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अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्न-औषध मूल्य निर्धारण

इस पृष्ठ में अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्न - औषध मूल्य निर्धारण की जानकारी दी गयी है I

औषधि नीति के उद्देश्य

औषधि नीति के उद्देश्य क्या है?

उत्तर-औषधि नीति, 1986 के सितम्बर, 1994 में घोषित संशोधनों के अनुसार औषधि नीति के मुख्य उद्देश्य निम्न प्रकार से हैं-

  1. अच्छी गुणवत्ता की आवश्यक व जीवनरक्षक एवं रोगनाशक दवाओं को उचित मूल्य पर प्रचुर मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित करना
  2. दवा उत्पादन की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली और देश में दवाओं के युक्तिसंगत प्रयोगों की बढ़ोत्तरी को बल प्रदान करना
  3. आर्थिक माप के साथ लागत प्रभावी उत्पादन को प्रोत्साहन देने की दृष्टि से औषध व्यवसाय में नए निवेशों के साधनों के लिए अनुकूलित वातावरण उत्त्पन्न करना एवं नई तकनीकों और नई दवाओं का प्रस्तुत करना एवं
  4. दवाओं के उत्पादन के लिए स्वदेशी क्षमताओं को बल प्रदान करना।

 

औषध मूल्य नियंत्रण आदेश

औषध (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 1995 (डीपीसीओ 1995) क्या है?

उत्तर- डीपीसीओ 1995, आवस्यक वस्तुए अधिनियम 1955 की धारा 3 के अन्तर्गत भारत सरकारा द्वारा दवाओं के मूल्यों को व्यवस्थित करने के लिए जारी किया गया एक आदेश है। यह आदेश अन्य बातों के साथ-साथ मूल्य नियंत्रित दवाओं की सूची, दवाओं के मूल्यो को निर्धारित करने की प्रक्रिया, सरकार द्वारा निर्धारित किए गए मूल्यों के कार्यान्वयन की विधि, प्रावधानों के उल्लंघन के लिए दंड इत्यादि प्रदान करता हैं। डीपीसीओ के प्रावधानों को कार्योन्वित करने के उद्देश्य से सरकार की शक्तियाँ राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण में निहित है।

दवा मूल्य नियंत्रण आदेश को आवश्यक वस्तुएँ अधिनियम के अन्तर्गत क्यों जारी किया जाता है?

उत्तर- दवायें समाज के स्वास्थ्य के लिए सारभूत होती है। दवायें आवश्यक घोषित की गई हैं और इसीलिए आवश्यक वस्तुएँ अधिनियम में इनको रखा गया है।

क्या देश में विपणन की जाने वाली सभी दवायें मूल्य नियंत्रण के अर्न्तगत आती है?

उत्तर  नहीं, साधारणतया प्रयोगी की जाने वाली 500 प्रपुंज (बल्क) दवाओं में से केवल 74 को ही वैधानिक मूल्य नियंत्रण के अर्न्तगत रखा गया है। सभी विनिर्मिती जिनमें ये प्रपुंज दवायें, एकल अथवा मिश्रित रूप में होती है, मूल्य नियंत्रित श्रेणी के अर्न्तगत आती हैं। तथापि अन्य दवाओं के मूल्य, यदि लोकहित में आवश्यक हो, विनियमित किए जा सकते हैं।

राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण क्या है एवं इसकी भूमिका क्या हे

उत्तर- राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की स्थाना 29 अगस्त 1997 को, मंत्रिमंडल समिति के द्वारा दवा नीति का सितम्बर 1994 में पुनर्वलोकन करते समय लिए गए एक निर्णय के अनुसार, विशेषज्ञों के एक स्वतंत्र निकाय के रूप में की गई थी। प्राधिकरण को अन्य कार्यों के साथ-साथ औषध उत्पादों (प्रपुंज दवाओं और विनिर्मिती) के मूल्यों के निर्धारण / संशोधन का कार्य, दवा (मूल्य नियंत्रण) आदेश के प्रावधानों को लागू करना एवं देश में नियंत्रित और अनियंत्रित (सरकारी नियंत्रण रहित) दवाओं के मूल्यों की निगरानी के कार्य सौपें गए हैं।

औषध (मूल्य नियंत्रण) आदेश की विशिष्टतायें

नियंत्रित श्रेणी की दवाओं के मूल्य कैसे व्यवस्थित किए जाते है?

