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एच.आई.वी./एड्स व श्रम जगत पर राष्ट्रीय नीति

इस लेख में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गयी एच.आई.वी./एड्स व श्रम जगत पर राष्ट्रीय नीति का उल्लेख किया गया है।

भूमिका

पृष्ठभूमि

एच आई वी/एड्स महामारी विकास और सामाजिक प्रगति के लिए एक सर्वाधिक विकट चुनौती है | इस महामारी से गरीबी और असमानता बढ़ती है और इससे समाज के सर्वाधिक वंचित लोगों अर्थात बुजुर्गों ,महिलाओं, बच्चों और गरीबों पर भार बढ़ता है |

ऐसे देश और संगठन जो समय रहते इसके लिए समुचित कार्यवाई नहीं करते उन्हें सार्वजानिक और निजी उद्यमों पर भारी लागत देकर इसकी कीमत चुकानी पड़ती है क्योंकि इससे उत्पादकता में कमी आती है, कुशल और अनुभावी श्रमिकों को खोना पड़ता है और कर्मचारियों के इलाज पर व्याय बढ़ता है जैसे-जैसे सार्वजनिक सेवाओं के लिए मांग बढ़ती है | राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाएं, जैसा कि उप-सहारा अफ्रिका जैसे गंभीर रूप प्रभावित क्षेत्रों में देखा गया है, वस्तुतः प्रत्येक क्षेत्र में प्रभावित हुई हैं |

भारत में स्थिति

नाको के अनुरूप भारत अनुमानतः 2.31 मिलियन लोग वर्ष 2007 में एच आई वी/एड्स के साथ जी रहे थे (15-49 वर्ष की आयु में 88.7 प्रतिशत, 50 और उससे ऊपर की आयु में 7.5 प्रतिशत और 15 वर्ष से कम आयु में 3.5 प्रतिशत बच्चे) | देश में एच आई वी/एड्स की मौजूदा दर 0,34% है | देश में महिलाओं पर एच आई वी भार 39 प्रतिशत है | आठ राज्यों में राष्ट्रीय औसत की तुलना में एच आई वी व्यक्ति अधिक है | भारत इस महामारी को समग्र रूप में नियंत्रित करने में सफल रहा है | तथापि, इस पर कतई ढील नहीं दी जा सकती क्योंकि यह महामारी अधिक जोखिम वाले वर्गों से सामान्य जनसंख्या  में, पुरुषों से महिलाओं में तथा शहरी क्षेत्रों से ग्रामीण इलाकों में फैलती है |

एच आई वी/एड्स और कार्य जगत

एच आई वी/एड्स कार्य जगत के लिए बड़ा खतरा है | इसका श्रम बल के सर्वाधिक उत्पादी क्षेत्र पर अधिकतम प्रभाव दिखा है | उच्च एच आई वी विद्यमान दरों वाले देशों में, श्रम आपूर्ति में कटौती हुई है और कामगारों की आय घटी है जिससे उद्यमों के निष्पादन और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ा है |

एच आई वी/एड्स कार्यस्थल पर मौलिक अधिकारों का हनन करता है | विशेषकर, एच आई वी/एड्स द्वारा प्रभावित कामगारों और उनके साथ रहने वाले लोगों के साथ भेदभाव किया और लांछन लगाया जाता है | कार्यस्थल पर लांछन और भेदभाव, ज्ञात अथवा परिकल्पित एच आई वी स्थिति की वजह से कामगारों को पेश आ रहे बहिष्करण और अलग–थलग पड़ने के आलावा रोज़गार और जीविका अवसरों के खोने के रूप में परिलक्षित होता है |

भारतीय श्रमजीवी वर्गों के लिए एच आई वी का खतरा इस तथ्य से स्पष्ट है कि सूचित एच आई वी संक्रमणों का लगभग 90% 15-49 वर्ष की सर्वाधिक उत्पादी आयु वर्ग से है |

भारत में 400 मिलियन से अधिक श्रमजीवी लोग हैं जिनमें से 93 प्रतिशत अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में हैं |अनौपचारिक/असंगठित क्षेत्र का श्रमिक अल्प पहुंच वाला होता है और यह कम शिक्षा वाला, नगण्य सामाजिक संरक्षण लाभों वाला, मुश्किल कामकाजी दशाओं वाला, खराब स्वास्थ्य वाला तथा स्वास्थ्य देखरेख सेवाओं तक सीमित पहुंच वाला होता है |

बड़ी सख्या में लोग बेहतर रोज़गार /जीविका की तलाश में देश में तथा विदेशों दोनों में प्रयास  करते है | यधपि सभी प्रवासी कामगारों को समान रूप से जोखिम नहीं होता है, फिर भी एच आई वी जैसे संक्रमण उन प्रवासियों में बढ़ जाते हैं जो अकेले रहते हैं, अधिक समय तक परिवार से दूर रहते हैं और मुश्किल परिस्थितियों में कार्य करते हैं |

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम में ध्यान दिया जाने वाला क्षेत्र

कार्यजगत में एच आई वी/एड्स नीति और कार्यक्रमों का विस्तार राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम फेज-111 (2007-2012) में मुख्य रणनीति के तहत एक महत्वपूर्ण संघटक है | राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन ने सतत तरीके से एच आई वी/एड्स को मुख्य धारा में लेने के लिए अभिकेन्द्रित प्रयास की जरूरत को महसूस करते हुए एक समर्पित मुख्य धारा प्रकोष्ठ की स्थापना की है जो सरकार, सिविल सोसायटी संगठनों और व्यवसायों/उधोगों के साथ मुख्य धारा प्रयासों की शुरुआत करने और सुविधाजनक बनाने के लिए उतरदायी है |

यह टिप्पणी की गई थी कि कार्यजगत में एच आई वी/एड्स हस्तक्षेपों पर राष्ट्रीय नीति दिशा–निर्देश का अत्यधिक महत्व होगा | श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय तथा स्वास्थय एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठनों ने इस नीति दस्तावेज को संयुक्त रूप में विकसित किया है | ये दिशा-निर्देश नियोक्ता और श्रमिक संगठनों एच आई वी/एड्स से पीड़ित व्यक्तियों, अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आई एल ओ) और यू एन ए आई डी एस के साथ परामर्श से उभर कर सामने आये हैं |

प्रस्ताविक राष्ट्रीय नीति का आधार

यह नीति निम्नलिखित पर आधारित तथा निर्मित है:-

क) भारत सरकार की एच आई वी/एड्स नीति का व्यापक ढांचा और सिधांत राष्ट्रीय नीति इस बात पर बल देता है कि संगठित तथा असंगठित क्षेत्र उद्योग को अपने श्रम बल के उत्पादी बर्गों की स्वास्थ्य संबंधी देखरेख हेतु प्रेरित किए जाने की जरुरत है |

ख) एच आई वी/एड्स तथा कार्यजगत संबंधी आई एल ओ प्रथा कोड जिसे भारत में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, नियोक्ता और कामगार संगठनों द्वारा अनुमोदित किया जाता है |

ग) सात राष्ट्रीय स्तर के नियोक्ता संगठनों द्वारा हस्ताक्षेरित एच आई वी/एड्स के बारे में भारतीय नियोक्ताओं का प्रतिबद्धता विवरण (अनुबंध-क)

घ) भारत में पांच केन्द्रीय श्रमिक संघों द्वारा हस्ताक्षरित केन्द्रीय श्रमिक संघ को एच आई वी/एड्स पर संयुक्त प्रतिबद्धता विवरण (अनुबंध-ख) |

तर्काधार

भारत के प्रधान मंत्री की अध्यक्षता वाली एड्स संबंधी राष्ट्रीय परिषद् एच आई वी/एड्स के संबंध में श्रम बल के संरक्षण को उच्च प्राथमिकता देती है |

  1. कार्यस्थल, जहाँ बड़ी संख्या में लोग एक साथ आते हैं, एच आई वी/एड्स के साथ जी रहे और प्रभावित लोगों के लिए निवारण, इलाज, देखरेख तथा सहायता को आसानी से पहुंचाने के लिए और वायरस के प्रभाव को शमन करने में मदद हेतु एक आदर्श ढांचा और स्थल है |
  2. एच आई वी/एड्स के साथ जुड़ा लांछन और भेदभाव एच आई वी/एड्स से लड़ने में एक बड़ी चुनौती है |
  3. भारत सरकार ने भेदभाव (रोजगार और व्यवसाय) पर आई एल ओ अभिसमय संख्या 111 का अनुसमर्थन किया है | इसलिए, कामगारों के साथ उनकी वास्तविक अथवा मानी गयी एच आई वी स्थिति के आधार पर भेदभाव रहित ढांचा सृजित करने के लिए एक नीतिगत वक्तव्य आवश्यक है | यह आवश्यक भी है क्योंकि भारत में एच आई वी/एड्स संबंधी एक विधायी ढांचा अभी तैयार नहीं किया गया है हालाँकि इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है | तथापि, रोजगार में एच आई वी/एड्स से जुड़े भेदभाव पर कई ऐतिहासिक न्यायालय निर्णय लिए गए हैं, जो इस नीतिगत वक्तव्य लिए संगत पृष्ठभूमि प्रदान करते हैं |
  4. कार्यस्थल के माध्यम से निवारण प्रयास वैश्विक रूप में मान्यता प्राप्त मितव्ययी रणनीति हैं |
  5. यद्यपि प्रयास किए जा रहे हैं, फिर भी असंगठित क्षेत्र के कामगरों के लिए नीतिगत उपाय अभी विकसित किए जाने हैं ताकि स्वास्थ्य बीमा में एच आई वी सहित भेदभाव रहित सामाजिक संरक्षण के लिए दिशानिर्देश दिए जा सकें |
  6. सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में अनेक नियोक्ताओं ने कम जोखिम अवधारणा और समझ की कमी की वजह से कार्यस्थल हस्तक्षेप को नहीं अपनाया है | श्रमिक संघों, नियोक्ता संगठनों (सार्वजनिक अथवा निजी स्वामित्व वाले जो भी हों) के साथ राज्य स्तर पर राज्य एड्स नियंत्रित सोसायटियों (एस ए सी एस), के बीच भागीदारी सीमित रही है |
  7. अगले 10-12 वर्षों में भारत में लगभग 14 मिलियन नौकरियां सृजित होंगी | आधिकांश प्रवेशकर्ता युवा होंगे और एच आई वी का अनियंत्रित फैलाव तथा उनके बीच इसका प्रभाव आर्थिक विकास को प्रभावित करेगा | कार्यस्थल नीति यह सुनिश्चित करेगी कि उन्हें निवारण के लिए समुचित सेवाएँ और सूचना प्रदान की जाती हैं |

