाल रोग सोरासिस संक्रामक है?

नहीं, छाल रोग संक्रामक नहीं है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को नहीं लगता।

इस बीमारी की रोक थाम के लिए क्या किया जा सकता है?

  • धूप तीव्रता सहित त्वचा को चोट न पहुंचने दें। धूप में जाना इतना सीमित रखें कि धूप से जलन न होने पाएं।
  • मद्यपान और धूम्रपान न करें
  • स्थिति को और बिगाड़ने वाली औषधी का सेवन न करें
  • तनाव पर नियंत्रण रखें
  • त्वचा का पानी से संपर्क सीमित रखें
  • फुहारा और स्नान को सीमित करें, तैरना सीमित करें
  • त्वचा को खरोंचे नहीं
  • ऐसे कपड़े पहने जो त्वचा के संपर्क में आकर उसे नुकसान न पहुंचाएँ
  • संक्रमण और अन्य बीमारियाँ हो तो डाक्टर को दिखाएं।

क्या आहार महत्वपूर्ण है?

व्यक्ति को जो आहार अच्छा लगे, वही उसके लिए उत्तम आहार है क्योंकि छाल रोग से पीड़ित व्यक्ति खान-पान की आदतों से उसी प्रकार लाभान्वित होता है जैसे हम सभी होते हैं। कई लोगों ने यह कहा है कि कुछ खाद्य पदार्थों से उनकी त्वचा में निखार आया है या त्वचा बेरंग हो गई है।

त्वचा का बेरंग होना

त्वचा अवरंजकता (हाईपोपिगमेंटेशन ) के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं?
त्वचा अवरंजकता के तीन मुख्य प्रकार हैः विटिलिगोजलन के बाद की अवरंजकता और रंजकहीनता.
विटिलिगो में त्वचा में जगह-जगह सामान्यतः स्पष्ट रूप से विरंजकता दिखाई देती है। कभी-कभी मोलनोकाइट्स की कमी के कारण त्वचा संवेदनशील बन जाती है। विरंजकता एक या दो जगहों पर अथवा त्वचा की परत के अधिकांश भाग पर परिलक्षित होती है। विटिलिगो से प्रभावित क्षेत्र में बाल सामान्यतः सफेद हो जाते हैं।

जलन के बाद की अवरंजकता वह स्थिति होती है जिसमें जलन संबंधी अनियमितता {उदाहरण के लिए त्वचा शोध (डर्मिटाइटिस)}, जलने और त्वचा संक्रमण के बाद वह स्थान ठीक होने की स्थिति में होता है। इसमें निशान पड़ जाते हैं। त्वचा अपुष्ट (ढीली) हो जाती है। त्वचा की वास्तविक चमक कम हो जाती है, लेकिन त्वचा दूध जैसी सफेद नहीं होती, जैसा कि विटिलिगो में होता है। कभी-कभी त्वचा का रंग शीघ्र ही पहले जैसा हो जाता है।

रंजकहीनता एक विरली आटोसोमल प्रतिसरण अनियमितता है जिसमें मेनोकाइट्स तो विद्यमान होते हैं लेकिन मेलनीन का निर्माण नहीं करते।
इन तीन प्रमुख प्रकार की अवरंजकता के अलावा त्वचा की एक अन्य सामान्य स्थिति भी होती है, जिसमें सामान्यतः त्वचा विरंजकता होती है जिसे पीटीरियासिस कहते हैं।

विटिलिगो

विटिलिगो क्या है?
विटिलिगो एक स्वतः असंक्रमणकारी स्थिति होती है जिसमें विरंजकता होती है। इससे शरीर पर जगह-जगह सफेद दाग हो जाते हैं, जो दूध के जैसे सफेद रंग के होते है। इससे शरीर की सामान्य संरचना और संवेदना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता तथा त्वचा पर पपड़ी नहीं जमती।

लिकोडर्मा क्या है?
लिकोडर्मा, विटिलिगों का ही दूसरा नाम है। ग्रीक भाषा के अनुसार लिको का मतलब सफेद और डर्मा का मतलब त्वचा होता है।