उत्तर- दवा (मूल्य नियंत्रण) आदेश के प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण दवाओं की नियंत्रित श्रेणी के मूल्य दो प्रकार के मूल्य नामशः उच्चतम मूल्य एवं गैर-उच्चतम मूल्य निर्धारित करना है

'उच्चतम मूल्य' क्या है?

उत्तर- प्रत्येक प्रपुंज औषधि की दशा मे, जो कि मूल्य नियंत्रण के अंतर्गत आती है, के लिए बिक्री मूल्य की एक एकल अधिकतम सीमा निर्धारित की जाती है जो समग्र देश में मान्य होती है।

बड़े पैमाने पर प्रयोग होने वाली विनिर्मितियों के मूल्यों में एकरूपता प्राप्त करने के लिए, औषध नीति के  संशोधन में दिया गया है कि मूल्य नियंत्रित विनिर्मितियों के साधारणतया विपणन होने वाले डिब्बों के प्रमाप नाप के लिए सीमित मूल्य होने चाहिए जो कि लघु पैमाने की इकाइयों सहित सभी के लिए अनिवार्य होंगे। औषध (मूल्य नियंत्रण) आदेश 1995 के पैरा 9 के अर्न्तगत दी गई शक्तियाँ सीमित मूल्यों के निर्धारण डीपीसीओ/ पुर्ननिर्धारण के लिए प्रयोग की जाती है। राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर निर्धारित/ संशोधित किए जाने वाले उच्चतम मूल्य भारत के राजपत्र (असाधारण) में अधिसूचित किए जाते हैं। सामान्यता अधिसूचित किए गए उच्चतम मूल्यों में उत्पाद शुल्क, स्थानीय कर आदि सम्मिलित नहीं होते हैं।

गैर-उच्चतम मूल्य क्या हैं?

उत्तर- औषध (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 1995 के अनुच्छेद 8(1) (2) और (4) एवं अनुच्छेद 11 के अर्न्तगत राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण के द्वारा किसी विशिष्ट कम्पनी के अनुसूचित विनर्मिती के किसी विशिष्ट पैक नाप के लिए निर्धारित विनिर्दिष्ट मूल्य, गैर-उच्चतम मूल्य होते हैं। अतः वे नियत विनिर्मिती और नियत कम्पनी के लिए होते हैं। ऐसे पैकों के लिए निर्धारित गैर-उच्चतम मूल्यों को संबंधित इकाइयों को कार्यालय ज्ञापन जारी करके सूचित कर दिया जाता है। ऐसे ज्ञापन में, सामान्यता उत्पादन शुल्क घटक अलग से दिखाया जाता है। तथापि, गैर-उच्चतम मूल्यों में स्थानीय कर सम्मिलित नहीं होते।

मूल्य व्यवस्थित करने में राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण

क्या गैर अनुसूचित दवाओं के मूल्य व्यवस्थित करने में राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की कोई भूमिका है?