अतः कार्यस्थल पर एच आई वी/एड्स के बारे में एक राष्ट्रीय नीति आवश्यक है ताकि सभी प्रमुख कार्यकर्ताओं को दिशानिर्देश दिये जा सकें और एच आई वी संक्रमण से भारतीय कामकाजी लोगों की सुरक्षा तथा इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव के शमन हेतु कारगर सहयोग और क्रियान्वयन के लिए तंत्र का सुझाव दिया जा सके |

नीतिगत ढांचा

नीतिगत ढांचा एच आई वी/एड्स के बारे में निम्नलिखित तथ्यों पर आधारित है:-

1) ह्यूमन इम्यूनो-डेफिसेन्सी वायरस (एच आई वी) के संक्रमण के ज्ञात मार्ग हैं :-

  • किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन सम्पर्क;
  • संक्रमित रक्त अथवा रक्त उत्पादों का आदान कराना;
  • संक्रमित सुइयों/सिरिजों का उपयोग करना; और
  • गर्भावस्था, बच्चे के जन्म अथवा स्तनपान कराने के दौरान संक्रमित माता से बच्चे को |

2) यह सुझाव देने के लिए कोई वैज्ञानिक अथवा जानपदिकरोग विज्ञानी तथ्य नहीं है कि एच आई वी का संक्रमण (एच आई वी से संक्रमित व्यक्तियों से बात करने अथवा स्पर्श करने, अथवा उसके द्वारा उपयोग में लाये जाने वाले कार्यालयीन उपकरणों, औजारों, बर्तनों अथवा शौचालय का उपयोग करने वाले) कार्यस्थल पर सामान्य संपर्क के माध्यम से हो सकता है | विशेष मामलों में जहां इनके संपर्क में आने से अत्यधिक जोखिम है, उदहारण के लिए स्वास्थ्य देखरेख कामगार जो रक्त उत्पादों के संपर्क में आ सकते हैं, वहां सार्वभौमिक पूर्वोपाय के रूप में ज्ञात विशिष्ट और समुचित संक्रमण-नियंत्रण प्रक्रियाएं हैं जिनका अनुसरण किया जाना चाहिए | अतः संक्रमण के नियमित कार्यस्थल पर होने की संभावना नहीं हैं |

3) एच आई वी के साथ व्यक्ति संक्रमण के बावजूद अनेक वर्षों तक कार्य करने के लिए स्वस्थ्य और सबल बने रह सकते हैं |

4) एन्टी रेट्रोवाइयरल इलाज की उपलब्धता से एच आई वी के साथ जी रहे लोगों का जीवन दीर्घ हो सकता है और वे एक सामान्य उत्पादी जीवन जी सकते हैं |

 

लक्ष्य

यह नीति, जो मानवधिकारों के सिधान्तों पर आधारित है, का लक्ष्य कार्यजगत में महामारी को कम करने तथा इसके प्रभाव को व्यवस्थित करने के लिए एच आई वी/एड्स के राष्ट्रीय प्रत्युतर को दिशानिर्देश देना है | विशिष्ट रूप इस नीति का लक्ष्य है :-

  1. कमागरों और उनके परिवारों के बीच एच आई वी संक्रमण को फैलने से रोकना;
  2. उन लोगों के अधिकारों का संरक्षण करना जो संक्रमित है और उन्हें उपलब्ध चिकित्सा देखरेख, सहायता तथा इलाज प्रदान करना;
  3. कमागरों को कार्यस्थल पर समानता तथा सम्मान का आश्वासन देकर एच आई वी/एड्स से संबंधित लांछन और भेदभाव से उनकी रक्षा करना;
  4. एच आई वी/एड्स के बारे में सूचना सेवाओं को आसान बनाकर सुरक्षित प्रवास सुनिश्चित करना |

 

कार्यक्षेत्र

यह नीति कामगार के पति/पत्नी तथा बच्चों अथवा अन्य आश्रित सदस्यों सहित सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों में सभी नियोजकों और कमागरों (कार्य के लिए आवेदकों सहित) तथा सभी कार्यस्थलों और ठेकागत नियोजनों तथा सभी कार्य पहलुओं-औपचारिक तथा अनौपचारिक व स्व-नियोजित कमागरों पर लागू होती है |

राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर नियोक्ता और कामगार संगठनों, सरकारी मंत्रालयों/विभागों, सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र की कंपनियों, भारत में कार्यरत बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अन्य सामाजिक भागीदारों को अपने अलग-अलग कार्यस्थलों में  कार्यस्थल नीति बनाने और क्रियान्वयन करने में इस नीतिगत ढांचे के उपयोग की सलाह दी जाती हैं |

मार्गदर्शी सिधांत

यह नीति एच आई वी/एड्स और कार्यजगत संबंधी आई एल ओ व्यवहार सहिंता के महत्वपूर्ण सिधान्तों को अंगीकार करती है जो भारत की राष्ट्रीय एच आई वी/ नीति के अनुरूप है | दस सिधांत हैं :

1. एच आई वी/एड्स एक कार्यस्थल मुद्दा

एच आई वी/एड्स एक कार्यस्थल मुद्दा है क्योंकि यह कमागरों और उद्यमों को प्रभावित करता है, श्रम लागत को बढ़ाता है | और उत्पादकता को घटाता है | कार्यस्थल इस महामारी को फैलने और इसके प्रभाव को सीमित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है |

2. भेदभाव न किया जाना

वास्तविक अथवा कल्पित एच आई वी स्थिति के आधार पर कमागरों के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए और न ही उन्हें लांछित किया जाना चाहिए |

एच आई वी/एड्स से पीड़ित लोगों से भेदभाव करने और उन पर लांछन लगाने से एच आई वी/एड्स की रोकथाम को बढ़ावा देने पर केन्द्रित प्रयासों में बाधा आती है |

3. लैंगिक समानता

जैविकीय, सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक कारणों से पुरुषों की तुलना में महिलाओं के एच आई वी/एड्स महामारी से संक्रमित और प्रभावित होने की अधिक संभावना होती है | एच आई वी संक्रमण के फैलाव को सफलतापूर्वक रोकने और एच आई वी/एड्स का सामना करने में महिलाओं को सक्षम बनाने हेतु समान लैंगिक संबंध और महिलाओं का सशक्तिकरण महत्वपूर्ण है |

4. स्वस्थ कार्य वातावरण

कार्य वातावरण स्वस्थ और सुरक्षित तथा कमागरों के शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होने और उनकी क्षमताओं के अनुकूल होनी चाहिए |

5. सामाजिक संवाद

एच आई वी/एड्स नीति और कार्यक्रम के सफलतापूर्वक विकास और क्रियान्वयन हेतु नियोक्ताओं. कमागरों और सरकारों के बीच पूर्ण सहयोग और विश्वास आवश्यक है |

6. रोजगार के प्रयोजनार्थ जाँच नहीं

रोजगार के आवेदकों अथवा रोजगार प्राप्त व्यक्तियों अथवा रोजगार या कामगार लाभों से बहार करने के प्रयोजनों के लिए एच आई वी/एड्स जाँच अपेक्षित नहीं होनी चाहिए | एच आई वी के प्रभाव का आकलन करने के लिए नियोक्ता अपने कार्यस्थल पर अज्ञात रूप से, असंबद्ध एच आई वी अध्ययन करवा सकता है | ऐसे अध्ययन कराये जा सकते हैं बशर्तें कि इन्हें विज्ञानिक अनुसंधान के नीतिपरक सिधान्तों, पेशेवर नीति शास्त्रों और व्यक्ति और गोपनीयता संरक्षण के अनुरूप कराया गया हो | जहाँ ऐसा अनुसंधान किया जाता है वहां एस संबंध में कमागरों से परामर्श किया जाना और उन्हें सूचित किया जाना चाहिए, की  यह हो रहा है | जाँच को अज्ञात नहीं समझा जायेगा यदि जाँच के परिणाम से किसी व्यक्ति की एच आई वी स्थिति के बारे में पता चलता हो |

7. गोपनीयता

रोजगार के इच्छुक अथवा कमागरों से एच आई वी संबंधित निजी सूचना प्रस्तुत करने के लिए कहने का कोई औचित्य नहीं है | न ही सह-कर्मियों से अपने साथ कमागरों के संबंध में निजी सूचना प्रकट करने के लिए कहा जाना चाहिए |

चिकित्सा गोपनीयता के दायरे में आने वाले व्यकितगत आंकड़ों को चिकित्सा गोपनीयता संबंधी नियमों द्वारा प्रतिबंधित कार्मिक द्वारा ही रखा जाना चाहिए और इसे अन्य व्यक्तिगत आंकड़ो से अलग रखा जाना चाहिए |

चिकित्सा जाँच के मामले में, नियोक्ता को रोजगार विशेष निर्णय से संबंध निष्कर्ष की ही जानकारी दी जानी चाहिए | निष्कर्षों में चिकित्सा के स्वरूप की कोई सूचना नहीं होनी चाहिए | उनमें उचित रूप से प्रस्ताविक कार्य हेतु उपयुक्तता का संकेत किया जाना चाहिए अथवा उन कार्यों के प्रकार और कार्य दशाओं को विनिद्रिष्ट किया जाना चाहिए जो अस्थायी रूप से अथवा स्थायी रूप से चिकित्सकीय दृष्टि से विरोधाभासी हों |

8. रोजगार संबंधों का जारी रहना

एच आई वी संक्रमण रोजगार समाप्ति का कोई कारण नहीं है | एच आई वी से संबंधित बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को तब तक कार्य के लिए उपयुक्त बने रहना चाहिए जब तक की वे समुचित दशाओं में में चिकित्सा दृष्टि से उपयुक्त हों |

9. रोकथाम

एच आई वी संक्रमण की रोकथाम की जा सकती है | सामाजिक भागीदार सूचना और शिक्षा तथा दृष्टिकोणों और व्यवहार में परिवर्तनों में सहायक होते हुए रोकथाम प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए एक अव्दितीय स्थिति में होते हैं |