विटिलिगो किस वजह से होता है?
त्वचा के मेलनोकाइट्स के क्षतिग्रस्त हो जाने की वजह से विटिलिगो होता है। विटिलिगो होने के कई कारण सामने आए हैं-

  • शरीर की प्रतिरोध क्षमता प्रणाली मेनोकाइट्स को नुकसान पहुंचाती है। शरीर उसके संपर्क में आनेवाले तत्वों को बाहरी समझ कर रंजकों को नष्ट कर देती है (अधिकतर ऐसा समझा जाता है)।
  • आनुवांशिक खराबियों की वजह से चोट आदि लगने के मामले में मेलनोकाइट्स संवेदी हो जाते हैं।
  • असामान्य रूप से कार्य करने वाली नस संबंधी कोशिकाओं से विषैला पदार्थ उत्पन्न हो सकता है जो मेलोकाइट्स को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • स्वयं नष्ट करने वाले मोलनोकाइट्स जब रंजक निर्मित करते हैं तब विषैले उप उत्पाद निर्मित हो सकते है जो मेलनोकाइट्स को नष्ट कर देते हैं।
  • अनुसंधानकर्ताओं का विश्वास है कि इन सभी सिद्धांतो के मिले जुले रूप से इसे और अच्छी तरह समझा जा सकता है।

क्या विटिलिगों को अन्य स्थितियों से जोड़ा जा सकता है?

हां, मनुष्य में इसे स्वतः प्रतिरोध-क्षमता संबंधी अनियमितताओं से जोड़ा जा सकता है।

खाज (स्कैबी)

खुजली क्या है?

खाज खुजली एक त्‍वचा रोग है जोकि सरकाप्‍टस नामक परजीवी के कारण होती है । ये 3.0 मिली मीटर सूक्ष्‍म कीट होते है जिन्‍हें घुन कहा जाता है ।  मादा परजीवी संक्रमण के 2-3 घंटे के भीतर त्वचा के नीचे बिल बनाता है और 2-3 अंडे रोज देता है । 10 दिनों के अंदर अंडे से बच्‍चे निकलते है और वयस्क कीट बन जाते है । खुजली एक संक्रामक रोग है जोकि एक अपेक्षाकृत छोटे घुन (सरकाप्‍टस स्क्‍ैबी) के द्वारा संक्रमण के कारण होती है।

प्रसार

इस का फैलाव एक व्‍यक्ति से दूसरे व्‍यक्ति के त्‍वचा के नजदीकी संपर्क से होता है, यह संभवत: तब होता है जब विवाहित रात गुजारते है । इसका संक्रमण बिस्‍तर, कपड़ों या दैनिक व्‍यवहार जैसे हाथ मिलाना आदि से भी होता है।

मादा घुन त्‍वचा के नीचे दो तीन अण्‍डे रोज देती है । दस दिन के भीतर अण्‍डे से घुन निकलते है जो कि व्‍यस्‍क घुन बन जाते है. लगभग चार हप्‍तों में मुख्‍यत: खुजलाहट जैसे लक्षण सामने आते है जोकि अविकसित घुन की वजह से उत्‍पन्‍न होते है ।

खाज खुजली से ग्रसित व्‍यक्ति तब तक संक्रमित कहलाता है इम तक उसका इलाज नहीं होता । उसके कपड़े और बिस्‍तर भी तभी तक संक्रमित रहते है । इलाज के बाद फिर से वह व्‍यक्ति संबंध बना सकता है।