उत्तर - गैर अनुसूचित दवाओं (दवायें जो प्रत्यक्ष मूल्य नियंत्रण के अंर्तगत नहीं आती) के विनिर्माताओं को ऐसी दवाओं के लिए राष्ट्रीय औषण मूल्य निर्धारण प्राधिकरण के मूल्य अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य नहीं होता। तथापि, राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण को ऐसी दवाओं के मूल्यों की निगरानी एवं जहां कही भी प्रमाणित हुए हों उपचारात्मक उपाय करना आवश्यक होता है एवं इसमें ऐसे मूल्यों को निर्धारित करने एवं व्यवस्थित करने की शक्तियां निहित हैं।

औषध मूल्य नियंत्रण आदेश 1995 के अनुसार थोक विक्रेताओं एवं खुदरा विक्रेताओं को कितने मार्जिन की अनुमति दी गई है?

उत्तर- औषध मूल्य नियंत्रण आदेश, 1995 के अनुच्छेद 19 के अनुसार अनुसूचित (नियंत्रित) दवाओं के लिए 16 प्रतिशत का अंतर निर्धारित किया गया है जिसे नीचे पुनः उद्धत किया गया है -

  • अनुसूचित दवाओं की दशा में, अन्यथा इस आदेश के प्रावधानों के अन्तर्गत अनुमति न दी गई हो अथवा उसमें कोई आदेश दिया गया हो, एक निर्माता, वितरक अथवा थोक विक्रेता, एक खुदरा विक्रेता को विनिर्मिती, खुदरा मूल्य के समान मूल्य में से उसके 16 प्रतिशत को घटा कर (उत्पादन शुल्क को छोड़कर, यदि कोई हो), सरकार द्वारा किसी आदेश में विनिर्दिष्ट अथवा सूचित किया गया हो, बेचेगा।
  • उप-अनुच्छेद (1) में उल्लिखित होते हुए भी, सरकार लोक हित में एक साधारण अथवा विशेष आदेश द्वारा, उन विनिर्मितियों (फॉमूलेशन) के मूल्य निर्धारित कर सकती है जो थोक विक्रेता अथवा खुदरा विक्रेता को बेची जाती है एवं जिनके मूल्य इस आदेश के अर्न्तगत निर्धारित / पुर्ननिर्धारित किए गए है। गैर अनुसूचित विनिमिर्तियों में मार्जिन / उपान्त का निर्णय करने के लिए कंपनियां स्वतंत्र है। किन्तु, उद्यम द्वारा यह सूचित किया गया है कि कुछ के लिए 10 प्रतिशत है।

उल्लधंन के लिए दंड

औषध मूल्य नियत्रंण आदेश 1995 का उल्लधंन करने के लिए क्या दंड है?

उत्तर- दवा (मूल्य नियत्रंण) आदेश, 1995 के किसी भी प्रावधान का उल्लंधन, आवश्यक वस्तुएँ अधिनियम 1995 के प्रावधानों के अनुरूप दण्डनीय है। आवश्यक वस्तुए अधिनियम की धारा 7 के अनुसार औषध (मूल्य नियत्रंण) आदेश के उल्लंधन के लिए न्यूनतम तीन महीने के कारावास के दंड की व्यवस्था है जो सात वर्ष तक के लिए बढ़ सकती है एवं अतिक्रमणकारी जुर्माने का भी पात्र होता है।

यदि एक विनिर्माता दवाओं को सरकार द्वारा अनुमोदित मूल्यों से अधिक पर बेचता है तो क्या होता है?

उत्तर- यदि एक निर्माता सरकार द्वारा उत्पादों के लिए अनुमोदित / निर्धारित कीमत से अधिक पर दवायें बेचता है तो वह आवश्यक वस्तुए अधिनियम के अर्न्तगत अभियोजन के योग्य होगा एवं सरकार के पास वह राशि जमा कराने के लिए उत्तरदायी भी होगा जो सरकार द्वारा निर्धारित / अधिसूचित कीमतों से अधिक वसूलने के कारण देय होती है।

लागू करने वाली एजेन्सियां

राष्ट्रीय स्तर, राज्य स्तर एवं जिला स्तर पर कौन-सी प्रधिकरण है जो निर्धारित कीमतों को लागू कराने के लिए उत्तरदयी है?