10. देखरेख और सहायता

कार्यस्थल पर एच आई वी/एड्स के प्रति प्रतिक्रिया में एकजुटता, देखरेख और सहायता से मार्गदर्शन किया जाना चाहिए | देखरेख और सहायता में स्वैच्छिक जाँच तथा परामर्श का प्रावधान, उपयुक्त कार्य का आबंटन, कर्मचारी और परिवार सहायता कार्यक्रम और स्वास्थ्य बीमा तथा व्यावसायिक योजनाओं के लाभों तक पहुँच शामिल होनी चाहिए |

सभी कर्मचारी परामर्श और जाँच तक पहुँच, ए आर टी और एस टी आई और हुए संक्रमणों के उपचार और सांविधिक तथा व्यवसायिक योजनाओं के लाभों सहित वहन करने योग्य स्वास्थ्य सेवाओं के पात्र हैं | उपचार की उपलब्धता गोपनीय स्वैच्छिक एच आई वी जाँच को बढ़ावा देती है जिससे देखरेख और प्रदान सहयता प्रदान करने में आसानी होती है और रोकथाम को बढ़ावा मिलता हैं |

प्रमुख कार्यनीतियाँ

क) एच आई वी संक्रमण की रोकथाम

ख) कार्यस्थलों पर सभी स्तरों पर शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करना, योग्य शिक्षाविदों के माध्यम से व्यवहार परिवर्तन हेतु हस्तक्षेप स्थापित करना, कार्यस्थलों पर विद्यमान/आरंभ किए जाने वाले कार्यक्रमों में एच आई वी को जोड़ना जैसे मानव संसाधन विभाग का प्रशिक्षण, कल्याण और ओ एच एस कार्यक्रम, कोर्पोरेट सामाजिक उतरदायित्वा पहल इत्यादी |

ग) कमजोर वर्गों के अध्ययनों और जोखिम आकलन पर आधारित असंगठित/अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों और प्रवासी कामगारों के लिए हस्तक्षेपों की स्थापना |

घ) कंडोमों तक पहुँच बढ़ाना, एस टी आई का उपचार, सार्वभौमिक पूर्व सावधानी और पोस्ट एक्सपोज़र प्रोफिलेक्सिस (पी ई पी)

ड) कर्मचारी और परिवार सहायता कार्यक्रमों, स्वास्थ्य बीमा में एच आई वी को शामिल करने के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज के कार्यक्षेत्र का विस्तार इत्यादी |

च) सूचित नीति और कार्यक्रम संबंधी निर्णय लेने हेतु आंकड़े/सूचना एकत्र करने के लिए कार्यस्थल पर उच्च जोखिम वाले वर्गों के अध्ययन/महामारी विज्ञान संबंधी निगरानी करवाना |

3.5.1 निम्निलिखित के माध्यम से एच आई वी/एड्स से संक्रमित और पीड़ित व्यक्तियों पर लांछन लगाने और उनसे भेदभाव करने को हतोत्साहित करने हेतु एक सक्षमकारी वातावरण सृजित और सुनिश्चित करना:-

  1. गैर-भेदभाव कार्यस्थल नीतियां तैयार और लागू करना;
  2. अन्य स्वास्थ्य संबंध सेवाओं में एच आई वी/एड्स सेवाओं एकीकृत करना;
  3. पी एल एच आई वी के लिए लचीलापन अपनाया जाना और उचित कार्य का आबंटन (व्यवहारिक रूप से जितना संभव हो सौंपे गये कार्य में समायोजन करना);
  4. योजना और क्रियान्वयन में पी एल एच आई को शामिल करना; और
  5. पी एल एच आई वी के लिए लगातार रोजगार और सुनिश्चित करना |

3.5.2 परामर्श सुविधाओं और देखरेख एवं सहायता सेवाओं के लिए प्रावधान

क) संक्रमित कमागरों/परिवारों/सह-कामगारों को या कार्यस्थलों पर अथवा अन्य सरकारी/नागरिक समाज सेवाओं के साथ भागीदारी स्थापित करते हुए परामर्श प्रदान करना |

ख) ए आर टी उपचार सेवाओं का प्रावधान सुनिश्चित करना और प्रयाप्त रेफरल्स और या लिंकेज स्थापित करना |

3.5.3 एच आई वी/एड्स रोकथाम और देखरेख में सार्वजनिक-निजी भागीदारियों को सुदृढ़ किया जाना |

3.5.4 कार्यस्थल नीति और कार्यक्रमों का गठन करने हेतु तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए एस.ए.सी एस/आई एल ओ/अन्य विशेषज्ञ एजेंसियों के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी सुदृढ़ करना;

1)  एच आई वी/एड्स शामिल करने के लिए कोर्पोरेट सामाजिक उतरदायित्वा प्रयासों का विस्तार;

2)  कामगारों और आसपास के समुदायों हेतु एकीकृत परामर्श और जाँच सुविधाओं/ए आर टी केन्द्रों की स्थापना;

3)  बीमा नीतियां और उत्पाद विकसित करना जिनमें पी एल एच आई वी शामिल हों;

4) वहन करने योग्य लागतों पर ए आर टी प्रदान करने के लिए फर्मेसेटीकल कंपनियों के साथ भागीदारी विकसित करना; और

5) राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अनुपूरक निजी क्षेत्र से संसाधन जुटाना |

विशिष्ट प्रावधान

सभी घटकों-मंत्रालयों और उनके प्रमुख संस्थानों, नियोक्ता और कामगार संगठनो, औरसार्वजनिक निजी क्षेत्र के उद्यमों/बहुराष्ट्रीय कंपनियों और नागरिक सामाजिक संगठनों में सिधांतों और क्रियान्वयन दिशा-निर्देश के आधार पर एच आई वी/एड्स नीति और कार्यक्रम स्थापित किए जाने चाहिए | तथापि, इन घटकों में विशिष्ट प्रावधानों द्वारा एच आई वी की रोकथाम में मदद होती है |

3.6.1 मंत्रालय, विभाग और उनके प्रमुख संस्थान

प्रत्येक मंत्रालय/सरकारी संस्थान को इस राष्ट्रीय नीति के कार्यढांचे के आधार पर अपनी कार्यस्थल नीति विकसित करने के लिए उत्साहित किया जाना चाहिए | इसके लिए मंत्रालयों को अपने कर्मचारियों/परिवारों को शामिल करने हेतु अपनी नीति और कार्यक्रम विकसित करने के लिए तकनीकी सहायता हेतु समुचित भागीदारियां प्राप्त करते हुए एक केन्द्रीय व्यक्ति नामित करना चाहिए और एच आई वी/एड्स  संबंधी एक आंतरिक समिति का गठन करना चाहिए |

1) मंत्रालयों को इस नीति पर आधारित अपनी कार्यस्थल नीति और प्रतिक्रिया विकसित करने के लिए अपने प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाले सार्वजनिक और निजी क्षेत्र उपक्रमों को दिशा-निर्देश जारी करने की सलाह दी जाती है |

2) मंत्रालयों/संस्थानों को एच आई वी/एड्स कार्यक्रम लागू करने के लिए बजटीय और कार्मिक संसाधनों का आबंटन करना चाहिए |

3) मंत्रालयों को आंतरिक समितियों के माधयम से और एच आई वी को विभागीय बैठक कार्यसूचियों की मुख्या धारा में लाते हुए कार्यस्थल नीति और कार्यक्रम के क्रियान्वयन की प्रगति की संवीक्षा करनी चाहिए |

4) केंद्रीय मंत्रालयों को इस नीति कार्यढांचे को अपने समकक्ष राज्य विभागों के साथ स्थापित राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटियो के सहयोग से अपनी स्वंय की कार्यस्थल नीति और कार्यक्रम विकसित करने के प्रति उनको उत्साहित करते हुए, बाँटना चाहिए |

5) प्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय को, इसके अतिरिक्त, भारत से बहार जाने वाले प्रवासी कामगारों के लिए प्रस्थान करने से पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एच आई वी/एड्स शिक्षा और प्रशिक्षण को एकीकृत करना चाहिए और मेजबान देशों में प्रवासियों और उनके अधिकारों के संरक्षण हेतु सक्षमकारी वातावरण तैयार करने के लिए प्राप्तकर्ता देशों के साथ व्दिपक्षीय समझौतों में एच आई वी को शामिल करना चाहिए |

3.6.2. नियोक्ता संगठन/व्यापार चैम्बर्स/औद्योगिक संगठन

क. भारत के राष्ट्रीय स्तर के अग्रणी नियोक्ता संगठनो द्वारा हस्ताक्षरित एच आई वी/एड्स पर प्रतिबद्धता के भारतीय नियोक्ता वक्यव्य में एच आई वी/एड्स के खिलाफ भागीदारियां तैयार करने और प्रतिबद्धता का नवीकरण करने के प्रति उनकी वचनबद्धता को दर्शाया गया है (अनुबंध-क) | सभी औद्योगिक संगठनों को इस वक्तव्य को लागू करने के लिए उत्साहित किया जा रहा है और जिसमें अनेक ऐसे क़दमों का उल्लेख किया गया है जो संगठन उठा सकते हैं |

ख. कार्यस्थल नीतियां और कार्यक्रम बनाने के लिए नियोक्ता संगठनों/व्यापार चैम्बर्स/औद्योगिक संगठनों को अपनी सदस्य कंपनियों को सक्रिय करने के प्रयासों की वकालत करनी चाहिए |

ग. नियोक्ता संगठनों/चैम्बरों, को राष्ट्रीय और राज्यीय दोनों स्तर पर कार्यस्थल नीति और कार्यक्रमों का दायरा बढ़ाने तथा एच आई वी रोकथाम और देखरेख हेतु सार्वजानिक निजी भागीदारियां स्थापित करने के लिए एनएसीओ/एसएसीएस  के साथ साझेदारी करनी चाहिए |

घ. नियोक्ता संगठनों/चैम्बरों को एच आई वी/एड्स कार्यस्थल कार्यक्रम आरंभ करने के लिए अपने सदस्यों को तकनीकी सहायता प्रदान करने हेतु योग्य बनाने के लिए एनएसीओ/एसएसीएस तथा अन्य संगत एजेंसियों के साथ अपनी क्षमताओं को सुदृढ़ बनाना चाहिए |