लक्षण

घुन के लाल भूरे रंग के पिंडों की बिलों या घावों में उपस्थिति लगातार खुजली का कारण बनती है । खुजली रातों की नींद खराब करने के लिए भी जानी जाती है । लगभग हमेशा तीव्र खुजली की वजह त्वचा के भीतर खुजली की एक प्रतिक्रिया के कारण होना है । पहली बार किसी को खुजली से संक्रमित होने पर चार से छह सप्ताह के तक उसे मालूम ही नहीं हो पाता कि उसे खुजली भी है । बाद में संक्रमण से पहली घुन के साथ खुजली एक घंटे के भीतर शुरू हो जाती है । हालांकि घुन मानव त्वचा से केवल तीन दिनों के लिए दूर रह सकते हैं, कपड़े या सोने का बिस्‍तर को साझा करने से परिवार के सदस्य या निकट संपर्क में आने वालों के साथ खुजली उन्‍हें भी फैल सकती हैं. मई 2002 में, रोग नियंत्रण के लिए केंद्र (सीडीसी) द्वारा यौन संचारित रोगों के उपचारके लिए अद्यतन दिशानिर्देशों में खुजली को भी शामिल किया गया हैं ।

आम स्थान जहॉ खाज खुजली हो सकती है, हैं: हाथ की उंगलियों और पैर की उंगलियों की झिल्ली, जघन और कमर क्षेत्र, कांख, कोहनी और घुटने, कलाई, नाभि, स्तन, नितंबों के निचले हिस्से, कभी कभी लिंग और अंडकोश की थैली, कमर और पेट के आस पास; और शायद ही कभी हाथ और पैरों के तलवों, हथेलियों के ऊपर होती हैं, और शायद ही कभी गर्दन के ऊपर भी । मई 2002 में, रोग नियंत्रण के लिए स्थापित केंद्र (सीडीसी) यौन संचारित रोगों के उपचार के लिए अद्यतन दिशानिर्देशों में खुजली शामिल हैं । जैसे ही अनजाने में खुजली के स्‍थान पर खुजलाया जाता है, वहॉ पर खारोंच के निशान दिखाई देने लगते है । खुजली के साथ फैलने वाले संक्रमण के घुनों की संख्‍या 15 तरह से अधिक नहीं हैं।

घुनों के कणों की भारी संख्या के साथ (लाखों – हजारों की संख्‍या) संक्रमण तब होता है जब एक व्यक्ति खरोंच नहीं करता है या जब एक व्यक्ति की एक कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली होती है । इन रोगियों में वे लोग शामिल हैं जिन पर दवाओं की प्रतिक्रिया होती है, जिन्‍होनें कैंसर के लिए कीमोथेरपी उपचार करवाया हो, अंग प्रत्‍यारोपित के बाद दवाओं को ले रहे हैं, मानसिक रूप से मंद, या शारीरिक रूप से कमजोर हो, लेकिमिया या मधुमेह जैसे अन्य रोगों या जो जिनकी प्रतिरक्षा कम है या वे जिन्‍हें अन्‍य रोग (जैसे एक्वायर्ड इम्यूनो सिंड्रोम या एड्स के रूप में) है. खुजली के इस रूप का संक्रपण तहवाली खुजली या नार्वेजियन खुजली के रूप में जाना जाता है। संक्रमित रोगियों की त्वचा मोटी और पूरे शरीर के साथ सिर पर परतदार त्‍वचा हो जाती है ।

रोगनिदान

खुजली की पहचान घुन की गतिविधियों को देखकर की जाती है। कीटाणुरहित सुई को घुन के बिल के अंत में रखकर उसे स्लाइड के नीचे देखा जाता है। घुन को भी सूक्ष्मदर्शी के नीचे पहचाना जाता है ।

उपचार

विभिन्‍न प्रकार के मल्‍हम (जिसमे 5% परमिथरिन होती है) शरीर पर लगाकर 12-24 घण्टों के लिए छोडा जाता है। एक बार ऐसा करना पर्याप्‍त है लेकिन यदि घुन अभी उपस्तिथ  है तो इस प्रक्रिया को एक सप्‍ताह के बाद दोहराया जाता है. मल्‍हम या एंटीहिसटामिन औषिधि से खुजली को कम किया जाता है ।