उत्तर- राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण, एफ.डी.ए / राज्य के औषधि नियत्रंक एवं जिलों के औषधि निरीक्षक क्रमंशः राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर कीमतों को लागू कराने के प्राधिकरी हैं।

स्थानीय स्तर के कौन से प्राधिकरण है जहां पर शिकायते दर्ज की जा सकती है?

उत्तर - संबधित राज्य के राज्य औषधि नियत्रंक / संयुक्त औषधि नियत्रंक / उप औषधि नियत्रंक / सहायक औषधि नियत्रंक / औषधि निरीक्षक आदि। इनमें से किसी के भी पास शिकायत दर्ज की जा सकती है।

एक उपभोक्ता औषधियों के अतिप्रभार एवं उनकी गुण्वत्ता से संबधित शिकायतें कहां दर्ज करा सकता है?

उत्तर - दवा के अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक प्रभार करना, औषध (मूल्य नियत्रण) आदेश, 1995 के दण्ड विषयक प्रावधानों को आकर्षित करता है। एक दवा के गुण्वत्ता पहलू औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 के प्रावधानों को आकर्षित करते है। राज्य के एफ.डी.ए. / दवा नियत्रंण संगठन, राज्य स्तर पर औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम एवं औषधि मूल्य नियत्रंण आदेश को लागू कराने वाली एजेन्सी है। इसीलिए दवाओं के मूल्यों एवं उनकी गुणवत्ता से संबधित शिकायते, जिला के औषधि निरीक्षक अथवा राज्य औषधि नियंत्रक के पास दर्ज की जा सकती है। औषध मूल्य निर्धारण प्रधिकरण को प्रत्यक्ष रूप से की जा सकती है।

खुदरा मूल्य एवं चिट्‌ (लेबल) अपेक्षाएं

खुदरा मूल्य क्या है?

खुदरा मूल्य वह है जो मूल्य पर औषधि/ विनिर्मिर्ती उपभोक्ता/ प्रयोगकर्ता को बेचीं जाती है I दवा विनिर्माता को यह मूल्य उत्पाद के लेबल पर अंकित करना आवश्यक होता है। नियंत्रित विनिर्मितियों की दशा में, खुदरा मूल्य वह होता है जो दवा मूल्य नियत्रंण आदेश, 1995 के प्रावाधानों के अनुरूप निर्धारित किया जाता है।

दवा के पैक के लेबल पर क्या आवश्यक अपरिहार्य सूचना अंकित होनी अपेक्षित है?

उत्तर - औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम एवं दवा मूल्य नियत्रंण आदेश, 1995 के अधीन निम्न सूचना दवा के लेबल पर अंकित होना अपेक्षित है :-

(क)   विनिर्मिती (फॉमूलेशन) का नाम

(ख)   विनिर्मिती के संघरक/मिश्रण

(ग)   पैक नाप

(घ)   विनिर्माता का पता

(ड.)   निर्माणी अनुज्ञाप्ति संख्या

(च)   निर्माण की दिनांक

(छ)   समाप्ति दिनांक

(ज)   अधिकतम खुदरा मूल्य (स्थानीय कर रहित) इत्यदि।

दवाओं के लेबल पर 'स्थानीय कर अतिरिक्त' लिखा होता है। इनका क्या अर्थ होता है और इनकी दर क्या होती है?

उत्तर- इनमें सामान्तया बिक्री कर एवं चुंगी साम्मिलित होती है। जब कभी भी निर्माता केन्द्रीय बिक्री कर का भुगतान करता है वह इसे भी सम्मिलित कर देता है। ये कर उपभोक्ता द्वारा ही दिये जाते है।

एक दवा के लिए कुल कितनी राशि का भुगतान किया जाना अपेक्षित होता है?