3.6.3 उद्यम

सार्वजनिक/निजी तथा औपचारिक/अनौपचारिक क्षेत्रों में, सभी उद्यमों को अपने कार्यस्थलों पर इस नीति के सिधांतों पर आधारित कार्यस्थल नीति और कार्यक्रम स्थापित करने के लिए उत्साहित किया जाता है | उन्हें निम्निलिखित कार्य करने चाहिए:-

क)  एच आई वी/एड्स नोडल व्यक्ति के रूप में किसी वरिष्ठ कर्मचारी को नामित करना;

ख)  कम्पनी को नीति और कार्यक्रम विकसित करने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को लेते हुए एच आ ईवी/एड्स पर एक आंतरिक समिति का गठन करना;

ग) अपने नियमित और साथ ही ठेकागत कमागरों और उनके परिवारों को शामिल करते हुए कार्यस्थल हस्तक्षेप स्थापित करना;

घ) एच आई वी के लिए स्वैच्छिक परामर्श और जाँच तक पहुँच को सुविधाजनक बनाना, या तो सीधे यदि उनके पास एक चिकित्सा व्यवस्था हो अथवा एसएसी द्वारा गठित आईसीटीसी के साथ रैफरल लिंकेज स्थापित करते हुए;

ड) अपने स्वास्थ्य कार्मिक/विभाग को क्षमता को सुदृढ़ करना और संक्रमणों, एसटीआई और एआरटी का उपचार प्रदान करने में उन्हें लगाना | उद्यम आईसीटीसी और एआरटी केंद्र स्थापित कर सकते हैं और सेवाओं तक पहुँच में विस्तार करने के लिए इन्हें अपने सयंत्रों/इकाइयों के आसपास के समुदायों के लिए खोल सकते हैं | यदि उद्यमों के पास अपना स्वंय का चिकित्सा/स्वास्थ्य विभाग नहीं है तो वे इन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नजदीकी सरकारी/गैर-सरकारी संगठनो/निजी सुविधा केन्द्रों के साथ रैफरल लिंकेज स्थापित करने चाहिए |

च) अपने कर्मचारी चिकित्सा/कल्याण पैकेज में एच आई वी/एड्स से संबंधित बीमारियां का उपचार शामिल करना | अपने ठेकागत कर्मचारियों के लिए जो उनके कर्मचारी लाभ पैकेज में शामिल नहीं होते, उद्यमों को सरकारी एआरटी केन्द्रों के साथ रैफरल लिंकेज स्थापित करने के लिए उत्साहित किया जाता है |

छ) अपनी सीएसआर पहलों के अंतर्गत अपने सयंत्रों/इकाइयों के आस-पास के अपने आपूर्तिकर्ताओं और समुदायों के बीच एच आई वी हस्तक्षेपों का समर्थन करना |

ज) कार्यक्रम हेतु निधियों का आबंटन करना और विशेषज्ञ एजेंसियों से तकनीकी भागीदारी प्राप्त करना |

पुनश्च:

  1. एच आई वी/एड्स को एक अलग कार्यक्रम के रूप में रखने की आवश्यकता नहीं है | यह कम लागत वाला है और कम्पनी की विद्यमान/आरंभ होने वाली कल्याण/सीएसआर/एचआर/ओएचएस पहलों के साथ एकीकृत करने से चलायें रखने योग्य है |
  2. कार्यस्थल कार्यक्रमों को छोटी धनराशी से आरंभ किया जा सकता है जो उद्यमों  आसानी से प्रदान की जा सकती है | तथापि, उद्यमों को अनुवीक्षण और मूल्यांकन हेतु नीति, कार्ययोजनाओं/व्यवस्थाओं के विकास, योग्य शिक्षाविदों के रूप में अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण, संचार सामग्री के लिए तकनीकी सहायता के आवश्यकता होगी, जिसके लिए उन्हें एनएसीओ/एसएसीएस, आईएलओ, यूएनएआईडीएस, व्यापार चैम्बरों/संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों और पीएलएचआईवी नेटवर्क इत्यादी से तकनीकी सहायता प्राप्त करनी चाहिए |
  3. उद्यम सार्वजानिक निजी भागीदारी के अंतर्गत एनएसीओ/एसएसीएस और अन्य एजेंसियों के साथ भागीदारी स्थापित करते हुए एच आई वी रोकथाम और देखरेख कार्यक्रमों की कवरेज बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दे सकते हैं, जो कि राष्ट्रीय कार्यक्रम का एक प्रमुख हिस्सा है |
  4. उधमों  द्वारा पीएलएचआईवी को अपनी आजीविका और/या रोजगार कौशल विकसित करने के लिए सहायता दी जानी चाहिए |
  5. एच आई वी से पीड़ित व्यक्ति सार्वजनिक और निजी कम्पनियों द्वारा प्रस्तावित विभिन्न योजनाओं से बहार रखे जाते हैं | बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण(आईआरडीए) द्वारा जारी सामाजिक दायित्वों के अधीन जनसंख्या के सुविधाहीन तबकों को दी जाने वाली सभी पॉलिसियों से एड्स संबंधित साथी मामलों को काफी विशिष्ट तरीके से बहार रखा जाना जारी है | इसके साथ-साथ, कम आय वाले संगठित क्षेत्र कामगार कर्मचारी राज्य बीमा योजना के अधीन व्यापक स्वास्थ्य संरक्षण प्रणाली से लाभ प्राप्त कर लेते हैं जबकि अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के अधिकांश कामगार ऐसा लाभ प्राप्त नहीं कर पाते |
  6. ऐसी स्थिति में बीमा बीमा कम्पनियों को एच आई वी से पीड़ित लोगों को शामिल करने के लिए सभी लाभों सहित स्वास्थ्य बीमा पोलिसियाँ/उत्पाद विकसित और प्रस्तुत करने के लिए उत्साहित किया जाता है |
  7. ऐसे उद्यम जहाँ उन कामगरों को कार्य पर लगाया जाता है जो कार्यस्थल पर मानवीय रक्त और शारीरिक द्रव्यों के नियमित संपर्क में रहते हैं, उन्हें सार्वभौमिक पूर्व सावधानियो का प्रशिक्षण दिया जाना बहुत आवश्यक है | सार्वजानिक और निजी दोनों क्षेत्रों में अस्पताल स्टाफ की प्रोफिलेक्सिस उपचार तक पहुँच होनी चाहिए |

3.6.4 कामगार संगठन/श्रमिक संघ

  1. कामगारों के प्रतिनिधि होने के कारण श्रमिक संघ विश्वास और नेतृत्व की एकविशेष स्थिति में होते हैं और उन्हें कामगारों को एच आई वी/एड्स से बचाने और लांछन और भेदभाव को कम करने के लिए आगे चाहिए | भारत के केन्द्रीय श्रमिक संघों का एच आई वी/एड्स पर वचनबद्धता का संयुक्त वक्तव्य एच आई वी/एड्स के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है (अनुबंध-ख) | सभी श्रमिक संघों को इस वक्तव्य को लागू करने के लिए उत्साहित किया जा रहा है जिसमें अनेक ऐसे क़दमों का उल्लेख किया गया है जो ये श्रमिक संघ उठा सकतें हैं |

श्रमिक संघ कार्यस्थलों पर प्रमुख कार्यकर्ता और समर्थानकर्ता होते हैं और वे निम्निलिखित के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं:

क)  कामगारों के अधिकारों और सम्मान को बढ़ाना और बनाये रखना,

ख)  सुरक्षित और स्वस्थ् कार्य दशाएं सुनिश्चित करना,

ग)  लांछन और भेदभाव का सामना करना,

घ)  उचित आय तक पहुँच को बढ़ावा देना,

ड)  सामाजिक संरक्षण प्रदान करना,

च) रोजगार और मानव संसाधनों को प्रभावित करने वाले राष्ट्रीय मुद्दों पर सामाजिक संवाद में भाग लेना, और

छ) कार्यस्थल हस्तक्षेपों के लिए सरकार और उद्यमों के साथ सहयोग करना |

3.6.5 नागरिक समाज संगठन/गैर सरकारी संगठन

  1. नागरिक समाज संगठनों को इस नीति के सिधान्तों के आधार पर अपने कर्मचारियों को शामिल करने के लिए अपनी स्वंय की कार्यस्थल नीति विकसित करने के लिए उत्साहित किया जाता है |
  2. नागरिक समाज संगठनों को कार्यस्थल नीति और कार्यक्रम तैयार करने के लिए उद्यमों/चैम्बरों/संघों/मंत्रालयों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए अपनी क्षमता विकसित करने हेतु उत्साहित किया जाता है |
  3. नागरिक समाज संगठनो को समुचित भागीदारों के माध्यम से अनौपचारिक/असंगठित क्षेत्र और लघु तथा मध्यम उद्यमों में कामगारों को लक्ष्य करते हुए हस्तक्षेप लागू करने के लिए उत्साहित किया जाता है |
  4. नागरिक समाज संगठनों को प्राकृतिक आपदाओं, अशान्त परिस्थितियों तथा निर्माण, कृषि इत्यादी जैसे अनौपचारिक क्षेत्र के कार्यस्थलों के संदर्भ में, अपने विद्यमान विकास कार्यक्रमों में विशेष रूप से जो महिलाओं, युवाओं,घरेलू समुदायों जैसे कमजोर समूहों में लागू किए जाते हैं, एच आई वी को मुख्य धारा में लाने के लिए उत्साहित किया जाता हैं |
  5. नागरिक समाज संगठनों को पी एल एच आई वी और उनके परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है | वे अपने कार्यक्रमों जैसे कौशल विकास/जीविका और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पी एल एच आई वी को शामिल कर सकते है | इससे पी एल एच आई वी/परिवारों के जीवन में गुणात्मक सुधार लाने, लांछन और भेदभाव में कमी लाने तथा एच आई वी/एड्स से प्रभावित व्यक्तियों और परिवारों के गरीबी की हालत में पहुँचने से रोकने में काफी मदद मिलेगी |