बचाव

खाज खुजली से बचने के लिए अच्‍छी साफ सफाई जरूरी है. रोज स्‍नान, स्‍वच्‍छ कपड़े, दूसरे वयक्ति के इस्‍तेमाल किये हुए कपड़े नहीं पहनने चाहिए । परिवार के सभी सदस्‍यों को एक साथ उपचार लेना चाहिए. जब घर का कोई व्‍यक्ति खाज खुजली से संक्रमित हो तो उसके कपड़े, बिस्‍तर को गर्म पानी में धोकर सूरज की रोशनी में सुखाना चाहिए।

त्वचा का रंग बदलना

त्वचा के हाइपोपिगमेंटेशन के मुख्य प्रकार क्या हैं ?
त्वचा के हाइपोपिगमेंटेशन के तीन मुख्य प्रकार: विटिलिगो, पोस्‍ट इनफ्लेमेटरी हाइपोपिगमेंटेशन तथा रंजकहीनता
विटिलिगो को अरंजक क्षेत्रों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। यह आमतौर पर सीमांकित एवं अक्सर सुडौल होते है जो मेलेनोसाइट्स (त्वचा के रंग के लिए जिम्मेदार कोशिकाएं) की कमी के कारण होते हैं। अरंजकता एक या दो स्थानों पर हो सकता है या ज्‍यादातर त्वचा की सतह को ढँक सकता है। विटिलिगो वाले क्षेत्रों में बाल सामान्यतः सफेद होते है। त्वचा के घाव वुड्स प्रकाश डालने पर  उभरते हैं।
प्रज्वलन या प्रदाह बाद की हाइपो रंजकता कुछ किस्म के प्रदाह विकारों के भरने (उदाहरण डर्मिटाइटिस), जलने एवं त्वचा संक्रमण के बाद होता है। यह चोट के निशानों तथा एट्रोफिक त्वचा से संबंधित है। त्वचा की रंजकता कम होती है, लेकिन विटिलिगो समान दूधिया सफेद नहीं होती है। कभी स्वतःस्फूर्त पुन:रंजकता हो सकती है।
रंजकहीनता एक दुर्लभ ऑटोसोमल रिसेसिव इनहेरिटेड विकार है जिसमें मेलेनोसाइट्स उपस्थित होता हैं लेकिन मेलेनिन नहीं बनाते (पदार्थ जो त्वचा को रंगता है)। वे विभिन्न रूपों के होते हैं। टाइरोसिनेस-निगेटिव रंजकहीनता में बाल सफेद होते हैं, त्वचा पीली, एवं आंखें गुलाबी होती है; नायस्‍टेग्‍मस् एवं अपवर्तन की त्रुटियाँ एक सामान्य बात हैं। उन्‍हें सूर्य के प्रकाश से बचना चाहिए, धूप के चश्मे का उपयोग करना चाहिए, दिन के समय सनस्क्रीन एस.पी.एफ़ >= 15 का इस्तेमाल करना चाहिए।
इन तीन मुख्य प्रकार के हाइपोपिगमेंटेशन के अलावा त्वचा की एक सामान्य स्थिति जो सामान्यत: त्वचा मे अरंजकता करती है, पिट्रियासिस के रूप में जानी जाती है।

स्रोत: फूट एंड ऐंकल स्टोर

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Satya kumar Jul 13, 2018 06:44 AM

Mere hath me dane pade hai un me paani niklta our ous pani se our jayda dane niklte hai oussi se khujli hoti to aap ham kya kre

Rustam Jul 07, 2018 06:00 PM

खुजली होती ह पुरे शरीर में चटके चलते ह कोई उपाय हो तो बताये यया कोनसे डॉ को दिखाएं

kitti Jun 28, 2018 01:17 AM

मेरी टांग के आस पास आग जैसी लगती है क्या करू पैर के ऊपर काले ढाबे पड़ है ये सुरगर की वजह से तो नहीं है

Vikash dixit Jun 13, 2018 07:40 AM

Sar mere hatheli pero ke talbo ka rang kala ho gaya hi kya bimari hi sar

Mahendra Yadav Jun 11, 2018 12:28 PM

Mere pair ke talve me Kala daag dhabbe ka hona shuru Hua hai ye Kya hai Aur iska ilaaz

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