उत्तर- किसी दवा पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य जमा स्थानीय कर, वह अधिकतम भुगतान योग्य राशि है। यद्यापि, एक दवा इस मूल्य से कम पर भी बेची जा कसती है।

यदि कोई खुदरा विक्रेता दवा की पैकिंग में से खुली दवायें बेचता है तो इस दशा में क्या मूल्य प्राप्त किया जा सकता है?

उत्तर- यदि कोई खुदरा विक्रेता खुली मात्रा में दवायें बेचता है तो उनका मूल्य, उस दवा के पैकेट के लेबल पर अंकित मूल्य के यथानुपात राशी और उसके 5% के योग से अधिक नहीं होना चाहिए।

क्या उपभोक्ता दवा विक्रेता द्वारा बेची जाने वाली दवाओं की मूल्य सूची मांग संकता है?

उत्तर- हाँ। प्रत्येक खुदरा व्यापारी / दवा विक्रेता को निर्माता / आयातक से प्राप्त मूल्य सूची और अनुपुरक मूल्य सूची को जहां वह व्यापार करता है उस परिसर में ऐसे ध्यानाकर्षी भाग में इस तरह से दर्शानी होती है कि जो भी व्यक्ति उनसे इस सबंध में परामर्श करना चाहे उनकी इस सूची तक सुगमता से पहुंच होनी चाहिये।

क्या दवा विक्रेता / खुदरा व्यापारी के लिए दवा की बिक्री के नकद प्राप्ति पत्र जारी करना अपरिहार्थ होता है?

उत्तर - हाँ। दवा विक्रेता / खुदरा व्यापारी को दवा की बिक्री के लिए नकद प्राप्ति पत्र जारी करना एवं नकद / उधार पत्रों की प्रतिलिपि रखना अपिरिहार्थ होता हौ।

दवा के मूल्यों में वृद्धि के सामान्य कारण

औषधियों के मूल्यों में वृद्धि क्यों हो रही है?

उत्तर  औषधियों के मूल्यों में वृद्धि के निम्न कारण है -

(क)प्रपुंज (बल्क) औषधियों के मूल्यों में वृद्धि

(ख)   औषाधियों के उत्पादन में प्रयुक्त होने वाले संघटकों जैसे लेक्टोस, स्टार्च, चीनी, ग्लिसरी, द्रावक, जिलेटीन केप्सूल आदि की लागतों में वृद्धि

(ग)   परिवहन, माल भाड़े दर आदि की लागत में वृद्धि

(घ)   उपयोगिताओं जैसे ईधन, शक्ति, डीज़ल आदि की लागतों में वृद्धि

(ड.)   आयातित औषधियों की दशा में, सी.आई.एफ. कीमतो में वृद्धि और रूपयें की कीमत में कमी।

(च)   करों एवं शुल्कों में परिवर्तन।

(छ)   मूल्य निर्धारण प्रक्रिया

मूल्यों के निर्धारण की गणना पद्धति

प्रंपुज (बल्क) औषधियों के मूल्यों के निर्धारण की गणना पद्धति क्या है?

उत्तर- प्रंपुज (बल्क) औषधियों के मूल्य निर्धारण की गणुनाप(ति निम्न प्रकार से है-

औषधि मूल्य नियत्रंण ओदश 1995 के अनुसार, प्रंपुज औषधियों के मूल्य राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्रधिकरण द्वारा इन्हें विभिन्न विनिर्माताओं द्वारा उचित मूल्यों पर उपलब्ध कराने के उदेश्य से निर्धारित किए जाते है। ये मूल्य समय-समय पर व्यवसायिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्धारित किए जाते है। प्रंपुज औषधियों के मूल्य निर्धारण / संशोधन प्रक्रिया में निम्न चरण निहित होते हैं-