3.6.6 अनौपचारिक/असंगठित क्षेत्र के कामगार

जैसा कि भारत की कामकाजी जनसंख्या का 93% अनौपचारिक आर्थिक क्रियाकलापों में संलग्न है, इसलिए राष्ट्रीय कार्यक्रम में एक बहुआयामी रणनीति अपनायी जाएगी ताकि नीति एवं कार्यक्रमों संबंधी हस्तक्षेपों को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके |

1) एचआईवी/एड्स का श्रम विधानों में समायोजन यथा असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, सामाजिक सुरक्षा स्कीमों यथा केंद्र एवं श्रम विभागों की ईएसआईसी/श्रम कल्याण निधि/स्कीम |

2) राष्ट्रीय कार्यक्रमों में अस्थायी तथा प्रवासी कामगरों का विस्तार बढ़ाना एक महत्वपूर्ण रणनीति है जिनका क्रियान्वयन निजी क्षेत्र एवं मजदूर संघों के समायोजना से किया जायगा |

3) विभिन्न मंत्रालयों के मौजूदा कार्यक्रमों के अंतर्गत एचआईवी/एड्स को मुख्य धारा में शामिल करते हुए अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में कामगारों के विस्तार को बढ़ाने का एक दूसरा रास्ता है| उदहारणस्वरूप:, श्रम और रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय श्रमिक शिक्षा बोर्ड एक ऐसा संस्थान है जो प्रत्येक वर्ष लगभग 300,000 अनौपचारिक कामगारों तक पहुंचता है जो लगभग 70 प्रतिशत हैं | यह विस्तार अभूतपूर्व हो सकता है जब एचआईवी/एड्स को मंत्रालय और उनके जुड़े नागरिक सामाजिक संगठनों जैसे कृषि (कोऑफ़रेटिवों सहित), ग्रामीण तथा शहरी विकास, पर्यटन, पंचायती राज, महिला तथा बाल विकास आदि के कार्यक्रमों में शामिल किया जाए |

4) एसएसीएस को स्थानीय औद्योगिक संघों एवं गैर-सरकारी संगठनों के साथ सहभागिता हेतु प्रोत्साहित किया जाता है ताकि लघु एवं सूक्ष्म उद्यमों  में संलग्न कामगारों के लिए कार्यक्रम तैयार किया जा सके |

5) व्यवसाय जगत को कार्यस्थल पर कर्यक्रमों का विस्तार अपने ठेका कमागरों,वेडरों/आपूर्ति कर्ताओं की कड़ी को अपनी सीएसआर प्रयासों के तहत शामिल करने को उत्साहित किया जाता है |

6) अनौपचारिक अर्थव्यथा में कामगारों को शामिल करने में इन क्षेत्रों में हस्तक्षेप को बढ़ाते हुए एसएसीएस को अपने स्थनीय सैक्टरल मजदूर संघों जैसे बागानों, खानों, कृषि, निर्माण, टैक्सी/ऑटो ड्राइवरों अदि तथा अन्य संगठनों जो इन मजदूर संघों से सम्बंध रखते हैं, के साथ भागीदारी जोड़ने के लिए उत्साहित किया जाता है |

क्रियान्वयन एवं निगरानी

राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरों पर

क) राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन एचआईवी/एड्स संबंधी एक निगरानी समिति के गठन का प्रस्ताव करती है जिसमें नियोक्ता तथा कामगार संगठन, विकास एजेंसी, नाको, श्रम और रोजगार मंत्रालय और पीएलएचआईवी शामिल हैं जो भारत में कामकाजी परवेश में एचआईवी/एड्स से संबंधित कार्यक्रमों के संबंध में पर्यवेक्षण/विस्तृत नीति दिशानिर्देशों के क्रियान्वयन की सुविधा और इनमें संबंधित रणनीतिक निर्णय लेते हैं | संसद सदस्यों का एचआईवी/एड्स मंच (पीएफए) तथा श्रम एवं एचआईवी/एड्स से जुड़े अन्तराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को भी इस समिति में शामिल किया जाएगा |

ख) श्रम और रोजगार मंत्रालय तथा नाको प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एड्स संबंधी राष्ट्रीय परिषद् स्तर पर आवश्यक कार्रवाई हेतु मुद्दों को उठाएंगे |

ग) एनएससीपी-111 के तत्वावधान में एसएसीएस द्वारा राज्य स्तर पर एड्स संबंधी एक राज्य परिषद् की स्थापना का प्रस्ताव किया जाता है | इसमें राज्य के श्रम विभागों, नियोक्ताओं तथा कामगार संगठन, एचआईवी/एड्स संबंधी विधायी मंच के सदस्यों का समुचित प्रतिनिधित्व होगा जो राज्य स्तर पर नीति की योजना तथा क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे |

घ) श्रम और रोजगार मंत्रालय और नाको अपनी प्रभावी भूमिका के रूप मेंनियमित सर्वेक्षणों तथा खतरों का आकलन विशेषरूप से श्रम सघन क्षेत्रों में प्रभावित जनसंख्या, प्रवासियों, कार्यदशाओं तथा अन्य संबंधित मामलों को चिन्हित करने के लिए करेगी | नियमित आधार पर किए जाने वाले इन अध्ययनों से नीति एवं क्रियान्वयन में अंतर ज्ञात करने में सहायता मिलेगी जिससे नीति में समुचित बदलाव संबंधी जानकारी तथा श्रम एवं रोजगार तथा नाकों द्वारा विशेष ध्यान दिए जाने की अपेक्षा वाले कार्य क्षेत्रों की पहचान में सहायता मिलेगी और साथ ही नीतिगत दिशा-निर्देश के क्रियान्वयन तथा कार्यबल में एचआईवी संक्रमण के प्रभाव की निगरानी में भी सहायता मिलेगी |

कार्यस्थल पर

1. प्रत्येक कार्यस्थल पर चाहे वह किसी संगठन, संस्थान, व्यवसाय एवं कम्पनी आदि का हो, एचआईवी/एड्स की एक समिति स्थापित की जानी चाहिए ताकि कार्यस्थल पर एचआईवी/एड्स की नीति एवं कार्यक्रम का समन्वयन एवं क्रियान्वयन किया जा सके | बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के लिए एक एचआईवी/एड्स समिति कोर्पोरेट स्तर पर होनी चाहिए जो कि एक छोटे दल की समायता से प्रत्येक प्लांट/स्थान पर क्रियान्वयन की जिम्मेदारी का निर्वहन कर सके | विलोमतः एक दल होना चाहिए जिसमें संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों सहित एक वरिष्ठ कार्यकारी के नेतृत्व में यह कार्य किया जा सके |

2.नीति एवं कार्यक्रम के उद्देश्य एवं ढांचा संगठन/कम्पनी के आकार, जरूरतों एवं संसाधनों पर निर्भर करेंगे|

3.एचआईवी/एड्स पर कार्यस्थलीय नीति की योजना एवं क्रियान्वयन हेतु जाँच सूचि अनुबंध-ग पर दी गई हैं |

4.नीति के आवधिक निरीक्षण एवं निगरानी से अथवा कम्पनी को आंतरिक एवं बाहरी स्थितियों के निरंतर परिवर्तन के साथ सामंजस्य बिठाने में सहायता मिलेगी |

5.कार्यस्थल संबंधी कार्यक्रम के नियमित पुनरीक्षण से यह सुनिश्चित होगा कि इसका दक्षतापूर्वक प्रबंधन अपेक्षित परिणाम देने वाला तथा कर्मचारियों के आवश्यकताओं ओ पूरा करने वाला है |

बजटीय तथा वित्तीय प्रावधान

सभी पणधारकों यथा:- केंद्रीय/राज्य सरकार के मंत्रालयों/विभागों, नियोक्ता/कामगार संगठनों, सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र उपक्रमों, प्रमुख राष्ट्रीय संगठनों तथा सिविल सोसायटी आदि जिन पर एचआईवी/एड्स संबंधी नीति की कार्यस्थल पर क्रियान्वयन की जिम्मेवारी है, अपने बजट में समुचित आबंटन करेंगे जिससे कि विभिन्न प्रकार की एचआईवी रोकथाम, देख-रेख तथा उनके द्वारा चलाए जा रहे सहयोगी कार्यक्रमों के लिए नियमित निधि की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके |

रेफरल वेब लिंक्स

श्रम और रोजगार मंत्रालय :    http://labour.nic.in

राष्ट्रीय एड्स कन्ट्रोल संगठन :www.nacooline.org

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन  :www.ilo/org/aids,www.ilo.org/hivaidsindia

संयुक्त यूनाइटेड नेशनस प्रोग्राम ऑन एचआईवी/एड्स  :www.unaids.org

पार्लियामेंटेरियन्सफोरम ऑन एचआईवी/एड्स(पीएफए)   :www.pfaindia.in

अनुबंध-क

एचआईवी/एड्स के संबंध में भारतीय नियोक्ताओं की प्रतिबद्धता विवरणी

हम, भारत के नियोक्ता संगठन इस बात की पुष्ठि करते हैं कि:-

  1. एचआईवी/एड्स कामकाजी जगत के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है | भारत में सूचित एचआईवी संक्रमणों में से 90 प्रतिशत से अधिक 15 से 49 वर्ष के सर्वाधिक उत्पादी आयु वर्ग से है |
  2. एचआईवी/एड्स कर्मचारियों को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है और परिणामतः बढ़ती अनुपस्थिति, कार्य प्रचालन में अवरोध और कर्मचारियों के इलाज में बढ़ते खर्च के कारण उद्यम कार्यनिष्पादन के लिए एक गंभीर चुनौती है |
  3. एचआईवी/एड्स से संबंधित कार्यस्थलीय नीति एवं कार्यक्रमों का विकास एक सतत मानव संसाधन संबंधी रणनीति है जो न सिर्फ व्यावसय के हितों की रक्षा करता है बल्कि बेहतर प्रबंधन प्रक्रिया की अपेक्षाओं को पूरा करता है जिससे भविष्य में किसी कम्पनी का सम्पूर्ण कार्यकरण भी प्रभावित होता है |
  4. व्यावसय ऐसे प्रमुख संस्थान हैं जो राष्ट्र के समाजिक ताने-बाने को विकसित करने में योगदान करते हैं | व्यवसाय अपने हितों को समाज के क्रियाकलापों से अलग नहीं रख सकते जिनमें वे काम करते हैं | व्यवसाय सामाजिक गतिविधयों से सीधे तौर पर जुड़ा है तथा इसे ऐसे लोगों के हितों की संरक्षा में, जो प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से एचआईवी/एड्स से प्रभावी हैं, योगदान करने की आवश्यकता है |
  5. भारत में एचआईवी/एड्स के विरुद्ध व्यवसाय एवं उपक्रमों को तुरंत कार्य करने की आवश्यकता है जिसमें व्यवसायी नेतृत्व प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं

