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अल्जाइमर रोग

इस भाग में मस्तिष्क की भूलने की बीमारी अल्ज़ाइमर की जानकारी दी गई है।

परिचय

डिमेंशिया, संज्ञानात्मक विकास की गंभीर क्षति द्वारा पहचाना जाता है। आमतौर पर यह विकार वृद्धावस्था में पाये जाने वाला विकार है, लेकिन इसके अलावा यह विकार कुछ अन्य स्थितियों में पहले से असक्षम व्यक्तियों  में भी पाया जा सकता है। अल्ज़ाइमर रोग का सबसे सामान्य प्रकार डिमेंशिया है। यह रोग वृद्ध व्यक्तियों में अधिक पाया जाता है। अल्ज़ाइमर रोग अप-रिवर्तनीय और प्रगतिशील मस्तिष्क रोग है, जो कि धीरे-धीरे स्मृति और सोचने के कौशल को नष्ट कर देता है। अंततः यह रोग दैनिक जीवन में होने वाले सरल काम को पूरा करने की क्षमता को भी समाप्त कर देता है। हालांकि, वैज्ञानिक रोज़ अल्ज़ाइमर रोग के बारे में अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन वे अभी तक अल्ज़ाइमर रोग होने के सटीक कारणों के बारे में जानकारी जान नहीं पाये हैं। इस प्रकार यह इडियोपैथिक रोग है। डीएसएम पांच ने अल्ज़ाइमर रोग की शब्दावली में बदलाव किया है। अल्ज़ाइमर रोग के कारण मुख्य या हल्का न्यूरो संज्ञानात्मक विकार होता है।

लक्षण

  • विस्मृति।
  • भाषा में कठिनाई, जिसमें नाम याद रखने में परेशानी शामिल है।
  • योजना निर्माण और समस्या के समाधान में परेशानी।
  • पूर्व परिचित कार्यों को करने में परेशानी।
  • एकाग्रता में कठिनाई।
  • स्थानिक रिश्तों जैसे कि सड़कों और गंतव्य के लिए विशेष मार्गों को याद रखने में परेशानी।
  • सामाजिक व्यवहार में परेशानी।

चरण

प्राथमिक

डिमेंशिया या मध्यम संज्ञानात्मक विकार (एमसीआई) या मध्यम न्यूरो संज्ञानात्मक विकार के कारण अल्ज़ाइमर रोग : इस रोग की पहचान संज्ञानात्मक गिरावट के स्तर द्वारा की जाती है। इस रोग में दैनिक जीवन की गतिविधियों को स्वतंत्रतापूर्ण बनाए रखने के लिए प्रतिपूरक रणनीतियों और सामजंस्य की आवश्यकता सहायता करती है।

मध्यम अल्ज़ाइमर डिमेंशिया

अल्ज़ाइमर रोग के कारण मध्यम अल्ज़ाइमर डिमेंशिया या मुख्य मध्यम न्यूरो संज्ञानात्मक विकार

इस रोग को दैनिक जीवन की बाधित होने वाली गतिविधियों के लक्षणों द्वारा पहचाना जाता है। रोगी को जटिल कार्यों जैसे कि वित्तीय प्रबंधन करने में पर्यवेक्षण की ज़रूरत पड़ती है।

गंभीर अल्ज़ाइमर डिमेंशिया

अल्ज़ाइमर रोग के कारण गंभीर अल्ज़ाइमर डिमेंशिया या मुख्य न्यूरो संज्ञानात्मक विकार

इस विकार को दैनिक जीवन की गंभीर बाधित गतिविधियों के लक्षणों द्वारा पहचाना जाता है। इसमें रोगी आधारभूत ज़रूरतों को पूरा करने के लिए दूसरों पर पूरी तरह से निर्भर होता है।

गंभीर डिमेंशिया से पीड़ित रोगी को चलने, बात करने और अपनी देखभाल करने की क्षमता में असमर्थता हो सकती है। उन्हें अपनी आधारभूत ज़रूरतों जैसे कि खाने, कपड़े धोने और शौचालय तक जाने के लिए देखभाल करने वालों के आश्रय की आवश्यकता होती है। उन्हें संचार जैसे कि वस्तुओं के नाम बोलने या स्वयं को अभिव्यक्त करने के लिए सटीक शब्दों का चयन करने में भी परेशानी हो सकती है।

कारण

वैज्ञानिक, अल्ज़ाइमर रोग से पीड़ित होने वाले सटीक कारणों को अभी तक समझ नहीं पाये हैं। इस रोग से पीड़ित होने वाले बहु-तथ्यों कारणों को निर्विवाद मान लिया गया है, जैसे कि :

जेनेटिक

अल्ज़ाइमर रोग में अपोलीपोप्रोटीन ई (एपीओई) जीन शामिल है। इस जीन के कई प्रकार हैं। उनमें से एक, एपीओई ε४ है, जो कि व्यक्ति में रोग के ज़ोखिम को विकसित करने के लिए पाया जाता है। हालांकि, इस एपीओई ε४ जीस होने का अर्थ, यह कदापि नहीं है, कि व्यक्ति में अल्ज़ाइमर रोग विकसित हो सकता है। कुछ व्यक्तियों में एपीओई ε४ जीस नहीं होता है, लेकिन उनमें यह रोग विकसित होता है। अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है, कि अतिरिक्त जीन जैसे कि प्रिसिनिलिन १, गुणसूत्र १४ में परिवर्तन, गुणसूत्र २१ में एपीपी (एमिलोयड प्रिकर्सर प्रोटीन) का बदलाव और प्रिसिनिलिन २, गुणसूत्र १ में होने वाला परिवर्तन अल्ज़ाइमर के विकास को प्रभावित कर सकता है। दुनियाभर के वैज्ञानिक व्यक्ति में अल्ज़ाइमर रोग के विकास के ज़ोखिम को बढ़ाने वाले अन्य जीन्स की खोज रहे हैं।