  1. कंपनियों को औषधि मूल्य नियत्रंण आदेश 1995 की प्रश्नावली / फॉर्म1 जारी कर के एवं लागत अंकेक्षण प्रतिवेदन आदि द्वारा आंकड़ों का संग्रहण।
  2. यदि आवश्यक हो तो संयन्त्र निरीक्षण दौरे द्वारा आंकड़ों का सत्यापन।
  3. वास्तविक लागत विवरण पत्र तैयार करना।
  4. प्रंपुज (बल्क) औषधियों के लिए उचित मूल्य ज्ञात करने के लिए अपनाए जाने वाले तकनीकी मापक तैयार करना।
  5. वास्तविक लागत और तकनीकी मापकों के आधार पर अनुमानित लागत तैयार करना। औषध (मूल्य नियत्रंण) ओदश 1995 के अनुच्छेद 3 के उप-अनुच्छेद (2) के अनुरूप, वैयक्तिक विनिर्माताओं द्वारा प्रदान किए गए विवरण में दिए गए विकल्प के आधार पर उचित मूल्यों की गणना की जाती है।
  6. भारित औसत लागत एवं उत्पादन स्तर में कटौती के अध्ययन पर विचार करते हुए प्रपुंज औषधियों के उचित मूल्यों का निर्धारण ।
  7. भारत के राजपत्र में प्रपुंज दवाओं के मूल्यों को अधिसूचित करना।
  8. यदि निर्माताओं द्वारा कहा जाता है, तो ये उचित मूल्य, बड़े कच्चे माल एवं उपयोगिता दरों में परिवर्तन के कारण गतिशीलता दरों में परिवर्तन के कारण गतिशीलता सूत्र के आधार पर पुनःसंशोधित किए जा सकते है।

विनिर्मितयों (फॉमूलेशन) के मूल्य निर्धारण की क्या गणना पद्धति है?

उत्तर - औषध (मूल्य नियत्रंण) आदेश, 1995 का अनुच्छेद 48, विनिर्मितियों के मूल्य निर्धारण के नियमों व प्रक्रियाओं का उल्लेख करता है। औषध (मूल्य नियत्रंण) आदेंश, 1995 का अनुच्छेद 7, विनिर्मितियों के खुदरा मूल्य की गणना के सूत्र का उल्लेख करता है।

विनिर्मितियों के मूल्य निर्धारण को पर प्रमाणित करने वाली परिस्थितियाँ है-

  1. प्रंपुज औषधियों के मूल्यों में पुनरावृति (दवा मूल्य नियत्रंण आदेश, 1995 के अनुच्छेद 8 का उप-अनुच्छेद 2)
  2. नए पैकों का आगमन (अनुच्छेद 8 का उप-अनुच्छेद 6)
  3. अनुच्छेद 7 के अर्न्तगता सरकार द्वारा सूचित विभिन्न शर्तो में परिवर्तन।
  4. निर्माताओं द्वारा दिए जाने वाले अन्य कारण।

मूल्य के अनुमोदन प्राप्त करने के लिए, पैकों की निर्माण इकाई को प्रार्थनापत्र, देना होता है यदि वह स्थानीय निर्माता है तो डीपीसीओ के साथ फॉर्म-3 में और यदि आयातक है तो डीपीसीओ के साथ अनुलग्नित फॉर्म-4 मे देना होता है। निर्माताओं से, फॉर्म-3 में स्वदेशी विनिर्मिती और आयातकों से फॉम-4 (डीपीसीओ-1995 में दिए अनुरूप) में राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्रधिकरण में प्राप्त प्रार्थनापत्रों को मूल्य निर्धारण / संशोधन के लिए विचार किया जाता है। स्वदेश में उत्पादित विनिर्मितियॉ के खुदरा मूल्य, डीपीसीओ 1995 के अनुच्छेद 7 में दिए सूत्र के अनुसार ज्ञात किये जाते है। स्वदेश में निर्मित विनिर्मितयों के लिए, अधिकतम अनुमति योग्य निर्माण पश्चात्‌ एमएपीइ 100 प्रतिशत की अनुमति दी गई है। आयातित विनिर्मितियां के लिए मेप, आधारभूत लागत का 50% तक है।

यथास्थिति मूल्य निर्धारण क्या है?