अतः  हम इस संबंध में जहाँ तक संभव होगा अपेक्षित नेतृत्व एवं व्यावहारिक सहयोग प्रदान करने के लिए संकल्पित हैं और हम सामूहिक रूप से इस बात का समर्थन करते हैं कि अनौपचारिक आर्थिक सहयोगियों सहित भारत सरकार के केन्द्रीय एवं राज्य स्तरों पर, मजदूर संघों, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन, यूएनएड्स, प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों तथा अन्य संबंधित पणधारकों के साथ मिलकर एचआईवी/एड्स को कामकाजी जगत से विमुक्त करने में सहयोग प्रदान करेंगे |

हम अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा प्रदान किए गए एचआईवी/एड्स और कामकाजी जगत संबंधी कोड प्रक्रिया के दिशा-निर्देशों का समर्थन करते हैं और अपनी सदस्य कम्पनियों को अपने कार्यस्थलों पर एचआईवी/एड्स की नीतियों एवं कार्यक्रमों की इन दिशा-निर्देशों के प्रभावी प्रयोग से विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं |

हम अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के कोड प्रक्रिया संबंधी निम्नलिखित प्रमुख सिधान्तों के अनुपालन के लिए गंभीर प्रयासों की शुरुआत करने का संकल्प लेते हैं जो निम्नवत हैं:-

एचआईवी/एड्स की पहचान एक कार्यस्थल मुद्दे के रूप में

  • एचआईवी/एड्स एक कार्यस्थल मुद्दा है, न सिर्फ इसलिए कि यह कार्य बल को सीधे प्रभावित करता है बल्कि कार्यस्थल इस महामारी के विस्तार एवं प्रभाव को सीमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है |

गैर-भेदभाव

  • किसी कर्मचारी के वास्तविक अथवा कल्पित रूप से एचआईवी से प्रभावित होने की स्थिति में किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं दिखाना अथवा उसे कलंकित नहीं मानना चाहिए |

लिंग समानता:

  • अधिकतम समान लैंगिक संबंधों एवं महिलाओं को अधिकार देने से एचआईवी/ के प्रभाव को सफलतापूर्वक रोकने तथा महिलाओं को एचआईवी/एड्स से लड़ने में सहायता मिलेगी |

स्वस्थ कार्य वातावरण

  • कार्य का वातावरण स्वस्थ एवं सुरक्षित होना चाहिए ताकि कर्मचारियों को स्वस्थ एवं सक्षम बनाए रखा जा सके |

सामाजिक संवाद

  • एक सफल एचआईवी/एड्स नीति एवं कार्यक्रम के लिए आपसी सहयोग तथा नियोक्ता, कर्मचारियों एवं सरकारी के बीच विश्वास का माहौल होना चाहिए |

नियोजन के उद्देश्य के लिए जाँच

  • नौकरी हेतु आवेदन कर्ताओं अथवा नियोजन के लिए इच्छुक  व्यक्तियों का एचआईवी/एड्स संबंधी परिक्षण नहीं किया जाना चाहिए तथा यदि आईएलओ कोड द्वारा अन्यथा विनिद्रिष्ट न हो तो कार्यस्थल पर एचआईवी संबंधी परिक्षण नहीं किया जाना चाहिए |

गोपनीयता

  • कामगारों के एचआईवी संबंधी स्थिति के व्यक्तिगत आंकड़ो तक पहुच आइ एल ओ सहिंता के प्रावधानों के अनुसार होनी चाहिए |

नियोजन संबंध की निरंतरता

  • एचआईवी संक्रमण नौकरी से निकाले जाने का कारण नहीं है | ऐसे व्यक्ति जो एचआईवी रोग से पीड़ित हैं चिकित्सकीय दृष्टि से समुचित अवस्था में कार्य करने के लिए समक्ष होने पर कार्य कर सकते हैं |

रोकथाम

  • सामाजिक भागीदार एक ऐसी अव्दितीय अवस्था में हैं जो रोकथाम के प्रयासों को बढ़ावा दे सकते है तथा सूचना एवं शिक्षा द्वारा मनोवृति एवं आचरण में बदलाव ला सकते हैं |

देख-रेख एवं सहायता

  • सौहार्द्र, देख-रेख एवं सहायता कार्यस्थल पर एड्स के प्रति कार्यक्रमों का हिस्सा होने चाहिए | सभी कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अनुमेय हैं और सावैधनिक एवं व्यवसायिक लाभों के हक़दार हैं |

हम अपनी ओर से निन्मलिखित के लिए संकल्पित हैं:-

  1. हम, एचआईवी/एड्स के लिए भारतीय बिजनेस ट्रस्ट, नाको, स्टेट एड्स नियंत्रण सोसायटी, ट्रेड यूनियन, आईएलओ, यूएन एड्स, डब्ल्यूएचओ गैर-सरकारी संगठन, सिविल सोसायटी संगठन, अन्य भारतीय सर्वोच्च/राज्य के व्यापार एवं उद्योग   संघों के निकाय, एचआईवी/एड्स से ग्रस्त लोगों का नेटवर्क एवं अन्य संबंधित भागीदारों के साथ मिलकर अपनी सदस्य  कम्पनियों के बीच एच आई वी एड्स के प्रति जागरूकता फैलाएगें |
  2. जहाँ तक संभव हो सकेगा हम संबंधित एजेंसियों के अपने सदस्यों को तकनीकी सहायता की सुविधा प्रदान करेंगे जिससे वे एचआईवी/एड्स के कार्यक्रमों को अपने कल्याण एवं/अथवा कोर्पोरेट सामाजिक दायित्व के प्रयासों में शामिल कर सकेंगे |
  3. हम कार्य स्थल पर एचआईवी/एड्स कार्यक्रम संबंधी उतम प्रक्रियाओं की जानकारी आईएलओ, यूएन एड्स, डब्ल्यूएचओ, नाको,आईओई एचआईवी/एड्स के लिए भारतीय बिजनेस ट्रस्ट और एड्स संबंधी ग्लोबल बिजनेस गठबंधन के सहयोग से प्रदान करेंगे |
  4. हम अभूतपूर्व नेतृत्व प्रदान करने वाले तथा एचआईवी/एड्स के कार्यक्रमों के संबंध में परिणामलक्षी क्रियान्वयन के लिए पहचान किए गए उपक्रमों को वार्षिक पुरस्कार की शुरुआत में सहायता देंगे | हम तकनीकी एजेंसियों के साथ भागीदारी करने का प्रयत्न भी करेंगे ताकि ऐसे पुरस्कारों के वितरण के लिए स्वस्थ मानदण्ड तैयार किए जा सकें जिसके आधार पर बेहतर उपक्रमों को पुरस्कार के लिए चयनित किया जा सके |
  5. हम भारत में एचआईवी/एड्स पर गठित प्रमुख राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय समितियों में भागीदारी करेंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने विचारों को इस प्रकार रखेंगे जिससे भारत में कार्यस्थल पर सहायता एवं सहयोग का विस्तार किया जा सके |
  6. हम राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय निधियन एजेंसियों से कार्यस्थलीय प्रयासों को तैयार करने एवं शुरू करने में सहयोग प्राप्त करेंगे जिसमें एचआईवी/एड्स, तपेदिक तथा मलेरिया संबंधी वैक्ष्विक निधि शामिल हैं | हम आईएलओ यूएन एड्स, नाको तथा अन्य संबंधित एजेंसियों से संबंध में तकनीकी सहायता प्राप्त करेंगे |
  7. हम सदस्य कम्पनियों के साथ एक नियमित परामर्शी प्रयास की शुरुआत करने का संकल्प लेतें हैं | एचआईवी/एड्स का मुद्दा हमारी बैठकों की कार्य सूचि में शामिल किया जाएगा |
  8. हम एचआईवी/एड्स के लिए अपने संगठनों के भीतर अंतरिक फोकल बिंदु तैयार करेंगे एक ऐसा तंत्र विकसित करेंगे जो एचआईवी/एड्स संबंधी वार्षिक गतिविधियों की बेहतर से बेहतर योजना तथा समीक्षा करेंगे |

अनुबंध-ख

भारत में केन्द्रीय मजदूर संघों एचआईवी/एड्स पर संकल्प संबंधी संयुक्त वक्तव्य

भारत के केन्द्रीय मजदूर संघों ने एचआईवी/एड्स की पहचान कार्यजगत के लिए एक गंभीर समस्या के रूप में की है क्योंकि यह श्रम बल सबसे उत्पादक समूह को प्रभावित करता | भारत में 15 से 49 वर्ष के आयु वर्ग के लगभग 90% प्रतिशत लोगों के एचआईवी/एड्स से संक्रमित होने की रिपोर्ट है| यह एक ऐसा आयु वर्ग है जिसके औपचारिक तथा अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल अधिकांश कामगार होते हैं|

इसके अतिरिक्त, एचआईवी/एड्स कम के मौलिक अधिकार को प्रभावित करता है जिसके कारण खासतौर पर एचआईवी/एड्स से प्रभावित लोगों को उपेक्षा की दृष्टि से देखना तथा कलंकित माना जाता है| भारत में कार्यस्थलों पर ऐसे भेदभाव व्यवहार के उदहारण मिलते हैं | ऐसे भी उदहारण हैं जिनमें एचआईवी से ग्रस्त व्यक्ति को रोजगार का अवसर न देकर अथवा रोजगार से हटाकर अथवा नियोजन के लाभों से वंचित रखकर उन्हें उपेक्षित रखा जाता है | यह रिपोर्ट मिली है कि साथी कामगारों द्वारा भेद-भावपूर्ण व्यवहार किया जाता है |

अतः केन्द्रीय मजदूर संघों के प्रतिनिधियों ने एचआईवी/एड्स के मुद्दे पर इस वक्तव्य के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद की है तथा इस बात पर जोर दिया जाता है कि सभी संबंधित संघ एवं सदस्य कोमरेड इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर लें तथा इसके रोकथाम के लिए कार्य करें और प्रभावित लोगों की देखभाल करें |