जीवन शैली कारक

अल्ज़ाइमर रोग के साथ, हृदय रोग, स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा और हाइपरलिपिडीमिया जैसे बीमारियाँ जुड़ी हो सकती हैं।

निदान

प्रारंभिक और उचित निदान कई कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह लोगों को यह बताया जा सकता है, कि उनके लक्षण अल्ज़ाइमर रोग या अन्य रोगों जैसे कि स्ट्रोक, ट्यूमर, पार्किंसंस रोग, सोने में गड़बड़ी, दवाओं के साइड इफेक्ट या अन्य स्थितियों के कारण उत्पन्न हुये हैं, तब रोग को प्रतिबंधित और संभवत: उपचारित किया जा सकता है। यह तथ्य उन्हें भविष्य में परिवार की योजना बनाने, रहने की व्यवस्था और सहयोगात्मक नेटवर्क विकसित करने में भी सहायता करता है। इसके अलावा, प्रारंभिक रोग की जानकरी द्वारा लोगों को नैदानिक परीक्षणों में शामिल करने के ज़्यादा अवसर प्रदान किए जा सकते हैं। यद्यपि, अल्ज़ाइमर रोग की निश्चित जानकारी केवल मृत्यु के बाद ही होती है। आमतौर पर चिकित्सक निम्नलिखित की सहायता द्वारा रोग की जानकारी जान सकता है :

  • पिछला चिकित्सीय इतिहास और वर्तमान स्वास्थ्य की स्थिति।
  • रोगी के व्यक्तित्व और व्यवहार में परिवर्तन।
  • संज्ञानात्मक परीक्षणों में स्मृति, समस्या समाधान और भाषा बोलने को देखा जा सकता है।
  • रोग के कारणों के समाधान के लिए मानक चिकित्सीय परीक्षण जैसे कि रक्त और मूत्र परीक्षण तथा अन्य परीक्षणों को अपनाया जाता है।
  • ब्रेन स्कैन में सीटी/एमआरआई स्कैन शामिल है।

प्रबंधन

अल्ज़ाइमर रोग के लिए कोई उपचार उपलब्ध नहीं है; हालांकि इस रोग के लक्षणों के आधार पर राहत प्रदान की जा सकती है। वर्तमान उपचार को चिकित्सा, साइकोसोशल और देखभाल में विभाजित किया जा सकता हैं।

चिकित्सा

कोलीनेस्टेरेस इन्हीबिटर्स-एसिटाइलकोलाइन एक रसायन है, जो कि तंत्रिका संकेतों को चार्ज रखता है तथा मस्तिष्क की कोशिकाओं के भीतर संदेश प्रणाली में मदद करता है।

अल्ज़ाइमर के उपचार के लिए विभिन्न प्रकार की दवाओं का उपयोग किया जाता है :

  • डोनेपेजिल
  • रिवाइस्टिंगमिन
  • गेलन्टामाइन
  • इन दवाओं का उपयोग हल्के से मध्यम अल्ज़ाइमर रोग के उपचार में किया जाता है।
  • एनएमडीए रिसेप्टर अवरोधक।
  • मिमेन्टाइम केमिकल का उपयोग मध्यम अल्ज़ाइमर रोग के साथ-साथ गंभीर अल्ज़ाइमर रोग के लिए किया जा सकता है।

साइकोसोशल

साइकोसोशल इन्टर्वेन्शन का उपयोग संयुक्त औषधीय-संबंधी उपचार के लिए किया जाता है। इसे सहयोगात्मक, संज्ञानात्मक और व्यवहारिक दृष्टिकोण में वर्गीकृत किया जा सकता है।

देखभाल

अल्ज़ाइमर से पीड़ित रोगी को पूरी तरह से उपचारित नहीं किया जा सकता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को धीरे-धीरे अपनी ज़रूरतों को पूरा करने में असमर्थ बनाया जाता है। इस प्रकार अनिवार्य देखभाल ही उपचार है तथा इसके माध्यम से इस रोग की अवधि को सावधानीपूर्वक प्रबंधित किया जा सकता है।

रोकथाम

इस रोग की रोकथाम के लिए कोई निश्चित प्रभावी उपाय नहीं है, जो कि रोग से बचने में सPicहयोग कर सकें।
हालाँकि, इस रोग से बचने के लिए कुछ निश्चित चरण है, जिन्हें अपनाया जा सकता है, जो कि डिमेंशिया की देरी से शुरुआत होने में सहायता कर सकते है। इन उपायों के माध्यम से रोगी मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकता है।

  • पढ़ना।
  • आनंद के लिए लिखना।
  • संगीत वाद्ययंत्र बजाना।
  • प्रौढ़ शिक्षा पाठ्यक्रमों में भाग लेना।
  • खेल खेलना।
  • तैराकी।
  • समूह खेल जैसे कि बॉलिंग करना।
  • घूमना।
  • तथा अन्य मनोरंजक गतिविधियों में भाग लेना।

स्त्रोत : राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रवेशद्वार,भारत सरकार।

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