उत्तर- राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्रधिकरण यथास्थिति आधार पर भी प्रंपुज (बल्क) औषधियों एवं विनिर्मितियों (फॉमूलेशन) के मूल्य निर्धारण / संशोधन करता है। जहाँ कही भी ये अनुभव होता है कि निर्माता प्रंपुज औषधियों के मूल्यों एवं वैधानिक शुल्कों में कमी होने के पश्चात्‌ भी डीपीसीओ, 1995 के प्रावधानों के अनुरूप अपने प्रार्थनापत्र नहीं देते है वहां यथा स्थिति मूल्य निर्धारण किया जाता है। अतः ऐसी मूल्य कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को पहुचाने की दृष्टि से, यथास्थिति मूल्य निर्धारित किए जाते है। उदाहरणतया, डीपीसीओ, 1995 के अनुच्छेद 8(2) के अनुसार, विनिर्माता को प्रंपुज दवओं के मूल्य निर्धारण / संशोधन के 30 दिन की अवधि के अन्दर विनिर्मिति के मूल्यों को संशोधन के लिए आवेदन करना होता है। यदि वे दिए गए समय के दौरान इस शर्त का निर्वाह करने में अक्षम होते है तो सीमित मूल्य के लिए डीपीसीओ, 1995 के अनुच्छेद 9(2) के अनुरूप और गैर-उच्चतम मूल्यों के डीपीसीओ,1995 के अनुच्छेद 11 के उपअनुच्छेद 8(2) के अनुरूप यथास्थिति कार्यवाही की जाती है।

यथानुपात मूल्य निर्धारण क्या है?

उत्तर  राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने 27.01.98 को यथानुपात मूल्य निर्धारण पर अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना के अनुसार, सभी अनुसूचित वितनर्मितियों के निर्माताओं को जिनके पैक नाप, डीपीसीओ, 1995 के अनुच्छेद 9 के उप-अनुच्छेद (1) और (2) मे सूचित पैक नाप से भिन्न है, को ऐसे पैक नाप के मूल्य, एक ही शक्ति और के उपअनुच्छेद (1) और (2) के अनुसार ऐसी विनिर्मितियों के नवीन सीमित मूल्य यथाअनुपात आधार पर निर्धारित

किये जाते है। ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि-

  1. निर्माता, विभिन्न पैक नापों के लिए बार-बार मूल्य अनुमोदन प्राप्त करने के लिए बाध्य न हो और
  2. निर्माता पैक नापों को, मूल्य नियंत्रण के क्षेत्र से बाहर रहने के उद्देश्य से परिवर्तित न करें।

डीपीसीओ की अनुसूची 1 के अर्न्तगत सम्मिलित प्रपुंज (बल्क) दवाओं की प्रत्येक विनिर्मिती, पैकनाप, बल, खुराक के रूप से असंब(, केवल सरकार द्वारा निर्धारित मूल्यों पर ही विपणन की जानी चाहिए, जहां कहीं भी आवश्यक हो यथानुपात मूल्यों का समायोजन होना चाहिए। यद्यपि लघु पैमाने की इकाईयों के निर्माता, उन अनूसूचित विनिर्मितयों जो कि उच्चतम मूल्य के श्रेणी के अंतर्गत नहीं आती, के लिए राष्ट्रीय औषध प्राधिकरण से मूल्य निर्धारण में छूट प्राप्त कर सकते है। बशर्ते वे रा0औ0मू0नि0प्रा0 को इस संबंध में एक घोषणा एस.ओ. संखया 134(ई0) दिनांक 2 मार्च 1995 के अनुरूप दे और इसके लिए रा0औ0मू0नि0प्रा0 से अनुमोदन भी प्राप्त किया गया हो।

 

स्रोत: राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण, भारत सरकार

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