हम कार्यजगत में एचआईवी/एड्स से संबंधित आईएलओ की प्रक्रिया सहिंता के दिशा-निर्देशों का समर्थन करते हैं | हम यह भी संकल्प लेते हैं कि आईएलओ की प्रक्रिया सहिंता के मुख्य सिधान्तों के अनुरूप गंभीर प्रयास करेंगे जो कि निन्मवत हैं:-

एक कार्यस्थलों मुद्दे के रूप में एचआईवी/एड्स की पहचान

एचआईवी/एड्स एक कार्यस्थलीय मुद्दा है, न इसलिए कि यह कार्य बल को सीधे प्रभावित करता है बल्कि कार्यस्थल इस महामारी के विस्तार एवं प्रभाव को सीमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है |

गैर-भेदभाव

किसी कर्मचारी के वास्तविक रूप से अथवा कल्पित रूप से एचआईवी से प्रभावित होने की स्थिति में किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं दिखाना अथवा उसे कलंकित नहीं मानना चाहिए |

महिला-पुरुष समानता

एचआईवी संक्रमण को फैलने से रोकने में सफलता एवं महिलाओं को एचआईवी/एड्स का सामना करने में समर्थ बनाने हेतु अधिक समान लैंगिक संबंध एवं महिलाओं का सशक्तिकरण महत्वपूर्ण है |

स्वस्थ कार्य वातावरण

कार्य वातावरण को स्वस्थ्य, सुरक्षित एवं कर्मचारियों की क्षमताओं एवं स्वास्थ्य के अनुकूल होनी चाहिए |

सामाजिक संवाद

एक सफल एचआईवी/एड्स नीति एवं कार्यक्रम के लिए नियोताओं,  कर्मचारियों एवं सरकारी के मध्य सहयोग एवं  विश्वास अपेक्षित  है |

नियोजन के उद्देश्य हेतु जाँच पड़ताल

नौकरी आवेदकों अथवा व्यक्तियों के नियोजन में एचआईवी/एड्स/जाँच पड़ताल अपेक्षित नहीं होनी चाहिए और आई एल ओ सहिंता में यथा विनिद्रिष्ट अनुसार को छोड़कर कार्यस्थल पर एचआईवी परिक्षण नहीं किया जाना चाहिए |

गोपनीयता

कामगार की एचआईवी  स्थिति से संबंधित व्यक्तिगत आंकड़ो तक पहुँच वर्तमान आईएलओ व्यवहार सहिंता की गोपनीयता नियामवली द्वारा प्रतिबंधित होनी चाहिए |

नियोजन संबंधों को जारी रखना

एचआईवी संक्रमण नियोजन समाप्ति का कारण नहीं है | एचआईवी से संबंधित बीमारियों से ग्रस्त व्यक्ति समुचित अवस्था में जब तक चिकित्सकीय दृष्टि से स्वास्थ्य हो, कार्य करने के योग्य होना चाहिए |

रोकथाम

सामाजिक भागीदार सूचना एवं शिक्षा के माध्यम से रोकथाम संबंधी प्रयासों को बढ़ावा देने और दृष्टिकोण एवं व्यवहार में परिवर्तन में सहायता करने की विशेष अवस्था में हैं |

देखभाल एवं सहायता

कार्यस्थल पर एचआवी/एड्स के प्रति जबाबदेही देखभाल एवं सहायता द्वारा दिशा-निर्देश होनी चाहिए | सभी कर्मचारी वहनीय स्वास्थ्य सेवाओं एवं सांविधिक एवं व्यावसायिक स्कीमों से लाभों के पात्र हैं |

अपनी तरफ से हम निम्नलिखित का वायदा करते हैं:

  • हम कामगारों एवं उनके प्रतिनिधियों को विकास एवं उनके कार्यस्थल हेतु समुचित नीति के क्रियान्वयन जो कि संक्रमण को फैलने से रोकने एवं एचआईवी/एड्स से संबंधित भेद-भाव से सभी कामगारों को बचाने हेतु गई है, नियोक्ताओं के साथ भागीदारी करने एवं परामर्श करने हेतु प्रोत्साहित करते हैं |
  • हम कार्यस्थल पर एचआईवी/एड्स नीतियों एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की समीक्षा/अनुवीक्षण करने हेतु केंद्र एवं राज्य स्तर पर एचआईवी/एड्स संबंधी आंतरिक समितियां स्थापित करेंगे;
  • हम कार्यस्थल पर एचआईवी/एड्स नीतियों को मानव संसाधन विकास कार्यक्रमों में शामिल करने हेतु नियोक्ताओं के साथ वार्ता करने का प्रयास करेंगे;
  • अपने वर्तमान संघ ढांचे का प्रयोग करते हुए हम कार्यस्थल पर कामगारों का प्रयोग करते हुए हम कार्यस्थल पर कामगारों को एचआईवी/एड्स संबंधी सूचना प्रदान करेंगे; आई एल ओ एवं अन्य एजेंसियों की सहायता से जहाँ भी संभव होगा संघों से एचआईवी/एड्स संबंधित शिक्षाकों को प्रशिक्षण देंगे |
  • हम जितना संभव होगा अनौपचारिक/असंगठित क्षेत्र में कामगारों को कवर करने हेतु रोकथाम हस्तक्षेप प्रारंभ करने का प्रयास करेंगे;
  • हम पुरे देश में कर्मचारी जनसँख्या के लिए हस्तक्षेप प्रारंभ करने एवं संयुक्त कार्रवाई कार्यक्रमों को विकसित करने हेतु विभिन्न सरकारी एवं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से अवसरों का पता लगाएंगे | यह राष्ट्रीय एड्स कन्ट्रोल संगठन (नाको) द्वारा संचालित एचआईवी/एड्स कन्ट्रोल कार्यक्रम संबंधी पुरे राष्ट्रीय फ्रेमवर्क के अंतर्गत किया जायगा; और
  • हम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय एचआईवी संबंधी एजेंसियों जिनमें नाको, राज्य एड्स नियंत्रण समितियां (एसएसीएस) एवं उनकी सांझी एजेंसियां, श्रम और रोजगार मंत्रालय, राज्य श्रम विभाग, नियोक्ता, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां, एचआईवी/एड्स से ग्रस्त व्यक्तियों का नेटवर्क एवं अन्य साथी शामिल हैं, से एचआईवी/एड्स से लड़ने के लिए अनुभवों एवं संसाधनों को बांटने हेतु सहभागिता बनाएगें |

द्वारा हस्ताक्षरित

श्री गुरुदास दास गुप्ता, संसद

महासचिव

आल इंडिया ट्रैड यूनियन कांग्रेस

 

श्री गिरीश अवस्थी

अध्यक्ष

भारतीय मजदूर संघ

 

डा.एम.के.पांधे

अनुबंध-ग

कार्यस्थल नीति की योजना एवं क्रियान्वयन और एचआईवी/एड्स संबंधी कार्यक्रम हेतु जाँच सूचि

नीति के नियमों के अनुसार, जैसा कि धारा 3.4 में दिया गया है, नीति एवं कार्यक्रम को विकसित करने हेतु निम्न क़दमों को जाँच सूचि के रूप में प्रयोग किया जा सकता है;

  • एचआईवी/एड्स समिति उच्च प्रबंधन निरीक्षकों, कामगारों श्रमिक संघों, मानव संसाधन विभाग, प्रशिक्षण विभाग, औद्योगिक सम्पर्क इकाई, व्यावसायिक स्वास्थ्य इकाई, एवं सुरक्षा समिति के प्रतिनिधियों एवं यदि सहमत हों तो एड्स ग्रस्त व्यक्तियों को लेकर स्थापित की जाती है;
  • समिति इसकी विचारार्थ विषय संदर्भ शर्ते, निर्णय करने की शक्तियां एवं उतरदायित्व को निर्धारित करती है;
  • सैक्टर/उद्यम/कार्यस्थल हेतु राष्ट्रीय कानूनों एवं इनके उलझावों/निहितार्थों की समीक्षा;
  • समिति(गुप्त आधारभूत अध्ययन करके) कार्यस्थल पर एचआईवी महामारी के प्रभाव एवं एचआईवी/एड्स संक्रमित एवं प्रभावित कामगारों की आवश्कताओं का पता लगाती है |
  • समिति यह स्थापित करती है कि कार्यस्थल एवं स्थानीय समुदाय दोनों जगहों पर क्या-क्या स्वास्थ्य एवं सूचना सेवाए पहले से ही उपलब्ध हैं |
  • समिति नीति प्रारूप बनाती है, टिप्पणी हेतु परिचालित करती है, संशोधित करती है और इसे अंगीकार करती है |
  • समिति बजट बनाती है, यदि आवश्यक हो तो बाहर से निधियों की व्यवस्था करती है, विशेषकर असंगठित कामगारों के बीच हस्तक्षेप हेतु एवं स्थानीय समुदाय में वर्तमान संसाधन की पहचान करती है;
  • समिति नीति कार्यक्रमों को लागू करने हेतु समय-सारणी एवं उतरदायित्व की रूप-रेखा के साथ क्रियात्मक योजना बनाती है;
  • नीति एवं क्रियात्मक योजना को नोटिस बोर्ड, मेलिंग सूचि, वेतन पर्ची, विशेष बैठकों, प्रारम्भिक पाठ्यक्रमों, प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से व्यापक रूप से प्रसारित किया जाता हैं;
  • समिति नीति के प्रभाव की निगरानी करती हैं;

समिति वायरस एवं कार्यस्थल पर इसके निहितार्थों के बारे में बाह्य सूचना एवं आंतरिक निगरानी के
प्रकाश में नीति की समीक्षा करती है |

उपर्युक्त वर्णित प्रत्येक कदम को व्यापक नीति जो कि एक स्थायी एवं निरन्तरतो वाले तरीके से विनियोजित, क्रियान्वित एवं मॉनीटर की जाती है, के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए |

अनुबंध-घ

  1. 1. पारिभाषिक शब्द एवं अर्थ

ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस (एचआईवी): ऐसा एक विषाणु जो शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली अर्थात रोगों से लड़ने की शरीर की प्राकृतिक क्षमता को कमजोर करता है | किसी एचआईवी पोजिटिव व्यक्ति का खून या बॉडी फ्लड किसी अन्य व्यक्ति के ब्लडस्ट्रीम में प्रवेश करने से एचआईवी का संचालन होता है | एचआईवी मुख्य रूप से चार बॉडी फ्लूड्स खून, वीर्य, वेजिनल सेक्रेशन एवं माँ के दूध के माध्यम से अंतरित होता है | ऐसे क्रियाकलाप जो एचआईवी अंतरण के लिए जाने जाते हैं उनमें असुरक्षित शारीरिक संबंध अथवा एचआईवी संक्रमित किसी व्यक्ति के साथ सुइयों अथवा सिरिजों को बाँटना, एचआईवी संक्रमित खून अथवा खून उत्पाद प्राप्त करना, एचआईवी संक्रमित माँ से उसके गर्भस्थ शिशु शामिल हैं | एचआईवी स्पर्श से नहीं फैलता एवं यह हवा, भोजन, पानी अथवा मच्छर/कीड़े के काटने से अंतरित नहीं होता |

जैसे ही रोग प्रतिरोधक प्रणाली असफल होती है, एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को विभिन्न प्रकार की जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं | तथापि, एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों में कई वर्षों तक बीमारी के संकेत नहीं दिखाई देते और वे कार्यस्थल पर एक उत्पादक सदस्य बने रहते हैं |

एचआईवी जाँच: प्रायः एचआईवी के कोई लक्षण पैदा नहीं होते एवं यह संक्रमण केवल व्यक्ति के खून की जाँच करके ही पता लगाया जा सकता है | राष्ट्रीय एचआईवी/एड्स नीति के आधार पर, किसी व्यक्ति के लिए एचआईवी जाँच को अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए | जो व्यक्ति स्वैच्छिक रूप से एचआईवी जाँच करवाना चाहता है, उसकी जाँच पूर्ण एवं जाँच बाद परामर्श जो कि भारत सरकार के अनुमोदित एकीकृत सलाह एवं जाँच केंद्र (आईसीटीसी) के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है, तक अवश्य पहुँच होनी चाहिए |

एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशियेंसी सिन्ड्रोम (एड्स): जब एचआईवी शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली एवं इसकी संक्रमण से लड़ने की क्षमता को समाप्त कर देता है तो इस अवस्था के कई संकेत एवं लक्षण एचआईवी संक्रमण की बढ़ी हुई अवस्था को दर्शाते हैं | जिन लोगों को एड्स होता है उनको जानलेवा बीमारियां जिनको अवसरवादी संक्रमण कहते हैं जो माइक्रोब्स जैसे विषाणु अथवा जीवाणु जो कि प्रायः स्वस्थ्य लोगों को बीमार नहीं बनाते हैं, से होता है | एड्स का आज तक कोई इलाज नहीं है यद्यपि  एंटी रेटरोवायरल ट्रीटमेंट की उपलब्धता से संक्रमित व्यक्तियों की उम्र को बढ़ाया जा सकता है |

संक्रमित व्यक्ति: जिन व्यक्तियों के जीवन इस महामारी के व्यापक प्रभाव के कारण एचआईवी एवं एड्स के कारण परिवर्तित हुए हैं |

भेद-भाव: इसका प्रयोग एचआईवी स्थिति को शामिल करने हेतु भेद-भाव (नियोजन एवं व्यावसय) आई एल ओ अभियान, 1958 (संख्या111) में दी गई परिभाषा के अनुसार किया जाता है | इसमें कामगार की एचआईवी स्थिति के आधार पर पक्षपात एवं यौन आधार पर भेद-भाव शामिल है |

नियोक्ता: एक व्यक्ति अथवा संगठन जो लिखित अथवा मौखिक नियोजन संविदा द्वारा दोनों पक्षों के अधिकार एवं कर्तव्यों को स्थापित करता है, जो की राष्ट्रीय कानून एवं व्यवहार के अनुसार है | सरकारें, लोक प्राधिकरण, निजी उद्यम एवं कोई भी व्यक्ति नियोक्ता हो सकता है |

व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवाएँ (ओएचएस): स्वास्थ्य सेवाएं जिनका मुख्य रूप से बचाव कार्य है एवं जो नियोक्ता, कामगारों एवं उनके प्रतिनिधियों को कार्य संबंध में अच्छी शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएँ देने हेतु एक सुरक्षित एवं स्वस्थ कार्य वातावरण एवं कार्यविधियों को बनाये रखने एवं स्थापित करने की आवश्यकताओं के संबंध में सलाह देने के लिए उतरदायी हैं | व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवाएं कामगारों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उनकी क्षमताओं के अनुसार कार्यग्रहण करने संबंधी सलाह भी देती है |

समुचित समायोजन: किसी कार्य अथवा कार्यस्थल में कोई बदलाव अथवा समायोजन जो कि समुचित ढंग से व्यावहारिक हो एवं एचआईवी अथवा एड्स से ग्रस्त व्यक्ति को नियोजन तक पहुँच रखने अथवा भाग लेने अथवा वृद्धि करने के योग्य बनायेगा |

जाँच: पहले की गई जाँच अथवा उपचार के संबंध में उपायों चाहे प्रत्यक्ष (एचआईवी जाँच), अप्रत्यक्ष (जोखिम लेने वाले व्यवहार का पता लगाना) अथवा प्रश्न पूछना |

सेक्स एवं लिंग: पुरुष एवं महिला में जैविक एवं सामाजिक दोनों अंतर हैं | च्सेक्सछ शब्द से अभिप्राय जैविक अंतरों से है जबकि चलिंगछ शब्द से अभिप्राय पुरुष एवं महिला के मध्य सामाजिक भूमिकाओं एवं संबंधो में अंतरों से है | लिंग भूमिकाएं सामाजीकरण के माध्यम से सीखी जाती हैं एवं अलग-अलग संस्कृतियों में अलग-अलग पाई जाती हैं | लिंग भूमिकाए आयु, वर्ग, जाती, नैतिकता एवं धर्म, भौगोलिक, आर्थिक एवं राजनैतिक पर्यावरण से प्रभावित होती हैं |

शारीरिक संबंधों द्वारा अंतरित संक्रमण: जो संक्रमण शारीरिक संबंधों द्वारा एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति तक अंतरित हो सकते हैं | एसटीआई की उपस्थिति एचआईवी की संभावनाओं को बढ़ा देता है| एसटीआई का त्वरित एवं समुचित इलाज एचआईवी संक्रमण को कम कर देता है |

नियोजन की समाप्ति: नियोक्ता की पहल पर समाप्ति |

सार्वभौमिक सावधानियां: खून जनित संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए एक साधारण संक्रमण
नियंत्रण व्यवहार का मानव प्रयोग किया जाना है |

अनौपचारिक/असंगठित क्षेत्र में कामगार: उत्पाद एवं सेवाएँ उत्पादन एवं वितरण करने वाली अति लघु इकाईयां, एवं शहरी क्षेत्रों में बहुत से स्वतंत्र, स्वंय नियोजित उत्पादकों को शामिल करते हुए संदर्भित हैं, उनमें से कुछ पारिवारिक श्रम एवं/अथवा कुछ किराये पर लिए गए कामगार अथवा प्रशिशुओं को भी नियोजित करते हैं; जो बहुत कम पूंजी अथवा बिना किसी पूंजी के संचालित होते हैं; जो निम्न स्तर की तकनीकी एवं दक्षता का प्रयोग करते हैं; इसलिए ये निम्न उत्पादकता स्तर पर कार्य करते हैं; और इनमें काम करने वाले की आय प्रायः बहुत कम एवं अनियमित होती है और ये अस्थाई रोजगार प्रदान करते हैं | ये इस अर्थ में अनौपचारिक हैं कि कार्यलय सांख्यिकी में अधिकार अपंजीकृत एवं बिना किसी रिकॉर्ड के होते हैं; इनका संगठित बजारों, क्रेडिट संस्थानों, औपचारिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों, अथवा बहुत-सी लोक सेवाओं एवं सुविधाओं तक बहुत कम अथवा न के बराबर पहुँच होती है; ये सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त अथवा विनियमित नहीं होते; ये प्रायः कानून के दायरे से बहार कार्य करने के लिए बाध्य होते हैं; और जहाँ पर ये पंजीकृत भी होते हैं एवं कानून के कतिपय पहलुओं का सम्मान करते हैं, ये पूर्णतया कार्यस्थल पर सामाजिक सुरक्षा, श्रम विधान एवं सुरक्षात्मक उपायों की पहुँच से बहार होते हैं | अनौपचारिक क्षेत्र के उत्पादक एवं कामगार प्रायः असंगठित (यद्यपि विशिष्ट क्रियाकलापों में लगे लोगों के अनौपचारिक स्थानीय संघ हो सकते हैं) होते हैं, और अधिकतर मामलों में श्रमिक संघों एवं नियोक्ता संगठनो की कार्रवाई के स्कोप से बहार होते हैं|

कामगार प्रतिनिधि: राष्ट्रीय कानून अथवा पद्धति द्वारा ऐसे मान्यता प्राप्त व्यक्ति चाहे वे (क) श्रमिक संघ प्रतिनिधि, नमता: श्रमिक संघों अथवा ऐसे संघों के सदस्यों द्वारा चयनित अथवा पदासीन प्रतिनिधि; अथवा (ख) चयनित प्रतिनिधि, नामित प्रतिनिधि जो राष्ट्रीय कानूनों अथवा विनियमनों अथवा सामूहिक समझौतों के उपबंधों के अनुसार उद्यम के कामगारों द्वारा स्वतंत्र ढंग से चयनित होते हैं और इनके कार्यों में वे क्रियाकलाप शामिल नहीं होते जिनको संबंधित देश के श्रमिक संघों के विशेष प्राधिकार के रूप में मान्यता प्राप्त है |

संवेदनशीलता: यह सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरणविहीन एवं सांस्कृतिक प्रसंग, कार्य परिस्थितियां जो कामगारों को संक्रमण के जोखिम के लिए अधिक सुग्राही बनाती हैं, से संबंधित है |

स्रोत: श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार

3.03191489362

SURENDER kumar Feb 03, 2018 08:39 AM

I'm HIV positive employees my COMPANY do me forcefully VRS what I do

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